राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने किया 9.32 लाख रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन; जल्द बनेगा सामुदायिक भवन

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्द्धघुमंतू कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को नर्मदापुरम रोड स्थित नट बाबा शिव मंदिर परिसर में 9 लाख 32 हजार रुपए की लागत से बनने वाली बाउंड्री वॉल एवं ‘वैष्णो भवन’ का भूमिपूजन किया। इस गरिमामय अवसर पर राज्यमंत्री  गौर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की कर्मठता और निरंतर परिश्रम के कारण ही गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी आस्था के प्रमुख केंद्र होते हैं, जो हमारी मनोकामनाओं को भी पूर्ण करते हैं। ऐसे में आस्था के इन केंद्रों को व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधा संपन्न बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि क्षेत्र की जनता की सुविधाओं का निरंतर ध्यान रखते हुए विकास की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने क्षेत्रीय रहवासियों द्वारा की गई सामुदायिक भवन की मांग को भी जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया।

वार्ड 53 में आयोजित इस भूमि-पूजन कार्यक्रम में क्षेत्रीय पार्षद श्री प्रताप वारे, श्री जितेन्द्र शुक्ला,  शीला पाटीदार और श्री किशोर पटेल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

मध्यप्रदेश से संयुक्त अरब अमीरात को जीआई-टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों का हुआ पहला वाणिज्यिक निर्यात

भोपाल

रीवा का सुंदरजा आम अब वैश्व‍िक बाजारों की शान बन गया है। केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आम मध्यप्रदेश से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पहले वाणिज्यिक निर्यात के रूप में पहुंच गये हैं। वैश्विक बाजारों में भारत के वि‍शिष्‍ट कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कृषक कल्याण वर्ष के चलते यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है।

पिछले कई महीनों से एपीडा ने मध्यप्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), पैकिंग हाउस संचालकों और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर इस उत्‍कृष्‍ट किस्म के आम के निर्यात के लिए संपर्क स्थापित करने का काम किया है। इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप संयुक्त अरब अमीरात में एक खरीदार की पहचान हुई जिससे प्रसिद्ध रीवा सुंदरजा आम के अंतर्राष्ट्रीय विपणन का मार्ग खुला।

जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप में एक मीट्रिक टन आम शामिल थे और यह 26 जून 2026 को मेसर्स साल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संयुक्त अरब अमीरात को निर्यात की गई। यह ऐतिहासिक खेप रीवा सुंदरजा आम की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है और आने वाले समय में नियमित निर्यात का मार्ग प्रशस्त करने की उम्मीद है।

निर्यात खेप में उच्च गुणवत्ता वाले जीआई टैग से युक्त रीवा सुंदरजा आम शामिल थे जिन्हें मध्यप्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ निवासी से ओन्धा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और प्रगतिशील किसानसोनू गुप्ता से प्राप्त किया गया था। आमों की कटाई निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार की गई थी और उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित त्रिसागर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के एपीडा-सुविधा प्राप्त पैक हाउस में इनकी ग्रेडिंग, छँटाई और निर्यात-योग्य पैकेजिंग की गई थी। निर्यात पैकेजिंग और पौध स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद आमों की खेप को वाराणसी हवाई अड्डे लाया गया जहां से उसे हवाई मार्ग द्वारा आगे संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया।

इस व्यावसायिक निर्यात से रीवा क्षेत्र के आम उत्पादकों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय बाजार में रीवा सुंदरजा आम का मौजूदा भाव लगभग 100 से 110 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि निर्यातक ने इसे 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा है। प्रति किलोग्राम 40 से 50 रुपये का यह लाभ किसानों को सीधे तौर पर मिलता है जो निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं में उत्पादकों को शामिल करने के आर्थिक लाभों को दर्शाता है। इस पहल से अधिक से अधि‍क किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और कटाई के बाद की प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ने की भी उम्मीद है।

इस सफल निर्यात से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में क्षेत्र-विशिष्ट कृषि उत्पादों को एक अलग पहचान दिलाने में भौगोलिक संकेत (जीआई) पंजीकरण के महत्व पर और जोर दिया गया है। असाधारण मिठास, भरपूर सुगंध, रेशे रहित गूदे और विशिष्ट स्वाद के लिए प्रसिद्ध रीवा सुंदरजा आम में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। वाणिज्यिक निर्यात से इस स्वदेशी किस्म की वैश्विक पहचान बढ़ने की उम्मीद है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश उत्‍कृष्‍ट कि‍स्‍म के आम निर्यात के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

