AMCA प्रोजेक्ट में नया संकट, अमेरिकी इंजन की कीमत दोगुनी से ज्यादा; दूसरे विकल्प की तलाश

 नई दिल्ली

भारत का महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट नई मुश्किल में फंस गया है. अमेरिका की GE एयरोस्पेस कंपनी का F414 इंजन, जो AMCA Mk-1 और तेजस Mk-2 दोनों के लिए चुना गया था, अब महंगा हो गया है. पहले एक इंजन की कीमत करीब 70-80 करोड़ रुपये थी, जो अब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है। 

यह बढ़ोतरी DRDO और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के लिए बड़ी चिंता बन गई है. तकनीकी बातचीत में प्रगति हुई थी, लेकिन कीमत, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोडक्शन और निवेश जैसे व्यावसायिक मुद्दों पर गतिरोध है. GE ने भारत में F414 इंजन की असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6000 करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश की मांग की गई है। 

F414 इंजन मूल रूप से तेजस Mk-2 के लिए चुना गया था. AMCA Mk-1 के शुरुआती संस्करणों के लिए अंतरिम इंजन के रूप में रखा गया है. योजना के अनुसार पहले 2-4 स्क्वॉड्रनों में यह इंजन लगेगा. बाद में ज्यादा शक्तिशाली स्वदेशी इंजन आएगा. AMCA ट्विन इंजन वाला स्टेल्थ फाइटर है, इसलिए प्रोटोटाइप में 5 प्रोटोटाइप्स के लिए करीब 15 इंजनों की जरूरत पड़ेगी। 

कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने प्रोटोटाइप विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मंजूर किए हैं. उड़ान परीक्षण में 1800 सॉर्टीज और सात साल लगेंगे. इंजन की समस्या से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। 

GE के साथ समझौते की चुनौतियां
GE F414 पर भारत और अमेरिका के बीच मोदी और बाइडेन के समय मजबूत राजनीतिक समर्थन मिला था. HAL और GE के बीच MoU को रक्षा सहयोग की बड़ी उपलब्धि माना गया. लेकिन व्यावसायिक बातचीत जटिल हो गई है. GE की फैक्ट्री न सिर्फ AMCA बल्कि तेजस Mk-2 और ट्विन इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) की जरूरतें भी पूरी कर सकती है। 

फिर भी कीमत में अचानक वृद्धि और निवेश की ऊंची मांग ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है. कुछ चर्चाओं में शुरुआती इंजन खरीद की संख्या घटाने पर भी विचार हुआ, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 

विकल्पों की तलाश: सैफ्रान और रोल्स-रॉयस
अब भारतीय एजेंसियां विकल्प देख रही हैं. फ्रांस की सैफ्रान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस कंपनियां पहले भी भारत के साथ इंजन विकास में साझेदारी के लिए इच्छुक रही हैं. दोनों कंपनियां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक सहयोग का बेहतर प्रस्ताव दे सकती हैं।  

हालांकि इंजन बदलना आसान नहीं है क्योंकि यह उड़ान नियंत्रण, सर्टिफिकेशन, परीक्षण और परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है. एयरफ्रेम डिजाइन लगभग फाइनल हो चुका है, इसलिए नया इंजन अनुकूलित करना पड़ेगा, पूरी डिजाइन नहीं बदलनी होगी। 

तेजस Mk-1A पहले ही इंजन सप्लाई की समस्या से देरी झेल रहा है. AMCA में भी यही समस्या समयरेखा प्रभावित कर सकती है. यह कार्यक्रम भारत की स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की स्टेल्थ तकनीक हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को मजबूत वार्ता करनी चाहिए. अगर GE से समझौता नहीं होता तो विकल्पों को तेजी से आगे बढ़ाना होगा. AMCA की सफलता न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक बनाने में भी मदद करेगी। 

वर्तमान में तीन निजी कंपनियों – टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T-BEL और भारत फोर्ज-BEML को प्रोटोटाइप विकास के लिए RFP जारी किए गए हैं. इंजन मुद्दे का जल्द समाधान AMCA कार्यक्रम की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है। 

देश के बड़े शहरों में खत्म हो रही जमीन, बढ़ती आबादी के बीच कहां रहेंगे लोग?

 नई दिल्ली

पिछले कुछ दशकों में भारत की तस्वीर तेजी से बदली है, कभी गांवों का देश कहा जाने वाले भारत की एक बहुत बड़ी आबादी रोजगार, बेहतर शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली की तलाश में शहरों का रुख कर चुकी है, लेकिन इस सामूहिक पलायन ने एक गंभीर और डरावने सवाल को जन्म दे दिया है, जब शहरों में ज़मीन सीमित है, तो आने वाले समय में ये लोग रहेंगे कहां रहेंगे। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2030 तक भारत की 40% से अधिक आबादी शहरों में रह रही होगी, इतनी बड़ी आबादी का दबाव झेलने के लिए हमारे शहरों के पास पर्याप्त जगह ही नहीं बची है. ज़मीन का यह संकट अब केवल एक अंदेशा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है। 

देश के प्रमुख आर्थिक केंद्र इस समय ज़मीन की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं. मुंबई भौगोलिक रूप से तीन तरफ से पानी से घिरा है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि मुंबई के पास अब हॉरिजॉन्टल विस्तार के लिए जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं बचा है. यही वजह है कि यहां झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ी और रीडेवलपमेंट ही एकमात्र रास्ता रह गया. जमीन की कमी के कारण मुंबई भारत का सबसे महंगा और घना शहर बन चुका है। 

नोएडा में जमीन खत्म होने के कगार पर 
दिल्ली-NCR का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन माना जाने वाला नोएडा भी अब इसी संकट के मुहाने पर खड़ा है. हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और नोएडा अथॉरिटी की बैठकों से यह साफ हुआ है कि मूल नोएडा (Noida Master Plan 2031 के तहत) में अब नया अलॉटमेंट करने के लिए ज़मीन लगभग खत्म हो चुकी है. औद्योगिक, कमर्शियल और आवासीय प्लॉट्स के लिए अथॉरिटी के पास जगह नहीं बची है. यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश सरकार को ‘न्यू नोएडा’ (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इनवेस्टमेंट रीजन) बसाने के लिए मास्टर प्लान 2041 को मंजूरी देनी पड़ी है, जिसके तहत बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। 

