ट्विशा शर्मा केस में बढ़ा दबाव, CM हाउस पहुंचे परिजन, दामाद और समधन पर कार्रवाई की मांग

भोपाल.

मध्य प्रदेश के भोपाल में हाईप्रोफाइल ट्विशा शर्मा सुसाइड केस को लेकर रोज नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं। भोपाल में ट्विशा शर्मा सुसाइड केस की जांच को लेकर परिजन 17 मई 2026, रविवार को सीएम निवास पहुंचे।

परिजन ने कहा कि बेटी की ससुराल पक्ष के दबाव में केस की जांच ढीली पड़ रही है। बेटी की सास रिटायर्ड जज व उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष होने से दबाव व प्रभाव ज्यादा है। ऐसे में हमारी मांग है कि भोपाल से केस ट्रांसफर किया जाए। ट्विशा के पिता और भाई को पुलिस सीएम हाउस के अंदर लाई। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। ट्विशा के परिजन ने कहा कि हम इनसाफ चाहते हैं। हमें यहां हेल्प नहीं मिल रही हैं। इतनी सारी एनजीओ हैं, क्या एम्स इतना स्ट्रॉन्ग नहीं है। आप सेकंड पीएम की परमिशन दीजिए।

बेटा लॉयर, मां पूर्व जज, जमानत नहीं मिलना चाहिए
ट्विशा मां ने कहा कि मेरी बेटी को न्याय चाहिए। समर्थ सिंह क्रिमिनल लॉयर है। उसे बचाव के रास्ते पता है। गिरिबाल सिंह को जमानत मिल गई है। उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए। कानून इनकी रक्षा के लिए बना है। विक्टिम के लिए कोई नहीं है। 

हम आमरण अनशन करेंगे, सीएम हाउस से हटेंगे नहीं
ट्विशा के पिता बोले काला कानून बताकर हमें गिरफ्तार कीजिए। हम आमरण अनशन करेंगे, हटेंगे नहीं है। मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए। यहां कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है।

पांचवें दिन भी परिजन ने शव लेने से किया इनकार
​क्रिमिनल लॉयर जमाई समर्थ सिंह और सास गिरिबला सिंह के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन पांच दिन से अड़े हुए हैं। ऐसे में वह ट्विशा शर्मा का शव भी लेने से इनकार कर गए हैं। जिस वजह से उसका पीएम और अंतिम संस्कार तक नहीं हो पाया है। 

सोमवार को ट्विशा सुसाइड केस की होगी सुनवाई
भोपाल ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में सास गिरिबला सिंह और समर्थ सिंह समर्थ सिंह को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। उनकी जमानत के बाद से परिजनों में भारी आक्रोश है। मामले में आगे की सुनवाई सोमवार को होगी। इस मामले की जांच SIT कर रही है। शव को पीएम के लिए दिल्ली AIIMS ले जाया जाएगा।

ट्विशा के पति की जमानत पर सुनवाई 18 मई को
मामले में ट्विशा की सास-रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई है। वहीं उसके वकील पति की जमानत अर्जी पर सोमवार, 18 मई को सुनवाई होगी। ट्विशा शर्मा के परिजन ने केस की जांच मध्य प्रदेश के बाहर की पुलिस से कराने की मांग की है। उधर, पुलिस का कहना है कि आरोपी पति की तलाश की जा रही है। लगातार उसके घर और ऑफिस पर दबिश दी जा रही है।

रिटायर्ड जज को इसलिए मिली अग्रिम जमानत
कोर्ट ने माना कि गिरिबाला सिंह उम्रदराज हैं। साथ ही वे न्यायपालिका में बड़े पद पर रह चुकी हैं। उनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। फरार होने की संभावना नहीं है। इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी जाती है। 

समर्थ कहता था- शादी हमारे स्टैंडर्ड की नहीं
पुलिस एफआईआर में परिजन ने बताया है कि समर्थ शादी के बाद से ट्विशा को प्रताड़ित करता था। वो कहता था कि शादी में जो ट्विशा के परिवार ने खर्च किया है, वो उसके स्टैंडर्ड का नहीं है। समर्थ शादी के बाद ट्विशा को महीने के खर्च के लिए भी पैसे नहीं देता था। जिसके चलते ट्विशा के पिता उसे ऑनलाइन पैसे भेजते थे।

