मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार वर्ष 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई तक

भोपाल

प्रदेश में शासकीय कार्यप्रणाली में नवाचार, सुशासन और जनसेवा के उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” (नवाचार हेतु) वर्ष 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने जानकारी दी कि यह पुरस्कार मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों, विभागाध्यक्ष कार्यालयों तथा उनके अधीन कार्यरत निगम, मंडल, बोर्ड एवं संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारियों को उनके नवाचार आधारित उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया जाएगा।

यह पुरस्कार 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 की अवधि में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिये प्रदान किये जायेंगे। ऐसे कार्य जिनसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सेवा प्रदाय व्यवस्था अथवा जनहित में सकारात्मक और प्रभावी परिवर्तन आया हो।

“मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार” के अंतर्गत नागरिक सेवा प्रदाय, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुशासन, शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण, अधोसंरचना, सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण, रोजगार एवं आर्थिक विकास जैसे प्रमुख कार्यक्षेत्रों में किए गए नवाचारों को सम्मानित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार की संख्या 15 होगी। प्रत्येक पुरस्कार के लिए 1 लाख रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा। किसी एक कार्यक्षेत्र में एक से अधिक शासकीय सेवक पात्र पाए जाने पर पुरस्कार राशि समान रूप से वितरित की जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन 15 जुलाई 2026 किये जा सकेंगे। पुरस्कार से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश एवं आवेदन प्रक्रिया विभाग की वेबसाइट awards.mp.gov.in पर उपलब्ध है।

 

सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें विश्वविद्यालय : मंत्री परमार

भोपाल 

विद्यार्थियों का सर्वांगीण हित, हमारी प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को सरलता और सुलभता से सुविधाएं उपलब्ध हो, इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। समस्त विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों की अंकसूची, उपाधि एवं अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित, प्रमाणित एवं सरल डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन कराते हुए उन्हें उपलब्ध पाठ्यक्रमों में रुचि एवं आवश्यकता अनुसार चयन के लिए प्रेरित कर, शैक्षणिक उन्नयन से जोड़ा जाए। विश्वविद्यालयों के कार्यों का प्रभाव, सामाजिक परिवर्तन की अभिप्रेरणा बने। विश्वविद्यालय, सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में, (एनएडी-डिजिलॉकर) एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन” विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री  परमार ने एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के क्रियान्वयन में, देश भर में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया एवं देश भर में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के यशस्वी नेतृत्व में, हमारा प्रदेश उच्च शिक्षा को आधुनिक, नवाचारयुक्त, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य हर विद्यार्थी तक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में, यह एक महत्वपूर्ण पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक केवल सुविधा का ही माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त आधार है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी डिजिटल रूप से सक्षम, ज्ञानसम्पन्न एवं वैश्विक अवसरों के लिए तैयार बने। विश्वविद्यालयों में परीक्षा एवं परिणाम को पारदर्शितापूर्ण बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। डिजिटल मूल्यांकन पद्धति से परीक्षा एवं परिणाम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

मंत्री  परमार ने कहा कि विद्यार्थी को संवेदनशील एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाना, विश्वविद्यालयों का दायित्व है। इसके लिए राष्ट्रहित एवं समाज हित में संस्कार रोपित करने की आवश्यकता हैं। मंत्री  परमार ने कहा कि शिक्षकों के आचरण को विद्यार्थी आत्मसात करते हैं, इसलिए शिक्षण व्यावहारिक होना चाहिए। मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए, भारतीय दृष्टि के साथ शैक्षणिक परिदृश्य सृजन करना होगा।

मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षण, डिजिटल गवर्नेंस एवं गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना, हमारी प्राथमिकताओं में समाहित है। एनएडी-डिजिलॉकर के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज सुरक्षित, प्रमाणित एवं डिजिटल रूप में सहज उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। एनएडी-डिजिलॉकर, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ बना रहा है। वहीं (स्वयं) पोर्टल, युवाओं को देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं संस्थानों से ऑनलाइन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, छात्र हित को प्राथमिकता देते हुए एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।  राजन ने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाते हुए समस्त विद्यार्थियों का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन एवं परीक्षा में प्रतिभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, अकादमिक कैलेंडर का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हों।  राजन ने विश्वविद्यालयों को पारदर्शितापूर्ण प्रशासनिक प्रबंधन के लिए, समर्थ पोर्टल पर शिफ्ट करने के लिए भी प्रेरित किया।

उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन देते हुए मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन प्रो खेमसिंह डेहरिया ने, कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विषयविद सु दीक्षा राजपूत संयुक्त सचिव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली एवं  अभिनव शर्मा क्षेत्रीय समन्वयक एनएडी-डिजिलॉकर ने, कार्यशाला की प्रासंगिकता, आवश्यकता एवं महत्ता के आलोक में अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयविद एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत संवाद करेंगे और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे।

कार्यशाला में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रशासनिक सदस्य  महेशचंद चौधरी एवं आयोग के सचिव डॉ देवेंद्र सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

रेल यात्रियों की सुरक्षा एवं विश्वास का प्रतीक बनी जीआरपी — जबलपुर, ग्वालियर एवं इंदौर