क्या है इसका विकल्प? 
जब ज़मीन खत्म हो रही हो, तो शहरों के पास फैलने का नहीं, बल्कि ऊपर उठने का ही विकल्प बचता है, आने वाले समय में शहरी आबादी पूरी तरह से हाईराइज इमारतों और वर्टिकल लिविंग पर निर्भर हो जाएगी. आने वाले समय में सरकारें FSI यानी ज़मीन के मुकाबले कितनी ऊंची इमारत बनाई जा सकती है के नियमों को और ढीला करेंगी, जहां पहले 4 से 5 मंजिला इमारतें बनती थीं, अब 40 से 50 मंजिला आवासीय टावर आम हो जाएंगे, एक ही एकड़ ज़मीन पर अब 50 परिवारों के बजाय 500 परिवार रह सकेंगे। 

भविष्य के शहर हाईराइज सोसायटियों के अंदर सिमट जाएंगे. इन्हें ‘वर्टिकल विलेज’ कहा जाता है, जहां एक ही गगनचुंबी इमारत या परिसर के भीतर पार्क, जिम, स्विमिंग पूल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और यहां तक कि स्कूल-अस्पताल भी मौजूद होंगे. लोगों की जमीन से निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी. नोएडा की तर्ज पर अब हर बड़े शहर के पास जैसे न्यू नोएडा, नवी मुंबई, न्यू गुड़गांव बसाए जा रहे हैं. साथ ही रेलवे और मेट्रो स्टेशनों के आसपास हाई-डेंसिटी ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं ताकि लोग कम ज़मीन में रहकर सीधे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें। 

क्या हैं चुनौतियां?
बेशक हाईराइज इमारतें जमीन की कमी का समाधान हैं, लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं है. 50 मंजिला इमारत में रहने वाले लोगों के लिए पानी, बिजली और सीवरेज सिस्टम का मैनेजमेंट करना बेहद जटिल होता जा रहा है. कंक्रीट के इन ऊंचे जंगलों के कारण शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ बन रहे हैं, जिससे शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 3 से 5 डिग्री तक ज्यादा रहता है. भूकंप या आग लगने की स्थिति में इतनी ऊंची इमारतों से लोगों को सुरक्षित निकालना आज भी एक बड़ी चुनौती है। 

गांवों से शहरों की तरफ बढ़ता इंसानी सैलाब रुकने वाला नहीं है और जमीन को रबर की तरह खींचा नहीं जा सकता, इसलिए भविष्य के भारत को ‘आसमान’ में ही अपनी जगह ढूंढनी होगी। 

BRICS में PM मोदी की कूटनीतिक चाल, ट्रंप का पैंतरा पड़ा फीका; चीन भी बढ़ाना चाहता है दोस्ती का हाथ

नई दिल्ली
इस वक्त पूरी दुनिया ट्रंप की डील और अमेरिका-ईरान की बातचीत पर चर्चा कर रही है.
लेकिन ग्लोबल पॉलिटिक्स की असली हलचल भारत में मची हुई है. ट्रंप की डील अब पूरी तरह कबाड़ होती दिख रही है. ईरान कुछ और कह रहा है और ट्रंप के बयान अलग आ रहे हैं. दुनिया यह तमाशा देख रही है कि अमेरिका में चल क्या रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ा ग्लोबल मैसेज दे दिया है. अमेरिका से ईरान हैंडल नहीं हो रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी ने चीन-अमेरिका और ईरान-इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को एक जगह ला दिया है. भारत अब इन सभी देशों के साथ बड़ी डील कर रहा है. नरेंद्र मोदी वह काम कर रहे हैं जो दुनिया में कोई सोच भी नहीं सकता. ग्लोबल पॉलिटिक्स का पूरा नैरेटिव अब भारत ने चेंज कर दिया है. मोदी ने भारत की डिप्लोमेसी को सुपरफास्ट ट्रैक पर दौड़ा दिया है. दुनिया अब अमेरिका नहीं बल्कि भारत की तरफ देख रही है। 

ब्रिक्स की मीटिंग में पीएम मोदी ने ट्रंप को कैसे दे दिया सबसे बड़ा झटका?
कुछ महीने पहले तक डॉनल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर बड़ी धमकियां देते थे. ट्रंप ब्रिक्स का नाम लेकर दुनिया को धमकाते थे कि ऐसा मत करो. लेकिन आज ट्रंप की ऐसी हालत है कि कोई उनका लोड नहीं ले रहा है. नरेंद्र मोदी तो ट्रंप का बिल्कुल भी लोड नहीं लेते. पीएम मोदी ने पहले ट्रंप को मुंह पर सीधा सुना दिया था. अब ब्रिक्स देशों की मीटिंग से मोदी ने तगड़ा मैसेज दे दिया है। 

भारत में ब्रिक्स देशों के एनएसए की अहम मीटिंग हो रही है. पीएम मोदी खुद इस ग्लोबल मीटिंग में पहुंच गए. वहां ब्रिक्स नेताओं की ग्रुप फोटो हुई और वन-टू-वन मुलाकात भी हुई. पीएम मोदी ने जो कड़क मैसेज दिया है, उससे ट्रंप के लोगों में हड़कंप मच गया है. पीएम मोदी ने कहा कि बदलते ग्लोबल हालात में ब्रिक्स की भूमिका बहुत अहम है. उन्होंने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर बहुत ज्यादा जोर दिया। 

पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ग्लोबल साउथ का पूरा समर्थन करेगा. भारत एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने के लिए अपनी ताकत लगाएगा. पीएम मोदी ने एक ही मीटिंग से दो बड़े काम निपटा दिए हैं. एक तरफ ब्रिक्स को अहम बताकर अमेरिका को पीछे हटने का मैसेज दे दिया. दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाकर सबको अलर्ट कर दिया। 

ट्रंप को अमेरिका में वोट वाला झटका कैसे लगा और अब वह क्या बहाने बना रहे हैं?
    अमेरिका में मध्‍यावधि चुनाव बहुत नजदीक हैं और डॉनल्ड ट्रंप लगातार दावे कर रहे हैं. लेकिन ट्रंप को हाल ही में एक बहुत बड़ा वोट वाला झटका लगा है. अमेरिका के भीतर ही ट्रंप का वोट बेस अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है. ट्रंप पहले जो वादे कर रहे थे, अब वहां की जनता उन पर सवाल उठा रही है. चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होते देख ट्रंप अब रोज नए बहाने बना रहे हैं। 

    ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर दुनिया में कुछ हुआ तो वह भारत के साथ खड़े होंगे. ट्रंप को यह अच्छे से पता है कि भारतीय मूल के वोटर अमेरिका में क्या ताकत रखते हैं. इसलिए ट्रंप अब भारत और पीएम मोदी की तारीफ करके अपना वोट बैंक बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी खुद की विदेश नीति अब पूरी तरह से फेल हो चुकी है। 

    ईरान को लेकर ट्रंप का स्टैंड अमेरिका में ही एक बड़ा मजाक बन गया है. ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि इस बड़े ग्लोबल शिफ्ट को कैसे हैंडल किया जाए. अब ग्लोबल पॉलिटिक्स ऐसे नहीं चलेगी कि सब कुछ सिर्फ ट्रंप की मर्जी से होगा. अमेरिका जो तय कर लेगा अब दुनिया में वही नियम नहीं चलने वाला है। 

चीन के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने कौन सा बड़ा खेल कर दिया?
ट्रंप के लिए सबसे बड़ा मैसेज यह है कि मोदी ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ब्रिक्स की बैठक में वांग यी के साथ हुई बातचीत की डिटेल से अमेरिका परेशान हो जाएगा. चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि मोदी ने शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने को कहा है. पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी पारंपरिक दोस्ती आगे बढ़ानी चाहिए. दोनों देश हाई लेवल बातचीत जारी रखें और ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करें. चीन के साथ पीएम मोदी की इस बात से अमेरिका को जरूर बड़ी आग लग जाएगी। 

ट्रंप तो शुरू से ही ब्रिक्स और चीन के बिल्कुल खिलाफ रहे हैं. चीन ने भी साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘दोनों देश एकजुटता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’ चीन अब ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा. चीन अब भारत के साथ भरोसा बढ़ाने और संदेह दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन के बयान से साफ है कि वह भारत से टकराव नहीं बल्कि दोस्ती चाहता है। 

ईरान और इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को पीएम मोदी कैसे एक साथ हैंडल कर रहे हैं?

    ब्रिक्स की अहम बैठक से अलग पीएम मोदी ने ईरान के टॉप अधिकारियों से भी मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ गदीर निजामीपुर पीएम मोदी से मिले. यह मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के तेल पर भारी छूट दी है। 

    ग्लोबल मार्केट में ईरान का तेल आने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का बड़ा न्योता दिया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के विदाई कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. यहां लोग कह रहे थे कि इजराइल से दोस्ती के चक्कर में भारत ने ईरान से रिश्ते बिगाड़ लिए. लेकिन मोदी ईरान के टॉप अधिकारियों से मिलकर नया ग्लोबल नैरेटिव सेट कर रहे हैं। 

    उधर भारत इजराइल से भी अपने रिश्तों को लगातार और ज्यादा मजबूत कर रहा है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इजराइल के रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल से मिले. दोनों देशों के बीच डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ज्वाइंट प्रोडक्शन पर अहम बातचीत हुई है. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ इजराइल के साथ भारत का यह बैलेंस अमेरिका को हैरान कर रहा है। 

मोदी सरकार ने कौन सी विदेशी फंडिंग रोक दी जिससे इकोसिस्टम की कमर टूट गई?

नरेंद्र मोदी एक तरफ भारत को ग्लोबल पॉलिटिक्स के सेंटर में पूरी तरह ला रहे हैं. दूसरी तरफ मोदी उस इकोसिस्टम पर भी कड़ी स्ट्राइक कर रहे हैं जो सरकार गिराने का काम करता है. यह विदेशी इकोसिस्टम पीएम मोदी को कुर्सी से हटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है. लेकिन मोदी सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जिसने इस इकोसिस्टम की कमर तोड़ दी है. सरकार ने विदेशी फंडिंग वाले कई बड़े एनजीओ के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए हैं। 

देश में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए विदेशों से भारी फंडिंग आती थी. मोदी सरकार ने इस अवैध फंडिंग के पाइपलाइन को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. विदेशी पैसे से चलने वाला सरकार गिराने का यह बड़ा ‘हथियार’ अब हमेशा के लिए निपट गया है. इसी वजह से इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम में अब भारी हंगामा मचा हुआ है. बिना विदेशी पैसे के यह गैंग अब भारत में अपना झूठा एजेंडा नहीं चला पा रहा है. भारत के खिलाफ काम करने वाले सभी संगठनों की फंडिंग पर अब सरकार की सख्त नजर है। 

एफएटीएफ के डर से पाकिस्तान के पसीने क्यों छूट रहे हैं और यूएई को क्या चाहिए?
    डॉनल्ड ट्रंप ने ग्लोबल कूटनीति में अमेरिका का जो भरोसा था उसे पूरी तरह हिला दिया है. आज दुनिया भारत की तरफ एक भरोसेमंद और पावरफुल पार्टनर के रूप में देख रही है. पाकिस्तान से अपना मुल्क नहीं संभल रहा है और वह भारत पर अटैक करने की बातें करता है. पाकिस्तान बुरी तरह से अलबलाया हुआ है क्योंकि उसे भारत की ताकत का अंदाजा है. पाकिस्तान को डर है कि भारत कभी भी उस पर एक बड़ा मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है। 

    दूसरी तरफ एफएटीएफ की नंगी तलवार भी पाकिस्तान की गर्दन पर लगातार लटकी हुई है. एफएटीएफ की ग्लोबल मीटिंग में पाकिस्तान के टेरर फंडिंग को लेकर बड़ा एक्शन लिया जा सकता है. पाकिस्तान अगर आतंकवाद को पालेगा तो एफएटीएफ उसे फिर से अपनी ब्लैक लिस्ट में डाल देगा. भारत एफएटीएफ में पाकिस्तान के सभी काले कारनामों के पक्के सबूत पेश करने की तैयारी कर चुका है.
    इधर गल्फ के देश अब डिफेंस के लिए अमेरिका की जगह भारत की तरफ देख रहे हैं. यूएई भारत से सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए बहुत अहम बातचीत कर रहा है. यूएई को ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत का फुली ऑटोमेटेड आकाशतीर सिस्टम भी तुरंत चाहिए. ब्रह्मोस मिसाइल ने ही ऑपरेशन सिंदूर में कमाल किया था और पाकिस्तान के एयरबेस फोड़ दिए थे। 

