महिला कोच में सफर करना पड़ेगा महंगा, पुरुष यात्रियों पर लगेगा ₹2500 तक का जुर्माना

नई दिल्ली

 ट्रेन से सफर के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन भी करना होता है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए खास नियम बनाएं हुए हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से आरक्षित कोच, सीट और बर्थ की व्यवस्था भी की हुई है. लेकिन अभी भी कुछ पुरुष यात्री महिलाओं के कोच में बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना अब भारी पड़ सकता है। 

ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. अब अगर कोई पुरुष यात्री महिला आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर बैठता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। 

 जुर्माना न भरने पर कोर्ट में ₹5000 जुर्माना भी लगेगा।

कितना लगेगा जुर्माना?

    अगर कोई पुरुष यात्री जानकर महिला कोच में सफर करता है तो ऐसे मामलों में 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 
    साथ ही यात्री को तुरंत महिला कोच से बाहर निकाल दिया जाएगा। 

    वहीं अगर कोई यात्री जुर्माना देने से इनकार करता है तो मामला सीधे कोर्ट तक जा सकता है। 
    इसके अलावा उस व्यक्ति पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 
    रेलवे ने सख्त आदेश दिए है कि सफर के दौरान कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में प्रवेश न करें। 

गलती से महिला कोच में आ गए तो क्या होगा?
अगर गलती से आप महिला कोच में आ जाते हैं तो ऐसे मामलों में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आप सबसे पहले अगले स्टेशन या फिर मौका देखते ही अपने कोच में चले जाएं. साथ ही आप इसकी जानकारी टीटीई को दे सकते हैं और उसे अपनी स्थिति के बारे में बता सकते हैं। 

रेलवे ने सख्त किए नियम
रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं. अब अगर कोई यात्री बिना टिकट सफर करता है या पहले इस्तेमाल हुई टिकट के साथ कोई यात्री दोबारा सफर करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और महिलाओं के कोच में सफर करना नियमों का उल्लंघन करना है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे के नियमों का अच्छे से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। 

यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है
सच कहें तो, यह कोई अलग-थलग बदलाव नहीं है। यह 1 जुलाई, 2026 से यात्रियों के लिए लागू किए गए अन्य सख्त रेलवे नियमों के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे कि बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, और ट्रेनों में धूम्रपान और सामान बेचने पर अब 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इन सभी रेलवे जुर्माना नियमों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क में अनुशासन को बढ़ावा देना है, जो वास्तव में प्रतिदिन 25 लाख से अधिक लोगों को यात्रा कराता है।

जमीनी स्तर
वैध टिकट, पहचान पत्र साथ रखें और बुनियादी नियमों का पालन करें। भारतीय रेलवे के नए जुर्माने के नियम अब सख्त हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं।

रेलवे टिकट के लिए न्यूनतम जुर्माना कितना है?
1 जुलाई, 2026
से, वैध टिकट के बिना यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है, और इसके अलावा आपको वास्तविक किराया भी देना होगा।

क्या रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री टिकट चेक कर सकते हैं?
सामान्यतः
नहीं, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच स्लीपर या एसी डिब्बों में ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को छोड़कर, बाकी सभी यात्रियों को रात 10 बजे के बाद टिकट चेक करने की अनुमति नहीं होती है।

 

 

कारगिल युद्ध का अनसुना किस्सा: सफेद झंडा, पाकिस्तानी अफसर संग सिगरेट और फिर प्वाइंट 5465 पर फतह

 कारगिल
 कारगिल युद्ध का नाम आते ही दिमाग में तोपों की गर्जना, बर्फ से ढकी दुर्गम चोटियां और भारतीय सैनिकों की अदम्य वीरता की तस्वीर उभरती है. 1999 की गर्मियों में भारत और पाकिस्तान के बीच 85 दिनों तक चली इस लड़ाई ने दोनों देशों के रिश्तों का एक ऐसा अध्याय लिखा, जिसे आज भी साहस और बलिदान की मिसाल माना जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की ऊंचाइयों से खदेड़कर विजय हासिल की. लेकिन, इस भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा पल भी आया, जब कुछ मिनटों के लिए बंदूकें खामोश हुईं, सफेद झंडा लहराया गया और दो दुश्मन सैनिकों ने एक-दूसरे के साथ सिगरेट और चॉकलेट शेयर की। 

यह कहानी है भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा की, जो उस समय युवा लेफ्टिनेंट थे. उनके सैन्य जीवन के इस अनोखे अनुभव का जिक्र उनके बेटों द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘शूरवीर’ में किया गया है. ये सभी बातें इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने एक रिपोर्ट में छापी है। 

17 हजार फीट पर आमना-सामना
जून 1999 में 22 ग्रेनेडियर्स की टुकड़ी प्वाइंट 5465 की ओर बढ़ रही थी. करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर लेफ्टिनेंट राजिंदर शर्मा अपनी छोटी टीम के साथ आगे बढ़ रहे थे. तभी पास की पहाड़ी पर जमे पाकिस्तानी सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी. शर्मा ने पहले से ही रणनीतिक तैयारी कर रखी थी. उन्होंने अपने जवानों और हथियारों की ऐसी तैनाती की थी कि जवाबी हमला सीधे पाकिस्तानी बंकरों पर पड़े. कुछ ही मिनटों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई इतनी सटीक और तेज थी कि दुश्मन के बंकरों में अफरा-तफरी मच गई. तभी अचानक एक पाकिस्तानी बंकर के पीछे से सफेद झंडा दिखाई दिया. युद्ध के नियमों में इसका मतलब होता है कि सामने वाला पक्ष बातचीत के लिए फायरिंग रोकने की अपील कर रहा है। 

