केरल में नई सरकार का गठन, वीडी सतीशन ने CM पद की शपथ ली; PM मोदी ने दी बधाई

तिरुअनंतपुरम 

 केरलम में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया. वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने शपथ दिलवाई. वीडी सतीशन केरलम के मुख्यमंत्री बने। IUML से पीके कुन्हालीकुट्टी नेमंत्री पद की शपथ ली. रमेश चेन्निथला ने मंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे. तिरुअनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। PM मोदी ने वीडी सतीशन को केरलम के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी। 

पी.के. कुन्हालीकुट्टी, सनी जोसेफ, के. मुरलीधरन और मॉन्स जोसेफ ने वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली केरलम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन और लोकसभा नेता राहुल गांधी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला को केरलम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी।

मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मंच पर मौजूद
शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेता केरल के तिरुवनंतपुरम में मंच पर मौजूद रहे।

कौन-कौन से विधायक बने मंत्री?
कांग्रेस के रमेश चेन्निथला, सन्नी जोसेफ, के. मुरलीधरन, ए.पी. अनिल कुमार, पी.सी. विष्णुनाथ, टी. सिद्दीकी, बिंदु कृष्णा, के.ए. तुलसी, रोजी एम. जॉन, एम. लिजू और ओ.जे. जनीश।

आईयूएमएल के पी.के. कुन्हालीकुट्टी, एन. शमसुद्दीन, के.एम. शाजी, पी.के. बशीर और वी.ई. अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली।

अन्य गठबंधन सहयोगियों में से केरल कांग्रेस (जोसेफ) के मॉन्स जोसेफ, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के शिबू बेबी जॉन, केरल कांग्रेस (जैकब) के अनूप जैकब और कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी के सी.पी. जॉन भी मंत्री बने हैं।

यूडीएफ को मिला स्पष्ट जनादेश
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने केरल में 2026 का विधानसभा चुनाव स्पष्ट जनादेश के साथ जीता। दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद UDF को 46.55% वोट मिले। इससे पहले 2001 में 49.05% वोट मिले थे। यह उसके 2021 के वोटों के हिस्से के मुकाबले 7.67 प्रतिशत अंकों की बढ़त है। वोटों में इस उछाल का नतीजा यह हुआ कि उसे 62 सीटें ज्यादा मिलीं, जिससे 2026 में UDF की सीटों की संख्या बढ़कर 102 हो गई।

यूडीएफ को मिला स्पष्ट जनादेश
कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने केरल में 2026 का विधानसभा चुनाव स्पष्ट जनादेश के साथ जीता। दस साल तक विपक्ष में रहने के बाद UDF को 46.55% वोट मिले। इससे पहले 2001 में 49.05% वोट मिले थे। यह उसके 2021 के वोटों के हिस्से के मुकाबले 7.67 प्रतिशत अंकों की बढ़त है। वोटों में इस उछाल का नतीजा यह हुआ कि उसे 62 सीटें ज्यादा मिलीं, जिससे 2026 में UDF की सीटों की संख्या बढ़कर 102 हो गई।

 

 

155 करोड़ बैंक घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, दिल्ली-गोवा के 7 ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली
ईडी ने 155 करोड़ रुपये के एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में आज बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले को लेकर दिल्ली और गोवा में 7 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही है. इस मामले में ईडी ने AAP नेता दीपक सिंगला के ठिकानों पर भी रेड की है। 

ये पूरा मामला ‘महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड’ के खिलाफ दर्ज वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है. जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ये छापेमारी मुख्य रूप से दीपक सिंगला, महेश सिंगला, अमरीक गिल और कुछ अन्य संदिग्धों से जुड़े परिसरों और ठिकानों पर की जा रही है। 

ईडी की टीमें सुबह-सुबह ही सभी संदिग्धों के घरों और व्यावसायिक ठिकानों पर पहुंच गईं. जांच के दौरान कई अहम दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है, ताकि 155 करोड़ रुपये के इस कथित बैंक घोटाले की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके। 

