PM आवास का सुनहरा मौका! सरकार ने शुरू किया नया सर्वे, जल्द जारी होगी लाभार्थियों की नई सूची

नई दिल्ली

पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों की पहचान को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास (P&RD) विभाग ने पहली बार सेल्फ-सर्वे सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत पात्र नागरिक खुद अपने घर से आवेदन कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन शिकायतों को कम करना है, जिनमें अक्सर आरोप लगाए जाते थे कि आवास योजना के लाभार्थियों के चयन में पक्षपात, राजनीतिक हस्तक्षेप या गलत जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। अब लाभार्थियों को किसी मध्यस्थ या स्थानीय सिफारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे डिजिटल माध्यम से अपनी पात्रता दर्ज करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

नई व्यवस्था के तहत इच्छुक आवेदकों को अपने मोबाइल फोन में ‘AwaasPlus 2024’ और ‘AadhaarFace RD’ ऐप डाउनलोड करने होंगे। इसके बाद आधार बेस्ड पहचान सत्यापन पूरा कर डिजिटल आवेदन जमा करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार द्वारा नियुक्त सर्वेक्षक संबंधित परिवार के घर पहुंचकर दी गई जानकारी की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि आवेदक योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं। इस प्रक्रिया के जरिए सरकार फर्जी दावों को रोकने और सही लाभार्थियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। खास बात यह है कि यह मॉडल पहले से कई राज्यों में लागू है और अब पश्चिम बंगाल ने भी इसे अपनाने का फैसला किया है।

सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि तकनीकी जानकारी या स्मार्टफोन की कमी के कारण कोई पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रह जाए। ऐसे लोगों के लिए डोर-टू-डोर सर्वे की व्यवस्था की गई है। सर्वेक्षक गांव-गांव जाकर उन परिवारों की जानकारी एकत्र करेंगे, जो स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवार केवल तकनीकी बाधाओं के कारण लाभ से वंचित न हों। सरकार का दावा है कि इस पहल से आवास योजना का दायरा और अधिक व्यापक तथा समावेशी बनेगा।

लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली भी लागू की है। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सर्वे किए गए कम से कम 10% परिवारों का दोबारा सत्यापन ब्लॉक या सब-डिवीजन स्तर के अधिकारियों से कराया जाए। इसके अलावा ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वतंत्र रूप से 5% मामलों की जांच करेंगे, जबकि जिला स्तर के अधिकारी 2% आवेदनों का प्रत्यक्ष सत्यापन करेंगे। इस बहु-स्तरीय जांच व्यवस्था का मकसद किसी भी तरह की गड़बड़ी, त्रुटि या गलत चयन को रोकना है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में सर्वे टीमों का गठन कर दिया गया है और लाभार्थियों की पहचान का काम शुरू हो चुका है। यह सर्वेक्षण 20 जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि नई सेल्फ-सर्वे प्रणाली से सही लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, शिकायतें कम होंगी और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचेगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह कदम ग्रामीण आवास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

PoK में मुनीर की कार्रवाई पर भारत का तीखा प्रहार, बोला- पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जाए

 नई दिल्ली

भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन से ध्यान हटाने के लिए फ़ेक न्यूज़ और गलत जानकारी फैला रहा है. रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के कुछ दिनों बाद भी वहां तनाव बना हुआ है। 

इस इलाके से आ रही खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने ‘पाकिस्तान से आने वाली फ़ेक न्यूज़ और वीडियो का एक पैटर्न’ देखा है और इसे अपनी नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश बताया है। 

जायसवाल ने कहा, “इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान से आने वाली फ़ेक न्यूज़ और वीडियो का एक पैटर्न देख रहे हैं. यह पाकिस्तान की अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान हटाने की एक हताश कोशिश है। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की कथित बर्बरता की खबरों का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान कई प्रदर्शनकारी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। 

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पुलिस की गंभीर बर्बरता की खबरें हैं. हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों और ज्यादतियों के लिए जवाबदेह ठहराएगा। 

ये बयान रावलकोट में पाकिस्तानी बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के कुछ दिनों बाद आए हैं, जिसमें कथित तौर पर कम से कम 27 लोग मारे गए. जहां आधिकारिक आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 27 बताई गई है, वहीं सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो में दावा किया गया है कि हताहतों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। 

यह इलाका तनावपूर्ण बना हुआ है क्योंकि प्रदर्शनकारी समूह पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ़ लामबंद हो रहे हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे PoK में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तावित ‘लॉन्ग मार्च’ को रोक देंगे, जबकि आयोजकों ने प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया है। 

ओमान से गुजरात तक बिछेगी गैस पाइपलाइन, होर्मुज पर निर्भरता घटाने की भारत की बड़ी तैयारी

