ईरान को लेकर बढ़ा तनाव, अगले हफ्ते बड़े एक्शन की तैयारी में Donald Trump और Benjamin Netanyahu?

तेल अवीव
अमेरिका और इजरायल के सैन्य अधिकारी ईरान पर संभावित हमलों के लिए टारगेट की लिस्ट बना रहे हैं. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच जल्द ही ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने की योजना बन रही है. इजरायली सेना और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इमरजेंसी मीटिंग की हैं. संयुक्त रूप से ईरान के जरूरी ठिकानों की लिस्ट तैयार की जा रही है. यह तैयारी अगले हफ्ते तक हमला शुरू करने जितनी तेजी से चल रही है। 

वर्तमान में अप्रैल 8 को लगा युद्धविराम पूरी तरह लाइफ सपोर्ट पर चल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कहा है कि ईरान के साथ शांति की कोशिशें लगभग खत्म हो चुकी हैं. पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत भी पूरी तरह फेल हो गई है. ईरान ने बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरा संप्रभु अधिकार और नई प्रबंधन व्यवस्था की मांग की थी, जिसे ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया। 

इजरायली न्यूज एजेंसी KAN के सूत्रों के अनुसार, इजरायल अमेरिका पर लगातार दबाव डाल रहा है कि युद्ध फिर शुरू किया जाए. इजरायली नेतृत्व का कहना है कि ईरान के खिलाफ पहले चरण का युद्ध उस समय से पहले खत्म कर दिया गया जब इसे पूरा होना चाहिए था. इजरायल अब ईरान की बची हुई परमाणु  सुविधाओं और मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह नष्ट करना चाहता है। 

ईरान पर हमले के संभावित लक्ष्य
अमेरिकी और इजरायली अधिकारी मिलकर ईरान के अंदर जरूरी टारगेट्स की एक संयुक्त सूची तैयार कर रहे हैं. इनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्लांट, मिसाइल फैक्टरियां, सैन्य अड्डे और कमांड सेंटर शामिल हो सकते हैं. दोनों देशों का मानना है कि अगर अभी कार्रवाई नहीं की गई तो ईरान फिर से मजबूत हो जाएगा और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा। 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से दुनिया का बहुत बड़ा तेल निर्यात होता है. ईरान ने इस पर अपना पूरा नियंत्रण मांगा था, जिसे अमेरिका और इजरायल दोनों ने मना कर दिया. अगर युद्ध शुरू हुआ तो इस खाड़ी में तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया की पर पड़ेगा। 

फिलहाल दोनों तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सैन्य स्तर पर तैयारी तेज हो गई है. इजरायल का मानना है कि ईरान की परमाणु क्षमता को हमेशा के लिए खत्म करने का यह आखिरी मौका हो सकता है. अमेरिका भी ईरान को मजबूत होने से रोकना चाहता है। 

ट्रंप प्रशासन का रुख सख्त है. वे ईरान की किसी भी शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं. अगर बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकला तो अगले कुछ दिनों या हफ्तों में ईरान पर हमला शुरू हो सकता है। 

ईरान पर कोई भी बड़ा हमला पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है. लेबनान, सीरिया, यमन और इराक जैसे देशों में तनाव बढ़ सकता है. तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है क्योंकि भारत ईरान से तेल आयात करता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर तेल आता है। 

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. सैन्य तैयारी तेज होने के साथ ही कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन फिलहाल सफलता मिलती नहीं दिख रही। 

ट्रंप के विमान में चीनी सामान पर सख्त रोक! गिफ्ट, बैज और फोन तक डस्टबिन में फेंकने का दावा वायरल

वाशिंगटन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे के बाद एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन से मिले सभी गिफ्ट, बैज, फोन और दूसरे सामान ट्रंप के विमान एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले डस्टबिन में फेंक दिए। 

बताया जा रहा है कि यह कदम साइबर जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के डर की वजह से उठाया गया. दावा है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने साफ निर्देश दिया था कि चीन की तरफ से मिला कोई भी सामान राष्ट्रपति के विमान में नहीं ले जाया जाएगा। 

