कंबोडिया में एक्टिव मिले 36 हजार भारतीय SIM, साइबर ठगी में 5,300 कार्ड के इस्तेमाल का खुलासा

जोधपुर/ लुधियाना

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंबोडिया से संचालित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान और पंजाब में एक साथ छापेमारी की है.  यह कार्रवाई जोधपुर, नागौर, किशनगढ़ (अजमेर) और लुधियाना सहित कुल 7 ठिकानों पर की गई.  जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी और दुरुपयोग किए गए सिम कार्डों के जरिए भारत में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था, जिसमें स्थानीय सिम वेंडरों ने आम लोगों के आधार और पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर हजारों सिम बिना उनकी जानकारी के एक्टिवेट किए। जांच में खुलासा हुआ है कि हजारों भारतीय सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिव कर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल भारत में बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।जांच के दौरान एजेंसी ने करीब 2.3 लाख संदिग्ध मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया। इसमें सामने आया कि लगभग 36 हजार भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय थे।

भारत के लोगों से करते थे ठगी 
जांच में सामने आया कि राजस्थान के सिम विक्रेताओं ने आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 36 हजार फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट किए, जिन्हें मलेशिया के रास्ते कंबोडिया भेजकर देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की जा रही थी. लगभग 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया, जिनमें कई नंबर साइबर फ्रॉड गतिविधियों में इस्तेमाल होते मिले. यह सिम कार्ड पहले भारत से मलेशिया भेजे जाते थे, और वहां से इन्हें कंबोडिया में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था, जहां से भारतीय नागरिकों को कॉल कर ठगी की जाती थी। 

5300 सिम भारत में साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल
इनमें से करीब 5300 सिम कार्ड सीधे तौर पर भारत में साइबर फ्रॉड के मामलों में इस्तेमाल किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार इन नंबरों के जरिए देशभर में सैकड़ों करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया।ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की।

5 जून को शुरू हुई इस कार्रवाई के तहत राजस्थान के किशनगढ़, नागौर और जोधपुर के साथ पंजाब के लुधियाना में कुल सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।छापेमारी के दौरान ईडी ने बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 14 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

मलेशियाई नागरिकों के जरिए भेजी जाती थीं सिम
ईडी के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। सिम विक्रेता टेलीकॉम कंपनियों की पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) आईडी का उपयोग कर लोगों को नया सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने के बहाने बुलाते थे।कम पढ़े-लिखे और जागरूकता की कमी वाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड भी सक्रिय कर दिए जाते थे। बाद में इन सिम कार्डों को मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजा जाता था।

पुलिस अधिकारी बनकर करते थे कॉल  
पूरे रैकेट में ठगी का तरीका बेहद संगठित था, जिसमें फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करते थे. मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी, और शेयर बाजार या क्रिप्टो निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे. कॉल के लिए भारतीय (+91) नंबरों का इस्तेमाल होने से पीड़ित इसे भरोसेमंद समझकर जाल में फंस जाते थे. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के जरिए हवाला और क्रिप्टो चैनलों से विदेश भेज दी जाती थी। 

मलेशिया के एजेंटों को सप्लाई किया 
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ POS सिम वेंडरों और एजेंटों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क चल रहा था, जिन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की आईडी का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए और उन्हें कमीशन के बदले मलेशियाई एजेंटों को सप्लाई किया. छापेमारी के दौरान कई बैंक खातों, संदिग्ध दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पहचान हुई है, जबकि कई चल और अचल संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं.  एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है और मामले में आगे और बड़े खुलासों की संभावना है। 

Aaj Ka Mausam: IMD का रेड अलर्ट जारी, आंधी-तूफान और भारी बारिश को लेकर बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली
 देश के कई राज्यों में मौसम तेजी से बदल रहा है। मॉनसून अपने पुराने अंदाज में आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मॉनसून की उत्तरी सीमा इस समय हरनाई, सोलापुर, कलबुर्गी, नंद्याल, चेन्नई और सिलिगुड़ी से होकर गुजर रही है। अगले 4 से 5 दिनों के दौरान मॉनसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के बचे हुए हिस्सों, पूरे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल के कुछ और इलाकों के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से जहां दक्षिण और पूर्व भारत में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है, वहीं उत्तर भारत को भीषण गर्मी से राहत मिलने वाली है।

उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली-NCR, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी आंधी के साथ बारिश की संभावना है। 13 से 16 जून के बीच भी धूल भरी आंधी और हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं, लखनऊ सहित पूरे उत्तर प्रदेश में 10 से 16 जून के बीच बारिश के आसार हैं। विशेष रूप से 12 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओले गिरने और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है।

जयपुर सहित पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 11 से 13 जून के बीच भीषण आंधी और धूल का गुबार छाए रहने की आशंका है। 14 से 16 जून के बीच तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 11 और 12 जून को व्यापक स्तर पर बारिश होगी। साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में इन दो दिनों में भारी ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है।

मुंबई में भारी बारिश, एमपी में ओले
मुंबई सहित कोंकण और गोवा के इलाकों में मॉनसून सक्रिय हो चुका है। यहां 10 और 11 जून को भारी बारिश के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी 12 जून तक आंधी-बारिश का दौर रहेगा। भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश में 12 जून को ओलावृष्टि और 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 11 और 12 जून को तेज आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट
10 जून को तटीय कर्नाटक में अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। बेंगलुरु सहित आंतरिक कर्नाटक में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल, माहे और तमिलनाडु के कई हिस्सों में 10 से 12 जून के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। हैदराबाद सहित तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश में 10 से 13 जून के बीच गरज-चमक के साथ 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की संभावना है। तेलंगाना में आज भारी बारिश भी हो सकती है।

असम-मेघालय में बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा
पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 7 दिनों (10-16 जून) तक मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 10 से 14 जून के बीच अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कोलकाता सहित गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 10 और 11 जून को तथा बिहार-झारखंड में 11 और 12 जून को 50-70 किमी/घंटे की रफ्तार से भीषण आंधी और बारिश होगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में आज बहुत भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि बिहार में 12 जून तक भारी बारिश हो सकती है।

बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा वसूले, अब चुकाने पड़े 25 हजार रुपये; कारोबारी को मिला सबक

कोच्चि

 अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल में एक ग्राहक से बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?
केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया।

जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की।

शराब निगम ने दी ये दलील
कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी सेस’ (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए।

निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया।

कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी
पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019’ के तहत ‘सर्विस में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है।

क्या सुनाया गया फैसला?
अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

23,000 करोड़ की मेगा डील से मजबूत होगी थल सेना, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी भारत की मारक क्षमता

नई दिल्ली

भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. हाल ही में भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की बड़ी डील को मंजूरी मिलने के बाद अब थल सेना के लिए भी खजाना खुलता दिख रहा है. सेना 23,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी स्वचालित तोपें खरीदने की तैयारी में है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। 

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को तेजी से आधुनिक बनाया है. वायुसेना को पहले 36 राफेल लड़ाकू विमान मिले. इसके बाद भारतीय नौसेना के लिए भी राफेल मरीन विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. अब एयरफोर्स के लिए और 114 राफेल खरीदे जा रहे हैं. अब सरकार का फोकस थल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने पर है. इसी रणनीति के तहत K9 वज्र तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी चल रही है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की टू-फ्रंट वार यानी चीन और पाकिस्तान दोनों से एक साथ निपटने की रणनीति का हिस्सा है। 

रक्षा सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने 300 अतिरिक्त K9 वज्र-टी हॉवित्जर खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. प्रस्ताव जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के सामने रखा जा सकता है. मंजूरी मिलने पर यह भारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी तोपखाना खरीद परियोजनाओं में शामिल होगी। 

