जयपुर से भी कम आबादी वाले देश के दौरे पर PM मोदी, जानिए तीन दिन की यात्रा का महत्व

नई दिल्ली

स्‍लोवाक‍िया, ज‍िसकी आबादी तकरीबन 55 लाख है, यानी जयपुर से भी कम. फ‍िर इस देश में ऐसा क्‍या है क‍ि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन द‍िन के दौरे पर जा रहे हैं. 1993 में स्लोवाकिया की आजादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी. पीएम मोदी वहां 14 से 16 जून तक रहेंगे. लगातार मीटिंग फ‍िक्‍स है. आपके मन में भी सवाल होगा क‍ि पीएम मोदी वहां इतना टाइम क्‍यों दे रहे हैं? वहां से क्‍या हास‍िल होने वाला है?

स्लोवाकिया आकार में भले छोटा देश हो, लेकिन भारत के लिए उसकी रणनीतिक, आर्थिक और ज‍ियोपाल‍िट‍िकल अहमियत लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि पीएम मोदी का दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि मध्य यूरोप में भारत की बढ़ती मौजूदगी का संकेत माना जा रहा है। 

स्‍लोवाक‍िया क्‍यों है खास?
    लगभग 55 लाख आबादी वाला स्लोवाकिया दुनिया के सबसे बड़े कार मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग सेंटर में गिना जाता है. यहां Volkswagen, Kia, Jaguar Land Rover और Stellantis जैसी कंपनियों के बड़े प्लांट हैं. भारत मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में सहयोग बढ़ाना चाहता है। 

    स्लोवाकिया European Union का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत रिश्ते भारत को मध्य और पूर्वी यूरोप के बाजारों तक बेहतर पहुंच दिला सकते हैं. भारत और यूरोपीय यून‍ियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दौर में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है। 

    रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देश अपने ड‍िफेंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को मॉडर्न बना रहे हैं. स्लोवाकिया भी उनमें शामिल है. भारत अपनी डिफेंस कंपनियों और स्वदेशी वेपन स‍िस्‍टम का एक्‍सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में ड‍िफ‍ेंस पार्टनरश‍िप दोनों देशों के रिश्तों का बड़ा आधार बन सकता है। 

    स्लोवाकिया अपनी बिजली का बड़ा हिस्सा परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है. भारत भी स्वच्छ ऊर्जा और न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है. इसलिए परमाणु तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं हैं। 

    मध्य यूरोप में भारत अपनी मौजूदगी बढ़ाकर रणनीतिक संतुलन बनाना चाहता है. स्लोवाकिया NATO और EU दोनों का सदस्य है. ऐसे में उसके साथ मजबूत संबंध भारत को यूरोपीय राजनीति और सुरक्षा ढांचे में अधिक प्रभावशाली साझेदार बनने में मदद कर सकते हैं। 

दुन‍िया के ल‍िए मैसेज
पीएम मोदी यह दौरा दिखाता है कि भारत की विदेश नीति अब केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन या फ्रांस जैसे बड़े देशों तक सीमित नहीं है. मोदी सरकार छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रही है। 

भारत में बढ़ा गर्मी का कहर! 13 साल में हीटवेव के दिन दोगुने, 100 से बढ़कर 200 पहुंचे

नई दिल्ली

जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत में साफ और बेहद खतरनाक रूप में दिखने लगा है. देश में पर्यावरण, वन्यजीव और मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव आ रहे हैं. सबसे चिंताजनक स्थिति हीटवेव की है, जिसके दिनों में पिछले कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इन आंकड़ों से साफ है कि भारत एक तरफ जहां गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ तकनीक और संरक्षण के जरिए इनसे निपटने की कोशिशें भी की जा रही हैं। 

हीटवेव का कहर: 13 साल में दोगुने हुए लू के दिन
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में क्लाइमेट चेंज के कारण हीटवेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. अगर पिछले 13 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत में हीटवेव के दिनों की संख्या दोगुनी हो चुकी है. साल 2013 में जहां देश में लगभग 100 दिन हीटवेव के दर्ज किए गए थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 200 दिनों के पार पहुंच चुका है। 

सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में भारतीय क्षेत्र में रिकॉर्ड 554 हीटवेव दिन देखे गए, जबकि साल 2023 में यह संख्या 230 दिन थी. यानी सिर्फ एक साल के भीतर ही हीटवेव के दिनों में दोगुने से भी ज्यादा का उछाल आया है, जो यह दर्शाता है कि ग्लोबल वार्मिंग और स्थानीय मौसमी बदलाव कितनी तेजी से भारत को अपनी चपेट में ले रहे हैं। 