जब भारतीय अफसर अकेले दुश्मन के पास पहुंच गया
भारतीय सैनिकों ने अपने अधिकारी को चेताया कि पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. लेकिन लेफ्टिनेंट शर्मा ने हालात का आकलन किया और बातचीत के लिए आगे बढ़ने का फैसला किया. मुश्किल यह थी कि भारतीय दल के पास सफेद झंडा था ही नहीं. तभी लांस नायक तुला राम ने अपनी सफेद बनियान उतारी और उसे INSAS राइफल की नाल पर बांधकर अस्थायी सफेद झंडा बना दिया. इसके बाद शर्मा दुश्मन की ओर बढ़े. कुछ दूरी पर पाकिस्तानी सैनिकों ने कहा कि सिर्फ एक अधिकारी आगे आए. तब शर्मा अकेले लगभग 150 मीटर ऊपर चढ़कर पाकिस्तानी अधिकारी मेजर जावेद से मिले। 

सिगरेट, चॉकलेट और सैनिकों की बातचीत
मेजर जावेद ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि उनके जवानों को भारी नुकसान हुआ है और पूछा कि भारतीय सेना ने फायरिंग क्यों की. शर्मा ने साफ जवाब दिया कि पहले गोली पाकिस्तान की ओर से चली थी, भारतीय सेना ने सिर्फ जवाब दिया. तनाव के उस माहौल में अचानक जावेद ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और शर्मा को पेश की. दोनों अधिकारियों ने कुछ मिनट तक साथ बैठकर सिगरेट पी. बातचीत के दौरान शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह इलाका भारतीय सीमा में है और पाकिस्तानी सैनिकों को यहां से पीछे हटना चाहिए। 

मेजर जावेद ने कहा कि वह भारत का संदेश अपने मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वह सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं. जवाब में शर्मा ने भी साफ कर दिया कि यदि आगे बढ़ते समय भारतीय सैनिकों पर फिर हमला हुआ तो जवाब पहले से भी ज्यादा कड़ा होगा. बातचीत खत्म होने लगी तो जावेद ने उन्हें अपनी सिगरेट का पैकेट दे दिया. बदले में शर्मा ने अपनी जेब से कैडबरी चॉकलेट बार निकाला और जावेद को दे दिया. कुछ मिनट पहले तक एक-दूसरे पर गोलियां चलाने वाले दोनों अधिकारी फिर अपनी-अपनी चौकियों की ओर लौट गए। 

शाम तक फतह कर लिया प्वाइंट 5465
बातचीत खत्म होते ही भारतीय टुकड़ी ने फिर आगे बढ़ना शुरू किया. दुश्मन की गोलियों, बारूदी सुरंगों और बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच 22 ग्रेनेडियर्स ने शाम होने से पहले प्वाइंट 5465 पर कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि यह बटालियन रेगिस्तानी इलाके में युद्धाभ्यास करने वाली यूनिट थी. हैदराबाद की 40 डिग्री गर्मी से सीधे शून्य से नीचे तापमान वाले कारगिल में पहुंची इस टुकड़ी को ऊंचाई के हिसाब से खुद को ढालने का भी ज्यादा समय नहीं मिला था. इसके बावजूद जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। 

चोटी पर कब्जा करने के बाद जवानों को याद आया कि उनके अधिकारी ने जीत के बाद साथ में सिगरेट पीने का वादा किया था. तब कर्नल शर्मा ने वही पाकिस्तानी सिगरेट अपने सैनिकों में बांटी. एक जवान मुस्कुराते हुए बोला, “साहब, यह तो नहीं बताया था कि जीत के बाद पाकिस्तानी सिगरेट मिलेगी। 

भारत के बेटे झुकना नहीं जानते
आज 60 वर्ष के हो चुके कर्नल राजिंदर कुमार शर्मा को उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. उनका मानना है कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था. उनके शब्दों में- कारगिल सिर्फ एक युद्ध नहीं था, यह संदेश था कि भारत के बेटे मर सकते हैं, लेकिन कभी झुक नहीं सकते. 26 साल बाद भी अगर दुश्मन दोबारा ऐसी गलती करेगा, तो उसे फिर कारगिल जैसा जवाब मिलेगा। 

Rules Change From Today: पेट्रोल, LPG, आधार से बैंकिंग तक… आज से बदल गए 10 बड़े नियम

 नई दिल्‍ली

जुलाई महीने की पहली तारीख से ही देश में कई बदलाव लागू होने वाले हैं, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. ये बदलाव एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल के दाम तक हैं. एलपीजी के ढरों नियम में बदलाव हो रहा है तो उम्‍मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार इसकी कीमतों में कुछ राहत दे सकती है. वहीं 1 जुलाई से पेट्रोल-डीजल से पाबंदियों को भी हटाया जा रहा है। 

