MP का खास आम 3 हजार रुपए किलो, स्वाद ऐसा कि विदेशों में भी जबरदस्त मांग

भोपाल 

आम को फलों का राजा यूं ही नहीं कहा जाता। इसका गाढ़ा रस और मिठास हर किसी को लुभाता है। आमों के मामले में भी मध्यप्रदेश देश के प्रमुख राज्यों में हैं। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है। यही कारण है कि यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी अनेक प्रसिद्ध किस्में मिलती हैं। एमपी की एक किस्म तो इतनी प्रसिद्ध है कि विदेशों में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड है। यह विशेष किस्म है “नूरजहां” आम। इसे “किंग ऑफ मैंगो” भी कहा जाता है। प्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला नूरजहां आम अपने विशाल आकार, अद्वितीय स्वाद और आकर्षक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहां आम का वजन लगभग 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। यह 3 हजार रुपए प्रति नग के रेट में बेचा जाता है। खूब महंगा होने के बाद भी लजीज नूरजहां को खरीदने के लिए विदेशों में लोग टूट पड़ते हैं।

“नूरजहां” आम केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी विशेष माना जाता है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में फल आते हैं, इसलिए इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। एक ही फल ही हजारों रुपए में बिकता है। यही कारण है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। कट्ठीवाड़ा का मौसम और वातावरण नूरजहां आम के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है, जिससे यहां पैदा होने वाले फल विशेष गुणवत्ता वाले होते हैं।

माना जाता है कि नूरजहां आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगानिस्तान से भारत पहुंची और बाद में पांचवें – छठवें दशक में मध्यप्रदेश के मालवा तथा आदिवासी अंचल झाबुआ में विकसित हुई।

आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्टीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के किसान भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहां आम का पौधा लेकर आए थे। उन्होंने अपने खेत में इस पौधे को लगाया और वर्षों की मेहनत से इसे संरक्षित किया। यही पौधा आगे चलकर पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु लगभग 20 से 25 वर्ष है। इसके साथ ही स्वयं भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे आज 3 से 5 वर्ष की अवस्था में विकसित हो रहे हैं।

नूरजहां आम अब मध्यप्रदेश की विशेष पहचान बन चुकी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 तथा 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

नूरजहां आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ के लिए अनुकूल सिद्ध हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई। झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका संरक्षण किसानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता रहा है।

नूरजहां आम की मांग विशेष रूप से बड़े शहरों और विदेशों में अधिक है। यहां के बाजारों में एक आम की कीमत 1500 से शुरु होकर 3000 तक होती है। नूरजहां का आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसका रंग, सुगंध और मिठास लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं।

संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों के रूप में इसकी अच्छी मांग

विदेशों में नूरजहां आम की विशेष मांग है। खासतौर पर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों के रूप में इसकी अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी नूरजहां आम अत्यंत लोकप्रिय हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी विशेष पहचान बन रही है।

हालांकि नूरजहां आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी विशिष्टता और दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान दिला रही है। विदेशी बाजारों में यह आम आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

बालाघाट के सांदीपनि विद्यालय का छात्र जाएगा नासा, शैक्ष्रणिक भ्रमण के लिए हुआ चयन

भोपाल

प्रदेश के बालाघाट जिले स्थित सांदीपनि विद्यालय के कक्षा 12वीं के छात्र  मयंक मात्रे ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल कर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। आईएसएससी 2026 में  मयंक मात्रे ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उल्लेखनीय सफलता के आधार पर उनका चयन प्रतिष्ठित नासा एजुकेशन टूर के लिए हुआ है।  मयंक की यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है तथा उनकी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

“Grand Winner” घोषित

मध्यप्रदेश के सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी क्रम में बालाघाट जिले के सांदीपनि विद्यालय वारासिवनी के कक्षा 12वीं के छात्र मयंक मात्रे ने आईएसएससी (International Space Science Competition) में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर विद्यालय एवं प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि के साथ उन्हें “Grand Winner” घोषित किया गया तथा आगामी सितंबर 2026 में आयोजित होने वाले नि:शुल्क नासा एजुकेशन टूर (USA) के लिये चयनित किया गया है। यह प्रतियोगिता Go4Guru द्वारा देशभर के स्कूल एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की जाती है।

