भारत ने बढ़ाई परमाणु ताकत! 190 तक पहुंचा न्यूक्लियर हथियारों का जखीरा, पाकिस्तान को लेकर भी बड़ा खुलासा

नई दिल्ली

वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महाशक्तियों के बीच अविश्वास के माहौल के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बेहद चौंकाने वाली और रिपोर्ट सामने आई है. रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाली प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) ने अपनी सालाना ‘सिपरी ईयरबुक 2026’ जारी कर दी है. परमाणु हथियारों की संख्या और उनके प्रभाव को कम करने के लिए दशकों से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब पूरी तरह से उल्टे होते दिख रहे हैं। 

दुनिया के कई देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बार फिर परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं. उनका मॉडर्न कर रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर परमाणु युद्ध या किसी गलतफहमी के कारण होने वाले परमाणु एस्केलेशन का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। 

इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से भारत ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. भारत का परमाणु हथियार भंडार साल 2025 के 180 वॉरहेड्स से बढ़कर साल 2026 में 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है। 

इस बढ़ोतरी के साथ ही भारत रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है, जिसकी परमाणु क्षमता इस दौरान बिना किसी बदलाव के 170 वॉरहेड्स पर ही रुकी हुई है. सिपरी की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत तेजी से और बहुत ही परिपक्वता के साथ अपनी रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। 

भारत की छलांग और पाकिस्तान की स्थिरता
भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु बलों और मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में भारत अब स्पष्ट बढ़त बना चुका है. जहां भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं. वहीं पाकिस्तान के पास केवल 170 वॉरहेड्स हैं. रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऑपरेशनल शिफ्ट का जिक्र किया गया है। 

भारत और चीन जैसे उभरते हुए परमाणु संपन्न देश अब शांति काल के दौरान भी अपनी मिसाइलों पर छोटी संख्या में परमाणु वॉरहेड तैनात कर सकते हैं. यह भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस में आए एक बड़े बदलाव को दर्शाता है. भारत अब किसी भी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में बेहद कम समय में जवाबी कार्रवाई करने के लिए खुद को तैयार कर चुका है. हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए टकरावों ने परमाणु प्रतिरोध और संकट की स्थिति में स्थिरता से जुड़े पुराने सिद्धांतों को कड़ी चुनौती दी है, जिसके कारण दोनों ही देश सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर हैं। 

मामूली गिरावट के बीच आधुनिकीकरण की आंधी
यदि हम पूरी दुनिया के स्तर पर देखें, तो सिपरी का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12187 वॉरहेड्स था. अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी 2025 से की जाए, तो तब यह संख्या 12241 थी. कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है। 

देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं. नए, अधिक घातक परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह ट्रेंड पूरी तरह पलट सकता है और कुल संख्या फिर से बढ़ सकती है। 

इस समय दुनिया भर के कुल 12,187 परमाणु हथियारों में से लगभग 9,745 वॉरहेड्स को सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है. इनमें से लगभग 4,012 वॉरहेड्स को मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा चुका है। 

सबसे डराने वाली बात यह है कि दुनिया भर में करीब 2,100 से 2,200 परमाणु वॉरहेड्स को ‘हाई ऑपरेशनल अलर्ट’ पर रखा गया है, यानी ये वो हथियार हैं जिन्हें महज कुछ ही मिनटों के आदेश पर दागा जा सकता है. इस श्रेणी में सबसे ज्यादा हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं। 

कौन सा देश है किस पायदान पर?  
परमाणु हथियारों की होड़ में आज भी शीतयुद्ध के दो सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी यानी रूस और अमेरिका ही सबसे आगे खड़े हैं. वैश्विक स्तर पर इन दोनों देशों का ही दबदबा है…

    रूस: रूस इस समय दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना हुआ है, जिसके पास कुल 5420 वॉरहेड्स का विशाल भंडार है। 

    अमेरिका: अमेरिका इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसके पास वर्तमान में 5,042 वारहेड्स मौजूद हैं। 
    चीन: भारत का पड़ोसी देश चीन भी अपने परमाणु बेड़े को बहुत आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है. चीन का परमाणु भंडार 600 से बढ़कर 620 वॉरहेड्स हो गया है। 