1. एलपीजी के नियमों में बदलाव 
केंद्र सरकार ने 90 दिनों की डेडलाइन दिया था, ताकि जिनके पास एलपीजी और पीएनजी के दोनों कनेक्‍शन हैं, वो अपना LPG कनेक्‍शन सरेंडर कर दें. 30 जून को इसकी डेडलाइन खत्‍म हो रही है, जिसका मतलब है कि 1 जुलाई से आप नए एलपीजी स‍िलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही केवाईसी पूरा नहीं कराने वालों को भी गैस मिलने में दिक्‍कत आ सकती है. हालांकि, सरकार बुकिंग टाइम को लेकर ढील दे सकती है। 

2. LPG के दाम में कटौती 
मिडिल ईस्‍ट में जंग छिड़ने के बाद से एनर्जी का संकट पैदा हुआ था, जिस कारण कमर्शियल से लेकर रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कटौती हुई थी, लेकिन अब जब जंग रुक गई है और होर्मुज से होते हुए तेल भारत आ रहे हैं तो ऐसे में सरकार से उम्‍मीद है कि LPG के दाम में कटौती कर स‍कती है। 

3. आधार कार्ड अपडेट 
Aadhaar बनाने वाली संस्‍था UIDAI नए महीने से आधार कार्ड अपडेट को लेकर एक खास सर्विस पेश की है, जिसके तहत अगर आप अपने आधार कार्ड पर ईमेल अपडेट करना चाहते हैं तो आप 1 जुलाई से आधार ऐप के जरिए फ्री में अपडेट कर पाएंगे. पहले इसे अपडेट करने के लिए 75 रुपये का शुल्‍क देना पड़ता था। 

4. रेलवे के नियम
भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए 1 जुलाई 2026 से नियम सख्‍त किए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने एक प्रस्‍ताव रखा है, जिसपर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसे जल्‍द ही लॉन्‍च किया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बिना टिकट यात्रा करने वालों पर जुर्माने की राशि बढ़ाने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा, रेलवे परिसर में स्थिति सामान्‍य रखने के लिए भी नियम सख्‍त किए जा रहे हैं। 

5. ITR डेडलाइन 
ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है. अगर आप इस समय के तहत आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो जुर्माने का भुगतान करना पड़ सकता है. साथ ही कुछ टैक्स सिस्टम चुनने पर रोक लग सकती है। 

6. पासपोर्ट फीस 
अगर आप सामान्‍य या तत्‍काल, किसी भी तरह का पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो अब ये महंगा हो सकता है, क्‍योंकि विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 से नॉर्मल और तत्‍काल पासपोर्ट के लिए सर्विस फीस बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अगर आप पासपोर्ट अप्‍लाई करते हैं तो अब पहले से ज्‍यादा पेमेंट देना पड़ सकता है। 

7. क्रेडिट कार्ड के नियम 
SBI कार्ड ने चुनिंदा PhonePe SBI क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट में बदलाव कर रहा है. इस नियम के तहत रिवॉर्ड पॉइंट कमाने की नई सीमाएं और उन ट्रांज़ैक्शन की एक बड़ी लिस्ट तय की गई है जिन पर रिवॉर्ड पॉइंट नहीं मिलेंगे. इसके अलावा, 1 जुलाई, 2026 से, HDFC क्रेडिट कार्ड होल्डर्स हर कैलेंडर क्वार्टर में तीन बार मुफ़्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज का इस्तेमाल कर सकेंगे, बशर्ते उन्होंने पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹60,000 खर्च किए हों। 

8. कारें हो रहीं महंगी 
जुलाई के पहले दिन से कार के दाम बढ़ सकते हैं, क्‍योंकि KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी और Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की कीमतों में बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 

9. पेट्रोल-डीजल के नियम 
भारत में 1 जुलाई से पेट्रोल और डीजल खरीदने को लेकर एक बड़ा बदलाव हो गया है. केंद्र सरकार ने उन अस्थायी प्रतिबंधों को हटा दिया है, जिनके तहत बड़े व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Commercial Buyers) की खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई थी. अब ट्रांसपोर्ट कंपनियां, फैक्ट्रियां, इंडस्‍ट्री और अन्‍य व्‍यावसायिक कंज्‍यूमर्स पहले जैसे तेल खरीद सकते है। 

10. ईपीएफओ अपडेट 
सरकार ईपीएफओ 3.0 के लॉन्‍च करने पर काम कर रही है. ईपीएफओ की वेबसाइट पर 3 दिनों के लिए सभी सर्विस को बंद किया गया है. उम्‍मीद है कि इसके बाद ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च कर दिया जाएगा. हालांकि अभी तक कोई अधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है. अगर ईपीएफओ 3.0 लॉन्‍च होता है तो पीएफ यूजर्स UPI और एटीएम के जरिए पैसे विड्रॉल कर सकते हैं। 

अल-नीनो का बड़ा खतरा! 2032 तक भारत को 94 लाख करोड़ रुपये के नुकसान की चेतावनी

नई दिल्ली
अल-नीनो को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है. अनुमान है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को 2032 तक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94,55,960 करोड़ रुपये) का आर्थिक नुकसान हो सकता है। 