अहमदाबाद 

वेस्‍ट एशिया में तनाव के बीच एनर्जी संकट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है. खासकर भारत जैसे देश, जो मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई रुकने के बाद सबसे ज्‍यादा प्रभातिव हुए है. इसी के मद्देनजर, भारत तेजी से अपने एनर्जी सप्‍लाई को निर्बाध करने में जुटा हुआ है. अब ओमान से गुजरात के बीच एक लंबी पाइपलाइन बिछने जा रही है। 

यह अरब सागर के पार लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी एक गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन होगी. यह ओमान और गुजरात को जोड़ने की लंबे समय से चर्चित योजना है, क्योंकि भारत तेजी से अनिश्चित भू-राजनीतिक तना के बीच अधिक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। 

पिछले तीन दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गई है, लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यावसायिक  दिक्‍कतों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई. अब, इस प्रस्ताव को सपोर्ट करने वाले प्राइवेट ग्रुप SAGE द्वारा मार्ग और इसकी इंजीनियरिंग चुनौतियों का वैल्‍यूवेशन करने के लिए समुद्र तल सर्वे के साथ-साथ तकनीकी और वित्तीय अध्ययन पूरा करने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली है।  

कितना आएगा खर्च? 
अनुमान है कि इस प्रोजेक्‍ट के तहत करीब  40,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन, अब तक के सबसे गहरे समुद्री मार्गों में से एक होगी. यह नेचुरल गैस की निर्बाध सप्‍लाई करेगी. अगर ये पाइपलाइन बन जाती है, तो इससे खाड़ी देशों और भारत के बीच एक सीधा ऊर्जा गलियारा स्थापित हो सकता है, जिससे देश की होर्मुज जलडमरूमध्‍य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो जाएगी। 

यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत आयातित ऊर्जा पर काफी हद तक निर्भर है. देश अपनी ज्‍यादातर कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है और प्राकृतिक गैस, विशेष रूप से एलएनजी की विदेशी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है. इन आयातों का एक बड़ा हिस्‍सदा खाड़ी देशों से आता है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे मार्ग, होर्मुज के माध्‍यम से भारत पहुंचता है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट ग्‍लोबल मार्केट्स पर तुरंत असर डाल सकता है. इससे शिपिंग कॉस्‍ट, ईंधनी की कीमतें और आप‍ूर्ति चेन प्रभावित हो सकती हैं। 

कैसी दिखेगी ये पाइपलाइन? 
प्रस्‍तावित प्रोजेक्‍ट, अरब सागर में फैले एक पानी के नीचे के नेटवर्क के माध्‍यम से ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी. इसकी सबसे खास बात, इसकी गहराई है. मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक नीचे होने की संभावना है, जिससे यह अब तक प्रस्तावित सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी. इतनी गहराई ज्‍यादातर अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में पाई जाने वाली गहराइयों से कहीं अधिक है और इसके लिए अत्यधिक विशेष इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होगी। 

गैस आने में कितना होगा खर्च? 
इस पाइपलाइन के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के तहत प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से भारत को अपने ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने में मदद मिलेगी. साथ ही ओमान को एक स्थिर निर्यात बाजार भी मिलेगा. परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, परिवहन लागत 2-2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के बीच हो सकती है. हालांकि अंतिम लागत फंडिंग व्यवस्था, निर्माण व्यय और भविष्य में गैस की कीमतों पर निर्भर करेगी। 

जोजिला सुरंग में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, फाइनल ब्रेकथ्रू पूरा; लद्दाख-श्रीनगर कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

 श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली ‘जोजिला सुरंग’ का अंतिम ‘ब्रेकथ्रू’ आज पूरा हो गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। 

इस कामयाबी के साथ ही कश्मीर और लद्दाख के बीच ऑल-वेदर रास्ता बनने का सालों पुराना सपना हकीकत के बेहद करीब पहुंच गया है. इस मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एलजी मनोज सिन्हा ने खुशी जाहिर की. वहीं, नितिन गडकरी ने भी इस टनल की अहमियत बताई। 

एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, ‘ये एक ऐतिहासिक तारीख है कि आज लद्दाख के लोगों को ऑल वेदर कनेक्टिविटी के लिए अंतिम चरण के पड़ाव को मंत्री जी (नितिन गडकरी) ने पूरा किया. मैं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिल से बधाई देता हूं। 

मनोज सिन्हा ने इंजीनियरों को दी बधाई
सिन्हा ने सुरंग के निर्माण में जुटे कार्यबलों की तारीफ करते हुए आगे कहा, ‘मैं इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले सभी इंजीनियरों को बधाई देता हूं, जिन्होंने इतनी ऊंचाई पर मुश्किल परिस्थितियों में काम किया है. हम सभी जानते हैं कि कनेक्टिविटी से ही विकास होता है. पिछले 12 सालों में इस क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। 