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो जाए और यह स्थिति कम से कम दो दिन तक बनी रहे, तो उसे हीटवेव कहा जाता है. मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों में 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान हीटवेव की श्रेणी में आता है। 

हीटवेव सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि लू का रूप ले लेती है, जो इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक होती है. विशेष रूप से गरीब, मजदूर वर्ग, बुजुर्ग और बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। 

13 सालों में दोगुनी हुई हीटवेव की संख्या
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के आंकड़ों से साफ पता चलता है कि 2013 के मुकाबले अब हीटवेव के दिन दोगुने हो गए हैं. पहले जहां हीटवेव मुख्य रूप से अप्रैल-मई तक सीमित रहती थी, अब मार्च से जून तक और कभी-कभी जुलाई में भी इसका असर दिखने लगा है।  

उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता बढ़ गई है. 2024-2025 के ग्रीष्मकाल में कई राज्यों में 40-45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान कई हफ्तों तक बना रहा, जिसने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 

जलवायु परिवर्तन क्यों जिम्मेदार?
जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान बढ़ रहा है. भारत में औसत तापमान 0.6 से 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि) की बढ़ती मात्रा वायुमंडल को गर्म कर रही है. मानवीय गतिविधियां जैसे जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल, जंगलों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण इस वृद्धि के मुख्य कारण हैं. जलवायु मॉडल बताते हैं कि अगर ग्लोबल वार्मिंग यूं ही जारी रही, तो 2050 तक हीटवेव की संख्या और अवधि और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। 

क्षेत्रीय प्रभाव और हॉटस्पॉट
    उत्तर भारत और इंडो-गंगा प्लेन: दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.
    पश्चिम भारत: राजस्थान और गुजरात में लंबे समय तक 45-48 डिग्री तापमान रहता है.
    मध्य और दक्षिण भारत: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी नई हीटवेव हॉटस्पॉट बन रहे हैं.

शहरों में शहरी हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण रात का तापमान भी नहीं गिरता, जिससे शरीर को आराम नहीं मिल पाता.

इंसानी सेहत पर असर
हीटवेव से हर साल हजारों लोग प्रभावित होते हैं. हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हार्ट अटैक और किडनी फेलियर के मामले बढ़ रहे हैं. बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है. एक लंबा हीटवेव हजारों अतिरिक्त मौतें का कारण बन सकती है. 2015 की हीटवेव में 2000 से ज्यादा मौतें हुई थीं. अब स्थिति और बदतर हो रही है। 

कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर असर

    कृषि: गेहूं, चावल, फल और सब्जियों की पैदावार घट रही है. पशुधन भी प्रभावित हो रहा है.
    पानी: भूजल स्तर गिर रहा है और जल संकट बढ़ रहा है.
    अर्थव्यवस्था: मजदूरों की उत्पादकता घटती है. बिजली की मांग बढ़ती है. अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान होता है.

भारत में हीटवेव का दोगुना होना जलवायु संकट की घंटी है. 13 साल में 100 से 200 दिनों तक की बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत है. अगर हम अभी गंभीर कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दशकों में यह संकट और भयावह रूप ले लेगा. हीटवेव अब कोई मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की स्थायी सच्चाई बन चुकी है। 

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: गृहिणी की मौत पर ₹30 हजार मासिक आय मानकर तय होगा मुआवजा

नई दिल्ली
एक्सीडेंट में जब किसी इंसान की मौत होती है, तब उसकी कमाई या सैलरी के हिसाब से मुआवजा तय होता है. लेकिन होम मेकर महिलाओं से जुड़े केस में यह मामला उलझ जाता है, क्योंकि होम मेकर महिलाओं की कोई तय कमाई नहीं होती. अब सुप्रीम कोर्ट ने होम मेकर (गृहिणियों) के मुआवजे को लेकर एक बड़ा फैसला दिया है. अदालत ने कहा कि जब किसी दुर्घटना के कारण गृहिणी की मौत हो जाती है, तब उसका मुआवजा तय करते हुए उनके योगदान का आकलन आवश्यक है. अदालत ने कहा कि गृहिणियों का योगदान केवल परिवार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वो मानव संसाधन और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.  ऐसे में उन्हें केवल “होममेकर” कहने के बजाय “नेशन बिल्डर” कहा जाना चाहिए। 