भोपाल 

मध्यप्रदेश रेलवे पुलिस द्वारा रेल यात्रियों की सुरक्षा, संपत्ति संरक्षण एवं जनविश्वास कायम रखने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जीआरपी जबलपुर, ग्वालियर एवं इंदौर द्वारा चोरी एवं जेवरात संबंधी मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं इंदौर जीआरपी ने ईमानदारी एवं तत्परता का परिचय देते हुए यात्री का जेवरों से भरा बैग सुरक्षित लौटाकर सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

जीआरपी जबलपुर

थाना जबलपुर द्वारा रनिंग ट्रेनों एवं रेलवे स्टेशन क्षेत्र में चलाये जा रहे विशेष चेकिंग अभियान के दौरान एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से सोने का मंगलसूत्र, चेन, बाली, लॉकेट एवं चांदी की पायल सहित लगभग 2 लाख 85 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।

एक अन्‍य कार्यवाही में जबलपुर की टीम द्वारा एक महिला चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी के आभूषण जप्त किये गये। महिला आरोपी द्वारा यात्रियों की भीड़ का फायदा उठाकर चोरी की वारदातों को अंजाम दिया जाता था। कार्रवाई के दौरान उसके कब्जे से 8 हजार 750 रूपए मूल्य के आभूषण जब्‍त किये गये।

जीआरपी ग्वालियर

जीआरपी ग्वालियर द्वारा ट्रेनों एवं रेलवे स्टेशन क्षेत्र में जेवरात एवं नगदी चोरी करने वाले गिरोह के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए विभिन्न प्रकरणों में संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों द्वारा अलग-अलग ट्रेनों में यात्रियों के पर्स, नगदी एवं सोने-चांदी के आभूषण चोरी करने की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। लगातार निगरानी, मुखबिर सूचना एवं तकनीकी विश्लेषण के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कब्जे से चोरी गये सोने-चांदी के आभूषण एवं नगदी सहित लगभग 7 लाख 30 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।

जीआरपी इंदौर

जीआरपी इंदौर ने रेलवे स्टेशन इंदौर से ट्रॉली बैग चोरी का मात्र 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्‍जे से लगभग 2 लाख 82 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।

इसके अतिरिक्त जीआरपी इंदौर ने ईमानदारी, संवेदनशीलता एवं तत्परता का परिचय देते हुए ट्रेन में छूटे लगभग 8 लाख 50 हजार रूपए मूल्य के जेवरों से भरे बैग को कुछ ही घंटों में सुरक्षित खोजकर संबंधित यात्री के सुपुर्द किया। जीआरपी की इस सराहनीय कार्रवाई से यात्रियों में सुरक्षा एवं विश्वास की भावना और अधिक मजबूत हुई है। यह कार्रवाई रेल पुलिस की जनसेवा, जिम्मेदारी एवं मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

माता और बहनों का सम्मान सर्वोपरि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार के लिये माताओं और बहनों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मातृ शक्ति के कल्याण के लिये प्रदेश शासन द्वारा संचालित सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। आज यहाँ पर रक्षाबंधन, भाईदूज और दीवाली सहित सभी त्यौहार एक साथ मनाने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी में आयोजित मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त के राशि अन्तरण और हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1835 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 296 करोड़ रुपये लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ ही उन्हें सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब तक योजना में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाड़ली बहनों के खातों में अंतरित की जा चुकी है।

रानी दुर्गावती के पराक्रम के सम्मान में जबलपुर व सिंग्रामपुर में हुईं कैबिनेट बैठकें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान नरसिंह की यह भूमि रानी दुर्गावती के पराक्रम की साक्षी है। रानी दुर्गावती के सम्मान में प्रदेश सरकार द्वारा जबलपुर और सिंग्रामपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित की है। वहीं आदिवासी शहीद भभूत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सम्मान में भी विशेष कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 6 पर महिला सांसद हैं, जबकि 27 महिला विधायक एवं 5 महिला मंत्री कार्यरत हैं।

कम्प्यूटर एवं सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाएं आ रहीं हैं आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर और सुरक्षा के क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही है। पुलिस विभाग में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि 4 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़ी हैं। रेडीमेड कपड़ा उद्योग एवं कारखानों में कार्य करने वाली महिलाओं को 5000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही 34 लाख महिला कृषकों को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 25 गाय या भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों को सरकार द्वारा 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।

उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर जिला गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है और यह शक्कर का कटोरा है। इससे यहां के 20 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। गाडरवारा की तुअर दाल प्रदेश ही नहीं देश में भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। नरसिंहपुर जिला सोयाबीन और गेहूं के उत्पादन में भी अग्रणी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गेहूं, चना, सरसों, मसूर एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित कर रही है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। मध्यप्रदेश देश का सबसे अधिक गेहूं खरीदी करने वाला राज्य है। किसानों के हित में 23 मई तक खरीदी की जा रही है। आवश्यकता हुई तो आगे भी खरीदी की अवधि बढ़ाई जाएगी।

