रिश्वतखोर पटवारी लोकायुक्त के जाल में फंसा, रंगे हाथ गिरफ्तार

रीवा

लोकायुक्त संभाग रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश एवं डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई।

जानकारी के अनुसार, ग्राम खजुआ कला निवासी कमलेश पटेल ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया कि सीमांकन कार्य में भूमि की सीमा बरकरार रखने के एवज में हल्का पटवारी मनोज पांडे द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी जा रही है। सत्यापन के दौरान आरोपी 10 हजार रुपये पहले ही ले चुका था और शेष 5 हजार रुपये की मांग कर रहा था।

लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को रीवा के राजीव मार्ग निराला नगर में जाल बिछाकर आरोपी पटवारी को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ ट्रैप कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार ने किया। टीम में निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया सहित 12 सदस्यीय दल शामिल रहा।

दो पंचायत सचिव निलंबित, CEO की बड़ी कार्रवाई से विभाग में हड़कंप

ग्वालियर

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जिला पंचायत CEO ने बड़ी कार्रवाई की है। एक साथ दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया। सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर यह कार्रवाई की गई है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कल्याणी के सचिव रामलखन गुर्जर ने स्व. सुरेश जाटव का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के एवज में अवैध राशि मांगने का आरोप लगा है। वहीं, ग्राम पंचायत आरोली के सचिव गौतम सिंह कौरव को लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायत पर निलंबित किया गया है।

सरपंच ने उनके खिलाफ शिकायत की थी। जिला पंचायत CEO सोजान सिंह रावत ने दोनों मामलों में निलंबन आदेश जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई से दोनों ग्राम पंचायत में हड़कंप की स्थिती बनी है।

भोजशाला को अयोध्या मॉडल पर विकसित करने की तैयारी, Mohan Yadav का बड़ा बयान

भोपाल 

लंबे समय से चल रहे धार की भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है वहीं कोर्ट ने इसे वाग्देवी मंदिर माना है. जहां सनातन समुदाय में इस फैसले से खुशी का माहौल है वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस खुशी को दोगुना कर दिया है. हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने एक कहा है कि इस जगह पर अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. राज्य सरकार ने संकेत दे दिया है कि वह पूरे धार क्षेत्र को अयोध्या मॉडल पर विकसित करने की तैयारी में है। 

बता दें कि भोजशाला पर शुक्रवार को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है. ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार मानकर फैसला सुनाया है और भोजशाला को मूल चरित्र से मां सरस्वती का मंदिर माना है. इस फैसला का राज्य सरकार ने खुलकर स्वागत किया है। 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंटरव्यू में कहा है कि राजधानी भोपाल स्थित भोजशाला को अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट से सरकार को बड़ा सहयोग मिला है और अब सरकार भोजशाला को भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। 

उन्होंने कहा कि भोजशाला मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि जैसे अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण के बाद वहां का विकास हुआ, उसी तरह भोजशाला क्षेत्र का भी समग्र विकास किया जाएगा. सीएम मोहन यादव ने साफ कहा कि दोनों पक्ष से बातचीत कर रास्ता निकाला जाएगा और धर्म की आड़ में माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्ती की जाएगी।

 क्या मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी जमीन
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के हर आदेश का पालन होगा. दोनों पक्षों के धर्म गुरुओं से बात करके रास्ता निकालेंगे. अगर मुस्लिम पक्ष मस्जिद बनाने के लिए जमीन चाहेगा तो हम उस पर भी जरूर विचार करेंगे। 

माता वाग्देवी की प्रतिमा को वापस कब कर लाएंगे?
पीएम मोदी अब तक देश की 1200 धरोहर वापल ला चुके हैं. उनसे मिलकर आग्रह करेंगे कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूर्ति के लिए केंद्र स्तर से प्रयास हो. प्रयास करेंगे कि मूर्ति जल्दी मंदिर में स्थापित हो…

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ, श्रद्धालुओं ने किए मां वाग्देवी के दर्शन

धार 
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के बाद शनिवार को यहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर फैसला सुनाए जाने के बाद हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है। फैसले के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। 

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार हुई पूजा
शनिवार सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों के साथ श्रद्धालु भोजशाला परिसर में एकत्र हुए। यहां पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला परिसर में यह पहली पूजा मानी जा रही है।

भोजशाला परिसर में पूजा के दौरान प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

हाईकोर्ट ने भोजशाला को माना मंदिर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया और हिंदू पक्ष को वहां पूजा करने का अधिकार दिया। अदालत ने उन याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया, जिनमें भोजशाला परिसर हिंदुओं को सौंपने और परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने से रोकने की मांग की गई थी।