सांदीपनि विद्यालय में विद्यार्थियों को आईएसएससी 2026 प्रतियोगिता की जानकारी दिए जाने के बाद इच्छुक विद्यार्थियों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में मयंक ने 8 अप्रैल 2026 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में भाग लिया। 4 मई को घोषित परिणामों में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-5 प्राप्त कर देशभर के शीर्ष 17 विद्यार्थियों में स्थान बनाते हुए फाइनल राउंड के लिए चयनित हुए। इसके बाद 15 मई 2026 को जूम के माध्यम से आयोजित लाइव फाइनल राउंड में नासा से संबद्ध शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रतिनिधियों एवं Go4Guru टीम की उपस्थिति में प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में त्वरित उत्तर आधारित विभिन्न क्विज राउंड हुए, जिनमें प्रतिभागियों को कुछ ही सेकंड में उत्तर प्रस्तुत करना था। देशभर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के मध्य प्रतिस्पर्धा करते हुए मयंक ने सर्वाधिक 155 अंक प्राप्त किए और आईएसएससी 2026 के विजेता घोषित हुए।

इस उपलब्धि के अंतर्गत मयंक का चयन आगामी नासा शैक्षणिक भ्रमण (NASA Educational Tour) के लिए किया गया है। इस दौरान उन्हें केनेडी स्पेस सेंटर, ऑरलैंडो का भ्रमण, अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय परिसर का अवलोकन, थीम पार्क अनुभव तथा डिज़्नी स्प्रिंग्स जैसी शैक्षणिक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों में सहभागिता का अवसर प्राप्त होगा।

मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी निरंतर मेहनत, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि एवं शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने बताया कि वे नियमित अध्ययन के साथ ISRO, NASA एवं Space Science से संबंधित विषयों का लगातार अध्ययन करते रहे।

गौरतलब है कि विद्यालय के उप प्राचार्य  हुमराज पटले के नेतृत्व में विद्यालय में विज्ञान, नवाचार एवं समग्र विकास आधारित गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विद्यालय में नियमित अकादमिक संवाद, शिक्षक समीक्षा बैठकें, योजनाबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिये विभिन्न प्रक्रियाएँ संचालित की जाती हैं। साथ ही, पीपल संस्था द्वारा प्रदान किए जा रहे सतत शैक्षणिक सहयोग, प्रशिक्षण आधारित मार्गदर्शन, अकादमिक सुझावों एवं विभिन्न शिक्षण प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन ने विद्यालय में शिक्षण गुणवत्ता, अकादमिक संवाद एवं सीखने के वातावरण को और अधिक बेहतर एवं परिणामोन्मुख बनाया है। छात्र की इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

 

शिक्षक राष्ट्र निर्माण में समर्पित हों, तभी बनेगा सशक्त भारत : डॉ. शर्मा

भोपाल

आनंद विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राज्य आनंद संस्थान, भोपाल में 18 से 23 मई 2026 तक शासकीय शिक्षकों के लिए राज्य स्तरीय आनंद सभा प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में गुना, ग्वालियर और सीधी जिले के शिक्षक प्रशिक्षणार्थी शामिल हो रहे हैं। कार्यशाला का संचालन राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य के निर्देशन में हो रहा है।

प्रशिक्षण के पांचवे दिवस लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक डॉ. मनीष शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को मार्गदर्शित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी सोच को सीमित नहीं रखना चाहिए। भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर आधारित है, जिसका अर्थ है पूरा विश्व हमारा परिवार है।

डॉ. शर्मा ने कहा, “जब हम देश निर्माण के लिए समर्पित होंगे तो बच्चे भी देशभक्त बनेंगे और उनका चरित्र निर्माण होगा। व्यक्ति अधिक कार्य करने से नहीं थकता, बल्कि कार्य को बोझ समझकर करने से थकता है। खुद को छोटी सोच और छोटे फ्रेम में न बांधें, तभी आपको आनंद की अनुभूति होगी।” उन्होंने महावीर स्वामी का उदाहरण देते हुए कहा कि सच्चा वीर वह है जो स्वयं से लड़ता है और आत्म-विजय प्राप्त करता है।

चौथे दिवस हुई मानव-मूल्यों पर चर्चा

कार्यशाला के चौथे दिवस में मानव, परिवार और समाज आधारित मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षणार्थियों से फीडबैक भी लिया गया। कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय से शंकर खत्री, रिसोर्स पर्सन नवीन शर्मा, कौशल बूटोलिया, अभिषेक शर्मा, राजेश पटेल, शैलेंद्र सिंह, मनोज जैन, रवि शंकर रजक, भारती शाक्य और सुमन जैन सहित अन्य अधिकारी और प्रशिक्षक उपस्थित रहे।