    फ्रांस: इस साल की रिपोर्ट में फ्रांस ने सबको चौंकाया है. फ्रांस ने अपने भंडार में सबसे तेज बढ़ोतरी करते हुए इसे 290 से सीधे 370 वॉरहेड्स तक पहुंचा दिया है। 

    ब्रिटेन: यूनाइटेड किंगडम (UK) ने अपनी रणनीतिक क्षमता को स्थिर रखा है. उसके पास वर्तमान में 225 वॉरहेड्स हैं। 

    इजरायल: मिडिल ईस्ट में जारी भारी युद्ध और तनाव के बावजूद इजरायल का अनुमानित परमाणु भंडार बिना किसी बदलाव के 90 वॉरहेड्स पर ही बना हुआ है। 

    उत्तर कोरिया: अपनी सनकी मिसाइल नीतियों के लिए जाना जाने वाला उत्तर कोरिया भी लगातार घातक हथियार बना रहा है. उसका भंडार 50 से बढ़कर 60 वॉरहेड्स हो गया है। 

दुनिया के ये सभी नौ देश (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल) अपने परमाणु शस्त्रागार को नया रूप दे रहे हैं. कई नई परमाणु-सक्षम प्रणालियों को सेना में शामिल कर रहे हैं। 

सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के उपकरण के रूप में परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है. सैन्य प्रौद्योगिकी में नए विकास, वैश्विक स्तर पर हथियारों के नियंत्रण के समझौतों का कमजोर होना और महाशक्तियों के बीच बढ़ती राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता ने दुनिया को एक बेहद खतरनाक चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। 

Census 2027: जनगणना के 33 सवालों का जवाब देना कितना जरूरी? गलत जानकारी देने पर क्या है नियम

नई दिल्ली
जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से जारी है। सबसे पहले मकानों की गणना की जा रही है। इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। मकानों की गणना के दौरान भी घर-परिवार और रहन-सहन के बारे में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं। एक तो यह कि क्या सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है? दूसरा यह कि अगर किसी सवाल का गलत जवाब दिया गया तो क्या ऐक्शन हो सकता है?

क्या है जनगणना की रूपरेखा
जनगणना 2027 की रूपरेखा दो प्रमुख चरणों में बंटी है। सबसे पहले हाउसिंग सेंसस हो रहा है। इसके लिए जनगणना अधिकारी एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और उनकी स्थिति, सुविधाएं और घर में रहने वाले लोगों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां इकट्ठी कर रहे हैं। इन जानकारियों के लिए परिवार के मुखिया से 33 सवाल किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जमीनी हकीकत का को ठीक से समझना और मुख्य जनगणना के कार्य को आसान करना है। इसके बाद 1 फरवरी से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा।

क्यों पूछे जा रहे हैं 33 सवाल
जनगणना के पहले चरण में यह पता लगाने का प्रयास है कि लोगों के जीवन का स्तर क्या है। इसी वजह से जो 33 सवाल किए जा रहे हैं उनमें सुविधाओं की जानकारी को मुख्य रखा गया है। इसमें घर में कितने लोग रहते हैं, फर्श कैसी है, दीवार की छत किस सामग्री से बनी है, पीने की पानी की क्या सुविधा है, घर का मुखिया कौन है। ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं।

इन सवालों में पानी, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल जैसे सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा कार,बाइक, साइकल और वाहनों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिससे लोगों के जीवन स्तर के सही आंकड़े जुटाए जा सकें।

जवाब ना देने पर क्या होगा
सवाल है कि अगर कोई जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता है तो क्या होगा। देश के नागरिक होने के नाते कोई भी सवालों का जवाब देने से इनकार नहीं कर सकता। वहीं जनगणना अधिकारी की भी जिम्मेदारी होती है को वह इन जानकारियों को पोर्टल पर ही अपडेट करे और कहीं प्रचारित ना करे। अगर कोई जानकारी गलत देता है तो सेंसस ऐक्ट 1948 के मुताबिक उस पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार के लिए आपके सवाल इसलिए भी जरूरी हैं ताकि जिन सुविधाओँ तक आपकी पहुंच नहीं हैं, उन्हें भविष्य में सुलभ बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि नागरिकों के हित में ही ये सवाल किए जा रहे हैं।

क्या हैं जनगणना के 33 सवाल?

