उत्तर रेलवे का बड़ा रिकॉर्ड: सोलर एनर्जी से 2 महीने में ₹2.2 करोड़ की बचत, 3.4 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन

नई दिल्ली
 नॉर्दर्न रेलवे पर्यावरण संरक्षण और बिजली की लागत कम करने के मकसद से सोलर एनर्जी को बढ़ावा दे रहा है। इस पहल के तहत, अप्रैल और मई के दौरान रूफटॉप सोलर क्षमता में 2.2 MW की बढ़ोतरी की गई है। आने वाले दिनों में सोलर पैनल लगाने के काम को और तेज करने की कोशिश की जाएगी।

चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी, एनर्जी सिक्योरिटी, कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, नॉर्दर्न रेलवे ने अपने रिन्यूएबल एनर्जी सफर में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है।

कुल सोलर क्षमता बढ़कर लगभग 28.35 MW 
इस फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती दो महीनों में, अलग-अलग रेलवे स्टेशनों और सर्विस बिल्डिंग्स में लगभग 2.2 MW क्षमता वाले ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट चालू किए गए। इन नए प्लांट के लगने से, नॉर्दर्न रेलवे की कुल सोलर क्षमता बढ़कर लगभग 28.35 MW हो गई है।

यह उपलब्धि कार्बन उत्सर्जन कम करने, नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को पूरा करने और पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने की इंडियन रेलवे की कोशिशों को और मजबूत करती है।

इस फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती दो महीनों में, नॉर्दर्न रेलवे के सोलर पावर प्लांट से लगभग 3.4 मिलियन यूनिट बिजली पैदा हुई, जिससे एनर्जी की लागत में लगभग ₹2.2 करोड़ की बचत हुई। इस सोलर पावर जनरेशन से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 2,820 टन की कमी आने की उम्मीद है।

 

धर्म परिवर्तन के बाद OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा पिछड़ा वर्ग का लाभ

चेन्नई

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिंदू धर्म की पिछड़ी, अति-पिछड़ी या अनुसूचित जाति से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को ‘बैकवर्ड क्लास मुस्लिम’ का दर्जा और आरक्षण देने की बात कही गई थी।

जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस पी बी बालाजी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाने के बाद सिर्फ एक मुस्लिम होता है। पीठ ने कहा, “कोई भी शख्स इस्लाम अपनाने के बाद सिर्फ ‘एक मुसलमान’ रह जाता है, बस बात यहीं खत्म। वह बैकवर्ड क्लास मुस्लिम के दर्जे या आरक्षण का दावा कतई नहीं कर सकता।”

क्या था मामला?
यह मामला थूथुकुडी जिले के रहने वाले समीर अहमद की याचिका के बाद सामने आया। पहले उसका नाम परमशिवम था। परमशिवम का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था। 2015 में उसने इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम समीर अहमद रख लिया और मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी की। धर्म परिवर्तन के बाद समीर ने तहसीलदार के पास ‘मुस्लिम लेब्बाई’ जाति का कम्युनिटी सर्टिफिकेट पाने के लिए आवेदन किया। इस जाति को तमिलनाडु में ‘पिछड़े वर्ग के मुसलमानों’ का दर्जा प्राप्त है।

तहसीलदार ने समीर का आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद समीर ने हाईकोर्ट का रुख किया और तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें कनवर्टेड मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात कही गई थी। तमिलनाडु सरकार ने दलील दी कि कनवर्ट होने वाले व्यक्ति को आरक्षण इसीलिए दिया जा रहा है ताकि वह अपनी पुरानी आरक्षित श्रेणी का लाभ उठा सके। हालांकि हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की दलील को खारिज कर दिया।

क्या बोला मद्रास हाईकोर्ट?
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि मुस्लिम समाज में भी कई ऐसे समुदाय मौजूद हैं, लेकिन इन समुदायों की सदस्यता केवल जन्म से तय होती है। बेंच ने कहा, “बेझिझक यह कहा जा सकता है कि वे हिंदू धर्म की जातियों के समान हैं। जैसे जाति जन्म से तय होती है, वैसे ही कोई व्यक्ति जन्म से ही राउथर, मरक्कयार या दक्कनी मुस्लिम होता है। यह कहना बेतुका है कि किसी को राउथर मुस्लिम में बदला जा सकता है।”

मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इस सरकारी आदेश को संविधान और इस्लाम दोनों के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। बेंच ने साल 1951 के ‘जी माइकल बनाम एस वेंकटेश्वरन’ मामले का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया था कि जब कोई हिंदू इस्लाम अपनाता है, तो वह ‘सिर्फ एक मुसलमान’ बनता है और मुस्लिम समाज में उसका स्थान उसकी पिछली जाति से तय नहीं होता।

सिर्फ आरक्षण के लिए नहीं दे सकते लाभ
अदालत ने कहा, “ईसाई मिशनरियों और इस्लामिक उपदेशकों ने दशकों और सदियों तक यह प्रचार किया कि उनके धर्मों में सामाजिक समानता है, जबकि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था है। धर्म-परिवर्तन के लिए ऐसा रुख अपनाने के बाद, अब यह दावा करना गलत है कि इस्लाम में भी ऊंच-नीच है। हमारी राय में, कुछ समुदायों को ‘पिछड़ा’ और बाकी को ‘अगड़ा’ मानना ​​कुरान की शिक्षाओं के खिलाफ है। इस्लाम एक ऐसा समाज बनाना चाहता है जिसमें सब बराबर हों। अल्लाह की नजर में सब समान हैं। वहां कोई सामाजिक ऊंच-नीच नहीं है।” अदालत ने कहा कि राज्य सरकार सिर्फ इसलिए विभिन्न जातियों के कनवर्टेड मुस्लिमों का एक समूह बनाकर उन्हें आरक्षण नहीं दे सकती कि वे लाभ उठाते रहें।

