सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू, लेकिन GRP में सैकड़ों पद खाली; करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल

उज्जैन 
 वर्ष 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ महापर्व की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू हो चुकी हैं, लेकिन रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु रेल मार्ग से उज्जैन पहुंचते हैं, ऐसे में रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

इसी बीच सामने आए आंकड़े बताते हैं कि जीआरपी (गवर्मेंट रेलवे पुलिस) में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, जिससे सुरक्षा तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में रेलवे पुलिस के कुल स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अभी भी रिक्त है। दूसरी ओर विभाग का दावा है कि तकनीक और अतिरिक्त बल के जरिए इस कमी को पूरा किया जाएगा।

रेलवे पुलिस में पदों की स्थिति

इकाई- स्वीकृत पद- उपलब्ध कर्मचारी- रिक्त पद

भोपाल जीआरपी- 951- 328- 623

इंदौर जीआरपी- 785- 460- 325

जबलपुर जीआरपी- 724- 467- 257

कुल-2460- 1255- 1205

भोपाल ईकाई में सबसे अधिक कमी
सबसे अधिक कमी भोपाल इकाई में दर्ज की गई है। नेतृत्व स्तर पर भी कमी। रेलवे सुरक्षा केवल जवानों के भरोसे नहीं चलती, बल्कि अधिकारी स्तर की मौजूदगी भी जरूरी होती है। लेकिन उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे) स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है।

पद- स्वीकृत- उपलब्ध -रिक्त

उप पुलिस अधीक्षक (रेलवे- 12-6-6)
रिक्त स्थान

भोपाल इकाई – बीना, ग्वालियर

इंदौर इकाई – रतलाम, उज्जैन

जबलपुर इकाई- जबलपुर, रीवा

उज्जैन में डिप्टी एसपी स्तर का पद खाली होना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सिंहस्थ के दौरान रेलवे संचालन और सुरक्षा का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।

सिंहस्थ को लेकर क्या तैयारी?

    रेलवे स्टेशन और प्लेटफार्म पर सीसीटीवी आधारित निगरानी
    कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम
    डिजिटल संचार नेटवर्क
    भीड़ विश्लेषण तकनीक
    रनिंग ट्रेनों में विशेष निगरानी
    खोया-पाया और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था लागू की जाएगी

75 हजार अतिरिक्त बल की मांग
विभाग ने सिंहस्थ के लिए करीब 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग भी की है। इसमें सिविल पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा इकाइयों की तैनाती प्रस्तावित है। साथ ही वर्तमान कर्मचारियों को भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों को भरने या वैकल्पिक तैनाती पर काम किया जा रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि जब तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, तब क्या 2028 से पहले खाली पद भरकर मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सकेगा या फिर सिंहस्थ जैसी विशाल व्यवस्था को सीमित मानव बल और तकनीक के भरोसे संभालना पड़ेगा।

ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा- कोई तैयारी नहीं

ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा कि भोपाल में बहुत जरूरी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ था। जिसमें DGP MP, DG RPF, DRM भोपाल, DRM रतलाम, ADRM झांसी के अलावा RPF के चार IG  IG RPF भोपाल, IG RPF मुंबई, IG RPF प्रयागराज, IG RPF कोलकाता उपस्थित थे। कमिश्न उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, ADG-IG उज्जैन और पुलिस अधीक्षक DIG भी मौजूद थें। DGP रेलवे उत्तर प्रदेश ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव बताए।

राजा बाबू सिंह ने कहा हमारी जो GRP इकाई इंदौर है, जिस पर सिंहस्थ 2028 का जिम्मा होगा उसने कोई होमवर्क नहीं किया है। वहां, पुलिस अधीक्षक, 2 DSP उज्जैन और रतलाम के पद रिक्त हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर जो अस्थायी थाने और चौकी या मेला क्षेत्र बनेंगे उसके लिए अभी से अतिरिक्त बल मिल जाना चाहिए, जो अभी तक नहीं मिला है। 

प्रयागराज महाकुंभ से सीख, इस बार ज्यादा फोकस क्राउड मैनेजमेंट पर

बैठक में  पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ और जिला प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या पिछले आयोजनों की तुलना में अधिक हो सकती है।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख स्टेशनों और मेला क्षेत्र में अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएं ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदलने से बचने के निर्देश भी दिए गए, क्योंकि इससे अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

AI और CCTV से होगी निगरानी

सिंहस्थ 2028 में पहली बार बड़े स्तर पर AI आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, होल्डिंग एरिया, पार्किंग और मेला क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC से जोड़ा जाएगा।