शुक्रवार को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।

भोजशाला फैसले पर उषा ठाकुर का दिग्विजय सिंह पर हमला, बोलीं- तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे

धार भोजशाला को लेकर आए न्यायालय के फैसले के बाद पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के शासनकाल में भोजशाला आंदोलन से जुड़े लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय हिंदू संगठनों और आंदोलनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश की गई थी. उषा ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करते रहे हैं और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के कारण आज भी हाई कोर्ट के फैसले पर बयानबाजी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भोजशाला हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और वर्षों पुराने संघर्ष के बाद अब न्यायपालिका से न्याय मिला है. पूर्व मंत्री ने कहा कि बरसों पुराना सपना अब पूरा हुआ है. मां सरस्वती और मां वाग्देवी का आशीर्वाद समाज को मिला है. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि एक मंदिर को मंदिर कहलाने में इतना लंबा समय गुजर गया. हालांकि अब अदालत के फैसले ने सत्य को सामने ला दिया है और सत्य की जीत हुई है. उषा ठाकुर ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे नेता अपने वोट बैंक की राजनीति के कारण इस तरह के बयान देते रहेंगे, लेकिन हिंदू समाज की आस्था भोजशाला से जुड़ी है और अब यहां प्रतिदिन पूजा होगी. उन्होंने कहा कि समाज लंबे समय से इस फैसले का इंतजार कर रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं वर्षों से भोजशाला आंदोलन से जुड़ी रही हैं. आंदोलन के संघर्ष को उन्होंने बहुत करीब से देखा है और पूरे घटनाक्रम की साक्षी रही हैं. उनके मुताबिक यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान की भी जीत है। 

भोजशाला में अभी चित्र ले जाने की अनुमति नहीं, संयम में श्रद्धालु, उत्साह से किए दर्शन

इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार की भोजशाला पहुंचे. दर्शन करने वालों में महिलाएं और बच्चियां भी शामिल रहीं. कई श्रद्धालु अपने साथ हनुमान जी और मां सरस्वती के चित्र लेकर पहुंचे थे. श्रद्धालुओं ने धार्मिक चित्रों को परिसर के भीतर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी. सुरक्षा कर्मियों ने श्रद्धालुओं को बताया कि उन्हें अभी तक हाई कोर्ट के नए आदेशों या प्रशासन की ओर से किसी बदलाव संबंधी निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं. ऐसे में फिलहाल पुरानी व्यवस्था और निर्धारित नियमों के तहत ही प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जा रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनुबंध एजेंसी के सुरक्षाकर्मियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि स्पष्ट आदेश मिलने के बाद ही किसी नई व्यवस्था को लागू किया जा सकेगा. हालांकि इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. लोग शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन और पूजा-अर्चना करते नजर आए. परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी को नमन कर आशीर्वाद लिया. वहीं भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की. समिति ने कहा कि हाई कोर्ट के विस्तृत दिशा-निर्देश और आधिकारिक आदेश मिलने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. पदाधिकारियों ने समाज से कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने का आग्रह किया.

कोर्ट ने कहा – भोजशाला का धार्मिक स्वरूप मंदिर का
अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र एक संरक्षित स्मारक है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है, जहां देवी सरस्वती का मंदिर स्थित है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थान देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर था। साथ ही यह जगह प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी जानी जाती थी। 

पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
शनिवार सुबह सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्रद्धालु और भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी परिसर पहुंचे। इनमें संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, श्रीश दुबे, केशव शर्मा और अशोक जैन शामिल थे। सभी ने मां वाग्देवी के स्थान और यज्ञ कुंड के पास पुष्प अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया।

श्रद्धालु बोले- भोजशाला मंदिर थी, है और रहेगी
दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि सालों बाद उन्हें बिना रोक-टोक पूजा करने का अवसर मिला है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने कहा, “भोजशाला का कण-कण यह दर्शाता है कि यह एक मंदिर है।”

मुस्लिम पक्ष की आगे की कानूनी कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन भोजशाला मंदिर था, मंदिर है और हमेशा मंदिर ही रहेगा। फिलहाल पूरे धार शहर और भोजशाला परिसर की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में 2 कैविएट याचिकाएं दायर
मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में 2 कैविएट याचिकाएं दायर की हैं। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाईकोर्ट ने लंदन के एक संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति वापस लाने की मांग पर भी विचार किया है।

संदीप पाठक पर FIR को लेकर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- जानकारी देने में हिचक क्यों?