एशिया ही नहीं, दुनिया के इतिहास में नंबर-1 बनेगी ये टनल- गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस ब्रेकथ्रू को भारतीय इंजीनियरिंग के इतिहास का एक सुनहरा पन्ना बताया. उन्होंने कहा, ‘आज का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास का सुनहरा दिन है. क्योंकि ये टनल 14 किलोमीटर लंबी है और स्टेट ऑफ आर्ट है. मुझे अभी बताया गया कि अब तक हम इसे एशिया का सबसे लंबा टनल कह रहे थे. लेकिन ये वर्ल्ड के इतिहास में भी नंबर 1 पर जाएगा, ये जानकर मुझे बहुत खुशी है. ये लेह और लद्दाख के लोगों के लिए लाइफलाइन है। 

कंपाने वाली ठंड में इंजीनियर्स और मजदूरों ने किया कमाल
केंद्रीय मंत्री ने सुरंग बनाने के दौरान आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों और टीम की कड़ी मेहनत को भी सराहा. उन्होंने बताया, ‘यहां की ऊंचाई लगभग 3 हजार मीटर है. जब काम हो रहा था, तो यहां -4 डिग्री या उससे भी कम तापमान के हालात थे. ऐसी कड़ाके की ठंड में हमारे इंजीनियर्स, मजदूर, ठेकेदारों और डॉक्टर्स ने बहुत मेहनत से काम किया है। 

गडकरी ने आहे बताया कि ये टनल वर्ल्ड क्लास सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिहाज से बनाई गई है और इससे लद्दाख-लेह को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिलेगी। 

जोजिला सुरंग की अहमियत
इस अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ ही पहाड़ के दोनों छोर अब आपस में पूरी तरह मिल गए हैं. अब सुरंग के अंदर सड़क बनाने, लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को लगाने का काम तेजी से पूरा हो पाएगा. इस सुरंग के पूरी तरह चालू होने से सर्दियों में लद्दाख का देश से संपर्क कटना हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। 

महाराष्ट्र में मानसून का तांडव, 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; यूपी-बिहार को भी मिलेगी राहत

नई दिल्ली

देश में मौसम का रुख एक बार फिर पूरी तरह बदल चुका है. केरल में दस्तक देने के बाद मानसून ने महाराष्ट्र में अपनी मजबूत एंट्री कर ली है. यह एंट्री भले ही तय समय के आसपास हुई हो, लेकिन इसके असर ने पूरे देश को अलर्ट मोड पर ला दिया है. एक तरफ जहां किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों में मौसम विभाग की चेतावनियों ने चिंता बढ़ा दी है। 

IMD के ताजा अपडेट के मुताबिक आने वाले दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और कई राज्यों को अपनी चपेट में लेगा. अरब सागर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक मौसम प्रणाली सक्रिय हो चुकी है, जिसका सीधा असर उत्तर, पूर्व और दक्षिण भारत में देखने को मिलेगा। 

अल-नीनो की परिस्थितियों के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मूसलाधार बारिश करवाता हुआ तेजी से आगे बढ़ रहा है। मॉनसून अब महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को कवर कर चुका है। मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाले सात दिन कई राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, मेघालय और पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं IMD ने उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पश्चिमी विक्षोभ के असर और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 11 से 12 जून तक उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।

इन राज्यों में होने वाली है मॉनसून की एंट्री
मॉनसून अब तेजी से आगे बढ़ते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों के बचे हुए हिस्से को कवर करने वाला है। वहीं दो से तीन दिन में ही यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल को भी पूरी तरह से कवर कर लेगा। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर करेगा। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी मॉनसून पहुंच चुका है और झमाझम बारिश हो रही है।

पश्चिमी विक्षोभ कराएगा बारिश
मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी इलाके में सक्रिय होने वाला पश्चिमी विक्षोभ अगले तीन से चार दिन में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश करवाने वाला है। इन राज्यों में 9 से 14 जून तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा 10 से 14 जून के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी राजस्थान में भी बारिश हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान में 11 और 12 जून को तेज हवाओँ के साथ बारिश हो सकती है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 11 और 12 जून को धूलभरी आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक हवाओँ की गति 50 से 60 किमी प्रतिघंटे तक पहुंचने की संभावना है।

यूपी-बिहार का मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 14 जून के बीच उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर शुरू होगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 9 से 14 जून के बीच मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। 10 जून के बाद बिहार के पटना, सिवान, भागलपुर, मुंगेर जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। झारखंड, बिहार और गंगा के आसपास के क्षेत्रों में 10 से 15 जून के बीच आंधी के साथ तेज बारिश की संभावना है।