यह कंट्रोल सेंटर रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा पब्लिक एड्रेस सिस्टम, डिजिटल साइन बोर्ड और कलर कोडिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से दिशा-निर्देश मिल सकें।

रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति

बैठक में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही छोटी दूरी की मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल इंजन वाली ट्रेनें और दिशा आधारित प्लेटफॉर्म व्यवस्था लागू की जाएगी। लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों का पहले से डायवर्जन भी तय किया जाएगा ताकि मुख्य रूट पर दबाव कम किया जा सके।

रेलवे द्वारा उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल, ओंकारेश्वर रोड और सीहोर के स्टेशनों पर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां नए फुटओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट स्टेशन और साइडिंग लाइन विकसित की जाएंगी।

घाटों का विस्तार और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार

उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि सिंहस्थ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित है। मेले के लिए लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घाटों का विस्तार करीब 37 किलोमीटर तक किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा मिल सके।

वैज्ञानिक तरीके से यह आकलन किया जा रहा है कि एक निश्चित समय में एक किलोमीटर घाट पर कितने श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकते हैं। प्रशासन ने यह भी माना है कि इंदौर-देवास मार्ग से सबसे ज्यादा यातायात रहेगा। इसी को देखते हुए सड़क और पार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

बैठक में जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। सभी स्टेशनों और भीड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाएगा।

सोनाली मिश्रा ने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों में आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए रेलवे जोनों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण जरूरी है।

आपात स्थिति से निपटने की भी तैयारी

सिंहस्थ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम, एनडीआरएफ और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती की जाएगी। सभी प्रमुख स्थानों पर बैकअप पावर सिस्टम और आपातकालीन सहायता केंद्र बनाए जाएंगे।

अधिकारियों ने कहा कि इस बार तकनीक, बेहतर योजना और विभिन्न विभागों के समन्वय के जरिए सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां तेज
सिंहस्थ 2028 को लेकर जीआरपी ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सीमित स्टाफ के बावजूद सीसीटीवी निगरानी, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, डिजिटल संचार नेटवर्क, भीड़ विश्लेषण तकनीक और त्वरित सूचना प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही 75 हजार अतिरिक्त बल की मांग और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाएगी। एडीजी जीआरपी राजाबाबू।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुकरू में कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं से किया आत्मीय संवाद

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के हिल स्टेशन कुकरू में शनिवार को कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने समूह द्वारा तैयार किए गया मावा और रबड़ी का स्वाद लिया तथा महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं से समूह की गतिविधियों, आय के स्रोत तथा शासकीय योजनाओं से प्राप्त सहयोग की जानकारी ली और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे उनके प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुकान में उपलब्ध मावा बनाने की प्रोसेस को देखा और महिलाओं से आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे कार्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिलाओं से लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली राशि के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि योजना की राशि नियमित रूप से प्राप्त हो रही है या नहीं। महिलाओं ने योजना का लाभ मिलने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह कुकरू की अध्यक्ष श्रीमती शोभा गायने ने बताया कि समूह को विभिन्न योजनाओं में सीसीएल से 3 लाख रुपये, सीआईएफ से 1 लाख रुपये, आरएफ से 11 हजार रुपये तथा पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि समूह में 11 सदस्य कार्यरत हैं। आजीविका मिशन से मावा बनाने की स्वचलित मशीन क्रय की गई। इससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपए की मासिक आय प्राप्त हो रही है।

समूह की सदस्य महिलाओं ने बताया कि वे पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मावा, रबड़ी एवं श्रीखंड निर्माण के साथ-साथ कृषि कार्य भी कर रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से समूह की महिलाओं को लगभग 15 से 18 हजार की मासिक आय प्राप्त हो रही है। जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसद श्री दुर्गादास उइके, बैतूल विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मप्र जन अभियान परिषद उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर, कमिश्नर श्री श्रीकांत बनोठ, आईजी श्री मिथलेश कुमार शुक्ल, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र जैन उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल के हिल स्टेशन कुकरू में देखा सनसेट पॉइंट

