बांग्लादेश की सेना में बढ़ रहा चीन का दखल, J-10CE डील से भारत को घेरने की तैयारी?

ढाका
 साउथ एशिया के डिफेंस मार्केट में इन दिनों तगड़ी हलचल है. पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए बांग्लादेश भी चीन का लड़ाकू विमान J-10CE को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी में जुट गया है. बांग्लादेश वायु सेना चीन से ऐसे 24 फाइटर जेट्स खरीदने की डील के बेहद करीब है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस लड़ाकू विमान के फुस्स हो जाने के बावजूद, ड्रैगन ने उल्टा नैरेटिव सेट करके इस जेट को जी-जान से प्रमोट किया. अब ढाका उसके जाल में फंस गया है. करीब 40 मिलियन डॉलर कीमत वाला ये सौदा अगर पक्का हुआ तो भारत की दोनों सरहदों पर चीनी हथियारों का पहरा मजबूत हो जाएगा। 

बांग्लादेश में चीन का डिफेंस जाल
बांग्लादेश की सेनाएं पहले से ही बड़े पैमाने पर चीनी हथियारों पर निर्भर हैं. चीन धीरे-धीरे बांग्लादेश के तीनों सेनाओं में घुस चुका है. थल सेना की बात करें तो बांग्लादेश का पूरा टैंक बेड़ा चीनी मूल का है, उनकी एयर डिफेंस और आर्टिलरी में भी चीनी उपकरणों की भरमार है. नौसेना के क्षेत्र में भी बांग्लादेश ने चीन से ही पनडुब्बी हासिल की थीं। 

अब इस प्लानिंग को आगे बढ़ाते हुए बांग्लादेशी वायु सेना को भी पूरी तरह चीनी रंग में रंगने की तैयारी है. बांग्लादेश के पास फिलहाल रूसी मिग-21 का चीनी वर्जन F-7 फाइटर्स है, जिसे वो काफी समय से बदलने की कोशिश में था. हालांकि उसने यूरोफाइटर जैसी पश्चिमी तकनीकों पर भी विचार किया लेकिन चीन ने नई चाल चल दी. चीन ने बांग्लादेश को कम कीमत और आसान शर्तें ऑफर कीं और आखिरकार पासा चीन के पक्ष में झुकता दिख रहा है। 

J-10CE, जिसे चीन में ‘विगोरस ड्रैगन’ के नाम से जाना जाता है, कोई साधारण विमान नहीं है. ये चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (PLAAF) का सबसे भरोसेमंद फाइटर जेट है. ये विमान चीन की खतरनाक PL-15 मिसाइलों से लैस होता है। 

चीन का गिरता एक्सपोर्ट और तीन देशों का खतरनाक नेक्सस
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर चीनी हथियारों की बिक्री में भारी गिरावट आई है. ऐसे में चीन के लिए ये डील संजीवनी की तरह है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन जितने भी हथियार एक्सपोर्ट करता है, उसका 80% हिस्सा एशिया में ही आता है। 

भारत के लिए क्या बदलेगा?
चीन के कुल सैन्य निर्यात का 60% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ तीन देश खरीदते हैं- पाकिस्तान, बांग्लादेश और म्यांमार. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर और पूर्व डीजी आर्टिलरी लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर के मुताबिक, चीन ने भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ एक खतरनाक मिलिट्री नेक्सस बना लिया है, जिस पर भारत को कड़ी नजर रखनी होगी। 

अगर बांग्लादेश-चीन की ये डील फाइनल होती है तो भारत के पश्चिमी बॉर्डर यानी पाकिस्तान और पूर्वी बॉर्डर यानी बांग्लादेश दोनों तरफ चीनी फाइटर जेट्स तैनात हो जाएंगे यानी चीन की एंट्री हो जाएगी. भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि संकट के समय भारत को दोतरफा हवाई खतरों का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा, बांग्लादेश में चीनी तकनीशियनों और सैन्य विशेषज्ञों की मौजूदगी बढ़ेगी जो भारतीय सीमा के बेहद करीब रहकर खुफिया कूटनीति और निगरानी को अंजाम दे सकते हैं। 

ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी को खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता दिया

नई दिल्ली
 ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई कर आयोजित किए जाएंगे।

हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है।

28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत
तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था।

राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।

 

बंगाल में आवास योजना पर ‘कट मनी’ के आरोप, दबाव बढ़ने पर TMC नेताओं ने लौटाए पैसे

 कूचबिहार

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में सीतलकुची ब्लॉक की भैरथाना ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 194 के तहत आने वाले छोटे बांगदाकी गांव में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद ‘आवास योजना’ के तहत घर बनाने की सुविधा दिलाने के बदले ग्रामीणों से ‘कट मनी’ यानी गैर-कानूनी कमीशन या रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ। 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के तीन स्थानीय नेताओं- मनोज अधिकारी, उत्तम बर्मन और क्षितीश देब शर्मा ने सरकारी आवास योजना का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों से पैसे लिए थे। 

खबरों के मुताबिक, जनता के भारी दबाव और बढ़ते गुस्से की वजह से इन तीनों नेताओं ने हाल ही में कई स्थानीय निवासियों को करीब 90,000 रुपए वापस किए। 

आरोपों पर क्या बोले TMC नेता?
पैसे वापस करने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में इस पर बहस छिड़ गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताओं के द्वारा हर लाभार्थी से रिश्वत के तौर पर 8,000 से 10,000 रुपए तक वसूले जाते थे। 

आरोपों के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी नेता मनोज अधिकारी ने कहा, “पार्टी के निर्देशों के मुताबिक कुछ फंड इकट्ठा किए गए थे. हालांकि, निवासी अब अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, इसलिए हम उन्हें पैसे लौटा रहे हैं। 

TMC के ही एक अन्य नेता उत्तम बर्मन ने भी इसी बात को दोहराया. वहीं, TMC नेता क्षितीश देब शर्मा के बेटे अक्षय देब शर्मा ने बताया कि उस खास दिन कई निवासियों को कुल 13,000 रुपए वापस किए गए थे। 

8वें वेतन आयोग में हो सकता है बड़ा बदलाव, महंगाई को लेकर उठी नई मांग

नई दिल्ली

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (AIDEF) ने आठवें वेतन आयोग से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला कर्मचारियों और पेंशनर्स पर महंगाई के बोझ का सही कैलकुलेशन नहीं करता है। 

महंगाई के अनुसार ज्‍यादा खर्च 
अभी महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन भत्ता (DR) में संशोधन अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस्‍ड है. यह इंडेक्‍स कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती कीमतों के लिए नुकसान की भरपाई करने और महंगाई के खिलाफ उनकी खरीदने की क्षमता की रक्षा के लिए है। 

मौजूदा फॉर्मूले में बड़ी खामियां            
हालांकि, आठवें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने दूसरे डिमांड में AIDEF ने कहा कि मौजूदा फॉर्मूले में महत्वपूर्ण कमियां हैं और यह कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बदलते खर्च करने के तरीकों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखा सकता है। 
 
देखें ये आंकड़े       
फेडरेशन के अनुसार, 2022-23 में पेश किए गए संशोधित कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स में फूड आइटम्‍स और मौसमी एग्री प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को पर्याप्‍त तौर पर नहीं बताता है. एआईडीईएफ ने बताया कि खाद्य और पेय पदार्थों का भार अब सूचकांक में 36.75% है, जबकि आवास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी कैटेगरी को ज्‍यादा वेटेज दिया गया है। 
 
पेंशनर्स के लिए चुनौती
AIDEF ने पेंशनभोगियों के चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनमें से कई अपनी मंथली इनकम का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और देखभाल सेवाओं पर खर्च करते हैं. अगर इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतें महंगाई से ज्‍यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई राहत में बदलाव उतना नहीं होता है। 

मौजूदा फॉर्मूले की जांच की मांग
इन चिंताओं को देखते हुए, AIDEF ने मौजूदा महंगाई फॉर्मूले की जांच करने और सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च को मैनेज करने के लिए बदलने के लिए कहा है। 

हर राज्‍य में आयोग की हो रही बैठक
गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग की बैठक कई राज्‍यों में पूरी हो चुकी है, जिसमें सैलरी बढ़ोतरी, महंगाई भत्ते में इजाफा और फिटमेंट फैक्‍टर समेत कई मांग रखी गई है. 

