MP में सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस पर सख्ती, सीट छोड़ते ही लगेगी ‘शॉर्ट लीव’

भोपाल 

 मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह काम एमपीएसईडीसी को सौंप दिया गया है। साथ-ही साथ सरकारी ऑफिसों में मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन का काम भी शुरु हो गया है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं।

एमपीएसईडीसी जो सिस्टम तैयार कर रहा है, उसमें कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर को भी ऐड किया जा रहा है। जिसके जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में ये सॉफ्टवेयर मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों से होगी। इसके बाद इसे कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में लागू किया जाएगा।

अब लगेगी शॉर्ट लीव और हॉफ डे
नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद कर्मचारियों के पंच करते ही सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए पंच लग जाएगा। इसका समय सीधे क्रेंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपनी सीट से जाता है तो ये सॉफ्टवेयर अपने आप शॉर्ट लीव और हॉफ डे दर्ज कर देगा। ये सिस्टम खुद ही बता देगा कि कौन कर्मचारी डेस्क पर है और कौन फ्रील्ड पर है।

बदलेंगे ये 2 पुराने नियम
मोहन सरकार अपने कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले ‘दो ही बच्चे अच्छे’ वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा।

दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा।

गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं
निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है।

विद्यार्थियों को रेडक्रॉस के सिद्धांतों से करें संस्कारित: राज्यपाल पटेल

विद्यार्थियों को रेडक्रॉस के सिद्धांतों से करें संस्कारित: राज्यपाल पटेल

जूनियर और युवक रेडक्रॉस शाखा की समीक्षा बैठक में हुए शामिल
राज्यपाल पटेल ने अपने कारकेड को किया आधा

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि रेडक्रॉस के सिद्धांत बच्चों में सेवा, सद्भाव, करूणा और संवेदनशीलता विकसित करते हैं। उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उनका सर्वांगीण विकास कर, उन्हें आदर्श नागरिक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए सक्षम पीढ़ी के निर्माण के लिए शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों में रेडक्रॉस की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सभी शिक्षण संस्थानों को हर विद्यार्थी को रेडक्रॉस से जोड़ने की ज़िम्मेदारी उठाना चाहिए।

राज्यपाल पटेल सोमवार को रेडक्रॉस की मध्यप्रदेश राज्य शाखा इकाई द्वारा आयोजित जूनियर रेडक्रॉस एवं युवक रेडक्रॉस शाखा की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन होटल पलाश रेसीडेंसी में किया गया। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल पटेल ने ईंधन बचत के दृष्टिगत अपने कारकेड के वाहनों की संख्या को आधा कर दिया है।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, बच्चों में ज्ञान और संस्कार को प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। संस्थानों को विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। उन्हें समसामयिक चुनौतियों और जीवन की प्रतिस्पर्धाओं के लिए जुझारू बनाएं। सफलताओं के दबाव और तनाव प्रबंधन से निपटने का हुनर सिखाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में बच्चों और युवाओं का विशेष योगदान रहेगा। ऐसे में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना होगा। कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। आदर्श नागरिक बनाकर मानवता के ध्वजवाहक के रूप में तैयार करना होगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, प्रदेश और जिला रेडक्रास इकाईयों के साथ सक्रिय समन्वय करें। रेडक्रॉस की वार्षिक गतिविधियों का कैलेंडर अनुसार नियमित आयोजन करें। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में रेडक्रॉस के नवाचारों का अध्ययन कर प्रदेश की परिस्थिति के अनुरूप समावेश करने की बात कही। राज्यपाल पटेल ने जूनियर और युवक रेडक्रॉस के लिए गठित समिति को शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। प्रदेश के सभी जिलों में रेडक्रॉस की गतिविधियों को सक्रियता के साथ संचालित करने के लिए कहा है।

बैठक में जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह ने रेडक्रॉस के माध्यम से ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सेनेटरी नैपकिन को कम दाम पर उपलब्ध कराने के संबंध में विचार के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और निचले स्तर पर कम से कम दामों में सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने से कमजोर वर्ग की महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा। आर्थिक बचत के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य का स्तर भी बेहतर होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में जूनियर और युवक रेडक्रॉस की गतिविधियों के सतत आयोजन की बात कहीं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों में भी रेडक्रॉस, एन.सी.सी. और एन.एस.एस. के माध्यम से मिलने वाले प्रोत्साहनों के संबंध में चर्चा की।स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल स्तर पर जूनियर और युवक रेडक्रॉस के पंजीयन, सदस्यता आदि प्रक्रियाओं के लिए सक्रिय समन्वय की आवश्यकता बताई।