संयुक्त अरब अमीरात को जीआई टैग वाले रीवा सुंदरजा आमों की पहली वाणिज्यिक निर्यात खेप की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 26 जून 2026 को ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन मध्यप्रदेश से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्‍ध‍ि साबित हुआ और एपीडा मध्यप्रदेश सरकार के बागवानी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, पैक हाउस संचालकों और किसानों के बीच सहयोग की सफलता दर्शाता है।

एपीडा निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करके, अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कर, बाजार संपर्क विकसित करके और वैश्विक बाजारों में भारत के कृषि उत्पादों को बढ़ावा देकर जीआई-टैग वाले और मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रीवा सुंदरजा आमों के वाणिज्यिक निर्यात की सफल शुरुआत से भारत से जीआई उत्पादों के लिए नए अवसर पैदा होने, कृषि निर्यात तंत्र को मजबूत करने और रीवा क्षेत्र के आम उत्पादकों की स्थायी आय में वृद्धि में योगदान देने की उम्मीद है।

सुंदरजा की विशेषता

दो साल पहले रीवा ज़िले के गोविंदगढ़ में उगने वाले सुंदरजा आम को जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन टैग मिला। 1968 में सुंदरजा पर एक पोस्टेज स्टैम्प जारी किया गया था। यह दिखने में सुंदर और स्वाद में लाजवाब होता है और इसकी खुशबू भी बहुत अच्छी होती है। यह पहली बारिश के बाद पक जाता है और सिर्फ़ गोविंदगढ़ के माहौल में ही उगता है क्योंकि यहाँ की मिट्टी और तापमान सुंदरजा के पेड़ के फलने-फूलने के लिए सही हैं। पत्ती, छाल, बीज हर हिस्सा काम का होता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है और इसमें विटामिन-A, विटामिन-C और आयरन भरपूर होता है। डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे पसंद करते हैं क्योंकि इसमें शुगर की मात्रा कम होती है। सुंदरजा रीवा ज़िले और पूरे मध्यप्रदेश की पहचान बन गया है।

रीवा के फ्रूट रिसर्च सेंटर, कथुलिया में आम पर और रिसर्च चल रही है। यहाँ अलग-अलग वैरायटी के 2345 आम के पेड़ उगाए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से बॉम्बे ग्रीन, इंदिरा, दशहरी, लंगड़ा, गधुवा, आम्रपाली, मल्लिका शामिल हैं। बाणसागर डैम नहर रीवा और आस-पास के जिलों में बागवानी फसलों के लिए लाइफलाइन साबित हुई है, जिससे फूड प्रोसेसिंग के छोटे उद्योगों के लिए काफी अवसरA बने हैं। गोविंदगढ़ इलाके में ही आम के अच्छे बाग हैं। यहां करीब 237 तरह के आम उगाए जाते हैं। सभी का स्वाद बहुत अच्छा होता है। रीवा फ्रांस, USA, UK और UAE को आम एक्सपोर्ट कर रहा है। 

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रिटायर्ड शिक्षकों के 50 दिन वाले आदेश पर रोक; 300 दिन के अर्जित अवकाश का रास्ता साफ

इंदौर 

 मध्यप्रदेश में टीचर्स के लिए अर्जित अवकाश पर इंदौर हाईकोर्ट नया फैसला आया है। हाईकोर्ट ने रिटायर्ड सहायक शिक्षकों को 300 दिन की अर्जित अवकाश (लीव एनकैशमेंट) का लाभ न देने के मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार के सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट देने संबंधी आदेशों को रद्द कर नए सिरे से विचार के लिए अफसरों को भेज दिया। इसी के साथ रिटायर्ड टीचर्स के लिए 300 दिन के अर्जित अवकाश का रास्ता खुल गया है। जस्टिस दीपक खोट की एकलपीठ ने 11 याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया। खास बात यह है कि वित्त विभाग ने भी हाल ही में प्रदेश में कर्मचारी के लिए अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने के निर्देश जारी किए हैं।