1. भवन संख्या

2. जनगणना घर संख्या

3- फर्श में उपयोग की गई सामग्री

4. घऱ की दीवार में उपयोग की गई सामग्री

6. घर के छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री

7. घर का उपयोग

7. घर की स्थिति (नया या पुराना)

8. घर में रहने वाले लोगों की संख्या

9. परिवार में आम तौर पर उपलब्ध रहने वालों की संख्या

10. परिवार के मुखिया का नाम

11- परिवार के मुखिया का लिंग

12. परिवार के मुखिया की जाति

13. घर किराये का या खुद का

14. आवासीय कमरों की संख्या

15. परिवार में रहने वाले विवाहितों की संख्या

16. पीने के पानी का स्रोत

17. प्रकाश की व्यवस्था

18. शौचालय की उपलब्धता

19. शौचालय का प्रकार

20. जल निकासी की व्यवस्था

21. स्नान की सुविधा

22. रसोईघर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन

23. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन

24. रेडियो या ट्रांजिस्टर

25. टेलीविजन

26. इंटरनेट

27. लैपटॉप या कंप्यूटर

28. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज

29. कार जीप की उपलब्धता

30. मोबाइल नंबर

रेलवे का 40 साल पुराना रिजर्वेशन सिस्टम बदलेगा, अगस्त से यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएं

नई दिल्ली

भारतीय रेलवे अगस्त महीने से अपने करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है. 1986 से इस्तेमाल हो रहे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) की जगह अब नया और आधुनिक सिस्टम लाया जाएगा. रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद हो जाएगी. साथ ही यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी। 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो. रेलवे अगस्त से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों को नए रिजर्वेशन सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू करेगा। 

1986 में शुरू हुआ था मौजूदा सिस्टम
भारतीय रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था. पिछले चार दशकों में इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वैसी ही बनी रही. इस दौरान यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में रेलवे को एक ज्यादा सक्षम और आधुनिक सिस्टम की जरूरत महसूस हो रही थी। 

रेलवे ने साल 2002 में इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी. आज हालात यह हैं कि लगभग 88 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं. ऐसे में नए सिस्टम को इसी बढ़ती डिजिटल मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 

ज्यादा क्षमता वाला होगा नया सिस्टम
रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता के साथ काम करेगा. इससे टिकट बुकिंग के दौरान सर्वर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रियों को वेबसाइट या ऐप पर बेहतर अनुभव मिलेगा। 

त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय अक्सर वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें आती हैं. रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा। 

RailOne ऐप की लोकप्रियता बढ़ी
रेलवे का यह बदलाव उसकी डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। 

इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुक और कैंसिल कर सकते हैं, ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कई दूसरी रेलवे सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस ऐप के जरिए हर दिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं. इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं। 

AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना
नए सिस्टम की सबसे खास सुविधाओं में से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेटिंग टिकट प्रेडिक्शन फीचर है. यह सुविधा यात्रियों को बताती है कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। 

रेलवे के अनुसार, इस फीचर की सटीकता पहले करीब 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी। 

करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगस्त से शुरू होने वाला यह बदलाव रेलवे के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। 

करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलकर रेलवे अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग को ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगा, जिसका फायदा देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा। 

8th Pay Commission पर बड़ी चर्चा: क्या केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा 14 लाख रुपये तक का एरियर?

नई दिल्ली

8th Pay Commission: 8वें पे कमीशन ने एक बार फिर से लोगों को सुझाव देने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है। अब 15 जून तक सभी स्टेकहोल्डर्स अपना सुझाव 8वें वित्त आयोग को दे सकते है। पहले यह डेडलाइन 5 मार्च 2026 थी। उसके बाद डेडलाइन को बढ़ाकर 30 अप्रैल किया गया। फिर इसे आगे बढ़ाते हुए 31 मई कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में लगातार आगे बढ़ा जा रहे डेडलाइन की वजह से लग रहा है कि पे कमीशन अपनी रिपोर्ट जमा करने में अभी समय लेगा। ऐसे में कर्मचारियों के बीच देरी वजह से एरियर को लेकर भी खूब चर्चाएं हो रही हैं।

