विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल

विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल

हमारी आत्मीयता, साम्यता का मंच स्थापना दिवस
लोक भवन में मनाया गया पश्चिम बंगाल का स्थापना दिवस

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारत की विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में शक्कर घुल जाती है, उसी तरह से मध्यप्रदेश में बंगाल के मूल निवासी घुल मिल गये हैं। हमारी अनेकता में एकता की आत्मीयता और साम्यता को राज्य स्थापना दिवस के आयोजन साकार करते है। आयोजन के मंच पर हमारी वेशभूषा, गीत, नृत्य में समाई हमारी सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक मिलती है। पश्चिम बंगाल की प्रस्तुतियों में उन्हें गुजरात के गरबा नृत्य और वेशभूषा में असम राज्य की झलक दिखाई दी।

राज्यपाल पटेल आज लोकभवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के प्रसंग में आयोजित समारोह में सम्मिलित भोपालवासी बंगाली मूल के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न कालीबाड़ियों के सदस्य उपस्थित थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़, राष्ट्रीय एकात्मकता को नई शक्ति प्रदाय करने और राज्यों के मध्य परस्पर सांस्कृतिक संवाद, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रयास अद्भुत है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने गत वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। पर्व में सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक दलों और बच्चों की सहभागिता से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मंच प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में 300 बच्चों ने कार्यक्रम में सहभागिता की थी। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को समृद्ध बनाने में बंगाल राज्य का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विगत वर्षों से देश की युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार विकसित भारत निर्माण के लिए युवाओं के साथ संवाद करते हैं। लोक भवन के  आयोजन में 7 से 60 साल के कलाकारों की सहभागिता और महिलाओं की बहुलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बदलते भारत की झलक और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में श्रीमती सपना गुहा ने स्वागत उद्बोधन में बंगाल की समृद्ध परम्पराओं, सांस्कृतिक विरासत के साथ ग्रामीण जन जीवन की सरलता और सांस्कृतिक छटा की रुपरेखा प्रस्तुत की सांस्कृतिक आयोजन की सूत्रधार श्रीमती महुआ चटर्जी ने “हमारा बंगाल रे” की थीम पर बंगाल के लोकगीत, नृत्य और जन जीवन को बाउल, झूमर, धमाइल, भटयाली लोक संगीत की प्रस्तुति के द्वारा सभागार में पश्चिम बंगाल के जन जीवन को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का स्थापना दिवस का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया।

राज्यपाल का कार्यक्रम में बंगाली समाज के सचिव सर्वसलिल चटर्जी, निलॉय घोष ने अभिनन्दन किया। आभार प्रदर्शन डा. एन. बनर्जी ने किया। संचालन सहायक सत्कार अधिकारी सुसृष्टि श्रीवास्तव ने किया।

 

राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्र सेवा ही शालिगराम जी के जीवन का था ध्येय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर और अरविंद मोघे सम्मानित

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. शालिगराम तोमर राष्ट्र सेवी थे। उन्होंने राष्ट्र की सेवा करने वाले अनेक कार्यकर्ता भी तैयार किए। राष्ट्र सेवा और राष्ट्रसेवियों का निर्माण उनके जीवन का प्रमुख ध्येय था। वे सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अनूठा परिवार भाव रखते थे। उनकी कार्य शैली से युवा सहज ही उनके सेवा प्रकल्पों के साथ जुड़ जाते थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मानस भवन में स्व. शालिगराम तोमर स्मृति राष्ट्र सेवी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। नवलय संस्था द्वारा इस वर्ष वरिष्ठ समाज सेवी सदाशिव देवधर पुणे और अरविंद मोघे को सम्मानित किया गया। दोनों समाज सेवियों ने विद्यार्थी परिषद, श्रमिक कल्याण, वनवासी कल्याण के साथ ही अनेक सामाजिक क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. शालिगराम तोमर ने एक कक्ष के कार्यालय से संगठन से कार्य करते हुए उसे विराट रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। उनके आदर्श जीवन से हजारों लाखों युवाओं ने प्रेरणा ली और सामाजिक क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए स्वयं को तैयार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित समाज सेवियों को बधाई दी और संस्था के उद्देश्यों एवं सम्मान कार्यक्रम की सराहना की। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के जीवन को संवारने में स्व. शालिगराम का समर्पण और सहयोग यादगार रहेगा। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्व. शालिगराम के जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाये। सेवानिवृत्त न्यायाधीश और संगठन पदाधिकारी अशोक पांडे ने कहा कि स्व. शालिगराम राष्ट्र सेवा का भाव रखते थे। राज्यसभा सदस्य रजनीश अग्रवाल ने नवलय संस्था को एक प्रेरणापुंज की स्मृति में सम्मान स्थापित करने के लिए बधाई दी। महासमुंद छत्तीसगढ़ से आए डॉ. विमल चोपड़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने सम्मान के लिए चयनित समाज सेवियों देवधर और मोघे को एक लाख रूपए की सम्मान निधि, शॉल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। दोनों समाजसेवियों के प्रशस्ति पत्र का वाचन भी किया गया।