यह मामला तब और चर्चा में आया जब पत्रकार एमिली गुडिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि अमेरिकी स्टाफ ने चीनी अधिकारियों की तरफ से दिए गए सभी सामान, जैसे क्रेडेंशियल्स, डेलिगेशन पिन, अस्थायी फोन और दूसरे आइटम इकट्ठा किए और एयर फोर्स वन में चढ़ने से पहले सीढ़ियों के नीचे रखे डस्टबिन में फेंक दिए। 

पोस्ट के मुताबिक, “चीन से मिला कोई भी सामान विमान में लाने की अनुमति नहीं थी.” इसके बाद सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और तस्वीरें भी वायरल होने लगीं। 

रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को चीन यात्रा के दौरान अपने निजी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इस्तेमाल करने से भी बचने को कहा गया था. इसके बजाय डेलिगेशन के सदस्यों को अस्थायी “बर्नर फोन” दिए गए थे, ताकि किसी भी संभावित साइबर निगरानी से बचा जा सके। 

इतना ही नहीं, प्रतिनिधियों के निजी फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एयर फोर्स वन में खास “फैराडे बैग” में रखा गया था. ये ऐसे बैग होते हैं जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को ब्लॉक करते हैं और किसी भी तरह की ट्रैकिंग या डेटा इंटरसेप्शन को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। 

हालांकि अमेरिकी प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस घटना ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते अविश्वास और टेक्नोलॉजी वॉर को फिर सुर्खियों में ला दिया है। 

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच साइबर सुरक्षा, जासूसी, चिप टेक्नोलॉजी और डेटा सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है. अमेरिका पहले भी कई बार चीन पर साइबर जासूसी के आरोप लगाता रहा है, जबकि चीन इन आरोपों से इनकार करता आया है। 

ट्रंप का बड़ा फैसला! चीन से मिले गिफ्ट्स डस्टबिन में फेंके, Air Force One तक नहीं पहुंचा सामान

वाशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चीन यात्रा के बाद सामने आई एक रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति और साइबर सुरक्षा जगत में हलचल मचा दी है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल ने चीन में मिले कई गिफ्ट्स, बैज और स्मृति चिह्नों को अमेरिका वापस ले जाने के बजाय फेंक दिया।

 क्यों फेंके गए गिफ्ट्स?
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि इन छोटे उपहारों में जासूसी डिवाइस, माइक्रोफोन या साइबर बग छिपे हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को पहले से सख्त निर्देश दिए गए थे कि चीन यात्रा के दौरान मिला कोई भी सामान Air Force One पर नहीं ले जाया जाएगा। इसी वजह से वापसी के समय कई वस्तुओं को नष्ट कर दिया गया या डस्टबिन में फेंक दिया गया। दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से साइबर जासूसी को लेकर तनाव बना हुआ है।अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पहले भी आरोप लगा चुकी हैं कि चीन आधुनिक तकनीक के जरिए विदेशी सरकारों, अधिकारियों और संस्थानों की निगरानी करता है।

फोन भी फेंकने या पूरी तरह नष्ट करने के निर्देश
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं या स्मृति चिह्नों में बेहद सूक्ष्म जासूसी उपकरण छिपाए जा सकते हैं, जो बातचीत रिकॉर्ड करने या डेटा चोरी करने में सक्षम होते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने इस यात्रा के दौरान अपने निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप भी साथ नहीं रखे। इसके बजाय उन्होंने “बर्नर फोन” का इस्तेमाल किया। ये अस्थायी फोन होते हैं जिन्हें सीमित समय तक उपयोग करने के बाद नष्ट कर दिया जाता है। अमेरिका लौटने से पहले इन फोन को भी फेंकने या पूरी तरह नष्ट करने के निर्देश दिए गए थे।

बंद डिवाइस भी हो सकते हैक
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक जासूसी तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि बंद पड़े डिवाइस भी निशाना बनाए जा सकते हैं। इसी वजह से अमेरिकी टीम ने अतिरिक्त सतर्कता बरती और किसी भी संदिग्ध वस्तु को साथ ले जाने से बचा।