14 लाख रुपये तक मिलेगा एरियर?
रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को 5 लाख रुपये से 14 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल पर होता है। 7वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसे में 8वां वित्त आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है। लेकिन पे कमीशन की रिपोर्ट तैयार ना होने की वजह से अभी भी कर्मचारियों को 7वें पे कमीशन के हिसाब से ही सैलरी मिल रही है। एक बार आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाए उसके बाद कर्मचारियों को 8वें पे कमीशन के हिसाब से सैलरी मिलेगी। क्योंकि पे कमीशन 1 जनवरी से प्रभावी है। इसलिए एक बड़ा अमाउंट एरियर के तौर पर कर्मचारियों को मिलेगा।

कैसे तय होगा एरियर का भुगतान
सबकुछ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा। 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है उसी के आधार पर आगे का फैसला होगा। 7वें वित्त आयोग के दौरान 2.57 फिटमेंट फैक्टर रखा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 8वें पे कमीशन के दौरान 3.68 फिटमेंट फैक्टर रह सकता है।

अगर यह फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर 66240 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। मंथली सैलरी में सरकारी कर्मचारियों के 48240 रुपये की बढ़ोतरी होगी। अगर 10 महीने का एरियर देखें तो यह 482400 रुपये के स्तर पर पहुंचता है।

कैबिनेट सचिव के पोस्ट के अधिकारी का बेसिक पे इस समय 7वें पे कमीशन के अनुसार 482400 रुपये है। अगर 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तब की स्थिति में बेसिक पे बढ़कर 920000 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। मंथली सैलरी 670000 रुपये बढ़ जाएगी। ऐसे में महज 2 महीने का ही एरियर 1340,000 रुपये हो जाता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.28 से 2.86 फिटमेंट फैक्टर रखा जा सकता है।

मॉनसून की धमाकेदार एंट्री! 12 राज्यों में झमाझम बारिश, यूपी-बिहार को भी जल्द मिलेगी राहत

नई दिल्ली

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों तक पहुंच चुका है। केरल से प्रवेश करने के बाद कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में भी मॉनसून का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में इन दिनों हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हलाांकि मौसम विभाग ने एक राहत की खबर सुनाई है। 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी पश्चिमी विक्षोभ ऐक्टिव हो सकता है। ऐसे में दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में भी बारिश का अनुमान है।

राजस्थान में गिरे ओले
राजस्थान के श्रीगंगानगर में धूलभरी आंधी के बाद बारिश शुरू हुई और फिर ओलावृष्टि होने लगी। मौसम विभाग के मुताबिक 8 जून को भी कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई है।

करवट लेने वाला है मौसम
दिल्ली एनसीआर में फिलहाल 9 और 10 जून को हीटवेव जारी रहने का अनुमान है। 10 जून से मौसम करवट ले सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो दिनों में ही दिल्ली एनसीआर का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।

इन राज्यों में मूसलाधार बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की वजह से कर्नाटक और केरल में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर में भी झमाझम बारिश हो रही है। मॉनसून त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड, मिजोरम तक पहुंच चुका है। यहां कई जगहों पर भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर कर लेगा।

अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में बारिश जारी रहेगी। वहीं ओडिशा, बिहास, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी आंधी के साथ बारिश हो सकती है। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 10 जून को केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार में भी तूफान के साथ बारिश का अनुमान है।

यूपी में कब होगी बारिश
उत्तर प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हीटवेव का असर देखा जा रहा है। यहां 9 और 10 जून को भी लू जारी रहेगी। वहीं 10 जून के बाद बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी में आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 8 और 9 जून को हल्की बारिश हो सकती है। 11 जून को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद उत्तराखंड में बारिश की गितिविधियां तेज होंगी।

बिहार का मौसम
बिहार में भी 10 जून के बाद ही बारिश का अनुमान लागाय गया है। 11 जून को भी कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। गर्मी की लिहाज से फिलहाल दो दिन भारी बताए गए हैं। झारखंडा में 8 जून को भी 40 से 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। साथ ही हल्की बारिश हो सकती है।

Re-NEET 2026 के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच! एयरफोर्स 18 ठिकानों से उठाएगी पेपर, परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर

 नई दिल्ली

देश में नीट (NEET) परीक्षा को लेकर मचे देशव्यापी बवाल और पेपर लीक के कड़े अनुभवों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार इस बार सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम कर रही है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. आगामी नीट री-एग्जा को पूरी तरह ‘लीक-प्रूफ’ और सुरक्षित बनाने के लिए अब देश की सबसे भरोसेमंद ताकत यानी भारतीय वायुसेना (IAF) को मैदान में उतार दिया गया है। 