मध्यप्रदेश में हो रहा तेजी से विकासात्मक बदलाव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश बदल रहा है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। सिकलसेल, कुपोषण से लड़ने में प्रदेश सरकार सफल हो रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना से 53 लाख बेटियों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। प्रदेश की 80 लाख बेटियों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 55 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।

सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार का 1.50 लाख रुपये का खर्च देगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना में नरसिंहपुर जिले में बेहतर कार्य हो रहा है। इस योजना में सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का सारा खर्च सरकार दे रही है। पहले दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग डरते थे, लेकिन अब उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि मानवीय पहल कर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों को सरकार द्वारा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदाय की जा रही है।

जल की एक-एक बूंद बचाने की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि जल है, तो जीवन है, जल है तो खेती है और जल है तो समृद्धि है। हमारे धार्मिक अनुष्ठानों में भी जल का विशेष महत्व है। प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आमजन को सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विकासखंड के ग्राम मेख में एक मालगुजार द्वारा 21 एकड़ जमीन तालाब निर्माण के लिए दान किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह अनुकरणीय उदाहरण है। परिवार को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जायेगा।

जिले की धरोहरों पर केंद्रित कैलेंडर का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नरसिंहपुर जिले की ऐतिहासिक धार्मिक एवं पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित कलेंडर का विमोचन किया। कैलेंडर में बरमान घाट, मृगनाथ तपोवन आश्रम, दादा दूल्हादेव महाराज, नरसिंह मंदिर, चौगान का किला, बरहेटा की पुरातात्विक धरोहर, गरूण मंदिर, बिनेकी टोला के शैल चित्र, मां राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी मंदिर, पीतल नगरी चीचली, गुरू गुफा अमोदा शंकर घाट को शामिल किया गया है।

40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 296 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि-पूजन किया। इसमें 215 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत के 17 कार्यों का भूमि-पूजन एवं 80 करोड़ 68 लाख रुपये लागत के 23 कार्यों का लोकार्पण के कार्य शामिल है।

मुंगवानी में बनेगा कॉलेज, शेढ़ नदी पर बनेगा पुल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के ग्राम मुंगवानी में कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने बेलखेड़ी- बरहटा- मुंगवानी मार्ग के शेढ़ नदी पर पुल निर्माण, नरसिंहपुर में इंडोर आउडोर स्टेडियम का उन्नयन के साथ ही हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान और ग्राम बुढ़ैना में बांध निर्माण की घोषणा की।

पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई अपील अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से ईधन के न्यूनतम उपयोग का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर कर 8 कर दी गई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदें। रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें, जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दे और प्राकृतिक खेती को अपनाएं।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिये उत्सव और सम्मान का दिन है। प्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी पहल ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री  प्रह्लाद पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान, श्रमिक और मातृशक्ति के कल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मविश्वास पैदा किया है और महिलाओं को परिवार तथा समाज में नई पहचान मिली है।

सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना जैसी महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर मध्यप्रदेश ने पूरे देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर निरंतर कार्य कर रही है।

सांसद  चौधरी दर्शन सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के समग्र कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। विभिन्न जनहितकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को आधुनिक कृषि सुविधाएं, युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा गरीब परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

विभिन्न योजनाओं में किया हितलाभ वितरण, प्रतिभाओं को किया सम्मानित

कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा शासकीय योजनाओं एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने आगंतुकों और उपस्थित जनसमूह का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभागों के नवाचारों और प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले की नवाचारी पहल “अभ्युदय निःशुल्क कोचिंग” के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को दी जा रही शैक्षणिक सहायता को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा प्रदर्शित समेकित नरवाई प्रबंधन प्रणाली के मॉडल का अवलोकन कर अधिकारियों से चर्चा की तथा किसानों के हित में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

प्रदर्शनी में गन्ने के अवशेषों से निर्मित पर्यावरण अनुकूल प्लाईवुड, पारंपरिक पीतल के बर्तन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए सजावटी एवं उपयोगी उत्पाद भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन उत्पादों का अवलोकन कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभों का वितरण किया। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को स्वीकृति-पत्र एवं आर्थिक सहायता प्रदान कर शासन की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र एवं टैबलेट प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही वॉलीबॉल एवं क्रिकेट प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ट्रैक सूट भेंट कर प्रोत्साहित किया गया।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को सीसीएल राशि सहित विभिन्न हितलाभ वितरित किए गए। राहवीर योजना अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने वाले राहगीरों को भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम में 51 लाड़ली बहनों ने कलश यात्रा के माध्यम से अगवानी की। उन्होंने इन बहनों को साड़ी भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लाड़ली बहनों पर पुष्प-वर्षा कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन व दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष मती ज्योति काकोड़िया, तेंदूखेड़ा विधायक  विश्वनाथ सिंह पटेल, विधायक सिवनी  दिनेश राय, पूर्व राज्यमंत्री  जालम सिंह पटेल, जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में लाड़ली बहने मौजूद रहीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं

  •         नरसिंहपुर के मुंगवानी में महाविद्यालय खोला जाएगा।
  •         शेढ़ नदी पर 24 करोड़ की लागत से 250 मीटर लंबा पुल बनेगा।
  •         नरसिंहपुर के हॉकी स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ बिछाई जाएगी।
  •         सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए बुडेना बांध के लिए परीक्षण करवाया जाएगा।

डुमना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री डॉ यादव का आत्मीय स्वागत.