अभिभाषक अभिनव धानोतकर ने बताया, इंदौर हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा है, अफसरों ने वित्त विभाग के 1991 और 2008 के परिपत्रों के आधार पर शिक्षकों को सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट का लाभ दिया, जबकि 28 जुलाई 2018 को मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम, में संशोधन व 8 मार्च 2019 के प्रपत्र पर विचार नहीं किया।

कोर्ट की टिप्पणी…
कोर्ट ने टिप्पणी की, विवादित आदेशों में यह भी नहीं बताया गया कि वर्ष वार अवकाश की गणना कैसे की गई और 50 दिन कैसे तय किए। इसलिए आदेश विधिसम्मत नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा, सिविल सेवा के नियमानुसार कर्मचारियों के अवकाश का पूरा रिकॉर्ड संधारित करना विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि अवकाश की गणना ही वर्ष वार उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कर्मचारी के अधिकारों का सही निर्धारण नहीं किया जा सकता। संशोधन व 8 मार्च 2019 के नवीनतम परिपत्र पर विचार नहीं किया।

कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान
बता दें कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान है। इसको लेकर वित्त विभाग ने हाल ही में सभी विभागों को निर्देश जारी कर कर्मचारी के पूरे सेवाकाल में अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने को कहा है। अधिक अवकाश होने पर उसका कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।

विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति
प्रदेश के विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति बनी है। वित्त विभाग के नए निर्देश से इसकी समाप्ति के साथ ही बड़ी स्पष्टता भी मिल गई है।

वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी प्रक्रिया
सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, असमर्थता पेंशन अथवा सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अवकाश नकदीकरण की गणना की प्रक्रिया भी वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी है।

भोपाल को 3900 करोड़ की बड़ी सौगात, बनेगा 10-लेन ईस्टर्न बायपास; ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

भोपाल 

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया जा रहा है। नई डिजाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

हाल ही में हुई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास परियोजना को दोबारा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना की नई डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आने वाले वर्षों की ट्रैफिक मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

 राजधानी को बड़ी सौगात मिली है। भोपाल में 52 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास अब दस लेन होगा। इसे वेस्टर्न बायपास से 11 मील व भानपुर, भौंरी पर मिलना था, लेकिन अब इसमें समय लगेगा। पीडब्ल्यूडी MPPWD को इसे री-डिजाइन करने के लिए भेजा है। नई डिजाइन के साथ इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, फिर काम शुरू होगा। ये 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। गौरतलब है कि हाल में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास पर फिर से काम शुरू करना तय हुआ है। दरअसल भविष्य की अनुमानित मांग को देखते हुए मौजूदा सड़क कनेक्टविटी को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ईस्टर्न बायपास के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है।

शिक्षा-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट होंगे किनारे पर
प्रस्तावित मार्ग पर कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्रों में, विकसित की जा रही हैं। अफसरों के अनुसार, क्षेत्र में आगामी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर कनेक्टविटी और जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए इसके रूट और डिजाइन में संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग हब और एजूकेशन हब के तौर पर विकसित होगा।

वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली
वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली है। इसके अलाइनमेंट और लागत अनुमानों में बदलाव के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

एमपीआरडीसी अभी वेस्टर्न पर काम कर रहा, फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा
पीडब्ल्यूडी के जीएम कैपिटल, पीसी वर्मा बताते हैं कि अभी एमपीआरडीसी वेस्टर्न पर काम कर रहा है। फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा। इसे री-डिजाइन किया जा रहा है। अभी के बायपास से यह बेहतर होगा।

एजुकेशन और ट्रेनिंग हब से जुड़ेगा बायपास
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास के आसपास कई बड़े शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इसी वजह से इसके रूट और डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।

वेस्टर्न बायपास के बाद ईस्टर्न पर होगा काम
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल एमपीआरडीसी वेस्टर्न बायपास परियोजना पर काम कर रहा है। इसके बाद ईस्टर्न बायपास के निर्माण को गति दी जाएगी। नई डिजाइन के साथ यह परियोजना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगी होगी।

रिंग रोड नेटवर्क होगा पूरा
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास बनने के बाद भोपाल का लंबे समय से लंबित रिंग रोड नेटवर्क पूरा होने की उम्मीद है। इससे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहन बिना शहर के भीतर प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।