होम मेकर की मौत पर 30 हजार रुपए मंथली के हिसाब से तय हो मुआवजा
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गृहिणी द्वारा किए जाने वाले घरेलू काम और देखभाल की सेवाओं का आर्थिक मूल्य है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. दुर्घटना की शिकार गृहणियों के मामले में मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइडलाइन जारी करते हुए होम मेकर महिलाओं की मौत पर 30 हजार रुपए महीना के हिसाब से मुआवजा तय करने की बात कही। 

एक्सीडेंट से जुड़े एक दावे की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 
वाहन दुर्घटना के दावों से जुड़ी एक अपील पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने कहा कि घर संभालने वाली महिला (होममेकर) का योगदान सिर्फ घर तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि देश के निर्माण में भी उनकी अहम भूमिका होती है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा तय करते समय घर संभालने वाली महिला की मौत या अक्षमता के कारण परिवार को घरेलू देखभाल के मामले में जो नुकसान होता है, उसे अलग से मान्यता दी जानी चाहिए। 

जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसी उद्देश्य से घरेलू देखभाल के नुकसान (Loss of Domestic Care) का मूल्य ₹30,000 प्रति माह निर्धारित किया है. पीठ ने यह भी कहा कि यह सिद्धांत पहले दिए गए फैसले में निर्धारित मानकों के अतिरिक्त है। 
मुआवजा निर्धारण के लिए एक नया मार्गदर्शक सिद्धांत प्रदान करता है। 

2001 में पंजाब की महिला की हादसे में मौत पर आया फैसला

यह फैसला पंजाब में एक मोटर एक्सीडेंट दावे से जुड़ी अपील पर आया, जिसमें नवंबर 2001 में रेशमा नाम की एक महिला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. उसके पति और तीन बच्चों ने मुआवज़े के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का दरवाज़ा खटखटाया था. ट्रिब्यूनल ने 2003 में मुआवजा दिया, लेकिन यह मामला सालों तक मुकदमे में उलझा रहा, और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपील पर दिसंबर 2024 में जाकर फैसला सुनाया। 

दुर्घटना के दो दशक से भी ज्यादा समय बाद इस तरह की देरी पर चिंता जताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के दाले पर आम तौर पर एक साल के अंदर फैसला हो जाना चाहिए. बेंच ने कहा ऐसे मामलों का फैसला आम तौर पर एक साल के अंदर हो जाना चाहिए। 

    कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से मोटर एक्सीडेंट क्लेम मामलों की मॉनिटरिंग करने और यह पक्का करने के लिए सही एडमिनिस्ट्रेटिव निर्देश जारी करने को कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा तय समय में हो जाए। 

    इस फैसले के दूरगामी असर होने की उम्मीद है क्योंकि पूरे भारत में कोर्ट आम तौर पर मृतक होममेकर्स के लिए मौजूदा न्यूनतम वेतन के आधार पर उन्हें एक काल्पनिक इनकम देकर मुआवजा तय करते हैं, और अक्सर उन्हें स्किल्ड या अनस्किल्ड वर्कर्स के बराबर मानते हैं। 
    सुप्रीम कोर्ट का फैसला उस तरीके से अलग है, यह मानते हुए कि घरेलू देखभाल के काम को पारंपरिक लेबर-मार्केट बेंचमार्क तक कम नहीं किया जा सकता। 

    कोर्ट की ये बातें उन मिसालों पर आधारित हैं जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि होममेकर्स के योगदान की, बिना पेमेंट के भी, मापने लायक आर्थिक वैल्यू है। 

    कीर्ति बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2021) और अरुण कुमार अग्रवाल बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2010) सहित कई पिछले फैसलों में, सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने होममेकर्स द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को गैर-कानूनी मानने के खिलाफ चेतावनी दी थी। 
    अदालत का यह ताजा फैसला एक कदम और आगे बढ़कर घरेलू देखभाल के नुकसान का आकलन करने के लिए हर महीने ₹30,000 का एक ठोस न्यूनतम बेंचमार्क तय करता है। 

    यह बेंचमार्क नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम प्रणय सेठी (2017) में संविधान बेंच द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के साथ काम करेगा, जो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मुआवजा तय करने के लिए एक मिसाल है। 

Hormuz LPG Crisis: भारत पर नया ऊर्जा संकट! होर्मुज से आई बुरी खबर, LPG और ईंधन कीमतों पर बढ़ेगा दबाव