चंडीगढ़ 
राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी।

पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब।

राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है।

पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

 अगली सुनवाई अगले सप्ताह
संजीव अरोड़ा की दलीलों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, फिलहाल नहीं दी कोई राहत

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपनी गिरफ्तारी व रिमांड को पूर्वनियोजित, कानूनविहीन और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा- ईडी ने पीएमएलए की प्रक्रियाओं की अवहेलना कर गिरफ्तारी को औपचारिकता बना दिया। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद असंतुष्टि जताते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी।

अरोड़ा के वकीलों ने बताया कि उन्हें वास्तव में सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया जबकि आधिकारिक गिरफ्तारी का समय शाम 4 बजे दर्शाया गया। अदालत में कहा गया- यह स्वतंत्रता पर प्रहार है और गिरफ्तारी की पारदर्शिता व वैधानिकता पर सवाल खड़े करता है। घंटों नियंत्रण में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के विपरीत है।

अदालत को बताया गया कि 5 मई के ईसीआईआर और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने धारा 50 के तहत कोई समन जारी नहीं किया, न स्वतंत्र पूछताछ की, न कोई नया साक्ष्य जुटाया। बचाव पक्ष ने कहा- पुराने फेमा मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

अरोड़ा की ओर से एक और बड़ा सवाल उठाया गया- जिस अधिकारी ने पहले फेमा में शिकायतकर्ता की भूमिका निभाई, वही पीएमएलए की धारा 19 के तहत रीजन टू बिलीव कैसे बना सकता है। इसे अपने मामले का जज बताते हुए कहा गया कि पूर्वाग्रहग्रस्त अधिकारी से निष्पक्ष संतुष्टि संभव नहीं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामला सोमवार दोपहर के लिए टाल दिया। फिलहाल अरोड़ा को राहत नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में केस दर्ज हुआ था।

 

खंभों पर गणेश जी की आकृतियां, दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’… भोजशाला की ग्राउंड रिपोर्ट में कई अहम खुलासे

 धार

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर शुक्रवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है. कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर बताया. फैसले के अगले ही दिन हमारी  टीम भोजशाला परिसर के अंदर पहुंची, जहां कैमरे में कई ऐसे चिन्ह और आकृतियां कैद हुईं, जिन्हें हिंदू पक्ष लंबे समय से अपने दावों का आधार बताता रहा है। 

हमारे कैमरे में भोजशाला परिसर के अंदर मौजूद प्राचीन खंभों और दीवारों पर कई सनातन प्रतीक साफ तौर पर दिखाई दिए. भोजशाला में कुल 104 प्राचीन खंभे मौजूद हैं, जिन पर अलग-अलग धार्मिक आकृतियां उकेरी गई हैं. इनमें भगवान गणेश की आकृति, घंटियां, रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक और अन्य पारंपरिक हिंदू चिन्ह शामिल हैं. कई खंभों पर बनी नक्काशी मंदिर वास्तुकला की शैली से मेल खाती नजर आई। 

दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ और छतों पर कमल के फूल की आकृति
हमारे कैमरे में भोजशाला की दीवारों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ सरस्वती नमः’ जैसे धार्मिक शब्द भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिए. इसके अलावा छत पर कमल के फूल की आकृति भी मौजूद है, जिसे हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रतीक इस बात के प्रमाण हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर था। 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी अपनी रिपोर्ट में इन प्रतीकों और आकृतियों का उल्लेख किया था. परिसर में मौजूद कई चिन्ह पहले चूने की परत से ढक दिए गए थे. बाद में सफाई और संरक्षण कार्य के दौरान ये आकृतियां और शिलालेख फिर से सामने आए. भोजशाला को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चला आ रहा है. हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी यानी सरस्वती मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद होने का दावा करता रहा है.

इसी विवाद को लेकर मामला अदालत में पहुंचा था. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब भोजशाला एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक बहस के केंद्र में आ गया है. फैसले के बाद परिसर की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. 