परिजन बोले-समर्थ और गिरिबाला ने फोन नहीं उठाया
ट्विशा के परिजन ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि 12 मई की रात 9:41 बजे ट्विशा अपनी मां से फोन कॉल पर बात कर रही थी। इसी बीच समर्थ कमरे में आया और चिल्लाया… किससे बात कर रही है? इसके बाद फोन कट गया। ट्विशा का फोन बंद हो गया। परिजन का कहना है कि हमने 20 मिनट तक समर्थ और गिरिबाला के मोबाइल पर कॉल किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। रात 10:35 बजे गिरिबाला ने फोन उठाया और कहा कि शी इज नो मोर (वो अब नहीं रही) और इसके बाद कॉल काट दिया।

अब जेल से रिहाई में नहीं होगी देरी, जमानत आदेश के 10 मिनट में बाहर आएंगे आरोपी

जबलपुर.

प्रदेश में यह व्यवस्था यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के तहत लागू की गई है। दावा किया जा रहा है कि कोर्ट से जमानत आदेश जारी होने के बाद 10 मिनट में रिहाई मिल सकेंगी। साथ ही, फैसले या आदेश की प्रमाणित कॉपी फीस जमा करने पर 1 मिनट में वॉट्सएप पर मिल जाएगी।

मध्य प्रदेश की अदालतों की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसके तहत 24 घंटे कोर्ट केस की जानकारी मिल पाएगी। दस्तावेजों के लिए कभी भी किसी भी समय ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रदेश में यह व्यवस्था यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के तहत लागू की गई है। जिसका जबलपुर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शुभारंभ किया। नई व्यवस्था में यह भी दावा किया जा रहा है कि कोर्ट से जमानत आदेश जारी होने के बाद 10 मिनट में रिहाई मिल सकेंगी। साथ ही, फैसले या आदेश की प्रमाणित कॉपी फीस जमा करने पर 1 मिनट में वॉट्सएप पर मिल जाएगी।

डिजिटल सिस्टम पर अपलोड होगी फॉरेंसिक-मेडिकल रिपोर्ट
यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस मॉडल के जरिए एआई आधारित सिस्टम बड़े केसों की समरी खुद तैयार करेगा। इससे जजों व वकीलों को लंबी फाइलें पढ़ने में कम समय लगेगा और सुनवाई तेज हो सकेंगी। डिजिटल सिस्टम पर फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट अपलोड होगी। इससे रिकॉर्ड बदलने या गायब होने की संभावना कम होगी।

फाइल अटकने, दस्तावेज गुम, देरी की समस्या कम होगी
पुलिस, अदालत और जेल के सिस्टम आपस में जुड़ने से फाइल अटकने, दस्तावेज गुम होने व देरी की समस्या कम हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत हर आरोपी की एक यूनिक डिजिटल पहचान होगी। इससे अपराधियों की ट्रैकिंग में आसानी हो जाएगी।

वाग्देवी मूर्ति पर धार सांसद का बड़ा दावा, ब्रिटिश म्यूजियम लौटाने को था तैयार

धार.

ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद धार सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने दावा किया है कि ब्रिटिश संग्रहालय वर्ष 2017-18 में ही प्रतिमा लौटाने पर सहमत हो गया था, लेकिन एक शर्त के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी।

सावित्री ठाकुर ने बताया कि वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के लिए तत्कालीन राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी केंद्र सरकार की ओर से ब्रिटिश म्यूजियम प्रबंधन से चर्चा कर रहे थे। वर्ष 2014 से 2017 के बीच सुब्रमण्यम स्वामी ने चार बार भोजशाला का दौरा भी किया था। सावित्री ठाकुर का कहना है कि वर्ष 2017-18 में ब्रिटिश म्यूजियम ने शर्त रखी थी कि वाग्देवी की प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाए, जहां पर वह पहले स्थापित थी। उस समय मामला हाई कोर्ट में लंबित होने के कारण यह शर्त पूरी नहीं हो सकी।

हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद प्रतिमा को भोजशाला में पुनर्स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वह स्वयं इस संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा करेंगी। बहुचर्चित भोजशाला परिसर में अलग भावनात्मक, धार्मिक और ऐतिहासिक वातावरण है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानते हुए शुक्रवार को दिए महत्वपूर्ण फैसले के बाद श्रद्धालुओं का यहां पहुंचना जारी है। श्रद्धालु निर्धारित शुल्क (एक रुपया प्रति व्यक्ति) देकर परिसर में प्रवेश कर मां वाग्देवी की प्रतिमा के स्थान पर पहुंचकर श्रद्धा, आस्था और भावुकता के साथ नमन कर रहे हैं।

लगता है जैसे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हो गया हो
मंदिर पक्ष में आए फैसले के बाद भोजशाला मुक्ति आंदोलन से जुड़े बुजुर्ग कार्यकर्ताओं और हिंदू समाज के वरिष्ठ लोगों की आंखों में संतोष, भावुकता और वर्षों के संघर्ष के बाद विजय की खुशी एक साथ दिखाई दी। 90 वर्षीय हिंदू नेता विमल गोधा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के कई दशक भोजशाला मुक्ति आंदोलन को समर्पित किए हैं। उन्होंने वह दौर भी देखा है, जब भोजशाला की बात उठाना ही संघर्ष माना जाता था। अब लगता है जैसे जीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हो गया हो।

आंदोलन से जुड़े रहे 75 वर्षीय सुरेशचंद्र भंडारी ने कहा कि यह आंदोलन सांस्कृतिक अस्मिता और इतिहास को बचाने की लड़ाई भी था। शुरुआती दौर में बहुत कम लोग खुलकर आंदोलन के साथ खड़े होते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह जन आस्था का आंदोलन बन गया। अब ऐसा लग रहा है जैसे संघर्ष की हर पीड़ा सार्थक हो गई।

खरीदी केंद्र पर ताला देख फूटा किसानों का गुस्सा, NH-146 पर 3 किमी लंबा जाम

विदिशा.

विदिशा जिले के उपार्जन केंद्रों पर जारी कुप्रबंधन और पिछले पांच दिनों से बने बारदाने के गंभीर संकट के कारण शनिवार को किसानों के सब्र का बांध टूट गया। नेशनल हाईवे-146 स्थित धतुरिया के आदित्य वेयरहाउस खरीदी केंद्र पर जब किसानों को ताला लटका मिला, तो आक्रोशित 500 से अधिक किसानों ने नेशनल हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रालियां आड़ी खड़ी कर चक्काजाम कर दिया।

हालात इस कदर बिगड़ गए कि फंसे हुए दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन को बुलडोजर बुलाना पड़ा, जिसने सड़क किनारे मिट्टी डालकर अस्थाई रास्ता बनाया, तब जाकर बाइक सवार वहां से निकल सके।

भीषण गर्मी में थमे पहिए, 3 किलोमीटर तक लगी गाड़ियां
चक्काजाम के कारण नेशनल हाईवे के दोनों ओर करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दोपहर के समय पारा 40 डिग्री के पार था, और इस भीषण गर्मी के बीच एक घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस, यात्री बसें और सैकड़ों राहगीर फंसे रहे। छोटे बच्चों और मरीजों के लिए यह एक घंटा बेहद प्रताड़ना भरा रहा।

70 KM दूर से आए किसान बोले- “रात-दिन भूखे-प्यासे दे रहे पहरा”
इस केंद्र पर अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए किसानों को भीषण धूप में प्रताड़ित होना पड़ रहा है।
राकेश चौकसे (धनियाखेड़ी): “हम 11 मई की सुबह ही ट्रॉली लेकर आ गए थे। 5 दिन बीत गए पर तौल नहीं हुई। अब खुले आसमान के नीचे फसल बचाएं या खुद को।”

