भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव! घुसपैठियों को खदेड़ते ही BSF-BGB के बीच बढ़ी तनातनी, हुई पत्थरबाजी

कलकत्ता

पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को बवाल हो गया. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा कथित रूप से एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजने की कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सीमा पर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव की घटनाएं सामने आईं. घटना मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के महेंद्रगंज क्षेत्र स्थित नंदिर चार सीमा इलाके की बताई जा रही है। 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लेने के बाद BSF ने उसे बांग्लादेश की ओर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की. हालांकि मामला उस समय उलझ गया जब बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) और सीमा पार मौजूद स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 

बताया जा रहा है कि BGB के इनकार के बाद वह व्यक्ति दोनों देशों की सीमा के बीच फेंसिंग के पास ही फंस गया. इससे इलाके में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश की ओर से उसे अपने कब्जे में लेने से इनकार कर दिया गया. घटना की खबर फैलते ही सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे. देखते ही देखते सैकड़ों लोग सीमा के पास पहुंच गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। 

दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सीमा पर जुटी भीड़ के बीच कहासुनी के बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी बाड़ के आर-पार पत्थर फेंके गए, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई. हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. BSF और BGB दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। 

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे हैं. इन वीडियो में सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है। 

हालात पर नजर, बातचीत से समाधान की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत बातचीत की संभावना है. BSF और BGB के अधिकारी स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार संपर्क में हैं और स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. फिलहाल नंदिर चार सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सहयोगात्मक सीमा प्रबंधन की व्यवस्था रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों की एजेंसियां बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाल लेंगी और सीमा क्षेत्र में शांति बहाल हो जाएगी। 

भारत की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा, 12 परमाणु हथियारों की तैनाती से बदला सुरक्षा समीकरण

बेंगलुरु 

भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ईयरबुक 2026 के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है. अगर यह आकलन सही साबित होता है तो इसे भारत की परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। 

रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब SIPRI ने दुनिया को चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर एक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो चुकी है. भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य आधुनिकीकरण और हथियार नियंत्रण समझौतों के कमजोर पड़ने के कारण परमाणु जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। 

भारत ने बदली परमाणु नीति?
SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 180 बताई गई थी. रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से करीब 12 परमाणु वारहेड अब ऑपरेशनल फोर्स के साथ तैनात हो सकते हैं. अब तक माना जाता रहा है कि भारत शांति काल में अपने परमाणु हथियार और मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग रखता है, ताकि किसी भी परमाणु कार्रवाई पर अंतिम नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व के पास रहे । 

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संख्या में वारहेड की तैनाती भारत की अधिक तेज और प्रभावी प्रतिरोध क्षमता की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है. खासकर तब, जब भारत अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। 

आक्रमण नहीं, हिफाजत के लिए परमाणु हथियार
भारत की परमाणु नीति लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज’ और ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ यानी विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता के सिद्धांत पर आधारित रही है. इसका मतलब यह है कि भारत परमाणु हथियारों को आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन को हमले से रोकने के लिए रखता है. SIPRI की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में बदलाव हुआ है, लेकिन यह जरूर संकेत दिया गया है कि रणनीतिक बलों की तैयारियों का स्तर पहले से अधिक मजबूत हुआ है। 

चीन भी तेजी से बढ़ा रहा परमाणु जखीरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया पर सबसे बड़ा प्रभाव चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमता का है. SIPRI के मुताबिक चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है. इसी वजह से भारत ने ऐसी नई मिसाइल प्रणालियां विकसित की हैं जो चीन के भीतर दूर तक स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक सोच अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही है। 

हालांकि पाकिस्तान भी भारत की सुरक्षा गणनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है. पिछले एक दशक में दोनों देशों ने नई मिसाइल प्रणालियों और परमाणु हथियारों को ले जाने वाले प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. ऐसे में दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत की प्राथमिकता बना हुआ है। 

दुनियाभर में कितने परमाणु हथियार?
वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है. SIPRI के अनुसार दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु वारहेड हैं. इनमें से लगभग सभी देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण में जुटे हुए हैं. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया धीरे-धीरे एक नए न्यूक्लियर आर्म्स रेस की ओर बढ़ रही है। 

इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य में भारत की कथित ऑपरेशनल तैनाती को भी देखा जा रहा है. भले ही इसकी संख्या सीमित हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की प्रतिरोध क्षमता को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है. खासकर ऐसे दौर में जब चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। 

सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा! 8वें वेतन आयोग के फॉर्मूले से ₹53 लाख तक एरियर की चर्चा, लखनऊ में अहम बैठक

नई दिल्ली

भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है।

वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations)
लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट
लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक
लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख

लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है।

अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है।

8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000

8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600

8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120
लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520

8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर

लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.)
लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780
लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320
लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340
लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880

2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर

लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर
11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440
12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360
13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320
14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240

 

ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है।

8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

रूस ने भारत को दिया सस्ते तेल का बड़ा ऑफर, एक के बाद एक डील से बदले ऊर्जा समीकरण

नई दिल्ली

ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है। 

रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है। 

क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा
सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी। 

चीन ने कर द‍िया था मना
चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं। 

होर्मुज संकट से निपटने की तैयारी! भारत का ₹40,000 करोड़ का मेगा प्लान, तेल-गैस सप्लाई होगी मजबूत

नई दिल्ली

ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग एक बार फिर जोर पकड़ती दिख रही है. अमेरिका ने अपने अपाचे हेलिकॉप्टर पर हमले पर बदला लेने के लिए होर्मुज के पास ईरान के अहम ठिकानों पर बुधवार तड़के (भारतीय समय) हमला कर दिया. वहीं ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बहरीन स्थित अमेरिका के पांचवें बेड़े को निशाना बनाने का दावा किया है. अमेरिका और ईरान के बीच इस ताजा वार और पलटवार ने होर्मुज स्ट्रेट के जल्द दोबारा खुलने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से मंडराते तेल-गैस के संकट के बीच भारत एक ऐसे मेगा प्रोजेक्ट पर गंभीरता से कदम आगे बढ़ा रहा है, जो आने वाले दशकों के लिए देश की ऊर्जा सुरक्षा की तस्वीर बदल सकता है. ओमान से गुजरात तक अरब सागर के नीचे लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी डीप-सी गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना को फिर से गति मिली है. करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भारत के लिए ‘होर्मुज संकट का स्थायी समाधान’ माना जा रहा है। 

भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से ज्यादा प्राकृतिक गैस आयात करता है. इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से एलएनजी (LNG) के रूप में आता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अगर किसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है या वहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो भारत समेत दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है। 

ओमान से गुजरात तक पाइपलाइन
यही वजह है कि भारत अब ओमान से सीधे गैस लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है. प्रस्तावित पाइपलाइन ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी और इसके जरिए गैस समुद्र के रास्ते टैंकरों में लाने की बजाय सीधे पाइपलाइन से भारत पहुंचेगी. इससे न केवल सप्लाई अधिक स्थिर होगी बल्कि समुद्री संकटों का असर भी काफी हद तक कम हो जाएगा। 

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीकी जटिलता है. पाइपलाइन का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से भी अधिक गहराई में बिछाया जाएगा. इतनी गहराई पर पाइपलाइन निर्माण दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जाता है. अगर यह योजना सफल होती है तो यह दुनिया की सबसे गहरी समुद्री गैस पाइपलाइनों में से एक होगी। 

इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से बढ़ावा देने वाली कंपनी साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) का दावा है कि वह पहले ही तकनीकी और वित्तीय अध्ययन के साथ-साथ समुद्र तल का सर्वेक्षण भी कर चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब सरकारी कंपनियों जैसे गेल, इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा है। 

गैस आयात हो जाएगा सस्ता
एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ गैस आयात का माध्यम नहीं होगी, बल्कि भारत और खाड़ी देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगी. ओमान को लंबे समय के लिए स्थायी ग्राहक मिलेगा, जबकि भारत को गैस की सुरक्षित और लगातार आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। 

वर्तमान में एलएनजी आयात की प्रक्रिया काफी लंबी और महंगी है. पहले गैस को तरल रूप में बदला जाता है, फिर विशेष जहाजों से हजारों किलोमीटर दूर ले जाया जाता है और भारत पहुंचने पर दोबारा गैस में परिवर्तित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में भारी खर्च आता है. प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए गैस सीधे स्रोत से उपभोक्ता तक पहुंचेगी. शुरुआती अनुमान के मुताबिक गैस परिवहन की लागत 2 से 2.25 डॉलर प्रति MMBtu के बीच रह सकती है, जो कई परिस्थितियों में एलएनजी आयात से प्रतिस्पर्धी साबित हो सकती है। 