 

जल संरक्षण में देश के लिए मिसाल बना मध्यप्रदेश, मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गिनाईं उपलब्धियां

जनसहयोग से जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नदियां हमारी प्रत्यक्ष शक्तियां हैं : दादा गुरू
साधक और शासक समाज के बीच कार्य करते हैं, तो मिलते हैं श्रेष्ठ परिणाम : आर्य
रवीन्द्र भवन में हुई नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी, सेवाभावियों को मिला समर्थ नर्मदा सम्मान

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पानी को बचाने और सहेजने के लिए सरकार के साथ ही आम नागरिक भी सजग और सक्रिय हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार द्वारा करवाए गए जल संरक्षण और जन संचयन के कार्यों में अग्रणी राज्य है। नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश में सभी शासकीय विभाग पानी बचाने और लोगों को जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए मिलकर कार्य करने की भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने परिसर स्थल में देशी उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बाल चित्रकार विक्रम लोधी ने मां नर्मदा का चित्र भेंट किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर दादा गुरु भगवान ने प्रवचन द्वारा मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और दादा गुरु ने स्मित अपराजिता की पुस्तक “समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर” का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न श्रेष्ठ सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों को समर्थ नर्मदा अलंकरण प्रदान किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कुंए, बावड़ियां, पोखर, नहर और अन्य जल स्त्रोतों एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्य चल रहे हैं। गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियां आगामी 30 जून तक निरंतर चलेंगी। इतनी लंबी अवधि के इस अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं को उपयोगी बनाना और पानी के प्रति जन जागृति बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संवर्धन अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। प्रदेश में अनेक त्यौहार भी शासन-प्रशासन के साथ मिलकर मनाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास और विरासत के संरक्षण के आहवान पर मध्यप्रदेश अमल कर रहा है।

पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थलों के अवलोकन और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयासों में सराहनीय जनभागीदारी मिल रही है। वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक गोपाल आर्य ने कहा कि हमारे देश में अमृता देवी जैसी महिलाएं हुई हैं, जो वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान से भी पीछे नहीं हटी। साधक और शासक जब समाज के बीच में रह कर कार्य करते हैं तो श्रेष्ठ परिणाम सामने आते हैं।

कार्यक्रम में दादा गुरू ने कहा कि भारत की संस्कृति ने दुनिया को दर्शन दिया है। हमारी प्रकृति यह संकेत दे रही है कि हम सभी मिलकर पर्यावरण की चिंता करें। हमारी नदियां हमारी शक्ति है। गंगा-यमुना-नर्मदा जल के रूप में प्रवाहित होने वाली प्रत्यक्ष शक्तियां हैं। नर्मदा पथ व्यक्तित्व निर्माण का पथ है। दादा गुरू ने मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में हो रहे कार्य की प्रशंसा की। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने प्रदेश में जनसहयोग से जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्यों का विवरण दिया। कार्यक्रम में खेल मंत्री विश्वास सारंग, राज्यसभा सदस्य श्रीमती माया नारोलिया, विधायक भगवानदास सबनानी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

उद्यानिकी का विस्तार बनेगा कृषि वर्ष में किसानों की समृद्धि का आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में कृषि एवं उससे जुड़ी संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक कार्य योजना पर अमल जारी हे। कृषि वर्ष में विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में एक लाख 32 हजार 147 हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हमारा उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती के साथ अधिक लाभकारी उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करना है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार फल फसलों के क्षेत्र में 18 हजार हैक्टेयर, सब्जी उत्पादन में 54 हजार हैक्टेयर, मसाला फसलों में 56 हजार हैक्टेयर, पुष्प उत्पादन में 3 हजार 500 हैक्टेयर, औषधीय फसलों में 600 हैक्टेयर तथा संरक्षित खेती में 47 हैक्टेयर क्षेत्र वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बदलते कृषि परिदृश्य में उद्यानिकी फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष की अवधारणा को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन तथा उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया है। शासन की मंशा है कि खेती को बहुआयामी बनाकर किसानों को वर्षभर आय सृजन के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी दिशा में उद्यानिकी विभाग किसानों को उन्नत पौध सामग्री, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, पॉली हाउस, शेडनेट तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रहा है।

प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र की लगातार बढ़ती सफलता इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है। वर्ष 2022-23 में मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का कुल क्षेत्रफल 25 लाख 96 हजार 793 हैक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 28 लाख 60 हजार 952 हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसी प्रकार उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में लगभग 37 लाख 68 हजार 200 मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की बढ़ती जागरूकता, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश की भौगोलिक विविधता और अनुकूल जलवायु उद्यानिकी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल और चंबल क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के फल, सब्जी और मसाला फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में आम, संतरा, अमरूद, पपीता, टमाटर, प्याज, लहसुन, धनिया और मिर्च जैसी फसलों की खेती किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

केंद्र और राज्य की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से प्रदेश में उद्यानिकी आधारित कृषि मॉडल को मजबूत आधार मिल रहा है। किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने के प्रयास भी तेज किए गए हैं, ताकि उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