विशाल ठाकुर (कछुआ बरखेड़ा): “रात-दिन ट्रॉली के पास ही भूखे-प्यासे पहरा देना पड़ रहा है। पानी तक की सही व्यवस्था नहीं है।”

किसान अवतार सिंह और नीलेश अहिरवार ने बताया कि बारदाना, हम्माल और कांटों की कमी के कारण तौल पहले ही कछुआ गति से चल रही थी, और शनिवार को प्रबंधन ने हाथ खड़े करते हुए केंद्र पर ताला ही जड़ दिया।

बारदाना आने पर ही खोला जाम
समिति प्रबंधकों ने अपनी लाचारी जताते हुए कहा कि जिला स्तर से बार-बार मांग के बावजूद पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। चक्काजाम की खबर मिलते ही एसडीएम क्षितिज शर्मा और तहसीलदार अजय पाठक पुलिस बल के साथ पहुंचे। पहले तो किसान सिर्फ कागजी आश्वासन पर हटने को तैयार नहीं हुए। जब प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही बारदाने से भरी गाड़ी मंगवाई, तब जाकर किसानों ने हाईवे खाली किया।

विपक्ष का आरोप
इस पर विपक्ष और किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विनीत दांगी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह पूरी तरह से प्रशासनिक कुप्रबंधन है। जब किसान पांच दिन से गुहार लगा रहे थे, तब कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन जैसे ही चक्काजाम हुआ, एक घंटे के भीतर बारदाने की गाड़ी आ गई। इससे साफ है कि जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही थी।”

तुलाई शुरू करवा दी है –
धतुरिया केंद्र पर बारदाने की कमी और तौल बंद होने की शिकायत मिलते ही हम पुलिस बल के साथ पहुंचे थे। किसानों को तुरंत बारदाना उपलब्ध कराकर तुलाई शुरू करवा दी गई है। सभी केंद्रों की व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है।
– क्षितिज शर्मा, एसडीएम, विदिशा

मध्यप्रदेश के जंगलों में 1000 साल पुराने पदचिन्ह, पुरातत्व विभाग की जांच जारी

रायसेन
 
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के जंगलों में पुरातत्वविदों को एक बेहद प्राचीन और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। रायसेन के जामगढ़ गांव में पथरीले रास्तों के बीच करीब 800 मीटर के दायरे में फैले पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन पदचिन्हों (पैरों के निशान) की खोज की गई है।

ये पदचिन्ह किसी महान संत के हो सकते हैं

इसके साथ ही वहां शुरुआती ‘नागरी लिपि’ में लिखा एक शिलालेख भी मिला है, जोकरीब 10वीं-11वीं शताब्दी (परमार काल) का माना जा रहा है। इतिहासकारों का मानना है कि पत्थरों पर बने ये कदम किसी महान संत या जैन मुनि के हो सकते हैं, जो एक हजार साल पहले इस क्षेत्र से गुजरे थे।

 

श्योपुर में बड़ा हादसा: मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी, 40 घायल, 6 जिंदगी की जंग लड़ रहे

श्योपुर.

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से एक बड़े हादसे की खबर आ रही है। यहां आवदा थाना इलाके के भोजका गांव के पास तेंदूपत्ता तोड़कर लौट रहे मजदूरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में ट्रॉली में सवार करीब 40 मजदूर घायल हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि सभी मजदूर काम खत्म करके वापस लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां 6 मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

इसके पहले भी जिले के विजयपुर क्षेत्र में शादी में भात मांगन जा रहे एक ट्रैक्टर पलटने से चार महिलाओं की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये।सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विजयपुर में भर्ती कराया गया है। हादसे मैं गंभीर रूप से घायल हुए छह लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर कर दिया गया। गुर्जर समाज के महिला पुरुष ट्रैक्टर ट्राली में सवार होकर घूघस से झारबड़ौदा भात मांगने जा रहे थे, तभी खितरपाल एमएस रोड इंडेन गैस एजेंसी के पास तेज रफ्तार के कारण ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गए, जिससे ट्रॉली में सवार चार महिलाओं की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