भारत का डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट किस तरह से दुनिया के रिकॉर्ड तोड़ रहा है?
भारत का डिफेंस सेक्टर अब ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमा रहा है. भारत अब सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा है बल्कि दुनिया को अपने हथियार बेच भी रहा है. नरेंद्र मोदी लगातार ग्लोबल मंच पर भारत को एक पावरफुल मिलिट्री प्लेयर बना रहे हैं. भारत एक ऐसा देश बन गया है जिस पर अब पूरी दुनिया आंख बंद करके भरोसा कर सकती है. इसी भरोसे की वजह से इस साल कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं. इस साल अभी तक पीएम मोदी 27 ग्लोबल लीडर्स को भारत बुलाकर मीटिंग कर चुके हैं. यूरोपियन यूनियन के अलावा फ्रांस और जर्मनी के बड़े नेता भी भारत का चक्कर लगा चुके हैं। 

भारत का डिफेंस प्रोडक्शन आज के समय में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2013-14 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन सिर्फ 43746 करोड़ रुपये के करीब था. लेकिन साल 2025-26 में यह प्रोडक्शन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी अब पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़कर आसमान छू रहा है. साल 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 686 करोड़ रुपये था. अब यह एक्सपोर्ट बड़ी छलांग लगाकर 38424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 

कमर्शियल सिलिंडर पर केंद्र का बड़ा फैसला, गैर-घरेलू पैक्ड LPG से हटे सभी प्रतिबंध

 नई दिल्ली

 पश्चिम एशिया में पैदा हुए ऊर्जा संकट के कम होने के संकेतों के बीच केंद्र सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। इसके साथ ही हालिया संकट के दौरान लागू किए गए अधिकांश सेक्टर-विशिष्ट प्रतिबंध भी हटा लिए गए हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि घरेलू उत्पादन में सुधार और आयातित एलपीजी कार्गो की उपलब्धता बढ़ने से आपूर्ति स्थिति बेहतर हुई है। इसी के मद्देनजर गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं।

उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद

मंत्रालय के अनुसार, संकट की शुरुआत में पूरी तरह रोकी गई बल्क एलपीजी सप्लाई को भी आंशिक रूप से बहाल करते हुए पूर्व खपत स्तर के 50 प्रतिशत तक अनुमति दे दी गई है। इससे औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए लगाए गए थे प्रतिबंध

दरअसल, ईरान संघर्ष के बाद वेस्ट एशिया से एलपीजी आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई थी। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में सरकार ने घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्रों में आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

बाद में स्थिति में कुछ सुधार होने पर सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया गया, लेकिन कई क्षेत्रों में आवंटन सामान्य स्तर से काफी कम रखा गया था।

पेट्रोकेमिकल सेक्टर से LPG उत्पादन की ओर मोड़ा गया कच्चा माल

संकट के दौरान एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत विशेष निर्देश जारी किए थे। इसके तहत सी-3 और सी-4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल उत्पादन से हटाकर एलपीजी निर्माण में इस्तेमाल किया गया। इस फैसले से पेट्रोकेमिकल कंपनियों, विशेष रूप से रिफाइनिंग सेक्टर की कंपनियों को उत्पादन समायोजन करना पड़ा।

अब आपूर्ति स्थिति सामान्य होने के बाद सरकार ने इन स्ट्रीम्स का आवंटन धीरे-धीरे फिर से पेट्रोकेमिकल और अन्य उद्योगों के लिए बहाल करने का फैसला किया है। हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि देश में एलपीजी उत्पादन प्रतिदिन 40,000 टन से नीचे न जाए।
कच्चे तेल की कीमतें भी लौटीं सामान्य स्तर पर

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब संघर्ष-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। यही वजह है कि आपातकालीन राशनिंग उपायों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
PNG पर शिफ्ट करने की योजना को मिलेगी रफ्तार

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट एलपीजी उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। इसके साथ ही कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जोड़ने की योजना को भी तेज किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में सिटी गैस नेटवर्क उपलब्ध है, वहां पात्र एलपीजी उपभोक्ताओं को चरणबद्ध तरीके से PNG पर स्थानांतरित किया जाएगा।
एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने का दिया निर्देश

सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कमर्शियल और इंडस्ट्रियल एलपीजी उपभोक्ताओं का एकीकृत डेटाबेस तैयार रखने तथा आपूर्ति प्रबंधन को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संशोधित व्यवस्था के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

 

NCERT की कक्षा 9 की किताब में पहली बार ‘आपातकाल’ अध्याय शामिल, जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को मिली जगह

नई दिल्ली
भारत में इमरजेंसी लागू होने के लगभग पांच दशक बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने पहली बार कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है. इसमें इसे ‘प्रमुख चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज़्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। 

यह जिक्र हाल ही में तैयार की गई सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में मिलता है, जिसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों का विश्लेषण करने वाले एक अध्याय में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। 

एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि यह पहली बार है जब कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में ‘आपातकाल’ (Emergency) पर एक सेक्शन जोड़ा गया है. स्कूल के पाठ्यक्रम में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, खासकर तब जब देश ने हाल ही में 1975 में लगाए गए आपातकाल के 50 साल पूरे होने का समय देखा है। 

इस सेक्शन में लिखा गया, ‘भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में आपातकाल लगाया गया. 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति जनता में असंतोष बढ़ रहा था. बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए। 

‘Emergency’ टाइटल से से जोड़ा गया खंड
नई किताब के चैप्टर 6 में लोकतंत्र और उसके सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में बताया गया है. इसी चैप्टर में ‘Emergency’ टाइटल से एक खंड जोड़ा गया है, जिसमें 1975–77 के आपातकाल को भारत में लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। 

किताब के मुताबिक, जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ बढ़ते जन-असंतोष, बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रशासन के आरोपों के बीच आपातकाल लगाया गया था. इसमें कहा गया है कि इस दौरान मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई. इसके साथ ही कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। 

चैप्टर में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जनआंदोलनों का भी जिक्र है. इसमें बताया गया है कि बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में छात्रों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही. 1977 में आपातकाल हटाया गया, जिसके बाद आम चुनाव हुए और लोगों को मतदान के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। 

अब तक कक्षा 12 के पाठ्यक्रम तक सीमित था विषय
अब तक आपातकाल का विषय कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की किताबों में पढ़ाया जाता था, जहां आजादी के बाद भारतीय लोकतंत्र के विकास और उसके सामने आई चुनौतियों के संदर्भ में इस दौर को विस्तार से समझाया जाता था। 