EWS छात्रों को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सरकारी फीस की मांग खारिज की

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने EWS आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेज फीस को लेकर याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों में अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो स्कॉलरशिप समेत अन्य विकल्प जैसे सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपनी फीस से चलते हैं और अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फीस लेने से रोका गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा। 

जो वहन नहीं कर सकते हैं फीस 
इस मु्द्दे पर फैसला देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकता है, तो स्कॉलरशिप, सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं। 

देश को डॉक्टरों की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि देश को अधिक डॉक्टरों की जरूरत है और निजी मेडिकल कॉलेज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस अधिक है केवल इसलिए उन्हें सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने का आदेश नहीं दिया जा सकता. हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ा कोई व्यापक कानूनी प्रश्न भविष्य में उठाया जा सकता है। 

राजस्थान का भी उठा मामला
वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को वैध माना था और कहा था कि राज्य की फीस नियामक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार ही फीस तय की गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 8 लाख रुपये के वार्षिक आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के बीच कथित विरोधाभास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। 

सिया के बर्थडे पर ग्रैंड पार्टी की थी तैयारी, महाबलेश्वर के रिजॉर्ट में बुक थे 40 कमरे

 पुणे

जिस सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल किले से धक्का देकर मार दिया, उसने सिया के बर्थडे पर ग्रैंड सेलिब्रेशन की तैयारी कर रखी थी. जांच में सामने आया है कि 19 जून को केतन अग्रवाल ने महाबलेश्वर के एक बड़े रिजॉर्ट में लगभग 40 से 50 कमरे बुक किए थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिया गोयल पर केतन अग्रवाल की हत्या की मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। 

इस पूरे मामले की जांच करने वालों का दावा है कि सिया ने इस पूरे कांड की साजिश इसलिए रची, क्योंकि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी. वह अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ रिलेशन रखना चाहती थी। 

पुलिस ने कहा कि सिया ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की प्लानिंग की. जांच के दौरान सामने आया कि सिया पहले 31 मई को केतन के साथ ट्रेकिंग के लिए लोहागढ़ किले गई थी. पुलिस को शक है कि इसी दौरान केतन को चट्टान से नीचे धकेलने का खयाल सबसे पहले उसके मन में आया था। 

इसके बाद 14 जून को दोनों ने फिर से फोटोशूट के बहाने लोहागढ़ किले का विजिट किया. इस दौरान सिया ने यह कहकर हंगामा कर दिया कि उसके पास एक सांप आ गया है, लेकिन केतन को घाटी में धकेलने की प्लानिंग नाकाम रही. बाद में 18 जून को सिया के बर्थडे से एक दिन पहले वह केतन को एक बार फिर लोहागढ़ किले ले गई. पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी के साथ मिलकर उसने केतन को चट्टान से नीचे धकेल दिया गया। 

मंगेतर के साथ सिया की रोमांटिक पोस्ट

पुणे में मंगेतर की हत्या करने वाली 20 साल की सिया गोयल ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो।

दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। उसने केतन को टैग भी किया था।

पुलिस के मुताबिक, 18 जून को केतन की मौत के दिन लोहगढ़ किले पर एक युवक 33°C तापमान में हुडी पहनकर आया था। पुलिस ने जांच में इसे ही आधार बनाकर एक-एक कड़ियां जोड़ीं। आखिरकार सिया और उसे बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को केतन की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया।

19 जून को सिया का बर्थडे, केतन से पहले से सेलिब्रेशन शुरू कर दिया
सोशल मीडिया पर सिया और उसके मंगेतर केतन का रिश्ता किसी परफेक्ट लव स्टोरी जैसी थी। 19 जून को सिया का बर्थडे था। केतन ने एक महीने पहले यानी 19 मई से ही काउंटडाउन सेलिब्रेशन शुरू कर दिया था। वह रोज उसे अलग-अलग तरीके से अपनी मंगेतर सरप्राइज देता।