K9 वज्र ने पिछले कुछ वर्षों में सेना का भरोसा जीता है. मूल रूप से इसे रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में युद्ध के लिए विकसित किया गया था. लेकिन पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव के दौरान इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया गया.कठिन मौसम और पहाड़ी इलाकों में भी इसके प्रदर्शन ने सेना को प्रभावित किया. यही कारण है कि सेना अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ाना चाहती है। 

K9 वज्र-टी एक 155 मिमी और 52 कैलिबर की आधुनिक स्वचालित तोप है. यह ट्रैक वाले प्लेटफॉर्म पर चलती है. इसलिए टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ तेजी से आगे बढ़ सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है शूट एंड स्कूट क्षमता. यानी दुश्मन पर गोले बरसाने के तुरंत बाद यह अपनी जगह बदल सकती है. इससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है. आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बेहद अहम मानी जाती है। 

भारतीय सेना के पास फिलहाल 100 K9 वज्र तोपें हैं. इसके अलावा 2024 में 100 और तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई थी. इस सौदे की कीमत 7,629 करोड़ रुपये थी. अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो सेना के पास K9 वज्र का विशाल बेड़ा तैयार हो जाएगा. इससे भारतीय तोपखाने की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। 

K9 वज्र का निर्माण भारत में किया जाता है. इसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की हनव्हा एयरोस्पेस की साझेदारी में तैयार किया जाता है. इसमें स्वदेशी सामग्री का हिस्सा लगातार बढ़ाया गया है. इसलिए यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

35 दल, 75 नेता और कई मुख्यमंत्री एक मंच पर, PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल का होगा भव्य महाजश्न

 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे हो गए हैं.देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड पीएम मोदी ने मोदी तोड़ दिया है. यह रिकॉर्ड आजादी के बाद निर्वाचित सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का है. पंडित नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे जबकि नरेंद्र मोदी का बतौर पीएम का 4399वां दिन है। 

पीएम मोदी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर पूरे देश में जश्न का माहौल है. मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों को बीजेपी लोगों के सामने रख रही है और उपलब्धियों का जश्न भी मना रही है. इस मौके पर दिल्ली में बीजेपी और एनडीए के सभी सहयोगी दल के नेता दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाली बैठक में शिरकत करेंगे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिकॉर्ड बनाने उपलक्ष्य में भारत मंडपम में हो रही बैठक में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित प्रमुख नेता शामिल होंगे. एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा। 

35 दल के 75 नेता करेंगे शिरकत
पीएम मोदी ने 1952 के आमचुनावों के बाद चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहर लाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा लिया है जबकि जवाहर लाल नेहरू  4,398 दिन तक पीएम रहे थे. इस तरह से नरेंद्र मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। 

मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में एक जश्न रखा गया है,  जिसमें बीजेपी और उसके सहयोगी दल के नेता हिस्सा लेंगे. बैठक में एनडीए के 22 शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के अलावा गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के नेता शिरकत करेंगे। 

बैठक में एनडीए के 35 सहयोगी दलों के करीब 75 वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष और गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. बैठक की अध्यक्षता बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन करेंगे. इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह,जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान जैसे केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रम में शामिल होंगे। 

वहीं, एनडीएमें शामिल पार्टियों के केंद्रीय मंत्रियों में टीडीपी से के राम मोहन नायडू, जेडीयू से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह,जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी और अपना दल-सोनेलाल से अनुप्रिया पटेल इस बैठक में शामिल होंगी. इसके अलावा राज्यों के सहयोगी दल के नेता भी शिरकत करेंगे। 

एनडीए की बैठक का एजेंडा क्या होगा
एनडीए बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों सहित मोदी सरकार के 12 पूरे होने पर चर्चा होने की संभावना है. एनडीए के नेता और केंद्र और राज्य सरकारों के नेता ‘विकसित भारत’ के  सपने को साकार करने के लिए और सुधार लाने के तरीकों पर अपने विचार रखेंगे। 