इस प्रोजेक्ट में क्या है रोड़ा?
हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी चुनौती इंजीनियरिंग की है. समुद्र की 3,000 मीटर गहराई पर पाइपलाइन बिछाना और उसका रखरखाव करना बेहद जटिल और महंगा काम होगा. किसी भी तकनीकी खराबी या रिसाव की स्थिति में मरम्मत करना आसान नहीं होगा. इसके लिए विशेष जहाजों और अत्याधुनिक उपकरणों की जरूरत पड़ेगी। 

दूसरी बड़ी चुनौती लागत और फंडिंग की है. 40,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत शुरुआती आंकड़ा है. ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अक्सर लागत बढ़ जाती है. इसके अलावा यह भी तय करना होगा कि निवेश कौन करेगा, लागत का बंटवारा कैसे होगा और गैस खरीद के दीर्घकालिक समझौते किस प्रकार होंगे। 

तीन दशक से अटका था काम
फिर भी हालात बदल चुके हैं. तीन दशक पहले जब यह परियोजना पहली बार सामने आई थी, तब तकनीक और आर्थिक व्यवहार्यता सबसे बड़ी बाधा थीं. लेकिन अब ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुकी है. रूस-यूक्रेन युद्ध, लाल सागर संकट और अब होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने यह दिखा दिया है कि किसी एक समुद्री मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना सफल होती है तो भविष्य में इसी नेटवर्क का इस्तेमाल हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधनों के परिवहन के लिए भी किया जा सकता है. यानी यह सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की ऊर्जा रणनीति का आधार बन सकती है। 

यही कारण है कि ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन को सिर्फ एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. होर्मुज संकट ने जिस खतरे की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है, भारत उसी का स्थायी समाधान खोजने में जुटा हुआ है. अगर यह मेगा प्लान जमीन पर उतरता है, तो देश की तेल-गैस आपूर्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो सकती है। 

 

PM मोदी के 12 साल पूरे होने पर जॉर्जिया मेलोनी की बधाई, भारत-इटली रिश्तों की भी हुई चर्चा

 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का नया रिकॉर्ड बनने के बाद दुनिया भर से बधाई संदेश आ रहे हैं. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी पीएम मोदी को शुभकामनाएं दी हैं. मेलोनी ने कहा कि नरेंद्र मोदी का भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनना एक बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने हाल में रोम में हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए भारत और इटली के रिश्तों को आगे बढ़ाने की बात भी कही. यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब पीएम मोदी के केंद्र सरकार में 12 साल पूरे होने को लेकर भी चर्चा तेज है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारतीय राजनीति में एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले मोदी ने लगातार 4,399 दिन पूरे कर लिए हैं. इसके साथ ही वे संविधान लागू होने के बाद भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 1952 के पहले आम चुनाव के बाद लगातार 4,398 दिन तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था। 

जॉर्जिया मेलोनी ने लिखा खास संदेश.

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को टैग करते हुए उन्हें बधाई दी. उन्होंने लिखा कि भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी को ढेर सारी शुभकामनाएं. फिर मेलोनी ने कुछ हफ्ते पहले रोम में हुई अपनी द्विपक्षीय मुलाकात को भी याद किया, जिसे लेकर वे काफी खुश दिखीं. इसके अलावा, अपने संदेश में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों पर बात की. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने मिलकर एक विशेष रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है. यह साझेदारी भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. इससे दोनों देशों के नागरिकों के लिए प्रगति के नए बेहतरीन अवसर पैदा होंगे। 

इस खास मौके पर देश और दुनिया के कई बड़े नेताओं ने भी पीएम मोदी को शुभकामनाएं दी हैं. नेताओं ने इसे जनता के भरोसे और लंबे राजनीतिक सफर की बड़ी उपलब्धि बताया है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनसेवा ही अच्छे शासन की सबसे बड़ी पहचान होती है. उन्होंने कहा कि वही व्यक्ति लोगों का विश्वास जीतता है, जो विनम्रता, समर्पण और कर्तव्य भावना के साथ लगातार काम करता है। 

