PM मोदी और CM यादव की अपील का असर: उज्जैन में अधिकारी ट्रैवलर बस से पहुंचे, 6750 का सफर सिर्फ 250 रुपये में

उज्जैन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘ईंधन बचाओ’ अपील और मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने काम करने का तरीका भी बदल दिया है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही बस में बैठकर सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच प्रशासन का यह कदम चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार, कमिश्नर – अधिकारी निरिक्षण के लिए अलग वाहन नहीं बल्कि ट्रेवलर से पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान, आशीष सिंह ने मितव्ययिता के नियमों के अनुरूप, अन्य अधिकारियों के साथ एक ही बस में यात्रा करके सिंहस्थ से संबंधित कार्यों का नियमित निरीक्षण शुरू किया। इससे पहले, अधिकारी अलग-अलग वाहनों का उपयोग करते थे।

नियमित दौरे के हिस्से के रूप में, व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और नए घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए सुगम पहुंच मार्गों के विकास की निगरानी करने हेतु गौ घाट से अन्य घाटों तक निरीक्षण किए गए।

सिंहस्थ के कार्यों का पिछले एक सप्ताह से अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं। रोज कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी अलग-अलग 15 वाहनों से पहुंचते थे। वे करीब 16 किमी का सफर करते हैं।

अब समझिए कैसे हुई खर्च में कटौती
15 अधिकारी रोज सिंहस्थ क्षेत्र के 16 किमी का सफर तय करते हैं। उससे पहले अपने बंगले से घाट तक पहुंचते हैं, यह भी पांच से सात किमी होता है। ज्यादातर इनोवा कार हैं, जिनका एवरेज 10 किमी प्रति लीटर होता है। वहीं जब अधिकारी निरीक्षण करते हैं, वाहनों के एसी चालू रहते हैं। इस हिसाब से देखें तो प्रत्येक वाहन पर चार लीटर पेट्रोल या डीजल खर्च होता है। 450 रुपए प्रति कार के हिसाब से मानें तो 6750 रुपए प्रतिदिन खर्च होते थे।

अधिकारियों ने बुधवार से ट्रैवलर बस से सफर शुरू किया है। इस बस में पहले दिन वे 12 किमी गए। जिसमें ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ, जो करीब 250 रुपए से भी कम का होता है। हालांकि ट्रैवलर बस 4100 रुपए प्रतिदिन के किराए पर ली गई है।

रोज सुबह किया जा रहा निरीक्षण
सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। घाटों से जुड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के स्थान चिन्हित करने के लिए अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान वे करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं।

टीम भावना भी मजबूत होगी
मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी गाड़ियों से आते थे, जिससे अनावश्यक ईंधन और शासकीय धन का अपव्यय होता था। अब सभी अधिकारी एक साथ यात्रा करेंगे, जिससे टीम भावना भी मजबूत होगी और ईंधन की खपत में भी भारी कमी आएगी।

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि अलग-अलग गाड़ियों का काफिला बनने से ट्रैफिक पर भी असर पड़ता था। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से ईंधन की बचत के साथ जाम जैसी समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने इसे बेहतर और अनुकरणीय पहल बताया।

सिंहस्थ के लिए इतना बजट है प्रस्तावित
बता दें कि, आगामी सिंहस्थ के लिए, ₹3,060 करोड़ के विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है। कंठल चौराहे से सती गेट तक सड़क चौड़ीकरण का काम पहले ही शुरू हो चुका है।

निर्माण कार्य की समय सीमा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सभी निर्माण कार्य 2027 तक, यानी सिंहस्थ आयोजन से 6 महीने पहले ही पूरे कर लिए जाएं, ताकि आखिरी समय में कोई समस्या न हो।

90 प्रवेश द्वारों से जुड़ेगा घाट क्षेत्र
शिप्रा नदी के बाएं तट पर निर्मित हो रहे 14.5 किमी लंबे नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन हेतु 65 प्रवेश-निर्गम मार्ग चिन्हित किए गए हैं। कुल 90 प्रवेश द्वारों को एप्रोच मार्गों और पार्किंग से जोड़ा जाएगा।

 

भोपाल के करोंद में भीषण आग: KFC आउटलेट के पास बिल्डिंग धधकी, इलाके में मचा हड़कंप

भोपाल
भोपाल के करोंद इलाके में बुधवार को अचानक आग लग गई। जानकारी के अनुसार, आग चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में लगी, जहां KFC आउटलेट और इलेक्ट्रॉनिक शोरूम मौजूद हैं। आग की ऊंची लपटें और काला धुआं देखकर इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। 