राज्यपाल 4 कारकेड वाहनों के साथ पहुँचे

राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर अपने कारकेड के वाहनों की संख्या आधी कर दी है। राज्यपाल पटेल सोमवार को जूनियर और युवक रेडक्रॉस की बैठक में शामिल होने के लिए केवल 4 वाहनों के साथ कार्यक्रम स्थल पहुँचे। विदित हो कि राज्यपाल के कारकेड में पूर्व में 8 वाहन शामिल रहते थे। 

राज्यपाल पटेल का बैठक के प्रारंभ में रेडक्रॉस की मध्यप्रदेश राज्य शाखा के चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। जनरल सेक्रेटरी रामेंद्र सिंह ने जूनियर और युवक रेडक्रॉस के पंजीकरण, शुल्क निर्धारण, वार्षिक ऑडिट, निर्धारित गतिविधियों के आयोजन आदि प्रस्तावों की जानकारी दी। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अनुपम राजन और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उच्च और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा शासकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु उपस्थित थे। 

हवाला लूटकांड की आरोपी SDOP पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 2 साल के बच्चे का दिया गया हवाला

सिवनी 

सिवनी के बहुचर्चित हवाला डकैती कांड में मुख्य आरोपी और निलंबित एसडीओपी पूजा पांडे को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए राहत प्रदान की। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में चर्चित यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, पूजा पांडे ने पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ता 22 वर्षीय महिला हैं और एकल माता भी हैं। उनका दो से तीन वर्ष का बच्चा भी जेल में उनके साथ रह रहा है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें नियमित जमानत दे दी।

पुलिस वर्दी और सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल से मचा था हड़कंप
पूरा मामला सिवनी जिले के खैरीटेक क्षेत्र में हुई कथित हवाला रकम की लूट से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार करीब तीन करोड़ रुपये की हवाला राशि को बेहद सुनियोजित तरीके से लूटा गया था। आरोप है कि वारदात को अंजाम देने के लिए पुलिस की वर्दी, सरकारी वाहन और हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। इसी वजह से मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया था और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे।

शुरुआती जांच में यह भी सामने आया था कि इस कथित डकैती की साजिश में पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। मामला उजागर होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। इसके बाद सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर जांच शुरू कराई थी।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े कई अहम खुलासे
एसआईटी जांच के दौरान एजेंसियों ने मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और बैंकिंग ट्रांजैक्शन समेत कई महत्वपूर्ण प्रमाण जुटाए थे। पूछताछ में कई पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई भी शुरू हुई। इसके बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि पूरी वारदात को पेशेवर तरीके से अंजाम देने की तैयारी की गई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर हवाला रकम की मूवमेंट की जानकारी जुटाई और फिर पुलिसिया रौब का इस्तेमाल करते हुए रकम पर कब्जा कर लिया।

अधिकांश आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है जमानत
इस मामले में गिरफ्तार अधिकांश आरोपियों को पहले ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं, दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर बाद में निरस्त कर दी गई थी। अब मुख्य आरोपी पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, मामले की जांच और ट्रायल अभी जारी है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की ओर से अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेंगे।

 

MP में 48 घंटे के भीतर भरने होंगे सड़क गड्ढे, सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी सख्त

भोपाल 
 सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों, मैनहोल और जलभराव वाले इलाकों में बैरिकेडिंग करना अनिवार्य होगा। समिति ने राज्यों से कहा है कि किसी भी खतरनाक जगह की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों में पर्याप्त लाइटिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि रात में सड़क हादसे रोके जा सकें।

खुले मैनहोल और जलभराव पर विशेष सख्ती

समिति ने कहा है कि खुले नाले, मैनहोल और बिना सुरक्षा वाले जलभराव क्षेत्र लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। कई हादसों में लोगों की मौत और गंभीर चोटें सामने आई हैं। इसी वजह से अब स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। अगर किसी राज्य में लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

48 घंटे में कार्रवाई के निर्देश
समिति ने निर्देश दिए हैं कि सड़क पर किसी भी गड्ढे, खुले मैनहोल या खतरनाक जलभराव की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। इसके तहत:

    गड्ढों की तत्काल मरम्मत
    खुले नालों और मैनहोल पर मजबूत बैरिकेडिंग
    रिफ्लेक्टिव टेप लगाना
    रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था

जैसे कदम उठाने होंगे।
बारिश में हादसे रोकने पर फोकस

सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने कहा है कि बारिश के मौसम में अंधेरे और जलभराव वाले इलाकों में दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए रात में प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वाहन चालकों को खतरे का पहले से अंदाजा हो सके।

दो महीने में मांगी रिपोर्ट
समिति ने सभी राज्यों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पिछले पांच वर्षों में गड्ढों की वजह से हुए हादसे, खुले जलभराव क्षेत्रों में मौतें और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में घायल लोगों का डेटा भी शामिल करना होगा।

IRC मानकों के अनुसार होगा सड़क निर्माण
निर्देशों में साफ कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। यदि किसी राज्य ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

जिला सड़क सुरक्षा समितियों को भी जिम्मेदारी
समिति ने जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है।

पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश
सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी इससे पहले 2018 में भी सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दे चुकी है। इनमें:

    हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना
    स्पीड मॉनिटरिंग
    सड़क किनारे बैरियर लगाना
    ब्लैक स्पॉट ऑडिट
    स्कूल वाहनों की सुरक्षा

जैसे कदम शामिल थे।

पांच साल के हादसों का डेटा भी मांगा

सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने राज्यों से पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा मांगा है। इसके अलावा खुले जलभराव और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में हुई मौतों और घायलों की जानकारी भी मांगी गई है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं। समिति का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश

इससे पहले साल 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी ने सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दिए थे। इनमें हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना, स्पीड मॉनिटरिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का ऑडिट और स्कूल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। अब बारिश के मौसम को देखते हुए एक बार फिर राज्यों को सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत केस ने पकड़ा तूल, मां के साथ आखिरी चैट ने बढ़ाए सवाल

भोपाल 

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कथित तौर पर ससुराल की प्रताड़ना की वजह से मौत के इस मामले में जहां एक तरफ पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, वहीं हर दिन कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं. बीते 12 मई को छत के सरिये से फांसी पर लटकी मिली ट्विशा को लेकर आरोपियों में से एक उसकी सास गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में अग्रिम जमानती आवेदन दिया था. आवेदन में उन्होंने दावा किया कि ट्विशा परिवार में एडजस्ट नहीं हो पा रही थी और वह ड्रग्स लेती थी। 

‘ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं’
इस बीच ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई आखिरी व्हाट्सएप चैट आजतक के हाथ लगी. मां के बात करते हुए वह काफी परेशान दिख रही है. इसमें ट्विशा ने अपने ससुराल वालों को लेकर कई गंभीर बातें लिखीं और पति पर चरित्र पर शंका करने जैसे आरोप लगाए। 

व्हाट्सएप चैट के मुताबिक, ट्विशा ने मां को भेजे मैसेज में लिखा था ‘बहुत परेशान हूं… ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं. समर्थ पूछता है कि मेरे पेट में किसका बच्चा है. इतना ही नहीं, ट्विशा ने अपनी मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार भी लगाई थी. उसने लिखा, ‘मुझे यहां से आकर ले जाओ, ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे। 

‘मेरा जीवन नरक हो गया है, ले जाओ यहां से’
यही नहीं चैट में ट्विशा ने एक जगह अपनी मां को लिखा है ‘मेरा जीवन नरक हो गया है’. ट्विशा ने लिखा है कि ‘ये लोग बहुत निर्दयी है. समर्थ तो ठीक से मुझसे बात तक नहीं करता। 

इधर ससुराल वालों द्वारा हत्या का आरोप लगा रहा ट्विशा का परिवार उसके दोबारा पोस्टमार्टम के लिए आज आवेदन देगा. ट्विशा के माता पिता का कहना है कि इससे पहले जो बेल्ट ट्विशा के गले में मिली थी, उसके इंस्पेक्शन के बिना ही पोस्टमार्टम कर दिया गया था। 

‘मैं फंस गई हूं, तू मत फंसना’
बता दें कि इससे पहले भी ट्विशा की उसकी दोस्त मीनाक्षी के साथ इंस्टाग्राम चैट सामने आई थी जिसमें वह उससे कह रही थी- मैं फंस गई हूं तू मत फंसना, ज्यादा बात नहीं कर पाउंगी। 