कक्षा 9 में इस विषय को शामिल किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि NCERT अब स्टूडेंट्स को भारतीय लोकतंत्र, संविधान और राजनीतिक इतिहास से जुड़े अहम मौकों को स्कूली शिक्षा के शुरुआती चरण में ही रुबरू कराना चाहता है। 

‘Democracy and You’ सेक्शन भी पहली बार जोड़ा गया
नई किताब में पहली बार ‘Democracy and You’ नाम से एक अलग खंड भी जोड़ा गया है. NCERT का कहना है कि इस खंड का मकसद किताब के कंटेंट और छात्रों के असल सामाजिक-राजनीतिक अनुभवों के बीच की दूरी को कम करना है. इसके जरिए छात्रों को ये समझाने की कोशिश की गई है कि वो भी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं और उसमें योगदान दे सकते हैं। 

आपातकाल जैसे ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से अहम चैप्टर के साथ इस नए खंड को जोड़कर NCERT ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के इतिहास और नागरिक भागीदारी को एक ही शैक्षणिक ढांचे में रखने की कोशिश की है। 

इसमें आगे कहा गया,’जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर देश में आपातकाल लागू किया. इस दौरान, ज़्यादातर मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया. लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई। 

किताब में आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया. ‘जयप्रकाश नारायण – जो एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से जाना जाता है – के नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, ख़ासकर बिहार और गुजरात में, बड़े पैमाने पर लामबंद किया. 1977 में आपातकाल हटा लिया गया और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला. सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया। 

‘आपातकाल’ (Emergency) वाला हिस्सा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर हो रही व्यापक चर्चा का एक हिस्सा है. आपातकाल के अलावा यह पाठ्यपुस्तक लोकतांत्रिक कामकाज के लिए चुनौतियों के तौर पर फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने, सार्वजनिक नियमों के उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है। 

इस अध्याय में ‘लोकतंत्र और आप’ (Democracy and You) नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है. एनसीईआरटी का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। 

आपातकाल के अलावा, संशोधित पाठ्यपुस्तक में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है. इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास हिस्सा है, जिसमें मीडिया को ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ बताया गया है और लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। 

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए इस किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं. इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और देश भर में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का जिक्र किया गया है। 

यह चैप्टर शासन-व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जिनमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत शामिल हैं. महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में उनके लिए आरक्षण पर भी एक अलग हिस्सा दिया गया है। 

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’, जमीन से आसमान तक रहेगी कड़ी निगरानी

श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में सालाना श्री अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए अनंतनाग ज़िले की पुलिस ने ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ शुरू किया है, जो एक व्यापक निगरानी और सुरक्षा पहल है, जिसे पूरे यात्रा मार्ग पर ज़मीन से आसमान तक चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि श्री अमरनाथ यात्रा अगले हफ़्ते अनंतनाग में पहलगाम और गांदरबल में बालटाल दोनों रास्तों से शुरू हो रही है। इसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किये गये हैं। सरकार ने जम्मू से गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों यात्रा मार्गों को ‘नो-फ़्लाई ज़ोन’ घोषित किया है। पवित्र गुफा मंदिर तक जाने वाले दो पारंपरिक रास्तों में से एक पहलगाम वाला रास्ता चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी से होकर गुज़रता है और दक्षिण कश्मीर हिमालय में लगभग 12,756 फ़ुट की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर पर समाप्त होता है।

‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के तहत अनंतनाग पुलिस ने आधुनिक तकनीक और रणनीतिक रूप से जवानों की तैनाती के ज़रिए कई स्तरों वाला सुरक्षा और निगरानी तंत्र तैयार किया है। पुलिस के एक बयान में कहा गया, “ हवाई निगरानी के लिए अहम जगहों पर पांंच ड्रोन तैनात किये जा रहे हैं, जो रियल-टाइम (सही समय पर) निगरानी और हालात की बेहतर जानकारी देंगे। हवाई निगरानी नेटवर्क किसी भी उभरती हुई स्थिति का तुरंत आकलन करने और ज़मीनी इकाइयों द्वारा त्वरित कार्रवाई करने में मदद करता है।”

पुलिस के अनुसार ज़मीन पर निगरानी क्षमता को मज़बूत करने और इलाके पर बेहतर नियंत्रण रखने के लिए संवेदनशील जगहों पर 28 रणनीतिक ‘मचान मोर्चे’ (ऊंचे निगरानी पोस्ट) बनाये गये हैं।

सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने और प्रभावी कार्रवाई की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए तय जगहों पर 22 विशेष रूप से प्रशिक्षित निशानेबाज टीमें भी तैनात की गयी हैं। निगरानी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए, यात्रा मार्ग पर अहम जगहों पर 416 हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे और चेहरा पहचानने वाली प्रणाली (ईआरएस) स्थापित की गयी है। 

पुलिस ने कहा, “यह प्रणाली लगातार रियल-टाइम निगरानी करते हैं और संदिग्ध गतिविधियों या हरकतों की समय पर पहचान करने में मदद करते हैं, जिससे सुरक्षा के एहतियाती उपाय मज़बूत होते हैं।”

‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ के ज़रिए, अनंतनाग पुलिस ने आसमान और ज़मीन पर अपनी नज़रें प्रभावी ढंग से जमा ली हैं और एक ऐसा बेहतरीन निगरानी नेटवर्क बनाया है, जो यात्रा मार्ग की पूरी निगरानी सुनिश्चित करता है।

पुलिस ने कहा, “यह पहल सभी तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित माहौल देने के लिए आधुनिक तकनीक और पेशेवर पुलिसिंग के तरीकों का इस्तेमाल करने के प्रति अनंतनाग पुलिस की प्रतिबद्धता को दिखाती है।”

मॉनसून में तालाब नहीं बनेंगी सड़कें! नितिन गडकरी ने दिए सख्त निर्देश, जानिए क्या कहा

मुंबई 

मॉनसून में अक्सर सड़कों के तालाब बन जाने की खबरों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बारिश आने से पहले ही तैयारी करने के जरूरी निर्देश दिए हैं. गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर मानसून से जुड़ी तैयारियों को पूरी तरह मजबूत किया जाए और खराब मौसम के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाए जाएं। 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के अनुसार, यह निर्देश उन समीक्षा बैठकों के दौरान दिए गए, जिनमें तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता, रखरखाव और प्रगति का आकलन किया गया है. गडकरी ने सड़क परिवहन की नींव राष्ट्रीय राजमार्गों पर खासतौर पर ध्यान रखने के लिए कहा है। 