वहीं, पूरी दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की आर्थिक नुकसान  का अनुमान है. यह नुकसान केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, रोजगार, एनर्जी और अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है. अल-नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है, जो भारत में मानसून को कमजोर कर सकती है और गर्मी बढ़ा सकती है. आने वाले अल-नीनो के दौरान भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई गई है। 

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
एक इंग्लिश अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार अल-नीनो की वजह से भारत में भीषण गर्मी बढ़ सकती है और मानसून कमजोर हो सकता है. इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा. बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घट सकता है, सिंचाई की जरूरत बढ़ेगी और बिजली की मांग भी बढ़ सकती है. इससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर भी असर पड़ने की आशंका है। 

2032 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान क्यों?
रिसर्चर्स का कहना है कि अल-नीनो का असर केवल उसी साल तक सीमित नहीं रहता. इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कई वर्षों तक धीमी रह सकती है. अनुमान है कि 2032 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. वहीं, वैश्विक स्तर पर यह नुकसान 10 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो सकता है. वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि कुछ आर्थिक असर लंबे समय तक बने रह सकते हैं। 

कृषि मंत्रालय ने शुरू की तैयारियां

उधर कमजोर मॉनसून के असर से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा, “हमने उन 111 जिलों की पहचान कर ली है जहां अल नीनो का ज्यादा असर पड़ने की आशंका है. लेकिन असर 300 जिलों से ज्यादा पर पड़ने की आशंका है. हमने राज्यों को पूरी जानकारी दे दी है कि उनके यहां कौन-कौन से जिले या इलाके संवेदनशील हैं. इन सभी प्रभावित होने वाले जिलों में उन्हें खेती या रोजगार में जहां भी कमी आएगी ‘जी राम जी’ कानून के तहत सभी प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा। 

कृषि मंत्रालय और इंडियन कॉउन्सिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा है क्योंकि इन 315 जिलों में मॉनसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रभावित होने वाले राज्यों को निर्देश दिया है कि जो पुरानी वॉटर बॉडीज है उनको समय पर ठीक कर लिया जाए. साथ ही, जितनी नई वॉटर बॉडीज बन सकती हैं बनायीं जाएं, और छोटी-छोटी वाटर बॉडीज जैसी संरचनाएं तैयार की जाएं. जल के संरक्षण से जुड़े कार्यों को 01 जुलाई से लांच होने वाले नए ‘जी राम जी’ कानून के तहत सर्वोच्च वरीयता दी जाए जिससे अगर बारिश कम हो तो बारिश के पानी को अच्छे से संग्रहित किया जा सके और इसका उपयोग खेती और पीने के पानी के लिए सही तरीके से हो सके। 

दिल्ली में कब दस्तक देगा?
यानी अगले 5 दिनों तक मॉनसून के दिल्ली या आसपास के इलाकों में पहुंचने का पूर्वानुमान नहीं है. मॉनसून के दिल्ली पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है, लेकिन मॉनसून के दिल्ली पहुंचने में इस साल करीब एक हफ्ते की देरी होने की संभावना है. मौसम विभाग के एक सीनियर वैज्ञानिक के मुताबिक, एक नया सर्कुलेशन पैटर्न डेवेलोप हो रहा है जिसकी वजह से 5 दिन के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ़्तार फिर तेज़ होने की संभावना है। 

जाहिर है, अगर मॉनसून ने 04 जुलाई से रफ्तार पकड़ी तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में मॉनसून पहुंच सकता है। 

क्या करना होगा? 
एकस्पर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से तैयारी शुरू करनी चाहिए. इसके लिए बेहतर वेदर फोरकास्ट, समय पर चेतावनी देने वाले सिस्टम, गर्मी सहने वाली फसलों का विकास, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाना जरूरी होगा. इससे अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज दोनों के असर को कम करने में मदद मिल सकती है। 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला अल-नीनो केवल मौसम की घटना नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, खेती और लोगों के जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है. ऐसे में समय रहते तैयारी और क्लाइमेट के हिसाब से प्लानिंग बनाना फ्यूचर के नुकसान को कम करने के लिए जरूरी होगा। 

Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले की साजिश? खुफिया एजेंसियों के खुलासे से बढ़ी सतर्कता

श्रीनगर 

 आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अमरनाथ यात्रा के दौरान किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की कोशिश कर सकती है। इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है।

चौतरफा मुश्किलों से घिरा है पाकिस्तान
खुफिया अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए इस समय पीओके, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों ने इस्लामाबाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अधिकारियों का दावा है कि हाल ही में अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किया गया हवाई हमला भी अंदरूनी दबाव से ध्यान भटकाने की कोशिश का हिस्सा था। इस हवाई हमले में 35 लोगों की मौत हुई।

अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की आशंका क्यों?
भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, इंटरसेप्ट किए गए कुछ इनपुट से संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान भारत में भी आतंकी हमले की साजिश रच रहा है। इसके लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर के जंगलों में छिपे कुछ आतंकियों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं आतंकियों के जरिए अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले की साजिश रची जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान, इन आतंकियों को पहलगाम जैसा बड़ा हमले करने के निर्देश देने की कोशिश कर रहा है।

अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस ने पूरे मार्ग पर आतंकवाद रोधी तंत्र को और मजबूत किया है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे और अत्याधुनिक डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके।

पंजाब भी निशाने पर?
एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, आईएसआई पिछले कुछ समय से पंजाब और जम्मू-कश्मीर में अपने मॉड्यूल को फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रही है। अधिकारी का दावा है कि पाकिस्तान चाहता है कि भारत में जल्द कोई बड़ी आतंकी घटना हो, ताकि पीओके और अन्य क्षेत्रों में बगावत के हालात से लोगों का ध्यान हटाया जा सके।

पीओके के हालात से पाकिस्तान पर बढ़ रहा दबाव
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं। वहां के लोग अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान के भीतर भी बड़ी संख्या में लोग पीओके के लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे वहां की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान पर दबाव बढ़ता जा रहा है। 

 

सुबह 6 बजे ट्रंप बोले- PM मोदी को फोन करते हैं’, सर्जियो गोर ने सुनाया दोनों नेताओं की खास बॉन्डिंग का किस्सा

 नई दिल्ली

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलने को लेकर हुए विवाद को खारिज करते हुए कहा कि “लेटरहेड पर लिखे नाम” से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है. अमेरिकी राजदूत ने इस बात को खारिज किया कि भारत-अमेरिका के बीच संबंध कमजोर हो रहे हैं। 

US-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत आज भी किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ ज़्यादा सैन्य अभ्यास करता है और रक्षा अधिकारियों के बीच नियमित द्विपक्षीय दौरे होते हैं। 

गोर की ये टिप्पणी ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ से ‘इंडो’ शब्द हटाने को लेकर हुए विवाद के बाद सामने आई हैं. 1947 में बनी US पैसिफिक कमांड अमेरिका की सबसे पुरानी यूनिफाइड कमांड्स में से एक है, जिसका दायरा अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है। 

लेटरहेड से क्या फर्क पड़ता है
US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत को देखते हुए पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ कर दिया गया था. इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका ने इस यूनिफाइड कमांड का पुराना नाम बहाल कर दिया।  

गोर ने कहा, “मैं बस एक बात कहना चाहता हूं क्योंकि नाम बदलने को लेकर बहुत से लोगों ने काफी हंगामा किया था. मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लेटरहेड पर क्या नाम लिखा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि अमेरिका असल में क्या कर रहा है। 

अमेरिकी राजदूत ने कहा, “हां, नाम बदला गया; लेकिन हम अभी भी वहां मौजूद हैं. भारत आज भी किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका के साथ कहीं ज़्यादा मिलिट्री एक्सरसाइज़ करता ह. हर महीने कुछ न कुछ होता रहता है, चाहे भारतीय सैनिक यहां आएं या अमेरिकी सैनिक उस क्षेत्र में जाएं।

उन्होंने कहा कि अगले दो हफ़्तों में भारतीय नौसेना का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका का दौरा करेगा। 

कमजोर नहीं हुए हैं भारत-अमेरिका के संबंध
गोर ने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध कमजोर हो गए हैं; उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर रिश्ते मजबूत स्थिति में हैं। उन्होंने कहा, “तो जो विशेषज्ञ ऑनलाइन बैठकर ट्वीट करते हैं और कहते हैं कि यह रिश्ता मुश्किल में है, उन्हें असलियत देखनी चाहिए. चाहे व्यापार हो, रक्षा हो या लोगों के बीच आपसी संबंध हों. हर मामले में यह रिश्ता मजबूत स्थिति में है। 

गोर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देते हैं और व्यापार, तकनीक, रक्षा और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

भारत में अमेरिकी राजदूत ने एक घटना का जिक्र किया जब ट्रंप ने मियामी से मोदी को फोन करने का फैसला किया; ये तब हुआ था जब ट्रंप वहां ‘अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप’ (UFC) के मुकाबले देख रहे थे। 

भारत में सुबह 6 बज रहे थे, ट्रंप बोले- PM मोदी को फोन लगाइए…
गोर ने बताया, “यह कुछ महीने पहले की बात है. राष्ट्रपति मियामी में UFC कार्यक्रम में थे और हम बैकस्टेज बैठे थे, तभी उन्होंने मुझसे कहा, ‘चलो प्रधानमंत्री मोदी को फोन करते हैं। 

गोर ने ट्रंप की बात याद करते हुए कहा, “मैंने कहा सर वहां (भारत में) सुबह के 6 बजे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘वह (मोदी) जाग रहे होंगे. वह (मोदी) मेरी तरह ही हैं। 

गोर ने बताया कि जब तक वह नई दिल्ली में कुछ लोगों से बात कर पाते, तब तक ट्रंप UFC के मंच पर पहुंच चुके थे और आखिरकार मोदी के साथ बातचीत अगले दिन के लिए तय की गई। 

गोर ने कहा कि इस घटना से ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच के रिश्ते की असलियत पता चलती है। 

अमेरिकी राजदूत गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा, “इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि जब आप किसी के दोस्त होते हैं, तो हर चीज पहले से तय करने की ज़रूरत नहीं होती.” उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति सच में प्रधानमंत्री को अपना दोस्त मानते हैं। 

