सागर के डायल 112 हीरोज कार में फँसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल

सागर जिले के थाना बंडा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित प्रतिक्रिया और साहसिक कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में कार के अंदर फँसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। हादसे के बाद तत्काल मौके पर पहुँचकर डायल-112 टीम ने मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दिया।

19-20 मई की मध्यरात्रि थाना बंडा क्षेत्र अंतर्गतसोनी पेट्रोल पंप के आगे सागर रोडपर एक कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई, जिसमें तीन व्यक्ति घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना एक राहगीर द्वारा अपने नोडल प्वाइंटबड़ा चौराहापर तैनात डायल-112 टीम को दी गई। इसके बाद सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल में दर्ज की गई।

सूचना मिलते ही डायल-112 स्टाफआरक्षक  सोवरन यादव एवं पायलट  सोने सिंह लोधीतत्काल घटनास्थल पर पहुँचे। दुर्घटना में कार क्षतिग्रस्त हो गई थी और घायल वाहन के अंदर फँसे हुए थे।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने राहगीरों की सहायता से कार में फँसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद एक घायल व्यक्ति को तत्काल एफआरव्ही वाहन सेबंडा अस्पतालपहुँचाया गया, जबकि अन्य दो घायलों को परिजनों के साथ निजी वाहन से उपचार हेतु सागर रवाना किया गया।

डायल-112 जवानों की त्वरित और साहसिक कार्यवाही से घायलों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।

डायल 112 हीरोजश्रृंखला की यह घटना दर्शाती है किडायल-112 सेवा केवल सूचना मिलने पर सहायता पहुँचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में मौके पर तत्काल राहत, रेस्क्यू और मानवीय सहायता प्रदान कर आमजन के जीवन की सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

 

जिन किसानों के स्लॉट बुक हैं, उनसे 28 मई तक गेहूं खरीदेगी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गेहूं उपार्जन के लिए जिन किसानों के स्लॉट 23 मई तक बुक हो चुके हैं, सरकार उनका गेहूं 28 मई तक खरीदेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान कल्याण के प्रतिबद्ध है। इस साल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार लगातार किसान हितैषी निर्णय ले रही है। इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूँ उपार्जन में हमने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बीते वर्ष हमने लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस साल 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं किसानों से खरीदा जायेगा। पूरे देश में अगर सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा गया, तो वो हमारे मध्यप्रदेश में खरीदा गया है। अभी तक हम 93 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद चुके हैं।

गेहूँ उपार्जन के लिए अंतिम तारीख 23 मई निर्धारित थी। किसानों द्वारा बताया गया कि उन्होंने स्लॉट तो बुक कर लिए, लेकिन लाइन लंबी है। हमने निर्णय किया है कि जिनके भी स्लॉट बुक हुए हैं, ऐसे सभी किसानों से हम गेहूं खरीदेंगे। किसानों के गेहूं उपार्जन की तारीख 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक की जाती है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच समाधान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार किसान हितैषी सरकार है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसान-गरीब-महिला-युवा, चारों वर्गों के कल्याण के लिये हम प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। किसान भाई-बहन चिंता मत करिए, हम स्लॉट बुकिंग का गेहूं खरीदने का प्रबंधन कर रहे हैं।

 

अब तक 12.56 लाख किसानों से 93.31 लाख मीट्रिक टन से अधिक हुआ गेहूँ का उपार्जन : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 12 लाख 56 हजार 952 किसानों से 93 लाख 31 हजार 177 मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। उन्होंने बताया है की तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक तथा देयक जारी करने का समय रात 12 तक कर दिया गया है। गेहूँ का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन सोमवार से शनिवार तक किया जा रहा है।

मंत्री  राजपूत ने बताया कि किसानों को 19 हजार 423 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूँ में से 81 लाख 47 हजार 675 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है।

मंत्री  राजपूत ने बताया है कि गेहूँ उपार्जन 23 मई 2026 तक किया जायेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल कांटों की संख्या में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिए जाने का निर्णय लिया गया। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटा उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है।

 

विगत एक सप्‍ताह मेंदिल्ली, गुजरात, बिहार एवं उत्तरप्रदेश से 5 नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर लौटाई परिवारों की मुस्कान

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संचालित ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपहृत एवं गुमशुदा नाबालिग बालक-बालिकाओं की खोज हेतु निरंतर, समन्वित एवं तकनीकी रूप से सशक्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विगत एक सप्‍ताह में पुलिस टीम ने प्रदेश के अन्‍य राज्‍यों से5 गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं को सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया है।