संजीव अरोड़ा से जुड़े मामले के तार
दीपक सिंगला का नाम आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में शुमार किया जाता है. बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों के तार पंजाब सरकार के गिरफ्तार मंत्री संजीव अरोड़ा से भी जुड़े हुए हैं. संजीव अरोड़ा को पहले ही भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। 

अब इस नए बैंक फ्रॉड केस में भी संजीव अरोड़ा, उनके करीबियों और पार्टी सहयोगियों का नाम आने से आम आदमी पार्टी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। 

बता दें कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक बैंक फ्रॉड केस दर्ज है. कंपनी पर कई बैंकों से लगभग 155 करोड़ रुपये का लोन लेकर उसमें हेराफेरी करने और बैंकों को बड़ा नुकसान पहुंचाने का आरोप है। 

बंगाल में बड़ा सिक्योरिटी रिव्यू, अभिषेक बनर्जी समेत कई TMC नेताओं की सुरक्षा में कटौती

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई बीजेपी सरकार ने रविवार को VIP सुरक्षा का रिव्यू कर ढांचागत बदलाव करते हुए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत कई हाई-प्रोफाइल नेताओं और पूर्व पुलिस अधिकारियों की वीआईपी सुरक्षा में भारी कटौती की है. इस प्रशासनिक समीक्षा के बाद गृह विभाग ने कल्याण बनर्जी, सुब्रत बख्शी, राजीव कुमार और अरूप बिस्वास जैसे कई वीआईपी के घरों के बाहर तैनात हाउस गार्ड्स को तुरंत वापस ले लिया है। 

अधिकारियों के अनुसार, ताजा थ्रेट परसेप्शन (खतरे का आकलन) की नई समीक्षा में पाया गया कि इन लोगों को अब अत्यधिक सुरक्षा की जरूरत नहीं है. हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट आदेश दिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में कोई कटौती नहीं होगी और उनकी सुरक्षा में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में सरकार बदलने के ठीक बाद सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया शुरू की गई थी. इसके तहत सबसे पहले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा को कम किया गया है. सरकार ने उनकी ‘जेड-प्लस’ (Z-Plus) कैटेगरी की सुरक्षा और विशेष पायलट कार की सुविधाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके अलावा कालीघाट स्थित उनके आवास और कैमैक स्ट्रीट पर उनके ऑफिस कैंपस के बाहर तैनात पुलिस बल को भी वापस बुला लिया गया है। 

MP’s और MLA’s को मिलेगी केवल तय सुरक्षा
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और पूर्व पुलिस प्रमुख राजीव कुमार को अब केवल सांसद के रूप में मिलने वाली सुरक्षा ही दी जाएगी. पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास के पास वर्तमान में कोई मंत्री पद या विधायी पद नहीं होने के कारण उनकी पुरानी सुरक्षा हटा दी गई है। 

वहीं, बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष को शारदा मामले में जमानत के बाद कोर्ट के निर्देश पर मिली अतिरिक्त सुरक्षा हटाकर अब केवल विधायक स्तर की सुरक्षा दी गई है। 

पूर्व DGP और वकीलों की सुरक्षा भी घटी
सुरक्षा में कटौती की इस लिस्ट में पूर्व डीजीपी मनोज मालवीय, पूर्व कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे और टीएमसी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने वाले एक प्रमुख अधिवक्ता का नाम भी शामिल है. पीयूष पांडे को अब केवल उनके वर्तमान पद के अनुसार ही सुरक्षा कवर मिलेगा. सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी वास्तविक जरूरत से ज्यादा सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए, इसलिए इन अतिरिक्त सुरक्षा बलों को वापस बुलाया गया है। 

ममता बनर्जी की सुरक्षा रहेगी बरकरार
विभिन्न नेताओं की सुरक्षा में कटौती के बीच प्रशासन ने ये भी साफ किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. कोलकाता पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ममता बनर्जी के आवास, उनके दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात रहने चाहिए. अधिकारियों ने कहा कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा। 

उदयिनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर बयान से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