नई दिल्ली

 भारत पर एक बार फिर तेल-एलपीजी वाला नया खतरा मंडराने लगा है. भारत से कोसों दूर हुई घटना ने एक बार फिर सबके कान खड़े कर दिए हैं. जी हां, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है. इससे भारत की एलपीजी और तेल सप्लाई पर एक बार फिर असर पड़ सकता है। 

दरअसल, अपाचे हेलिकॉप्टर के गिराए जाने से अमेरिका गुस्से में है. अमेरिका दो दिनों से ईरान पर लगातार अटैक कर रहा है. इसके जवाब में ईरान ने अब होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है. होर्मुज के रास्ते भारत का करीब 60 फीसदी से अधिक एलपीजी और तेल आता है. इतना ही नहीं, वैश्विक स्तर पर करीब 20% तेल और बड़ी मात्रा में LNG इसी होर्मुज के रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है। 

होर्मुज बंद होने से मचेगा हाहाकार
होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचेगा. इसकी झलक पूरी दुनिया पिछले कुछ समय में देख चुकी है. ईरान ने जब पहली बार होर्मुज बंद किया तो पूरी दुनिया में एलपीजी से लेकर तेल की किल्लत हो गई. मगर बात में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद होर्मुज खुल गया था. मगर अब अमेरिकी हमलों के कारण ईरान ने फिर इसे बंद करने का फैसला किया है. अगर होर्मुज फिर से लंबे वक्त तक बंद रहता है तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। 

भारत के लिए कितनी चिंता की बात
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50% हिस्सा, LNG का करीब 60% हिस्सा और LPG की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं. भारत क्योंकि एलपीजी और तेल का आयातक देश है, तो इसकी भी निर्भरता होर्मुज पर ही है। 

एलपीजी सप्लाई पर बढ़ेगा दबाव
अगर होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारत में सबसे पहले LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. भारत में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और LPG का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है.  ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है. वैसे भी अब भी भारत में एलपीजी सप्लाई पहले की तरह नॉर्मल नहीं हो पाया है। 

तेल के भी बढ़ेंगे दाम?
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है. हालांकि, भारत के पास अब भी तेल और गैस का भंडार है। 

फर्टिलाइजर की आपूर्ति भी होगी प्रभावित
इतना ही नहीं, होर्मुज के बंद होने से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है. भारत यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए भी खाड़ी क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में लंबे समय तक संकट रहने पर कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों के पास कुछ समय के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है। 

Iran-US War: फिर बंद हुआ होर्मुज, समंदर में अमेरिका-ईरान आमने-सामने; UN में भारत का कड़ा संदेश, 3 भारतीय क्रू का मामला गंभीर

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया फिर जलने लगा है. ईरान जंग की आग और भड़क उठी है. डील की बातें कर रहा अमेरिका अब युद्ध करने लगा है. ईरान पर अमेरिका लगातार अटैक कर रहा है. अपाचे हेलिकॉप्टर के मार गिराए जाने से अमेरिका आगबबूला हो चुका है. इसी से गरमाकर डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर अब ताबड़तोड़ अटैक कर रहे हैं. जी हां, पश्चिम एशिया यानी मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है. दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग होर्मुज में फिर हाहाकार मच गया है. होर्मुज के पास लगातार बम-गोलों की बरसात हो रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. इसी बीच ईरानी मीडिया में दावा किया गया है समुद्र में अमेरिकी और ईरानी नौसेनाओं के बीच झड़प हुई है. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. इतना ही नहीं, ईरान ने होर्मुज को भी फिर से बंद कर दिया है. वहीं, समंदर में जहाजों पर अटैक से चिंता बढ़ गई है. इसे लेकर भारत ने यूएन में भी आवाज उठाई है। 

दरअसल, ईरानी अखबार तेहरान टाइम्स ने दावा किया कि अमेरिकी और ईरानी सैन्य जहाजों के बीच समुद्री टकराव की खबरें हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने आ गईं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. दोनों नौसेनाओं के बीच झड़प हुई है. ईरान की मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, होर्मुज में भीषण झड़पें और गोलीबारी की खबरें हैं, क्योंकि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई तटीय इलाकों में हमले किए हैं। 

3 भारतीय क्रू के लापता होने का मामला गहराया

ओमान के तट के पास एक टैंकर पर हुए हमले और तीन भारतीय नाविकों के लापता होने के मामले ने भारत-अमेरिका संबंधों में नई मुश्किलें पैदा कर दी है. इस घटना के बाद भारत ने नई दिल्ली में अमेरिका के सबसे वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया था. अब अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर भारत सरकार के सीधे संपर्क में है। 