कृषि वर्ष 2026 के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार का यह अभियान केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन तथा कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में यह प्रयास मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी उद्यानिकी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एमपी की बेटी माही लामा का विश्व कप के लिए चयन, चीन में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग एकेडमी की प्रतिभाशाली बॉक्सर माही लामा ने एनआईएस पटियाला में आयोजित असेसमेंट रैंकिंग ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप के लिए भारतीय टीम में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। 60 किलोग्राम भार वर्ग में माही ने 13 मई से 15 मई 2026 तक आयोजित ट्रायल्स में लगातार बेहतरीन जीत दर्ज कर चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। अब वे 15 जून से 20 जून 2026 तक चीन के गुइयांग शहर में आयोजित होने वाले विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

शानदार प्रदर्शन के दम पर हासिल किया चयन

माही लामा ने अपने पहले मुकाबले में हरियाणा की विंका को 4:1 के अंतर से हराया। इसके बाद दूसरे मुकाबले में महाराष्ट्र की दिशा पाटिल के खिलाफ 5:0 से एकतरफा जीत दर्ज कर अपनी श्रेष्ठता साबित की। लगातार दो प्रभावशाली जीतों के साथ उन्होंने विश्व कप के लिए चयन सुनिश्चित किया।

प्रदेश और देश के लिए गौरव का क्षण

माही लामा की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उन्होंने न केवल प्रदेश का नाम रोशन किया है, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी प्रस्तुत की है।

विश्व कप में दिखेगा भारतीय मुक्केबाजी का दम

चीन के गुइयांग शहर में आयोजित होने वाले विश्व कप में माही लामा भारतीय टीम की ओर से चुनौती पेश करेंगी। यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर होगी।

कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम

माही की सफलता उनके निरंतर अभ्यास, अनुशासन और अकादमी में मिल रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने कठिन मुकाबलों में धैर्य और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत

माही लामा की उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। यह साबित करता है कि समर्पण, मेहनत और सही मार्गदर्शन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है।

खेल मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने माही लामा को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

अकादमी की उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का परिणाम

मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। माही लामा की यह सफलता प्रदेश की मजबूत खेल अधोसंरचना और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है।

 

 

उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने की अंतर्राज्यीय वन्यजीव मांस तस्कर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज

भोपाल 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंड पीठ में गठित युगल पीठ ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में काला हिरण, चिंकारा, सांभर, चीतल आदि वन्यजीवों का शिकार कर उनके अवयवों की तस्करी मुंबई (महाराष्ट्र) तक करने वाले संगठित गिरोह के सरगना की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ख़ारिज कर दी है। याचिका की   सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि आरोपी द्वारा पूर्व में दायर धारा 439 सीआरपीसी के तहत जमानत आवेदन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी दो मृत काले हिरणों के साथ वीडियो क्लिप में पाया गया था तथा गिरफ्तारी की समस्त वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसलिए आरोपी की हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता और यह याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में काला हिरण, चिंकारा, सांभर, चीतल आदि वन्यजीवों का शिकार कर उनके अवयवों की तस्करी मुंबई (महाराष्ट्र) तक करने वाले संगठित गिरोह के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21 अगस्त 2025 को दर्ज किया गया था। प्रकरण की विवेचना में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह सामने आया कि गिरोह पिछले कई वर्षों से मध्यप्रदेश में आकर स्थानीय सदस्यों के साथ मिलकर वन्य जीवों का शिकार कर रहा था। एसटीएसएफ द्वारा इस गिरोह के कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 4 आरोपी महाराष्ट्र तथा 2 आरोपी मध्यप्रदेश के हैं।

गिरोह के सदस्य साहब अंतुले को 27 अक्टूबर 2025 को मुंबई (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, इंदौर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। आरोपी की जमानत याचिका इंदौर खंडपीठ द्वारा 26 फरवरी 2026 को निरस्त कर दी गई थी। आरोपी पिछले 6 माह से जेल में निरुद्ध है। आरोपी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए इंदौर खंडपीठ की युगल पीठ के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। सुनवाई में न्यायालय ने कहा कि आरोपी द्वारा पूर्व में दायर धारा 439 सीआरपीसी के तहत जमानत आवेदन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी दो मृत काले हिरणों के साथ वीडियो क्लिप में पाया गया था तथा गिरफ्तारी की समस्त वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसलिए आरोपी की हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता और यह याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता न्यायिक आदेश के तहत वैध हिरासत में है तथा इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट लागू नहीं होती। प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं विवेचना के आधार पर न्यायालय ने आरोपी की याचिका निरस्त कर दी। 

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