दिल्ली का मौसम
आईएमडी के अनुसार, हालांकि बारिश से कुछ स्थानों पर थोड़ी राहत मिली। सुबह साढ़े आठ बजे तक 24 घंटे की कुल वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, केवल पालम और आयानगर में हल्की बारिश हुई लेकिन सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे के बीच किसी भी वेधशाला में बारिश दर्ज नहीं की गई। आईएमडी के अनुसार, 10 जून तक अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़कर 43 डिग्री तक पहुंच सकता है, और उसके बाद 11 जून से आंधी की वजह से तापमान में गिरावट आ सकती है।

देशभर में मौसम का सिस्टम एक्टिव, तेज हवाओं और बारिश का खतरा
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में कई चक्रवाती परिसंचरण अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं. यही वजह है कि मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर हो गया है. कहीं तेज धूप के बाद अचानक बारिश हो रही है तो कहीं आंधी-तूफान ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 

    अगले 2 से 3 दिनों में मानसून के और आगे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद यह छत्तीसगढ़, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक पहुंच सकता है.हवाओं की गति कई जगहों पर 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। 

दिल्ली-NCR में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर
दिल्ली-NCR में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है. 7 जून को आंशिक बादल छाए रहने के साथ तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है. अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रह सकता है, लेकिन आंधी और बारिश के चलते शाम तक राहत मिल सकती है. मौसम विभाग ने यहां 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है. कई इलाकों में अचानक मौसम बिगड़ सकता है, जिससे यातायात और जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। 

उत्तर प्रदेश में मौसम का बदलता रुख और आंधी-तूफान का अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मौसम अगले कुछ दिनों तक काफी सक्रिय रहने वाला है. पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में रुक-रुककर बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी. 9 से 12 जून के बीच कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है. IMD ने राज्य के कई जिलों में 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी दी है. लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में मौसम अचानक बदल सकता है. गर्मी और उमस के बीच यह बारिश कुछ राहत भी दे सकती है, लेकिन बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। 

बिहार में मौसम का मिजाज और बारिश की गतिविधियां
बिहार में 7 और 8 जून को मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है. कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है. पटना, गया, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में तेज हवाएं चलने की संभावना है. 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में नुकसान की आशंका है. हालांकि बारिश के कारण गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी। 

झारखंड में मौसम का बदलाव और तेज हवाओं का असर
झारखंड में भी मौसम पूरी तरह बदल चुका है. रांची, धनबाद, बोकारो और दुमका जैसे जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। 

मध्‍य प्रदेश में प्री मानसून के दौर में बारिश शुरू हो गई है.

पश्चिम बंगाल में मौसम का असर और भारी बारिश की चेतावनी

पश्चिम बंगाल में भी मौसम ने रफ्तार पकड़ ली है. कई जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. हावड़ा, कोलकाता, नादिया और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है. 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। 

राजस्थान में मौसम का बदलाव और गर्मी से राहत की स्थिति
राजस्थान में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं. कई जिलों में आंधी और बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है. हालांकि मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 8 जून के बाद पश्चिमी राजस्थान में फिर से भीषण गर्मी और लू लौट सकती है। 

मध्य प्रदेश में मौसम का उतार-चढ़ाव और तेज हवाएं
मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, विदिशा और खंडवा जैसे जिलों में बारिश और आंधी का अलर्ट है. यहां 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे कई इलाकों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। 

पंजाब-हरियाणा में मौसम का बदलाव और बारिश की संभावना
    पंजाब और हरियाणा में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक काफी अस्थिर बना रह सकता है. मौसम विभाग के अनुसार दोनों राज्यों के कई हिस्सों में तेज बारिश, गरज-चमक और आंधी-तूफान की स्थिति देखने को मिल सकती है. पटियाला, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में अचानक मौसम बदलने की संभावना जताई गई है. कई इलाकों में बादल घिरने के साथ ही तेज बारिश शुरू हो सकती है, जिससे दिन के तापमान में गिरावट भी दर्ज की जाएगी। 

    यहां 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि गतिविधियां और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है. खेतों में खड़ी फसलें, खासकर धान और सब्जियों की फसल, तेज हवा और बारिश से नुकसान की चपेट में आ सकती हैं. मौसम विभाग ने लोगों को खुले इलाकों में सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। 

उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में मौसम का पहाड़ी असर
    पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज इस समय काफी चुनौतीपूर्ण और अस्थिर बना हुआ है. उत्तराखंड के नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे कई जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. लगातार बारिश के कारण कई संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बना हुआ है। 

    हिमाचल प्रदेश में शिमला, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और सोलन जैसे क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है. यहां मौसम में अचानक बदलाव के कारण तापमान। 

उज्ज्वला योजना के नियमों में बड़ा बदलाव, 10 करोड़ परिवारों पर पड़ेगा असर; LPG को लेकर सरकार का नया फैसला

  नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को बड़ा झटका (PM Ujjwala Yojna Rule Change) देते हुए सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की संख्या में बड़ी कटौती की है. देश में हाल ही में तेल वितरण कंपनियों द्वारा 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद, अब सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। 