उज्जैन

जिले के उन्हेल थाना पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के अंतर्गत त्वरित कार्यवाही करते हुए गुमशुदा 16 वर्षीय बालिका को महज 24 घंटे के भीतर राजकोट (गुजरात) से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों को सौंपा। पुलिस की तत्परता एवं तकनीकी जांच के चलते बालिका सुरक्षित वापस लाई जा सकी, जिससे परिजनों ने राहत की सांस ली।

कटनी

जिले में भी ऑपरेशन मुस्कान के तहत लगातार प्रभावी कार्रवाई की गई। बरही थाना पुलिस ने अपहृत बालिका को दिल्ली से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया।

वहीं थाना स्लीमनाबाद पुलिस ने एक अन्य गुमशुदा नाबालिग बालिका को बिहार के पटना जिले से सुरक्षित खोज निकाला।

मुरैना

जिले के थाना कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुमशुदा 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को प्रकरण दर्ज होने के 16 दिवस के भीतर हापुड़ (उत्तरप्रदेश) से सकुशल दस्तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया।

गुना

जिले में अपहृत अथवा गुमशुदा नाबालिगों की दस्तयाबी हेतु सतत एवं संवेदनशील कार्रवाई के तहत कोतवाली पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए लापता किशोरी को दिल्ली से सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन मुस्कान केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा एवं परिवारों की भावनाओं से जुड़ा मानवीय प्रयास बन चुका है। प्रदेश पुलिस द्वारा तकनीकी संसाधनों, साइबर ट्रैकिंग, स्थानीय पुलिस समन्वय एवं निरंतर मैदानी प्रयासों के माध्यम से गुमशुदा बच्चों की तलाश में लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी बालक अथवा बालिका के गुम होने की स्थिति में तत्काल निकटतम थाना अथवा डायल-112 पर सूचना दें, ताकि त्वरित कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित खोजा जा सके। अभियान के अंतर्गत गुमशुदा बच्चों की तलाश एवं दस्तयाबी की कार्यवाही आगे भी लगातार जारी रहेगी।

 

सजगता, सहयोग और सावधानी से सिकल सेल उन्मूलन संभव : राज्यपाल पटेल

भोपाल

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारी के उन्मूलन में जागरूकता और जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और समुचित उपचार से रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। जानकारी के अभाव में यह बीमारी माता-पिता से बच्चों तक पहुंच जाती है, लेकिन सजगता, सहयोग और सावधानी से इसका उन्मूलन संभव है। राज्यपाल  पटेल बुधवार को बैतूल के भीमपुर में सिकल सेल स्वास्थ्य शिविर एवं हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री  दुर्गादास उईके भी मौजूद थे।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को सिकल सेल मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही हैं। देशभर में लगभग 7 करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आज का आयोजन इसी दिशा में मजबूत कदम है। राज्यपाल  पटेल ने बैतूल जिले में सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सराहना की। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबके प्रयास” के संकल्प से सिकल सेल उन्मूलन का आह्वान किया।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कोई भी बच्चा सिकल सेल से प्रभावित नहीं हो। इसके लिए विवाह से पूर्व लड़का और लड़की के स्वास्थ्य कार्ड का मिलान अवश्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन के लिए एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी में शोध एवं उपचार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्यपाल  पटेल ने सिकल सेल और टी.बी. मरीजों को तैलीय एवं फास्ट फूड नहीं खाने, पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने तथा अनुशासित जीवन शैली अपनाने की सलाह दी।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय समुदायों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बैगा, सहरिया और भारिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना, जनजातीय ग्रामों की अधोसंरचना विकास और मूलभूत सुविधाओं की दृष्टि से अभूतपूर्व है।  उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों का मानचित्र तैयार कर सरकार के प्रयासों को आवश्यकताओं के अनुरूप पहुँचाने के निर्देश दिए।  राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा ही प्रगति और सफलता का सबसे बड़ा माध्यम है। बेटियों को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों को अच्छी शिक्षा देने का आग्रह किया।

केंद्रीय मंत्री जनजातीय मामले  दुर्गादास उइके ने कहा कि भीमपुर में सिकल सेल जांच मशीन का लोकार्पण जनजातीय एवं वंचित समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। केंद्रीय मंत्री  उईके ने राज्यपाल  पटेल के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में चल रहे सिकल सेल जागरूकता एवं उन्मूलन प्रयासों की सराहना की।

सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जांच मशीन “गजेल” का लोकार्पण

राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जांच की अत्याधुनिक मशीन “गजेल” का लोकार्पण किया। राज्यपाल  पटेल को बताया गया कि मशीन जनजातीय बाहुल्य भीमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्थापित की जाएगी। सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक रक्त संबंधी बीमारियों की त्वरित एवं सटीक जांच में सहायक होगी।

“मिशन रानी” अभियान का किया शुभारंभ

राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम में “मिशन रानी” अभियान का भी शुभारंभ किया। अभियान में स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा जनजातीय कार्य विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह अभियान महिलाओं, किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती माताओं में एनीमिया नियंत्रण के लिए प्रारंभ किया गया है। अभियान का उद्देश्य एनीमिया में कमी लाना, रक्त में हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार करना तथा सिकल सेल एवं थैलेसीमिया जैसी बीमारियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना है। अभियान के तहत हीमोग्लोबिन जांच, संपूर्ण रक्त जांच, सीरम फेरिटिन, विटामिन बी-12 एवं विशेष रक्त परीक्षण किए जाएंगे।

हितलाभ वितरण और प्रदर्शनी अवलोकन

राज्यपाल  पटेल ने कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया। सिकल मित्र प्रमाण पत्र, जेनेटिक कार्ड, फूड बास्केट, मां गंगा आजीविका स्वयं सहायता समूह, सी.सी.एल. राशि प्रदान की। सी.बी.एस.ई. कक्षा 12वीं में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सेजल उईके, राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी शिवानी उईके तथा अंतर्राष्ट्रीय कराटे में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कल्याणी कोड़पे को सम्मानित किया। उन्होंने महिला एवं बाल विकास, पशुपालन, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, वन और स्वास्थ्य विभाग के स्टालों का भी निरीक्षण किया। विभागीय गतिविधियों, योजनाओं की जानकारी ली। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

 

मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली बैठक होगी उज्जैन में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्य क्षेत्रीय परिषद् की अगली (27वीं) बैठक वर्ष 2027 में उज्जैन में होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने 19 मई को बस्तर में परिषद् की 26वीं बैठक में इस आशय की सहमति दे दी है। मध्य क्षेत्रीय परिषद् की बैठक लेने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री  शाह उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को लेकर हो रही व्यापक नागरिक व्यवस्थाओं, मानव प्रबन्धन एवं आपदा प्रबंधन का भी मुआयना करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री  शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद् की 26वीं बैठक बस्तर में करके देश में नक्सलवाद की समाप्ति का जन संदेश दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से बीते सप्ताह राज्य में हुई विशेष गतिविधियों और सरकार को मिली उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

मध्यप्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित, मुख्यमंत्री ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सल मुक्त करने में अपने शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री  शाह द्वारा पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना, विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव सहित ‘नक्सल उन्मूलन अभियान’ में सक्रिय योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया है।

भोजशाला पर उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत, मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा लाने का प्रयास करेगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धार जिले की भोजशाला परिसर को लेकर मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शांति का टापू है। प्रदेश में कानून व्यवस्था नियंत्रण हमारी प्राथमिकता है। इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जायेगी। उन्होंने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने करीब 750 साल पुराने और धार्मिक/ईश वंदना से जुड़े इस मसले का सकारात्मक एवं शांतिपूर्ण समाधान किया है। सरकार इस विषय से जुड़े सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय का पालन करायेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार मां वाग्देवी की वास्तविक प्रतिमा विदेश से स्वदेश लाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ हर जरूरी प्रयास एवं समन्वय करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस महत्वपूर्ण फैसले के मद्देनजर मध्यप्रदेश में शांति, सौहार्द और सद्भावना बनाए रखने के लिए प्रदेशवासियों को सरकार की ओर से बधाई भी दी।

प्रधानमंत्री का सम्मान – देश का सम्मा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें विदेश में मिल रहा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पूरे देश का सम्मान है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि, किसानों को मिली नई सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धान, ज्वार-बाजरा, कपास, तिल, सोयाबीन और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने के लिए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के किसानों को यह नई सौगात दी है।

