तमिलनाडु की इकलौती महिला मंत्री एस कीर्तना ने विधानसभा में शपथ नहीं ली, वजह जानें

चेन्नई 

तमिलनाडु की इकलौती महिला और सबसे युवा मंत्री एस कीर्तना सोमवार को विधानसभा में विधायक के रूप में शपथ ही नहीं ले पाईं। जानकारी के मुताबिक वह अपना इलेक्शन सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर पाईं और इसलिए उन्हें शपथ लेने से रोक दिया गया। विधानसभा के मुख्य सचिव के श्रीनिवासन ने उन्हें पहले शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया। वह पोडियम तक पहुंच गईं लेकिन जब श्रीनिवासन ने पूछा कि उन्होंने अपना इलेक्शन सर्टिफिके प्राप्त कर लिया है। इसपर कीर्तना ने इनकार कर दिया।

शपथ लेने से क्यों रोका गया
विधानसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण में देखा गया कि जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष) की ओर मुख करके खड़े होते हैं जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाणपत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाणपत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि उनके पास उस समय निर्वाचन प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। प्रमाणपत्र जमा नहीं कर पाने के कारण, वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें शपथ लेने की अनुमति देने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। अब वह निर्वाचन प्रमाणपत्र जमा करने के बाद किसी भी समय शपथ ले सकती हैं।” अधिकारी ने बताया कि सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे अपना प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से साथ लाएं। सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए भी यह बात साफ कर दी थी।

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सहित सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने पहले अपने प्रमाणपत्र जमा किए और उसके बाद अधिकारियों के निर्देशानुसार संविधान के तहत पद की शपथ ली। कैबिनेट में नौवें स्थान पर काबिज कीर्तना, शपथ लेने के लिए आमंत्रित की जाने वाली अंतिम मंत्री थीं।

शिवकाशी से चुनी गई हैं कीर्तना
एस. कीर्तना शिवकाशी विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के अशोकन जी. को 11,670 मतों के अंतर से हराया है। इस चुनाव में पूर्व मंत्री और अन्नाद्रमुक के दिग्गज नेता के.टी. राजेंद्र बालाजी तीसरे स्थान पर रहे। तमिलनाडु विधानसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 233 है। मुख्यमंत्री विजय ने पेरम्बलुर और तिरुचि पूर्व दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, जिसमें से उन्होंने तिरुचि पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से इस्तीफा दे दिया है।

सीएम शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट में अहम फैसले, बॉर्डर एरियाज में आज से शुरू होगा जमीन ट्रांसफर, 45 दिन में BSF को सौंपा जाएगा

कोलकाता

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार अस्तित्व में आ गई है. शुभेंदु सरकार सत्ता में आते ही फॉर्म में आ गई. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 5 मंत्रियों के साथ अपनी पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें बॉर्डर पर फेंसिंग करने और बीजेपी के मारे गए 321 कार्यकर्ताओं को सम्मान देने समेत 6 अहम फैसले लिए गए। पहली कैबिनेट बैठक के बाद सीएम शुभेंदु ने बताया कि उनकी पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश के साथ सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में नौकरी के आवेदकों की आयु सीमा पांच साल बढ़ाने की मंजूरी दी गई. यह वादा गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। 

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक की. इसमें पांच बड़े फैसले किए गए. मीटिंग में शुभेंदु के साथ सभी पांच कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का रोडमैप इस सरकार की प्राथमिकता होगी। 

पहली कैबिनेट बैठक में राज्य के मतदाताओं, चुनाव आयोग और इस विशाल चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया गया। 

शुभेंदु सरकार के पहले पांच बड़े ऐलान

1. आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राज्य में इसे लागू करने के लिए काम करेंगे। 

2. नियमों के मुताबिक, आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। 

3. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (ममता सरकार) ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था। 

4. बॉर्डर एरियाज में जमीन ट्रांसफर का काम आज से शुरू होगा. 45 दिनों के अंदर जमीन BSF को ट्रांसफर की जाएगी।
 
5. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बता दें कि बीजेपी का ऐसा दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई। 

नौकरी की सुरक्षा में विस्तार: कैबिनेट की बैठक में छठा अहम फैसला राज्य सरकार की सभी नौकरियों के लिए 5 साल का विस्तार दिया गया है. इस तरह से ये कदम पश्चिम बंगाल में शासन, सुरक्षा और कल्याण की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देते हैं. पश्चिम बंगाल में साल 2015 से कोई भर्ती नहीं हुई है, इसी वजह से सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि की गई है