बताया जा रहा है कि, आग बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर में लगी। इसके चलते फर्नीचर भी जल गया।  राहत की बात यह है कि कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन इस आग के चलते आर्थिक नुकसान जरूर हुआ है। इसका आंकलन किया जाएगा।

बड़ा हादसा टला
आग लगते ही फायर ब्रिगेड को कॉल किया गया। पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। नगर-निगम की दमकल गाड़ी भी मौके पर पहुंची थी। गनीमत रही कि, बिल्डिंग में ज्यादा लोग मौजूद नहीं थे। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन अब हादसे की जांच कर रहा है।

आग की वजह से इलाके में हड़कंप मच गया। अफरा-तफरी के माहौल के बीच आग पर काबू पाया गया। इससे कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपए का नुकसान हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग लगने के दौरान बिल्डिंग में भीड़ नहीं थी। इस वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन नुकसान का आंकलन लगा रहा है।

क्रोमा के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम के जनरेटर से भड़की आग
नगर निगम के फायर प्रभारी सौरभ पटेल ने बताया कि बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम है। इसके पास में रखे जनरेटर में आग लगी थी। इस वजह से कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी थी, वहां पर केएफसी का आउटलेट भी है। हालांकि, उसे नुकसान नहीं पहुंचा।

20 मिनट में काबू में आई
आग की वजह जनरेटर में शार्ट सर्किट होने को बताया जा रहा है। आग लगने की जानकारी मिलते ही पास में पीपुल्स हॉस्पिटल की फायर ब्रिगेड पहुंची और उसे बुझाने लगी। इसी दौरान नगर निगम की दमकल भी आ गई। दोनों ने मिलकर आग को काबू में लिया। इस वजह से आग ज्यादा नहीं फैली।

बिल्डिंग के सामने लगी भीड़
करोंद में पीपुल्स हॉस्पिटल के सामने स्थित यह बिल्डिंग है। अचानक लगी आग से इलाके में हड़कंप मच गया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें और दूर तक फैलता काला धुआं देखकर इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। इससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची।

जनरेटर में लगी थी आग
नगर निगम के फायर प्रभारी के अनुसार, बिल्डिंग में क्रोमा का इलेक्ट्रॉनिक शोरूम था। इसके पास रखे जनरेटर में आग लगी थी। इसके चलते कई एसी भी जल गए। जहां आग लगी वहीं केएफसी का आउटलेट है लेकिन इसे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

करोंद इलाके में यह बिल्डिंग पीपुल्स हॉस्पिटल के बिलकुल सामने है। आग की ऊंची लपटें दूर से ही देखी जा सकती थीं। आग लगाने की सूचना मिलने पर आसपास के लोग भी पहुंचे। निशातपुरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को संभाला।

CBSE 12वीं रिजल्ट में भोपाल रीजन का प्रदर्शन: 79.43% छात्र हुए पास

भोपाल 

सीबीएससी 12वीं के लिए बुधवार का बड़ा दिन है। सीबीएससी ने 12वीं का रिजल्ट घोषित कर दिया है। यह रिजल्ट बोर्ड की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया है। इसे उमंग एप पर भी देखा जा सकता है। भोपाल रीजन के 79.43 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं।

मध्यप्रदेश के स्टूडेंट्स का इंतजार बुधवार को खत्म हो गया। सीबीएसई बोर्ड ने 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। जैसा कि पहले ही उम्मीद की जा रही थी कि मई के दूसरे सप्ताह तक यानी 15 मई से पहले रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। पत्रिका ने भी दूसरे सप्ताह में रिजल्ट जारी होने की खबरें प्रकाशित की थी। मध्यप्रदेश से 80 हजार 454 स्टूडेंट्स 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से भोपाल जिले के 9 हजार 399 स्टूडेंट शामिल हैं।

भोपाल रीजन 19वें स्थान पर
क्षेत्रवार प्रतिशत देखें तो देश में पहले नंबर पर त्रिवेंद्रम रहा, जहां का रिजल्ट 95.62 प्रतिशत रहा। वहीं भोपाल 79.43 प्रतिशत के साथ 19वें नंबर पर रहा। सीबीएसई बोर्ड के भोपाल रीजन में 79.43 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं। 

12वीं का रिजल्ट 85.20 प्रतिशत रहा
देशभर में CBSE के रिजल्ट की बात करें तो 12वीं का कुल परिणाम 85.20 प्रतिशत रहा। इसमें लड़कियों का पास परसेंट 88.86% और लड़कों का उत्तीर्ण प्रतिशत 82.13% रहा। यानी लड़कियों ने लड़कों की तुलना में 6.73% बेहतर प्रदर्शन किया है। इस बार भी लड़कियों ने बाजी मार ली।