पर्यावरण मंजूरी भी होगी जरूरी
परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आवश्यक मंजूरी भी लेनी होगी। प्रस्तावित मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय अनुमति अहम मानी जा रही है।

रिंग रोड पूरा होने की उम्मीद
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास से भोपाल के बहुप्रतीक्षित रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। देशभर में भोपाल ही एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसकी पूरी रिंग रोड नहीं है। ईस्टर्न कॉरिडोर के साथ पश्चिमी का काम पूरा होने पर ये रोड भी पूरी हो जाएगी।

प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एनजीटी की मंजूरी की भी दरकार हो सकती है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर NGT में मामला जा सकता है।

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन की मांग, राज्यमंत्री गौर ने केंद्रीय मंत्री मांडविया को लिखा पत्र

भोपाल के ESIC अस्पताल के उन्नयन और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की मांग की

केंद्रीय मंत्री मांडविया को राज्यमंत्री गौर ने लिखा पत्र

भोपाल

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में स्थित कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल, सोनागिरी के उन्नयन के संबंध में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उल्लेख किया है कि यह अस्पताल भोपाल, मंडीदीप, सतलापुर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों तथा उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। वर्तमान में लगभग 6.5 लाख बीमित कामगार इस अस्पताल से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में यह अस्पताल राज्य शासन के श्रम विभाग द्वारा राज्य कर्मचारी बीमा सेवाएं द्वारा संचालित था, लेकिन दिनांक 22 जून 2023 को भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने इसका संचालन अपने हाथ में ले लिया और आज भी भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के नियंत्रण में है। इसलिए बीमित श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए इसका 300 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेष चिकित्सकों एवं मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता और सेकेंडरी व सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए निवेदन किया है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का किया उद्घाटन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 10वें अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर समृद्ध एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश समित के पूर्व रवींद्र भवन में ही दो पवेलियन में विकसित औद्योगिक परिवेश का संदेश देती प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के एमएसएमई एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की उद्यमिता, नवाचार तथा विनिर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनेक उत्पादों की जानकारी ली और स्टार्टअप एवं सूक्ष्म,लघु मध्यम उद्यमियों से चर्चा कर उनका उत्साह वर्धन किया

प्रदर्शनी में 60 से अधिक स्टाल लगाये गए थे ।ड्रोन निर्माण समाधान, आईओटी-आधारित फिजियोथेरेपी उपकरण, सोलर वाटर हीटर एवं डीट पंप, रेलवे तथा रक्षा इंजीनियरिंग उत्पाद, पेटेंटयुक्त इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स एवं ईवी चार्जिंग समाधान, कृषि-अवशेष पैलेट्स तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उत्पादों सहित विविध नवाचारी उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘बाजार से’ नामक एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का उद्घाटन किया, जो ग्राहकों एवं व्यवसायों को जोड़ता है तथा इसे देश के पहले एआई-संचालित बाज़ार के रूप में स्थापित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बांसकारी स्टॉल पर बांस से बनी अनेक वस्तुओं की जानकारी ली।

एमएसएमई विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के सात जिलों के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक समर्पित पवेलियन (एमपी पवेलियन) भी स्थापित किया गया। इसके साथ ही औद्योगिक नीतियों एवं योजनाओं संबंधी एमएसएमई की जिज्ञासाओं के निवारण संबंधी एक हेल्पडेस्क तथा उद्यमियों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फेसिलिटेशन डेस्क की भी स्थापना की गई।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई), एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) सहित विभिन्न संस्थानों ने भी राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के विकास के लिये इस प्रदर्शनी में सहभागिता की। 

इंदौर बना EV और ग्रीन एनर्जी का नया हब, कॉन्क्लेव में जुटे देशभर के निवेशक और स्टार्टअप

इंदौर 

इंदौर में आयोजित कॉन्क्लेव ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। शेराटन ग्रैंड पैलेस में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से आए निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों।

ह्युन्स ऑफ ईवी द्वारा आयोजित इस सकॉन्क्लेव में 200 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इंदौर नगर निगम ने सिटी होस्ट पार्टनर के रूप में आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे शहर की स्वच्छ और टिकाऊ विकास के प्रति प्रतिबद्धता भी सामने आई।