सुवेंदु अधिकारी का नया कानून चर्चा में, गुंडई पर सख्त कार्रवाई का दावा; ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कड़ा बताया

कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार का दिन एक बड़े धमाके की तरह होगा. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी राज्य के 54 साल पुराने कानून में बदलाव करने जा रही है. एक ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र’ लाने जा रहे हैं, जो अपराधियों की रीढ़ तोड़ देगा. इस नए कानून को उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ से भी कई गुना अधिक घातक और सख्त माना जा रहा है. इसे लेकर पूरे बंगाल के गुंडा-बवालियों में अभी से मौत का खौफ है. जानते हैं पूरी कहानी। 

54 साल पुराने कानूनों की विदाई
बंगाल राज्य सरकार1972 में बने कानून The West Bengal Maintenance of Public Order Act, 1972 उसमें संशोधन करने जा रही है.  इसे 1972 में पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित किया गया था और उसी वर्ष राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून लागू हुआ था। 

इस कानून का संक्षिप्त इतिहास
1960 और 70 का दशक के दौर में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक आंदोलन और कानून-व्यवस्था की भारी समस्याएं थीं. सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) को बनाए रखने, उग्रवादी गतिविधियों को रोकने और अवैध हथियारों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार को विशेष शक्तियों की जरूरत थी, जिसके लिए यह कानून 1972 में लाया गया था। 

 ‘पश्चिम बंगाल में नया कानून?
लेकिन अब बंगाल सरकार ‘पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026’ को विधानसभा में पेश करने जा रही है. उसने दशकों पुराने ढर्रे को बदल दिया है. 1972 के कानून अब आधुनिक संगठित अपराध और दंगाई मानसिकता से लड़ने के लिए नाकाफी साबित हो रहे थे. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बंगाल में ‘कानून का राज’ होगा, न कि ‘सिंडिकेट का राज’. 54 सालों से चली आ रही ढील अब हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। 

7 पीढ़ियों तक होगी वसूली, कोई नहीं बचेगा!
इस कानून का सबसे खौफनाक पहलू इसका ‘रिकवरी मैकेनिज्म’ है. यदि कोई दंगाई सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी भरपाई सिर्फ अपराधी से नहीं, बल्कि उसकी संपत्ति से होगी. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इसके प्रावधान इतने कड़े हैं कि एक बार दंगा करने पर अपराधी की आने वाली सात पीढ़ियां हर्जाना भरते-भरते कंगाल हो जाएंगी. यह केवल दंड नहीं, बल्कि ‘आर्थिक खात्मा’ है, जो दंगाइयों को कानून हाथ में लेने से पहले सोचने पर मजबूर कर देगा। 

बुलडोजर मॉडल का भी ‘बाप’ है ये बिल
उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ के मॉडल ने देशभर में दंगाइयों के बीच खौफ पैदा किया था, लेकिन सुवेंदु अधिकारी का यह नया बिल उससे भी दो कदम आगे है. इसमें ‘प्रिवेंटिव डिटेंशन’ (बिना मुकदमे हिरासत) और ‘एक्सटर्नमेंट’ (जिले से निष्कासन) जैसी शक्तियां पुलिस को असीमित अधिकार देती हैं. यह बिल दंगाइयों को पनाह देने वालों के खिलाफ भी ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है. किसी को पनाह देना भी अब दो साल की सीधी जेल का निमंत्रण होगा। 

विपक्ष की रूह क्यों कांप रही है?
जैसे ही इस बिल का ड्राफ्ट सामने आया, विपक्ष के गलियारों में सन्नाटा पसर गया है. जिन नेताओं को लगता था कि वे दंगों के जरिए अपनी राजनीति चमका लेंगे, उनकी रूह अब कांप रही है. वे जानते हैं कि यह कानून न केवल गुंडों को खत्म करेगा, बल्कि उन बड़े चेहरों को भी बेनकाब करेगा जो दंगों को स्पॉन्सर करते हैं. सुवेंदु अधिकारी सरकार ने साफ कर दिया है कि दंगा करना है, तो कीमत चुकाने के लिए तैयार रहो। 

शांति और सुरक्षा का नया युग
यह बिल बंगाल की बदलती तस्वीर का गवाह है. सरकार का कहना है कि यह कानून शरीफ नागरिकों की रक्षा के लिए एक ढाल है. जो बंगाल कल तक अराजकता की आग में जलता था. वह अब अपराधियों के लिए एक बड़ी जेल साबित होगा. सोमवार को जब यह कानून विधानसभा में बहस के लिए आएगा तो देखना यह होगा कि असल में क्या हुआ। 

RBI का नया नियम: किन लोगों को मिलेंगे ₹25,000? जानिए कौन उठा सकेगा इस सुविधा का लाभ

  नई दिल्‍ली

सोचिए एक दिन आपके फोन पर एक मैसेज आता है कि आपके 20,000 रुपये कट गए हैं, जबकि आपने कभी इसका पेमेंट नहीं किया था और ना ही कोई अप्रूवल दिया था. फिर तुरंत आप इसकी जांच करते हुए बैंक से बात करते हैं, बैंक भी ये बताने में असमर्थ होता है कि पैसे कैसे मिलेंगे। 

आपने शिकायत भी दर्ज करा दी कि आपके खाते से 20,000 रुपये का ऑनलाइन फ्रॉड हो चुका है, लेकिन सवाल हमेशा से रहेगा कि आपको पैसा वापस मिलेगा या नहीं? क्‍योंकि ज्‍यादातर ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कस्‍टमर्स का पैसा रिकवर नहीं हो पाता है. हालांकि, अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सीधे तौर पर शामिल हो चुका है।  

RBI ने एक नया नियम निकाला है, जिसके तहत अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड या UPI के जरिए स्‍कैम होता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आपको मुआवजे का भुगतान करेगा. 24 जून 2026 को, आरबीआई ने नोटिफिकेशन जारी किया है।