आयुष्मान भारत लागू
बीजेपी ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्‍ता में आने पर राज्‍य में आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को लागू किया जाएगा. अब ये वादा पूरा होने जा रहा है. शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य ने आधिकारिक तौर पर केंद्र की स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ से जुड़ने का फैसला किया है. CM ने कहा कि अब PM की सभी योजनाएं बंगाल में लागू की जाएंगी। 

नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और BNS लागू
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पिछली CM ममता बनर्जी द्वारा रोकी गई नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और तैनाती को मंजूरी दे दी गई है. साथ ही, बंगाल में अब तक लागू न हुई भारतीय न्याय संहिता यानी BNS आज से प्रभावी हो गई है. अब सभी नए केस नए कानून के तहत दर्ज होंगे। 

2015 से बंद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी
मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सरकार ने माना कि 2015 से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई. CM ने वादे के मुताबिक नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने का ऐलान किया.कैबिनेट बैठक के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ये फैसले “नए बंगाल” की दिशा तय करेंगे. विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। 

आयुष्मान भारत योजना से गरीब और कमजोर परिवारों को इलाज मिलता है. इसमें हर साल पांच लाख रुपये तक सालाना कवरेज मिलता है. ये इलाज कैशलेस होता है.

कैबिनेट बैठक के बारे में और जानकारी देते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा, ‘बंगाल के सीमावर्ती जिलों में लगातार बदलती जनसंख्या को देखते हुए, हमारे मंत्रिमंडल ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है. मुख्य सचिव और राज्य के भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है। 

अधिकारी ने आगे बताया कि टीएमसी सरकार ने संविधान और जनता के साथ विश्वासघात किया और जानबूझकर बंगाल में जनगणना प्रक्रिया को रोके रखा ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को रोका जा सके. लेकिन अब मंत्रिमंडल ने राज्य में परिपत्र को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी है। 

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) मतलब नया आपराधिक कानून, जो पूर्ववर्ती आईपीसी और सीआरपीसी की जगह ले रहा है, राज्य में टीएमसी सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया था और कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में नए कानून को लागू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। 

बता दें कि बंगाल (293 सीट) में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है. इस चुनाव में बीजेपी को 207 सीट मिली हैं. वहीं सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। 

चुनावी जीत के बाद शुभेंदु को सीएम बनाया गया. उन्होंने ही भवानीपुर विधानसभा से ममता बनर्जी को हराया है. भवानीपुर में शुभेंदु को 73,917 वोट मिले. वहीं ममता 58,812 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. उनको 15105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 

पीएम मोदी बोले, ‘यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं’, सोमनाथ अमृत महोत्सव में लिया भाग

सोमनाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यहां पर आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जय सोमनाथ! यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। हम इस पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।” उन्होंने आगे लिखा कि पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पावनधाम सोमनाथ आकर दिव्य अनुभूति हुई है। इस अवसर पर मंदिर मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों के जोश और प्रचंड उत्साह को देखकर मन अभिभूत और भावविभोर है! मैं आज यहां उस क्षण को जी रहा हूं, जिसका अनुभव भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर किया होगा। सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण हर तरफ अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को गुजरात पहुंचे, जहां सोमनाथ में एक रोडशो किया। यह रोडशो सोमनाथ अमृत महोत्सव से पहले आयोजित किया गया था। गुजरात के गिर सोमनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। आज सुबह गुजरात के प्रभास पाटन में श्री सोमनाथ महादेव ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष महा पूजा में शामिल हुए, इसके बाद कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह संपन्न हुए, जो मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण की रीतियों के प्रतीक हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 11 तीर्थ स्थलों से लाए गए जल को मंदिर के शिखर पर अर्पित किया गया। 90 मीटर ऊंची क्रेन की सहायता से, मंदिर के शीर्ष पर कलश स्थापित किया गया।

पीएम ने लिखा कि सोमनाथ में, हर कोने में भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अनगिनत लोग एक साथ एकत्रित हुए हैं। वह दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक मील का पत्थर था।

वहीं, भारतीय वायु सेना की ‘सूर्य किरण’ एरोबेटिक्स टीम ने बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के दौरान हवाई करतब दिखाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में एक ‘विशेष महापूजा’ में भी हिस्सा लिया।
बता दें कि ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित समारोहों में मंदिर के जीर्णोद्धार और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1951 में इसके उद्घाटन की स्मृति को याद किया गया। धार्मिक समारोहों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जामनगर से सोमनाथ पहुंचने के बाद वहां रोड शो किया। वह रविवार रात गुजरात पहुंचने के बाद जामनगर में रुके थे। रोड शो में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे।