ट्रंप का बयान भी चर्चा में
जब पत्रकारों ने ट्रंप से चीन की कथित जासूसी गतिविधियों पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा, “वे हम पर जासूसी करते हैं और हम भी उन पर नजर रखते हैं।” ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने Xi Jinping से साफ कहा था कि अमेरिका भी चीन के खिलाफ साइबर ऑपरेशन चलाता है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिबंध, डेटा सुरक्षा और साइबर हमलों के आरोपों के कारण तनाव लगातार बढ़ा है। Huawei जैसी चीनी कंपनियों पर अमेरिका पहले भी सुरक्षा और जासूसी से जुड़े आरोप लगा चुका है, जबकि चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

रेलवे क्रॉसिंग पर बड़ा हादसा: बस से टकराई मालगाड़ी, आग में 8 की मौत

बैंकॉक

बैंकॉक में शनिवार को एक दर्दनाक रेल हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा शहर के मध्य क्षेत्र में स्थित एयरपोर्ट रेल लिंक स्टेशन के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, रेलवे क्रॉसिंग पर कई वाहन रुके हुए थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मालगाड़ी सामने खड़ी नारंगी रंग की सार्वजनिक बस से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेन बस को काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई। इस दौरान आसपास खड़े कई अन्य वाहन भी ट्रेन की चपेट में आ गए।

 हादसे के तुरंत बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते वह आग का गोला बन गई।  वीडियो में कई मोटरसाइकिल सवारों को सड़क पर गिरते और उछलते हुए देखा गया। घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी। Erawan Medical Center के अनुसार, हादसे में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद बचाव दल जली हुई बस के भीतर पहुंचे और घायलों को बाहर निकाला। हादसे के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें ट्रेन को बस से टकराते और फिर बस में आग लगते देखा जा सकता है।

अमेरिका-नाइजीरिया का संयुक्त ऑपरेशन सफल, ISIS आतंकी अबू बकर मारा गया

वाशिंगटन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और नाइजीरिया की सेनाओं ने शुक्रवार को एक अभियान में इस्लामिक स्टेट समूह के एक कुख्यात आतंकी को मार गिराया। ट्रंप ने देर रात एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस संयुक्त अभियान की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अबू बक्र अल-मैनुकी वैश्विक स्तर पर इस्लामिक स्टेट समूह का दूसरा सबसे बड़ा आतंकी था और ‘उसे लगा कि वह अफ्रीका में छिप सकता है लेकिन उसे यह नहीं पता था कि हमारे पास ऐसे सूत्र हैं, जो हमें उसकी गतिविधियों की जानकारी देते रहते थे’।

नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिका अल-मैनुकी को आईएस के संगठन और वित्तपोषण में प्रमुख व्यक्ति मानता था और वह अमेरिका और उसके हितों के खिलाफ हमले की साजिश रच रहा था। आतंकी समूहों पर नजर रखने वाली संस्था ‘काउंटर एक्सट्रीमिज्म प्रोजेक्ट’ के अनुसार, 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो प्रांत में जन्मे अल-मैनुकी ने 2018 में मम्मन नूर के मारे जाने के बाद पश्चिम अफ्रीका में आईएस शाखा की बागडोर संभाली थी।

UAE से पाकिस्तान को बड़ा झटका, एयरलाइन ने अचानक बंद की उड़ानें; सामने आई बड़ी वजह

 दुबई

यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) की लो-कॉस्ट एयरलाइन फ्लाईदुबई (Flydubai) ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका दिया है। एयरलाइन ने ‘ऑपरेशनल कारणों’ का हवाला देते हुए पाकिस्तान के तीन प्रमुख शहरों के लिए अपनी उड़ानें 26 अक्टूबर तक के लिए सस्पेंड कर दी हैं। इनमें राजधानी इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर शामिल हैं। हालांकि, एयरलाइन ने यह साफ किया है कि कराची से आने-जाने वाली उड़ानों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और वे पहले की तरह ही जारी रहेंगी।

