भोपाल में 18 मई को होगा ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट का शुभारंभ

पीएम सूर्य घर योजना का डिजिटली होगा प्रचार-प्रसार

इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में एक साथ होगा प्रचार प्रसार अभियान का शुभारंभ

भोपाल
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर एवं नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ऊर्जा विकास निगम के व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का डिजिटली प्रचार-प्रसार करने के लिये एमपीयूवीएनएल एवं काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरनमेंट एंड वॉटर के सहयोग से 18 मई सोमवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सुबह 10 बजे व्हाट्सऐप चैटबॉट एवं प्रचार वीडियो लॉन्च किया जाएगा।

व्हाट्सऐप चैटबॉट और प्रचार वीडियो से नागरिकों को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी सरल एवं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे योजना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ेगी और नागरिकों को आवेदन एवं सोलर संयंत्र लगाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।

प्रमुख शहरों में आईईसी अभियान का होगा शुभारंभ
मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा प्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर एवं जबलपुर में एक लक्षित सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) एवं जन-जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान उपभोक्ताओं के बीच विश्वास निर्माण, व्यवहारगत परिवर्तन को प्रोत्साहित करने एवं योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

आमजन के बीच लोकप्रिय हो रही है योजना
प्रदेश में योजना को लेकर लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक मध्यप्रदेश में 1 लाख 96 हजार 791 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 1 लाख 24 हजार 663 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 467.06 मेगावाट है। भारत सरकार द्वारा अब तक 879.69 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्रदान किया जा चुका है।

चैटबॉट और आईईसी शुभारंभ कार्यक्रम में भारत सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर, बैंक प्रतिनिधि, विद्युत वितरण कंपनियों एवं नगर निगम के अधिकारी तथा योजना से जुड़े पंजीकृत वेंडर भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

एमपी ट्रांसको ने सुरक्षित दूरी सुनिश्चित कर मानव जीवन को जोखिम से बचाया

220 केवी दमोह-टीकमगढ़ लाइन में ट्रिपिंग की जाँच के लिये विशेष अभियान

भोपाल  
मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस दमोह संभाग द्वारा 220 केवी दमोह-टीकमगढ़ ट्रांसमिशन लाइन में हुई ट्रिपिंग की जांच के लिए विशेष पेट्रोलिंग अभियान चलाया गया। पेट्रोलिंग में जबलपुर नाका क्षेत्र में यह पाया गया कि श्री हरिकांत उपाध्याय द्वारा मकान की छत पर कराये जा रहे बाउंड्री एवं छज्जे का निर्माण ट्रांसमिशन लाइन के अत्यधिक निकट प्रतिबंधित कारिडोर के भीतर आ गया था, जिसके कारण लाइन में ट्रिपिंग की स्थिति उत्पन्न हुई थी।

कार्यपालन अभियंता श्री एस.के. मुड़ा के मार्गदर्शन में सहायक अभियंता श्री एमए बेग व ट्रांसमिशन लाइन मैंटैनेंस दमोह की टीम ने संबंधित को ट्रांसमिशन लाइन के प्रतिबंधित कारिडोर मे निर्माण से संभावित खतरों एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी दी गई। उनकी सहमति से छत की बाउंड्री एवं छज्जे के उस हिस्से को सुरक्षित तरीके से हटाया गया, जिससे ट्रांसमिशन लाइन को आवश्यक दूरी उपलब्ध हो सके। साथ ही विद्युत ट्रिपिंग की आशंका को टाला जा सके।

दमोह में लगभग 15 निर्माण खतरनाक जद में
एमपी ट्रांसको के अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री अरविंद शर्मा ने बताया कि दमोह शहर में लगभग 15 ऐसे निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जो इस प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर आते हैं। इन सभी मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे स्वयं निर्माण हटाएं, अन्यथा प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इन निर्माणों से न केवल रहने वालों की जान जोखिम में है, बल्कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति भी लंबे समय तक बाधित हो सकती है।

ऊर्जा मंत्री श्री तोमर की अपील
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। ट्रांसमिशन लाइनों के समीप किसी भी प्रकार का निर्माण न करें और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें।