इन परियोजनाओं में तेलंगाना के 4,931 किलोमीटर, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के 2,035 किलोमीटर और लद्दाख के 804 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह समीक्षा मीडिया रिपोर्टों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मिली प्रतिक्रियाओं और अधिकारियों, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और परियोजना ठेकेदारों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की गई। 

बैठकों के दौरान गडकरी ने चल रही परियोजनाओं, रखरखाव कार्यों और सुरक्षित, टिकाऊ एवं प्रभावी राजमार्ग बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की। 

गडकरी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, समय पर काम पूरा करने तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों और बेहतर कार्य पद्धतियों को अपनाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे सड़कों की मजबूती, यात्रा सुविधा और राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा। 

मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों को देखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावी ड्रेनेज प्रबंधन, ढलानों की स्थिरता (स्लोप स्टेबिलाइजेशन) और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मौसम से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम) तैनात करने पर भी जोर दिया। मंत्री के अनुसार, ये कदम राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर निर्बाध यातायात, सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। 

गडकरी ने कहा कि अच्छी तरह से विकसित और रखरखाव वाली सड़कें क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और यात्रियों की सुविधा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर परियोजनाओं का पूरा होना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और आधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों को अपनाना सड़क क्षेत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। 

देवी-देवताओं या भारत माता के नाम पर शपथ नहीं, केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

तिरुवनंतपुरम
केरल हाई कोर्ट ने शपथ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि स्थानीय निकायों के चुने हुए प्रतिनिधि शपथ लेते समय कानून में तय शब्दों से बाहर नहीं जा सकते. यानी शपथ  ईश्वर के नाम पर ली जा सकती है या फिर बिना ईश्वर का नाम लिए सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा की जा सकती है. उसमें देवी-देवताओं, भारत माता, किसी संगठन, राजनीतिक शहीद या किसी व्यक्ति का नाम जोड़ना मान्य नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कुछ पार्षदों की शपथ को अवैध माना. कोर्ट ने कहा कि अपनी तरफ से कोई भी नया शब्द जोड़ना पूरी तरह गलत माना जाएगा। 

यह मामला तब अदालत पहुंचा जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने शपथ लेते समय अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं, ‘भारतम्बा’, ‘भारत माता’, गुरुदेव, अपने राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम लिए. इसी से जुड़ी एक दूसरी याचिका पलक्कड़ जिले के वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य की शपथ को लेकर भी थी. उस सदस्य ने ‘ईश्वर की कृपा से उम्मन चांडी के नाम पर’ शपथ ली थी. इन दोनों मामलों को देखते हुए हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या कानून शपथ के तय प्रारूप से बाहर जाने की इजाजत देता है। 

कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट (नगरपालिका अधिनियम), केरल पंचायत राज एक्ट के तहत शपथ का सिर्फ दो ही तरीका है. पहला, ईश्वर के नाम पर शपथ लेना. दूसरा, ईश्वर का नाम लिए बिना सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करना. अदालत ने साफ कहा कि ईश्वर शब्द का दायरा बढ़ाकर किसी खास देवी-देवता, भारत माता, राजनीतिक शहीद, संगठन या व्यक्ति का नाम जोड़ना कानून के खिलाफ है। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि शपथ सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह जनता के प्रति एक गंभीर वादा है कि चुना हुआ प्रतिनिधि संविधान का पालन करेगा, कानून के मुताबिक काम करेगा, ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा. इसलिए शपथ वही मानी जाएगी जो कानून में लिखे तरीके से ली गई हो। 

पार्षदों की सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा?
हाई कोर्ट ने कहा कि शपथ गलत तरीके से ली गई थी, इसलिए वह वैध नहीं मानी जा सकती. लेकिन सिर्फ इस वजह से चुने हुए प्रतिनिधियों का जनादेश खत्म नहीं किया जाएगा. अदालत ने आदेश दिया है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षद, वडक्कनचेरी पंचायत सदस्य चार हफ्ते के भीतर दोबारा सही तरीके से शपथ लें. अदालत ने यह भी माना कि इन लोगों ने शायद यह सोचकर ऐसा किया कि उनका तरीका कानूनी रूप से सही है, इसलिए उन पर कोई सजा या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। 

तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षदों के मामले में अदालत ने राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि अब तक उनके द्वारा किए गए काम केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट की धारा 531 के तहत सुरक्षित रहेंगे. यानी उनकी अब तक की कार्रवाई सिर्फ शपथ की गलती के आधार पर रद्द नहीं होगी. लेकिन वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य के मामले में तस्वीर अलग है. कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज एक्ट में ऐसी सुरक्षा का प्रावधान नहीं है, इसलिए उस सदस्य ने अब तक जो काम किए, वे अमान्य माने जाएंगे. हालांकि उसे भी दोबारा शपथ लेने का मौका दिया गया है। 

फैसले में नारायण गुरु की सीख और संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता का जिक्र करते हुए कहा गया कि लोग भगवान को भले ही अलग-अलग नामों से पुकारें, लेकिन कानूनन शपथ सिर्फ ईश्वर के नाम पर या सत्यनिष्ठा से ही ली जा सकती है. इसमें अपनी तरफ से कोई भी नाम जोड़ना ठीक नहीं है। 

 

चेतन से प्यार, केतन से नजदीकियां! आखिर सिया चाहती क्या थी? टीवी एक्ट्रेस का फूटा गुस्सा

 पुणे

पुणे के चर्चित लोहगढ़ हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस जांच में अब मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके परिवार की पृष्ठभूमि को भी खंगाला जा रहा है. जानकारी के अनुसार, सिया गोयल पुणे के गंगाधाम इलाके स्थित न्यू एरा सोसायटी में अपने परिवार के साथ रहती थी. उसके परिवार में माता-पिता और एक भाई शामिल हैं। 

जांच में यह भी पता चला है कि सिया और चेतन की पहली मुलाकात पिछले साल दिवाली के दौरान आयोजित एक पार्टी में हुई थी. इसी मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया. पुलिस अब दोनों के रिश्तों, कॉल रिकॉर्ड, मुलाकातों और आपसी संवाद से जुड़ी जानकारियों को खंगाल रही है। 