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल प्रवास के दौरान जिले के सुप्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू का भ्रमण किया। उन्होंने कुकरू स्थित सिपना सनसेट पॉइंट पर पहुंचकर सूर्यास्त के मनोहारी एवं अलौकिक दृश्य के साथ क्षेत्र के अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य को निहारा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुकरू की पर्वत श्रृंखलाओं, हरित वनों और प्राकृतिक छटा से अभिभूत हुए। उन्होंने कहा कि कुकरू प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित होने की अपार संभावनाएं रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक सौन्दर्य से समृद्ध कुकरू न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेगा।

 

भोपाल में वर्ष 2027 में होगी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लघु उद्योगों को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश सबसे आगे है। प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी एमएसएमई सेक्टर में भारत को ग्लोबल चैम्पियन बना रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय क्षेत्र दूसरों के जीवन को सुखद बनाते हैं। उद्यमी कर्म को पूजा और श्रम को साधना मानते हैं। आने वाले समय में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी और सुख का सूरज निकलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में आगामी वर्ष 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जाएगा। समिट में प्रधानमंत्रीमोदी को आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को रवीन्द्र भवन में “विश्व एमएसएमई दिवस” पर हुई “सशक्त उद्यमी : समृद्ध मध्यप्रदेश” समिट को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न उत्पादों, कला शिल्पों की विशाल प्रदर्शनी का अवलोकन किया। यह प्रदर्शनी रविवार 28 जून को भी सभी के लिए खुली रहेगी। शासन द्वारा कपास पर मंडी शुल्क आधा करने सहित उद्यमियों और किसानों के हित में अनेक निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बुरहानपुर सहित विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा अभिनंदन किया गया। समिट में लगभग 2000 उद्यमियों, निवेशकों, स्व-सहायता समूहों के सदस्यों सहित नीति निर्माताओं ने भागीदारी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में लगभग 7 करोड़ एमएसएमई इकाइयां हैं, जिसमें 25 लाख मध्यप्रदेश में हैं। प्रदेश की इकाइयां लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही है। जीडीपी में 31 प्रतिशत की हिस्सेदारी एमएसएमई सेक्टर की है। निर्यात में 49 प्रतिशत और विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35 प्रतिशत है। इस तरह एमएसएमई सेक्टर अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में कार्य कर रहा है। मध्यप्रदेश का एमएमसएमई सेक्टर जनकल्याण का माध्यम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में रिमोट से एमएसएमई इकाइयों के साथ ही वृहद उद्योगों के लिए भी राशि जारी की। एमएसएमई इकाइयों को 225 करोड़ 19 लाख की राशि और विभिन्न स्टार्ट-अप के लिए लगभग 39 लाख की राशि प्रदान की गई। बड़े उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 1274 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई। इस तरह कुल 1500 करोड़ रुपए उद्योग क्षेत्र को प्रदान किए गए। मध्यप्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जहां मई 2026 तक की समस्त देनदारी का भुगतान उद्यमियों को निवेश सहायता के रूप में किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों के विकास में मध्यप्रदेश आगे है। राज्य सरकार द्वारा कपास के मंडी शुल्क को आधा करने के निर्णय का लाभ किसानों और उद्यमियों को प्राप्त होगा। एमएसएमई दिवस पर एमओयू और उद्योगों के लिए भूखंडों के आवंटन का कार्य हुआ है। राज्य में प्रत्येक जगह उद्योग लगाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में आने वाले समय में मध्यप्रदेश देश के सबसे इंडस्ट्री प्रोमोटिंग स्टेट के रूप में पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कनाडा, यूके, अमेरिका, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रदेश में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मेडिकल डिवाइस आदि क्षेत्रों में निवेश आ रहा है। भोपाल में वर्ष 2025 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद 9 हजार 300 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतरा हैं।

नई नीतियां और नियम बने लाभकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत 2 वर्ष में बनाई गई 18 नई नीतियों और नए नियमों का लाभ उद्योगों को मिल रहा है। प्रदेश में ओडीओपी क्षेत्र में भी प्रगति है। वर्ष 2025- 26 में मध्यप्रदेश को 20 जीआई टैग प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2027 युवा वर्ष की थीम पर मनाया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स का जिम्मा माताओं-बहनों के हाथों में है। गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 67 प्रतिशत बढ़ा है। राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 क्लस्टर्स का निर्माण किया है और 14 नए क्लस्टर्स पर काम चल रहा है। राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य सरकार सभी की कठिनाइयों को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, शुचिता और पारदर्शी निर्णयों के बलबूते आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे। कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। किसानों को ऋण चुकाने के लिए नई सौगात दी गई है। किसान जिस तारीख को ऋण लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में ऋण भर सकेंगे। इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है। इसके दृष्टिगत वर्ष 2024 को गरीब कल्याण और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया।