 

बड़वानी के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल 06 व्यक्तियों को त्वरित सहायता पहुँचाकर कराया अस्पताल में भर्ती

भोपाल

बड़वानी जिले के थाना पाटी क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्रवाई से सड़क दुर्घटना में घायल हुए 06 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायलों को राहत मिली और समय रहते उनका उपचार प्रारंभ हो सका।

21 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना पाटी क्षेत्र अंतर्गत बोकराटा रोड पर दो मोटर साइकिलों की आमने-सामने से टक्कर हो गई है, जिसमें 06 व्यक्ति घायल हो गए हैं।  पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना पाटी क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री प्रशांत मोरे एवं पायलट श्री विशाल चौहान ने मौके पर पहुंचकर पाया कि मोटर साइकिल दुर्घटना में 06 व्यक्ति घायल हो गए। डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को सुरक्षित डायल 112 वाहन एवं चिकित्सा वाहन की सहायता से अस्पताल पहुँचाया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटनाओं सहित हर संकट की स्थिति में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, तत्परता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की मदद कर रहे हैं।

 

कर्मचारी राज्य बीमा निगम के पंजीकृत श्रमिकों को मिलेगा कैशलेस आयुष चिकित्सा का लाभ

भोपाल 

मध्यप्रदेश में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों को कैशलेस आयुष चिकित्सा का लाभ दिया जायेगा। यह श्रमिकों के स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार की गरिमामयी उपस्थिति में श्रम विभाग और आयुष विभाग के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। इस एमओयू पर आयुष विभाग की ओर से आयुक्त डॉ. संजय मिश्र और श्रम विभाग (ईएसआईसी) की ओर से संचालक डॉ. सी. एस. जायसवाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आयुष विभाग के प्रमुख सचिव  शोभित जैन एवं श्रम विभाग के सचिव  रघुराज एम आर सहित दोनों ही विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री  पटेल ने कहा कि श्रमिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा दायित्व है और यह पहल भारतीय चिकित्सा पद्धति को आमजन में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के श्रमिक सामूहिक रूप से योग कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश देंगे।

मंत्री  परमार ने भारतीय चिकित्सा पद्धति को विश्वसनीयता के साथ आमजन तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस एमओयू के तहत की जा रही गतिविधियों की हर वर्ष समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार सुविधाओं का विस्तार भी किया जायेगा। इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमिक वर्ग में योग और सूर्य नमस्कार से स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए श्रम विभाग द्वारा आयुष विभाग के सहयोग से तैयार किए गए एक विशेष ‘लोगो’ का भी विमोचन किया गया।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी राज्य बीमा योजना के लाभार्थियों को राज्य के शासकीय आयुष संस्थानों, जैसे चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, एलोपैथिक अस्पतालों में संचालित आयुष विंग्स और औषधालयों के माध्यम से समग्र, सुलभ और पूरी तरह से कैशलेस चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इसके तहत पंजीकृत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी पद्धतियों पर आधारित वैकल्पिक उपचार के बहुआयामी विकल्प प्राप्त हो सकेंगे। इस योजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, जिसके प्रथम चरण में इसे प्रदेश के 9 शासकीय आयुष चिकित्सा महाविद्यालयों में शुरू किया जाएगा और इसके बाद दोनों विभागों की आपसी सहमति से इसका विस्तार जिला स्तरीय आयुष चिकित्सालयों, आयुष विंग और डिस्पेंसरीज़ में किया जाएगा। इस पहल से जहाँ एक ओर दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर एलोपैथिक स्वास्थ्य संस्थानों पर मरीजों का बढ़ता दबाव भी कम होगा।

एमओयू के प्रावधानों के अनुसार, श्रम विभाग द्वारा ईएसआईसी के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक और उनके आश्रित परिवार के सदस्य (जैसे जीवनसाथी, आश्रित माता-पिता एवं पात्र संतान) इस योजना में लाभ प्राप्त करने के पात्र होंगे। लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन ई-पहचान पत्र, बीमा संख्या अथवा अन्य वैध माध्यमों से किया जाएगा। इन संस्थानों में पात्र मरीजों को चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क ओपीडी परामर्श देने के साथ आवश्यक आयुष औषधियों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संस्थान में उपलब्धता के आधार पर पंचकर्म व अन्य चिकित्सीय प्रक्रियाएँ, योग व जीवनशैली परामर्श तथा मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया और मोटापा जैसे दीर्घकालिक रोगों का समग्र प्रबंधन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उपचार के लिये सीजीएचएस अथवा राज्य शासन द्वारा निर्धारित दरों को लागू किया जाएगा और ऑनलाइन क्लेम प्रोसेसिंग प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध प्रतिपूर्ति की जाएगी।