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, “स्टेट डिपार्टमेंट इस मामले को लेकर भारत सरकार के साथ सीधे संपर्क में है.” यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने ओमान के पास हुए हमले की निंदा करते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 

समंदर में ईरान-अमेरिका के बीच झड़प
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इस जलमार्ग में अमेरिकी सेना का मुकाबला किया. आगे बताया गया कि अमेरिकी सेना ने अब तक कम से कम सात तटीय ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें बंदर अब्बास, सिरिक, केशम द्वीप और हेंगाम द्वीप के आसपास के इलाके शामिल हैं। 

यहां बताना जरूरी है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है. अमेरिका बीते कुछ समय से शांत था. वह ईरान संग डील करने को बेताब था. उसने इजरायल को भी अटैक करने से रोक रखा था. मगर अब अपाचे के गिरने के बाद अमेरिका ने ईरान पर फिर अटैक करना शुरू कर दिया है। 

दरअसल, बुधवार को भारत ने टैंकर सेटेबेलो पर हुए हमले की कड़ी आलोचना की थी. इस हमले में जहाज पर सवार 24 भारतीय क्रू में से 3 भारतीय क्रू लापता बताए जा रहे हैं. भारत ने इस मामले में अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय बुलाकर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के US डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को बुलाने के फैसले और दो जहाजों पर हमलों के बारे में एक सवाल के जवाब में, स्टेट डिपार्टमेंट के एक प्रवक्ता ने कहा, “डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट इस मामले में भारत सरकार के सीधे संपर्क में है। 

अमेरिका ने पलाऊ फ्लैग टैंकर पर किया था हमला
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट संदेश दिया कि भारतीय नाविकों की जान को खतरे में डालने वाली किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता. हालांकि, भारत के आधिकारिक बयान में हमले के लिए किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन मामले से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पलाऊ-फ्लैग वाले टैंकर सेटेबेलो को अमेरिकी बलों ने निशाना बनाया था. आरोप है कि जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को दरकिनार करने की कोशिश कर रहा था। 

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि तीन भारतीय अभी भी लापता हैं. ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान की निगरानी कर रहा है। 

जानकारी के मुताबिक, सेटेबेलो चीन के लियानयुंगांग बंदरगाह से संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह जा रहा था. जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल थे. ओमान की सशस्त्र सेनाओं ने 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया। 

ओमानी नौसेना ने किया थे भारतीय क्रू को रेस्क्यू
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ओमान के सोहार बंदरगाह से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में जहाज के इंजन रूम में आग लग गई थी. समुद्री सुरक्षा कंपनी वैनगार्ड के मुताबिक, जहाज ने संकट संदेश भेजकर बताया था कि उस पर मिसाइल हमला हुआ है, जिसके बाद आग लग गई. इसके बाद ओमान की नौसेना ने राहत अभियान शुरू किया। 

भारत ने इस पूरी घटना को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का नतीजा बताते हुए तत्काल तनाव कम करने की अपील की है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए. साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही बहाल की जानी चाहिए। 

गौरतलब है कि, 13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर रखी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अब तक सात जहाजों को रोका गया है, 134 जहाजों का रास्ता बदला गया है और 42 मानवीय सहायता से जुड़े जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है। 

होर्मुज एक बार फिर हुआ बंद
अमेरिकी अटैक का असर अब होर्मुज में साफ दिख रहा है. ईरान ने एक बार फिर होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरानी सरकारी मीडिया का हवाला देते हुए रॉयटर्स ने बताया कि ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों सहित सभी तरह के यातायात के लिए बंद कर दिया गया है. ईरानी सेना ने चेतावनी दी कि होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज पर गोली चलाई जाएगी। 

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल है. खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकता है। 

अमेरिका ने ईरान पर किया हमला, होर्मुज एक बार फिर बंद.