सीबीएसई 12वीं पर एक नजर
देशभर के 17 हजार से अधिक स्टूडेंट्स 95 प्रतिशत से अधिक अंक लाए हैं।
इस साल कुल 85.20 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए हैं।
लड़कियों का प्रदर्शन 88.86 प्रतिशत रहा।
लड़कों का प्रदर्शन 82.13 प्रतिशत रहा।

आधिकारिक वेबसाइट पर देखें रिजल्ट
स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट cbse.gov.in और cbseresults.nic.in पर देख सकते हैं। वहीं स्कोरकार्ड के लिए डिजिलॉकर और उमंग एप पर भी देखा जा सकता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपना एडमिट कार्ड (Roll Number, School Code और Admit Card ID) निकालकर रखें।

कैसा था 2025 में 12वीं का रिजल्ट
CBSE 12th Results: पिछले साल 2025 की बात करें तो 12वीं की परीक्षा में मध्य प्रदेश का रिजल्ट 82.46 प्रतिशत था। मध्यप्रदेश से कुल 74,502 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से लड़कों की संख्या 38,974 और लड़कियों की संख्या 35,528 थी। एमपी में 12वीं तक सीबीएसई के कुल 1252 स्कूल हैं और कुल 475 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे।

13वें नंबर पर था भोपाल रीजन
इससे पहले 2023 की बात करें तो 12वीं का रिजल्ट 83.54 प्रतिशत था और भोपाल 12वें नबर पर था। उस समय भोपाल 12वीं के 12 हजार स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर अपने कारकेड में घटाई वाहनों की संख्या

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर अपने कारकेड में घटाई वाहनों की संख्या

राष्ट्र हित में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने पर मध्यप्रदेश में होगा अमल, निर्देश जारी

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आहवान पर आगामी आदेश तक अपने कारकेड में वाहनों की संख्या कम कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को राज्य मंत्री परिषद की बैठक में मंत्री परिषद के सदस्यों से वर्तमान वैश्विक संकट को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने सहित राष्ट्र हित में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने की अपील की थी। मध्यप्रदेश गंभीरता से इस पर अमल करेगा। इस तारतम्य में राज्य सरकार ने आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री के काफिले में चलेंगे 8 वाहन

आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री के कारकेड में 13 वाहनों के स्थान पर 8 वाहन ही चलेंगे। उनके भ्रमण के समय वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी। सभी मंत्रीगण यात्रा में न्यूनतम वाहनों का प्रयोग करेंगे। यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करें और वाहन रैली आयेाजित न करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के आहवान और दिए गए सुझावों के अनुरूप मध्यप्रदेश में शासकीय कार्यों में मितव्ययता के उपायों पर अमल करने को कहा है। मंत्रीगण सहित निगम-मंडल के पदाधिकारियों और आम नागरिकों से वाहनों के कम से कम प्रयोग करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और अनावश्यक रूप से वाहनों का उपयोग न किए जाने को कहा गया है।

 

गांव-गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को करें जागरूक, जिससे अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं का करा सकें टीकाकरण

गांव-गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को करें जागरूक, जिससे अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं का करा सकें टीकाकरण

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने डिंडोरी जिले की ग्राम पंचायत बरगांव में वृहद पशु टीकाकरण अभियान का किया शुभारंभ

35 गांवों में पहुंचेगी 50 टीमें

भोपाल 

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने डिंडोरी जिले के विकासखंड शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बरगांव में मंगलवार को वृहद पशु टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। अभियान के अंतर्गत 35 गांवों में 50 टीमों द्वारा घर-घर पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण किया जाएगा। इस टीकाकरण अभियान का उद्देश्य गलघोंटू जैसे संक्रामक रोगों की रोकथाम कर पशुधन को सुरक्षित रखना है, जिससे पशुपालकों को होने वाली आर्थिक हानि से बचाया जा सके।

इस अवसर पर मुख्य अतिथियों ने 4 बसों एवं 18 चार पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों में पशु चिकित्सक, पैराबेट, सहायक एवं अन्य तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर पशुओं का टीकाकरण करेंगे।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उईके, सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते, विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला अध्यक्ष चमरू सिंह नेताम सहित राजकुमार मटाले (अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख), कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, डॉ. राखी वैश्य (डीन, वेटरनरी कॉलेज जबलपुर), डॉ. मंजीत शर्मा (कुलगुरु, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय), मनोहर लाल साहू, सुनील कांत, एच.पी. शुक्ला, डॉ. आदित्य मिश्रा, डॉ. सुनील मिश्रा, डॉ. कृष्ण कुमार एवं सतीश चौबे राष्ट्रीय संयोजक अखिल भारतीय सहित अन्य अधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित रहे।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री पटेल ने टीकाकरण शिविर का अवलोकन कर अधिकारियों को अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन पशुपालकों के हित में लगातार कार्य कर रहा है तथा पशुओं को रोगमुक्त रखने के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गांव-गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाए, जिससे अधिक से अधिक पशुपालक अपने पशुओं का टीकाकरण करा सकें।