उज्ज्वला योजना के नियमों में बदलाव के बाद अब PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर सब्सिडी मिलती थी। 

2016 से अब तक 10.5 करोड़ कनेक्शन 
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई थी. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, PMUY के जरिए खाना पकाने के लिए साफ-सुथरा ईंधन लाखों घरों तक पहुंचा है, जिससे महिलाओं को सशक्त बनाने और भारतीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार में मदद मिली. इस योजना का जरूरतमंदों को पूरा फायदा पहुंचा. इस सरकारी स्कीम की शुरुआत के बाद से अब तक गरीब परिवारों की महिलाओं को 10.5 करोड़ से ज्यादा मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। 

सरकार देती ही 300 रुपये सब्सिडी
उज्ज्वला योजना की शुरुआत के बाद सरकार ने एलपीजी को किफायती बनाए रखने के लिए मई 2022 में इस 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी देने की शुरुआत की थी और इसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया था, जो लगातार लाभार्थियों को मिल रही हैं और LPG Subsidy का ये पैसा हर रिफिल के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा किया जाता है. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं। 

घाटे के बाद भी सब्सिडी राहत जारी
मिडिल ईस्ट टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट के बीच सरकारी तेल विपणन कंपनियां हर घरेलू गैस सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं. इस बीच सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी भी की गई, लेकिन सरकार ने 300 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी देना जारी रखा है, जो उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत है. जहां आम ग्राहकों के लिए 14.2 किलो वाला सिलेंडर 942 रुपये का है, तो वहीं सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना में पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होता है। 

12 से 9 और अब सिर्फ 4 सिलेंडर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत शुरुआत में लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती सिलेंडर दिए जाते थे, जिनकी संख्या बीते साल घटाकर 9 कर दी गई थी और अब बड़ा फैसला लेते हुए इसे चार एलपीजी सिलेंडर तक सीमित कर दिया गया है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से इस कदम को वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाने वाला बताया गया है। 

लाभार्थियों को कितना घाटा? 
तेल मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा के मुताबिक, संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है. हालांकि, प्रति रिफिल सब्सिडी की राशि अपरिवर्तित रखी गई है. ताजा बदलाव के बाद प्रति लाभार्थी वार्षिक सहायता की अधिकतम सीमा 1,200 रुपये हो गई है. लाभार्थियों पर असर की बात करें, तो अब तक 300 रुपये की सब्सिडी के साथ 9 एलपीजी सिलेंडर पर उन्हें सालाना 2700 रुपये की मदद मिलती थी, लेकिन अब इसमें एक झटके में 1500 रुपये की कमी कर दी गई है। 

सरकार की ओर से ग्लोबल एलपीजी प्राइस हाइक का हवाला देते हुए LPG Cylinder Price Hike और उज्ज्वला योजना के तहत रियायती सिलेंडरों की संख्या में कटौती के फैसले का बचाव किया है. बयान में कहा गया कि संशोधित सब्सिडी स्ट्रक्चर से सरकार पर वित्तीय बोझ कम करने में मददगार होगा, साथ ही खाना पकाने के लिए एलपीजी पर निर्भर परिवारों को सहायता मिलती रहेगी। 

मोदी सरकार के 12 साल पूरे, PM मोदी ने तोड़ा नेहरू का रिकॉर्ड; 22 राज्यों में NDA का शासन

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर बने रहने के नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. वो देश के सबसे लंबे कार्यकाल तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं. 9 जून 2024 को ही उन्होंने एनडीए के तीसरे कार्यकाल में पीएम पद की शपथ ली थी और उनके सत्ता में रहने के 12 साल भी आज पूरे हो रहे हैं. पीएम मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और आज 9 जून 2026 तक उनके कार्यकाल के 4398 दिन पूरे हो गए हैं. अब वो सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। 

एनडीए 10 जून को दिखाएगा ताकत 
एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की 10 जून को बैठक होगी और इसमें एकजुटता के साथ शक्ति प्रदर्शन होगा.आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू रखेंगे प्रस्ताव. अन्य सहयोगी दलों के नेता प्रस्ताव का करेंगे समर्थन. प्रस्ताव में बतौर प्रधानमंत्री पिछले बारह साल की उपलब्धियों का ज़िक्र किया जाएगा। 

पंडित नेहरू का 12 साल का रिकॉर्ड
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 13 मई 1952 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. नेहरू लगातार 4397 दिन यानी 12 साल 14 दिन तक प्रधानमंत्री रहे थे. पीएम मोदी ने 9 जून को सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री का नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया. निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने 4398 दिन यानी 12 साल 15 दिन पूरे कर लिए हैं. नेहरू हालांकि 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री बने थे लेकिन 1952 में लोकसभा चुनाव के पहले तक वो पांच साल अंतरिम सरकार के प्रमुख थे. नेहरू तब तक चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री नहीं बने थे। 