इस दौरान प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए मंदिर के पास स्थित वीर हमीरजी सर्कल तक हेलीपैड से लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हजारों लोग जमा हो गए। जब उनका काफिला इलाके से गुजरा तो समर्थकों ने झंडे लहराए और नारे लगाए, जबकि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कलाकारों ने मार्ग में निर्धारित स्थानों पर पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए।

 

अस्तित्व की गवाही और सनातन के गौरव की गौरवगाथा

 यह नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में गर्व और श्रद्धा का भाव जाग उठता है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अटूट आस्था, भारतीय सभ्यता की जीवटता, भारत भूमि के आत्मसम्मान और राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक है. गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों से बना एक देवालय नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के कभी न हारने वाले संकल्प का सजीव तथ्य है. ‘सोमनाथ हमारा स्वाभिमान’… यह उस सत्य की घोषणा है जिसने सदियों के आक्रमणों, लूट और विध्वंस के बाद भी अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी. एक हजार साल पहले 1026 में महमूद गजनवी के हमले से लेकर आज तक सोमनाथ हमें बताता है कि आस्था को तोड़ा जा सकता है, लेकिन उसके विश्वास को मिटाया नहीं जा सकता। 

सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के किनारे स्थित है. यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है. पुराणों के अनुसार चंद्रदेव ने सबसे पहले सोने का मंदिर बनवाया था. बाद में रावण ने चांदी का, भगवान कृष्ण ने चंदन का और कई राजाओं ने पत्थर का मंदिर बनाया. यह स्थान केवल पूजा और अराधना का केंद्र नहीं थी, यहां व्यापार, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम होता था. लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते थे. मंदिर की भव्यता और धन-दौलत की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। 

विनाश का काला अध्याय और सनातन का धैर्य
सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्षों की लंबी गाथा है. विदेशी आक्रांताओं ने इस मंदिर की अकूत संपदा और हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के लिए इसे बार-बार निशाना बनाया. महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, हर बार मंदिर को तोड़ा गया, लूटा गया और अपवित्र करने का प्रयास किया गया. लेकिन हर विनाश के बाद, सनातनियों का संकल्प और भी मजबूत होकर उभरा। 

1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया. उसने मंदिर लूटा, तोड़ा और लाखों श्रद्धालुओं की हत्या की. लेकिन यह पहला हमला नहीं था और आखिरी भी नहीं. अलाउद्दीन खिलजी, औरंगजेब समेत कई आक्रमणकारियों ने मंदिर को निशाना बनाया. इतिहासकार बताते हैं कि मंदिर को 16-17 बार तोड़ा गया. हर बार तोड़ने के बाद भारतीयों ने आत्मबल और आस्था के विश्वास से अपने स्वाभिमान को फिर से खड़ा किया. आक्रांताओं ने मंदिर की दीवारें तो ढहाईं, लेकिन वे लोगों के हृदय में बसे महादेव को नहीं निकाल सके. दरअसल, यह सिर्फ ईंट-पत्थर का खेल नहीं था, यह सनातन की अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण था। 

लौह पुरुष का संकल्प और आधुनिक मंदिर का उदय
स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ का आधुनिक पुनरुद्धार आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे बड़ी सांस्कृतिक घटना के रूप में वर्णित है. जूनागढ़ की आजादी के बाद, जब लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रभास पाटन की धरती पर पैर रखा तो उन्होंने समुद्र का जल हाथ में लेकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया. उन्होंने निर्णय किया कि सोमनाथ मंदिर को फिर से भव्य रूप में खड़ा किया जाएगा. उनके इस निर्णय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का भी संपूर्ण समर्थन था. स्पष्ट है कि यह स्वतंत्र भारत के उस स्वाभिमान की पुनर्स्थापना थी, जिसे विदेशी शासन ने कुचलने की कोशिश की थी। 

स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण
11 मई 1951 को जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की तो उन्होंने इसे ‘अतीत के अपमान पर भविष्य के गौरव की जीत’ बताया था. यह दिन भारतीय इतिहास में स्मरणीय है. स्वतंत्र भारत ने अपने प्राचीन गौरव को वापस पाने का संकल्प लिया था. आज सोमनाथ सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं रहा. यहां आधुनिक सुविधाएं भी विकसित हो रही हैं. लेकिन मूल भावना वही है- श्रद्धा, स्वाभिमान और गर्व. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि विरासत और विकास साथ-साथ चल सकते हैं। 