इन रूट्स पर कैंसिल हुईं उड़ानें
एविएशन मॉनिटर ‘फ्लाइटरडार24’ के मुताबिक, कम से कम 7 मई से ही इन तीन शहरों के लिए फ्लाईदुबई की उड़ानें कैंसिल चल रही हैं। प्रभावित होने वाली उड़ानों की डिटेल इस प्रकार है:

इस्लामाबाद-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ353 और FZ354

लाहौर-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ359 और FZ360

पेशावर-दुबई: फ्लाइट नंबर FZ375 और FZ376

आपको बता दें कि फ्लाईदुबई ने जुलाई 2024 में इस्लामाबाद और लाहौर में अपना ऑपरेशन शुरू किया था, जबकि पेशावर के लिए बीते साल मई में उड़ानें शुरू की गई थीं।

एयरलाइन ने यात्रियों को दी ये सलाह
ईरान युद्ध शुरू होने के कुछ दिन बाद, 31 मार्च को फ्लाईदुबई की वेबसाइट पर एक बयान जारी किया गया था। इसमें बताया गया था कि एयरलाइन “फिलहाल अपने नेटवर्क पर घटे हुए शेड्यूल के साथ उड़ानें संचालित कर रही है।”

एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी है कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले वे लेटेस्ट अपडेट्स और अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक कर लें। कंपनी ने अपने बयान में 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों से भड़के मध्य पूर्व संघर्ष का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा: हम स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और उसी के मुताबिक अपने फ्लाइट शेड्यूल को अपडेट कर रहे हैं। यात्रियों और क्रू मेंबर्स की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ईंधन संकट: हवाई यात्रा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते जेट फ्यूल (विमान ईंधन) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण एविएशन सेक्टर में बीते कई सालों का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने भी पिछले महीने चेतावनी दी थी कि ईरान युद्ध से उपजे जेट फ्यूल संकट की सबसे बड़ी मार सबसे पहले एशिया पर पड़ सकती है। IATA के प्रमुख विली वॉल्श ने कहा, “मुझे लगता है कि ईंधन की संभावित कमी को देखते हुए, गर्मियों के पीक सीजन में एयरलाइंस अपनी उड़ानों के शेड्यूल में कटौती करना शुरू कर देंगी।”

कर्ज वापसी के बाद अब टेलीकॉम सेक्टर से भी UAE का किनारा
एविएशन सेक्टर में मिले इस झटके से ठीक पहले यूएई आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा चुका है। बीते दिनों यूएई ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर के भारी-भरकम कर्ज की अचानक वापसी करा ली थी। यह वही कर्ज था जिसे यूएई पिछले कई सालों से रोल-ओवर कर रहा था ताकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार दिवालिया होने से बचा रहे।

कर्ज वापसी के झटके से पाकिस्तान उबर भी नहीं पाया था कि अब यूएई की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी ईएंड (e& जिसे पहले एतिसलात के नाम से जाना जाता था) ने भी पाकिस्तान से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी शुरू कर दी है। एतिसलात के पास पाकिस्तान की सरकारी टेलीकॉम कंपनी पीटीसीएल (PTCL) में 26 फीसदी हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा कर रही है और अपने शेयर बेचकर पाकिस्तान के टेलीकॉम मार्केट से बाहर निकलने की योजना बना रही है।

दरअसल, पाकिस्तान सरकार और एतिसलात के बीच 2005 से 800 मिलियन डॉलर (करीब 6.6 खरब पाकिस्तानी रुपये) का एक बड़ा वित्तीय विवाद अनसुलझा है। इसके अलावा यूएई अपनी नई ग्लोबल ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ के तहत भी पाकिस्तान से अपने निवेश वापस खींच रहा है।

पाकिस्तान में जनता को बड़ी राहत, पेट्रोल 5 रुपये सस्ता; डीजल के दाम भी घटे

इस्लामाबाद 

अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से दुनियाभर में तेल का संकट मंडरा रहा है। इस माहौल के बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 रुपये की कटौती की है। इस कटौती के बाद पेट्रोल की कीमत 409.78 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 409.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