इस अभियान में नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर, पशुपालन विभाग जबलपुर एवं पशुपालन विभाग डिंडोरी के चिकित्सकों एवं तकनीकी टीम का विशेष सहयोग रहा।

 

पंजीकृत श्रमिकों के लिए संजीवनी बनीं शासकीय योजनाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की गारंटी

पंजीकृत श्रमिकों के लिए संजीवनी बनीं शासकीय योजनाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की गारंटी

भोपाल

प्रदेश के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा व्यापक कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं। श्रम विभाग और विभिन्न बोर्ड्स के माध्यम से अब श्रमिकों को जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक हर कदम पर आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है। इनमें प्रसूति सहायता ₹16 हजार, बेटियों के विवाह के लिये अनुदान 49 हजार रूपये और 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क चिकित्सा लाभ (आयुष्मान भारत) शामिल है।

इसके अतिरिक्त श्रमिकों के बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा देने के लिए ‘विदेश अध्ययन योजना’ के तहत 40 हज़ार डॉलर तक की सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही अधिकतम 10 हजार यू.एस. डॉलर प्रतिवर्ष बतौर वार्षिक निर्वाह भत्‍ता भी प्रदान किया जाता है। राज्‍य एवं संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 50 हज़ार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। श्रमिकों के आवास निर्माण के लिए एक लाख रूपये तक, ई-स्कूटर खरीदी के लिए 40 हजार रूपये तक और औजार अनुदान भी सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में भेजा जा रहा है। पात्र श्रमिक निर्धारित समय-सीमा के भीतर ‘श्रम सेवा पोर्टल’ या ‘लोक सेवा केंद्र’ के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।

‘श्री’ और ‘श्रमणा’ पहल से मिल रहा सम्मान

सुरक्षा और संपूर्ण गारंटी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी इन योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए शासन द्वारा ‘(SHREE)’ अभियान चलाया जा रहा है। इस विशेष जनसंपर्क और आउटरीच अभियान के माध्यम से ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर जागरूकता फैलाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन हो और कोई भी शिक्षा, स्वास्थ्य या पेंशन के लाभ से वंचित न रहे।

इसके साथ ही कार्यस्थल पर श्रमिकों विशेषकर महिला श्रमिकों की गरिमा, सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए ‘श्रमणा’ योजना भी संचालित की जा रही है। योजना में कार्यस्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे महिला श्रमिकों को एक अनुकूल और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

 

पेट्रोल बचाने की पहल, सीएम मोहन यादव के काफिले में घट सकती हैं गाड़ियों की संख्या

 भोपाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल उपयोग का उपयोग कम करने की अपील का असर मध्य प्रदेश सरकार में दिखने लगा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब शासकीय कार्यों में उपयोग के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को टैक्सी के रूप में लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में से वाहनों की संख्या कम कर सकते हैं। इसके अलावा वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगा रखी है।

मुख्यमंत्री के काफिले में बदलाव की तैयारी

मुख्यमंत्री के काफिले में लगभग 13 गाड़ियां हैं। इसमें से पांच से छह गाड़ियां कम की जा सकती हैं। सुरक्षा के हिसाब से कुछ वाहन काफिले में खाली चलते हैं, इन्हें कम किया जा सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जहां भी दौरे पर जाते हैं उनके स्वागत के लिए वाहनों से जुटने वाली भीड़ पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस बीच, वन विभाग और पुलिस को छोड़कर सभी विभागों में नए वाहन क्रय करने पर रोक लगा दी गई है।

खर्चों में कटौती के सख्त निर्देश

जल्द ही कम खपत वाले वाहनों के उपयोग के निर्देश जारी किए जाएंगे। वित्त विभाग यह भी निर्धारित करने जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का कितना और कब उपयोग हो, जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों से कहा है कि पेट्रोल-डीजल के मद में खर्च कम करें और खुद के खर्चों में भी कटौती करें।
मंत्रियों के काफिले पर स्थिति

केवल जनता से पेट्रोल-डीजल के किफायती उपयोग की अपील की जा रही है, लेकिन मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या घटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 30 मंत्री हैं। मंत्रियों के काफिले में तीन से चार वाहन चलते हैं। स्टेट गैराज से इन्हें वाहन आवंटित होता है और पेट्रोल-डीजल भी मिलता है।