हरिद्वार में CM धामी का बुलडोजर एक्शन, अवैध मजार पर चली कार्रवाई, प्रशासन सख्त

 लक्सर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर लक्सर तहसील प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने हरिद्वार में एक और अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया। सहारनपुर झबेडा मार्ग पर सरकारी जमीन पर बनी उक्त मजार को ध्वस्त करने के लिए पहले नोटिस दिया गया था।

वहीं गोवर्धनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभियान चलाकर 35 से अधिक अतिक्रमण हटाए। अभियान के दौरान अधिकारियों ने सड़क, नाली और फुटपाथ पर किए गए कब्जों को हटाते हुए व्यापारियों और स्थानीय लोगों को आगे से अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी।

13 लोगों के चालान
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस टीम ने राजमार्ग किनारे दुकानों व सार्वजनिक भूमि का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान कई अस्थायी ढांचे, सामान और अवैध कब्जे हटाए गए। साथ ही 81 पुलिस एक्ट के तहत 13 लोगों के चालान भी किए गए।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि, सड़क, नालियों और फुटपाथों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोबारा अतिक्रमण किया गया तो सामान जब्त करने के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

अभियान में एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला, तहसीलदार दीवान सिंह राणा, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।

मोदी सरकार के 12 साल पर कैबिनेट का बड़ा फैसला, अहमदाबाद मेट्रो समेत कई परियोजनाओं को मिली मंजूरी

नई दिल्ली

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को अहमदाबाद मेट्रो के फेज 2A प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी. यह प्रोजेक्ट कोटेश्वर रोड से सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक 6 किलोमीटर का विस्तार है और इसकी अनुमानित लागत 2,169 करोड़ रुपये है. कैबिनेट की बैठक के बाद फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद अहमदाबाद में शहरी आवागमन को बेहतर बनाना और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर व डेवलपमेंट हब (जिनमें प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स की सुविधाएं भी शामिल हैं) तक कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। 

यह एक्सटेंशन बनने वाले कॉमनवेल्थ एन्क्लेव को एयरपोर्ट से जोड़ेगा, जिससे एथलीटों, अधिकारियों, आने वाले लोगों और निवासियों के लिए आसानी से आना-जाना मुमकिन हो जाएगा. अहमदाबाद 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला है। 

अहमदाबाद मेट्रो का विस्तार
अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के विस्तार में करीब 2169 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है. इसमें करीब 2500 लोगों को रोजगार भी मिलेगा. यह परियोजना पूरी होते ही अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो रूट का विस्तार 77.63 किलोमीटर तक हो जाएगा। 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट निर्णयों की जानकारी दी. वैष्णव ने कहा, पंडित नेहरू एक बहुत बड़े राजनीतिक परिवार से आए थे. हमें अंग्रेजों से अभी-अभी आजादी मिली थी. माहौल और सोच अलग थी, जिन लोगों का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं था, जो बहुत साधारण परिवारों से आए थे और जिन्होंने अपने काम से देश को आगे बढ़ाया, देश ने उन पर भरोसा किया। 

रेल मंत्री ने कहा, आज पीएम मोदी ने एक चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने का नया रिकॉर्ड बनाया है. इस मौके पर केंद्रीय कैबिनेट ने एक प्रस्ताव पास किया है. इस प्रस्ताव में पीएम मोदी के देश के लिए एक चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार सेवा के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर चर्चा की गई है और कई वादों और संकल्पों की रूपरेखा बताई गई है. 10 जून 2026 भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है. आज नरेंद्र मोदी देश की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं. प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार 4399 दिनों तक सेवा करने का रिकॉर्ड बनाया है. यह एक ऐसा पड़ाव है जिसे आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार हासिल किया गया है। 

कॉरिडोर के स्टेशनों के नाम
इस कॉरिडोर की लंबाई 6.032 किलोमीटर होगी और इसमें 05 स्टेशन (04 एलिवेटेड और 01 अंडरग्राउंड) होंगे. फेज 2(A) के चालू होने पर, अहमदाबाद-गांधीनगर में 77.63 किलोमीटर का एक्टिव मेट्रो रेल नेटवर्क हो जाएगा. फेज 2(A) कॉरिडोर के स्टेशनों के नाम हैं- आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की कुल लागत (IDC – यानी निर्माण के दौरान लगने वाले ब्याज सहित) 2,169.04 करोड़ रुपये होगी। 