मोदी की अगुवाई में होने वाली बैठक में ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने पर एनडीए नेता अपनी बात रख सकते हैं. बैठक में राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के मोदी सरकार के विजन की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा. बैठक में इस बात पर भी चर्चा होने डंबल इंजन की सरकार चल रही, उन राज्यों में विकास योजनाओं को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। 

पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों को लोगों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दिशा में काम करना चाहिए. पीएम मोदी ने कहा था कि भले ही सरकार 2014 से सत्ता में है, लेकिन 2026 में भविष्य के लक्ष्यों और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. माना जा रहा है कि इस पर विस्तार के चर्चा हो सकती है। 

बैठक में मोदी के लिए आएगा प्रस्ताव
एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास किया जाएगा. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू एक विशेष प्रस्ताव पेश करेंगे, जिसका समर्थन नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो करेंगे। 

एनडीए के तरफ से लाए जाने वाले विशेष प्रस्ताव में 12 साल तक निर्वाचित रूप से प्रधानमंत्री पद पर बने रहने के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई दी जाएगी और उनके नेतृत्व के लिए एनडीएका आभार जताया जाएगा  प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने से पहले गठबंधन के नेता चर्चा में हिस्सा लें. प्रस्ताव पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को संबोधित कर सकते हैं। 

एनडीए की बैठक को मोदी करेंगे संबोधित
 दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली एनडीए बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. बैठक में मोदी सरकार के 12 साल की उपलब्धि पर चर्चा किए जाने के साथ ये बैठक करीब 3 घंटे तकतक चलेगी. मोदी सरकार के कामकाज पर प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद पीएम मोदी एनडीए नेताओं को संबोधित करेंगे। 

भारत में अपराध दर 6% घटी, लेकिन साइबर क्राइम बना बड़ी चुनौती; 1 लाख के पार जा सकते हैं मामले: SBI रिपोर्ट

नई दिल्ली
देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में अपराध, अर्थव्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और तकनीक के बीच के रिश्ते पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। 

SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 के दौरान 58.86 लाख संज्ञेय (Cognizable) अपराध दर्ज किए गए. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. देश की कुल अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और निगरानी तंत्र में सुधार इसके प्रमुख कारण हैं। 

हालांकि कुल अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साइबर क्राइम के मामले 1 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में ऐसे 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 4.41 लाख रह गए. यह करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि चुनौती का स्तर अभी भी बहुत बड़ा है और इसे सफलता नहीं माना जा सकता। 

एएनआई के मुताबिक, SBI का मानना है कि UPI, FASTag और डिजिटल निगरानी जैसे साधनों ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. डिजिटल ट्रेल की वजह से अपराध करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन क्षेत्रों में अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहां अपराध में हल्की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि निगरानी बढ़ने से अपराध कम होने की संभावना बढ़ती है। 

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के सभी 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं. ये सेंटर डेटा, तकनीक, निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़ते हैं. इसका मकसद शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। 

रिपोर्ट के अनुसार 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. SBI का कहना है कि ये सुविधाएं लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं। 

रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच दिलचस्प संबंध का उल्लेख किया गया है. अध्ययन बताते हैं कि अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे विकास की गति धीमी हो सकती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है। 

SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर अल्पकाल में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 0.11 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी अपराध कम होने का फायदा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था और विकास दर को भी मिलता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध श्रम बाजार में बाधा पैदा करते हैं और महिला कार्यबल की भागीदारी को प्रभावित करते हैं. NCRB 2024 के अनुसार पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,227 मामले और 1,21,166 पीड़ित दर्ज किए गए। 

वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि करीब 27.88 करोड़ विवाहित महिलाओं में से 24 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया. इसका अनुमानित वार्षिक बोझ करीब 6.69 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और श्रम नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

क्या भारत में आएंगे प्लास्टिक के नोट? न फटेंगे, न पानी से खराब होंगे; जानिए कैसे बनते हैं