बता दें कि पाकिस्तान की सरकार 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से हर हफ्ते  रात को पेट्रोलियम की कीमतों में बदलाव कर रही है। पिछले हफ्ते, सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 14.92 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 15 रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने सबसे पहले 6 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी और 9 मार्च को खर्च में कटौती के कुछ ऐसे उपाय घोषित किए थे, जो पहले कभी नहीं किए गए थे।

भारत में 3 रुपये महंगा हुआ है पेट्रोल-डीजल
सरकारी तेल कंपनियों ने चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद  पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन करते हुए दोनों ईंधनों के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर थीं। हालांकि, मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों ईंधनों के दाम में दो रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी।

वहीं, चार राज्यों-असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 16 दिन बाद यह बढ़ोतरी हुई है। मतदान अवधि के दौरान ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था जबकि पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज वृद्धि हुई थी। तेल कंपनियां चुनाव से पहले पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी पर 674 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठा रही थीं।

दूसरे देशों से अब भी भारत में सस्ती कीमत
वैश्विक तेल संकट के बीच जारी एक आंकड़े के मुताबिक भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम रही है। रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार में पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% तक महंगा हुआ, जबकि मलेशिया, पाकिस्तान, यूएई और अमेरिका में भी ईंधन कीमतों में 40 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल केवल 3.2% और डीजल 3.4% महंगा हुआ है, जिसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम वृद्धि बताया गया है। सरकार का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उछाल के बावजूद आम लोगों पर बोझ कम रखने के लिए कीमतों को लंबे समय तक नियंत्रित रखा गया।

ISIS के टॉप कमांडर अबू बिलान मिनूकी का खात्मा, Donald Trump बोले- उसे मारना आसान नहीं था

वाशिंगटन

ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टेट के एक टॉप कमांडर को मार गिराया गया है। इस समय वह आतंकी संगठन में नंबर दो पर कार्य कर रहा था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और नाइजीरियन सेना के संयुक्तअभियान में अबू-बिलाल अल मिनूकी मारा गया है। ट्रंप ने कहा कि यह बहुत ही जटिल अभियान था।

डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े उत्साह के साथ इस अभियान का जिक्र किया और कहा कि आईएसआईएस अब बुरी तरह से कमजोर हो चुका है। उन्होंने कहा, मेरे ही निर्देश पर बहादुर अमेरिकी फौज और नाइजीरिया के सैनिकों ने मिलकर इस कठिन अभियान को अपने लक्ष्य तक पहुंचाया है।

कौन था अबू बिलाल अल मिनूकी
अबू बिलाल का नाम अबू बकर मुह्म्मद अल मिनूकी था। वह अफ्राका के साहेल इलाके का रहने वाला था। वह आईएसआईएस में बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रहा था। वह वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस में आईएस के सीनियर कमांडर के तौर पर काम कर रहा था। अमेरिाक ने उसे वैश्विक आतंकी जून 2023 में ही घोषित कर दिया था। तब से ही अमेरिकी फौज उसे मार गिरना की फिराक में थी।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पहले भी नाइजीरिया में कई इस तरह के हमले करवा चुके हैं जिसमें आतंकियों की मौत हुई है। बीते दिनों आईएसआईएस के पनाहगाह होने के नाते ही नाइजीरिया पर डोनाल्ड ट्ंरप खूब बरसे थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि नाइजीरिया की सरकार ईसाई विरोधी है। उन्होंने दावा किया था कि नाइजीरिया में इसाइयों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जा रहा है। हालांकि नाइजीरिया की सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया था।

बताया जाता है कि मिनूकी अफ्रीक के बड़े हिस्से में सक्रिय था। जिस क्षेत्र में वह ऐक्टव था उसका विस्तार करीब 5900 किलोमीटर का है। इसमें मॉरिटानिया, माली, सेनेगल, बुर्कनी फासो, नाइजारिया, नाइजर, चाड और सुडान जैसे देश शामिल हैं। इसके अलावा गांबिया, गिनी, इरिट्रिया और कैमरून तक इसाक प्रभाव था। वह चाड डिवीजन में आईएसआईएस के खतरनाक अभियानों को अंजाम देता था। इसके अलावा वह आतंकी संगठनों की फंडिंग करवाने का भी काम करता था। डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन के लिए अपने सैनिकों की जमकर तारीफ की है।