नई दिल्ली

सनातन के खिलाफ अक्सर जहर उगलने वाले डीएमके विधायक और तमिलनाडु के नेता विपक्ष उदयनिधि स्टालिन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री विजय के सामने विधानसभा में सनातन को खत्म करना ही होगा कहने वाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गौरतलब है कि कुछ साल पहले भी उदयनिधि ने सनातन पर इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई थी। हालांकि, इस बार टिप्पणी तमिलनाडु विधानसभा के भीतर की गई है।

लाइव लॉ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर करते हुए उदयनिधि द्वारा सनातन धर्म को खत्म करने वाली टिप्पणी का जिक्र है। यह अर्जी एक अवमानना याचिका के तहत दाखिल की गई है। शाहीन अब्दुल्ला बनाम भारत संघ मामले में दायर एक रिट याचिका से कनेक्ट है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह अवमानना याचिका अमिता सचदेवा नाम की वकील ने दायर की।

अर्जी में क्या कहा गया?
अर्जी में कहा गया है कि हेट स्पीच और इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के साफ आदेश के बाद भी पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ ऐक्शन नहीं लिया। हालांकि, यह याचिका उनके पुराने बयान पर 29 अप्रैल को दायर की गई थी, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ बेंच ने स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन अब फिर से इसमें जोड़ा गया है कि तमिलनाडु विधानसभा की कार्रवाही के दौरान भी उदयनिधि ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही है।

सनातन वाले बयान पर उदयनिधि की आई सफाई
इससे पहले, सितंबर, 2023 में एक कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से की थी और इसे खत्म किए जाने की बात कही थी। तब भी मामले पर काफी विवाद हुआ था और भाजपा समेत तमाम दलों के नेताओं ने हमला बोला था। हालांकि, अब तमिलनाडु वाली टिप्पणी पर उदयनिधि की सफाई आई है। उन्होंने कहा है कि हम किसी भी भगवान की आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि जाति के आधार पर जो भेदभाव होता आया है, उसका विरोध करते हैं।

‘मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं’
एक्स पर एक पोस्ट में, विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि ने कहा, “जब मैंने तमिलनाडु विधानसभा में बात की, तो मैंने कहा था कि लोगों को बांटने वाली जाति व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए। कुछ लोग इस बात के लिए मेरी आलोचना करते हैं। मैं डरने वाला इंसान नहीं हूं। द्रविड़ आंदोलन विरोध से ही उभरा था। इस लिहाज से, मैं एक छोटी सी सफाई देना चाहूंगा।” अपनी सफाई देते हुए उदयनिधि ने कहा कि जाति व्यवस्था को खत्म करने का मतलब धर्म या पूजा का विरोध नहीं समझा जाना चाहिए। जब मैं कहता हूं कि जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को भी मंदिर नहीं जाना चाहिए। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए, न सिर्फ मंदिर में, बल्कि समाज में भी।”

अयोध्या की राह पर भोजशाल,हाई कोर्ट के फैसले का हिंदू और मुसलमानों के लिए क्या मतलब है?

 नई दिल्ली

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इंदौर खंडपीठ ने अपने 242 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि 11वीं शताब्दी का यह परिसर मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र था।

हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत ने अब हिंदुओं को परिसर में प्रतिदिन पूजा का विशेष अधिकार देने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और अभिलेख यह साबित करते हैं कि विवादित स्थल भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन का प्रमुख केंद्र था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “ऐतिहासिक साहित्य और पुरातात्विक संदर्भ यह स्थापित करते हैं कि यह क्षेत्र देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर और संस्कृत अध्ययन का केंद्र था। हिंदू पूजा की परंपरा समय-समय पर नियंत्रित जरूर हुई, लेकिन कभी समाप्त नहीं हुई।”

बेंच ने 28 मार्च को स्वयं स्थल का निरीक्षण भी किया था। अदालत ने विवादित परिसर को प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक घोषित करते हुए कहा कि इसका प्रभाव 18 मार्च 1904 से माना जाएगा।