कॉन्क्लेव में ईवी इकोसिस्टम, बैटरी एवं ऊर्जा प्रबंधन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर एक्सपर्टस ने विस्तृत चर्चा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों ने इन क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चयनित स्टार्टअप्स की लाइव पिच प्रस्तुति रही। लगभग 2,400 आवेदनों में से बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद नौ स्टार्टअप्स को निवेशकों के समक्ष अपने नवाचार और बिजनेस मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस दौरान स्टार्टअप्स और निवेशकों के बीच कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक चर्चाएं और नेटवर्किंग सत्र भी आयोजित किए गए।

सम्मेलन में कईअग्रणी कंपनियों की भागीदारी रही। आयोजन ने उद्योग, निवेशकों और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का मंच प्रदान किया।

एचईवी सीईओ डॉ. ललित सिंह ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ परिवहन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और ऐसे मंच नवाचार तथा निवेश को नई गति प्रदान करते हैं। वहीं, सलाहकार स्वप्निल बंसल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों में होने वाले ऐसे आयोजन टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय पहचान और निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

डायरेक्टर आभा सिंह और एडिटर दिव्या ठक्कर ने कहा कि यह कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और ईवी आधारित नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं हैं। मध्य भारत भी तेजी से इस बदलाव का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।

 

सागर में ‘लुटेरी दुल्हन’ का खेल! शादी के तीसरे दिन ₹1.20 लाख नकद और जेवर लेकर फरार

सागर/ जैसीनगर
 जैसीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा पेगवार में शादी के तीसरे ही दिन दुल्हन घर से 30 हजार रुपये नकद व जेवर लेकर भाग गई। पीड़ित की शिकायत पर जैसीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार महुआखेड़ा पेगवार निवासी 36 वर्षीय नोनीराम पटेल ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वह दोबारा विवाह करना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से हुई, जिसने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी निवासी रुक्मणी चतुर्वेदी से विवाह कराने का भरोसा दिलाया।

महिला को विधवा बताकर की ठगी
पुलिस के अनुसार पीड़ित को बताया गया कि रुक्मणी के पति की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। रिश्ता तय कराने के एवज में रामनारायण दुबे को एक लाख 20 हजार रुपये दिए गए। नोनीराम के अनुसार ने बताया कि 19 जून को सागर में दोनों की कोर्ट मैरिज और अगले दिन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान रुक्मणी के साथ ओडिशा निवासी अरविंद विभार भी मौजूद था, जिसे उसने अपना जीजा बताया था।

सुबह नींद खुली तो महिला फरार हो चुकी थी
नोनीराम ने बताया कि 21 जून की रात रुक्मणी घर की अलमारी से 30 हजार रुपये नकद, करीब आधा किलो चांदी की करधोनी, लगभग 250 ग्राम चांदी की पायल और एक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गई। सुबह परिवार की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली।

तलाश के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि देर रात एक कार गांव में आई थी और उसमें सवार युवक घर का पता पूछ रहा था। फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने उसकी पहचान शादी में आए अरविंद विभार के रूप में की।

बिचौलिए से की जा रही पूछताछ
पीड़ित ने जैसीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शुक्रवार को वह दोबारा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने बताया कि मामले में रिश्ता तय कराने वाले कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार महिला और उसके सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

 

उज्जैन से भोपाल तक डीपफेक का जाल, MBBS छात्रा और मां-बेटी बने निशाना; रिश्तेदार और प्रेमिका पर आरोप

उज्जैन / भोपाल

मध्यप्रदेश के उज्जैन में MBBS की पढ़ाई कर रही एक छात्रा का फेक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार छात्रा और उसके परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा तथा तरक्की से जलन रखने वाले रिश्तेदारों ने ही उसे बदनाम करने की साजिश रची थी. आरोपियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के दौरान जमा कराई गई छात्रा की तस्वीर हासिल की और तकनीकी माध्यमों से उसका आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। 

पिता की शिकायत के बाद सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार मक्सी रोड क्षेत्र के एक किसान ने 20 जून की रात पंवासा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में बताया गया कि उनके मोबाइल पर एक वीडियो आया, जिसमें उनकी नाबालिग बेटी के नाम से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दो दिनों तक गोपनीय रूप से जांच की और वीडियो के स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया। 