मध्यप्रदेश औद्योगिक सुधारों को लागू करने में आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा तय 23 औद्योगिक सुधारों को शत-प्रतिशत लागू करने में मध्यप्रदेश टॉप अचीवर है। औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार ने दृढ़ संकल्प लिया है। आज प्रदेश के 13 जिलों में 14 औद्योगिक केंद्र और भवनों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया गया है। इसी तरह 7 नए औद्योगिक क्षेत्र इंडस्ट्री सेक्टर को नया आकार प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में भारत एमएसएमई सेक्टर के अतिरिक्त कई सेक्टर्स में आगे बढ़ रहा है। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, क्लस्टर्स स्कीम जैसी अनेक योजनाएं शामिल हैं। पूंजी, प्रशिक्षण और बाजार से उद्यमी निरंतर जुड़ रहे हैं।

उद्यमियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले से प्राप्त होने वाले राजस्व के मॉडल तैयार करने का कार्य करेगी, जिससे जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए समृद्धि का पूरा लाभ मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के उद्यमियों से संवाद के दौरान यह बात कही। विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस के नेतृत्व में मध्यांचल कॉटन एंड जिंजर ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कपास पर मंडी शुल्क आधा करने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का गजमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में लघु उद्योग निगम के अध्यक्षसत्येंद्र भूषण सिंह, उद्योग आयुक्तदिलीप कुमार, सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

एमएसएमई मंत्रीचेतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि प्रदेश में आज उद्योगों के विकास का नया वातावरण बना है और यह सब संभव हुआ है गतिशील और प्रबल इच्छा शक्ति के धनी नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से। पिछले 2 वर्षों में ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग के बजट को 1100 करोड़ से 3100 करोड़ तक पहुंचा दिया है। नई एमएसएमई और स्टार्ट-अप पॉलिसी से उद्यमियों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं के साथ लगभग 1100 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन मिला है। मंत्रीकाश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के परिश्रम की पराकाष्ठा का ही परिणाम है कि विभाग ने पिछले 2 सालों में 1200 औद्योगिक भूखंड दिए हैं और आगामी वर्षों में 3000 भूखंड उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रदेश में 34 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। प्रदेश में किसान,कृषि और उद्योग क्षेत्र के विकास का अभियान इसी तरह जारी रहेगा।

मुख्य सचिवअनुराग जैन ने कहा कि सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों की महत्ता पूरे विश्व ने पहचानी है। मध्यप्रदेश भी एमएसएमई के क्षेत्र में पीछे नहीं है। प्रदेश में होने वाले मैन्युफैक्चरिंग में एमएसएमई का योगदान 45 प्रतिशत और निर्यात 49 प्रतिशत होना ऐतिहासिक है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश ने रोजगार देने में महत्वपूर्ण काम किया है और हम एक साल में देश में 14 से 11 वे स्थान पर पहुंच गए हैं। मुख्य सचिवजैन ने कहा कि “इज ऑफ डूइंग बिजनेस” के तहत नई पॉलिसी बनाई गई है, सैकड़ों कानून खत्म किए गये हैं। लगभग 100 कानूनों में जेल भेजने जैसी सजा के स्थान पर अर्थ दंड लगाने का प्रावधान किया गया है। सब मिलाकर उद्यमियों के लिये मध्यप्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण मौजूद है। इसके साथ ही आज बैंक से वित्तीय संसाधन भी आसानी से उपलब्ध करवाये जा रहे है। यही वजह है कि कुल 21 प्रतिशत वित्त में से एक लाख 45 हजार करोड़ यानि 11 प्रतिशत एमएसएमई को उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने के लिए आगे आकर नेतृत्व करने का आव्हान किया।