कम से कम 27 मीटर का सुरक्षित कारिडोर आवश्यक
एमपी ट्रांसको ने आम नागरिकों से अपील की है कि अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के निकट किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पूर्व विद्युत सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें, जिससे दुर्घटनाओं एवं विद्युत व्यवधानों से बचा जा सके। नियमानुसार 132 के.वी. ट्रांसमिशन लाइन के दोनों ओर 27 मीटर का क्षेत्र और 220 के वी लाइन में 35 मीटर सुरक्षा कॉरीडोर के रूप में प्रतिबंधित है। इसके भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः वर्जित है। इस क्षेत्र में बने मकान, दुकान या अन्य संरचनाएं इसलिए अत्यंत जोखिमपूर्ण हैं क्योंकि तेज हवा या अन्य कारणों से तारों के झूलने (स्विंग) की स्थिति में कभी भी जानलेवा हादसा हो सकता है।

ट्रांसमिशन लाइनों में प्रवाहित विद्युत धारा घरेलू बिजली की तुलना में लगभग 600 से 950 गुना अधिक घातक होती है। ऐसे में इन लाइनों के पास रहना या निर्माण करना, हर समय एक खतरे के साए में रहने जैसा है।

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही

विगत 2 दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 48 लाख रुपये से अधिक के मादक पदार्थ एवं अन्य संपत्ति जब्त

भोपाल
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में  विगत दो दिनों में मंदसौर, उमरिया, कटनी, मैहर एवं सागर जिलों की पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अवैध डोडाचूरा एवं गांजा जप्त किया है। साथ ही तस्करी में प्रयुक्त वाहन भी जप्त किए गए हैं।

उमरिया-दुर्घटनाग्रस्त वाहन से 62 किलो से अधिक गांजा जब्त
जिले की चौकी अमरपुर पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन की तलाशी के दौरान 62 किलो 384 ग्राम अवैध गांजा जब्त किया। वाहन चालक एवं अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश जारी है। पुलिस द्वारा गांजा एवं वाहन सहित लगभग 22 लाख 50 हजार रुपये की संपत्ति जब्त की है।

मंदसौर- 324 किलो डोडाचूरा जप्त
जिले की थाना गरोठ पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्यवाही करते हुए एक पिकअप वाहन से सब्जियों के नीचे विशेष तरीके से छिपाकर रखा गया 324 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा जब्त किया। पुलिस ने मादक पदार्थ, परिवहन में प्रयुक्त पिकअप वाहन एवं मोबाइल फोन सहित लगभग 16 लाख 69 हजार  रुपये की संपत्ति जब्त की है।आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया  है।

कटनी-15 किलो से अधिक का गांजा जब्त
जिले की एनकेजे पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साड़ियों की पैकिंग के भीतर छिपाकर परिवहन किया जा रहा 15 किलो 730 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 1  लाख  59 हजार रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की।

मैहर-“ऑपरेशन प्रहार 2.0” के तहत  21 किलो से अधिक का गांजा जब्त
जिले में विशेष अभियान “ऑपरेशन प्रहार 2.0” के अंतर्गत कोतवाली पुलिस ने संदिग्ध कार की जांच के दौरान 21 किलो 243 ग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा जब्त  कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जब्त संपत्ति की कीमत लगभग 4  लाख 12 हजार रुपये है।

सागर-4 किलो से अधिक गांजा एवं वाहन जब्त
थाना राहतगढ़ पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 4 किलो 30 ग्राम अवैध गांजा एवं परिवहन में प्रयुक्त ऑटो वाहन सहित लगभग 3 लाख 20 हजार रुपए की संपत्ति जब्त की है। मामले में महिला आरोपी सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं अवैध गतिविधियों में संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध इसी प्रकार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। आमजन से अपील की गई है कि नशे से संबंधित किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

तेंदूपत्ता संग्रहण में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने वन विभाग की अनूठी पहल

सुरक्षा संदेश युक्त मास्क वितरण एवं जनजागरूकता अभियान

भोपाल
दक्षिण सामान्य वनमण्डल बालाघाट द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन के दौरान संग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष (ह्युमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट) की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से विशेष जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीच सुरक्षा संदेशों से मुद्रित मास्क वितरित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से जंगल में सुरक्षित व्यवहार एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जा रही है।