फायदे और विकास को बढ़ावा
अहमदाबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का फ़ेज 2(A) शहर के इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में एक अहम प्रगति है. फेज़ 2(A) शहर में मेट्रो रेल नेटवर्क के बड़े विस्तार के तौर पर काम करता है। 

बेहतर कनेक्टिविटी
अहमदाबाद मेट्रो प्रोजेक्ट के फेज 2(A) में लगभग 6.032 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर का विकास शामिल है. इसका मकसद एयरपोर्ट तक आसान कनेक्टिविटी देकर और ऐसे प्रमुख रिहायशी व कमर्शियल इलाकों को जोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को काफी बेहतर बनाना है, जहां अभी ट्रांसपोर्ट की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं। 

इस फेज का मकसद रिहायशी और कमर्शियल हब जैसे अहम इलाकों को मौजूदा अहमदाबाद-गांधीनगर कॉरिडोर से आसानी से जोड़ना है. साथ ही, वर्ल्ड पुलिस गेम्स 2029 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए आस-पास स्पोर्ट्स सुविधाएं विकसित किए जाने की भी संभावना है। 

इन अहम इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़कर, फेज 2(A) न केवल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और टूरिज्म को भी बढ़ावा देगा, साथ ही यहां रहने वालों और आने-जाने वालों के लिए शहरी आवाजाही को आसान बनाएगा। 

आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के लिए ऑफिस अकोमोडेशन
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार को आंध्र प्रदेश की नई राजधानी अमरावती में केंद्र सरकार के जनरल पूल ऑफिस अकोमोडेशन (CGGPOA) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। 

यह प्रोजेक्ट अमरावती के नए ग्रीनफील्ड शहर में एक अहम पहल है, जिसे एक वर्ल्ड-क्लास शहरी केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना है. इस प्रस्ताव का मकसद केंद्र सरकार के अलग-अलग दफ्तरों के लिए ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग को पूरा करना है, ताकि उन्हें एक ही जगह पर लाया जा सके. इससे विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा और आंध्र प्रदेश राज्य को केंद्र सरकार की तरफ से दी जाने वाली सेवाओं की क्षमता और असर में सुधार होगा। 

5.53 एकड़ में बनेगा अकोमोडेशन
आंध्र प्रदेश के नए राजधानी शहर अमरावती में सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल ऑफिस अकोमोडेशन (CGGPOA) को 5.53 एकड़ जमीन पर बनाने की योजना है. CGGPOA में दो ब्लॉक हैं। 

एक ब्लॉक प्लॉट C-9 पर है जिसमें ग्राउंड फ्लोर के अलावा 13 मंजिलें हैं (ग्राउंड फ्लोप पर सर्विसेज, तीन मंजिलों पर पोडियम पार्किंग और दस मंजिलों पर ऑफिस स्पेस हैं), और दूसरा ब्लॉक प्लॉट C-8 पर है जिसमें ग्राउंड फ्लोर के अलावा 10 मंजिलें हैं (ग्राउंड फ्लोर पर सर्विसेज, तीन मंजिलों पर पोडियम पार्किंग और सात मंजिलों पर ऑफिस स्पेस हैं).

इस सुविधा को लगभग 8,000 अधिकारियों और स्टाफ सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें लगभग 1,800 इक्विवेलेंट कार स्पेस (ECS) के लिए पोडियम पार्किंग की व्यवस्था का प्रस्ताव है. इस प्रोजेक्ट का कुल बिल्ट-अप एरिया 23,25,000 वर्ग फ़ीट (2,16,032 वर्ग मीटर) है। 

कंबोडिया में एक्टिव मिले 36 हजार भारतीय SIM, साइबर ठगी में 5,300 कार्ड के इस्तेमाल का खुलासा

जोधपुर/ लुधियाना

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंबोडिया से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान और पंजाब में एक साथ छापेमारी की है.  यह कार्रवाई जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ (अजमेर) और लुधियाना सहित कुल 7 ठिकानों पर की गई.  जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी और दुरुपयोग किए गए सिम कार्डों के जरिए भारत में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था, जिसमें स्थानीय सिम वेंडरों ने आम लोगों के आधार और पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर हजारों सिम बिना उनकी जानकारी के एक्टिवेट किए। जांच में खुलासा हुआ है कि हजारों भारतीय सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिव कर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।जांच के दौरान एजेंसी ने करीब 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि लगभग 36 हजार भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय थे।