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के साथ उनका जुड़ाव उनके पहले कार्यकाल से ही है. भारत से जुड़ी उनकी अच्छी यादें हैं. और यह एक बहुत बड़ा फायदा है। 

गोर ने कहा, “अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है.” उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो साल दशकों तक चलने वाले द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने के लिए बहुत अहम होंगे। 

गोर ने बताया कि ये अगले दो साल रिश्ते को आने वाले कई दशकों के लिए एक नई दिशा देंगे. इसलिए जो भी इसमें शामिल हो रहा है, वह इसे एक लंबे समय के प्रोजेक्ट के तौर पर देखे. यह एक या दो साल का मामला नहीं है, बल्कि हम आज जो बोएंगे, वही हमें आने वाले दशकों तक आगे ले जाएगा। 

ममता बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, TMC के अकाउंट फ्रीज मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार

कलकत्ता

कलकत्ता हाईकोर्ट से मंगलवार को ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के खिलाफ दायर याचिका पर अर्जेंट सुनवाई करने से स्पष्ट मना कर दिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य कर रहे हैं. उन्होंने ममता गुट की याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि इस केस की सुनवाई भी आम मामलों की तरह ही होगी, यानी जो नंबर तय है, उसी लिस्टिंग के अनुसार सुनवाई की जाएगी। ममता गुट के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट को बताया कि टीएमसी के तीन बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है. इस वजह से इन खातों से किसी भी तरह का पेमेंट और लेन-देन नहीं हो पा रहा है. वकील ने कहा कि इन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये की भारी रकम फंसी हुई है. उन्होंने इस संकट को देखते हुए कोर्ट से तुरंत सुनवाई करने की अपील की, लेकिन अदालत ने उनकी ये मांग मानने से साफ इनकार कर दिया।

बैंक खातों में 440 करोड़ जमा
तृणमूल कांग्रेस के जिन तीन बैंक खातों पर रोक लगाई गई है, उनमें लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कुछ विधायकों द्वारा बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद की गई है। शिकायत में उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर खातों की विस्तृत जांच कराने की मांग की थी।विधायकों ने अपनी शिकायत में बैंक खातों में जमा धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए सभी लेन-देन की जांच कराने की मांग की।

उन्होंने जांचकर्ताओं से यह पता लगाने का आग्रह किया कि खातों में जमा धन वैध स्रोतों से आया है या फिर कथित अवैध गतिविधियों, जैसे ‘कट मनी’ की वसूली, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और घोटालों से अर्जित रकम से जुड़ा हुआ है। बता दें कि फलता के चुनाव के बाद कई ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें लोगों को कटमनी वापस की गई थी। दरअसल सरकारी योजनाओं को लाभ देने के लिए वसूला गया धन कट मनी कहा जाता है। आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार में धड़ल्ले से लोगों से कटमनी वसूली जाती थी।

तय समय से होगी सुनवाई
सोमवार को मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग किये जाने पर अदालत ने बैंक, पुलिस और राज्य सरकार को पक्षकार बनाने तथा उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था. मंगलवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फिर से त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया. न्यायमूर्ति ने दोहराया कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी. इस मामले में राज्य सरकार भी एक पक्ष है. राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि यदि त्वरित सुनवाई संभव नहीं है, तो कम से कम गुरुवार को पक्षों को अपनी दलीलें रखने का अवसर दिया जाये। 

बागी विधायकों की शिकायत पर हुई कार्रवाई
टीएमसी के इन बैंक खातों पर ये कार्रवाई बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े कुछ विधायकों की शिकायत के बाद हुई है. इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने इस मामले की पूरी जांच करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। 

इन बागी विधायकों ने खातों में जमा करोड़ों रुपयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने जांच टीम से मांग की है कि इस पैसे के सोर्स की जांच की जाए. वे पता लगाना चाहते हैं कि ये पैसा ईमानदारी की कमाई का है या फिर किसी गलत काम से आया है. उन्हें शक है कि ये पैसा कट-मनी (कमीशन), पब्लिक फंड की हेराफेरी और किसी बड़े घोटाले का हो सकता है। 

एल-नीनो का मानसून पर बड़ा असर, जून में 42% कम बारिश; 100 साल का तीसरा सबसे सूखा महीना

नई दिल्ली
 प्रशांत महासागर में सक्रिय एल-नीनो का असर भारत में इस साल साफ-साफ देखने को मिल रहा है। साल 1927 से 2026 तक यह तीसरा ऐसा मौका है, जब जून का महीना सबेस सूखा साबित होने जा रहा है। महीने के अंत होने में कुछ घंटे शेष है और देश भर में 42% बारिश की कमी देखने को मिल रही है।

दरअसल, जून में अब तक देश भर में औसतन केवल 92.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर यह आंकड़ा 157.7 मिमी होना चाहिए था। अगर आज यानी मंगलवार को जून महीने के आखिरी दिन अच्छी बारिश होती है तो कुल मिलाकर लगभग 100 मिमी बारिश होने की संभावना है।