जबलपुर 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आज शाम डुमना एयरपोर्ट पहुंचने पर आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री शाम करीब 7.10 बजे अनूपपुर जिले के बिजुरी से हेलीकॉप्टर द्वारा ट्रांजिट विजिट पर डुमना एयरपोर्ट पहुँचे थे।

डुमना एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का स्वागत जिला पंचायत अध्यक्ष आशा गोंटिया, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  संदीप जैन एवं उपाध्यक्ष  प्रशांत केशरवानी, नगर निगम अध्यक्ष  रिकुंज विज, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष  अखिलेश जैन, नगर अध्यक्ष  रत्नेश सोनकर, ग्रामीण जिला अध्यक्ष  राजकुमार पटेल, पूर्व मंत्री  हरेंद्र जीत सिंह बब्बू, पूर्व महापौर  प्रभात साहू,  पंकज दुबे,  सुभाष तिवारी रानू,  सोनू बचवानी,  रंजीत पटेल,  प्रणीत वर्मा,  अंकित द्विवेदी,  कौशल सूरी,  मुरली दुबे आदि ने किया।

डुमना एयरपोर्ट पर  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आगवानी संभागायुक्त धनंजय सिंह, उप पुलिस महानिरीक्षक अतुल सिंह, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय एवं नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने की। मुख्यमंत्री डॉ यादव डुमना एयरपोर्ट से शाम लगभग 7.50 बजे वायुयान से रायपुर रवाना हुये

माताओं-बहनों का सम्मान प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

नरसिंहपुर

13 मई 2026. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार के लिये माताओं और बहनों का सम्मान सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रदेश शासन की सबसे बड़ी और प्रभावी योजनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि नरसिंहपुर की पावन धरती पर बहनों के बीच पहुंचकर ऐसा अनुभव हो रहा है मानो रक्षाबंधन, भाईदूज और दीपावली जैसे सभी पर्व एक साथ मनाए जा रहे हों

मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी में आयोजित मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के राज्य स्तरीय हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में योजना की 36वीं किस्त के रूप में 1835 करोड़ रुपये की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित की। साथ ही 296 करोड़ 34 लाख रुपये लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर जिले को विकास की बड़ी सौगात दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि बहनों के खातों में अंतरित की जा चुकी है।

रानी दुर्गावती के पराक्रम को नमन 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान नरसिंह की यह भूमि वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य और पराक्रम की साक्षी रही है। उनके सम्मान में प्रदेश सरकार द्वारा जबलपुर एवं सिंग्रामपुर में विशेष कैबिनेट बैठकों का आयोजन किया गया। वहीं आदिवासी शहीद भभूत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को स्मरण करते हुए भी विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 6 पर महिला सांसद, 27 महिला विधायक तथा 5 महिला मंत्री कार्यरत हैं।

महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। अब महिलाएं केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कम्प्यूटर, सुरक्षा, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं। पुलिस विभाग में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

     उन्होंने बताया कि प्रदेश में 4 लाख से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं। रेडीमेड वस्त्र उद्योग एवं कारखानों में कार्यरत महिलाओं को 5 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही 34 लाख महिला कृषकों को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 गाय या भैंस पालन करने वाले पशुपालकों को सरकार द्वारा 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुरनूर नस्ल की गौवंश का पूजन किया। साथ ही उनके बछड़ों को दूध पिलाया। यह इंडो- ब्राजिलियन नस्ल की बताई गई है।

किसानों के हित में सरकार प्रतिबद्ध

     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर जिला गन्ना उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और इसे “शक्कर का कटोरा” कहा जाता है। गाडरवारा की तुअर दाल देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यह जिला गेहूं एवं सोयाबीन उत्पादन में भी अग्रणी है।  

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गेहूं, चना, सरसों, मसूर एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित कर रही है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक गेहूं खरीदी करने वाला राज्य बन चुका है। किसानों के हित में 23 मई तक खरीदी जारी रहेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अवधि और बढ़ाई जाएगी।

विकास की नई दिशा में मध्यप्रदेश     

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में व्यापक परिवर्तन हुए हैं और मध्यप्रदेश भी तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार सिकल सेल एवं कुपोषण जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से मुकाबला कर रही है।   

उन्होंने बताया कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से 53 लाख बेटियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रदेश की 80 लाख बेटियों को शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति दी जा रही है तथा मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 55 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

सड़क दुर्घटना पीड़ितों के उपचार का खर्च उठाएगी सरकार 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार हेतु 1.50 लाख रुपये तक का पूरा खर्च सरकार वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि अब दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले लोगों को डरने की आवश्यकता नहीं है। घायल को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों को सरकार द्वारा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

जल संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि “जल है तो जीवन है, जल है तो खेती है और जल है तो समृद्धि है।” उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की।

उन्होंने नरसिंहपुर जिले के ग्राम मेख में एक मालगुजार द्वारा तालाब निर्माण के लिए 21 एकड़ भूमि दान करने की सराहना करते हुए इसे अनुकरणीय पहल बताया।