इस घटना के बाद जहां विवाह की खुशियां मातम में बदल गई, वहीं पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल निर्मित हो गया है। घटनाक्रम की सूचना मिलने के बाद पूर्व वनमंत्री रामनिवास रावत, एसडीएम अभिषेक मिश्रा और टीआई राजन गुर्जर सहित पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मरीजों को कर के लिए अस्पताल भर्ती करने में मदद की।

नीमच में शव रखकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, 4 घंटे तक सड़क जाम

 मनासा/महागढ़ (नीमच)

महागढ़ के एक ग्रामीण की मौत के बाद आक्रोशित भीड़ व स्वजनों ने नगर के मनासा नाके पर शव रखकर जाम कर दिया। लगभग 4 घंटे से अधिक चले जाम के दौरान स्वजनों और भीड़ ने दूसरे पक्ष के लोगों पर ग्रामीण की हत्या के आरोप लगाए हैं। साथ ही पूर्व की शिकायत पर पुलिस द्वार कार्रवाई में अनदेखी करने का दावा भी किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती है तो ग्रामीण की जान नहीं जाती। एसडीएम के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। एसडीएम ने ग्रामीण के स्वजनों को आर्थिक सहायता देने का भरोसा भी दिया है।

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, आहत PHD छात्रा ने फांसी लगाकर दी जान

दतिया

शादी का वादा कर मुकर गए प्रेमी और उसकी दो बहनों की कथित प्रताड़ना से तंग आकर एक युवती ने अपने घर में ही फांसी लगाकर जान दे दी। मामला तब गरमाया जब मृतका के शव के पास पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसमें उसने अपने साथ हुई पूरी घटना का आरोपियों के नाम सहित जिक्र किया है। मामला गोराघाट थाना क्षेत्र के ग्राम पचोरखर सुनारी फैक्ट्री का है। मृतका ग्वालियर में पीएचडी की छात्रा थी।

घटना के बारे में परिजन ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार शाम करीब छह बजे युवती घर में अपने कमरे से ऊपर छोटे भाई के कमरे में गई और दुपट्टे से फांसी लगा ली। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिवार के लोग कमरे में पहुंचे तो वह फंदे पर लटकी मिली। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पीएम के लिए भेजा। शनिवार दोपहर पीएम के बाद शव परिजन को सौंप दिया गया।

विदिशा में खरीदी केंद्र पर ताला देख भड़के किसान, NH-146 पर 3 KM लंबा जाम

विदिशा

 विदिशा जिले के उपार्जन केंद्रों पर जारी कुप्रबंधन और पिछले पांच दिनों से बने बारदाने के गंभीर संकट के कारण शनिवार को किसानों के सब्र का बांध टूट गया।

नेशनल हाईवे-146 स्थित धतुरिया के आदित्य वेयरहाउस खरीदी केंद्र पर जब किसानों को ताला लटका मिला, तो आक्रोशित 500 से अधिक किसानों ने नेशनल हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रालियां आड़ी खड़ी कर चक्काजाम कर दिया।

हालात इस कदर बिगड़ गए कि फंसे हुए दोपहिया वाहनों को निकालने के लिए प्रशासन को बुलडोजर बुलाना पड़ा, जिसने सड़क किनारे मिट्टी डालकर अस्थाई रास्ता बनाया, तब जाकर बाइक सवार वहां से निकल सके।
भीषण गर्मी में थमे पहिए, 3 किलोमीटर तक लगी गाड़ियां

चक्काजाम के कारण नेशनल हाईवे के दोनों ओर करीब तीन किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दोपहर के समय पारा 40 डिग्री के पार था, और इस भीषण गर्मी के बीच एक घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस, यात्री बसें और सैकड़ों राहगीर फंसे रहे। छोटे बच्चों और मरीजों के लिए यह एक घंटा बेहद प्रताड़ना भरा रहा।

70 KM दूर से आए किसान बोले- “रात-दिन भूखे-प्यासे दे रहे पहरा”

इस केंद्र पर अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए किसानों को भीषण धूप में प्रताड़ित होना पड़ रहा है।