पिछले 100 सालों में कब-कब सूखा रहा जून का महीना?
जून का महीना पिछले 100 सालों में तीन बार सूखा रहा है। मौसम इतिहास में जून महीने में इससे कम बारिश पिछले 100 सालों में सिर्फ 2009 (87.5 मिमी) और 2014 (92.1 मिमी) दर्ज की गई थी। यह दोनों साल 20 वर्षों के भीतर के ही हैं।

राहत की बात यह है कि जून में जहां देश के अधिकांश हिस्सों, विशेष रूप से मध्य भारत में जहां अब तक मानसून की सबसे अधिक कमी रही है, वहां अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। IMD के अनुसार, जुलाई के पहले हफ्ते से मध्य भारत सहित देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून रफ्तार पकड़ेगा और अच्छी बारिश होगी।

बारिश की भारी कमी
बता दें कि जून के महीने में मध्य भारत में अब तक भारी वर्षा हुई है, लेकिन यह 54% तक कम है। इसके बाद पूर्वी और उत्तरपूर्वी भारत में 41%, उत्तर-पश्चिमी भारत में 30% और दक्षिणी भारत में 28% की कमी देखी गई है। देश के चारों तरफ इतनी भारी मात्रा में बारिश की कमी शायद इस बात का संकेत है कि एल-नीनो का प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ना शुरू हो गया है।

क्या अल नीनो लाएगा सूखा, महंगाई और पानी का संकट?

 जून में  देश में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत 16 राज्यों में मानसून की रफ्तार थम गई है। 

सवाल है कि क्या इस साल मानसून कमजोर पड़ रहा है? क्या अल नीनो इसकी वजह है? अगर बारिश कम हुई तो क्या होगा, क्या महंगाई बढ़ेगी? क्या फसलें प्रभावित होंगी और आखिर वैज्ञानिक क्यों कह रहे हैं कि आने वाले महीने बेहद अहम हैं?

आखिर मानसून क्यों थम गया? 

इस समय मानसून तेलंगाना के भद्राचलम इलाके के आसपास अटका हुआ है. मानसूनी हवाएं आगे बढ़ने की बजाय कमजोर पड़ गई हैं. 15 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल गायब दिखाई दिए. IMD के मुताबिक 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य रूप से 53.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई केवल 19.2 मिलीमीटर यानी बारिश में 64 प्रतिशत की कमी. इसी वजह से मौसम वैज्ञानिक लगातार एक शब्द दोहरा रहे हैं- अल नीनो। 

क्या है अल नीनो?
भारत में बारिश कम हो रही है, लेकिन इसकी कहानी हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर से शुरू होती है. सामान्य परिस्थितियों में, पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली ट्रेड विंड्स गर्म समुद्री पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं. यही गर्म पानी बादलों को जन्म देता है और यही सिस्टम भारतीय मानसून को ऊर्जा देता है, लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं तो समुद्र का संतुलन बिगड़ जाता है और गर्म पानी वापस मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की ओर फैलने लगता है. समुद्र का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसी स्थिति को वैज्ञानिक अल नीनो कहते हैं। 

अल नीनो सिर्फ समुद्र का तापमान नहीं बढ़ाता. ये पूरी पृथ्वी के मौसम तंत्र को प्रभावित करता है. समुद्र गर्म होता है, उसके ऊपर की हवा गर्म होती है. बादलों का पैटर्न बदलता है. हवाओं की दिशा बदलती है और मानसून कमजोर पड़ सकता है. IMD के मुताबिक, अल नीनो के वर्षों में भारत में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बढ़ जाती है। 

एल-नीनो का प्रभाव
अमेरिकी एजेंसी इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी के अनुसार, प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती गर्मी से एल-नीनो मध्यम तीव्रता के करीब पहुंच चुका है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की आशंका है।

एल-नीनो प्रशांत महासागर के पानी का गर्म कर देते है, जिसे वैश्विक मौसम प्रभावित होता है। यह हवाओं का रुख बदलकर भारतीय मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसी के कारण 4 जून को केरलम पहुंचे मानसून की रफ्तार अभी तक सुस्त है और जून में देश की दैनिक वर्षा महज एक ही दिन सामान्य से अधिक रही है।

 

PM मोदी की कैबिनेट में हो सकता है बड़ा फेरबदल, कौन होगा बाहर और किन नए चेहरों को मिल सकता है मौका?

नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में परिवर्तन की चर्चा काफी समय से हो रही है, लेकिन जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और अमित शाह के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ये चर्चा तेज हो गई. कैबिनेट में बदलाव कब होगा, इसको लेकर भी दो तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कहा जा रहा है कि 28 या 29 जून को कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है या फिर मानसून सत्र के बाद बदलाव होगा. मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, फिर 21 अगस्त के बाद कैबिनेट में बदलाव संभव है। 

ये पीएम मोदी के काम करने का स्टाइल है, आखिरी समय तक किसी को कुछ नहीं पता होता कि क्या होने वाला है. कैबिनेट रीशफल में भी यही दिख रहा है. चर्चाएं और कयास लग लग रहे हैं. अब आपको बताते हैं कि मोदी कैबिनेट रीशफल में किस किस को मौका मिल सकता है. और किस-किस का पत्ता कट सकता है। 

सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि…
* उद्धव गुट और TMC से टूटे कुछ सांसदों को मौका मिल सकता है.
* उद्धव गुट से आए संजय दीना पाटिल को जगह मिल सकती है.
* एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट रैंक दिया जा सकता है.
* TMC से आए काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय की भी चर्चा है. तीनों में से कोई एक कैबिनेट में शामिल हो सकता है.
* केंद्रीय मंत्री और यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी को संगठन में भेजा जा सकता है. पंकज चौधरी की जगह नया मंत्री बनाया जा सकता है.
* दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी संगठन भेजा जा सकता है. हर्ष मल्होत्रा की जगह भी नया मंत्री बनाया जा सकता है.
* इसके अलावा कई वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन भेजा जा सकता है.
* इनकी जगह युवा चेहरों को कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है.