‘इंडिया टुडे’ को टॉप सोर्सेज (शीर्ष सूत्रों) से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, नीट री-टेस्ट के दौरान प्रश्नपत्रों को लीक होने से बचाने और उनकी सुरक्षित डिलीवरी के लिए भारतीय वायुसेना लॉजिस्टिक सपोर्ट (लॉजिस्टिक्स सहायता) प्रदान करेगी। 

आसमान से होगी प्रश्नपत्रों की सुरक्षित लैंडिंग: 18 जगहों से उठेंगे पैकेट्स

सूत्रों के मुताबिक, इस बार प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेदारी किसी प्राइवेट कूरियर या सामान्य सरकारी डाक के भरोसे नहीं छोड़ी जा रही है. सुरक्षा का घेरा इतना कड़ा है कि नीट री-टेस्ट के प्रश्नपत्रों (Question Papers) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का जिम्मा खुद भारतीय वायुसेना के जिम्मे होगा.सूत्रों ने बताया है कि वायुसेना देश के 18 चुनिंदा और महत्वपूर्ण स्थानों से प्रश्नपत्रों के पैकेट्स को अपनी कस्टडी में लेगी और उन्हें तय समय पर सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाएगी। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सुरक्षा व्यवस्था केवल पेपर सेटिंग तक सीमित नहीं है। प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण के लिए भी बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। सरकार भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद से प्रश्नपत्रों को विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर लीक या छेड़छाड़ की आशंका को खत्म किया जा सके। इसके अलावा पारंपरिक बैंक स्ट्रॉन्ग रूम के बजाय अधिक सुरक्षित स्थानों की भी पहचान की जा रही है।

NTA ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। हाल के दिनों में टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर री-एग्जाम का कथित पेपर बिकने के दावों के बाद एजेंसी सतर्क हो गई है। NTA ने ऐसे दावों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताते हुए चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

21 जून को होने वाली यह पुनर्परीक्षा देश और विदेश के कुल 551 भारतीय शहरों तथा 14 विदेशी शहरों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा पहले की तरह पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। NTA ने उम्मीदवारों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप भी जारी कर दी है, जबकि एडमिट कार्ड अलग से जारी किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि NTA और पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। इसलिए इस बार “जीरो-ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल” पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें किसी एक व्यक्ति को पूरी प्रक्रिया की जानकारी न हो और हर स्तर पर निगरानी बनी रहे।

‘हर चुनौती से निपटने के लिए हैं तैयार’
सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा सूत्रों का कहना है कि नीट परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी स्तर का जोखिम नहीं लेना चाहती. वायुसेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न कराने के लिए जिस भी तरह के सहयोग या सपोर्ट की आवश्यकता होगी, उसके लिए सेना पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है। 

इस कदम का सीधा मकसद सॉल्वर गैंग और लीक माफियाओं के उस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है, जो प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र के बीच के रास्ते में पेपर लीक की वारदातों को अंजाम देते थे। 

शुभेंदु सरकार का बड़ा ऐलान, बंगाल में CBI को मिली जांच की खुली छूट

 कोलकाता

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सीबीआई को जांच करने की पूरी छूट देने का बड़ा फैसला किया है. होम एंड हिल अफेयर्स विभाग की तरफ से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट, 1946 के तहत सीबीआई को राज्य में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों और उनसे जुड़े मामलों की जांच करने की अनुमति दी गई है। 

इस नोटिफिकेशन का सीधा मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में कुछ मामलों की जांच करने के लिए फिर से सामान्य सहमति (General Consent) दे दी है, लेकिन यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है। 

यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है. नोटिफिकेशन 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है। 
किन मामलों में जांच कर सकेगी CBI?

    केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले.
    केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों से जुड़े मामले.
    अगर किसी शख्स पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो, तो उनके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी.

किन मामलों में CBI सीधे जांच नहीं कर सकेगी?

पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच नहीं कर सकती है.
ऐसे मामलों में सीबीआई को पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी.