उद्यमियों ने कहा – मध्यप्रदेश उद्योगों को बढ़ाने वाला राज्य

समिट में उद्यमी डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश सिर्फ उद्योग स्थापित करने नहीं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ाने वाला राज्य है। किसी भी उद्योग की स्थापना के दौरान अनेक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उद्योग अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियां बहुत पारदर्शी हैं। राज्य सरकार की ओर से हमें मिला सहयोग सफलता की पूंजी है। हमारी कंपनी राज्य में 200 करोड़ का निवेश कर चुकी है। आगामी दो वर्षों में मेडिसिन रिसर्च के लिए हमारी कंपनी राज्य में 50 करोड़ का नया निवेश करेगी। मध्यप्रदेश तेजी से फॉर्मा सेक्टर में अनुसंधान का हब बन रहा है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्षराजेश मिश्रा ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार ने प्रत्येक विभाग में निवेश प्रोत्साहन सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की है। मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में सरकार ने 31 मई 2026 तक की सभी देनदारियां क्लियर की हैं। निश्चित ही यह उद्यमियों और निवेशकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति और निवेशराघवेंद्र सिंह ने कहा कि गत ढाई वर्ष में सभी तरह के उद्योगों को 11 हजार 500 करोड़ की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गयी है। मध्यप्रदेश में नए उद्योगों में भरपूर निवेश हो रहा है। ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट : 2025 में 30 लाख 77 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत धरातल पर आ गाए हैं। मध्यप्रदेश की एमएसएमई ने अपने उत्पादों की क्वालिटी को बेहतर किया है और 19 हजार प्रमाणन इसका उदाहरण है। प्रमुख सचिवसिंह ने प्रदेश में बदलते उद्योग परिवेश के बारे में भी जानकारी दी। कैंसर के उपचार की दवा के निर्माण और रिसर्च में संलग्न फार्मा कंपनी भी मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों के सहयोग से आज दुनिया के अनेक देशों तक पहुंच गई है।

समिट की प्रमुख गतिविधियां

  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 750 से अधिक इकाइयों को प्रोत्सान राशि वितरित की।
  •          मध्यप्रदेश के सफल उद्यमियों की विकास गाथा पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 137 स्टार्ट-अप को 1.5 करोड़ की सहायता राशि अंतरित की।
  •          मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वृहद उद्योगों को 1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।
  •          मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटन आशय पत्र एवं लोन स्वीकृति-पत्र वितरित किए। इनमें विदिशा, मंदसौर की तीन-तीन इकाइयां शामिल हैं।
  •          प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमएसएमई विभाग के बीच स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू किया गया।
  •          मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में कटनी, खरगोन और रायसेन जिले के 4 हितग्राहियों को एक करोड़ 57 लाख रुपए की ऋण राशि प्रदान की गई।
  •          मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत 30 लोगों को रोजगार देने वाली इकाई को सहायता राशि प्रदान की गई।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिल स्टेशन कुकरू में लगाई रात्रि चौपाल, ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बैतूल के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों से सहज भाव से संवाद कर उनकी समस्याओं के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के कामों में यदि किसी भी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार से परेशान किया जाता है, तो वे निसंकोच होकर उन्हें बतायें। रात्रि चौपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मिलनसारिता और आत्मीयता से ग्रामीणों ने अभिभूत होकर मुख्यमंत्री के समक्ष खुलकर अपनी बातें रखीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहजता और प्रेम से प्रभावित होकर रात्रि चौपाल में ग्रामीणों ने स्थानीय कोरकू भाषा में पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” भजन सुनाकर सभी का मन मोह लिया। रात्रि चौपाल में गंदलो सुसुम कोरकू दल के 21 सदस्यीय तथा होलेरा नृत्य दल के 19 सदस्यीय दल द्वारा पारंपरिक जनजातीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रीमती शिपा शनवारे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधकर भाई के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठकर संवाद किया तथा बच्चों को स्नेहपूर्वक दुलार भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों से विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्चों से बचने तथा सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को भी समाज में हतोत्साहित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रहा है। सरकार के प्रयास हैं कि समृद्ध खेती के साथ-साथ पशुपालन के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिले। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को 25 भैंस अथवा 25 गायों के लिए 40 लाख रुपए तक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 10 लाख रुपए का वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोदो-कुटकी की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर निरंतर की जाएगी। ग्राम कुकरू में पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने तथा पशुशेड निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को महिलाओं ने बताया कि आजीविका मिशन के माध्यम से ग्राम में कृषि सखी, जेंडर सखी, बकरी पालन, भैंस पालन, मुर्गी पालन सहित विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जुड़कर समूह की अनेक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए किसान सम्मान निधि एवं लाड़ली बहना योजना के लाभों की जानकारी ली। उन्होंने किसान सम्मान निधि से वंचित किसानों की ई-केवाईसी शीघ्र कराने के निर्देश प्रशासन को देते हुए कहा कि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 79 लाख से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए तालाब निर्माण कराने के निर्देश प्रशासन को दिए। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने बालिका छात्रावास की स्वीकृति एवं निर्माण, जामूखेड़ी मार्ग तथा बुंदियाखुर्द पुलिया निर्माण के निर्देश भी दिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देशित किया कि स्वयं सहायता समूहों के बड़े समूहों को सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से जोड़कर रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जाएं। समूह की महिलाओं की मांग पर आजीविका भवन तथा कोदो-कुटकी प्रसंस्करण यूनिट स्थापित करने के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास तथा शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग ठकिया गायन की रोजगार संबंधी मांग पर उन्हें ट्राइसिकल उपलब्ध कराने तथा स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री जनजातीय कार्य एवं सांसददुर्गादास उइके, प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायकहेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायकमहेंद्र सिंह चौहान, उपाध्यक्ष जन अभियान परिषदमोहन नागर, संभागायुक्तश्रीकांत बनोठ, आईजीमिथलेश कुमार शुक्ला, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षकवीरेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