‘बहू ड्रग्स न ले तो हाथ कांपते थे’
मृतका की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट ने शुक्रवार को ही अग्रिम जमानत दे दी है. अपने जमानती आवेदन में गिरबाला ने दावा किया था कि बहू ड्रग्स लेती थी और ड्रग्स न मिल पाने की स्थिति में उसके हाथ कांपने लगते थे.  उन्होंने बताया कि ट्विशा विवाह के पूर्व फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल थी और उन्होंने तेलगू और अन्य भाषाओं की फिल्मों में हीरोइन के रूप में और एड फिल्मों में काम किया था. शादी के समय ट्विशा दिल्ली की प्रायवेट कंपनी में वर्कफार्म होम काम कर रही थी. घर पर रहते हुए हम लोगों को ट्विशा के व्यवहार से संदेह हुआ कि वह ड्रग्स लेती हैं.  बाद में उसका पापा ने ही इस बात की पुष्टी की। 

‘प्रेग्नेंट हुई तो सामान बांधकर निकल गई’
उन्होंने कहा कि ट्विशा शादी के दिन यानी 09 दिसंबर 2025 से  12 मई 2026 के बीच पांच बार सुसराल से मायके और अन्य जगहों पर गयी थी. हाथों में कंपन और कुछ समय तक डग्स न ले पाने के कारण उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन नजर आता था. ट्विशा के पिता ने ही हमें बताया कि वह ड्रग्स लेती है। 

गिरिबाला का कहना है कि 17 अप्रैल 2026 को पहली बार ट्विशा को अपने प्रेग्नेंट होने की जानकारी हुई. उसी दिन ट्विशा अपने पति के साथ हजेला अस्पताल गयी. इसके बाद उसका व्यवहार मेरे और मेरे बेटे के प्रति  काफी अधिक परेशान करने वाला था. अस्पताल से आने के बाद ट्विशा ने अपना सामान बैग में भरा ओर बोली कि वह अपने घर नोएडा जाना चाहती हैं . वह 17 अप्रैल को निकलकर 18 अप्रैल 2026 को हवाई जहाज से दिल्ली पहुंची. लेकिन सीधा घर नहीं गई और घर पहुंचने में इतना समय लगने का कोई कारण भी नहीं बताया. इधर, मामले में फरार ट्विशा के पति समर्थ सिंह की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही हैं। 

ट्विशा शर्मा का गलने लगा शव

भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मृतका का शव पिछले पांच दिनों से भोपाल एम्स (AIIMS) की मर्चुरी में रखा हुआ है, जो अब डीकंपोज (गलने) लगा है. इस बीच, ट्विशा शर्मा के परिजनों ने रविवार को सीएम हाउस के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद उनके पिता नवनिधि शर्मा और भाई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी (OSD) से मुलाकात की. दूसरी ओर, पुलिस शव को सौंपने के लिए परिजनों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है। 

कानूनी सुनवाई किसी अन्य राज्य में की जाए
सीएम हाउस में मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात के दौरान ट्विशा के पिता और भाई को इस मामले में उचित और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन मिला है. OSD से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा, “हमारी मुख्य रूप से दो मांगें हैं. पहली मांग यह है कि बेटी का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में कराया जाए, और दूसरी यह कि इस पूरे मामले की कानूनी सुनवाई मध्य प्रदेश के बजाय किसी अन्य राज्य में की जाए.” उन्होंने बताया कि इस विषय पर अभी परिवार में चर्चा होगी और उसके बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा। 

क्या है ट्विशा शर्मा भोपाल मौत का पूरा मामला?
31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उन्होंने एक मॉडल के रूप में भी काम किया था. शादी से पहले वह दिल्ली में जॉब करती थीं. वैवाहिक वेबसाइट ‘शादी डॉट कॉम’ के जरिए उनका रिश्ता भोपाल की रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बेटे वकील समर्थ सिंह से तय हुआ था. दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी. शादी के कुछ समय बाद ट्विशा का गर्भपात हो गया और इसके बाद 12 मई 2026 को उन्होंने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। 

शरीर पर चोटों के निशान, मौत का कारण फांसी
मृतका के परिजनों ने उनकी सास (रिटायर्ड जज) और पति (वकील) पर गंभीर रूप से प्रताड़ित करने और हत्या करने के आरोप लगाए हैं. शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं और मौत का कारण फांसी बताया गया है. इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है. वहीं, आरोपियों ने कोर्ट से अग्रिम जमानत ले रखी है. वर्तमान में कटारा हिल्स थाना प्रभारी (TI) दुबे इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। 

पत्थरों पर मिले 1000 साल पुराने पदचिन्ह, जैन इतिहास से जुड़ने के संकेत

रायसेन.