फूटा टीवी एक्ट्रेस का गुस्सा, सिया पर एक्शन की डिमांड
 केतन अग्रवाल की मौत ने सनसनी मचाई हुई है. 26 साल के लड़के की मौत लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान हुई. वो पहाड़ी से नीचे गिर पड़े, जिसमें उनकी जान चली गई. पहले इसे महज एक हादसा बताया जा रहा था. लेकिन फिर ये बात सामने आई कि उनकी मंगेतर सिया गोयल ने अपने लवर चेतन चौधरी के साथ केतन को पहाड़ी से नीचे धक्का दिया। 

इस घटना ने हर किसी को हैरानी में डाल दिया है. सभी सिया से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया है. टीवी सेलेब्स भी अपनी नाराजगी बयां करते दिख रहे हैं. हिना खान के बाद अब आंचल खुराना ने केतन अग्रवाल के साथ जो कुछ हुआ, उसपर दुख जताया है. आंचल ने सिया को लेकर भी बड़ी बात कह डाली है। 

रोडीज विनर ने जताई नाराजगी
अपने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करके आंचल खुराना ने कहा- केतन अग्रवाल सिर्फ 26 साल का लड़का था. एक करोड़पति बाप के बेटे की एक करोड़पति बाप की बेटी से अरेंज मैरिज फिक्स होती है. दोनों परिवार एक-दूसरे के करीबी हैं, तो वो अपने बच्चों की भी शादी तय कर लेते हैं. लेकिन जो बेटी है उसका चेतन के साथ अफेयर चल रहा होता है. आप ये बात अपने पेरेंट्स से कह सकती थीं, आप अपने मंगेतर को ये बात बता सकती थीं. लेकिन उसने केतन को पहाड़ी से नीचे फेंकना सही समझा। 

‘यार ये सिर्फ लड़का या लड़की की बात नहीं है. मैं ये कहना चाह रही हूं कि इस पीढ़ी को हो क्या गया है? हमें किसी पर भी अत्याचार नहीं करना चाहिए. सिया के अंदर केतन को मारने की हिम्मत आई, लेकिन अपने माता-पिता को अफेयर का सच बताने की हिम्मत नहीं थी. क्या तुम सीरियस हो? तुम उसके घर से भाग सकती थी, कुछ और कर सकती थी. किसी को मारने की क्या जरूरत थी? ये आखिर हो क्या रहा है? मेरे हिसाब से उस लड़की को भी उसी खाई से धक्का दे देना चाहिए. इस मामले में कोई कोर्ट केस भी नहीं होना चाहिए। 

 सिया आखिर चाहती क्या थी? 
 पुणे के बहुचर्चित लोहगढ़ किला केस का सबसे चर्चित नाम. एक ऐसी लड़की, जिसकी जिंदगी में एक तरफ केतन अग्रवाल था, जिससे कुछ महीनों बाद उसकी शादी होने वाली थी, तो दूसरी तरफ चेतन था, जिसके साथ उसके अफेयर की बात पुलिस जांच का हिस्सा बन चुकी है। 

पुणे के गंगाधाम इलाके की न्यू एरा सोसायटी में रहने वाली सिया एक कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती है. उसके पिता प्रवीण गोयल ड्राय फ्रूट और मसालों के कारोबार से जुड़े हैं. परिवार की छवि समाज में सम्मानित मानी जाती है जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले साल दिवाली के दौरान आयोजित एक पार्टी में सिया की मुलाकात केतन से हुई थी. बताया जाता है कि पहली मुलाकात के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता चला गया. वहीं दूसरी ओर पुणे (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पिछले छह महीनों में सिया और चेतन के बीच 2,004 कॉल हुईं और कुल मिलाकर लगभग 238 घंटे बातचीत हुई. कुछ कॉल दो से तीन घंटे तक लगातार चली थीं. पुलिस का मानना है कि यह लंबी बातचीत कथित साजिश की तैयारी का भी हिस्सा हो सकती है।  

11 फरवरी को हुई मुलाकात, 19 को रोका 
दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान सिया के परिवार ने उसके लिए जीवनसाथी की तलाश भी शुरू कर दी थी. इसी क्रम में अग्रवाल परिवार से रिश्ता तय हुआ. 11 फरवरी को दोनों परिवारों की मुलाकात हुई, 19 फरवरी को रोका सम्पन्न हुआ और 25 नवंबर को शादी की तारीख भी तय कर दी गई. घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी थीं. भविष्य के सपने बुने जा रहे थे. परिवार का कहना है कि सिया केवल नाम की होने वाली बहू नहीं थी, बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुकी थी. वह कई बार उनके घर आई. होली के अवसर पर आई, पूजा-पाठ में शामिल हुई, पूरा दिन परिवार के साथ बिताया. बातचीत में अपनापन दिखाती थी. किसी को यह आभास तक नहीं हुआ कि उसके मन में कुछ और भी चल रहा है। 

केतन की मां ने मान लिया था बहू 
केतन की मां आज भी इसी बात को याद कर भावुक हो जाती हैं. उनका कहना है कि उन्होंने सिया को बहू मान लिया था. वह घर आती थी, परिवार के साथ घुल-मिलकर रहती थी, इसलिए कभी शक नहीं हुआ. उनका आरोप है कि यदि रिश्तों की वास्तविक स्थिति पहले बता दी जाती तो शायद आज उनका बेटा जिंदा होता. एक तरफ शादी की तैयारियां चल रही थीं, दूसरी तरफ पुलिस जांच में सामने आया कि सिया और चेतन लगातार संपर्क में थे. जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता था. परिजनों का दावा है कि दोनों की मुलाकातें होती थीं और वे एक-दूसरे के काफी करीब थे. सोशल मीडिया और जांच से जुड़े कुछ वीडियो भी चर्चा में हैं, जिनमें दोनों को साथ देखा गया है.  इसी बीच केतन के परिवार ने एक और गंभीर दावा किया है. उनका आरोप है कि 14 जून को भी सिया, केतन को लेकर लोहगढ़ किले गई थी. वहां कथित रूप से एक ऐसी घटना हुई, जिसे परिवार हत्या की पहली कोशिश मान रहा है। 