वन विभाग द्वारा बताया गया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं वनाश्रित परिवार जंगल क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं। ऐसे समय में हिंसक वन्यप्राणियों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में सतर्कता अत्यंत आवश्यक होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा सुरक्षा संबंधी संदेशों को सरल एवं प्रभावी तरीके से जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह अभिनव पहल की गई है।

वन विभाग द्वारा मास्क पर अंकित संदेशों के माध्यम से संग्राहकों को समूह में जाकर तेंदूपत्ता संग्रहण करने, सूर्योदय के पूर्व एवं सूर्यास्त के बाद जंगल में प्रवेश न करने, किसी क्षेत्र में हिंसक वन्यप्राणी की उपस्थिति दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने तथा अत्यधिक घने एवं संवेदनशील वन क्षेत्रों में संग्रहण से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही संग्रहण कार्य में विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है।

वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा गांवों एवं संग्रहण केंद्रों में लगातार संपर्क कर संग्राहकों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि जागरूकता, सतर्कता एवं सामूहिक सहभागिता के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

 

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार हो रहा मध्यप्रदेश

विश्वस्तरीय हॉकी सुविधाओं एवं अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित हो रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का हॉकी इंडिया प्रतिनिधिमंडल ने किया अवलोकन

आधुनिक खेल अधोसंरचना से मध्यप्रदेश में खेल विकास को मिल रही नई दिशा
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही एमपी हॉकी अकादमी

भोपाल  
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा विकसित विश्वस्तरीय हॉकी अधोसंरचना एवं भोपाल स्थित बरखेड़ा नाथू में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्माणाधीन सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का हॉकी इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल द्वारा अवलोकन एवं निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण संचालक श्री अंशुमान यादव के साथ हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह, कोषाध्यक्ष सेकर जे. मनोहरन तथा महानिदेशक कमांडर आर.के. श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने हॉकी अकादमी में उपलब्ध अंतर्राष्ट्रीय स्तर की एस्ट्रोटर्फ सुविधाओं, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश में विकसित की गई खेल सुविधाओं एवं अधोसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में खिलाड़ियों को मिल रही विश्वस्तरीय सुविधाएं भारतीय हॉकी के भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने बरखेड़ा नाथू में निर्माणाधीन सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की प्रगति एवं वहां विकसित की जा रही आधुनिक खेल अधोसंरचना का भी अवलोकन किया। यह कॉम्प्लेक्स अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जहां भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की व्यापक संभावनाएं निर्मित होंगी। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस प्रकार की अत्याधुनिक एवं समग्र खेल सुविधाएं खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगी।

मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही है। अकादमी के खिलाड़ियों ने विगत वर्षों में भारतीय टीम में स्थान बनाकर विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। जूनियर एवं सीनियर स्तर पर खिलाड़ियों की निरंतर सफलता यह प्रमाणित करती है कि मध्यप्रदेश देश में हॉकी प्रतिभाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है।

प्रदेश में खेलों के विकास के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग के नेतृत्व में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, अनुभवी प्रशिक्षकों एवं उत्कृष्ट खेल वातावरण के कारण मध्यप्रदेश हॉकी सहित विभिन्न खेलों में स्वर्णिम उपलब्धियों की नई इबारत लिख रहा है।

बरखेड़ा नाथू में निर्माणाधीन सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार होने के बाद मध्यप्रदेश में खेल विकास को एक नया आयाम प्राप्त होगा। इस अत्याधुनिक परिसर में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवास, फिटनेस, रिकवरी एवं प्रतियोगिताओं से संबंधित सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। साथ ही यह परिसर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा, जिससे प्रदेश के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

 

‘पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ : दूरी, संसाधनों और आर्थिक अभाव को दूर कर सुनिश्चित कर रही है जीवनरक्षक उपचार

गंभीर मरीजों के लिए बनी नई उम्मीद
अब तक 140 मरीज हो चुके हैं लाभान्वित

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर उपचार की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा कई नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मई 2024 से प्रदेश में ‘पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ प्रारंभ की गई, जो आज गंभीर रूप से बीमार, दुर्घटना प्रभावित एवं आपदा पीड़ित मरीजों के लिए जीवनरक्षक पहल के रूप में स्थापित हो रही है।