इंडो-फ्रांस कॉन्क्लेव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह हुए इंडो-फ्रांस कान्क्लेव (भारत-फ्रांस निवेश सम्मेलन) के सफल आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सरकार फ्रांस के साथ हर  क्षेत्र में मिलकर काम करेगी। फ्रांस के राजदूत  थियरी माथू, आईएफसीसीआई की महानिदेशक सु पायल एस कंवर और लगभग 150 प्रतिनिधियों से इसमें हिस्सा लिया, जिसमें भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राजनियक, नीति निर्माता, शासकीय अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पोमा रोपवेस, एआई वैनसिटी एण्ड मेडिकेप्स यूनीवर्सिटी, डासाल्ट सिस्टमस, सफलेट, सियस्ट्रा, एन्जी सहित विश्व के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सीईओ-सीओओ और बहुराष्ट्रीय कंपनी प्रतिनिधियों की इस कान्क्लेव में सहभागिता मध्यप्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों के प्रति दिनों-दिन बढ़ रहे वैश्विक विश्वास का प्रतीक है।

निगम-मंडलों के पदाधिकारियों को मिला प्रशिक्षण, सरकार ने प्रारंभ किया नवाचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार के अधीन विभिन्न निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग, प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की हाल ही में नियुक्ति की गई है। शासकीय विभागों के प्रमुख निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग एवं प्राधिकरण के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों के लिए प्रदेश में पहली बार कार्य प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार का एक नवाचारी प्रयास है। इसमें सभी नये पदाधिकारियों को उनके पदीय दायित्वों के निर्वहन की रीति-नीति, नियम-कायदे और वित्त प्रबंधन के संबंध में प्रशिक्षित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देकर सभी से प्रदेश के विकास के लिए काम करने की अपील की। 

भोपाल के प्रकाश तरण पुष्कर स्विमिंग पूल में गैस लीक, चार बच्चों की हालत बिगड़ी

भोपाल

टीटी नगर लिंक रोड नंबर-1 स्थित प्रकाश तरण पुष्कर में बुधवार शाम स्विमिंग के दौरान क्लोरीन गैस लीक होने से चार बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। घटना शाम करीब पांच बजे की है। उस समय पूल में करीब 20 से 25 बच्चे स्विमिंग कर रहे थे।

तभी अचानक कुछ बच्चों को खांसी और सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत बच्चों को इलाज के लिए जयप्रकाश अस्पताल लेकर पहुंचे।

डाॅक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों को घर भेज दिया, लेकिन एहतियात के तौर पर 24 घंटे तक निगरानी रखने की सलाह दी है। परिजन सचिन जैन ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी आध्या जैन भी स्विमिंग कर रही थी। अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे लगातार खांसी आने लगी।

हालत इतनी खराब हो गई कि वह बेहोशी जैसी स्थिति में पहुंच गई थी। वहां मौजूद महिलाओं ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। डाॅक्टरों ने जरूरी इलाज किया, जिसके बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।

प्रकाश तरण पुष्कर के मैनेजर हेमंत जारिया ने बताया कि पाइपलाइन में समस्या आने से क्लोरीन गैस लीक हुई थी। हवा के कारण गैस तेजी से फैल गई। बच्चों को खांसी और घबराहट की शिकायत होने पर तुरंत अस्पताल भेजा गया। उन्होंने कहा कि गैस लीक का पता चलते ही टंकी बदल दी गई। फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र बना जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक

भोपाल 

कन्दा वन धन विकास केन्द्र जनजातीय महिला उद्यमिता का प्रतीक बन गया है। दक्षिण पन्ना में स्किल इस केन्द्र ने म.प्र. में सर्वाधिक राजस्व प्राप्त किया है।

केंद्र द्वारा इस वर्ष लगभग 21.4 लाख रुपये का रिकॉर्ड राजस्व एवं लगभग 5 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया है, जो पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में राजस्व में 400 प्रतिशत से अधिक तथा लाभ में 800 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। पूर्व वर्षों में केंद्र का राजस्व एवं लाभ क्रमशः वर्ष 2021-22 में 6.5 लाख रुपये एवं 17 हजार रुपये, वर्ष 2022-23 में 4.7 लाख रुपये एवं 67 हजार रुपये, वर्ष 2023-24 में 2.6 लाख रुपये एवं 63 हजार रुपये और वर्ष 2024-25 में 5.1 लाख रुपये एवं 22 हजार रुपये रहा था। यह वृद्धि स्थानीय संग्राहकों को बेहतर मूल्य, गुणवत्तापूर्ण प्रसंस्करण एवं प्रभावी विपणन रणनीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