 नई दिल्ली

भारत में भी अब ‘प्लास्टिक’ के नोट आने वाले हैं, जैसे कई दूसरे देशों में छापे जाते हैं. खास मैटेरियल से बने ये नोट जल्दी से फटते नहीं हैं और अगर पानी में गिर जाए तो खराब नहीं होते हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बता दिया है कि इस तरह के नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी शुरुआती फेज में है. अभी भले ही इसमें टाइम लगेगा, लेकिन भारत के करेंसी नोट भी अलग मैटेरियल के होंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये नोट प्योर प्लास्टिक से बनाए जाएंगे या फिर कुछ अलग मैटेरियल के होंगे और इस पर कितना काम हो चुका है?

अभी आरबीआई का क्या कहना है?
हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है. पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसे लेकर आकलन कर रहा है. इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी. दरअसल, सरकार इस पर लंबे वक्त से काम कर रही है। 

इससे पहले इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था. हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था। 

किस मैटेरियल के होंगे ये नोट?
जिन नोटों की चर्चा हो रही है, उन्हें पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये कागज के बजाय एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने मुद्रा नोट होते हैं. ये आम कागजी नोटों (जो कपास और लिनन से बनते हैं) की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं. ये पानी में भीगने या वॉशिंग मशीन में धुल जाने पर भी खराब नहीं होते हैं. ये नोट थोड़े चिकने होते हैं। 

इन नोट्स को बनाने में BOPP यानी पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलिमर नोटों में पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) ही वह मुख्य आधार है, जो इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों से अलग बनाता है. इन्हें प्लास्टिक का कहा जा सकता है, लेकिन ये पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट नहीं होते हैं जबकि ये उसी मैटेरियल का सबसे अच्छा रूप है. पॉलिमर नोट आम प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग या पीवीसी) से काफी अलग होते हैं. इसकी परत आम प्लास्टिक की तरह मोटी या सख्त नहीं, बल्कि कागज जितनी पतली होती है. यह सामान्य प्लास्टिक की तरह जेब की गर्मी या धूप से आसानी से पिघलता या सिकुड़ता नहीं है। 

इस प्लास्टिक फिल्म पर स्याही को रोकने के लिए खास तरह की लेयर की कोटिंग की जाती है, इस पर छपाई टिकी रहती है. पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसके बाद से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों ने भी अपनी मुद्रा के लिए पॉलिमर तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है. अब भारत भी इस पर विचार कर रहा है। 

8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीद, ₹18,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹68,940 तक पहुंचने के आसार

नई दिल्ली
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की जा रही है। अगर सरकार सबसे अधिक प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर 3.83 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) मौजूदा ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹68,940 हो सकता है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा बेसिक पे और पेंशन को नए सैलरी स्ट्रक्चर में परिवर्तित किया जाता है। वेतन आयोग की सिफारिशों में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर वेतन, पेंशन, भत्ते और एरियर तय होते हैं।

7वें वेतन आयोग में कितना था फिटमेंट फैक्टर?
7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था।

8वें वेतन आयोग के लिए क्या हैं मांगें?
विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।विशेषज्ञों का फिटमेंट फैक्टर का अनुमान 1.92 है। जबकि, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) का 3.00 और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) का 3.25 है। वहीं, जम्मू-कश्मीर कर्मचारी मंच का अनुमान 3.05 और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी समन्वय समिति का 2.86 से 3.68 है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM)ने 3.83 का अनुमान लगाया है।

फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से कितना हो सकता है वेतन?
मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 को आधार मानें तो संभावित वेतन इस प्रकार हो सकता है…

1.92 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560

2.57 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260

2.86 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480

3.00 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹54,000

3.25 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹58,500

3.68 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹66,240

3.83 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹68,940

अगर सरकार 7वें वेतन आयोग जैसा 2.57 का फिटमेंट फैक्टर ही लागू करती है, तब भी न्यूनतम मूल वेतन ₹46,260 तक पहुंच सकता है। वहीं, कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर मंजूर होने पर वेतन में करीब 283 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है।