प्रदेश सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह महत्वाकांक्षी सेवा उन परिस्थितियों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है, जब मरीज को “गोल्डन ऑवर” के भीतर उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाना आवश्यक होता है। सेवा के अंतर्गत एक हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस तथा एक फिक्स्ड-विंग कन्वर्टेड फ्लाइंग एम्बुलेंस को प्रशिक्षित चिकित्सकीय और पैरामेडिकल टीम के साथ संचालित किया जा रहा है। यह व्यवस्था राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मानकों और आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप कार्य कर रही है। एयर एम्बुलेंस के माध्यम से कम समय में उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों की जान बचाने की संभावनाएं उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि आर्थिक अभाव किसी भी मरीज के उपचार में बाधा नही बने। आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों को प्रदेश के भीतर एवं बाहर स्थित सभी शासकीय तथा आयुष्मान मान्यता प्राप्त अस्पतालों तक एयर एम्बुलेंस सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इसका समस्त व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। वहीं गैर-आयुष्मान श्रेणी के मरीजों को भी प्रदेश के भीतर शासकीय अस्पतालों तक यह सेवा नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। सड़क दुर्घटना, औद्योगिक हादसों एवं आपदा प्रभावित मरीजों के लिए भी राज्य के भीतर और बाहर किसी भी शासकीय अथवा निजी अस्पताल तक नि:शुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मई 2024 से प्रारंभ इस सेवा से 140 मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। अनेक गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में यह सेवा महत्वपूर्ण साबित हुई है।

दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को मिल रही त्वरित चिकित्सा सहायता
हाल ही में बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम देवरी बुजुर्ग निवासी चार माह के मासूम अयांश-मसराम के मामले ने इस सेवा की संवेदनशीलता और उपयोगिता को रेखांकित किया। गंभीर हृदय रोग से पीड़ित अयांश की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विशेष शिविर में की गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए महानगर में इलाज संभव नहीं था, लेकिन जिला प्रशासन की तत्परता और राज्य सरकार की संवेदनशील पहल के चलते बच्चे को पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से मुंबई स्थित नारायण हृदयालय भेजा गया, जहां उसका उपचार एवं आवश्यक सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नि:शुल्क की जा रही है। बच्चे के परिजनों की भावुक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि शासन की यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन रही है।

संवेदनशील और सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था
पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा न केवल आपातकालीन चिकित्सा परिवहन को नई दिशा दे रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि दूरी, संसाधनों की कमी या आर्थिक स्थिति किसी नागरिक के जीवनरक्षक उपचार में बाधा न बने। सिंगरौली निवासी 32 वर्षीय श्रीमती संध्या दुबे के मामले में भी पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा ने जीवनदायिनी भूमिका निभाई। गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं एवं सेप्टीसीमिया की स्थिति उत्पन्न होने पर जिला प्रशासन ने त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा। ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक आधुनिक एवं त्वरित चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए संकल्पित है।

 

प्रदेश में पेपर लैस कार्य संस्कृति को किया जा रहा प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में पेपरलेस कार्य संस्कृति को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। नागरिकों को एमपी ई-सेवा पोर्टल एवं मोबाइल ऐप पर सरकार के 56 विभागों की 1700 सेवाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध हैं। प्रदेश में साइबर तहसीलों की स्थापना हो चुकी है। इस नवाचार को प्रधानमंत्री पुरस्कार भी मिल चुका है। भोपाल में देश के पहले साइबर पंजीयन कार्यालय की शुरुआत की गई है। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर का भी शुभारंभ किया गया है। मंत्रि-परिषद की कार्यवाही पूर्णत: पेपरलैस हो चुकी है, जिससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ी है। प्रदेश में सुशासन के साथ ग्रीन गवर्नेंस को भी बढ़ावा मिल रहा है। इन नवाचारों से प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं और जन सामान्य से जुड़ी सेवाओं तक आम आदमी की पहुंच को आसान और उनके उपयोग को सरल व सुगम बनाया जा रहा है। सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश-न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने जबलपुर के एक कार्यक्रम में प्रदेश में पेपर लैस कार्य प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, पूर्णत: पेपरलैस बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। इससे पर्यावरण को भी संबल मिलेगा।