जहाजों पर हमले को लेकर भारत यूएन में गरजा

    इधर, होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते हमलों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने कहा कि समुद्री जहाजों को निशाना बनाया जाना बेहद चिंताजनक है. उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि कुछ भारतीय अब भी लापता हैं। 

    भारत ने साफ कहा कि वह वाणिज्यिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर हमलों का कड़ा विरोध करता है. पी. हरिश ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. उनकी सुरक्षा और भलाई भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है. भारत ने यह भी कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित भी इस क्षेत्र की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर करते हैं. ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव न केवल स्थानीय देशों बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। 

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. भारत ने कहा कि किसी भी पक्ष को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे हालात और खराब हों. नई दिल्ली ने जोर देकर कहा कि बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान ही मौजूदा संकट से निकलने का सबसे बेहतर रास्ता है. गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है. बीचे में सीजफायर हुई थी. हालांकि, अब हालात और बिगड़ने लगे हैं। 

 

जहां कभी था जहांगीर खान का दबदबा, उसी इलाके में हाफ पैंट पहन पुलिस ने निकाली परेड

कलकत्ता

एक समय जिस इलाके में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान का दबदबा और खौफ माना जाता था, वहीं अब एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जहागीर खान को हाफ पैंट पहनाकर सड़कों पर पैदल घुमाया, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मियों के बीच जहागीर खान सड़क पर चलते नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर उस छवि से बिल्कुल उलट है, जिसमें कभी उनका रसूख और दबदबा चर्चा में रहता था और अब वही शख्स सरेआम इस तरह पेश किया जा रहा है। 

भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान
जहांगीर खान को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ़्तार किया गया था. खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली. इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने से कुछ दिन पहले से ही खान को दक्षिण 24 परगना ज़िले के उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं देखा गया था। 

डायमंड हार्बर की एक अदालत ने सरकारी पक्ष की अपील पर, फाल्टा पुलिस थाने में खान के खिलाफ दर्ज सात प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 मई को खान को मिला अंतरिम संरक्षण हटा दिया था. खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा पुलिस थाने में सात प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। 

जहांगीर के ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा: द राइज़’ के ‘झुकेगा नहीं’ मशहूर डॉयलॉग को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई थी. उपचुनाव से पहले केंद्रीय बलों और पुलिस ने जहांगीर के घर पर छापा मारा था. इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षकों में से एक अजय पाल शर्मा ने किया था. इस घटना के बाद तृणमूल ने पुलिस पर्यवेक्षक के अधिकार पर सवाल उठाए थे. जहांगीर ने कहा था कि यदि वह पुलिस अधिकारी ‘शेर’ है, तो वह भी ‘पुष्पा’ है. वे चुनाव आयोग के कथित पक्षपाती व्यवहार के आगे नहीं झुकेंगे। 

केरल में निपाह वायरस की दस्तक! 43 वर्षीय व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर

कोझिकोड

केरल में निपाह वायरस के एक मामले की पुष्टि हो गई है. शुरुआती जांच में 43 साल के व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. कोझिकोड के फेरोक के रहने वाले संदिग्ध मरीज की शुरुआती जांच में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है. यह जांच कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में की गई थी.स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ अस्पताल के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आया था और माना जा रहा है कि निपाह का संदिग्ध मरीज़ माने जाने से पहले वह कई लोगों के संपर्क में आया था। 

अधिकारियों को शक है कि यह संक्रमण किसी गोदाम की सफाई के दौरान हुआ हो सकता है, हालांकि इसके सही स्रोत की अभी पुष्टि नहीं हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) से अंतिम पुष्टि गुरुवार को होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ की हालत अभी स्थिर है. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार सुबह मेडिकल बोर्ड की बैठक बुलाई गई है. कोझिकोड ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अलग समीक्षा बैठक भी होगी. कंटेनमेंट ज़ोन घोषित करने और पाबंदियां लगाने का फ़ैसला समीक्षा बैठकों और NIV टेस्ट के नतीजों के आधार पर लिया जाएगा.स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज़ के कई लोगों के संपर्क में आने की वजह से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। 

घबराने की जरूरत नहीं: केरल के स्वास्थ्य मंत्री
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि कोझिकोड के जिस व्यक्ति की शुरुआती जांच में निपाह की पुष्टि हुई है, वह कई लोगों के संपर्क में आया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय घबराने की कोई वजह नहीं है.मंत्री ने कहा कि 43 साल के मरीज़ ने उस प्राइवेट अस्पताल के कई विभागों का दौरा किया था जहां उसने शुरू में इलाज कराया था, जिससे दूसरों के भी संक्रमित होने की चिंता बढ़ गई है.मंत्री ने बताया कि एहतियात के तौर पर, अस्पताल के जिन कर्मचारियों के मरीज़ के संपर्क में आने की संभावना है, उन्हें क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है। 