सिर्फ वेतन ही नहीं, भत्ते भी बढ़ेंगे
फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का असर केवल मूल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ ही हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी होगी। ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की समीक्षा होगी और मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन में समाहित किया जाएगा। नया सैलरी स्ट्रक्चर लागू होने के बाद DA की गणना फिर से शुरू होगी।

कर्मचारियों की निगाह सरकार के फैसले पर
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, वेतन और पेंशन में उतनी ही बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है।

राज्यसभा चुनाव के बाद मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल? 12 मंत्रियों के बदलने की चर्चा तेज

नई दिल्ली

राज्यसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही एनडीए सरकार में कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अटकलें हैं कि इस बार कई राज्य मंत्रियों को बदला जा सकता है। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि किन मंत्रालयों में बड़े स्तर पर बदलाव होंगे, लेकिन कहा जा रहा है कि इसकी संख्या एक दर्जन मंत्रियों तक जा सकती है। खास बात है कि 18 जून को राज्यसभा चुनाव हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी कैबिनेट को लेकर बड़े फैसले ले सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कम से कम 2 कैबिनेट मंत्री और 3 राज्य मंत्रियों परिषद से बाहर हो सकते हैं। अटकलें ये भी हैं कि एक वरिष्ठ मंत्री को दक्षिण भारतीय राज्य में पार्टी की कमान भी सौंपी जा सकती है।

दूसरे दलों को भी मिलेंगे पद
रिपोर्ट के मुताबिक, सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि मोदी सरकार की नई कैबिनेट में JD(U), TDP, NCP और RLM जैसे सहयोगी दलों (Allies) को जगह मिल सकती है। इसमें भी नीतीश कुमार की JD(U) और चंद्रबाबू नायडू की TDP को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। जबकि, सहयोगी दलों के ज्यादातर नेताओं को राज्य मंत्री का पद मिलने की उम्मीद है।

राज्यसभा चुनाव
कहा जा रहा है कि राज्यसभा का कार्यकाल पूरा कर रहे कई मंत्रियों को इस साल या 2027 की शुरुआत में संगठन में भेजा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, माना जा रहा है कि 70 साल से ज्यादा उम्र के कुछ राज्यसभा सांसदों को बदलने पर विचार किया जा सकता है और नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि भाजपा मोर्चा नेताओं को कैबिनेट में पहली बार शामिल किया जा सकता है।

इन मंत्रालयों में बदलाव के आसार
रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे, वित्त, कॉर्पोरेट अफेयर्स, कोयला, टेक्सटाइल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, ग्रामीण विकास, रसायन और उर्वरक, सहकारिता, मत्स्य पालन, जल शक्ति, कृषि और पर्यावरण, कानून और अन्य में बदलाव के आसार हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।

राज्यसभा चुनाव
18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। जिन 26 सीटों के लिए चुनाव एवं उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं।

क्या 62% लोगों के लिए होम लोन होगा मुश्किल? CIBIL स्कोर के नए नियम ने बढ़ाई चिंता

 नई दिल्ली
RBI के ECL नियम लागू होने के बाद बैंकों को ज्यादा प्रावधान करना होगा, कमजोर क्रेडिट प्रोफाइल वाले ग्राहकों के लिए बढ़ सकती हैं ब्याज दरें अगर आपका CIBIL स्कोर 730 से कम है तो आने वाले समय में होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशन लोन लेना पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए ‘ECL Direction-2026’ के लागू होने के बाद बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को कर्ज देने में अधिक सतर्कता बरतेंगे. बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि कम क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को या तो लोन मिलने में दिक्कत होगी या फिर उन्हें ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ेगा। 

कई मामलों में बैंक अतिरिक्त गारंटी या कोलेटरल की भी मांग कर सकते हैं. सबसे बड़ी चिंता की बात है कि देश में करीब 62 फीसदी लोन आवेदकों का CIBIL स्कोर 730 से कम है. ऐसे में अगले साल से बड़ी संख्या में लोगों के लिए होम, ऑटो और एजुकेशन लोन हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। 