 

मैहर बैंड भारत सरकार की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में सम्मिलित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गहरी सांस्कृतिक अभिरुचि और प्रदेश की अनमोल धरोहरों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के दृढ़ संकल्प के फलस्वरूप मध्यप्रदेश की संगीत विरासत को एक और ऐतिहासिक गौरव प्राप्त हुआ है। माँ शारदा की नगरी की धरोहर और विश्वविख्यात ‘मैहर वाद्यवृंद’ (मैहर बैंड) को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की सूची में सम्मिलित कर लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की लोक-संस्कृति और कलाओं को अक्षुण्ण रखने की नीति के अंतर्गत संस्कृति विभाग द्वारा उठाए गए प्रभावी कदमों का ही यह सुखद परिणाम है। अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासनशिव शेखर शुक्ला ने मैहर बैंड के प्रतिभावान कलाकारों एवं शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों में से ‘भगोरिया नृत्य’ और ‘गोंड चित्रकला’ को भी इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सूची में स्थान मिल चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की कला-संस्कृति के प्रति अनुराग के अनुरूप प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग की इस सांस्कृतिक यात्रा में पूर्व में सात ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ भी प्राप्त हो चुके हैं। मैहर बैंड की इस अनूठी संगीत परंपरा को जीवंत रखने और आगामी पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा शासकीय संगीत महाविद्यालय, मैहर के माध्यम से एक ‘गुरुकुल’ की स्थापना भी की जा रही है। इस गुरुकुल पद्धति से प्रशिक्षित होकर युवा कलाकार मैहर बैंड के अनूठे संगीत, रागों और इसकी गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा को और अधिक समृद्ध कर सकेंगे।

‘मैहर बैंड’ का गौरवशाली इतिहास

स्वर और साधना के अद्भुत संगम ‘मैहर बैंड’ का इतिहास बेहद गौरवशाली और अनूठा है। इसकी स्थापना वर्ष 1918 में महान संगीत मनीषी उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब ने मैहर रियासत के तत्कालीन महाराजा बृजनाथ सिंह जूदेव की प्रेरणा से की थी। भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में यह विश्व का पहला ऐसा शास्त्रीय वाद्यवृंद (ऑर्केस्ट्रा) है, जिसने संगीत प्रेमियों को एक नए वितान से परिचित कराया। बीते 108 वर्षों के अपने सुदीर्घ और यशस्वी सफर में इस बैंड ने अपनी मौलिकता और शास्त्रीय गरिमा को जीवंत रखा है। धरोहर के रूप में इसके कलाकारों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस अनमोल वाद्यवृंद की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ संजोकर रखा है। मैहर बैंड की सबसे बड़ी विशेषता इसके दुर्लभ वाद्ययंत्र और उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब द्वारा तैयार की गई विशेष शास्त्रीय बंदिशें हैं। इस वाद्यवृंद में सितार, सरोद, इसराज, वायलिन, चेलो, सितार-बैंजो, हारमोनियम और तबला जैसे पारंपरिक एवं पाश्चात्य वाद्यों का अनूठा मेल है। इनमें सबसे अनोखा और मुख्य आकर्षण ‘नलतरंग’ है। खाँ साहब ने बंदूक की नालियों (बैरल) को काटकर, उन्हें कलात्मक ढंग से स्वरबद्ध कर ‘नलतरंग’ जैसे अद्भुत और मधुर शास्त्रीय वाद्य का आविष्कार किया था। पूरी दुनिया में मैहर बैंड के अलावा यह वाद्य कहीं और नहीं पाया जाता, जो वैश्विक संगीत जगत में कौतूहल और आकर्षण का केंद्र है।