BLO से हासिल की गई छात्रा की तस्वीर
जांच में सामने आया कि छात्रा की तस्वीर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान जमा दस्तावेजों से हासिल की गई थी. पुलिस के अनुसार बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी ने एसआईआर फॉर्म में लगी छात्रा की फोटो व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी. बाद में यह तस्वीर अन्य आरोपियों तक पहुंची. इसी तस्वीर का उपयोग कर AI और डीपफेक जैसी डिजिटल एडिटिंग के जरिए आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। 

MBBS की पढ़ाई और परिवार की तरक्की बनी वजह
पंवासा थाना प्रभारी गमर सिंह मंडलोई के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़िता अपने गांव और समाज की पहली लड़की है जो MBBS की पढ़ाई कर रही है. पुलिस का दावा है कि छात्रा के परिवार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से कुछ रिश्तेदार नाराज थे. परिवार की बढ़ती प्रतिष्ठा को देखते हुए आरोपियों ने उसे बदनाम करने की साजिश रची. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का उद्देश्य कथित तौर पर परिवार पर सामाजिक दबाव बनाना था ताकि छात्रा की पढ़ाई प्रभावित हो सके। 

उज्जैन: MBBS कर रही छात्रा बनी रिश्तेदार की साजिश का शिकार
उज्जैन के पंवासा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक MBBS छात्रा के फोटो को अश्लील वीडियो से जोड़कर सोशल मीडिया और गांव के वॉट्सएप ग्रुप पर वायरल कर दिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि यह साजिश छात्रा के ही रिश्तेदार ने रची थी। उसका मकसद छात्रा के पिता को समाज में बदनाम करना था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि छात्रा का फोटो सरकारी रिकॉर्ड से एक महिला BLO ने आरोपियों को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद फोटो को एडिट कर डीपफेक वीडियो तैयार किया गया और गांव के ग्रुपों पर वायरल कर दिया गया।

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। महिला BLO को जमानत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।

सरकारी रिकॉर्ड से मिला फोटो
पुलिस के मुताबिक, छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी फोटो जुटाना आसान नहीं था। आरोपी को पता चला कि छात्रा ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान BLO को अपना फोटो दिया था। वहीं से फोटो हासिल कर उसे डीपफेक वीडियो में इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। शुरुआती जांच में चुनावी और पारिवारिक रंजिश को घटना की वजह माना जा रहा है।

भोपाल: शादी से इनकार पर मां-बहन को बनाया निशाना
भोपाल के करोंद इलाके में एक युवक को अपनी प्रेमिका से शादी से इनकार करना भारी पड़ गया। आरोप है कि युवती ने बदला लेने के लिए युवक की मां और 18 वर्षीय बहन की AI से अश्लील तस्वीरें और वीडियो तैयार कर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से वायरल कर दिए।

पीड़ित परिवार का कहना है कि तस्वीरें वायरल होने के बाद उनकी बेटी तनाव में है और पूरा परिवार बदनामी झेल रहा है।

परिवार ने थाने में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
पीड़ित परिवार ने पहले छोला थाना में शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों को आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने और आरोपी युवती के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इन दोनों मामलों ने एक बार फिर दिखा दिया है कि AI और डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल लोगों की प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर निजी फोटो साझा करने में सावधानी बरतने और संदिग्ध कंटेंट दिखने पर तुरंत पुलिस से शिकायत करने की सलाह दे रहे हैं।

चार महीने पहले तैयार किया गया था फेक वीडियो
पुलिस जांच में पता चला कि कथित फेक वीडियो करीब चार महीने पहले तैयार किया गया था. बताया जा रहा है कि छात्रा सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थी, इसलिए उसकी तस्वीर जुटाना आसान नहीं था. आरोपियों को जब पता चला कि छात्रा की फोटो सरकारी दस्तावेजों में उपलब्ध है, तो उसी का इस्तेमाल कर वीडियो तैयार किया गया. कुछ समय बाद यह वीडियो छात्रा के पिता तक पहुंचा, जिसके बाद परिवार ने पुलिस की शरण ली। 

तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आबिद पटेल, एहसान पटेल और मुजफ्फर पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार बताया जा रहा है। 

मोबाइल जब्त, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
जांच एजेंसियों ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इन उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि वीडियो बनाने, एडिट करने और प्रसारित करने की पूरी प्रक्रिया का पता लगाया जा सके. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वीडियो कितने लोगों तक पहुंचा और इसके प्रसार में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। 