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के जंगलों में पुरातत्वविदों को एक बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। रायसेन के जामगढ़ गांव में पथरीले रास्तों के बीच करीब 800 मीटर के दायरे में फैले पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन पदचिन्हों (पैरों के निशान) की खोज की गई है।

इसके साथ ही वहां शुरुआती ‘नागरी लिपि’ में लिखा एक शिलालेख भी मिला है, जोकरीब 10वीं-11वीं शताब्दी (परमार काल) का माना जा रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि पत्थरों पर बने ये कदम किसी महान संत या जैन मुनि के हो सकते हैं, जो एक हजार साल पहले इस क्षेत्र से गुजरे थे। यह महत्वपूर्ण खोज इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के भोपाल चैप्टर की पुरातत्वविद नैन्सी शर्मा और उनके सहयोगी मिलनाथ पेटेले द्वारा किए फील्ड सर्वे के दौरान हुई है।

समय के साथ धुंधले हो गए हैं निशान
सर्वे का नेतृत्व करने वाली नैन्सी शर्मा ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर वे इस दुर्गम पहाड़ी स्थल पर पहुंचीं। समय के साथ कुछ निशान जरूर धुंधले हुए हैं, लेकिन अधिकांश पदचिह्न आज भी सुरक्षित हैं। इन्टेक (INTACH) मध्य प्रदेश के संयोजक एम.एम. उपाध्याय के अनुसार, पहले प्रमुख चरण चिह्न के पास पत्थरों पर दो लाइनों का एक प्राचीन शिलालेख खुदा हुआ है। इसमें ‘सिद्ध’, ‘पद’, ‘पंडित’ और ‘कृत’ जैसे शब्दों का उल्लेख है, जो पवित्र स्मारक परंपराओं से जुड़े हैं।

एएसआई (ASI) के पूर्व एपिग्रैफी निदेशक रवि शंकर ने इस लिपि की पहचान परमार राजवंश के समय की आरंभिक नागरी लिपि के रूप में की है। इतिहास विशेषज्ञों का कहना है कि 10वीं-11वीं शताब्दी के दौरान मध्य प्रदेश में कई जैन मंदिरों और स्मारकों का निर्माण हुआ था, जिसके चलते इस खोज के तार सीधे जैन इतिहास से जुड़ रहे हैं।

बदलने जा रहा MP के रेल नेटवर्क का नक्शा, इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन पर बड़ा अपडेट सामने आया

भोपाल 

इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में मांगलिया रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां एक ओर यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम तेज रफ्तार से चल रहा है तो दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी फोकस किया गया। पत्रिका न्यूज टुडे की टीम ने मौके पर काम का जायजा लेकर हकीकत जानी। स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से होते नजर आए तो कई काम अधूरे दिखाई दिए। वर्तमान में यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है जो भविष्य में बड़ी सुविधा बन सकती है।

टीम जब स्टेशन पहुंची तो प्लेटफॉर्म और बीच के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया। नया एफओबी (फुट ओवर ब्रिज) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेनों का इंतजार करने को मजबूर हैं।

पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई के लिए हब
स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बायप्रोड क्ट्स की सह्रश्वलाई के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक कनेक्टिविटी और लोडिंग सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।

10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट
इंदौर के इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रॉसिंग और 7 नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा।

इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रॉसिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता मिला। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर बेस मजबूत किया जा रहा है। रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है, आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है।

ये भी जानें- पहले कैसा था रूट
    अभी इंदौर से भोपाल या जबलपुर जाने के लिए ट्रेनों को उज्जैन और सीहोर के साथ ही संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) होकर जाना पड़ताहै। ऐसे में इस घुमावदार रास्ते की दूरी भी बढ़ जाती है।