किस तरह के फ्रॉड पर मिलेगा मुआवजा
ये नियम स्‍मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर सभी कमर्शियल बैंकों पर लागू होते हैं और 1 जनवरी, 2027 से उस तारीख को या उसके बाद किए गए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के लिए प्रभावी होंगे। 

सरल शब्दों में कहें तो, इसमें आज आप जितने भी प्रकार के डिजिटल भुगतान करते हैं, वे सभी शामिल हैं, जैसे यूपीआई ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान, चाहे वे कार्ड स्वाइप या टैप करके किए गए हों या कार्ड की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करके किए गए हों. अगर आपने डिजिटल माध्यम से पैसे का लेन-देन किया है, तो इसे इस कैटेगरी में रखा जाएगा। 

कौन करेगा भुगतान? 
जब कोई धोखाधड़ी वाला लेनदेन होता है, तो नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है, आप, बैंक, या कोई और? RBI ने यह भी जानकारी दी है कि यह तय किस आधार पर किया जाएगा. आरबीआई का कहना है कि बैंक सिर्फ यह कहकर हट नहीं सकता कि फ्रॉड के दौरान कस्‍टमर्स लापरवाह थे, अब उन्‍हें साबित भी करना होगा। 

RBI ने रखा तीन कंडीशन
    अगर धोखाधड़ी बैंक की गलती के कारण हुई है, जैसे कि सुरक्षा में चूक, सिस्टम में गड़बड़ी, या बैंक द्वारा आपको धोखाधड़ी की सूचना न भेजना, तो नियम स्पष्ट है. बैंक को पूरे पैसे का भुगतान करना होगा, चाहे कस्‍टमर ने इसकी जानकारी दी हो या नहीं। 

    अगर धोखाधड़ी किसी तीसरे पक्ष, जैसे कि भुगतान ऐप, भुगतान गेटवे या दूरसंचार प्रदाता के कारण हुई है, न कि आपके या बैंक के कारण, तो भी आपको शून्य दायित्व और पूर्ण धनवापसी प्राप्त होगी, लेकिन केवल तभी जब कस्‍टमर धोखाधड़ी की घटना की तारीख से पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना देता है. पांच दिन बाद रिपोर्ट करें, और आपकी देनदारी बैंक की अपनी आंतरिक नीति के अनुसार तय की जाएगी। 

    अगर धोखाधड़ी आपकी लापरवाही के कारण हुई है, जैसे कि आपने अपना ओटीपी साझा किया, अपने बैंक से मिली स्पष्ट धोखाधड़ी की चेतावनी को अनदेखा किया, या कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड किया, तो नियम अधिक जटिल हैं, और यहीं पर इस अधिसूचना का वास्तव में नया हिस्सा सामने आता है। 

आपकी गलती पर भी मिल सकती है रकम
नए नियमों के तहत, भले ही आप तकनीकी रूप से लापरवाह रहे हों, जैसे कि आपने किसी फ़िशिंग लिंक पर क्लिक किया हो या कोई ऐसा ओटीपी शेयर किया हो जो आपको नहीं करना चाहिए था, फिर भी आपको मुआवजा मिल सकता है, बशर्ते नुकसान कम हो और आपने तुरंत कार्रवाई की हो। 

कितना मिलेगा मुआवजा? 
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुआवजे का भुगतान पूरे लाइफ में एक ही बार किसी एक व्‍यक्ति को किया जाएगा. यह भुगतान 25,000 रुपये या 85 फीसदी जो भी कम हो किया जाएगा. अगर मान लीजिए किसी व्‍यक्ति के साथ 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी हुई है और कस्‍टमर ने शिकायत दर्ज कराई है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये का ही मुआवजा दिया जाएगा. अगर उसके साथ दोबारा फ्रॉड होता है तो उसे कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। 

कौन कितना करेगा पेमेंट? 
छोटे धोखाधड़ी के मामलों में, खासकर 29,412 रुपये से कम के नुकसान वाले मामलों में, जहां मुआवजा नुकसान का 85 प्रतिशत होता है. घरेलू धोखाधड़ी के मामलों में, 65 प्रतिशत रिजर्व बैंक द्वारा, 10 प्रतिशत ग्राहक के बैंक द्वारा और बाकी 10 प्रतिशत लाभार्थी बैंक द्वारा वहन किया जाएगा. लाभार्थी बैंक, वह बैंक है जिसने सबसे पहले आपका चोरी हुआ पैसा प्राप्त किया था। 

29,412 रुपये और 50,000 रुपये के बीच के थोड़े बड़े नुकसान के लिए, जहां मुआवजे की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये है, RBI, ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक क्रमशः 19118 रुपये, 2941 रुपये और 2941 रुपये का योगदान करेंगे। 

 

भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए 1 जुलाई को भारत आएंगी जापान की प्रधानमंत्री, कई अहम समझौतों पर रहेगी नजर

नई दिल्ली
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जापान की पीएम साने ताकाइची तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचेंगी. पीएम ताकाइची 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगी. यह उनका पहला भारत दौरा है. प्रधानमंत्री ताकाइची 1-3 जुलाई, 2026 तक नई दिल्ली के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी. यह समिट दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करने और मजबूत करने के साथ-साथ परस्पर हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर देगा। 

यह प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी अगस्त 2025 में जापान के दौरे पर पहुंचे थे, जहां वे 15वें भारत-जापान सालाना समिट में शामिल हुए. यह भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में टोक्यो में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ भारत-जापान आर्थिक मंच कार्यक्रम के दौरान शीर्ष उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी पर प्रकाश डाला और द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए पांच-पॉइंट रोडमैप पेश किया। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा अभी भारत-जापान बिजनेस फोरम की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. इसमें कंपनियों के बीच हुई बिजनेस डील का विस्तार से वर्णन दिया गया है. इस प्रगति के लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं. दो दिवसीय जापान दौरे पर पीएम मोदी ने प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के एक समूह के साथ एक बैठक की. इस दौरान भारत और जापान के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों पर चर्चा हुई. इसके अलावा, उन्होंने टोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के राज्यपालों से मुलाकात की थी. प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने से संबंधित कई समझौते पर मुहर लगी। 