राकेश चौकसे (धनियाखेड़ी): “हम 11 मई की सुबह ही ट्रॉली लेकर आ गए थे। 5 दिन बीत गए पर तौल नहीं हुई। अब खुले आसमान के नीचे फसल बचाएं या खुद को।”

विशाल ठाकुर (कछुआ बरखेड़ा): “रात-दिन ट्रॉली के पास ही भूखे-प्यासे पहरा देना पड़ रहा है। पानी तक की सही व्यवस्था नहीं है।”

किसान अवतार सिंह और नीलेश अहिरवार ने बताया कि बारदाना, हम्माल और कांटों की कमी के कारण तौल पहले ही कछुआ गति से चल रही थी, और शनिवार को प्रबंधन ने हाथ खड़े करते हुए केंद्र पर ताला ही जड़ दिया।

 

मध्यप्रदेश में बड़ा एक्शन: 5 हजार से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस कैंसिल, 98 हजार चालान

भोपाल

मध्यप्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि 5 हजार से ज्यादा लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस कैंसिल कर दिए गए हैं। प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरई) द्वारा सड़क सुरक्षा अभियान के तहत प्रदेशभर में 26 अप्रेल से लेकर 10 मई 2026 तक 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान ट्रैफिक पुलिस द्वारा रेकॉर्ड तोड़ चालानी कार्रवाई की गई है।

पूरे प्रदेश में हेलमेट नहीं पहनने वाले दो पहिया वाहन चालकों के 98 हजार चालानी कार्रवाई की गई है। जिससे 2.87 करोड़ से अधिक की रकम वसूली गई है। अभियान के अंतर्गत ट्रैफिक पुलिस ने चालान काटने के साथ नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में सख्ती दिखाई है। इसमें करीब 5253 ड्राइविंग लाइसेंसों को निरस्त भी कर दिया गया है।

हेलमेट पर की गई थी सख्ती
बीते दिनों पहले ही प्रदेश के कई बड़े जिलों में हेलमेट को लेकर कड़ी निगरानी की गई। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सबित कई जिलों में हेलमेट लगाए बिना दो पहिया वाहन चलाने वालों की निगरानी के लिए करीब 20 टीम तैयार की गई थी। यह टीम शहर के किसी भी रास्ते पर अचानक चैकिंग कर रही थी। वाहन चालकों से विवाद की स्थिति नहीं बने इसलिए चैकिंग टीम बॉडी वार्न कैमरे के साथ तैनात थी। इस दौरान भी कई लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस नियम तोडऩे की वजह से जब्त कर उसे निलंबित कराया गया।

सीटबेल्ट-हेलमेट की अनदेखी से मौतें
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक की मौत हेलमेट न पहनने की वजह सड़क दुर्घटना में 75 प्रतिशत लोगों से हुई। साल 2024 में प्रदेश में 55,711 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 16,831 लोगों की मौत हुई। जिसमें सीटबेल्ड और हेलमेट नहीं लगाना मौतों का सबसे बड़ा कारण निकलकर सामने आया है।

वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल ठप
वहीं इंदौर में परिवहन विभाग द्वारा वाहन और सारथी पोर्टल से वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंस के काम किए जाते हैं, लेकिन 6 दिन से दोनों पोर्टल ठप पड़े है। वाहनों के रजिस्ट्रेशन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस के काम नहीं हो रहे हैं। डीलरों को 7 दिन बाद पेनल्टी का फटका लगने का डर सता रहा है।

रजिस्ट्रेशन, रिन्यूअल, ट्रांसफर, परमिट, फाइनेंस हटाना आदि के आवेदन होने के साथ वाहनों के सभी प्रकार के काम होते हैं। इसी तरह सारथी पोर्टल से लर्निंग लाइसेंस, पक्का लाइसेंस, रिन्यूअल, डुप्लीकेट की प्रक्रिया होती है, लेकिन काम नहीं होने से वाहन मालिक परेशान है। बताया जाता है कि यह समस्या पूरे प्रदेश में है। पोर्टल का सर्वर बदलने
का काम चल रहा है, इसलिए ऐसी समस्या आ रही है।

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