    वहीं उज्जैन-भोपाल रूट पहले से ही दिल्ली – मुंबई और अन्य रूट की ट्रेनों के कारण बेहद व्यस्त रहता है, इससे गाड़ियां लेट होती हैं। इससे ट्रेन के संचालन में कम से कम 20-30 मिनट का समय बर्बाद होता था।

अब क्या बदलेगा, कैसे बचेंगे 2 घंटे
    इंदौर-बुधनी प्रोजेक्ट यानी नई रेल लाइन करीब 204 किमी लंबी है। इसके बनने से इंदौर सीधे भोपाल-जबलपुर की मुख्य रेल लाइन से जुड़ेगा।

    इंदौर बुधनी और आगे भोपाल या जबलपुर जाने की दूरी 45 किमी तक कम हो जाएगी। इसके बाद सीधे-सीधे 2 घंटे का सफर कम किया जा सकेगा।

    मांगलिया को महा जंक्शन बनाया जाना है। यानी ये अब छोटा स्टेशन नहीं रहेगा। बल्कि मालवा और महाकौशल को जोड़ने एक विशाल बिजनेस और लॉजिस्टिक हब बन जाएगा। यहां से पेट्रोलियम और सोयाबीन सप्लाई पूरे देशभर में तेजी से की जा सकेगी।

    10 नए क्रॉसिंग और 7 हाल्ट बनने से ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। स्थानीय व्यापार को पंख लग जाएंगे

भारतीय रेलवे के नए सिस्टम से MP की 236 ट्रेनें पकड़ेंगी रफ्तार, लाखों यात्रियों को मिलेगा फायदा

ग्वालियर
भारतीय रेलवे ने अपनी पारंपरिक कछुआ चाल को अलविदा कहकर डिजिटल और हाईस्पीड युग में कदम रख दिया है। झांसी-हेतमपुर रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम (स्वचालित सिग्नल प्रणाली) के लागू होने से ट्रेनों के संचालन का पूरा गणित ही बदल गया है। लगभग 155 किलोमीटर लंबे इस व्यस्त रूट पर अब ट्रैक के हर एक किलोमीटर पर रेलवे की तीसरी आंख तैनात है। पहले जहां इस दूरी में केवल 34 सिग्नल थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 162 कर दी गई है। इस बदलाव से न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को स्टेशन के बाहर (आउटर पर) बेवजह खड़े रहने की झंझट से भी मुक्ति मिल जाएगी।

क्या है नया सिस्टम?
एक के पीछे एक दौड़ेंगी ट्रेनें पुरानी व्यवस्था में एक स्टेशन से दूसरी ट्रेन तब तक रवाना नहीं की जाती थी, जब तक कि आगे चल रही ट्रेन अगले स्टेशन तक न पहुंच जाए।

 अब क्या बदला: नई तकनीक में ट्रैक को छोटे-छोटे ब्लॉक (करीब 1-1 किमी) में बांट दिया गया है।

■ इलेक्ट्रॉनिक नजर: आधुनिक सेंसर्स और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के जरिए ट्रेन की लोकेशन बदलते ही सिग्नल का रंग अपने आप बदल जाता है। अब एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाकर एक के पीछे दूसरी ट्रेनें आसानी से दौड़ सकेंगी। इससे ट्रैक की क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
लोको पायलट को ग्रीन सिग्नल की राहत, आउटर का रेड सिग्नल गायब

1. ड्राइवर्स का बढ़ा भरोसा: अब लोको पायलट को काफी पहले ही आगे के सिग्नल की सटीक स्थिति का पता चल जाता है। खराब मौसम या धुंध में भी ड्राइवर पूरे आत्मविश्वास के साथ ट्रेन की रफ्तार बनाए रख सकेंगे।

2. आउटर पर नो वेटिंग: अक्सर अगले स्टेशन से हरी झंडी न मिलने के कारण ट्रेनों को आउटर पर रोक दिया जाता था। अब ऑटोमेटिक ब्लॉक सिस्टम के कारण ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे चलती रहेंगी, जिससे स्टेशन मास्टर को भी मैन्युअली सिग्नल ऑपरेट नहीं करना पड़ेगा।
ग्वालियर में ट्रैक लोड हर दिन गुजरती हैं 236 ट्रेनें

ग्वालियर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव इतना ज्यादा है कि यह सिस्टम ‘लाइफलाइन’ साबित होगा-