ताकाइची का पहला भारत दौरा

यह प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा अगस्त 2025 में 15वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के टोक्यो दौरे के बाद हो रहा है। यह दौरा भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पीएम मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ मियागी प्रांत के सेंडाई शहर का दौरा किया था. इस दौरान दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड (टीईएल मियागी) का दौरा किया. कारखाने में उन्हें टीईएल की वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भूमिका, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और भारत के साथ वर्तमान व भविष्य के सहयोग के बारे में जानकारी दी गई थी। 

इस दौरे से दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण, टेस्टिंग और सप्लाई चेन में सहयोग के अवसरों की व्यावहारिक समझ बनी. प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और जापान की उन्नत तकनीक के बीच सामंजस्य के तौर पर रेखांकित किया गया। 

दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में सहयोग गहन करने, जापान-भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन साझेदारी के लिए सहमति को आगे बढ़ाने और भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा व आर्थिक सुरक्षा वार्ता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई. इस दौरान मजबूत, लचीली और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित करने के साझा लक्ष्य पर भी जोर दिया गया। 

ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, वॉर मेमोरियल पर किया गया अंकित

 नई दिल्ली

भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवान अब औपचारिक रूप से देश के सामने आए हैं. सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक किए हैं. इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया गया है. युद्ध स्मारक की वॉल 3डी पर 2025 सेक्शन में अंकित किया गया है। 

यह पहली बार है जब सरकार ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन सिंदूर में हुई मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. इससे पहले सरकार ने इन शहीदों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी, हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स और अटकलें चल रही थीं। 

मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाया था. इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. यह चार दिनों तक चला. इसका मकसद सीमा पार से आने वाले आतंकवाद को कुचलना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना था. इस दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। 

अब तक सरकार ने ऑपरेशन के दौरान हुई सैन्य क्षति के बारे में विस्तार से नहीं बताया था. लेकिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह नामों को शामिल करना सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकृति मानी जा रही है कि ऑपरेशन में भारतीय बलों को नुकसान हुआ था। 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित छह शहीद सैनिकों और एयर वारियर्स के नाम इस प्रकार हैं…

    सूबेदार मेजर पवन कुमार – हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड  
    राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र – 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री  
    लांस नायक दिनेश कुमार – 5 फील्ड रेजिमेंट  
    एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक – 851 लाइट रेजिमेंट  
    हवलदार सुनील कुमार सिंह – 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी  
    सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल – 39 विंग

इनमें दो सैनिकों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया था – राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु मेडल मिला था। 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का महत्व
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास है. यहां देश के सभी शहीद सैनिकों के नाम दीवारों पर अमर कर दिए जाते हैं. हर साल नए शहीदों के नाम संबंधित वर्ष के सेक्शन में जोड़े जाते हैं. इन छह नामों को 2025 सेक्शन में शामिल किया गया है। 

रोल ऑफ ऑनर में नाम दर्ज होना सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देने का तरीका है. परिवारों, साथी सैनिकों और पूरे देश के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अब इन शहीदों को आधिकारिक रूप से फॉलेन हीरोज कहा जा रहा है। 

सरकार की चुप्पी और अब खुलासा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई दिनों तक दोनों तरफ से तनाव रहा. भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी कुछ दावे किए. लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही सैन्य हताहतों की संख्या या नामों पर चुप्पी साध रखी थी. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक वजहों से यह गोपनीयता बरती गई थी। 

अब नाम जारी करने को विशेषज्ञ सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इससे परिवारों को न्याय मिला है. देश के लोग अपने शहीदों को सलाम कर सकते हैं. ये छह जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर गए. सूबेदार मेजर पवन कुमार जैसे अनुभवी जवान ब्रिगेड की अगुवाई करते थे। 

राइफलमैन सुनील कुमार जैसे युवा सिपाही सीमा पर तैनात थे. एविएशन टेक्नीशियन और सार्जेंट जैसे एयर वारियर्स ने हवाई समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर शहीद के परिवार में अब दर्द है, लेकिन गर्व भी है. पूरे देश को इन वीरों पर गर्व है. इनके बलिदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग हैं। 

केतन अग्रवाल हत्याकांड: फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस, पीड़ित परिवार से मिले CM फडणवीस

मुंबई 

महाराष्ट्र के लोनावला ग्रामीण इलाके में केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में उनके पिता विशाल अग्रवाल ने पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर बेटे के लिए न्याय की मांग की है. मुख्यमंत्री ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के साथ-साथ सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग भी तत्काल स्वीकार कर ली। 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ऑफिस से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया, “लोनावला के ग्रामीण इलाके में केतन अग्रवाल की दुखद हत्या के मामले में केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने आज पुणे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की. हम यह पक्का करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इस मामले में दोषियों को सबसे कड़ी सज़ा मिले. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें भरोसा दिलाया कि परिवार को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। 

पोस्ट में आगे कहा गया है कि इस मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और उज्ज्वल निकम को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने की उनकी मांग को भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत मान लिया और कानून एवं न्याय विभाग के सचिव को इस बारे में निर्देश जारी किए. सीनियर एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने भी इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर काम करने के लिए अपनी सहमति दे दी है। 

सिया के भाई साहिल को अफेयर के बारे में सब पता था

लोहागढ़ किले से रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल मर्डर के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस की नजर सिया गोयल के भाई साहिल गोयल पर भी टिक गई है. पुलिस ने साहिल को पूछताछ के लिए तलब किया है. सूत्रों के मुताबिक, उसे अपनी बहन सिया गोयल और चेतन चौधरी के अफेयर की पहले से जानकारी थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि  उसने यह बात परिवार या किसी अन्य व्यक्ति से क्यों नहीं बताई। 