ASI को फटकार
हाईकोर्ट ने ASI की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि एजेंसी ने अपने वैधानिक दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया और भोजशाला परिसर के संरक्षण में जानबूझकर लापरवाही बरती। कोर्ट ने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल को संरक्षित घोषित करने से पहले ASI की जिम्मेदारी होती है कि वह उस स्थल की मूल प्रकृति, स्वरूप और धार्मिक चरित्र का सही निर्धारण करे।

केंद्र और ASI को क्या निर्देश दिए गए?
अदालत ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर का प्रशासन और प्रबंधन संभालने का निर्देश दिया है। इसके मुताबिक, ASI को संरक्षण, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के नियमन का पूर्ण अधिकार होगा। परिसर को संस्कृत अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।

कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि लंदन म्यूजियम में रखी गई देवी सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग पर विचार किया जाए।

अयोध्या फैसले की झलक
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्यों की व्याख्या अनुभव, ऐतिहासिक समझ और विवेकपूर्ण निर्णय के आधार पर की जानी चाहिए।

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारों का दायित्व है कि वे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों का संरक्षण करें और संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करें।

मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा
इस मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी सहित मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं हाईकोर्ट ने खारिज कर दीं। MKWS के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका आरोप है कि अदालत ने जिन रिपोर्टों पर भरोसा किया, वे एकतरफा थीं।

मुस्लिम पक्ष के वकील अशर वारसी ने कहा कि ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण है। वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह परिसर 700 वर्षों से मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को पलट देगा।

जैन समुदाय के दावे पर अदालत की टिप्पणी
मामले में जैन समुदाय ने भी दावा किया था कि यह स्थल मूल रूप से मध्यकालीन जैन मंदिर था।

अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में जैन और हिंदू परंपराएं सदियों से साथ-साथ विकसित हुई हैं। पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन दोनों में समान आध्यात्मिक तत्व मौजूद हैं। कोर्ट ने कहा कि खुदाई में जैन तीर्थंकर की प्रतिमा मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि दोनों परंपराओं की मूर्तियां अक्सर एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों में पाई जाती रही हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में अहम कदम है।

क्या है भोजशाला विवाद?
धार स्थित भोजशाला को हिंदू पक्ष देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत पाठशाला मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वर्ष 2003 में ASI ने व्यवस्था बनाई थी कि हिंदू मंगलवार को पूजा करेंगे और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे। अब हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को खत्म करते हुए हिंदू पक्ष को दैनिक पूजा का अधिकार दे दिया है।

 

सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज, राष्ट्रपति मुर्मु ने दी मंजूरी, अब कुल संख्या होगी 38

नई दिल्ली

 देश की शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को केंद्रीय कैबिनेट के उस फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) कर दिया गया है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट अधिनियम, 1956 में संशोधन किया गया है।

इसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

क्यों पड़ी जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत?
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य देश की सर्वोच्च अदालत को और अधिक मजबूत बनाना और आम जनता को जल्द से जल्द न्याय दिलाना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 92,000 से अधिक हो गई है।

इस वृद्धि को औपचारिक रूप देने के लिए कैबिनेट ने संसद में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

क्या कहता है भारतीय संविधान?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह कानून (कानूनी संशोधन) बनाकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या का निर्धारण कर सकती है। बढ़ते मुकदमों और काम के बोझ को देखते हुए पिछले कुछ दशकों में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में कई बार बदलाव किए गए हैं।

भारतीय सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या का इतिहास देश में बढ़ते मुकदमों और न्यायपालिका के विस्तार को दर्शाता है, जिसकी शुरुआत साल 1956 में मूल अधिनियम के तहत मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों की संख्या तय करने से हुई थी।

इसके बाद, समय-समय पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए संसद ने इसमें बदलाव किए, जिसके तहत साल 1960 में जजों की संख्या बढ़ाकर 13, साल 1977 में 17 और साल 1986 में बढ़ाकर 25 कर दी गई।

21वीं सदी में मुकदमों के बढ़ते बोझ के कारण साल 2008 में इस स्वीकृत संख्या को 30 किया गया, जिसे आगे चलकर साल 2019 में आखिरी बार संशोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 कर दिया गया था।