वन-धन विकास केंद्र कल्दा के माध्यम से स्थानीय जनजातीय संग्राहकों को लघुवनोपज का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी अधिक प्राप्त हो रहा है। इसमें अचार/चिरौंजी चरवा का समर्थन मूल्य 130 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है, जबकि गुणवत्ता के आधार पर संग्राहकों को वन-धन केंद्र के माध्यम से लगभग 160 रुपये से 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक मूल्य प्राप्त हुआ। बाद में इसी उपज का प्रसंस्करण, डीसीडिंग, सफाई एवं आकर्षक पैकेजिंग कर “कल्दा चिरौंजी” ब्रांड के रूप में विपणन किया गया। इस पहल से स्थानीय संग्राहकों की आय में वृद्धि हुई है तथा बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।

वन-धन विकास केंद्र की गतिविधियों से विशेष रूप से जनजातीय महिला सदस्यों को बड़ा आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है। कई महिला सदस्य, जिन्हें पूर्व में कोई आय प्राप्त नहीं होती थी, वे वर्तमान में वन-धन केंद्र से जुड़कर लगभग 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, जिससे जनजातीय महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिली है।

वर्ष 2025-26 में केंद्र को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब प्राप्त हुई जब जेके सीमेंटt के साथ सीएसआरसाझेदारी स्थापित हुई, जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ियों एवं विद्यालयों के लिये महुआ लड्डुओं की नियमित मासिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई। इससे वन आधारित उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध हुआ तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसरों में वृद्धि हुई।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र द्वारा चिरौंजी, प्राकृतिक शहद, महुआ लड्डू, आंवला आधारित उत्पाद, त्रिफला चूर्ण, दहीमन, सूखा आंवला, बाल हर्रा एवं बहेड़ा छिलका जैसे विविध लघु वनोपज आधारित उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता एवं पोषणीय मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र के अधिकांश प्रमुख उत्पादों का एफएसएसएआई मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया, जिसमें उनकी उच्च गुणवत्ता, शुद्धता एवं पोषणीय मूल्य की पुष्टि हुई। परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक शहद में HMF शून्य तथा Fiehe’s Test निगेटिव पाया गया, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि शहद ताजा एवं बिना किसी चीनी मिलावट के है। इसी प्रकार चिरौंजी में उच्च ऊर्जा, प्राकृतिक वसा एवं प्रोटीन पाए गए, जबकि ट्रांस फैट एवं कोलेस्ट्रॉल नहीं पाये गये। महुआ लड्डुओं में संतुलित पोषणीय तत्व पाए गए तथा उनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थ, कृत्रिम रंग अथवा मिलावट का उपयोग नहीं पाया गया।

कल्दा वन-धन विकास केंद्र की उपलब्धियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना प्राप्त हुई है। भोपाल में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 2025” में केंद्र के उत्पादों को पूरे मध्यप्रदेश में दूसरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्राप्त हुआ। वहीं नई दिल्ली में आयोजित “भारत ट्राइब्स फेस्ट (आदि महोत्सव) 2026” में कल्दा वन-धन विकास केंद्र का चयन मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि के रूप में किया गया, जहां चिरौंजी, प्राकृतिक शहद एवं महुआ लड्डुओं सहित विभिन्न उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने। आगंतुकों एवं विशेषज्ञों द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग एवं प्रभावी ब्रांडिंग की विशेष सराहना की गई। दक्षिण पन्ना वन विभाग द्वारा निकट भविष्य में पन्ना, पवई एवं शाहनगर में रिटेल आउटलेट स्थापित करने की योजना भी प्रस्तावित है, जिससे स्थानीय नागरिकों को शुद्ध एवं पोषक वन उत्पाद सहज रूप से उपलब्ध हो सकेंगे तथा वन आधारित जनजातीय आजीविका को और अधिक मजबूती मिलेगी।

सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रदर्शित किए जाएं मानसिक स्वास्थ्य सहायता हेल्पलाइन नंबर

भोपाल 

अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन की अध्यक्षता में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए गठित Monitoring and Implementation Framework Committee की आज मंत्रालय में बैठक हुई।

अपर मुख्य सचिव  राजन ने प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता से संबंधित टेली मानस-14416, उमंग हेल्पलाइन-14425 तथा इमरजेंसी डायल-112 प्रदर्शित करने, हेल्पलाइन नंबरों का स्कूलों एवं महाविद्यालयों में व्यापक प्रचार-प्रसार तथा विद्यार्थियों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक करने को कहा।