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और आज का संदेश
वर्ष 2026 में महमूद गजनवी के पहले आक्रमण को 1000 साल पूरे हो गए हैं. इस अवसर पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने इसे भारत की अदम्य सभ्यता का प्रतीक बताया है. सोमनाथ आज हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति कितनी मजबूत है. विदेशी आक्रमण आए, लूटे गए, मंदिर टूटे, लेकिन हमारी आस्था हर बार नई शक्ति के साथ खड़ी हुई. यह सनातन का सार है- नष्ट होने पर भी पुनर्जीवित होना. सोमनाथ का विध्वंस और अनेकों बार इस ‘अभिमान’ का पुनर्निर्माण यह दर्शाता है कि भारत की सांस्कृतिक स्वाभिमान की जड़ें कितनी गहरी हैं। 

स्थापत्य कला में झलकता मान-अभिमान
वर्तमान सोमनाथ मंदिर चालुक्य शैली (कैलाश महामेरु प्रासाद) में निर्मित है. इसकी भव्यता और समुद्र तट पर इसकी स्थिति इसे दिव्य बनाती है. मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा और त्रिशूल दूर से ही भारत के मान-मर्यादा का उद्घोष करते हैं. मंदिर के प्रांगण में बना ‘बाण स्तंभ’ यह बताता है कि हमारे पूर्वज विज्ञान और भूगोल में कितने निपुण थे. यह स्तंभ दर्शाता है कि सोमनाथ और दक्षिणी ध्रुव (Antarctica) के बीच पृथ्वी का कोई भू-भाग नहीं है. स्पष्ट है कि यह हमारे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम है। 

नया भारत और सोमनाथ मंदिर का विस्तार
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर परिसर का कायाकल्प हो रहा है. इसे केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है. ‘प्रसाद योजना’ के तहत बने नए कॉरिडोर, सुंदर समुद्र दर्शन पथ और डिजिटल संग्रहालय आने वाली पीढ़ी को हमारे गौरवशाली इतिहास से जोड़ रहे हैं. आज का सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना सीख रहा है.
आज जब भारत विश्व पटल पर अपनी पहचान नये सिरे से स्थापित कर रहा है, तब सोमनाथ मंदिर हमें प्रेरणा देता है – अपनी जड़ों को कभी मत भूलिए, अपनी विरासत पर गर्व करिए और हर चुनौती का सामना करिए। 

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतीक हमारा सोमनाथ
सोमनाथ मंदिर भारतीय राजनीति और समाज में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ का सबसे बड़ा स्तंभ है. यह मंदिर हमें बताता है कि विकास केवल पुलों और सड़कों से नहीं होता, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और उसकी पहचान को संजोने से होता है. जब भक्त सोमनाथ की चौखट पर माथा टेकता है, तो वह केवल एक भक्त नहीं होता, वह उस गौरवशाली परंपरा का उत्तराधिकारी होता है जिसने हजार साल के अंधेरे को चीरकर उजाले की राह चुनी है। 

स्वाभिमान है सोमनाथ, शाश्वत है सोमनाथ
सोमनाथ हमारा स्वाभिमान है क्योंकि यह हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे खड़ा हुआ जाता है और कैसे अपने स्वाभिमान की रक्षा की जाती है. सोमनाथ की जय-जयकार वास्तव में भारत की विजय का नाद है. सोमनाथ का इतिहास हमें सिखाता है कि सत्य को दबाया तो जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता. ऐसे में प्रत्येक भारतीय को एक बार सोमनाथ अवश्य पहुंचना चाहिए. वहां खड़े होकर जब ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं तो लगता है कि हजारों साल की आस्था हमें घेर लेती है. हम अनुभव करते हैं कि हम सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि एक महान सभ्यता की संतान हैं। 

LPG सिलेंडर डिलीवरी में बड़ा अपडेट: इंडेन, HPCL और भारत गैस ने जारी किया नया नोटिस

नई दिल्ली

एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी अब 100 पर्सेंट DAC कोड के जरिए होने लगी है। इससे एक भी सिलेंडर का दाएं-बाएं होना अब मुश्किल है। LPG सिलेंडर के डिस्ट्रीब्यूशन और सही उपभोक्ता तक उसकी पहुंच के लिए यह सिस्टम बेहद सुरक्षित है। हालांकि, फेक DAC कोड के जरिए लोगों को लूटने के लिए साइबर फ्रॉड भी सक्रिय हो गए हैं। LPG सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनियों ने DAC को लेकर अपडेट जारी की हैं। आइए देखें किसने क्या कहा और आगे खबर में यह भी जानेंगे कि असली और फेक DAC की पहचान कैसे करें?