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि साहिल का बयान इस पूरे घटनाक्रम की कई अहम कड़ियों को जोड़ सकता है. फिलहाल उससे विस्तृत पूछताछ की जा रही है और उसके बयान को केस डायरी का हिस्सा बनाया जा रहा है. जांच टीम यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि परिवार के भीतर सिया की मानसिक स्थिति, उसके रिश्तों और शादी को लेकर क्या चर्चाएं होती थीं। 

 भाई के बयान से खुल सकती हैं कई परतें

सूत्रों के अनुसार, पुलिस के पास ऐसे कुछ इनपुट हैं जिनसे संकेत मिलता है कि साहिल को सिया और चेतन की दोस्ती या संपर्क के बारे में जानकारी थी. हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी इन दोनों के संपर्क की जानकारी थी या नहीं. यदि किसी को पहले से जानकारी थी तो उसने इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया, यह भी जांच का हिस्सा है। 

पूछताछ में सामने आई हत्या की कथित पूरी साजिश
इस बीच पुलिस जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है. जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने पूछताछ के दौरान हत्या की पूरी योजना का क्रमवार विवरण बताया है. पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहागढ़ किले पर पहुंचने से पहले दोनों ने पूरी योजना तैयार कर ली थी. तय हुआ था कि सिया एक निश्चित स्थान पर बैठकर पहले से तय इशारा करेगी. जैसे ही संकेत मिलेगा, चेतन पीछे से आकर केतन अग्रवाल को अचानक गहरी खाई में धक्का देगा. अधिकारियों का कहना है कि घटना ठीक उसी योजना के अनुसार हुई. केतन को अंतिम क्षण तक किसी तरह का संदेह नहीं हुआ और इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, उसे खाई में धक्का दे दिया गया। 

शुरुआत में दोनों ने बचने की कोशिश की
जांच अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपी लगातार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे. चेतन चौधरी ने पहले दावा किया कि वह किले पर तो मौजूद था, लेकिन घटना वाले स्थान तक नहीं गया था. उसने यह भी कहा कि उसे नहीं पता कि आखिर वहां क्या हुआ. हालांकि पुलिस को उसके बयान पर भरोसा नहीं हुआ. तकनीकी साक्ष्यों, घटनास्थल से मिले तथ्यों और लगातार पूछताछ के बाद दोनों के बयान बदलने लगे. इसके बाद दोनों ने कथित रूप से अपराध स्वीकार करते हुए पूरी योजना पुलिस के सामने रखी 

भागकर शादी नहीं, हत्या का रास्ता क्यों चुना ?
पूछताछ के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से यह सवाल भी किया कि यदि वे एक-दूसरे से प्रेम करते थे तो भागकर शादी क्यों नहीं कर ली. पुलिस के अनुसार, दोनों का जवाब था कि यदि वे घर से भाग जाते तो दोनों परिवारों की सामाजिक बदनामी होती. इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. यह जवाब जांच अधिकारियों के लिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि पुलिस का मानना है कि यदि यह कथन सही है तो हत्या की साजिश पहले से सोची-समझी थी. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 18 जून की घटना पहली कोशिश नहीं थी. अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले भी आरोपी केतन अग्रवाल को दो बार लोहागढ़ किले पर लेकर गए थे. जांच के मुताबिक, दोनों मौकों पर कथित योजना किसी कारण सफल नहीं हो सकी. इसके बाद तीसरी बार मौका देखकर वारदात को अंजाम दिया गया. पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण कर रही है। 

नवंबर में होनी थी शाही शादी
केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई हो चुकी थी. दोनों की शादी इसी वर्ष नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में प्रस्तावित थी. दोनों परिवार विवाह की तैयारियों में जुटे थे और कार्यक्रम को लेकर उत्साह था. पुलिस के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि सिया कथित रूप से इस शादी से खुश नहीं थी. हालांकि परिवार का दावा है कि उसने कभी इस तरह की कोई बात उनके सामने नहीं रखी। 

पिता ने बेटी के लिए भी मांगी कठोर सजा
सिया के पिता प्रवीण गोयल मीडिया के सामने आए. उन्होंने कहा कि यदि इस अपराध में उनकी बेटी दोषी साबित होती है तो उसे भी उतनी ही कठोर सजा मिलनी चाहिए जितनी किसी अन्य आरोपी को मिलेगी. उन्होंने कहा कि केतन उनके लिए बेटे जैसा था और उसकी मौत ने दोनों परिवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था और किसी ने भी कभी ऐसी घटना की कल्पना नहीं की थी. सिया की मां पूजा गोयल ने भी पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा. उनके अनुसार, सिया और चेतन की पहचान एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी. परिवार को सिर्फ इतनी जानकारी थी कि दोनों एक-दूसरे को जानते हैं. उन्होंने कहा कि शादी तय करने से पहले कई बार सिया से पूछा गया था कि क्या वह केतन अग्रवाल से शादी करना चाहती है. हर बार उसने सकारात्मक जवाब दिया और यह भी कहा कि उसका किसी अन्य युवक से कोई संबंध नहीं है. पूजा गोयल का कहना है कि परिवार को कभी ऐसा संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि बेटी किसी मानसिक दबाव में है या शादी नहीं करना चाहती। 

परिवार ने रिश्ते की पूरी कहानी बताई
प्रवीण गोयल ने बताया कि सबसे पहले गोवा में एक पारिवारिक समारोह के दौरान रिश्ते की चर्चा हुई थी. उस समय उन्होंने बेटी की कम उम्र का हवाला देते हुए जल्दबाजी से इनकार किया था. बाद में कर्जत में आयोजित एक अन्य पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान अग्रवाल परिवार की ओर से दोबारा प्रस्ताव आया. रिश्तेदारों ने दोनों परिवारों को उपयुक्त बताते हुए इस रिश्ते पर आगे बढ़ने की सलाह दी. इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवाह तय हुआ. प्रवीण गोयल ने यह भी कहा कि उन्होंने चेतन चौधरी को कभी देखा तक नहीं था और न ही उससे कोई बातचीत हुई थी. उनके मुताबिक, उन्हें बेटी और चेतन के कथित संबंधों की कोई जानकारी नहीं थी। 