अब वर्तमान में, यानी साल 2026 में, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और शीर्ष अदालत को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जजों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 37 और मुख्य न्यायाधीश सहित कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है।

 

हॉर्मुज जलडमरूमध्य हमले पर भारत ने UN में जताई कड़ी चिंता

 नई दिल्ली

भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कारोबारी जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि नागरिक जहाजों और उनके चालक दल को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

पर्वतनेनी हरीश ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (यूएनईसीओएसओसी) की विशेष बैठक में यह बात कही। बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि कारोबारी जहाजों पर हमले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में ओमान तट के पास भारतीय झंडे वाले एक जहाज पर हमला हुआ था।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर दिया जोर
रविवार को एक्स पर किए गए पोस्ट में पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा और उर्वरक संकट से निपटने के लिए भारत का दृष्टिकोण साझा किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक कदमों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है।

उन्होंने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना, नागरिक चालक दल की जान खतरे में डालना और नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह पालन होना चाहिए।

ओमान तट के पास हुआ था हमला
13 मई को सोमालिया से जा रहे भारतीय झंडे वाले एक कारोबारी जहाज पर ओमान के पास हमला हुआ था। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। ओमान प्रशासन ने जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। हालांकि, हमला किसने किया, इसकी तुरंत पुष्टि नहीं हो सकी।

विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस हमले की निंदा करते हुए कहा था कि कारोबारी जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम दो अन्य भारतीय जहाजों पर भी हमले हो चुके हैं।

NEET-UG 2026 पेपर लीक,सीबीआई जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा

 नई दिल्ली

 नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच में एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी को शक है कि इस नेटवर्क में परीक्षा से जुड़े अंदरूनी लोग, बिचौलिए और अलग-अलग राज्यों के छात्र शामिल थे।

अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, पेपर लीक कई चरणों में हुआ। जांच में सामने आया कि सवाल और उत्तर परीक्षा प्रणाली के अंदर से बाहर निकाले गए और फिर अलग-अलग लोगों तक पहुंचाए गए। सीबीआई के मुताबिक, पुणे की बॉटनी प्रोफेसर मनीषा मंडहरे परीक्षा प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञ के तौर पर जुड़ी थीं। एजेंसी को शक है कि उन्हें बॉटनी और जूलॉजी के गोपनीय प्रश्नों तक पहुंच थी।

प्रोफेसरों और बिचौलियों की भूमिका पर शक
जांच में रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी का नाम भी सामने आया है। सीबीआई को शक है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी का कुछ हिस्सा परीक्षा तंत्र के अंदर से बाहर निकाला गया। सीबीआई के अनुसार, मनीषा मंडहरे और पुणे की ही मनीषा वाघमारे के बीच करीबी संपर्क था।

दोनों एक ही हाउसिंग सोसायटी में रहती थीं। जांच में पता चला कि वाघमारे अक्सर मंडहरे के घर जाती थीं। अदालत में सीबीआई ने कहा कि मनीषा मंडहरे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे आपस में साजिश के तहत काम कर रहे थे। एजेंसी के मुताबिक, लीक प्रश्नपत्र शुभम खैरनार तक पहुंचाए गए।

‘स्पेशल क्लास’ में बताए गए सवाल
सीबीआई ने अदालत को बताया कि अप्रैल में मनीषा मंडहरे ने पुणे स्थित अपने घर पर कुछ चुनिंदा छात्रों के लिए ‘स्पेशल’ क्लास ली थी। इन क्लासों में बॉटनी और जूलॉजी के सवाल छात्रों को बताए गए। बताया गया कि मनीषा वाघमारे छात्रों को इन क्लासों तक लेकर आती थीं।

जांच के अनुसार, मंडहरे छात्रों को सीधे प्रिंटेड पेपर देने की बजाय सवाल बोलकर लिखवाती थीं और नोटबुक में उन्हें समझाती थीं। जांच में आयुर्वेद चिकित्सक धनंजय लोखंडे का नाम भी सामने आया है। सीबीआई का कहना है कि उन्हें वाघमारे से परीक्षा से जुड़ी सामग्री मिली थी और वह नेटवर्क में बिचौलिए की भूमिका निभा रहे थे।