मोदी सरकार के 12 वर्ष और 22 राज्यों में NDA शासन

संगठनात्मक विस्तार पर चर्चा
भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बैठक दोपहर में शुरू हुई. शाम देर तक चली. उन्होंने बताया कि यह बैठक पीएम मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल की सफलताओं और एनडीए के 22 राज्यों में शासन को रेखांकित करने के लिए बुलाई गई थी, जो संगठन के व्यापक विस्तार का प्रतीक है।

युवा, महिला और वंचित वर्गों पर फोकस
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि नितिन नबिन की अध्यक्षता में हुई भाजपा की बैठक में संगठनात्मक विस्तार, युवाओं को जोड़ने, महिलाओं के सशक्तिकरण और एससी/एसटी समुदायों के विकास पर चर्चा हुई. बैठक में पार्टी के संगठन को मजबूत करने, युवा वर्ग को मुख्यधारा में लाने, महिला सशक्तिकरण और अनुसूचित जाति/जनजाति के उत्थान जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया। 

आगामी चुनावों की रणनीति
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में 26 मई 2026 तक मोदी सरकार के 12 वर्षों के उपलक्ष्य में जन-संपर्क अभियान तेज करने और आगामी विधानसभा व राज्यसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने पर मंथन हुआ. संगठनात्मक समन्वय बढ़ाने के लिए 10 जून को एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की एक हाई-प्रोफाइल बैठक प्रस्तावित है, जिसमें भावी राजनीतिक एजेंडे पर चर्चा होगी। 

नेहरू 1947 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद  पर रहे. ऐसे में नेहरू का पूरा टाइम तो 6130 दिन होता है. लेकिन इसमें से करीब 5 साल वो अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर प्रधानमंत्री रहे. पीएम मोदी ने 25 जुलाई 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लगातार 4077 दिनों के प्रधानमंत्री के लंबे कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। 

शासन में सबसे लंबे वक्त का रिकॉर्ड
पीएम मोदी ने मार्च 2026 में एक बड़ा इतिहास बनाया था. गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री रहने के दोनों कार्यकालों को मिला दें तो वह 8931 दिनों से अधिक समय तक सत्ता में रहने वाले भारत के पहले नेता बन गए थे. उन्होंने तब सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग (8930 दिन) के रिकॉर्ड को तोड़ा था। 

सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री
पीएम मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी हैं. वो गैर कांग्रेसी सरकार के ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने लगातार दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार चलाई और अब तीसरी बार एनडीए सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। 

लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले दूसरे प्रधानमंत्री
पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद 2024 में नरेंद्र मोदी देश के दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री बने थे, जिन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में अपने नेतृत्व में गठबंधन या पार्टी को जीत दिलाकर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. वो भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म देश की आजादी के बाद (17 सितंबर 1950) हुआ. इस तरह वो आजाद भारत में जन्मे पहले पीएम है. उनसे पहले के सभी प्रधानमंत्री 1947 से पहले जन्मे थे। 

मोदी सरकार में लोगों को मिले कौन-कौन से लाभ?
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा अंत्योदय से प्रेरित रही है और उसका प्रयास हमेशा यह सुनिश्चित करना रहा है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचें जो दशकों से पीछे छूट गए हैं।

पीएम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह खुशी की बात है कि गरीबों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में प्रौद्योगिकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पीएम मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहायता सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंच रही है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, कार्यकुशलता बढ़ी है और शासन में विश्वास मजबूत हुआ है।

इसी तरह गरीब कल्याण को आगे बढ़ाने का सफर मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के हमारे सपने को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन बन गया है।

केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं से लोगों को वित्तीय सुरक्षा मिली: शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास और जन-धन जैसी केंद्रीय योजनाओं ने करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सुविधाओं और वित्तीय सुरक्षा से जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दूसरे वर्ष के समापन पर एक संदेश में शाह ने कहा कि गरीब कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अमित शाह ने कहा कि सरकार ने अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास, जन-धन, मुद्रा ऋण और प्रधानमंत्री स्वनिधि जैसी कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सुविधाओं, वित्तीय सुरक्षा और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा है।

UNSC में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, बोला- ‘यह पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण’

 नई दिल्ली

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा हुई. चर्चा के दौरान भारत ने पाकिस्तान को जमकर घेरा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए अफगानिस्तान में घुसकर किए गए उसके हमले को नरसंहार करार दिया. भारत के प्रतिनिधि ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन किया है। 