 

जल संरक्षण में खंडवा बना मिसाल: सड़कों किनारे लाखों कंटूर खोदकर बढ़ाया जाएगा जलस्तर

खंडवा
 जल संरक्षण और भूजल संवर्धन की दिशा में खंडवा नई पहचान बना रहा है. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन के लिए अनोखी पहल की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में पहाड़ों पर लाखों कंटूर खोदने के बाद अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर (गड्ढा) खोदकर जल संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ बहने के बजाय जमीन में समा सके और भूजल स्तर में वृद्धि हो।

प्रदेश में खंडवा का पहला स्थान
जल संचय जन भागीदारी अभियान में खंडवा ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी रैंकिंग में खंडवा देशभर में दूसरे स्थान पर पहुंचा है, जबकि जल गंगा संवर्धन अभियान में खंडवा पूरे मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पर चल रहा है. खंडवा में प्रशासन द्वारा जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से लगातार व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

मिशन मोड में चल रहा अभियान
वर्षा जल संरक्षण और जल बचाने के लिए जिला प्रशासन मिशन मोड में अभियान चला रहा है. कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि “जिले में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. खेत तालाब, कुएं रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर, रिचार्ज शाफ्ट, बोरवेल रिचार्ज सिस्टम और रूफटॉप वर्षा जल संचयन जैसी योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

सड़कों के किनारों पर भी कंटूर
पुराने तालाबों, जलाशयों और गड्ढों को भी नए तरीके से ठीक किया जा रहा है. अब सड़कों के किनारों पर भी कंटूर बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी सीधे नालों में बहने के बजाय जमीन में रिस सके. इससे आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार होने के साथ जल संकट से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

अब तक एक लाख कंटूर खोदे
जिले में अब तक एक लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जबकि करीब ढाई लाख संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वर्ष 2025 में भी खंडवा ने जल संचय करने वाले जिलों में देश में पहला स्थान हासिल किया था. प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी और सतत प्रयासों से खंडवा आने वाले वर्षों में जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

रालामंडल ब्रिज फिर ट्रैफिक के लिए खुला: बिना विद्युत पोल के शुरू हुआ आवागमन

इंदौर

राऊ-देवास बायपास पर अर्जुन बड़ौद ब्रिज के बाद रालामंडल के समीप बना ब्रिज भी ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। दोनों ब्रिजों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। दोनों ब्रिजों को बिना लोकार्पण के शुरू कर दिया गया है। रालामंडल ब्रिज डेढ़ माह पहले ट्रायल के लिए खोला था, लेकिन चार दिन बाद उसे फिर बंद कर दिया गया, क्योंकि ब्रिज का लोड टेस्ट नहीं हुआ था और रेलिंग के बाद कुछ गलत निर्माण भी हो गए थे। गलती समझ में आने पर बाद में अफसरों ने उसे तुड़वा दिया था। ब्रिज की दोनों भुजाएं ट्रैफिक के लिए बंद होने के कारण वाहन को सर्विस रोड से गुजरना पड़ रहा था। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों की कतार लग जाती थी।

राऊ से देवास के बीच 35 किलोमीटर के बायपास पर तीन जगह ब्रिजों का निर्माण चल रहा है। दो स्थानों पर ब्रिज ट्रैफिक के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे ट्रिपल लेयर ब्रिज के शुरू होने में छह माह से अधिक का समय और लगना है। यहां मध्य हिस्से को तो ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी अंडरपास और फ्लायओवर का काम बाकी है।

इस ब्रिज के बनने से बायपास से इंदौर शहर में प्रवेश करने वाले वाहनों को आसानी होगी। अभी बोगदों से होकर वाहनों को आना पड़ता है, जबकि भारी वाहन तो बोगदों से आए ही नहीं पाते हैं। इस ब्रिज के बनने से शहर में एंट्री आसान होगी।रालामंडल ब्रिज ट्रैफिक के लिए तो खोल दिया गया, लेकिन ब्रिज पर बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। यहां ट्रैफिक अंधेरे में ही चलेगा, जबकि बायपास के दूसरे ब्रिजों पर विद्युत पोल लगाए गए हैं।
 

नरसिंहपुर में CM यादव द्वारा आज 1835 करोड़ की राशि का वितरण, लाभान्वित होंगी लाड़ली बहनें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण

1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त

नरसिंहपुर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी।

लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है।

योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी

वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है।

राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह

योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है।

महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता

लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी

योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

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