जिले की धरोहरों पर आधारित कैलेंडर का विमोचन 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में नरसिंहपुर जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित विशेष कैलेंडर का विमोचन किया। इसमें बरमान घाट, मृगनाथ तपोवन आश्रम, दादा दूल्हादेव महाराज, नरसिंह मंदिर, चौगान का किला, बरहेटा की पुरातात्विक धरोहर, गरूण मंदिर, बिनेकी टोला के शैल चित्र, मां राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी मंदिर, पीतल नगरी चीचली तथा गुरु गुफा अमोदा शंकर घाट जैसे प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है।

40 विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 296 करोड़ 34 लाख रुपये लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 215 करोड़ 65 लाख रुपये लागत के 17 कार्यों का भूमिपूजन तथा 80 करोड़ 68 लाख रुपये लागत के 23 कार्यों का लोकार्पण शामिल है।

मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण घोषणाएं 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंगवानी में कॉलेज खोलने की घोषणा की। साथ ही बेलखेड़ी-बरहटा-मुंगवानी मार्ग पर शेढ़ नदी पर पुल निर्माण, नरसिंहपुर में इंडोर-आउटडोर स्टेडियम उन्नयन, हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान निर्माण तथा ग्राम बुढ़ैना में बांध निर्माण की भी घोषणा की।

पेट्रोल-डीजल की बचत और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने खर्चों में नियंत्रण रखने की अपील की है। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि उनके काफिले में अब केवल 8 वाहन ही चलेंगे।   

उन्होंने आमजन से भी सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, पेट्रोल-डीजल की अनावश्यक खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील की।

विभागीय प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र   

कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा शासकीय योजनाओं एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभागों के नवाचारों की सराहना की।

उन्होंने “अभ्युदय निःशुल्क कोचिंग” पहल को प्रेरणादायी बताते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को दी जा रही सहायता की प्रशंसा की। कृषि विभाग द्वारा प्रस्तुत समेकित नरवाई प्रबंधन मॉडल का अवलोकन कर किसानों के हित में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए।

प्रदर्शनी में गन्ने के अवशेषों से निर्मित पर्यावरण अनुकूल प्लाईवुड, पारंपरिक पीतल के बर्तन तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार सजावटी एवं उपयोगी उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। एक जिला एक उत्पाद के तहत महिलाओं ने मुख्यमंत्री को अरहर दाल से निर्मित मुख्यमंत्री की तस्वीर भेंट की।

प्रतिभाओं का सम्मान 

कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र एवं आर्थिक सहायता वितरित की गई। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र एवं टैबलेट देकर सम्मानित किया गया। 

वॉलीबॉल एवं क्रिकेट प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ट्रैक सूट प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। वहीं सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले राहगीरों को भी सम्मानित किया गया।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर 51 लाड़ली बहनों ने कलश यात्रा के माध्यम से उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने बहनों को साड़ी भेंट कर सम्मानित किया तथा कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लाड़ली बहनों पर पुष्पवर्षा कर आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।  

प्रदेश शासन के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिये उत्सव और सम्मान का दिवस है। प्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी पहल ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

 उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में जन्म लेने वाली प्रत्येक बेटी को सरकार सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के लिये अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। शासकीय सेवाओं में महिलाओं को आरक्षण प्रदान कर उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास और सम्मान बढ़ा है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री  प्रह्लाद पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान, श्रमिक और मातृशक्ति के कल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मविश्वास पैदा किया है और महिलाओं को परिवार तथा समाज में नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। आज प्रदेश की बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। सरकार महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है।

सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना जैसी महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर मध्यप्रदेश ने पूरे देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है।

सांसद  चौधरी दर्शन सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के समग्र कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जनहितकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को आधुनिक कृषि सुविधाएं, युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा गरीब परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन विधायक गोटेगांव  महेंद्र नागेश ने दिया।

इस अवसर परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष मती ज्योति काकोड़िया, तेंदूखेड़ा विधायक  विश्वनाथ सिंह पटेल, विधायक सिवनी  दिनेश राय, पूर्व राज्यमंत्री  जालम सिंह पटेल, पूर्व राज्यसभा सदस्य  कैलाश सोनी, पूर्व विधायक  हाकम सिंह चढ़ार,  नरेश पाठक, मती साधना स्थापक,  रामसनेही पाठक, संभागायुक्त  धनंजय सिंह, कलेक्टर मती रजनी सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में लाड़ली बहने मौजूद थी।माताओं-बहनों का सम्मान प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मिल्क मैजिक में मिलावट का बड़ा खुलासा: पाम ऑयल मिलाकर तैयार हो रहे थे डेयरी प्रोडक्ट

भोपाल
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डेयरी उद्योग में बड़े पैमाने पर मिलावट और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ी सफलता हासिल की है।प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने 11 मई, 2026 को जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक किशन मोदी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आधिकारिक तौर पर आरोप पत्र दाखिल किया।