ड्राई फ्रूट का कारोबार करते हैं सिया के पिता
बताया जा रहा है कि सिया के पिता प्रवीण गोयल शहर में ड्राई फ्रूट और मसालों के कारोबार से जुड़े हुए हैं और उनका अपना व्यापारिक प्रतिष्ठान भी है. जांच एजेंसियां परिवार से जुड़े तथ्यों और मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। 

वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए चेतन के बारे में भी कई जानकारियां सामने आई हैं. सूत्रों के मुताबिक चेतन भी ड्राई फ्रूट के व्यवसाय से जुड़ा हुआ था. उसने बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी. फिलहाल पुलिस उसके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। 

अधिकारियों का मानना है कि मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए दोनों के बीच संबंधों की प्रकृति और घटनाओं के क्रम को समझना बेहद जरूरी है. इसी वजह से जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी सबूतों की मदद से पूरे घटनाक्रम को जोड़ने में जुटी हैं. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और मामले से जुड़े हर तथ्य को सत्यापित करने का प्रयास किया जा रहा है। 

साबित हुआ आखिर सफर 
परिवार के मुताबिक, उस दिन किले के एक हिस्से में खड़े होने के दौरान केतन को पीछे की ओर धक्का लगा था. वह नीचे की ओर खिसक गया, लेकिन झाड़ियों में हाथ फंस जाने के कारण उसकी जान बच गई. परिवार का कहना है कि बाद में सिया ने सांप आया… सांप आया कहकर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की.  परिजनों के अनुसार, 19 जून को सिया का जन्मदिन था. जन्मदिन मनाने की बात कहकर उसने 18 जून को केतन को लोहगढ़ किले चलने के लिए कहा. सुबह करीब साढ़े आठ बजे दोनों वहां के लिए निकले. परिवार को लगा कि होने वाले पति-पत्नी घूमने जा रहे हैं. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर केतन की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा. करीब 10:45 बजे फोन आया कि केतन किले की घाटी में गिर गया है. परिवार तुरंत मौके के लिए रवाना हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. केतन की मौत हो चुकी थी। 

सिया के चेहरे पर नहीं थी सिकन 
केतन के पिता विशाल अग्रवाल का कहना है कि शुरुआत से ही उन्हें यह घटना हादसा नहीं लगी. उनका आरोप है कि घटनास्थल की परिस्थितियां और बाद की परिस्थितियां कई सवाल खड़े करती हैं. परिवार का दावा है कि जब उन्होंने केतन का शव देखा, तब भी सिया के चेहरे पर वैसा दुख दिखाई नहीं दिया. केतन की मां कहती हैं कि जिस बेटे को उन्होंने लाड़-प्यार से बड़ा किया, जिसकी शादी की तैयारियां चल रही थीं, वह अचानक उनसे छिन गया. उनकी आवाज में दर्द साफ झलकता है. वह कहती हैं कि केतन हर बात उनसे साझा करता था, लेकिन शायद वह भी नहीं समझ पाया कि उसके आसपास क्या चल रहा है। 

उधर पुलिस तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की जांच में जुटी है. कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल का पुनर्निर्माण और संबंधित लोगों से पूछताछ लगातार जारी है. जांच एजेंसियां हर उस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जो इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई तक पहुंचा सके. लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है, जो लाखों लोगों के मन में घूम रहा है. अगर सिया की जिंदगी में चेतन था, जिससे वो प्यार करती थी तो केतन से शादी को क्यों तैयार  हो गई. पुलिस अब यह जांच कर  रही है कि आखिर वह चाहती क्या थी? वैसे तो इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है. जवाब शायद जांच पूरी होने के बाद मिलेगा। 

 

 

भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौते के करीब, 2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

नई दिल्ली

भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. दोनों देश एक बेहद ऐतिहासिक और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी पोलोस मॉरिसन ने कैपिटल हिल में आयोजित ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी समझौते का मुख्य उद्देश्य साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार पहुंचाना है. इस रणनीति को ‘मिशन 500’ का नाम दिया गया है। 

परिणाम-उन्मुख संबंधों पर जोर
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देश अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका ध्यान सीधे परिणामों पर केंद्रित है. फरवरी 2026 में व्यापार समझौते की दिशा में की गई आधिकारिक घोषणा के बाद से दोनों देशों की टीमों ने इस पर दिन-रात काम किया है. इस समझौते के लागू होने से अमेरिकी निर्यातकों के लिए भारत का 140 करोड़ (1.4 बिलियन) उपभोक्ताओं वाला विशाल बाजार पूरी तरह खुल जाएगा, जो दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होगा। 

क्या है समझौते की प्रमुख बातें?
500 अरब डॉलर की भारतीय खरीद: इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल और अत्याधुनिक तकनीकी उत्पाद खरीदने की योजना बना रहा है। 

ऊर्जा साझेदारी में उछाल: दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार 2025 से तेजी से बढ़ा है और यह 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. साथ ही नए ‘शांति अधिनियम’ के तहत दोनों देश नागरिक परमाणु सहयोग बढ़ाने की राह तलाश रहे हैं। 

रिकॉर्ड भारतीय निवेश: आर्थिक मोर्चे पर भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में हुए ‘SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट’ में भारतीय कंपनियों द्वारा 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धताएं जताई गईं, जो अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी निवेश घोषणाओं में से एक है। 

टैरिफ नीति में बदलाव के बाद नए सिरे से बातचीत
हाल ही में अमेरिकी टैरिफ नीतियों में आए बड़े बदलावों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस समझौते के ढांचे को फिर से समायोजित किया जा रहा है. इसी सिलसिले में अमेरिकी मुख्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर नई दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ इस समझौते के आखिरी हिस्सों को सुलझाने के लिए गहन बातचीत कर रहे हैं. दोनों पक्षों की कोशिश है कि 24 जुलाई 2026 से पहले (जब अमेरिका का अस्थायी 10% टैरिफ समाप्त हो रहा है) एक अंतरिम व्यापार समझौते को लागू कर दिया जाए. भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश अगले महीने यानी जुलाई के मध्य तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरी तरह से लागू करने की स्थिति में होंगे। 

व्यापार संतुलन और शिक्षा का योगदान
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है. इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली बढ़त के साथ 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से भारत का आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इस वजह से भारत का व्यापार अधिशेष जो पहले 40.89 अरब डॉलर था, वह घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है. व्यापार के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र भी इस रिश्ते को मजबूती दे रहा है; वर्तमान में 3,30,000 से अधिक भारतीय छात्र अमेरिकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 14 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। 

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