BLO के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी
पुलिस जांच में बीएलओ की भूमिका सामने आने के बाद प्रशासन को भी रिपोर्ट भेजी गई है. पंवासा थाना पुलिस ने संबंधित बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के संबंध में कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा है. प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी। 

परिवार को बदनाम करने की साजिश का खुलासा
पुलिस का कहना है कि यह मामला साइबर अपराध के साथ-साथ किसी व्यक्ति की सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कथित साजिश से भी जुड़ा है. फिलहाल फरार आरोपी की तलाश जारी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। 

नव्य, दिव्य और भव्य सिंहस्थ के लिए तेजी से चल रही हमारी तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नव्य, दिव्य और भव्य सिंहस्थ के लिए तेजी से चल रही हमारी तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला
स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प
करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, हर दिन करीब 4 करोड़ श्रद्धालु कर सकेंगे अमृत स्नान
शिप्रा नदी पर हो रहा 853.46 करोड़ रूपए से 22 नए पुलों का निर्माण
सिंहस्थ हमारी आस्था का महासंगम, उज्जैन और करीबी जिलों में चल रहे हैं 25 हजार करोड़ के विकास कार्य
अधोसंरचना विकास कार्यों पर केंद्रित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन
उज्जैन में सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प पर हुई वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में की सहभागिता

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ भारत का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, अटूट आस्था और हमारी आध्यात्मिक परम्पराओं का महासंगम है। इस धार्मिक उत्सव में मां शिप्रा के जल में स्नान करने से पापों का शमन होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिंहस्थ : 2028 को नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए हमारी सभी तरह के प्रबंधन एवं तैयारियां तेजी से जारी हैं। हम सब मिलकर पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण से काम करेंगे, तभी सिंहस्थ : 2028 एक नई मिसाल कायम करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन में ‘सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प’ विषय पर हुई एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ : 2028 के महाआयोजन से जुड़े सभी प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों एवं अन्य जनों से कहा कि सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। यह हमारी परम्पराओं, विरासत का भव्य प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखने हम सभी की जिम्मेदारी है। इसीलिए अधिकारी-कर्मचारी-स्वयंसेवी संगठन-जनप्रतिनिधि सभी लोग एक टीम की तरह सेवा भावना से कार्य करें, क्योंकि टीम वर्क ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प है। सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन और इसके आस-पास के सभी जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की लागत के विभिन्न श्रेणी के कई विकास कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने पर उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य के काल का वैभव पुन: प्राप्त कर धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का उज्जैन आने का अनुमान है। शिप्रा के नवीन घाटों और मौजूदा घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। सभी श्रद्धालु मां शिप्रा के जल से ही स्नान कर सकें, इसके लिए हमारी सरकार हर तरह के प्रबंध कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत बदल रहा है। देशभर में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है। विरासत से विकास का अनुष्ठान चल रहा है। हमारी धार्मिक और ऐतिहासिक नगरियां देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को लालायित कर रही हैं। उज्जैन काल और महाकाल की नगरी है। सौभाग्यशाली लोगों को ही उज्जैन आने का अवसर मिलता है। सिंहस्थ 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए उज्जैन में दूरगामी दृष्टि के साथ अधोसंरचना विकास के कार्य जारी हैं। यहां किए जा रहे कार्य परमात्मा के आशीर्वाद से हो रहे हैं। सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए हर बार पिछली चुनौतियों को लेकर मंथन हुआ है। यह कार्यशाला भी इसी उद्देश्य के लिए आयोजित की गई है।

सिंहस्थ : 2028 के लिए समितियों का होगा गठन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1980 के सिंहस्थ में उन्होंने स्वयं भी स्काउट एंड गाइड वॉलेंटियर के रूप में श्रद्धालुओं की सेवा की थी। वर्ष 1992 में सिंहस्थ समिति की बैठकों में शामिल होने का अवसर भी मिला। सिंहस्थ समितियों में हर वर्ग के अनुभवी लोगों को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाते हैं। आगामी सिंहस्थ के लिए सभी समितियों का गठन होना है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सिंहस्थ है। पहले के सिंहस्थ में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कराने की चुनौती थी। लेकिन वर्ष 2022 के बाद उज्जैन शहर में होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य शुरू हुए। श्रद्धालुओं के सुविधाजनक आवागमन के लिए अब कोई सड़क ऐसी नहीं बच रही है, जिसे चौड़ा न किया गया हो। शिप्रा नदी पर घाटों का निर्माण कार्य जारी है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना शिप्रा में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार ने देवस्थानों पर सुविधाएं विकसित करने का काम कर रही है। शिप्रा में पक्के घाटों के निर्माण से मिट्टी का कटाव थमेगा, साथ ही नदी की धारा अविरल और एक जैसी बनी रहेगी।