सिया सोशल मीडिया पर इसके वीडियो पोस्ट करती थी। ये पोस्ट अब वायरल हो रहे हैं। एक पोस्ट में केतन अपनी कार फूलों से सजाकर सिया को गिफ्ट देता दिखा। सिया ने इसका वीडियो पोस्ट कर लिखा- उसने ‘पसंद है तुम्हें’ वाली बात को बहुत सीरियसली से ले लिया।

बैकग्राउंड में ‘पसंद है तुम्हें’ गाना भी बज रहा था। एक स्टोरी में उसने केतन की तस्वीर को ‘दैट स्माइल’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। केतन की मौत के अगले दिन सिया ने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट लिखी- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’

पिता ने बयां किया दर्द, बोले- बेटा कोहिनूर था
केतन के पिता विशाल अग्रवाल से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि 26 साल का बेटा गुजर गया, ये दुख समंदर से बड़ा है. मेरा बेटा मेरे बुढापे का सहारा था, मेरा वंशज था. विशाल अग्रवाल ने कहा कि मेरी चिता को वही मुखाग्नि देने वाला था. आज वही चला गया. मेरा सब खत्म हो गया. उन्होंने बताया कि केतन पढ़ाई में होशियार था. उसने यूएस से एमबीए किया था. इसके बाद वह मेरे बिजनेस में ही हाथ बंटा रहा था. बेटा मेरे लिए कोहिनूर था, जिसे धोखे से मार दिया। 

कॉल रिकॉर्ड से प्रेमी का खुलासा, 2004 कॉल्स और 238 घंटे बातचीत हुई
पुलिस को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल कम्युनिकेशन डेटा की जांच से पता चला सिया चेतन नाम के लड़के से लगातार संपर्क में थी। दोनों के बीच 1 जनवरी से 18 जून तक 2004 कॉल्स हुए। इससे दोनों के बीच गहरे संबंध के संकेत मिले।

पुलिस ने चेतन की तस्वीरों और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की। जब उसकी तस्वीरों को CCTV फुटेज में दिख रहे हुडी वाले युवक से मैच किया गया तो हत्या का शक और मजबूत हो गया। इसके बाद पुलिस ने चेतन चौधरी को हिरासत में लिया।

प्रेमी बोला- सिया बदनामी के कारण भागकर शादी के खिलाफ थी
पूछताछ में चेतन से जब पूछा गया कि सिया और तुमने भागकर शादी क्यों नहीं की। इस पर उसने बताया कि सिया सगाई तोड़कर भागने के पक्ष में नहीं थी। उसे लगता था कि इससे उसके परिवार की बदनामी होगी। इसके बाद पुलिस ने सिया और चेतन दोनों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया।

रियल एस्टेट कारोबारी थे केतन, शादी के लिए 17 करोड़ में पैलेस बुक था
केतन अग्रवाल पुणे के गहुंजे के रहने वाले थे। वे रियल एस्टेट कारोबारी और सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर विशाल अग्रवाल के बेटे थे। विशाल पुणे के रियल एस्टेट सर्कल में ‘लैंड बैंक’ माने जाते हैं। केतन भी कंपनी में डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के पद पर थे।

उन्होंने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से BBA किया था। अमेरिका के बैब्सन F.W. ओलिन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एंटरप्रेन्योरशिप में MS (मास्टर ऑफ साइंस) की डिग्री ली। सिया ड्राई फ्रूट्स कारोबारी की बेटी है। नवंबर में दोनों की शादी होनी थी। इसके लिए राजस्थान में 17 करोड़ रुपए का एक पैलेस बुक किया जा चुका था। मेहमानों के लिए दो चार्टर्ड प्लेन बुक थे।

बहन को हुआ शक, 4 दिन बाद पहुंची थी सिया
पुलिस जांच में 18 जून की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में आ गईं. जांचकर्ताओं के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह 7 बजे से शाम 5 बजकर 40 मिनट तक चेतन चौधरी का इंटरनेट बंद रहा. इस अवधि को पुलिस ने बेहद महत्वपूर्ण माना और उसकी गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल शुरू की। 

25 नवंबर को होनी थी केतन और सिया की शादी
जांच में यह भी सामने आया कि चेतन चौधरी कथित तौर पर अपना मोबाइल फोन दुकान पर छोड़कर गया था. पुलिस का दावा है कि वह अपने कर्मचारी का मोबाइल लेकर लोहगढ़ पहुंचा था. जांचकर्ताओं को शक है कि ऐसा अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने और मोबाइल ट्रैकिंग से बचने के लिए किया गया। 