यह कहना कि ‘बंगाल ने CBI को सभी मामलों की जांच की पूरी छूट दे दी’ पूरी तरह सही नहीं होगा. नोटिफिकेशन पढ़ने पर साफ है कि छूट मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों के लिए दी गई है. राज्य सरकार के अधिकारियों पर CBI अभी भी बिना अनुमति सीधे जांच नहीं कर सकती। 

भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की सीबीआई को दी खुली छूट
 मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछली सरकार ने 4 वर्षों से सीबीआई की कार्रवाई को रोक रखा था. कानून के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या अभियोजन शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है। 

ममता बनर्जी पर भ्रष्ट नौकरशाहों को संरक्षण देने का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जान-बूझकर इन फाइलों को अटकाये रखा, ताकि उनके खास अधिकारियों को बचाया जा सके. मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल 3 प्रमुख विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच की सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दे दी गयी है. इसकी प्रतियां केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गयी हैं। 

रडार पर शिक्षक भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड

    शिक्षक भर्ती घोटाला (WBSSC) स्कूलों में अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है. इस केस में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई सीधे आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी। 
    नगर निकाय भर्ती घोटाला वो केस है, जिसमें बंगाल के विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई नौकरियों की बंदरबांट हुई थी. अब इसकी जांच तेजी से आगे बढ़ेगी। 

कानून का हथियार बनाकर भ्रष्टाचारियों को दिया गया था सुरक्षा कवच
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने कानून को ढाल बनाकर भ्रष्टाचारियों को कवच प्रदान किया था. उन्होंने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है. जो फाइलें सचिवालय की आलमारियों में बंद थीं, उन्हें अब खोल दिया गया है, ताकि जनता का पैसा लूटने वालों को सजा मिल सके। 

क्या भगवान मंत्रियों का इंतजार करते हैं? VIP दर्शन व्यवस्था पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

चेन्नई

मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए बीते  पूछा कि भगवान के सामने तो सभी लोग समान होते हैं तो मंदिरों में VIP दर्शन जैसी व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। इसकी वजह से आम श्रद्धालुओं को मंदिर के बाहर इंतजार करना पड़ता है। दरअसल, जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच मंदिरों में वीआईपी दर्शन और स्पेशल दर्शन व्यवस्था को खत्म करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, तब उन्होंने यह टिप्पणी की।

‘मंदिर में मंत्रियों की प्रतीक्षा नहीं कर रहे भगवान’
सुनवाई के दौरान, मद्रास हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, ‘मंत्रियों और विधायकों को यह ना समझने दें कि वे किसी भी वक्त मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और भगवान उनकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे। VIP दर्शन की जरूरत ही क्या है? भगवान के सामने सभी समान हैं।’

याचिका में की गई VIP दर्शन को खत्म करने की मांग
लाइव लॉ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस याचिका में वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांगजन, मंदिर कला से जुड़े कलाकार, नवविवाहित जोड़े, राज्य के प्रमुख, संवैधानिक पदाधिकारी और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर बाकी लोगों के लिए VIP दर्शन और विशेष दर्शन व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान, मद्रास हाईकोर्ट ने पहले यह भी पूछा था कि क्या 15 मई को किसी मंत्री के दर्शन के लिए तिरुपरंकुंद्रम सुब्रमण्यस्वामी मंदिर के बंद होने का वक्त बढ़ाया गया था।

6 हफ्ते बाद होगी मामले की अगली सुनवाई
इस पर एडिशनल एडवोकेट जनरल पी. वी. बालासुब्रमण्यम ने बेंच को बताया कि मंदिर के बंद होने के वक्त में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस संबंध में एक रिपोर्ट भी हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई है। फिर, पी. वी. बालासुब्रमण्यम ने बेंच से जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। मद्रास हाईकोर्ट ने इस अपील को स्वीकार करते हुए केस की अगली सुनवाई 6 हफ्ते के लिए स्थगित कर दी।

VHP के पदाधिकारी ने दाखिल की है याचिका
जान लें कि यह याचिका, मद्रास हाईकोर्ट में विश्व हिंदू परिषद की उत्तर तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष पी. चोक्कलिंगम ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम की धारा 6(15)(b) के अंतर्गत उनकी अर्जी विचार योग्य है।