 

Pune Fort Case: सिया की WhatsApp चैट से बड़ा खुलासा! ट्रैकिंग का प्लान केतन का था या चेतन का? माता-पिता ने की कड़ी सजा की मांग

 पुणे

लोहगढ़ किले पर ट्रैकिंग सिया की जिद थी या चेतन की. ऐसा तो नहीं यह केतन का बनाया हुआ प्लान था ? पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच के बीच अब एक नया दावा सामने आया है. इस बार यह दावा किसी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का नहीं, बल्कि मुख्य आरोपी सिया गोयल की मां पूजा गोयल का है. उनका कहना है कि जिस लोहगढ़ ट्रैकिंग को लेकर अब पूरी कहानी खड़ी की जा रही है, वहां जाने के लिए सिया नहीं, बल्कि केतन लगातार कह रहे थे. इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि इस बात के WhatsApp चैट आज भी सिया के मोबाइल में मौजूद हैं। 

उधर पुलिस का दावा है कि 18 जून को लोहगढ़ किले पर हुई घटना एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. वहीं दूसरी ओर सिया के माता-पिता का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी और चेतन चौधरी के कथित प्रेम संबंधों की कोई जानकारी नहीं थी और न ही कभी यह महसूस हुआ कि सिया शादी से खुश नहीं थी। 

 मां ने खोला WhatsApp चैट का जिक्र

पूजा गोयल ने बातचीत में सबसे अहम दावा ट्रैकिंग को लेकर किया. उन्होंने कहा कि जब 18 जून को लोहगढ़ जाने की बात हुई तो सिया खुद वहां जाने के पक्ष में नहीं थी. उसने वीडियो कॉल पर अपनी होने वाली सास से भी कहा था कि उसे ट्रैकिंग पर नहीं जाना है. पूजा गोयल के मुताबिक, सिया ने उनसे कहा था कि वह केतन को मना कर चुकी है. उसने अपनी होने वाली सास से भी कहा कि आप ही केतन को समझाइए कि ट्रैकिंग का कार्यक्रम टाल दें, क्योंकि अगले दिन महाबलेश्वर जाना था और थकान हो जाएगी. लेकिन परिवार की ओर से जवाब मिला कि यदि केतन कह रहे हैं तो चले जाओ.  यहीं पर पूजा गोयल ने एक और बड़ा दावा किया. उनका कहना है कि इस पूरी बातचीत के WhatsApp चैट मोबाइल में मौजूद हैं। 

केस में भावुक होकर बोले सिया के मां- बाप  …
 केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए पहलू सामने आ रहे हैं. इस बीच पहली बार सिया गोयल के माता-पिता ने सामने आकर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि केतन और सिया का रिश्ता कैसे तय हुआ था और चेतन चौधरी के बारे में उन्हें क्या जानकारी थी। 

केतन के घरवालों ने शादी में देखा था सिया को
सिया के पिता प्रवीण गोयल ने बताया कि यह रिश्ता किसी मैट्रिमोनियल वेबसाइट या पारंपरिक रिश्ते के जरिए नहीं हुआ था. उनके मुताबिक, परिवार के एक शादी समारोह के दौरान गोवा में पहली बार सिया को देखकर केतन के परिवार की ओर से रिश्ते की बात की गई थी. बाद में दोनों परिवारों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और रिश्ता तय हो गया। 

पुलिस का दावा इससे अलग
हालांकि, पुलिस की जांच अब तक एक अलग तस्वीर पेश कर रही है. जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर उन्हें यह संदेह है कि लोहगढ़ की यात्रा पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी. पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि घटना से एक दिन पहले सिया गोयल और चेतन चौधरी पुणे के लुल्लानगर स्थित एक कैफे में मिले थे. वहीं कथित तौर पर पूरी योजना पर चर्चा हुई. पुलिस का आरोप है कि दोनों ने पहले से तय योजना के तहत वारदात को अंजाम दिया. इस मामले में दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और जांच जारी है। 

हमें सिर्फ दोस्ती की जानकारी थी
पूजा गोयल ने यह भी स्वीकार किया कि चेतन चौधरी और सिया एक-दूसरे को जानते थे. उनके अनुसार दोनों की पहचान एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी और उन्हें केवल इतनी जानकारी थी कि दोनों दोस्त हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उन्हें कभी यह नहीं लगा कि दोनों के बीच प्रेम संबंध हैं. उनका कहना है कि यदि उन्हें जरा भी आभास होता कि मामला सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं है तो वह कभी शादी की तैयारियां आगे नहीं बढ़ातीं. उनका दावा है कि सगाई के बाद भी घर में कभी ऐसा माहौल नहीं बना जिससे लगे कि सिया इस रिश्ते से खुश नहीं है। 

केतन हमारे बेटे जैसे थे
सिया के पिता प्रवीण गोयल बातचीत के दौरान कई बार भावुक दिखाई दिए. उन्होंने कहा कि केतन उनके घर कई बार आए. परिवार के साथ खाना खाया. वह उन्हें “पापा जी” कहकर बुलाते थे और धीरे-धीरे बेटे जैसे हो गए थे. प्रवीण गोयल का कहना है कि यदि केतन को कभी यह संदेह था कि सिया का फोन लगातार व्यस्त रहता है या वह किसी और से बात करती है, तो इस बारे में उन्हें सीधे बताया जाना चाहिए था. उनका कहना है कि यदि परिवारों के बीच यह बातचीत पहले हो जाती तो शायद हालात अलग होते। 