गुड गवर्नेंस के नए आयाम होंगे स्थापित
प्रधानमंत्री श्री मोदी के सुशासन के मंत्र को आत्मसात करते हुए मिनिमम गवर्नमेंट- मैग्सिमम गवर्नेंस के मूल मंत्र के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में गुड गवर्नेंस के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में सक्रिय हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्यालयों में फाइलों की मॉनिटरिंग, समयबद्ध निराकरण और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हुआ है। इससे भ्रष्टाचार में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति आई है। लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है। संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से प्रदेश में रजिस्ट्री की सुविधा अब लोगों के लिए आसान हुई है। नागरिक अब घर बैठे दस्तावेज के पंजीयन करवा रहे हैं। वारंट और समन की तामील के लिए ई-तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है।

तकनीक के बदलते दौर में बदल रहा न्यायिक प्रशासन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही, सुशासन के दो मजबूत स्तंभ हैं और एक -दूसरे के पूरक भी। पारदर्शिता से जवाबदेही मजबूत होती है और जवाबदेही स्वयं पारदर्शिता की कारक होती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति ने देश में सर्विस डिलीवरी और व्यवस्था की जवाबदेही को मजबूती दी है। तकनीक आज सामाजिक परिवर्तन के साथ व्यवस्था में बदलाव का भी प्रमुख कारक बन गई है। तकनीक के इस बदलते दौर में प्रदेश के न्यायालय तेजी से बदल रहे हैं। वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया कागजी अभिलेखों पर आधारित रही। एफआईआर से लेकर चार्जशीट, केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, समन, वारंट और अंतिम निर्णय हर चरण पर भौतिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान होता था। अब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से हम “एंड-टू-एंड ई-प्रोसीडिंग” की ओर बढ़ रहे हैं। ई-फाइलिंग, ई-समन, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं न्यायिक प्रशासन को अधिक कुशल बना रही हैं। महाधिवक्ता कार्यालय में भी पेपरलैस प्रणाली स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। केस मैनेजमेंट, डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग एवं विभागीय समन्वय के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।

कानूनी जागरूकता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों को जानना जरूरी है। कमजोर वर्गों, महिलाओं और बुजुर्गों में कानूनी जागरूकता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कानून की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो न्याय चाहने वाले व्यक्ति को सरलता से समझ में आ जाए। राज्य सरकार जन सामान्य में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्यरत है। डिजिटल समय में कानूनी प्रक्रियाओं को डिजिटली सशक्त करने से न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक सशक्त और जीवंत बनाने में सहायक होगी।

 

मध्यप्रदेश के आमों की मिठास और विशालकाय नूरजहाँ की विश्व पहचान

प्रदेश का गौरव-किंग ऑफ मैंगो नूरजहाँ आम

भोपाल
भारत को आमों का देश कहा जाता है और मध्यप्रदेश इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला प्रमुख राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं। यही कारण है कि यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी अनेक प्रसिद्ध किस्मों के साथ-साथ एक ऐसी अनोखी किस्म भी पैदा होती है, जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान बनाई है। यह विशेष किस्म है “नूरजहाँ” आम। इसे “किंग ऑफ मैंगो” भी कहा जाता है।

मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला नूरजहाँ आम अपने विशाल आकार, अद्वितीय स्वाद और आकर्षक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहाँ आम का वजन लगभग 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसका रंग, सुगंध और मिठास लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं। बाजार में इसकी मांग विशेष रूप से बड़े शहरों और विदेशों में अधिक है। एक आम की कीमत 1500 से 3000 तक होती है।

“नूरजहाँ” आम केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी विशेष माना जाता है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में फल आते हैं, इसलिए इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। कई बार एक फल ही हजारों रुपये में बिक जाता है। यही कारण है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। कट्ठीवाड़ा का मौसम और वातावरण इस किस्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है, जिससे यहां पैदा होने वाले फल विशेष गुणवत्ता वाले होते हैं।