भारत में भी एआईए की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (आईएसआईएस) के सदस्य मोहम्मद शारिक को आतंकी विचारधारा फैलाने और संगठन के लिए धन जुटाने के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। एनआईए ने सोमवार को एक बयान जारी कर बताया कि बेंगलुरु स्थित एक विशेष अदालत ने शारिक पर 92,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

होर्मुज पर बढ़ी हलचल! चीन से लौटते ही Donald Trump का बड़ा दावा, Xi Jinping ने दी हरी झंडी

बीजिंग 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन दौरे से लौटने के बाद बड़ा दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मानते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी है। 

तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शी जिनपिंग के साथ ईरान, ताइवान और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लंबी चर्चा की. ट्रंप के मुताबिक, “शी ने बहुत मजबूती से कहा कि ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन नहीं होना चाहिए. वह यह भी चाहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहे। 

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल कर रहा है और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान को पिछले ढाई हफ्तों में हर दिन लगभग 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, “अगर ईरान स्ट्रेट बंद करता है तो उसका नुकसान उसी को होगा. वहां पूरी तरह अमेरिका का नियंत्रण है। 

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण इस क्षेत्र में लगातार खतरा बना हुआ है। 

ताइवान पर 
ट्रंप ने ताइवान मुद्दे पर भी बातचीत का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ताइवान की स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश के खिलाफ हैं और इसे बड़ा टकराव मानते हैं. ट्रंप ने कहा, “शी नहीं चाहते कि ताइवान को लेकर कोई लड़ाई हो. उनका मानना है कि इससे बहुत बड़ा संघर्ष पैदा हो सकता है। “

हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की, लेकिन शी जिनपिंग ने 1982 के अमेरिका-चीन समझौते और ताइवान को हथियार बिक्री का मुद्दा उठाया. ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच ताइवान पर “बहुत विस्तार से” चर्चा हुई। 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फिलहाल अमेरिका किसी नए युद्ध में नहीं उलझना चाहता. ट्रंप ने कहा, “आखिरी चीज जिसकी हमें जरूरत है, वह 9500 मील दूर एक और युद्ध है। 

ट्रंप ने चीन यात्रा को “बेहद शानदार” बताया और शी जिनपिंग को “अविश्वसनीय नेता” कहा. उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर अच्छी समझ बनी है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। 

शी जिनपिंग का बड़ा हमला! डोनाल्ड ट्रंप के सामने अमेरिका को बताया ‘गिरता हुआ देश’

बीजिंग 

ईरान जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी चीन में हैं. पश्चिम एशिया संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर है.डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. जिनपिंग से मिलते ही ट्र्ंप के सुर बदले दिखे. चीन में डोनाल्ड ट्रंप ने जिनपिंग के तारीफों के पुल बांधे. जिनपिंग को महान नेता बताया. उन्हें अच्छा दोस्त कहा. मगर इसके उलट डोनाल्ड ट्रंप को जलालत झेलनी पड़ी. जी हां, शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप की घनघोर बेइज्जती कर दी. अमेरिका को उनके सामने ही डिक्लाइनिंग नेशन यानी गिरता हुआ देश बता दिया. दिलचस्प बात यह रही कि डोनाल्ड ट्रंप भी जिनपिंग के इस बात से सहमत दिखे। 

सबसे पहले जानते हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को लेकर ट्रंप के आगे क्या कहा. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कूटनीतिक मुलाकात के दौरान एक ऐसा बयान सामने आया, जिसने दुनिया भर का ध्यान खींच लिया. जिनपिंग ने अमेरिका को पतन की ओर जाता देश या गिरता हुआ देश बताया. बीजिंग में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक के दौरान जिनपिंग ने जिस अंदाज में अमेरिका को गिरता हुआ देश बताया, उसे ट्रंप के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है. हालांकि, ट्रंप इस बयान का अलग मतलब समझा रहे हैं। 