एक बार भी नहीं कहा कि शादी नहीं करनी
पूजा गोयल का दावा है कि शादी तय होने के बाद उन्होंने कई बार सिया से पूछा कि क्या वह केतन से शादी करना चाहती है. हर बार जवाब एक ही मिला मुझे केतन पसंद हैं और मैं शादी करना चाहती हूं. उनका कहना है कि यदि सिया शादी के खिलाफ होती तो परिवार बाली प्री-वेडिंग ट्रिप की तैयारी क्यों करता? उन्होंने बताया कि बेटी की शॉपिंग पर लगभग 50 हजार रुपये खर्च किए गए थे. जन्मदिन की ड्रेस खरीदी गई थी. शादी और जन्मदिन से जुड़े कई कार्यक्रम तय थे. परिवार के अनुसार यदि बेटी ने एक बार भी शादी से इनकार किया होता तो ये सारी तैयारियां वहीं रुक जातीं। 

अगर दोषी है तो सजा मिलनी चाहिए
प्रवीण गोयल से पूछा गया कि यदि जांच में उनकी बेटी दोषी पाई जाती है तो उनका क्या कहना होगा. उन्होंने कहा कि यदि अदालत और जांच एजेंसियां यह साबित कर देती हैं कि उनकी बेटी ने अपराध किया है, तो उसे कानून के मुताबिक सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि न्याय में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए. पूजा गोयल ने भी कहा कि यदि उनकी बेटी ने वास्तव में अपराध किया है तो उसे भी वहीं से गिरा देना चाहिए। 

‘अगर हम सिया के साथ थे तो हमें फांसी दे दो’
मामले में सामने आए आरोपों और जांच के बीच सिया के माता-पिता ने कहा कि उन्हें चेतन चौधरी के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं थी. उनका कहना है कि अगर उन्हें पहले से किसी भी बात की जानकारी होती तो वे कभी इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होते। 

आजतक से बातचीत में सिया के माता-पिता ने कहा कि यदि जांच में यह साबित हो जाता है किं उनके परिवार की कोई गलती है या उन्हें किसी बात की जानकारी थी, तो उन्हें भी सबसे कड़ी सजा दी जाए. उन्होंने कहा, ‘अगर हमारी गलती पाई गई तो हमें भी फांसी दे दीजिए। 

‘सिया को भी किले से धक्का दे दो’
उन्होंने अपनी बेटी को लेकर भी भावुक बयान दिया. उनका कहना था कि यदि सिया दोषी साबित होती है तो उसे भी कानून के मुताबिक सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर उसने यह अपराध किया है तो उसे भी उसी किले पर ले जाकर धक्का दे देना चाहिए जहां से गिरकर केतन की मौत हुई। 

सिया के पिता प्रवीण गोयल इमोश्नल होकर बताते हैं कि केतन जब भी उनके घर आता था, उन्हें हमेशा पापा जी कहकर बुलाता था. वह घंटों घर में बैठता, परिवार के साथ समय बिताता और सभी के साथ घुलमिल जाता था. उनके मुताबिक धीरे-धीरे रिश्ता इतना करीब हो गया था कि उन्हें केतन अपने बेटे से भी ज्यादा प्रिय लगने लगा था. उन्होंने कहा कि केतन का व्यवहार, उसका सम्मान और परिवार के प्रति उसका अपनापन उन्हें बेहद प्रभावित करता था. यही वजह है कि जब केतन की मौत की खबर आई तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि दो परिवारों के बीच बने एक रिश्ते के टूट जाने जैसा भी था. सिया के माता-पिता के इस बयान के बाद मामले को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। 

सिया के इशारे पर केतन ने दिया धक्का?
गौरतलब है कि केतन अग्रवाल की हत्या का मामले में हर दिन नई परतें खुल रही हैं. अब पुलिस जांच में पता चला है कि उनकी मंगेतर सिया गोयल ने ही इशारा देकर अपने प्रेमी चेतन चौधरी से उन्हें लोहागढ़ किले की खाई में धक्का दिलवाया था. यह घटना 18 जून को हुई थी. फिलहाल दोनों आरोपी अब पुलिस की पकड़ में हैं। 

Passport Rule Change: 14 साल बाद पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा, 1 जुलाई से बढ़ेंगी फीस, जानें नई रेट लिस्ट

 नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने पासपोर्ट और उससे जुड़ी सर्विस की फीस में बड़ा बदलाव किया है. ये बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण माने जाने को लेकर बहस चल रही है. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 जारी करते हुए इसे अगले महीने से ही लागू करने के निर्देश दिए हैं। 

साल 2012 में आखिरी बार हुआ था फीस में बदलाव
नए नियमों के तहत 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट के नए शुल्क लागू होंगे. इस बदलाव के तहत अब पासपोर्ट बनवाना दो हजार रुपये तक महंगा पड़ सकता है. इससे पहले साल 2012 में आखिरी बार पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ाई गई थी. इस तरह ये बदलाव 14 साल बाद हुआ है। 

सरकार ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद नया पासपोर्ट बनवाने, पासपोर्ट रिन्यू कराने और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए संशोधित शुल्क देना होगा. इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की पुरानी शुल्क सूची (शेड्यूल-IV) को हटाकर नई शुल्क सूची लागू कर दी जाएगी. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 1 जुलाई 2026 से सभी पासपोर्ट सेवाओं पर नए शुल्क लागू होंगे। 

फीस में कितना हुआ बदलाव

1 जुलाई से पासपोर्ट शुल्क में बदलाव, जानिए अब कितना देना होगा
 
36 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
पहले: ₹1,500 → अब: ₹2,500 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,500 → अब: ₹5,000 (तत्काल)

60 पेज का पासपोर्ट (नया/री-इश्यू):
पहले: ₹2,000 → अब: ₹3,500 (नॉर्मल)
पहले: ₹4,000 → अब: ₹6,000 (तत्काल)

36 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
पहले: ₹1,500 → अब: ₹5,000 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,500 → अब: ₹7,500 (तत्काल)