■ झांसी-आगरा रूट: 170 ट्रेनें

■ ग्वालियर-गुना रूट: 28 ट्रेनें

■ ग्वालियर-भिंड रूट: 06 ट्रेनें

■ ग्वालियर-कैलारस : 06 ट्रेनें

■ थ्रू (बिना रुके) ट्रेनें: 26 ट्रेनें

■ कुल: 236 ट्रेनें प्रतिदिन
हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम

रेलवे ट्रैक के हर किलोमीटर पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जा रहा है। इससे ट्रैक की कैपेसिटी और ट्रेनों की स्पीड दोनों बढ़ती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि ट्रेनों को अब किसी स्टेशन या आउटर पर बेवजह इंतजार नहीं करना पड़ता। झांसी मंडल में यह काम लगभग पूरा हो चुका है।

-शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे 

भोपाल में 18 मई को होगा ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट का शुभारंभ

पीएम सूर्य घर योजना का डिजिटली होगा प्रचार-प्रसार

इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में एक साथ होगा प्रचार प्रसार अभियान का शुभारंभ

भोपाल
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का डिजिटली प्रचार-प्रसार करने के लिये एमपीयूवीएनएल एवं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरनमेंट एंड वॉटर के सहयोग से 18 मई सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सुबह 10 बजे व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो लॉन्च किया जाएगा।

व्हाट्सऐप चैटबॉट और प्रचार वीडियो से नागरिकों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी सरल एवं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ेगी और नागरिकों को आवेदन एवं सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

प्रमुख शहरों में आईईसी अभियान का होगा शुभारंभ
मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा प्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं जबलपुर में एक लक्षित सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) एवं जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान उपभोक्ताओं के बीच विश्वास निर्माण, व्यवहारगत परिवर्तन को प्रोत्साहित करने एवं योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

आमजन के बीच लोकप्रिय हो रही है योजना
प्रदेश में योजना को लेकर लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक मध्यप्रदेश में 1 लाख 96 हजार 791 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1 लाख 24 हजार 663 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 467.06 मेगावाट है। भारत सरकार द्वारा अब तक 879.69 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जा चुका है।

चैटबॉट और आईईसी शुभारंभ कार्यक्रम में भारत सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर, बैंक प्रतिनिधि, विद्युत वितरण कंपनियों एवं नगर निगम के अधिकारी तथा योजना से जुड़े पंजीकृत वेंडर भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

एमपी ट्रांसको ने सुरक्षित दूरी सुनिश्चित कर मानव जीवन को जोखिम से बचाया

220 केवी दमोह-टीकमगढ़ लाइन में ट्रिपिंग की जाँच के लिये विशेष अभियान

भोपाल  
मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस दमोह संभाग द्वारा 220 केवी दमोह-टीकमगढ़ ट्रांसमिशन लाइन में हुई ट्रिपिंग की जांच के लिए विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। पेट्रोलिंग में जबलपुर नाका क्षेत्र में यह पाया गया कि श्री हरिकांत उपाध्याय द्वारा मकान की छत पर कराये जा रहे बाउंड्री एवं छज्जे का निर्माण ट्रांसमिशन लाइन के अत्यधिक निकट प्रतिबंधित कारिडोर के भीतर आ गया था, जिसके कारण लाइन में ट्रिपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई थी।

कार्यपालन अभियंता श्री एस.के. मुड़ा के मार्गदर्शन में सहायक अभियंता श्री एमए बेग व ट्रांसमिशन लाइन मैंटैनेंस दमोह की टीम ने संबंधित को ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित कारिडोर मे निर्माण से संभावित खतरों एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई। उनकी सहमति से छत की बाउंड्री एवं छज्जे के उस हिस्से को सुरक्षित तरीके से हटाया गया, जिससे ट्रांसमिशन लाइन को आवश्यक दूरी उपलब्ध हो सके। साथ ही विद्युत ट्रिपिंग की आशंका को टाला जा सके।

दमोह में लगभग 15 निर्माण खतरनाक जद में
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री अरविंद शर्मा ने बताया कि दमोह शहर में लगभग 15 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित हो सकती है।

ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की अपील
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।

कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारिडोर आवश्यक
एमपी ट्रांसको ने आम नागरिकों से अपील की है कि अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के निकट किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पूर्व विद्युत सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें, जिससे दुर्घटनाओं एवं विद्युत व्यवधानों से बचा जा सके। नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है।

ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक खतरे के साए में रहने जैसा है।

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