मैहर वाद्यवृंद की राष्ट्रीय ख्याति का शंखनाद वर्ष 1924 में लखनऊ के केसर बाग में आयोजित प्रतिष्ठित ‘भातखंडे समारोह’ से हुआ था, जहाँ इसकी अद्वितीय प्रस्तुति ने समूचे भारतवर्ष को चमत्कृत कर दिया था। तब से लेकर आज तक इस बैंड ने देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित संगीत मंचों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। संगीत और कला के प्रति इसके अमूल्य योगदान को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2016 में इसे सर्वोच्च ‘शिखर सम्मान’ से भी विभूषित किया जा चुका है। वर्तमान में संस्कृति विभाग के संरक्षण में यह वाद्यवृंद भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनवरत बहती रसधारा के रूप में विश्व पटल पर मध्यप्रदेश का मस्तक ऊंचा कर रहा है।

 

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह ने जीता रजत पदक

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के प्रतिभावान खिलाड़ी समरदीप सिंह ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रतियोगिता के चौथे दिन सायंकालीन सत्र में आयोजित पुरुष शॉट पुट स्पर्धा में समरदीप सिंह ने 20.40 मीटर का प्रभावशाली थ्रो करते हुए रजत पदक अर्जित किया।

एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

समरदीप सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन के बल पर एशियाई खेल 2026 के लिए निर्धारित क्वालीफिकेशन मानक भी प्राप्त कर लिया है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने न केवल पदक हासिल किया, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी सुनिश्चित किया। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की सशक्त पहचान

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में समरदीप सिंह का यह प्रदर्शन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं की निरंतर प्रगति और खेल अकादमियों में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है। राष्ट्रीय मंच पर पदक जीतने के साथ एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने समरदीप सिंह को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समरदीप आगामी एशियाई खेलों में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

समरदीप सिंह की यह सफलता प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट सफलता प्राप्त की जा सकती है।

 

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर हुए विशेष सत्र

भोपाल

अंतराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश थीम पर रवींद्र भवन में शनिवार को हुई समिट के दौरान नये बाज़ार, नई उड़ान और पूंजी की व्यवस्था सत्रों मे निवेशको, उद्यमियों और विभिन्न व्यावसायिक तथा बैंकिंग संस्थाओं के बीच सार्थक संवाद हुआ।

एमएसएमई एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए नवीन बाज़ार अवसर

इस सत्र में एमएसएमई के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों, विशेषकर सीमित बाजार पहुंच, पर ध्यान केंद्रित किया गया तथा निर्यात, डिजिटल कॉमर्स, शोध एवं विकास, जोखिम कम करने तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधानों पर विचार-विमर्श किया गया।

सुश्री अंकिता पांडे, सीनियर प्रोजेक्ट कंसल्टेंट एंड यंग एलएलपी (मॉडरेटर) एवं विशेषज्ञों ने संस्थागत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें फियो (FIEO) ने प्रथम बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को दस्तावेजीकरण, बाजार चयन तथा वैश्विक व्यापार गतिकी के संबंध में मार्गदर्शन देकर निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने पर बल दिया। सीएसआईआर-एएमपीआरआई के डॉ. भास्कर ने कच्चे एवं अपशिष्ट पदार्थों को मूल्यवर्धित उत्पादों में परिवर्तित करने में नवाचार तथा सतत प्रक्रियाओं की भूमिका पर बल दिया तथा शोध एवं उद्योग के मध्य सुदृढ़ सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। ओएनडीसी (ONDC) तथा ईसीजीसी (ECGC) के प्रतिनिधियों ने बाजार पहुंच विस्तार हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तथा विशेष रूप से छोटे एवं नवीन निर्यातकों के लिए भुगतान जोखिमों से सुरक्षा हेतु निर्यात्त ऋण बीमा के लाभों को रेखांकित किया। चर्चा में इंडिया पोस्ट के विस्तृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक विश्वसनीय एवं किफायती समाधान के रूप में उजागर किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई डिजिटल उपकरणों, नवाचार, वित्तीय संरक्षण तथा सुदृढ़ सप्लाई चेन सहायता का लाभ उठाकर प्रभावी रूप से अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।