ट्रंप ने बाइडन प्रशासन को लपेटा

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि शी जिनपिंग का यह बयान पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल को लेकर था. डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की उन टिप्पणियों की नई व्याख्या दी. ट्रंप ने तर्क दिया कि जिनपिंग का इशारा खास तौर पर जो बाइडेन के कार्यकाल और उस वक्त हुए अमेरिका को नुकसान की ओर था, न कि उनके प्रशासन के तहत अमेरिका की स्थिति को लेकर था. ट्रंप ने अपने तरह से उस बयान को समझाते हुए कहा कि उनके दोबारा सत्ता में आने के बाद अमेरिका फिर से दुनिया की सबसे ताकतवर आर्थिक और सैन्य शक्ति बन गया है। 

ट्रंप ने अपनी सरकार का किया बचाव
डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट कर अमेरिका की मौजूदा वैश्विक स्थिति का बचाव किया और एक बार फिर बाइडेन के राष्ट्रपति काल की आलोचना की. ट्रंप ने लिखा, ‘जब राष्ट्रपति शी ने बहुत ही नजाकत से अमेरिका को एक ‘संभवतः पतनशील राष्ट्र’ कहा तो उनका इशारा ‘स्लीपी जो बाइडेन’ और बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों के दौरान हुए भारी नुकसान की ओर था. और इस मामले में शी जिनपिंग 100% सही हैं। 

हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र कर रहे थे. क्या वह निजी बातचीत में कही गई बात थी या बीजिंग में सार्वजनिक रूप से कही गई थी. दौरे के पहले दिन शी जिनपिंग ने ‘पतनशील राष्ट्र’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उन्होंने ‘थ्यूसिडिडीज ट्रैप’ में फंसने को लेकर जरूर चेतावनी दी. यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक अवधारणा है, जिसमें एथेंस के उदय से स्पार्टा की सत्ता को चुनौती मिली थी। 

जिनपिंग ने क्या कहा था
बीजिंग में अपने शुरुआती संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा था, ‘दुनिया एक नए मोड़ पर आ गई है. क्या चीन और अमेरिका ‘थ्यूसिडिडीज ट्रैप’ से बच सकते हैं और बड़ी शक्तियों के संबंधों का नया मॉडल बना सकते हैं?’ ट्रंप के साथ बैठक के दौरान शी ने ‘सदी में पहले कभी न देखे गए बड़े बदलावों’ का भी जिक्र किया, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले वैश्विक व्यवस्था से हटने के संकेत के तौर पर देखा गया। 

वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने आगे बाइडेन प्रशासन पर ‘खुली सीमाएं, ऊंचे टैक्स, खराब व्यापार समझौते, बढ़ता अपराध’ और अन्य नीतियों के जरिए नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया. ट्रंप ने विविधता, समानता और समावेशन (DEI) पहलों और ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़ी नीतियों की भी आलोचना की। 

अपनी तारीफ में क्या कहा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका अब आर्थिक और सैन्य रूप से मजबूत हो रहा है, जिसमें ‘स्टॉक मार्केट्स अपने उच्चतम स्तर पर’, मजबूत रोजगार बाजार और वैश्विक स्तर पर फिर से प्रतिष्ठा हासिल करने की बात कही. उन्होंने ‘ईरान की सैन्य ताकत को खत्म करने’ का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका एक बार फिर ‘आर्थिक महाशक्ति’ बन गया है. ट्रंप ने आगे कहा कि शी ने उन्हें ‘अद्भुत सफलताओं’ के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वॉशिंगटन और बीजिंग के रिश्ते बेहतर होंगे। 

जिनपिंग से सहमत हैं ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दो साल पहले तक हम सच में एक पतनशील राष्ट्र थे. इस पर मैं राष्ट्रपति शी से पूरी तरह सहमत हूं. लेकिन अब, अमेरिका दुनिया का सबसे आकर्षक देश है और उम्मीद है कि हमारा चीन के साथ रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और बेहतर होगा। 

 

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