पूर्व संज्ञान सुनवाई के बाद, भोपाल स्थित विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम न्यायालय ने आरोपों का औपचारिक संज्ञान लिया है।जांच से मिल्क मैजिक ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले मिलावटी डेयरी उत्पादों के निर्माण से जुड़े एक बेहद चिंताजनक गिरोह का खुलासा हुआ है।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, कंपनी ने प्राकृतिक मिल्क फैट को पाम ऑयल और अन्य हानिकारक पदार्थों से बदलकर संगठित धोखाधड़ी की। ये मिलावटी उत्पाद न केवल घरेलू बाजारों में व्यापक रूप से वितरित किए गए, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए गए, जिससे समाज के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हुआ।

संघीय एजेंसी ने खुलासा किया कि कंपनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने के लिए अत्यधिक भ्रामक तरीकों का इस्तेमाल किया।धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई जांच में पता चला कि कंपनी ने प्रतिष्ठित संस्थानों से कथित तौर पर प्राप्त जाली प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्ट निर्यात निरीक्षण एजेंसी को आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत की थीं।

निर्यात के लिए नकली रिपोर्ट तैयार की
जांच एजेंसी ने बताया कि निर्यात की मंजूरी हासिल करने के लिए कंपनी ने प्रतिष्ठित लैब्स की फर्जी टेस्ट रिपोर्ट्स जमा की थीं। संबंधित प्रयोगशालाओं से सत्यापन कराने पर कई रिपोर्ट्स नकली पाई गईं। ईडी के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनी ने मिलावटी डेयरी उत्पादों का निर्यात कर करीब 19.69 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की।

ईडी ने कहा कि यह राशि कंपनी के बैंक खातों के माध्यम से संचालित की गई, जिसे पीएमएलए के तहत “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) माना गया है। मामले में एजेंसी पहले ही कंपनी की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है।

कंपनी के अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही
इस पूरे मामले की जांच भोपाल के हबीबगंज थाना और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए थे।

ईडी ने कार्रवाई करते हुए कंपनी के प्रबंध निदेशक किशन मोदी को 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था, जबकि तत्कालीन CEO सुनील त्रिपाठी को 20 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

एजेंसी के मुताबिक कंपनी के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले समय में मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

जांच करने पर, संबंधित प्रयोगशालाओं ने पुष्टि की कि ये रिपोर्टें वास्तव में मनगढ़ंत थीं।

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि मिलावटी सामानों के इन धोखाधड़ीपूर्ण निर्यातों के माध्यम से कंपनी ने लगभग 19.69 करोड़ रुपए की आपराधिक आय अर्जित की।

यह धनराशि विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से भेजी गई थी और इसे औपचारिक रूप से आपराधिक आय के रूप में मान्यता दी गई है।

यह मामला हबीबगंज पुलिस स्टेशन और भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा में कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर से उत्पन्न हुआ।

जांच के शुरुआती चरण में, प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपियों से जुड़ी अचल संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया था।

बच्चों का सर्वांगीण विकास ही विकसित मध्यप्रदेश @2047 की आधारशिला: मंत्री भूरिया

बच्चों का सर्वांगीण विकास ही विकसित मध्यप्रदेश @2047 की आधारशिला: मंत्री  भूरिया

“परिणामोन्मुखचाइल्ड बजटिंग कार्यशाला में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागीय समन्वय पर दिया जोर

भोपाल 

महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मध्यप्रदेश के बच्चों का सर्वांगीण विकास ही राज्य के सतत और समावेशी विकास की आधारशिला बनेगी। मंत्री सुश्री भूरिया बुधवार को होटल कोर्टयार्ड मैरियट में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘चाइल्ड बजटिंग इन मध्यप्रदेश’ विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।

बजट 2026-27: बच्चों के लिए रिकॉर्ड आवंटन

मंत्री सुश्री भूरिया ने बताया कि वर्ष 2026-27 के राज्य बजट में बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दिखती है। उन्होंने मुख्य वित्तीय प्रावधानों को साझा करते हुए कहा कि बजट में इस वर्ष 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है।स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में 23 हजार 747 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें ‘पोषण 2.0’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। राज्य के कुल व्यय का 13.7 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर व्यय के लिये आवंटित किया गया है।

19 विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता

मंत्री सुश्री भूरिया ने स्पष्ट किया कि बच्चों का विकास केवल संबंधित बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा चाइल्ड बजट स्टेटमेंट में अब 19 विभागों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय जैसे सभी विभागों को एक निर्धारित लक्ष्य अनुसार मिलकर काम करना होगा। विभागों के बीच जब बेहतर समन्वय होगा, तभी बजट का वास्तविक लाभ धरातल पर दिखेगा।

जिलों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ध्यान

मंत्री सुश्री भूरिया ने प्रदेश के 55 जिलों की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि हर जिले में बच्चों की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय आवश्यकताओं को समझें और उसी के अनुरूप कार्य योजना बनाएं।

3 करोड़ बच्चे हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी” : आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता

महिला एवं बाल विकास आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कि राज्य की लगभग 40 प्रतिशत आबादी 3 करोड़ बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि चाइल्ड बजट की रिपोर्टिंग को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाना अनिवार्य है।विभागों को केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि साक्ष्यों पर ध्यान देना होगा कि उनकी योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों तक कैसे पहुँच रहा है।