असली और फेक DAC कोड की कैसे करें पहचान
LPG डिलीवरी मैसेज की पहचान को लेकर एचपीसीएल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि स्कैमर्स LPG डिलीवरी के नाम पर फर्जी मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन असली HP Gas मैसेज की पहचान जानकर आप सुरक्षित रह सकते हैं।

Delivery Authentication Code साझा करने से पहले हमेशा जांच करें। इस पोस्ट में कंपनी ने आगे लिखा है, “मैसेज आधिकारिक sender name “VM-HPGASc-S” से आया हो। उसमें 4 अंकों का OTP हो और OTP केवल सिलेंडर डिलीवरी के समय ही इस्तेमाल किया जाए।

ध्यान रखें, HP Gas के कर्मचारी कभी भी फोन कॉल, WhatsApp या किसी संदिग्ध लिंक के जरिए OTP नहीं मांगते। अगर मैसेज जल्दबाजी में कार्रवाई करने को कहे, अजीब लगे या अलग फॉर्मेट में हो, तो उस पर भरोसा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। HP Gas के साथ साइबर फ्रॉड से बचें।” इसी तरह की अपील भारत गैस ने भी की है।
इंडेन के उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी

साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह बताते हैं कि इंडेन के मैसेज को उदाहरण के साथ बताते हैं कि सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने सिलेंडर बुक कराया था या नहीं। अगर बिना बुक कराए कोई डिलीवरी मैसेज है तो उसपर ध्यान न दें। अगर बुक कराया तो यह देखें कि मैसेज किसी आधिकारिक सेंडर ID (जैसे VK-INDANE, VM-INDANE आदि) से आया हैं कि नहीं।

इसके बाद यह देखें कि मैसेज में बुकिंग या इनवायस नंबर दिया गया है या नहीं और 6 अंकों का DAC Code है और इसे केवल डिलीवरी बॉय को शेयर करने की बात कही गई है या नहीं। अंत में Indane का नाम है या नहीं। DAC/OTP केवल तब शेयर करें जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर पहुंच जाए। उससे पहले कभी साझा न करें।

एलपीजी सिलेंडर के क्या हैं आज के रेट
इंडेन के मुताबिक बेंगलुरु में घरेलू ₹915.50 और कमर्शियल ₹3152 में बिक रहा है। हैदराबाद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट ₹965 और कमर्शियल ₹3315 है। इंदौर में घरेलू सिलेंडर 941 रुपये का है और कमर्शियल 3176.5 रुपये का। रायपुर में घरेलू सिलेंडर 984.5 रुपये और कमर्शियल 3294.5 रुपये में है। पटना में आज घरेलू सिलेंडर ₹1002.50 और कमर्शियल ₹3346.5 का है।

जयपुर में एलपीजी घरेलू सिलेंडर ₹916.5 और 19 किलो वाला कमर्शियल ₹3099 में बिक रहा है। देहरादून में घरेलू सिलेंडर ₹932 और कमर्शियल ₹3129 का है। अंडमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट ₹989 हैं तो कमर्शियल के ₹3490 है।

चंबा में भयावह हादसा: खाई में गिरा गुजरात का वाहन, 6 पर्यटकों की मौत

 चंबा

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया. जिसमें छह पर्यटकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा चंबा जिले के ककीरा क्षेत्र में उस वक्त हुआ, जब गुजरात से आए पर्यटकों का वाहन अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए मौके पर पहुंचे। 

जानकारी के मुताबिक पर्यटक हिमाचल प्रदेश घूमने आए थे और ककीरा क्षेत्र से गुजर रहे थे. इसी दौरान पहाड़ी रास्ते पर एक मोड़ के पास चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा. देखते ही देखते गाड़ी सड़क से नीचे सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी. हादसा इतना भीषण था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। 

कुछ घायलों की हालत है गंभीर
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंच गई. स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. काफी मशक्कत के बाद घायलों और मृतकों को खाई से बाहर निकाला गया. घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है. डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी है. प्राथमिक जांच में माना जा रहा है कि पहाड़ी रास्ते पर तेज रफ्तार और मोड़ पर संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ. हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. दुर्घटना के बाद कुछ समय के लिए सड़क मार्ग भी बाधित रहा। 

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है. वहीं, पुलिस ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की अपील की है। 

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