1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे नए नियम
RBI का ‘Expected Credit Loss (ECL) Direction-2026’ 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. वर्तमान व्यवस्था में बैंक किसी लोन के एनपीए (Non-Performing Asset) बनने के बाद उसके लिए प्रावधान करते हैं. आमतौर पर ये स्थिति तब आती है, जब ग्राहक 90 दिनों तक किश्त नहीं चुकाता.  नई व्यवस्था में बैंकों को संभावित डिफॉल्ट का अनुमान पहले ही लगाना होगा और उसके हिसाब से अलग से रकम रखनी होगी. यानी लोन डूबने का इंतजार नहीं किया जाएगा और संभावित नुकसान के लिए पहले से तैयारी करनी होगी. जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से बैंकिंग सेक्टर के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है और कुल मिलाकर करीब 42 हजार करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है। 

प्रीमियम ग्राहकों पर रहेगा ज्यादा फोकस
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए नियम लागू होने के बाद बैंक उन ग्राहकों से ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं जिनमें डिफॉल्ट का जोखिम अधिक है. वहीं, बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को ब्याज दरों में रियायत और बेहतर शर्तों पर लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है. इसी वजह से बैंक 730 या उससे ज्यादा CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों पर ज्यादा फोकस करेंगे. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक देश में करीब 7 करोड़ ऐसे ग्राहक हैं जिनका क्रेडिट स्कोर 730 या उससे ज्यादा है। 

बैंक कैसे लगाएंगे भविष्य के जोखिम का अनुमान?
ECL फ्रेमवर्क के तहत बैंक मौजूदा भुगतान स्थिति देखने के साथ कई दूसरे इंडिकेटर्स का भी एनालिसिस करेंगे जिनमें शामिल हैं-
-ग्राहक का भुगतान रिकॉर्ड
-CIBIL स्कोर में बदलाव
-आय में कमी या अस्थिरता
-नौकरी जाने का जोखिम
-लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो 
-मौजूदा कर्ज की स्थिति
इन आंकड़ों के आधार पर बैंक तय करेंगे कि भविष्य में डिफॉल्ट की आशंका कितनी है. 

डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा प्रावधान

नए नियमों के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की स्थिति में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रकम अलग रखनी होगी. उदाहरण के तौर पर, 25 लाख रुपये के होम लोन पर:
– 30 दिन की EMI डिफॉल्ट होने पर अभी करीब 10 हजार रुपये का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 25 हजार रुपये हो जाएगा.
– 31 से 60 दिन तक डिफॉल्ट रहने पर ये रकम 10 हजार रुपये से बढ़कर 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
90 दिन से ज्यादा के डिफॉल्ट की स्थिति में अभी 3.75 लाख रुपये (15%) का प्रावधान करना पड़ता है, जो बढ़कर 5 लाख रुपये हो जाएगा
इससे बैंकों की लागत बढ़ेगी और वे कर्ज देने के दौरान वो ज्यादा सावधानी बरतेंगे. 

आम ग्राहकों पर क्या असर होगा?
जानकारों का मानना है कि ECL फ्रेमवर्क बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने और जोखिम की पहचान पहले करने की दिशा में बड़ा कदम है. हालांकि इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिनका क्रेडिट स्कोर कमजोर है. ऐसे ग्राहकों को समय पर EMI भुगतान, क्रेडिट कार्ड बिल की नियमित अदायगी और कम कर्ज देनदारी बनाए रखने पर ध्यान देना होगा. बेहतर CIBIL स्कोर ही भविष्य में सस्ती ब्याज दर और आसान लोन मंजूरी की सबसे बड़ी कुंजी बन सकता है.  1 अप्रैल 2027 से नियम लागू होने के बाद बैंकों की लोन देने की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां फोकस लोन डिस्ट्रीब्यूशन के साथ ही ग्राहक की क्रेडिट क्वालिटी और जोखिम क्षमता पर रहेगा। 

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