सौर ऊर्जा के उपयोग को अधिकाधिक प्रोत्साहित करें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा उत्पादन के पारम्परिक स्त्रोतों का उपयोग करते हुए राज्य में सौर ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। किसानों के लिए सोलर पम्प और गांव से लेकर शहर तक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग को प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के कार्यों की बैठक में समीक्षा कर रहे थे।

नवाचारों की प्रशंसा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा विभाग द्वारा किए गए प्रमुख नवाचारों की प्रशंसा की। बैठक में बताया गया कि गत ढाई वर्ष में प्रदेश में ड्रोन आधारित पेट्रोलिंग का नवाचार सफल हुआ है। इससे विद्युत लाइन ट्रिपिंग को 35 प्रतिशत कम करने और 220 केव्ही के लगभग 10 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग के कार्य में सफलता मिली है। इसी तरह वर्तमान में 400 और 132 केव्ही के 23 हजार टॉवरों के टॉप पेट्रोलिंग का कार्य ड्रोन द्वारा किया जा रहा है। इंसूलेटेड वर्क प्लेटफार्म का नवाचार भोपाल, जबलपुर, इंदौर और दमोह में किया गया। लाइनमैन द्वारा चालू लाइन में ही वेयर हेन्ड तकनीक और हॉट लाइन स्टिक तकनीक का कार्य इससे संभव होता है। गत वर्ष चालू लाइन में 257 परिचालन किए गए। परिचालन कर्मियों और प्रशिक्षु इंजीनियरों के प्रशिक्षण के लिए परिचालन सिम्युलेटर स्थापित किया जा रहा है।

19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति

बैठक में जानकारी दी गई कि मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी ने विश्वसनीय संचालन का प्रमाण देते हुए विद्युत गृहों द्वारा लगातार विद्युत उत्पादन किया गया है। गत 14 जनवरी को 19 हजार 895 मेगावॉट की सफलतापूर्वक पूर्ति इतिहास की सर्वाधिक पूर्ति है। ट्रांसमिशन कम्पनी का हानियां भी 2.60 प्रतिशत ही हैं। इसी तरह पारेषण उपलब्धता का प्रतिशत 99.52 है।

समाधान योजना 2025-26

समाधान योजना 2025-26 के अंतर्गत विलंबित बिल के भुगतान पर सरचार्ज में छूट का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया। कुल 1,970 करोड़ की देनदारियां निराकृत हुईं। उपभोक्ताओं को 473 करोड़ रूपए की सरचार्ज की राशि माफ की गई। स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रगति पर है। तीनों विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा 40 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए गए हैं। प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में प्रीपेड मीटरिंग के अंतर्गत 47 हजार से अधिक मीटर प्रीपेड मोड पर संचालित हैं। इस कार्य में 139 प्रतिशत भौतिक प्रगति प्राप्त की गई।

प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ी

प्रदेश में मार्च 2024 में कुल विद्युत क्षमता में नवकरणीय ऊर्जा का प्रतिशत 25 था, जो मार्च 2026 में बढ़कर 33 हो गया है। दो वर्ष पहले जहां 5 हजार 690 मेगावॉट ऊर्जा नवकरणीय स्त्रोतों से उत्पादित की जा रही थी, वहीं अब यह 8 हजार 608 मेगावॉट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि में सर्वाधिक योगदान 5 हजार 376 मेगावॉट सौर ऊर्जा का है। प्रदेश में पवन और अन्य नवकरणीय ऊर्जा से 3 हजार 232 मेगावॉट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग  नीरज मंडलोई ने बताया कि विभाग द्वारा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के पालन, राजस्व आय में वृद्धि, घोषणाओं को पूर्ण करने के कार्य को प्राथमिकता दी गई। विद्युत अधोसंरचना की वृद्धि के साथ विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ परिणाम लाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्र शासन से बेहतर समन्वय के कारण जबलपुर आईलैंडिंग योजना के क्रियान्वयन के लिए 5.08 करोड़ रूपए के केन्द्रीय अनुदान की मंजूरी मिली है। राज्य भार प्रेषण केन्द्र की सायबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी 13.61 करोड़ रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। केन्द्र सरकार के पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से प्राप्त अनुदान से प्रदेश में ओपीजीडब्ल्यू (ऑप्टिकल ग्राउंड वायर) की 10 हजार 752 किलोमीटर लाईन में सफलतापूर्वक स्थापना संभव हुई। इसके लिए केन्द्र सरकार 146 करोड़ रूपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 63 हजार से अधिक जनजातीय समुदाय के नागरिकों को आवास गृह के विद्युतीकरण का लाभ दिलवाया गया। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) के अंतर्गत प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय के 28 हजार से अधिक घरों में विद्युतीकरण होने की उपलब्धि भी मिली है। कृषि फीडर विभक्तिकरण के 374 फीडर और एचटी लाईन में क्षमता वृद्धि के तहत लगभग 18 हजार कार्य पूर्ण किए गए हैं।

ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ यादव के प्रमुख निर्देश

    सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रत्येक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।

विदेश में उच्च शिक्षा का सुनहरा अवसर: मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन आमंत्रित

भोपाल

विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के उच्‍च् शिक्षा विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत सत्र 2026-27 (जनवरी से जून 2026) के लिए पात्र विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

यह योजना विशेष रूप से अनारक्षित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के लिए संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से उन्हें स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर विदेश में अध्ययन हेतु राज्य सरकार आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। आवेदन प्रक्रिया 11 मई से प्रारंभ हो चुकी है और 25 मई 2026 शाम 6 बजे तक आवेदन जमा किए जा सकेंगे।

हर वर्ष 20 विद्यार्थियों को मिलता है लाभ

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित यह छात्रवृत्ति योजना प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष कुल 20 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इनमें जनवरी से जून सत्र के लिए 10 और जुलाई से दिसंबर सत्र के लिए 10 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। उपलब्ध आवेदनों और पात्रता के आधार पर चयन समिति अंतिम निर्णय लेती है।

इन विद्यार्थियों को मिलेगा योजना का लाभ

इस योजना का लाभ केवल मध्यप्रदेश के मूल निवासी अनारक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा। आवेदक का कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा मध्यप्रदेश स्थित विद्यालयों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और पीएचडी के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि आवश्यक है।

आवेदन के लिए आयु सीमा भी निर्धारित की गई है। स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष और पीएचडी के लिए 35 वर्ष रखी गई है। आवेदक के परिवार की वार्षिक आय सभी स्रोतों से 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही आवेदक किसी प्रकार के रोजगार में कार्यरत नहीं होना चाहिए।

QS टॉप-500 विश्वविद्यालयों में ही अध्‍ययन की अनुमति

योजना की एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि छात्र केवल उन्हीं विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन के लिए पात्र होंगे जो क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (QS World University Rankings) की वैश्विक सूची के शीर्ष 500 संस्थानों में शामिल हों। यह रैंकिंग विश्व के विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, प्रतिष्ठा और वैश्विक मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। संबंधित विश्वविद्यालय से प्रवेश अथवा ऑफर लेटर प्राप्त होना भी अनिवार्य है। छात्र को स्वयं अपने प्रयासों से स्टूडेंट वीजा प्राप्त करना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि छात्रवृत्ति वास्तव में गुणवत्तापूर्ण और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए उपयोग हो।

मिलेगी व्यापक आर्थिक सहायता

यह योजना व्यापक वित्तीय सहयोग प्रदान करती है। राज्य सरकार शिक्षण शुल्क, वीजा शुल्क, बीमा प्रीमियम, इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा और अन्य आवश्यक शैक्षणिक व्यय वहन करेगी। योजना के तहत अधिकतम 40 हजार अमेरिकी डॉलर (लगभग 36 लाख रुपये) तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 38 हजार अमेरिकी डॉलर तक शिक्षण एवं संबंधित व्यय तथा 2 हजार अमेरिकी डॉलर, पुस्तकें, शोध सामग्री, उपकरण और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए निर्धारित हैं।

शिक्षण शुल्क सीधे संबंधित विश्वविद्यालय को भेजा जाएगा, जबकि अन्य अनुमन्य व्यय विद्यार्थियों के बैंक खातों में जमा किए जाएंगे।