मामले को और पुख्ता करने के लिए पुलिस ने 18 जून को चेतन के मोबाइल पर आने वाली सभी कॉल्स की जांच की. जिन लोगों ने उस दिन फोन किया था, उनसे पूछताछ की गई. पुलिस के अनुसार, कई कॉलर्स ने बताया कि फोन पर खुद चेतन ने बात नहीं की थी, बल्कि उसके कर्मचारियों ने कॉल रिसीव कर जवाब दिए थे. इससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा हो गया। 

डिजिटल सुरागों ने बदली जांच की दिशा
पुलिस का कहना है कि कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियों, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने जांच को हत्या की साजिश की ओर मोड़ दिया. जांच में मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कड़ियां जोड़ी हैं. फिलहाल मामले की जांच जारी है. हालांकि, इस पूरे केस में केतन की बहन का शुरुआती शक वह पहला सुराग साबित हुआ, जिसने एक कथित हादसे के पीछे छिपी कहानी को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई. अब पुलिस डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत जांच कर रही है। 

‘मलबे में दबे लोग पानी-पानी चिल्ला रहे थे’, चश्मदीद ने सुनाई कोलकाता हादसे की दर्दनाक कहानी

कोलकाता
कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को बड़ा हादसा हो गया. यहां एक निर्माणाधीन फैक्ट्री शेड के गिरने से 18 लोग घायल हो गए और कई अन्य के फंसे होने की आशंका है. हादसे से बचाए गए लोगों में से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है. मलबे के नीचे फंसे लोगों को ढूंढने और निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. हालांकि अभी यह सामने नहीं आ सका है कि इमारत के भीतर कितने लोग फंसे थे. घायलों को उपचार के लिए शहर के SSKM Hospital भेजा गया है। मलबे से निकाले गए 18 घायलों को SSKM अस्पताल में भेजा गया है। 

 पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना स्थल पर राहत व बचाव कार्य का जायजा लिया। 

 केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने कहा, ‘अभी-अभी यह हादसा हुआ है. इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम राहत और बचाव अभियान है. बचाव कार्य जारी है और हमारी सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है.’ उन्होंने कहा, कि हो सकता है कि इस निर्माण की अनुमति पिछली सरकार के दौरान दी गई हो. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में यह भी देखा गया था कि कोलकाता नगर निगम ने कई ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दी थी जो अवैध थे. सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और सभी पहलुओं को देखेगी। 

मजदूरों पर गिरे बीम और भारी स्लैब
सामने आया है कि शेड में काम कर रहे मजदूरों पर लोहे के बड़े भारी बीम और कंक्रीट के स्लैब गिर पड़े, जिससे उन्हें निकलने का मौका नहीं मिला और वह मलबे में ही दबे रह गए. ढांचा गिरने के तुरंत बाद, बचाव दल मौके पर पहुंचा और लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें मलबे के नीचे से मदद के लिए चीखें सुनाई दे रही थीं, क्योंकि बचाव दल अंदर दबे लोगों तक पहुंचने के लिए जी-जान से काम कर रहे थे। 

मलबे में दबे लोगों की चीख-पुकार
घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल उज्ज्वल कुमार ने हादसे के बाद का भयावह मंजर बताया. उन्होंने कहा कि मलबे के नीचे दबे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे. उन्होंने और उनके साथियों ने मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों को पानी पिलाया और राहत कार्य में मदद की। 

ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा था काम
मौके पर मौजूद एक शख्स ने बताया कि नीचे ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था. पहली और दूसरी मंजिल पर कंक्रीट के स्ट्रक्चर का काम पूरा हो चुका था. नीचे काम करते हुए लोगों पर ही पूरी इमारत ढह गई. दमकल विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि कंक्रीट डालने के काम के दौरान शेड ढह गया और उन्होंने यह भी कहा कि घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