 राजन ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जिला स्तर पर जिला स्तरीय टास्क फोर्स एवं राज्य स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है। अपर मुख्य सचिव  राजन ने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समितियों की बैठक प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जाए तथा उसकी जानकारी राज्य स्तर पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलों में आयोजित होने वाली समय-सीमा बैठकों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जिससे संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  राजन ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पैरा-35 में जारी दिशा-निर्देशों का सभी संबंधित विभाग गंभीरता से अध्ययन करें और उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए। प्रत्येक संस्थान में काउंसलर की नियुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य रेफरल प्रणाली विकसित की जाए। गार्जियन ट्यूटर योजना/मेंटरशिप प्रणाली को प्रभावी बनाने, भेदभाव, सार्वजनिक अपमान एवं अत्यधिक शैक्षणिक दबाव पर रोक लगाने, हेल्पलाइन एवं आपात मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा शिक्षक एवं कर्मचारियों को नियमित मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देने को कहा।

 राजन ने एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एलजीबीटीक्यू एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील एवं समावेशी वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही रैगिंग, बुलिंग एवं उत्पीड़न की रोकथाम तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने अभिभावकों के लिए जागरूकता एवं मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता कार्यक्रम आयोजित करने, मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने तथा खेल, कला एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। नियमित करियर काउंसलिंग एवं वैकल्पिक करियर मार्गदर्शन, छात्रावासों को नशा मुक्त एवं सुरक्षित बनाए रखने तथा कोचिंग हब में विशेष मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण  के.जी. तिवारी, जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त  तरुण राठी, तकनीकी शिक्षा आयुक्त  अवधेश शर्मा सहित स्कूल शिक्षा विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

राजेश दाहिमा
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MP में स्कूल टीचर्स की भर्ती पर बड़ा फैसला, ग्वालियर हाईकोर्ट ने अंग्रेजी अनिवार्यता पर सुनाया अहम आदेश

ग्वालियर 

एमपी में मिडिल स्कूल टीचर्स बनने के लिए अंग्रेजी जरूरी हो गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है कि स्नातक में अंग्रेजी विषय अनिवार्य है तभी मिडिल स्कूल शिक्षक बन सकेंगे। मप्र उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। खंडपीठ ने शिक्षक भर्ती को लेकर यह अहम फैसला सुनाया है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अभ्यर्थी के पास स्नातक स्तर पर संबंधित विषय की डिग्री नहीं है, तो केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उसे मिडिल स्कूल शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। इसी के साथ हाईकोर्ट में दायर याचिका भी खारिज कर दी।

हाईकोर्ट का यह मामला माध्यमिक शिक्षक परीक्षा- 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा ने शिक्षक भर्ती के प्रावधानों को चुनौती दी थी। उन्होंने उच्च योग्यता के आधार पर नियुक्ति पर विचार करने की मांग की थी पर सरकार ने कोर्ट में इसे नियमों के विपरीत बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने लोक शिक्षण आयुक्त को नियमों के विपरीत कोई निर्देश देने से स्पष्ट तौर पर इंकार कर दिया।

याचिकाकर्ता पवन कुमार मिश्रा माध्यमिक शिक्षक परीक्षा- 2018 की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे। उन्होंने अंग्रेजी विषय के शिक्षक पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान विभाग ने नियुक्ति इस आधार पर निरस्त कर दी कि उनके पास स्नातक स्तर पर अंग्रेजी विषय नहीं था। पवन कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि वे अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर हैं। उनकी उच्च योग्यता को पात्रता मानते हुए नियुक्ति पर विचार किया जाए। इधर सरकार ने इसे भर्ती नियमों के विपरीत बताया।

ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के तर्क पर सहमति जताई। इसी के साथ कोर्ट ने ‘खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते’ सिद्धांत को दोहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट- नियमों के विपरीत नहीं दे सकते निर्देश
डबल बेंच ने कहा कि भर्ती नियम वैधानिक और बाध्यकारी होते हैं। यदि बाद में नियमों में ढील दी जाती है तो उन हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने विज्ञापन की शर्तों के कारण आवेदन ही नहीं किया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा कोई नियम प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें पोस्ट ग्रेजुएशन को ग्रेजुएशन के समकक्ष माना गया हो। इसलिए लोक शिक्षण आयुक्त को नियमों के विपरीत कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता।

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