पूंजी तक पहुंच सत्र से एमएसएमई को मिला नया क्षेत्र

नई पीढ़ी के एमएसएमई के लिए वित्त-पोषण सत्र में मॉडरेटर सुश्री ऋचा सिंह, सीनियर मैनेजर, अन्र्स्ट एंड यंग एलएलपी ने तकनीकी सत्र का संचालन किया।विकसित हो रहे वित्त पोषण परिदृश्य पर चर्चा की गई तथा डिजिटल एवं वैकल्पिक वित्त-पोषण माध्यमों के द्वारा ऋण प्राप्ति में आने वाली बाधाओं को कम करने पर बल दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के बावजूद, एमएसएमई को समय पर एवं सुलभ वित प्राप्त करने में कोलैटरल की कमी, अपूर्ण दस्तावेज़ीकरण तथा सीमित क्रेडिट इतिहास जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चर्चा में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया, जिसमें यूपीआई डेटा को नकद प्रवाह तथा साख-योग्यता के आकलन हेतु एक उपयोगी उपकरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बैंकिंग दृष्टिकोण से एमएसएमई द्वारा वित्तीय अनुशासन बनाए रखने, दस्तावेजीकरण में सुधार करने तथा ऋण पात्रता बढ़ाने हेतु सुदृढ साख प्रोफाइल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इनवॉइस डिस्काउंटिंग के माध्यम से कार्यशील पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ट्रेड्स (TReDS) की भूमिका को भी रेखांकित किया गया, जिससे त्वरित नकदी प्रवाह तथा औपचारिक क्रेडिट ट्रेल स्थापित करने में सहायता मिलती है। सत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया कि एमएसएमई को विकास के लिए पूंजी तक पहुंच तथा सतत विस्तार सक्षम बनाने में डिजिटल अंगीकरण, वित्तीय साक्षरता, वैकल्पिक वित्त पोषण तथा सुदृढ़ संस्थागत सहयोग को समाहित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक है। दोनों सत्रों में नव उद्यमियों के प्रश्नों और शंकाओं का समाधान भी किया गया।   

पुलिस प्रशिक्षण शाला उज्जैन में नव आरक्षकों को नशामुक्त समाज निर्माण का दिया गया संदेश

भोपाल 

“नशे से दूरी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।” इसी संदेश के साथ विश्व मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस (International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking) के अवसर पर मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस प्रशिक्षण शाला, उज्जैन में संचालित 6वें नव आरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक श्रीमती मनीषा पाठक सोनी द्वारा किया गया। उन्होंने मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव, नशा मुक्ति के महत्व, पुलिस की सामाजिक जिम्मेदारी तथा समाज में नशा विरोधी जन-जागरूकता अभियान की आवश्यकता के संबंध में जानकारी दी।

कार्यशाला में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), इंदौर के निरीक्षक श्री गौरव जायसवाल ने मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव, अवैध तस्करी की कार्यप्रणाली, नशे की लत से होने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक दुष्परिणाम तथा इससे जुड़े अपराधों के संबंध में बताया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को मादक पदार्थों से संबंधित सूचना देने हेतु संचालित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1933 की जानकारी दी गई तथा नागरिकों से इस हेल्पलाइन का अधिकाधिक उपयोग कर नशे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में युवाओं से अपील की गई कि वे स्वयं नशीले पदार्थों से दूर रहें, अपने साथियों को भी नशे की ओर बढ़ने से रोकें तथा स्वस्थ, सुरक्षित एवं नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यशाला के समापन पर उपस्थित सभी नव आरक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई। उन्होंने स्वयं नशीले पदार्थों से दूर रहने, समाज में नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने तथा युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

 

राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने किया 9.32 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन; जल्द बनेगा सामुदायिक भवन

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को नर्मदापुरम रोड स्थित नट बाबा शिव मंदिर परिसर में 9 लाख 32 हजार रुपए की लागत से बनने वाली बाउंड्री वॉल एवं ‘वैष्णो भवन’ का भूमिपूजन किया। इस गरिमामय अवसर पर राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की कर्मठता और निरंतर परिश्रम के कारण ही गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र होते हैं, जो हमारी मनोकामनाओं को भी पूर्ण करते हैं। ऐसे में आस्था के इन केंद्रों को व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधा संपन्न बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि क्षेत्र की जनता की सुविधाओं का निरंतर ध्यान रखते हुए विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने क्षेत्रीय रहवासियों द्वारा की गई सामुदायिक भवन की मांग को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।

वार्ड 53 में आयोजित इस भूमि-पूजन कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद श्री प्रताप वारे, श्री जितेन्द्र शुक्ला,  शीला पाटीदार और श्री किशोर पटेल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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