मेरिट पर आधारित होगी चयन प्रक्रिया

विद्यार्थियों का चयन 100 अंकों की मेरिट प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इसमें शैक्षणिक योग्यता, चयनित विश्वविद्यालय की QS रैंकिंग और साक्षात्कार को आधार बनाया जाएगा। उच्च रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों के लिए अधिक अंक निर्धारित किए गए हैं।

पहले परीक्षण समिति आवेदन पत्रों की जांच कर पात्र उम्मीदवारों की सूची तैयार करेगी। इसके बाद चयन समिति साक्षात्कार लेकर अंतिम सूची जारी करेगी। यदि दो उम्मीदवारों के अंक समान होते हैं, तो आयु में वरिष्ठ उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी।

नियमों का पालन अनिवार्य

योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना आवश्यक होगा। योजना के प्रावधानों के अनुरूप अध्ययन पूर्ण करने तथा आवश्यक सूचनाएं समय-समय पर उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई है। किसी विशेष परिस्थिति में नियमों के उल्लंघन या अपूर्ण जानकारी पाए जाने पर शासन के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए चयनित विद्यार्थियों से आवश्यक बंधपत्र भी लिया जाएगा।

विदेश में पढ़ाई के दौरान, नियमित निगरानी

छात्रवृत्ति प्राप्त विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर उच्च शिक्षा विभाग नियमित नजर रखेगा। संबंधित विश्वविद्यालयों से समय-समय पर प्रगति प्रतिवेदन प्राप्त किए जाएंगे। यदि प्रदर्शन असंतोषजनक पाया गया तो छात्रवृत्ति समाप्त की जा सकती है।

पीएचडी शोधार्थियों के लिए शोध प्रगति रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। इससे योजना की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

आवेदन कैसे करें

इच्छुक विद्यार्थी आवेदन पत्र स्वयं, वाहक, डाक अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से कार्यालय आयुक्त, उच्च शिक्षा, सतपुड़ा भवन, भोपाल में निर्धारित समय सीमा तक जमा कर सकते हैं। योजना की विस्तृत मार्गदर्शिका और आवेदन पत्र उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

पात्रता एक नजर में

  •     मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना अनिवार्य
  •     अनारक्षित वर्ग के छात्र-छात्राएं पात्र
  •     10वीं और 12वीं मध्यप्रदेश से उत्तीर्ण
  •     न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक
  •     परिवार की आय 8 लाख रुपये से कम
  •     स्नातकोत्तर हेतु आयु 30 वर्ष तक
  •     पीएचडी हेतु आयु 35 वर्ष तक
  •     QS टॉप-500 विश्वविद्यालय में प्रवेश/ऑफर लेटर आवश्यक

आर्थिक सहायता में क्या मिलेगा

  •     शिक्षण शुल्क
  •     वीजा शुल्क
  •     बीमा प्रीमियम
  •     हवाई यात्रा व्यय
  •     पुस्तकें और शोध सामग्री
  •     अधिकतम 40,000 अमेरिकी डॉलर तक सहायता
  • महत्वपूर्ण तिथियां
  •     आवेदन प्रारंभ: 11 मई 2026
  •     अंतिम तिथि: 25 मई 2026, शाम 6 बजे
  •     आवेदन स्थान: आयुक्त, उच्च शिक्षा कार्यालय, सतपुड़ा भवन, भोपाल

 

माँ और शिशु स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है राज्य सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हर माँ और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुँच के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने एसआरएस सर्वे में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी है एवं सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया है।

तकनीक आधारित निगरानी से प्राप्त हुए सकारात्मक परिणाम: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल

उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है। भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश का एमएमआर 2018–20 में 173 था, जो 2022–24 में घटकर 135 रह गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए है।

प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया गया है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), एफआरयू और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एएनएमओएल 2.0 एप्लीकेशन के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का रियल-टाइम पंजीयन, जांच और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। सुमन सखी चैटबॉट के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी एवं आवश्यक मार्गदर्शन 24×7 उपलब्ध कराया जा रहा है। सुमन पहल के अंतर्गत हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, ट्रैकिंग और प्राथमिकता आधारित प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान और प्रसव पश्चात होने वाली जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी तथा दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुँच के माध्यम से मध्यप्रदेश वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात को 70 से नीचे लाने के लक्ष्य की दिशा में सुगठित प्रयास जारी रहेंगे।

 