टेलीग्राम तक पहुंचा ‘गेस पेपर’
सीबीआई को शक है कि शुभम खैरनार ने यह ‘गेस पेपर’ आरोपी यश यादव तक पहुंचाया। जांच के मुताबिक, यश यादव ने 29 अप्रैल को परीक्षा से चार दिन पहले फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के प्रश्नपत्र पीडीएफ फॉर्मेट में टेलीग्राम पर शेयर किए।

जांच में यह भी सामने आया कि मांगीलाल बीवाल ने अपने बेटे के लिए लीक पेपर लेने के बदले 10 से 12 लाख रुपये देने की बात कही थी। सूत्रों के अनुसार, यश यादव राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान मांगीलाल के बड़े बेटे विकास बीवाल को जानता था। सीबीआई का दावा है कि पेपर मिलने के बाद मांगीलाल ने उसकी प्रिंट कॉपी निकलवाई और बेटे अमन बीवाल, रिश्तेदारों और परिचितों में बांटी।

21 जून को होगी दोबारा परीक्षा
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद कर दी गई थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने 12 मई को एनटीए के उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक वरुण भारद्वाज की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था।

अब नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी। सीबीआई फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पैसों के लेनदेन और कॉल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का केंद्र सरकार पर हमला, वंदे मातरम फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी

नई दिल्ली

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने की केंद्रीय कार्यसमिति के दो दिवसीय अधिवेशन में सरकार की नीतियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के खिलाफ उनका संगठन अदालत का दरवाजा खटखटाएगा.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्र सरकार के वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा दिया जाने के फैसले को खारिज कर दिया है. मदनी ने वंदे मातरम को ‘विवादित गीत’ और ‘मुसलमानों के खिलाफ’ करार दिया है.

बता दें सरकार ने सभी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम के छह बंद गाना अनिवार्य किया है. इस पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा, ‘एक नोटिफिकेशन के जरिए वंदे मातरम जैसे विवादित गीत को राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया है. बीजेपी शासित राज्यों में इसे अनिवार्य भी किया जा रहा है.’

मदरसों-मस्जिदों पर अतिक्रमण का विरोध
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अरशद मदनी ने कहा, ‘दूसरी ओर मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है. मदरसों के खिलाफ रोज नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, मानो वो शैक्षणिक संस्थान न होकर गैरकानूनी गतिविधियों के केंद्र हों.’

मदनी ने बताया कि वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ भी अब कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. उनके मुताबिक, ‘ये गीत हमारे धार्मिक विश्वासों के खिलाफ है और इसे अनिवार्य बनाकर हमारी धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने की कोशिश की जा रही है.’

देश के राजनीतिक माहौल पर बात करते हुए जमीयत ने आरोप लगाया कि पहले सिर्फ मुसलमान ही सांप्रदायिक ताकतों के निशाने पर थे, लेकिन अब सीधे इस्लाम धर्म को निशाना बनाया जा रहा है.

‘शांति और एकता के साथ खतरनाक खेल खेला जा…’
अरशद मदनी ने दावा किया कि देश में नफरत की पॉलिटिक्स अब डराने-धमकाने की पॉलिटिक्स में बदल गई है. इसका मकसद मुसलमानों को डराना और उन्हें थोपी हुई शर्तों के तहत जीने के लिए मजबूर करना है. सत्ता के लिए शांति और एकता के साथ एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है, जिससे धार्मिक कट्टरता और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले चुपचाप देखते रहते हैं.

मदनी ने लिखा, ‘हाल के चुनावों के बाद, कुछ नेताओं का नफरत के ज़रिए सत्ता पाने का जुनून और बढ़ गया है और धार्मिक भावनाओं को भड़काकर मेजोरिटी को माइनॉरिटी के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, जबकि सरकारें इंसाफ और निष्पक्षता से चलती हैं, डर और धमकियों से नहीं.’