मंत्री ने आगे कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है और वे हालात पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य मंत्री के ऑफ़िस में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है. मरीज़ का सैंपल पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजा गया है, जबकि ज़िला और राज्य स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी तैयारी के उपाय कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि मरीज़ की हालत स्थिर बनी हुई है। 

 

8th Pay Commission से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को खुशखबरी! DA में हो सकती है बड़ी बढ़ोतरी

  नई दिल्ली

केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स 8वें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके तहत कितनी सैलरी बढ़ेगी और कब तक खातों में आएगी, इसे लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. इस बीच महंगाई के आंकड़ों से ऐसी संभावनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं, 8th Pay से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई से महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी (DA Hike) का तोहफा मिल सकता है। 

इंतजार के बीच मिलेगी राहत!
एक ओर जहां लाखों केंद्रीय कर्मचारी 8th Pay Commission के तहत वेतन में बड़े संशोधन की सिफारिशें लागू होने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं इस इंतजार के बीच उन्हें महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के रूप में एक छोटी, लेकिन तत्काल राहत मिल सकती है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम ब्यूरो द्वारा जारी नए महंगाई के आंकड़ों ने इस उम्मीद को और मजबूत किया है। 

आठवें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संघ यह तर्क मजबूती के साथ रख रहे हैं कि महंगाई के चलते बढ़ती कीमतों ने जीवन यापन की लागत को लगातार बढ़ाने का काम किया है और खर्च करने की शक्ति कमजोर हुई है। 

महंगाई के आंकड़ों से क्या संकेत? 
औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW), जो महंगाई भत्ता (DA) तय करने में अहम रोल निभाता है, वो मार्च 2026 में 149.1 से बढ़कर अप्रैल 2026 में 149.9 हो गया है. इस दौरान औद्योगिक श्रमिकों के लिए रिटेल महंगाई दर भी 4.27% से बढ़कर 4.46% हो गई है। 

इस आधार पर डीए में बढ़ोतरी का गणित समझें, तो अप्रैल 2026 तक AICPI-IW आंकड़ों के आधार पर, 12 महीने का औसत 147.51 है. 2016 की आधार सीरीज  को 2001 की आधार सीरीज में कन्वर्ट करने के लिए 2.88 के लिंकिंग फैक्टर को लागू करें, तो DA की कैलकुलेशन करीब 62.51% आती है, जिसे संभवतः 63% माना जा सकता है। 

3% मिल सकता है DA Hike
केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 60% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है और ताजा कैलकुलेशन के आधार पर देखें, तो ये 63% हो सकता है यानी 3% DA Hike की उम्मीद है. हालंकि, अंतिम दर मई-जून 2026 के लिए AICPI-IW के आंकड़ों और उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर करेगी। 

कर्मचारियों की 8वें वेतन आयोग से ये डिमांड 
कई कर्मचारी संगठनों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के बढ़ते खर्चों के लिए वेतन में महत्वपूर्ण संशोधन की आवश्यकता है. 8th Pay Commission के सामने रखी गईं प्रमुख मांगों में हाई फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन में संशोधन, महंगाई भत्ता (डीए) का मूल वेतन में विलय और मजबूत पेंशन सुरक्षा शामिल हैं. कुछ कर्मचारी यूनियनों ने 3.83 Fitment Factor का प्रस्ताव दिया है। 

गौरतलब है कि वेतन और पेंशन को लेकर चर्चा जारी रहने के बीच, 8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन प्रस्तुत करने की अंतिम समय सीमा को बढ़ाकर 15 जून, 2026 कर दिया है. आयोग ने यह भी कहा है कि ज्ञापन सिर्फ उसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा किए जाने चाहिए और हार्ड कॉपी, भौतिक दस्तावेज, ईमेल या पीडीएफ पर विचार नहीं किया जाएगा। 

ओमान के पास भारतीय जहाज ‘जलवीर’ पर हमला, तीन दिन में तीसरे शिप को बनाया गया निशाना

 नई दिल्ली

ओमान तट के पास बुधवार को हुए हमले के 24 घंटे बीतने तक एक और हमला रिपोर्ट किया गया है. ये हमला ओमान के शिनास बंदरगाह के पास एक जहाज पर हुआ है. इस शिप का नाम MT जलवीर है और सामने आई तस्वीरों में समुद्र के बीच इस शिप को जलते हुए देखा जा सकता है. इस घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। 

अधिकारियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्हें आज (गुरुवार को) शिनास बंदरगाह के पास एक पोत (वेसल) से संबंधित घटना की सूचना मिली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है. बयान के अनुसार, घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है. फिलहाल घटना के कारणों और संभावित प्रभावों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। 

इस हमले की जानकारी ओमान में भारतीय एंबेसी की ओर से दी गई है. मामले में और जानकारी जुटाई जा रही है।  

बुधवार को भी हुआ था हमला
बता दें कि ओमान तट के पास बीते बुधवार को भी एक कमर्शियल जहाज पर हमला होने की बात सामने आई थी. इस जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे. इनमें से 24 भारतीय थे. दुखद बात यह है कि इस हमले के बाद 3 भारतीय लापता बताए जा रहे हैं. जबकि 21 भारतीय को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है. ये घटना 10 जून की है. भारत ने इस हमले की कड़ी निंदा की है.  इस हमले में लापता तीन भारतीयों में से 2 के शव मिलने की जानकारी भी सामने आ गई है। 

जिस जहाज पर हमला किया गया था उसका नाम सेटेबेलो था. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जहाज पर मौजूद 24 भारतीय क्रू सदस्यों में से अब तक 21 भारतीयों को बचा लिया गया. मंत्रालय ने कहा कि ओमान में भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और चल रहे खोज और बचाव अभियान में ओमान के अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से तालमेल बिठा रहा है। 

रॉयटर्स ने ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप एम्ब्रे के हवाले से लिखा है कि, “यह शायद ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के लिए अमेरिकी ऑपरेशन का नतीजा था. पहले भी क्रू को चेतावनी दी गई है कि हमले की स्थिति में वे जहाज के पिछले हिस्से के बजाय अगले हिस्से (बो) पर इकट्ठा हों। 

तीन दिन में तीन शिप पर हमला
सामने आया है कि MT जलवीर पर हुए हमले से पहले ओमान में ही समुद्री तटों पर बीते दो दिनों से हमले हो रहे हैं. यह लगातार तीसरे शिप पर हमला है. दरअसल, बुधवार को भारत ने टैंकर सेटेबेलो पर हुए हमले की कड़ी आलोचना की थी. भारत ने इस मामले में अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय बुलाकर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के US डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को बुलाने के फैसले और दो जहाजों पर हमलों के बारे में एक सवाल के जवाब में, स्टेट डिपार्टमेंट के एक प्रवक्ता ने कहा, “डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट इस मामले में भारत सरकार के सीधे संपर्क में है। 

 

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर बड़ी राहत, सरकार ने एक्साइज ड्यूटी हटाने का किया ऐलान

  नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण सप्लाई लाइन प्रभावित हुई है. पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित होने का असर कीमतों पर नजर भी आ रहा है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इस बीच अब भारत सरकार ने ईंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने एथेनॉल के अधिक मिश्रण वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त कर दी है. अब अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। 

भारत सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 22 से 30 फीसदी तक एथेनॉल के मिश्रण वाला पेट्रोल अब एक्साइज ड्यूटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है. यानी अब ई-22, ई-25, ई-27 और ई-30 श्रेणी के पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं देनी होगी। 

सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस फैसले का तेल कंपनियों से लेकर आम किसान और उपभोक्ता तक, सभी को फायदा होगा. सरकार के इस कदम को पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. एथेनॉल के ज्यादा मिश्रण से पेट्रोल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिल सकेगी। 

एथेनॉल का मिश्रण अधिक होने को किसानों के लिए भी लाभदायक बताया जा रहा है. एथेनॉल का कनेक्शन कृषि क्षेत्र से है. सरकार के इस फैसले का तत्कालिक प्रभाव जो भी रहे, इसके पीछे दीर्घकालिक रणनीति बताई जा रही है. ज्यादा एथेनॉल के मिश्रण वाले पेट्रोल एक्साइज ड्यूटी शून्य हो जाने के बाद ई-20 या प्रीमियम पेट्रोल के मुकाबले कहीं सस्ते होंगे। 

इससे इसकी मांग बढ़ेगी. हालांकि, ये पेट्रोल सभी वाहनों में अभी से ही इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे, लेकिन वाहन बनाने वाली कंपनियां ऐसे इंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित होंगी जो ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर चल सकें. बता दें कि हाल ही में ई-85 पेट्रोल भी लॉन्च कर दिया गया था. हालांकि, यह पेट्रोल केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ही इस्तेमाल हो सकेगा। 

 

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