भारत के लोगों से करते थे ठगी 
जांच में सामने आया कि राजस्थान के सिम विक्रेताओं ने आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 36 हजार फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट किए, जिन्हें मलेशिया के रास्ते कंबोडिया भेजकर देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की जा रही थी. लगभग 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें कई नंबर साइबर फ्रॉड गतिविधियों में इस्तेमाल होते मिले. यह सिम कार्ड पहले भारत से मलेशिया भेजे जाते थे, और वहां से इन्हें कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था, जहां से भारतीय नागरिकों को कॉल कर ठगी की जाती थी। 

5300 सिम भारत में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल
इनमें से करीब 5300 सिम कार्ड सीधे तौर पर भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार इन नंबरों के जरिए देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया।ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की।

5 जून को शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत राजस्थान के किशनगढ़, नागौर और जोधपुर के साथ पंजाब के लुधियाना में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।छापेमारी के दौरान ईडी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 14 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

मलेशियाई नागरिकों के जरिए भेजी जाती थीं सिम
ईडी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सिम विक्रेता टेलीकॉम कंपनियों की पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) आईडी का उपयोग कर लोगों को नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के बहाने बुलाते थे।कम पढ़े-लिखे और जागरूकता की कमी वाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड भी सक्रिय कर दिए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजा जाता था।

पुलिस अधिकारी बनकर करते थे कॉल  
पूरे रैकेट में ठगी का तरीका बेहद संगठित था, जिसमें फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करते थे. मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी, और शेयर बाजार या क्रिप्टो निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे. कॉल के लिए भारतीय (+91) नंबरों का इस्तेमाल होने से पीड़ित इसे भरोसेमंद समझकर जाल में फंस जाते थे. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए हवाला और क्रिप्टो चैनलों से विदेश भेज दी जाती थी। 

मलेशिया के एजेंटों को सप्लाई किया 
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ POS सिम वेंडरों और एजेंटों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चल रहा था, जिन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की आईडी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए और उन्हें कमीशन के बदले मलेशियाई एजेंटों को सप्लाई किया. छापेमारी के दौरान कई बैंक खातों, संदिग्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पहचान हुई है, जबकि कई चल और अचल संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं.  एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है और मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना है। 

Aaj Ka Mausam: IMD का रेड अलर्ट जारी, आंधी-तूफान और भारी बारिश को लेकर बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली
 देश के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मॉनसून अपने पुराने अंदाज में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी, नंद्याल, चेन्नई और सिलिगुड़ी से होकर गुजर रही है। अगले 4 से 5 दिनों के दौरान मॉनसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, पूरे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल के कुछ और इलाकों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से जहां दक्षिण और पूर्व भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है।

उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी आंधी के साथ बारिश की संभावना है। 13 से 16 जून के बीच भी धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं, लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में 10 से 16 जून के बीच बारिश के आसार हैं। विशेष रूप से 12 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओले गिरने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।

जयपुर सहित पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 11 से 13 जून के बीच भीषण आंधी और धूल का गुबार छाए रहने की आशंका है। 14 से 16 जून के बीच तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में इन दो दिनों में भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है।

मुंबई में भारी बारिश, एमपी में ओले
मुंबई सहित कोंकण और गोवा के इलाकों में मॉनसून सक्रिय हो चुका है। यहां 10 और 11 जून को भारी बारिश के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी 12 जून तक आंधी-बारिश का दौर रहेगा। भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश में 12 जून को ओलावृष्टि और 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 11 और 12 जून को तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट
10 जून को तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। बेंगलुरु सहित आंतरिक कर्नाटक में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल, माहे और तमिलनाडु के कई हिस्सों में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हैदराबाद सहित तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में 10 से 13 जून के बीच गरज-चमक के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना है। तेलंगाना में आज भारी बारिश भी हो सकती है।

असम-मेघालय में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा
पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों (10-16 जून) तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 10 से 14 जून के बीच अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कोलकाता सहित गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 10 और 11 जून को तथा बिहार-झारखंड में 11 और 12 जून को 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से भीषण आंधी और बारिश होगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि बिहार में 12 जून तक भारी बारिश हो सकती है।

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