60 पेज का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
पहले: ₹2,000 → अब: ₹6,000 (नॉर्मल)
पहले: ₹4,000 → अब: ₹8,500 (तत्काल)

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 36 पेज का पासपोर्ट:
पहले: ₹1,000 → अब: ₹1,750 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,000 → अब: ₹4,250 (तत्काल)

नाबालिगों का खोया/क्षतिग्रस्त पासपोर्ट:
पहले: ₹1,000 → अब: ₹4,250 (नॉर्मल)
पहले: ₹3,000 → अब: ₹6,750 (तत्काल)

होर्मुज में बढ़ा खतरा! ईरानी ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की जान पर संकट, समुद्री रास्ते में फिर तनाव

 नई दिल्ली

होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. यह हमला तब हुआ जब यूनाइटेड नेशन की टीम इस क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान में जुटी थी. ओमान के तट के पास एक कार्गो शिप पर हुए हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने इस रेस्क्यू अभियान को रोक दिया है. इस फैसले से करीब 11 हजार नाविकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, जो अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों पर मौजूद हैं। 

पिछले कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सदस्य देशों की मदद से फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चला रहा था. इस मिशन का मकसद उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट पार कराना था, जो युद्ध और सुरक्षा प्रतिबंधों की वजह से कई दिनों से फंसे हुए थे। 

इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो शिप एवर लवली पर ड्रोन हमला हो गया. हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा. हालांकि किसी नाविक की मौत या गंभीर चोट की खबर नहीं है. इसके तुरंत बाद IMO ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पूरे रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया। 

UN ने रेस्क्यू क्यों रोक दिया?
IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि जब तक इवैक्युएशन लिस्ट में शामिल जहाजों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक अभियान आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. हालांकि जिस जहाज पर हमला हुआ, वह UN के रेस्क्यू मिशन का हिस्सा नहीं था. लेकिन घटना ने यह साफ कर दिया कि समुद्री रास्ता अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। 

IMO के मुताबिक इस पूरे इलाके में करीब 20 हजार से ज्यादा नाविक अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं. इनमें से लगभग 11 हजार नाविकों को निकालने के लिए विशेष इवैक्युएशन प्लान तैयार किया गया था. अब रेस्क्यू अभियान रुकने के बाद ये नाविक फिर से बीच समंदर में फंस गए हैं. उन्हें नहीं पता कि वे कब सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट पार कर पाएंगे। 

यूनाइटेड नेशन ने पहले ही जहाजों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि बिना इजाजत किसी भी तरह की आवाजाही न करें. इसके साथ ही IMO ने भी चेतावनी दी थी कि निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. जहाजों की आवाजाही तभी शुरू की जानी थी, जब IMO, UKMTO और MICA सेंटर के कोऑर्डिनेटेड सिस्टम के जरिए सभी वेसल्स से संपर्क स्थापित हो जाए. इसके बाद संबंधित कोस्टल लाइन्स से बातचीत के बाद ही आगे बढ़ने की इजाजत थी। 

ईरान ने हमला क्यों किया?
ईरान ने कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी थी कि उसकी इजाजत के बिना कोई भी जहाज संयुक्त राष्ट्र और ओमान द्वारा तैयार किए गए नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल न करे. ड्रोन हमले के कुछ घंटों बाद ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने बयान जारी कर कहा कि जो जहाज ईरान द्वारा तय किए गए आधिकारिक रास्ते के बजाय दूसरे मार्ग का इस्तेमाल करेंगे, उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी। 

होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए ईरान की तरफ से एक समुद्री कॉरिडोर तय किया गया है. जहाजों को सिर्फ लारक आईलैंड (Larak Island) के पास बनाए गए आधिकारिक मार्ग से ही गुजरने की इजाजत दी गई है. इस रूट के अलावा किसी भी रूट से गुजरने पर सख्त चेतावनी दी गई थी. ईरान ने एक नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा था कि, किसी भी उल्लंघन की स्थिति में होने वाले नुकसान, जुर्माने या दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जहाज के मालिक और कप्तान (मास्टर) की होगी। 

यानी ईरान साफ संदेश देना चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को उसके नियम मानने होंगे. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ओमान की तरफ से दक्षिणी रास्ते को खतरनाक बताकर खारिज कर दिया था और जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे सिर्फ तेहरान से मंजूर रास्तों का ही इस्तेमाल करें। 

आखिर विवाद किस रास्ते को लेकर है?
इस समय होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए दो अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर मौजूद हैं. पहला रास्ता ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इस मार्ग पर जहाजों को ईरान की नई एजेंसी PGSA से पहले इजाजत लेनी होती है. बिना परमिट किसी जहाज को प्रवेश नहीं दिया जाता. ईरान का कहना है कि सिर्फ एक यही रूट ही जिससे जहाज को सुरक्षित पासेज दिया जाएगा। 

दूसरा रास्ता ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है. इसी मार्ग को संयुक्त राष्ट्र और ओमान मिलकर सुरक्षित निकासी के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. दर्जनों जहाजों को इस रास्ते से पार भी कराया गया है. 24 जून को ही 60 से ज्यादा विमानों को पार कराया गया था. ईरान का कहना है कि उसके तय रास्ते को छोड़कर दूसरे कॉरिडोर का इस्तेमाल करना नियमों का उल्लंघन है। 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा कॉरिडोर माना जाता है. दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी-एलपीजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं. अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। 

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल IMO, ओमान, ईरान और अन्य सदस्य देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू की जा सके. IMO ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती, तब तक हजारों नाविक समुद्र में फंसे रह सकते हैं. यानी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच होर्मुज स्ट्रेट में हुए ड्रोन हमले ने पूरी वैश्विक शिपिंग व्यवस्था और हजारों नाविकों की सुरक्षा को फिर से संकट में डाल दिया है. अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो इसका असर सिर्फ समुद्री व्यापार ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में तेल की सप्लाई और कीमतों पर भी पड़ सकता है। 

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