यानी उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी का साथ छोड़कर आने वाले सांसदों को मौका मिल सकता है. तो वहीं कई पुराने वरिष्ठ नेताओं को वापस संगठन भेजा जा सकता है और उनकी जगह युवाओं को मौका मिल सकता है. यानी एक तरफ उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी हैं, जिनकी पार्टी ही टूट गई है, फिर भी पुराने कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई दी है। 

25 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का जन्मदिन था. पीएम मोदी ने कहा कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू करने में धर्मेंद्र प्रधान की सराहनीय भूमिका है. पीएम मोदी की इस बधाई की बड़ी चर्चा हो रही है क्योंकि इंडी गठबंधन से लेकर कॉक्रोच पार्टी तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही है. पेपर लीक के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विपक्ष हमलावर है. ऐसे में पीएम मोदी के बधाई संदेश के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। 

Rule Change From July 1: LPG, क्रेडिट कार्ड, कारों की कीमत समेत 1 जुलाई से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम

नई दिल्ली

जून का महीना खत्म होने वाला है और 5 दिन बाद जुलाई महीने की शुरुआत हो जाएगी. हर महीने की तरह अगला महीना भी अपने साथ कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st July) को लेकर शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव के साथ ही क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियम भी बदलने जा रहे हैं. इसके अलावा कार के शौकीनों को महंगाई का झटका लगने वाला है. आइए ऐसे ही 5 बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं। 

पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के दाम बदलेंगे
हर महीने की पहली तारीख को देश के लोगों की नजर तेल कंपनियों द्वारा एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए जाने वाले संशोधन पर टिकी होती है, क्योंकि ये मामला सीधे घर की रसोई के बजट से जुड़ा हुआ है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराई मिडिल ईस्‍ट टेंशन के बीच LPG Price Hike का कई बार झटका लगा. बीते 1 जून को भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 53.50 रुपये महंगा हुआ था, जिसके बाद 19 Kg LPG Cylinder Price In Delhi 3113.50 रुपये का हो गया था. वहीं 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर भी महंगाई का बम फूटा था. हालांकि, 14 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई थीं। 

दूसरा बदलाव: ATF की कीमतों में संशोधन
जुलाई महीने की पहली तारीख से दूसरा बड़ा बदलाव हवाई सफर करने वाले यात्रियों से जुड़ा है. दरअसल, तेल कंपनियां न सिर्फ एलपीजी की कीमतों में संशोधन (LPG Price Change) करती हैं, बल्कि एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के दाम में भी बदलाव करती हैं. इसकी कीमत में होने वाली बढ़ोतरी हवाई यात्रा के खर्च में बढ़ोतरी करने वाली साबित होती है, तो वहीं इसमें गिरावट खर्च में कटौती का कारण बनती है। 

तीसरा बदलाव: HDFC क्रेडिट कार्ड रूल 
HDFC Bank का क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं, तो फिर आपके लिए भी 1 जुलाई 2026 की तारीख बदलाव (Credit Card Rule Change) लेकर आ रही है. दरअसल, एचडीएफसी बैंक रेगैलिया गोल्ड क्रेडिट कार्ड यूजर्स को घरेलू एयरपोर्ट लाउंज की फ्री सर्विस जारी रखने के लिए तिमाही खर्च की नई लिमिट पूरी करनी होगी. ताजा संशोधन के मुताबिक, इस क्रेडिट कार्ड के यूजर्स को अगली तिमाही में इस फ्री सर्विस का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में मिनिमम 60,000 रुपये खर्च करने होंगे। 

चौथा बदलाव: फ्री में आधार अपडेट 
जुलाई की पहली तारीख से UIDAI आधार कार्ड यूजर्स को राहत देने जा रहा है. रेग्युलेटर की ओर से जारी नोटिफिकेशन को देखें, तो Aadhaar Card पर आपकी ईमेल आईडी अपडेट नहीं है, तो 1 जुलाई से यह काम फ्री में होने वाला है. यूआईडीएआई आधार में ईमेल को अपडेट करने के लिए दिसंबर तक यानी 6 महीने के लिए फ्री सर्विस दे रहा है. इससे पहले इस काम को करने के लिए 75 रुपये का चार्ज लागू था। 

पांचवां बदलाव: कार खरीदना होगा महंगा
जुलाई के पहले दिन से कार खरीदारों को झटका लगने वाला है. KIA मोटर्स समेत कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी कारों के दाम बढ़ाने जा रही हैं. किआ ने अपनी कारों की कीमतों में 2 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, तो वहीं Tata Motors भी ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) और EV मॉडल्स की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। 

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