भारी बीम बन रही रेस्क्यू ऑपरेशन में रोड़ा
भारी बीम और मोटी सरिया के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है इसलिए उन्हें हटाने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि फंसे हुए लोगों तक पहुंच बनाने के लिए  ड्रिलिंग की जा रही है. कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम के एक सदस्य ने कहा, ‘मलबे के नीचे से लोगों के शोर सुनकर आवाज की दिशा में काम किया जा रहा है.’ पश्चिम बंगाल सरकार ने स्थिति पर नज़र रखने और बचाव एवं राहत कार्यों के समन्वय के लिए राज्य सचिवालय नबन्ना में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है. राज्य मंत्री इंद्रनील खान ने बचाव कार्यों की समीक्षा करने के लिए घटनास्थल का दौरा किया। 

कैसे हुआ हादसा, होगी जांच- इंद्रनील खान
इंद्रनील खान ने कहा है कि, ‘हम हादसे के कारणों और किसी भी तरह की गड़बड़ी की जांच भी करेंगे, लेकिन अभी हमारी प्राथमिकता लोगों को बचाना है.’ शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं, जबकि भाजपा नेता राकेश सिंह इससे पहले ही वहां का दौरा कर चुके थे. पिछले छह से सात महीनों से गोदाम का निर्माण कार्य चल रहा था. यह ज़मीन बेहेरा ब्रदर्स कंस्ट्रक्शन के शंभू बेहेरा की है, जबकि इस प्रोजेक्ट को डिवेलप असगर खान कर रहे थे. असगर खान का इलाके में दबदबा बताया जाता है. सामने आ रहा है कि इमारत के बनाए जाने में सुरक्षा मानकों और सुरक्षित निर्माण के तौर-तरीकों का पालन नहीं किया गया था. इन दावों पर आगे की जांच की जा रही है। 

सरकार करेगी पूरे मामले की जांच- केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार
इस हादसे को लेकर केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार ने कहा, ‘अभी-अभी यह हादसा हुआ है. इस समय सबसे महत्वपूर्ण काम राहत और बचाव अभियान है. बचाव कार्य जारी है और हमारी सरकार पूरे मामले पर नजर रखे हुए है.’ उन्होंने कहा, कि हो सकता है कि इस निर्माण की अनुमति पिछली सरकार के दौरान दी गई हो. ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में यह भी देखा गया था कि कोलकाता नगर निगम ने कई ऐसे निर्माण कार्यों को अनुमति दी थी जो अवैध थे. सरकार इस पूरे मामले की जांच करेगी और सभी पहलुओं को देखेगी। 

तारातला में निर्माणाधीन गोदाम का शेड गिरने के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है. मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं. हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। 

कतर के अमीर ने PM मोदी को किया फोन, रास लाफान हादसे में भारतीयों की मौत पर जताया दुख

नई दिल्ली
 कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दर्दनाक हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत की हो गई है। इस बीच मंगलवार को कतर के अमीर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास फोन करके इस हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कतर और भारत नागरिकों की भलाई और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए हादसे को लेकर कतर के अमीर ने जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- ‘मैं कतर के अमीर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने फोन करके कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना जताई। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और एक-दूसरे के साथ एकजुटता से खड़े हैं।’

12 भारतीय नागरिकों की मौत
    कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में पुष्टि करते हुए बताया, ”रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।”

    अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है।

दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक है रास लाफान
रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ, जब फैसिलिटी में कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।

सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सपोर्ट टर्मिनल के कुछ हिस्सों को फिर से चालू करने का काम चल रहा था, तभी धमाका हुआ। कंपनी के मुताबिक, रविवार रात इसी काम के दौरान बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई।

बरजान फैसिलिटी कतर के गैस आधारभूत संरचना का एक अहम हिस्सा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1.4 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रतिदिन है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को चलाने के लिए किया जाता है, जो इस सूखे खाड़ी देश में पानी की आपूर्ति करते हैं।

UN में भारत का दो टूक संदेश, पाकिस्तान और चीन को सुनाई खरी-खरी; कहा- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा

नई दिल्ली

जम्‍मू-कश्‍मीर पर भारत के रुख से पूरी दुनिया वाकिफ है. हर कोई जानता है कि नई दिल्‍ली को उसके स्‍टैंड से कोई नहीं डिगा सकता, लेकिन पाकिस्‍तान अपने यार चीन के साथ मिलकर अक्‍सर ही साजिश रचता रहता है. संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्‍तान ने चीन के साथ मिलकर फिर से जम्‍मू-कश्‍मीर का मुद्दा उठाया. हर बार की तरह इस बार भी भारत ने पाकिस्‍तान के साथ ही चीन को इस कदर रगड़ा कि उनको कोई जवाब नहीं सूझ पड़ा। 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित अरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया. भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी पक्ष की कोई भूमिका नहीं हो सकती. ‘Bridging the Implementation Gap: Security Council Resolutions and Maintenance of International Peace and Security’ विषय पर आयोजित इस बैठक में पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की. इस पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पहले भी भारत का अभिन्न हिस्सा था, आज भी है और आगे भी भारत का ही रहेगा। 

UN को भी दिखाया आईना
भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए. पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है। 

पाकिस्‍तान का दांव फिर धराशायी
भारत ने यह भी कहा कि जब UN80 पहल के तहत संयुक्त राष्ट्र महासभा के जनादेशों की समीक्षा की जा रही है, तो सुरक्षा परिषद के जनादेशों को भी उसी गंभीरता से परखा जाना चाहिए. भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश करता रहा है. भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर पर उसका रुख अडिग है और यह विषय पूरी तरह संप्रभु भारतीय अधिकार-क्षेत्र के भीतर आता है। 

मुंबई में मानसून का कहर, सड़कों और रेलवे ट्रैक पर भरा पानी; अंधेरी सबवे बंद

 मुंबई
 मानसून की पहली बारिश मंगलवार को मुंबई में आफत बनकर आई। सड़कें, रेलवे ट्रैक और सबवे सभी जगहों पर पानी भर गया और शहर के कई हिस्सों में जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए मुंबई में भारी बारिश का अनुमान लगाते हुए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। पूरे राज्य में बारिश का मौसम बने रहने के कारण महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं।

जलभराव से रोजमर्रा की जिंदगी बाधित
मंगलवार तक हुई भारी बारिश के कारण मुंबई के कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया। सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया और सिविक अधिकारियों द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर रोक लगाने के कारण यात्रियों को ट्रैफिक में रुकावटों का सामना करना पड़ा।

एवरार्ड नगर में पानी से भरे सबवे को भी आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। साकी नाका मेट्रो स्टेशन इलाके समेत शहर के अलग-अलग हिस्सों की तस्वीरों में भारी बारिश का रोजमर्रा की आवाजाही पर असर साफ दिखा।

‘नहीं ढूंढ़ पाए समस्या का अस्थाई समाधान’
अंधेरी अंडरपास की स्थिति के बारे में बात करते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के अधिकारी ऋतिक ने कहा, “हम पानी भरने की इस गंभीर समस्या का कोई अस्थायी समाधान नहीं ढूंढ पाए हैं। हमारे अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए यहां तैनात रहते हैं कि गाड़ियां यहां से न गुजरें। लेकिन कुछ रिक्शा चालक फिर भी अपनी गाड़ियों को वहां से निकालने की कोशिश करते हैं। एक रिक्शा सबवे के बीच में फंस गया था। उसकी जान खतरे में थी। हमारे दो अधिकारियों ने उसे बाहर निकालने में मदद की।”

बीएमसी के एक और अधिकारी रॉबर्ट ने कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि अंडरपास के अंदर कोई भी गाड़ी न जाए। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
रेल सेवा जारी रही

बीएमसी ने कहा कि पानी से भरे अंधेरी अंडरपास को छोड़कर सभी सबवे चालू रहे, जबकि शहर भर में रेल सेवा सामान्य रूप से चलती रही। जोरदार बारिश के बावजूद, वेस्टर्न रेलवे ने पुष्टि की कि सुबह के व्यस्त समय में हार्बर लाइन और चर्चगेट-दहानू कॉरिडोर समेत मुख्य रूटों पर सबअर्बन ट्रेन सेवाएं सामान्य रूप से चल रही थीं। हालांकि, रात भर लगातार हुई बारिश के कारण मुंबई और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में जलभराव हो गया।