सनातन धर्म नहीं सिखाता भेदभाव
पी. चोक्कलिंगम ने अपनी याचिका में कहा कि सनातन धर्म, जाति, आर्थिक संपन्नता या सामाजिक हैसियत के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता है। उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म सभी मनुष्यों को एक बराबर मानने की शिक्षा देता है, इसलिए मंदिरों के अंदर वीआईपी और आम श्रद्धालु या अमीर और गरीब के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के दौरे को लेकर है। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने दर्शन के लिए तिरुपरनकुंड्रम स्थित सुब्रमण्य स्वामी मंदिर को बंद करवा दिया था। इसके बाद जब उन्होंने दर्शन कर लिए उसके बाद मंदिर खोला गया। विपक्ष के इन आरोपों को विजय सरकार ने खारिज किया है।

मद्रास हाई कोर्ट में यह मामला विश्व हिंदू परिषद तमिलनाडु ईकाई के नेता पी, चोकलिंगम की याचिका पर शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि निर्मल कुमार की तरह ही कई बार मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए जाते हैं, जिसकी वजह से आम जनता को काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में धन, सामाजिक स्थिति या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता है और सभी भक्तों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

हालांकि, चोकलिंगम ने अपनी याचिका में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में सेवा करने वाले कलाकारों, राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक अधिकारियों सहित कुछ श्रेणियों के लिए छूट की मांग की।

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 में रचा इतिहास, उत्पादन और बिक्री ने बनाए नए रिकॉर्ड

हैदराबाद    

 सरकार के स्वामित्व वाली लौह अयस्क की प्रमुख कंपनी एनएमडीसी ने अब तक के सबसे मजबूत परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन के साथ वित्त वर्ष 26 को समाप्त किया। उत्पादन में मजबूत वृद्धि और अनुशासित निष्पादन ने कंपनी को प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में मदद की।

वित्त वर्ष 26 में लौह अयस्क उत्पादन 21% बढ़कर 53.16 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और बिक्री 13% बढ़कर 50.24 मिलियन टन हो गई, जिससे एनएमडीसी ने  अपने इतिहास में अब तक की सबसे अधिक वार्षिक मात्रा दर्ज की। ये दोनों मील के पत्थर घरेलू इस्पात की सुदृढ़ मांग और भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक की बढ़ती क्षमताओं दोनों का संकेत देते हैं। 

उत्पादन और प्रेषण में वृद्धि ने सीधे एनएमडीसी के वित्तीय प्रदर्शन को बढ़ावा दिया, जिससे वित्त वर्ष 26 में टर्न ओवर 33% बढ़कर अब तक के उच्चतम स्तर 31,554 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। । ईबीआईटीडीए 9% बढ़कर रु. 10,737 करोड़ हो गया जबकि कर पूर्व लाभ 9% बढ़कर रु. 10,155 करोड़ और निवल लाभ 11% बढ़कर रु. 7,421 करोड़.हो गया। 

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 में 3,690 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया साथ ही शेयरधारक रिटर्न को सुदृढ़ बनाए रखा। बोर्ड ने शेयरधारक अनुमोदन के अधीन, 1 रुपये प्रति शेयर के अंतिम लाभांश की सिफारिश की। साथ ही वित्त वर्ष26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर रु. 2.5 के अंतरिम लाभांश घोषित किया। इस प्रकार वर्ष के लिए कुल लाभांश की राशि रु. 3,077 करोड़ होती है।.

एनएमडीसी ने उत्पादन, बिक्री और वित्तीय मेट्रिक्स में व्यापक आधार पर वृद्धि के साथ चौथी तिमाही के उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ वित्त वर्ष 26 को एक मजबूत स्थिति में समाप्त किया। लौह अयस्क का उत्पादन वर्ष -दर-वर्ष 22% बढ़कर 16.27 मिलियन टन हो गया, जबकि बिक्री 21% बढ़कर 15.30 मिलियन टन हो गई।

मात्रा में मजबूत वृद्धि ने वित्तीय प्रदर्शन में तेजी से वृद्धि की, जिसमें टर्न ओवर 61% बढ़कर रु. 11,173 करोड़ हो गया। कर पूर्व लाभ 22% बढ़कर रु. हो गया। 2,875 करोड़, जबकि कर पश्चात लाभ 35% बढ़कर रु. 2,020 करोड़ रुपये हो गया। इसे बेहतर प्राप्ति और स्थिर परिचालन दक्षता द्वारा समर्थन मिला। ईबीआईटीडीए 21% बढ़कर रु. 3,072 करोड़ हो गया।  तिमाही के प्रदर्शन ने इस सेक्टर क्षेत्र में एनएमडीसी के प्रभुत्व को और मजबूत किया।
 