भारत ने यूएनएससी में कहा है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में घुसकर हमले किए, जिसमें आम नागरिक मारे गए. पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की हत्या कर रहा है. यूएनएससी में भारत के प्रतिनिधि ने इसे पाखंड का सबसे बड़ा उदाहरण बताया और कहा कि नरसंहार करने वाला उसे सैन्य कार्रवाई का नाम दे दे, तो ऐसा करने वाला उस पाप से मुक्त नहीं हो जाता। 

यूएनएससी में भारत के प्रतिनिधि ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 372 आम नागरिक वहां मारे जा चुके हैं. अधिकतर लोग रमजान के पाक महीने में मारे गए थे. उन्होंने अफगानिस्तान के लैंडलॉक देश होने का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि पाकिस्तान उसके व्यापार मार्गों में भी बाधाएं डाल रहा है। 

पी हरीश ने यूएनएससी में कहा कि अफगानिस्तान के सामान पर प्रतिबंध लगाकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन किया है. उन्होंने भारत की ओर से अफगानिस्तान की मदद के लिए उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया और कहा कि साल 2021 के बाद 50 हजार टन गेहूं, 420 टन दवाएं और वैक्सीन, 40 हजार लीटर कीटनाशक वहां भेजे जा चुके  हैं। 

यूएनएससी में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि इस साल अप्रैल महीने में ही बाढ़ राहत के लिए जरूरी सामान और वैक्सीन की खेप काबुल भेजी गई थी. नई दिल्ली ने मानवीय सहायता के साथ ही अफगानिस्तान में सभी 34 प्रदेश के विकास के लिए भी बहुत मदद दी है. अफगानिस्तान में भारत की करीब 500 से ज्यादा परियोजनाएं चल रही हैं. पक्तिका, पक्तिया और खोस्त में मैटरनिटी क्लीनिक का निर्माण भारत ने कराया है। 

पी हरीश ने कहा कि काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ का अपग्रेडेशन कराने के साथ ही ट्रॉमा सेंटर, ऑन्कोलॉजी सेंटर और 30 बेड के अस्पताल का निर्माण भारत ने कराया है. उन्होंने कहा कि भारत द्विपक्षीय श्रृंखला के लिए अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम की मेजबानी कर रहा है. पी हरीश ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हम मानते हैं कि अफगान भाई-बहन इससे बेहतर के हकदार हैं। 

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध खराब चरित्र का प्रमाण नहीं

हैदराबाद

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में कहा है कि आपसी सहमति से दो अविवाहित व्यस्कों के बीच बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के खराब चरित्र का प्रमाण नहीं हो सकता है. न्यायाधीश मनमोहन और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयन एक आपराधिक मामले की वजह से रद्द कर दिया गया था। 

इस उम्मीदवार पर शादी का झांसा देकर रेप का आरोप लगा था, जो बाद में अदालत के बाहर सुलझ गया था. लेकिन तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उस आरोप को देखते हुए खराब चरित्र का आधार देकर उम्मीदवार की भर्ती को रोक दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध अपने आप में किसी व्यक्ति के चरित्र के खराब होने का आधार नहीं हो सकता है और न ही ऐसा होना चाहिए. ऐसा कोई कानून नहीं है जो सहमति से बने दो अविवाहित वयस्कों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो। 

उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी
इस मामले में उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवार की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया और तेलंगाना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें बोर्ड को पुलिस कांस्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था. तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उनके खिलाफ 2014 में दर्ज विवाह का वादा करके बलात्कार का मामला दर्ज कराया गया था। 

हर संबंध शादी में तबदील नहीं होता है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस उम्मीदवार का अपनी पड़ोसी के महिला के साथ संबंध था. आरोप लगने के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो गया था. साल 2015 में लोक अदालत में इसका निपटारा भी हो गया था. आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था. ऐसे में उस आधार पर उम्मीदवार को भर्ती न करने का फैसला सही नहीं है। 

कोर्ट ने कहा “हर रिश्ता शादी में तब्दील नहीं होता है. इसलिए, केवल इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है. इस आधार पर यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उस व्यक्ति का चरित्र खराब था। 

भारत ने बढ़ाई परमाणु ताकत! 190 तक पहुंचा न्यूक्लियर हथियारों का जखीरा, पाकिस्तान को लेकर भी बड़ा खुलासा

नई दिल्ली

वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महाशक्तियों के बीच अविश्वास के माहौल के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बेहद चौंकाने वाली और रिपोर्ट सामने आई है. रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) ने अपनी सालाना ‘सिपरी ईयरबुक 2026’ जारी कर दी है. परमाणु हथियारों की संख्या और उनके प्रभाव को कम करने के लिए दशकों से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब पूरी तरह से उल्टे होते दिख रहे हैं। 

दुनिया के कई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बार फिर परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. उनका मॉडर्न कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर परमाणु युद्ध या किसी गलतफहमी के कारण होने वाले परमाणु एस्केलेशन का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। 

इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भारत ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. भारत का परमाणु हथियार भंडार साल 2025 के 180 वॉरहेड्स से बढ़कर साल 2026 में 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है। 