माना जाता है कि नूरजहाँ आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत पहुंची और बाद में पाँचवें – छठवें दशक में मध्यप्रदेश के मालवा तथा आदिवासी अंचल झाबुआ में विकसित हुई। आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्टीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के कृषक श्री भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्व. रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहाँ आम का पौधा लेकर आए थे। उन्होंने अपने खेत में इस पौधे को लगाया और वर्षों की मेहनत से इसे संरक्षित किया। यही पौधा आगे चलकर पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। श्री जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु लगभग 20 से 25 वर्ष है। इसके अतिरिक्त स्वयं श्री भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे आज 3 से 5 वर्ष की अवस्था में विकसित हो रहे हैं।

आज यह मध्यप्रदेश की विशेष पहचान बन चुकी है। कट्टीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की ख्याति वर्षों पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 तथा 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

नूरजहाँ आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ के लिए अनुकूल सिद्ध हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई। झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका संरक्षण किसानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता रहा है।

विदेशों में भी नूरजहाँ आम की विशेष मांग देखी जा रही है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों की अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी भारतीय आम अत्यंत लोकप्रिय हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी विशेष पहचान बन रही है।

हालांकि नूरजहाँ आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी विशिष्टता और दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान दिला रही है। विदेशी बाजारों में यह आम आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

मध्यप्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत पौधों, ड्रिप सिंचाई तथा फल प्रसंस्करण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आम उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। आज मध्यप्रदेश का आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, कृषि नवाचार और प्रदेश की वैश्विक पहचान का माध्यम बन चुका है।

 

ट्विशा शर्मा केस में बढ़ा दबाव, CM हाउस पहुंचे परिजन, दामाद और समधन पर कार्रवाई की मांग

भोपाल.

मध्य प्रदेश के भोपाल में हाईप्रोफाइल ट्विशा शर्मा सुसाइड केस को लेकर रोज नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं। भोपाल में ट्विशा शर्मा सुसाइड केस की जांच को लेकर परिजन 17 मई 2026, रविवार को सीएम निवास पहुंचे।

परिजन ने कहा कि बेटी की ससुराल पक्ष के दबाव में केस की जांच ढीली पड़ रही है। बेटी की सास रिटायर्ड जज व उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष होने से दबाव व प्रभाव ज्यादा है। ऐसे में हमारी मांग है कि भोपाल से केस ट्रांसफर किया जाए। ट्विशा के पिता और भाई को पुलिस सीएम हाउस के अंदर लाई। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। ट्विशा के परिजन ने कहा कि हम इनसाफ चाहते हैं। हमें यहां हेल्प नहीं मिल रही हैं। इतनी सारी एनजीओ हैं, क्या एम्स इतना स्ट्रॉन्ग नहीं है। आप सेकंड पीएम की परमिशन दीजिए।

बेटा लॉयर, मां पूर्व जज, जमानत नहीं मिलना चाहिए
ट्विशा मां ने कहा कि मेरी बेटी को न्याय चाहिए। समर्थ सिंह क्रिमिनल लॉयर है। उसे बचाव के रास्ते पता है। गिरिबाल सिंह को जमानत मिल गई है। उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए। कानून इनकी रक्षा के लिए बना है। विक्टिम के लिए कोई नहीं है। 

हम आमरण अनशन करेंगे, सीएम हाउस से हटेंगे नहीं
ट्विशा के पिता बोले काला कानून बताकर हमें गिरफ्तार कीजिए। हम आमरण अनशन करेंगे, हटेंगे नहीं है। मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए। यहां कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है।

पांचवें दिन भी परिजन ने शव लेने से किया इनकार
​क्रिमिनल लॉयर जमाई समर्थ सिंह और सास गिरिबला सिंह के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन पांच दिन से अड़े हुए हैं। ऐसे में वह ट्विशा शर्मा का शव भी लेने से इनकार कर गए हैं। जिस वजह से उसका पीएम और अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाया है। 

सोमवार को ट्विशा सुसाइड केस की होगी सुनवाई
भोपाल ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में सास गिरिबला सिंह और समर्थ सिंह समर्थ सिंह को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। उनकी जमानत के बाद से परिजनों में भारी आक्रोश है। मामले में आगे की सुनवाई सोमवार को होगी। इस मामले की जांच SIT कर रही है। शव को पीएम के लिए दिल्ली AIIMS ले जाया जाएगा।