पारंपरिक मछली पालन से आगे बढ़कर स्टार्टअप आधारित होगा मत्स्योद्योग : राज्यमंत्री पंवार

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मत्स्योत्पादन को दोगुना करने के विजन को लेकर ‘मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026’ के सफल क्रियान्वयन की दिशा में शुक्रवार को राज्य स्तरीय ‘हितधारक सम्मेलन’ हुआ। इस सम्मेलन में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार की उपस्थिति में मत्स्य क्षेत्र के उद्यमियों और निवेशकों ने उत्साह दिखाया।

राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि प्रदेश में पहले वर्ष 10 हज़ार केज लगाने का लक्ष्य था, लेकिन निवेशकों की ओर से लगभग 2 लाख केज लगाने के प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। यह दिखाता है कि प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को दोगुना करने की दिशा में विभाग द्वारा सकारात्मक पहल की जा रही है।

मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  नारायण सिंह पंवार ने कहा कि आज का यह समागम केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी सरकार पहली बार पारंपरिक मत्स्य पालन की सीमाओं से आगे बढ़कर एकीकृत मत्स्योद्योग (हितग्राही और उद्यमी मॉडल) पर काम कर रही है। इसे केवल एक समाज आधारित योजना के रूप में न देखकर, हर वर्ग को साथ लेकर चलने और रोजगार सृजन की ‘स्टार्टअप आधारित ब्लू इकॉनमी’ के रूप में देखा जाना चाहिए।

केज कल्चर के लिए खत्म हो आवेदन की समय सीमा:  पंवार

राज्यमंत्री  पंवार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केज कल्चर के प्रस्ताव प्राप्त करने की प्रक्रिया को किसी समय-सीमा में न बांधा जाए। इसे एक सतत प्रक्रिया बनाया जाए जिससे अधिक से अधिक युवा उद्यमी और हितग्राही इससे जुड़ सकें। कृषि उत्पादन आयुक्त  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य विकास के लिए 100 करोड़ रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए कोल्ड चेन मेंटेन करने, हैचरी निर्माण और फिश फीड के लिए शासन द्वारा पूरी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने बैंकिंग और इंश्योरेंस क्षेत्र के हितधारकों से मत्स्य उत्पादन के आधुनिकीकरण में सहयोग की अपील की।

हर निवेशक के साथ जुड़ेंगे कॉन्टैक्ट ऑफिसर: सचिव  सिंह

मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के सचिव  स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश जलाशयों का केंद्र है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए हर निवेशक के साथ सुविधानुसार एक ‘कॉन्टैक्ट ऑफिसर’ नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी निवेशक के सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण, सब्सिडी और अन्य विभागीय कार्यों को पूर्ण कराने में मदद करेगा। साथ ही, विभाग द्वारा मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जुड़े एक्सपर्ट्स की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी।

राज्यमंत्री  नारायण सिंह पंवार ने केज कल्चर के प्रस्तावों के अनुरूप प्राथमिक रूप से चयनित केज कल्चर के हितधारकों को अभिस्वीकृति पत्र वितरित किये गए। मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक  अनुराग चौधरी ने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में निवेशकों और उद्यमियों के साथ ‘राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस’ भी आयोजित की गई, जिसमें स्टेक होल्डर्स से प्राप्त प्रस्तावों और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके अलावा, प्रदेश में ‘केज कल्चर’ को बढ़ावा देने के लिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सीड, फीड और जाल आदि की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विक्रेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के संचालक  मनोज पथरोलिया, मत्स्य महासंघ के महाप्रबंधक  रवि गजभिए समेत प्रदेश भर से आए मत्स्य उद्यमी, निवेशक, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। उप संचालक, मत्स्योद्योग  गिरीश मेश्राम ने सभी अतिथियों, निवेशकों और हितधारकों के प्रति आभार व धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