भारी बारिश से थमी मुंबई की रफ्तार

वसई, विरार और नालासोपारा क्षेत्रों में बुधवार रात से लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है. जलभराव के कारण स्थानीय सेवाएं प्रभावित हुईं और यात्रियों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. पहली ही तेज बारिश ने कई क्षेत्रों में परेशानी बढ़ा दी है. वहीं, भवानी पार्क इलाके में एक पेड़ भी गिर गया, जिसे हटाने के लिए दमकल विभाग की टीम युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुटी हुई है. लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। 

मुंबई में रेड वॉर्निंग के बीच बुधवार शाम से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है. इसी दौरान दादर स्टेशन के पूर्वी इलाके में भारी बारिश के कारण एक बड़ा पेड़ गिरकर एक कार पर आ गिरा, जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ. सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और पेड़ की शाखाएं काटकर उसे हटाने का काम शुरू कर दिया. लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की भी खबरें हैं। 

 मुंबई में मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक लगातार जारी रही. मुंबई में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. भारी बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई. पनवेल से नवी मुंबई आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक की रफ्तार बेहद धीमी रही. सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक समय लगा। 

 बारिश का असर मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं पर भी साफ दिखाई दिया. पश्चिमी रेलवे की लोकल ट्रेनें 20 से 25 मिनट की देरी से चल रही हैं. वहीं सेंट्रल लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार और भी ज्यादा प्रभावित हुई है तथा कई ट्रेनें लगभग 30 मिनट की देरी से चल रही हैं. सेंट्रल रेलवे की सेवाओं में भी व्यवधान दर्ज किया गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 

सबसे बड़ा असर हार्बर लाइन पर देखने को मिला. रेलवे प्रशासन ने जानकारी दी है कि तकनीकी कारणों के चलते हार्बर लाइन की सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं. प्रशासन के अनुसार भारी बारिश और उससे जुड़े तकनीकी कारणों की वजह से यह कदम उठाया गया. इससे नवी मुंबई और मुंबई के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। 

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आंकड़ों के अनुसार 23 जून सुबह 8 बजे से 24 जून रात 2 बजे तक शहर क्षेत्र में औसतन 78 मिमी बारिश दर्ज की गई. पूर्वी उपनगरों में 87 मिमी और पश्चिमी उपनगरों में 113 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. रात 1 बजे से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा बारिश भांडुप कॉम्प्लेक्स में 40 मिमी दर्ज हुई. इसके अलावा एस वार्ड में 35 मिमी, टी वार्ड में 31 मिमी और मिथागर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 29 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। 

पश्चिमी उपनगरों में आनंद नगर म्यूनिसिपल स्कूल क्षेत्र में 32 मिमी, दिंडोशी वसाहत और दहिसर में 30 मिमी तथा मालवणी फायर स्टेशन क्षेत्र में 26 मिमी बारिश हुई. वहीं शहर क्षेत्र में काला किला धारावी में 19 मिमी, आदर्श नगर स्कूल वर्ली में 16 मिमी तथा दादर और वर्ली फायर स्टेशन क्षेत्र में 15 मिमी बारिश दर्ज की गई. मिटी नदी का जलस्तर भी बढ़कर 1.83 मीटर तक पहुंच गया है, जिस पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। 

मुंबई में कितनी बारिश हुई?
बीएमसी के बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 23 जून को सुबह 8:00 बजे से रात 11:00 बजे के बीच शहर में औसतन 56 एमएम बारिश हुई, जबकि पूर्वी उपनगरों में 23 एमएम और पश्चिमी उपनगरों में 33 एमएम बारिश दर्ज की गई।

रात 10:00 बजे से 11:00 बजे के बीच, पश्चिमी उपनगरों में कई जगहों पर अच्छी-खासी बारिश हुई। इनमें कांदिवली का चारकोप सेक्टर 1 म्युनिसिपल स्कूल (32 मिमी), मलाड का MHB म्युनिसिपल स्कूल (28 मिमी), गजधरबंध स्टॉर्म वॉटर पंपिंग स्टेशन (26 मिमी), बनाना लीफ और जुहू डिस्पेंसरी (22 मिमी) और सांताक्रूज का नारियलवाड़ी स्कूल (21 मिमी) शामिल हैं।

 

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