5 वर्षों की सफलता और ‘इक्विटी’ पर जोर : विलियम हैनलोन जूनियर

यूनिसेफ मध्यप्रदेश के चीफ फील्ड स्टॉफ, श्री विलियम हैनलोन ने कहा कि मध्यप्रदेश ‘चाइल्ड बजटिंग’ के 5 सफल वर्ष पूरे कर चुका है और यह केवल खर्च की रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर ‘परिणाम-आधारित’ बजटिंग की ओर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश की अधिकांश जनजातीय आबादी को देखते हुए बजट में लिंग और भौगोलिक स्थिति के आधार पर समानता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

विकसित भारत @2047′ के लिए रणनीतिक निवेश : क्रिस्टीना पोपीवानोवा

यूनिसेफ की सोशल पॉलिसी चीफ (दिल्ली) सुश्री क्रिस्टीना पोपीवानोवा ने मध्यप्रदेश की इस पहल को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन के अनुरूप बताया।उन्होंने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब बच्चों में निवेश को ‘लाभार्थी’ के नजरिए से नहीं बल्कि ‘उत्पादकता’ के आधार पर देखा जाए ।

महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री अभिताभ अवस्थी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बाल बजट के अंतर्गत 75 हजार 587 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राशि राज्य के कुल बजट का 19.4 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद का 4.1 प्रतिशत है। वर्ष 2022 में बाल बजटिंग की पहल शुरू करने के बाद, मध्यप्रदेश अब इसके पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस प्रक्रिया में विभागों की भागीदारी 17 से बढ़कर 19 हो गई है, जो राज्य की “होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच”को दर्शाती है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों का संचालन यूनिसेफ की सामाजिक नीति विशेषज्ञ सुश्री पूजा सिंह द्वारा किया गया। इसमें शामिल 19 विभागों के प्रतिनिधियों ने बजट प्रक्रिया और क्रियान्वयन के अपने अनुभव साझा किए।

 

सादगी की मिसाल: सिर्फ 8 गाड़ियों के काफिले में निकले CM मोहन यादव, मंत्रियों ने भी घटाया लाव-लश्कर

भोपाल 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने की अपील के बाद एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने काफिले में से 5 वाहन कम कर दिए हैं। सीएम के कारकेड में अब तक 13 वाहन चलते थे अब 8 वाहन ही साथ रहेंगे।

सीएम के काफिले में सिर्फ 8 वाहन रहे
भोपाल से नरसिंहपुर रवाना होते वक्त सीएम डॉ. मोहन यादव के काफिले में आज सिर्फ आठ वाहन ही नजर आए।

डिप्टी सीएम शुक्ल का ऐलान कम से कम गाड़ियां काफिले में रहेंगी
सीएम के बाद अब डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने अपने काफिले में कम से कम गाड़ियां चलाने का ऐलान किया है। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने सोशल मीडिया पर लिखा- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर राष्ट्रहित में ईंधन संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस दिशा में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग भी पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ योगदान देगा।

आगामी आदेश तक विभागीय भ्रमण, निरीक्षण एवं अन्य शासकीय गतिविधियों में न्यूनतम वाहनों का उपयोग किया जाएगा। अनावश्यक वाहन रैली, अतिरिक्त काफिले और ईंधन की खपत वाले आयोजनों से परहेज किया जाए।

विभाग के अफसर कार पुलिंग को प्राथमिकता दें
डिप्टी सीएम ने कहा कि विभाग के सभी अधिकारी भी शासकीय कार्यों में सादगी अपनाते हुए सार्वजनिक परिवहन अथवा साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित भोजन का भी सीधा संबंध है। इसी दृष्टि से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है, जिससे रासायनिक उर्वरकों (जो अधिकांश आयातित होते हैं) का उपयोग कम हो, भूमि और जल की गुणवत्ता सुरक्षित रहे तथा आमजन को स्वास्थ्य कर अन्न उपलब्ध हो।

यह जनस्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा है कि ऊर्जा संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण के इस संदेश को भी जनजागरूकता अभियानों में शामिल करें। ईंधन की बचत, स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक कृषि, ये सभी स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के आधार हैं। राष्ट्रहित सर्वोपरि है। प्रत्येक छोटी बचत, देश की बड़ी शक्ति बनती है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर मध्यप्रदेश राष्ट्रहित में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए संकल्पित है। आगामी आदेश तक मेरे कारकेड में सुरक्षा की दृष्टि से न्यूनतम वाहन होंगे और भ्रमण के दौरान कोई वाहन रैली नहीं होगी। सभी मंत्रीगण भी यात्रा के समय न्यूनतम वाहनों का उपयोग करेंगे। साथ ही, नवनियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों से भी आग्रह है कि वे सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं। राष्ट्रहित सर्वोपरि है। मुख्यमंत्री  मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई अपील को मध्यप्रदेश में पूरी गंभीरता के साथ अमल में लाया जाएगा।