विकसित की जा रही है बेहतर रोड कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन आने-जाने के लिए आसपास के सभी शहरों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। पड़ोसी राज्यों से भी चर्चा कर श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। दूसरी ओर रेलवे लाइन के विकास कार्य भी आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब फतेहाबाद का ट्रैक चालू हो गया है और नागदा जाने के लिए रेलगाड़ियों को अब उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री ने उज्जैन में एक नए रेलवे स्टेशन की सौगात दी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के जरिए पिछले सिंहस्थ आयोजनों में उज्जैन में सेवाएं दे चुके सभी अनुभवी अधिकारियों और नागरिकों से जो भी सुझाव मिलेंगे, हम उन सुझावों पर बेहतर अमल कर सिंहस्थ : 2028 का सफल आयोजन सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में सिंहस्थ 2028 को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त, सुरक्षित एवं सुविधाजनक स्नान स्थल उपलब्ध कराने के लिए 778 करोड़ रुपए की लागत से मां शिप्रा के दोनों तटों पर 29 किमी से अधिक लंबाई के नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही 120 करोड़ रुपए राशि से मौजूदा 7.8 किमी के स्थायी घाटों का उन्नयन किया जा रहा है। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए उज्जैन को सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जोड़ा जा रहा है। उज्जैन की चारों दिशाओं में 6 लेन 4 लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। करीब 1692 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर 6 लेन रोड तो लगभग पूर्ण हो गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन और आंतरिक मार्गों पर यातायात अवरुद्ध ना हो इसके लिए 853.46 करोड़ रुपए राशि से 22 नवीन पुलों का निर्माण एवं वर्तमान पुलों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। 17 पुल नदी पर और 5 रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण प्रगतिरत है। सिंहस्थ के दौरान रियल टाइम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए केंद्रीय डिजिटल कमांड सेंटर का विकास 139 करोड़ रुपए राशि से किया जा रहा है। सेंटर में शहर और मेला क्षेत्र की एकीकृत सीसीटीवी निगरानी, एआई आधारित भीड़ प्रबंधन आदि की सुविधा रहेगी। सिंहस्थ को सुरक्षित बनाने के लिए एकीकृत आपदा प्रबन्धन, मानव संसाधन प्रशिक्षण और अग्नि सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 5,017 करोड़ रुपए से उज्जैन-जावरा मार्ग एवं 2,935 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, 2,523 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-झालावाड़ 2 लेन से फोरलेन, 351 करोड़ रुपए से उज्जैन-मक्सी 2 लेन से फोरलेन, 2,660 करोड़ रुपए से उज्जैन-गरोठ मार्ग, 7.02 करोड़ रुपए से सिंहस्थ बाईपास निर्माण कर श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम बनाया जाएगा। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुगम और निर्बाध रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 236 स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इसके साथ ही 7 रेलवे स्टेशन उज्जैन, नई खेड़ी, चिंतामन, पंवासा, मोहनपुरा, पिंगलेश्वर और विक्रम नगर का उन्नयन एवं आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुगम कनेक्टिविटी के लिए उज्जैन-देवास रोड पर करीब 457 एकड़ भूमि पर नवीन हवाई अड्डे का निर्माण किया जा रहा है। करीब 13.45 करोड़ रुपए से सदावल में 4 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है।

कार्यशाला में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे। कमिश्नर उज्जैन एवं मेलाधिकारी आशीष सिंह ने सिंहस्थ के लिए की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। कार्यशाला में कलेक्टर उज्जैन रोशन कुमार सिंह, पिछले सिंहस्थ में सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त एवं वर्तमान में सेवारत प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। अपर पुलिस महानिदेशक उज्जैन राकेश गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।

 

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