इस बढ़ोतरी के साथ ही भारत रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है, जिसकी परमाणु क्षमता इस दौरान बिना किसी बदलाव के 170 वॉरहेड्स पर ही रुकी हुई है. सिपरी की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत तेजी से और बहुत ही परिपक्वता के साथ अपनी रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। 

भारत की छलांग और पाकिस्तान की स्थिरता
भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु बलों और मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में भारत अब स्पष्ट बढ़त बना चुका है. जहां भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं. वहीं पाकिस्तान के पास केवल 170 वॉरहेड्स हैं. रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऑपरेशनल शिफ्ट का जिक्र किया गया है। 

भारत और चीन जैसे उभरते हुए परमाणु संपन्न देश अब शांति काल के दौरान भी अपनी मिसाइलों पर छोटी संख्या में परमाणु वॉरहेड तैनात कर सकते हैं. यह भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस में आए एक बड़े बदलाव को दर्शाता है. भारत अब किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में बेहद कम समय में जवाबी कार्रवाई करने के लिए खुद को तैयार कर चुका है. हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए टकरावों ने परमाणु प्रतिरोध और संकट की स्थिति में स्थिरता से जुड़े पुराने सिद्धांतों को कड़ी चुनौती दी है, जिसके कारण दोनों ही देश सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं। 

मामूली गिरावट के बीच आधुनिकीकरण की आंधी
यदि हम पूरी दुनिया के स्तर पर देखें, तो सिपरी का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12187 वॉरहेड्स था. अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी 2025 से की जाए, तो तब यह संख्या 12241 थी. कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है। 

देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं. नए, अधिक घातक परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह ट्रेंड पूरी तरह पलट सकता है और कुल संख्या फिर से बढ़ सकती है। 

इस समय दुनिया भर के कुल 12,187 परमाणु हथियारों में से लगभग 9,745 वॉरहेड्स को सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है. इनमें से लगभग 4,012 वॉरहेड्स को मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा चुका है। 

सबसे डराने वाली बात यह है कि दुनिया भर में करीब 2,100 से 2,200 परमाणु वॉरहेड्स को ‘हाई ऑपरेशनल अलर्ट’ पर रखा गया है, यानी ये वो हथियार हैं जिन्हें महज कुछ ही मिनटों के आदेश पर दागा जा सकता है. इस श्रेणी में सबसे ज्यादा हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं। 

कौन सा देश है किस पायदान पर?  
परमाणु हथियारों की होड़ में आज भी शीतयुद्ध के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी यानी रूस और अमेरिका ही सबसे आगे खड़े हैं. वैश्विक स्तर पर इन दोनों देशों का ही दबदबा है…

    रूस: रूस इस समय दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना हुआ है, जिसके पास कुल 5420 वॉरहेड्स का विशाल भंडार है। 

    अमेरिका: अमेरिका इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसके पास वर्तमान में 5,042 वारहेड्स मौजूद हैं। 
    चीन: भारत का पड़ोसी देश चीन भी अपने परमाणु बेड़े को बहुत आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है. चीन का परमाणु भंडार 600 से बढ़कर 620 वॉरहेड्स हो गया है। 

    फ्रांस: इस साल की रिपोर्ट में फ्रांस ने सबको चौंकाया है. फ्रांस ने अपने भंडार में सबसे तेज बढ़ोतरी करते हुए इसे 290 से सीधे 370 वॉरहेड्स तक पहुंचा दिया है। 

    ब्रिटेन: यूनाइटेड किंगडम (UK) ने अपनी रणनीतिक क्षमता को स्थिर रखा है. उसके पास वर्तमान में 225 वॉरहेड्स हैं। 

    इजरायल: मिडिल ईस्ट में जारी भारी युद्ध और तनाव के बावजूद इजरायल का अनुमानित परमाणु भंडार बिना किसी बदलाव के 90 वॉरहेड्स पर ही बना हुआ है। 

    उत्तर कोरिया: अपनी सनकी मिसाइल नीतियों के लिए जाना जाने वाला उत्तर कोरिया भी लगातार घातक हथियार बना रहा है. उसका भंडार 50 से बढ़कर 60 वॉरहेड्स हो गया है। 

दुनिया के ये सभी नौ देश (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल) अपने परमाणु शस्त्रागार को नया रूप दे रहे हैं. कई नई परमाणु-सक्षम प्रणालियों को सेना में शामिल कर रहे हैं। 

सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के उपकरण के रूप में परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है. सैन्य प्रौद्योगिकी में नए विकास, वैश्विक स्तर पर हथियारों के नियंत्रण के समझौतों का कमजोर होना और महाशक्तियों के बीच बढ़ती राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता ने दुनिया को एक बेहद खतरनाक चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। 

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