शुभेंदु अधिकारी पर मदनी का निशाना
मदनी ने शुभेंदु अधिकारी को लेकर कहा, ‘पश्चिम बंगाल के नए चुने गए मुख्यमंत्री का ये बयान कि वो सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. क्योंकि हर मुख्यमंत्री सभी नागरिकों के लिए न्याय बनाए रखने की शपथ लेता है. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी खास समुदाय के खिलाफ नफरत और बांटने वाली राजनीति को बढ़ावा देना.’

मदनी ने आरोप लगाया है कि देश को एक सोची-समझी सोच वाले देश में बदलने की एक सोची-समझी कोशिश है. यूनिफॉर्म सिविल कोड, वंदे मातरम को जरूरी बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई और SIR की आड़ में असली नागरिकों को वोट देने के अधिकार से रोकना, ये सब एक ही कड़ी की कड़ी हैं.

‘इस्लाम खुद निशाना बन गया है’
उन्होंने साफ किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ऐसे सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी. पिछली सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात कहीं ज्यादा खतरनाक हो गए हैं. पहले सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाया जाता था, अब इस्लाम खुद निशाना बन गया है.

मदनी ने लिखा, ‘2014 के बाद बनाए गए कानून और हाल के कदम इस बात का साफ सबूत हैं कि मौजूदा सरकार सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है. दुनिया भर में भी इस्लाम के खिलाफ संगठित प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है. हालांकि, इतिहास गवाह है कि जो लोग इस्लाम को मिटाना चाहते थे, वो खुद ही मिट गए. इस्लाम जिंदा था, जिंदा है, और कयामत तक जिंदा रहेगा.’

आखिर में उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हम सभी इंसाफ पसंद पार्टियों, सामाजिक संगठनों और देशभक्त नागरिकों से अपील करते हैं कि वो डेमोक्रेटिक और सामाजिक लेवल पर सांप्रदायिक और फासिस्ट ताकतों के खिलाफ एकजुट हों और देश में भाईचारे, सहनशीलता, इंसाफ और संविधान के लिए मिलकर संघर्ष करें.

कांडला पोर्ट पर सुरक्षित पहुंचा 20 हजार टन LPG जहाज ‘सिमी’, ऊर्जा आपूर्ति पर नजरें

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच 20 हजार टन एलपीजी लेकर ‘सिमी’ कैरियर कांडला के दीनदयाल पोर्ट पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया है। इस जहाज ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट को पार किया था।

इस जहाज पर 21 क्रू सदस्य सवार हैं, जिनमें आठ यूक्रेनी और 13 फिलिपीनी हैं। मौजूदा निगरानी वाले ऑपरेशन्स में होर्मुज स्ट्रेट को पार करने वाला ‘सिमी’ 11वां एलपीजी टैंकर था

होर्मुज में तनाव के बीच सुरक्षित कैसे पहुंचा जहाज?
अधिकारियों के मुताबिक, डीजी शिपिंग और विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम- प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच करीबी तालमेल से इतनी सुरक्षा मुमकिन हो पाई।

कच्चे तेल का भंडार घटा
ये जहाज ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। पिछले कुछ महीनों में भारत का कच्चा तेल भंडार तेजी से घटा है। भंडार में लगभग 15% की गिरावट आई है।

कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल कच्चा तेल भंडार फरवरी के अंत में दर्ज 107 मिलियन बैरल से घटकर 91 मिलियन बैरल रह गया है। यह वही समय था जब संघर्ष शुरू हुआ था। इस भंडार में पेट्रोलियम भंडार, रिफाइनरी होल्डिंग्स और वाणिज्यिक भंडारण शामिल हैं, लेकिन पाइपलाइन स्टॉक शामिल नहीं हैं।

आयात में कमी के बावजूद भारतीय रिफाइनरों ने अब तक प्रोसेसिंग का काम स्थिर रखा है और बिना किसी बड़ी कटौती के रिफाइनरी का काम जारी रखा है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावटें लंबे समय तक जारी रहीं तो रिफाइनरों के पास रिफाइनरी का काम कम करने या कच्चे तेल की प्रोसेसिंग का स्तर घटाने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा।

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