ट्विशा के पति की जमानत पर सुनवाई 18 मई को
मामले में ट्विशा की सास-रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई है। वहीं उसके वकील पति की जमानत अर्जी पर सोमवार, 18 मई को सुनवाई होगी। ट्विशा शर्मा के परिजन ने केस की जांच मध्य प्रदेश के बाहर की पुलिस से कराने की मांग की है। उधर, पुलिस का कहना है कि आरोपी पति की तलाश की जा रही है। लगातार उसके घर और ऑफिस पर दबिश दी जा रही है।

रिटायर्ड जज को इसलिए मिली अग्रिम जमानत
कोर्ट ने माना कि गिरिबाला सिंह उम्रदराज हैं। साथ ही वे न्यायपालिका में बड़े पद पर रह चुकी हैं। उनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। फरार होने की संभावना नहीं है। इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी जाती है। 

समर्थ कहता था- शादी हमारे स्टैंडर्ड की नहीं
पुलिस एफआईआर में परिजन ने बताया है कि समर्थ शादी के बाद से ट्विशा को प्रताड़ित करता था। वो कहता था कि शादी में जो ट्विशा के परिवार ने खर्च किया है, वो उसके स्टैंडर्ड का नहीं है। समर्थ शादी के बाद ट्विशा को महीने के खर्च के लिए भी पैसे नहीं देता था। जिसके चलते ट्विशा के पिता उसे ऑनलाइन पैसे भेजते थे।

परिजन बोले-समर्थ और गिरिबाला ने फोन नहीं उठाया
ट्विशा के परिजन ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि 12 मई की रात 9:41 बजे ट्विशा अपनी मां से फोन कॉल पर बात कर रही थी। इसी बीच समर्थ कमरे में आया और चिल्लाया… किससे बात कर रही है? इसके बाद फोन कट गया। ट्विशा का फोन बंद हो गया। परिजन का कहना है कि हमने 20 मिनट तक समर्थ और गिरिबाला के मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। रात 10:35 बजे गिरिबाला ने फोन उठाया और कहा कि शी इज नो मोर (वो अब नहीं रही) और इसके बाद कॉल काट दिया।

अब जेल से रिहाई में नहीं होगी देरी, जमानत आदेश के 10 मिनट में बाहर आएंगे आरोपी

जबलपुर.

प्रदेश में यह व्यवस्था यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के तहत लागू की गई है। दावा किया जा रहा है कि कोर्ट से जमानत आदेश जारी होने के बाद 10 मिनट में रिहाई मिल सकेंगी। साथ ही, फैसले या आदेश की प्रमाणित कॉपी फीस जमा करने पर 1 मिनट में वॉट्सएप पर मिल जाएगी।

मध्य प्रदेश की अदालतों की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसके तहत 24 घंटे कोर्ट केस की जानकारी मिल पाएगी। दस्तावेजों के लिए कभी भी किसी भी समय ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रदेश में यह व्यवस्था यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के तहत लागू की गई है। जिसका जबलपुर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शुभारंभ किया। नई व्यवस्था में यह भी दावा किया जा रहा है कि कोर्ट से जमानत आदेश जारी होने के बाद 10 मिनट में रिहाई मिल सकेंगी। साथ ही, फैसले या आदेश की प्रमाणित कॉपी फीस जमा करने पर 1 मिनट में वॉट्सएप पर मिल जाएगी।

डिजिटल सिस्टम पर अपलोड होगी फॉरेंसिक-मेडिकल रिपोर्ट
यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के जरिए एआई आधारित सिस्टम बड़े केसों की समरी खुद तैयार करेगा। इससे जजों व वकीलों को लंबी फाइलें पढ़ने में कम समय लगेगा और सुनवाई तेज हो सकेंगी। डिजिटल सिस्टम पर फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट अपलोड होगी। इससे रिकॉर्ड बदलने या गायब होने की संभावना कम होगी।

फाइल अटकने, दस्तावेज गुम, देरी की समस्या कम होगी
पुलिस, अदालत और जेल के सिस्टम आपस में जुड़ने से फाइल अटकने, दस्तावेज गुम होने व देरी की समस्या कम हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत हर आरोपी की एक यूनिक डिजिटल पहचान होगी। इससे अपराधियों की ट्रैकिंग में आसानी हो जाएगी।

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