राज्य शासन ने जारी किए निर्देश

* आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री जी के कारकेड में 13 वाहनों के स्थान पर सिर्फ 8 वाहन रहेंगे।
* मुख्यमंत्री जी के भ्रमण के समय कोई वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी।
* सभी मंत्रिगण यात्रा के समय न्यूनतम वाहनों का प्रयोग करेंगे।
* नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करें और कोई वाहन रैली इसमें नहीं रहेगी।

एक कार से मंत्रालय गए खेल मंत्री
खेल और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने भी सुरक्षा में चलने वाले पायलेट और फॉलो वाहन को हटा दिया है। मंत्री सारंग एक कार से स्टाफ के साथ मंत्रालय के लिए रवाना हुए। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान अर्थव्यवस्था का सुधारने करने के लिए है।

इस देश के लिए यदि हम कुछ करना चाहते हैं तो यह हमारा दायित्व है कि प्रधानमंत्री मोदी की सलाह और आवाहन को स्वीकार करें। कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि कम से कम पेट्रोल डीजल का उपयोग करें। यह इस देश के नवनिर्माण के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का यह नया प्रयास है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा इस देश को खड़ा करने का काम किया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कोरोना के समय इतने बड़े देश में महामारी से जीतने का काम हुआ। आगे आने वाली पीढ़ी एक विकसित हिंदुस्तान में रहे, स्वावलंबी हिंदुस्तान का निर्माण करें यह हम सबका कर्तव्य है।

मंत्रियों ने भी कम की गाड़ियां
सीएम मोहन के अलावा दूसरे नेताओं ने भी गाड़ियां कम कर दी हैं. डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने काफिले में कम से गाड़ियां चलाने की बात कही है. वहीं मंत्रियों ने भी अपना काफिला कम कर दिया है. मंत्री विश्वास सारंग ने भोपाल में महज एक गाड़ी का इस्तेमाल किया. मंत्रियों ने सुरक्षा में चलने वाले पायलेट और फॉलो वाहन को हटा दिया है. वह केवल एक कार से ही मंत्रालय के लिए रवाना हुए और इसी तरह से भ्रमण भी किया था. प्रदेश के दूसरे मंत्रियों ने भी काफिले में कमी की है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने की जनता से ये अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील है कि वे पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें. सार्वजनिक परिवहन या कारपूलिंग का इस्तेमाल करें. एक साल तक सोना न खरीदें. ताकि, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके. जनता विदेशी ब्रांड की जगह स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करे। संभव हो सके तो जनता वर्क फ्रॉम होम करें. जनता अगले एक साल तक गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचे. किसान रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें और प्राकृतिक खेती अपनाएं. खाने में जरूरत के अनुसार ही खाद्य तेल का उपयोग करें। 

NEET पेपर लीक में सीहोर कनेक्शन का खुलासा: मास्टमाइंड शुभम ने इसी यूनिवर्सिटी से की थी पढ़ाई

सीहोर
NEET 2026 पेपर लीक मामले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में मध्य प्रदेश के सीहोर जिले का कनेक्शन सामने आया है. राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से डॉक्टर शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है, जो कभी सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी में बीएएमएस का छात्र रह चुका है. इस गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां पेपर लीक नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश तक जुड़े होने की आशंका पर भी जांच कर रही हैं। 

3 मई को हुई थी शुभम की गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने 3 मई 2026 को शुभम खैरनार को हिरासत में लिया था. तब से उससे लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शुभम का सीहोर की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से संबंध रहा है. इसके बाद पुलिस ने यूनिवर्सिटी से भी संपर्क कर आरोपी के शैक्षणिक रिकॉर्ड और गतिविधियों की जानकारी जुटाई। 

सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या शुभम किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था और क्या उसने मेडिकल शिक्षा संस्थानों के माध्यम से किसी तरह का संपर्क या नेटवर्क तैयार किया था. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि पेपर लीक से जुड़े अन्य आरोपियों के साथ उसका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध था या नहीं। 

हालांकि इस पूरे मामले में श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने आरोपी शुभम खैरनार से खुद को अलग कर लिया है. यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवारी ने स्पष्ट कहा कि शुभम ने वर्ष 2021 में बीएएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश जरूर लिया था, लेकिन प्रवेश के बाद वह कभी नियमित रूप से यूनिवर्सिटी नहीं आया. कुलपति के मुताबिक उसने न तो किसी परीक्षा में हिस्सा लिया और न ही किसी शैक्षणिक या अन्य गतिविधि में भागीदारी की। 

यूनिवर्सिटी का दावा, कभी क्लास में नहीं आया था आरोपी
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि आरोपी का संस्थान से केवल नाममात्र का संबंध था और उसका कैंपस गतिविधियों से कोई जुड़ाव नहीं रहा. इसके बावजूद पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपी की भूमिका केवल सीमित थी या वह बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा था। 

गौरतलब है कि NEET 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां हो रही हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें बड़ी रकम के लेनदेन के जरिए अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचाए गए। 

अब सीहोर कनेक्शन सामने आने के बाद जांच और तेज हो गई है. राजस्थान पुलिस आरोपी शुभम खैरनार से पूछताछ के आधार पर उसके संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और शैक्षणिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 

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