एनएमडीसी के सीएमडी  अमिताभ मुखर्जी ने कहा, “रिकॉर्ड उत्पादन, टॉप लाइन में वृद्धि, रणनीतिक पूंजी नियोजन और सभी क्षेत्रों में मजबूत वित्तीय मेट्रिक्स के साथ, एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 26 को एक ऐसी गति के साथ बंद किया जो हमें भारत के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में एक विशिष्ट उच्च स्थान में रखता है। हम इस मात्रात्मक वृद्धि को बनाए रखने, परिसंपत्ति उत्पादकता बढ़ाने और भविष्य के लिए तैयार खनन क्षमता का निर्माण करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।“ 
 
यह प्रदर्शन कंपनी के भीतर चल रहे परिवर्तन को दर्शाता है, जो मुख्य रूप से उच्च-नकदी-प्रवाह खनन पीएसयू से एक बड़े पैमाने वाले, पूंजी-गहन संसाधन उद्यम के रूप में उभर रहा है, जिसमें परिचालन और वित्तीय पैमाना बढ़ रहा है।

वृद्धि , नकदी प्रवाह और क्षमता एनएमडीसी के वित्त वर्ष 26 रिकॉर्ड प्रदर्शन को परिभाषित करते हैं – टॉपलाइन में 33% की वृद्धि, आउटपुट में 21% की वृद्धि

वि.व. 26    वि.व.25    वृद्धि     4थी तिमाही वि.व.26    4थी तिमाही वि.व.25    वृद्धि

उत्पादन    53.16    44.07    21%    16.27    13.31    22%
बिक्री    50.24    44.40    13%    15.30    12.67    21%
टर्नओवर    31,554    23,668    33%    11,173    6,953    61%
पीबीटी    10,155    9,296    9%    2,875    2,351    22%
पी ए टी    7,421    6,693    11%    2,020    1,496    35%
ईबीआईटीडीए    10,737    9,847    9%    3,072    2,538    21%
उत्पादन और बिक्री मिलियन टन में, और वित्तीय आंकड़े करोड़ रुपये में

‘उकसाओगे तो जवाब मिलेगा’, ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर आर्मी चीफ ने दुश्मनों को दी चेतावनी

नई दिल्ली

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह तय कर दिया है कि उकसावे पर भारत किस तरह जवाब देता है। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पासिंग आउट कैडेटों से अपील की कि वे अपने सैन्य करियर की शुरुआत करते हुए इस उच्च मानक को हमेशा बनाए रखें। पुणे के खडकवासला स्थित त्रि-सेवा अकादमी परिसर में एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “आज के समय में खतरे हमेशा वर्दी में या किसी घोषित मोर्चे पर नहीं आते। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया और एक बेंचमार्क स्थापित किया कि जब राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और संकल्प के साथ व्यक्त किया जाता है तो भारत उकसावे का कैसा जवाब देता है। अब इस मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी आपकी है।”

तीनों सेनाओं के तालमेल पर दिया जोर
सेना प्रमुख ने तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता उसी एकीकृत दृष्टिकोण का परिणाम थी, जिसकी नींव एनडीए में रखी जाती है। उन्होंने कैडेट्स से कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में आपने जो एकीकृत प्रतिक्रिया देखी, वह ठीक उसी नींव पर बनी थी जो एनडीए तैयार करता है। यहां संयुक्तता केवल पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि पहले दिन से ही तीनों सेनाओं के सैनिकों के साथ मिलकर जीने की एक प्रवृत्ति है।”

42 साल बाद अकादमी लौटे सेना प्रमुख
जनरल द्विवेदी ने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में परेड की समीक्षा की, जहां 355 कैडेटों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल किया गया। इस पासिंग आउट बैच में 12 मित्र विदेशी देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सेना प्रमुख भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह अवसर उनके लिए बेहद खास है क्योंकि चार दशक से भी पहले वह खुद इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। आपको बता दें कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र और चार्ली स्क्वाड्रन के कैडेट रह चुके हैं।

उन्होंने कहा, “42 साल से अधिक समय पहले मैं इसी क्वार्टर डेक से पास आउट हुआ था। आज समीक्षा अधिकारी के रूप में अपनी मातृ संस्था में लौटना मेरे लिए गर्व की बात है। इसी संस्थान ने मेरे मूल्यों, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को आकार दिया है।”

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