आयुर्वेद चिकित्सा के सफल प्रयोग की जानकारी और लाभ जन-जन तक पहुंचायें: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन से जुड़े स्थानों पर आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा व्यवस्था और वेलनेस केन्द्र स्थापित करने की पहल सराहनीय है। अन्य प्रदेशों में हुए ऐसे सफल प्रयोगों और नवाचारों का अध्ययन कर बेहतर कार्य करते हुए उन्होंने जन-जन तक इनकी जानकारी और इनका लाभ पहुंचाने के आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वृद्ध नागरिकों की डोर टू डोर आयुष देखभाल के लिए वयोमित्र कार्यक्रम उपयोगी है। इसी तरह कारूण्य के अंतर्गत असाध्य रोगों का कष्ट झेल रहे रोगियों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने का कार्य भी प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में आयुष विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग के साथ किए गए एमओयू के अंतर्गत प्रदेश में 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें विश्व धरोहर स्थल खजुराहो जिला छतरपुर के साथ ही ओंकारेश्वर जिला खण्डवा, चंदेरी जिला अशोकनगर, चित्रकूट जिला सतना, पचमढ़ी जिला नर्मदापुरम, ओरछा जिला निवाड़ी के अलावा उज्जैन, दतिया, मंदसौर, आलीराजपुर, सिंगरौली और आगर-मालवा शामिल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एलोपैथी के साथ ही ऐसी चिकित्सा पद्धतियों का प्रोत्साहन आवश्यक है जो भारतीय परम्परा से जुड़ी हैं। प्रदेश के अनेक स्थानों पर प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य कार्यरत हैं। इनकी सेवाओं से बड़ी संख्या में नागरिक लाभान्वित होते हैं। उज्जैन सहित प्रदेश के अनेक स्थानों पर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ लेकर शल्य चिकित्सा के बिना रोगियों को लाभान्वित करने के उदाहरण मिलते हैं। सामान्य प्रसव करवाने वाले अस्पताल भी प्रदेश में संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आजीवन आयुर्वेद चिकित्सा का लाभ लेने वाले नागरिकों को भी प्रोत्साहन कार्यक्रमों से जोड़ा जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य नीति-2017 और विजन-2047 के अनुक्रम में प्रदेश के जिला स्तरीय चिकित्सालयों में विकल्प के रूप में आयुष चिकित्सा के लिए पृथक विंग स्थापित करने का कार्य चल रहा है। प्रत्येक आयुष विंग में पंचकर्म यूनिट की स्थापना भी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन कार्यों की गति बढ़ाई जाए। बैठक में बताया गया कि जिलों में आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के व्यापक संचालन के अंतर्गत सुप्रजा, आयुर्विद्या, वयोमित्र, मस्कुलर-स्केलेटल प्रिवेंटिव कार्यक्रम और कारूण्य का लाभ नागरिकों को दिलवाया जा रहा है। जनजातीय बहुल और सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जिलों में आयुर्वेद औषधियों का वितरण भी सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 22 जिलों के एलोपैथी चिकित्सालयों में आयुष विंग की स्थापना की कार्यवाही चल रही है। पांच नए आयुर्वेदिक कॉलेज स्थापित करने और 12 जिलों में 50 बिस्तर क्षमता के आयुष अस्पताल प्रारंभ करने का कार्य चल रहा है। भारत सरकार से राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत गत दो वर्ष में नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ और शुजालपुर जिला शाजापुर में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय के निर्माण की मंजूरी मिली है। भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय के परिसर में 29 करोड़ की लागत से प्रशासनिक और अकादमिक भवन का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में 6 जिला आयुष कार्यालय बन कर तैयार हो गए हैं। इसी तरह 80 आयुष औषधालयों के भवन बनाए जाने थे, जिनमें से 53 का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।

आयुष विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रदेश के सभी 9 आयुष महाविद्यालयों को फर्स्ट रेफेरल यूनिट के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। सभी 9 आयुष महाविद्यालयों में हॉस्टल बनाने, सीट क्षमता का 100 तक उन्नयन करने, यूनानी पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध करवाने, आयुष महाविद्यालयों में शोध कार्य बढ़ाने और बालाघाट में आयुष शोध केन्द्र का संचालन प्रारंभ करने का भी लक्ष्य है।

श्रम विभाग से समन्वय कर प्रदेश के लगभग 13 लाख कर्मचारी राज्य बीमा में पंजीकृत श्रमिक परिवारों को आयुष चिकित्सा पद्धति की कैशलेस सुविधा दिलवाने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य बीमा में आयुष को शामिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 7 आयुष महाविद्यालयों में फार्मेसी विभाग स्थापित करने, आयुष विश्वविद्यालय की पहल और एक प्राकृतिक एवं योग महाविद्यालय स्थापित करने तथा ऐसे जिलों जहां आयुष चिकित्सा सुविधा नहीं है, वहां 20 आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारंभ करने के कार्यों के लिए लगभग 75 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया है।

बैठक में आयुष मंत्री  इंदर सिंह परमार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

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