कार्यक्रम में पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, वरिष्ठ समाज सेवी शशि भाई सेठ, विभीषण सिंह, अनेक लोकतंत्र सेनानी, नागरिक और समाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

कान्हा में CDV का खतरा, ग्वालियर जू अलर्ट पर; बाघिन मीरा के तीनों शावक फिलहाल आइसोलेशन में रहेंगे

ग्वालियर
 कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से सात बाघों की मृत्यु होने के बाद अब गांधी प्राणी उद्यान (ZOO) प्रबंधन अलर्ट पर आ गया है। यही कारण है कि दो माह पहले जन्मे सफेद बाघिन मीरा के शावकों को फिलहाल आइसोलेशन में ही रखा जाएगा।

सैलानियों को इन नन्हें शावकों की पहली झलक पाने और अठखेलियों को देखकर आनंद लेने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि तीनों शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं, लेकिन कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से हुई बाघों की मौत के बाद जू प्रबंधन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।

चिड़ियाघर में सफेद बाघिन मीरा ने गत पांच अप्रैल को तीन शावकों को जन्म दिया था। इनमें दो शावक पीले और एक सफेद शावक है। बीते दो माह दिनों से शावक आइसोलेशन में ही अपनी मां की देखरेख में सुरक्षित हैं और उनकी गतिविधियां भी सामान्य हैं। इन शावकों को एक माह पूरा होने पर ही केज से बाहर निकालने की तैयारी की गई थी, लेकिन इस दौरान भीषण गर्मी को देखते हुए शावकों को केज से बाहर नहीं निकाला गया।

अब जब शावकों को बाहर निकालने की बारी आई, तो कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की संभावना को देखते हुए इस निर्णय को टाल दिया गया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी एडवायजरी जारी कर वन्य जीवों को इस वायरस से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। यह वायरस जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है और खासतौर पर शावकों के लिए अधिक खतरनाक साबित होता है।

 

9 साल का इंतजार खत्म, मध्यप्रदेश में GST अपीलीय न्यायाधिकरण ने शुरू की सुनवाई

विवेक झा, भोपाल। वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू होने के लगभग नौ वर्ष बाद मध्यप्रदेश के करदाताओं, उद्योगों और टैक्स पेशेवरों का लंबा इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रदेश में GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के समक्ष द्वितीय अपीलों की नियमित सुनवाई शुक्रवार से प्रारंभ होने जा रही है। इसे जीएसटी व्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित कदम माना जा रहा है, जिससे वर्षों से लंबित कर विवादों के निस्तारण का रास्ता खुल गया है।

प्रारंभिक चरण में भोपाल बेंच के समक्ष 300 से अधिक अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं। इससे प्रदेश के सैकड़ों करदाताओं और उद्योगों को शीघ्र न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

26 जून से भोपाल बेंच में होगी नियमित सुनवाई

जानकारी के अनुसार भोपाल स्थित GSTAT बेंच में 26 जून 2026 से अपीलों की सुनवाई शुरू होगी। फिलहाल तकनीकी सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्रत्येक सप्ताह गुरुवार और शुक्रवार को ही मामलों की सुनवाई निर्धारित की गई है।

विशेष बात यह है कि सुनवाई हाइब्रिड मोड में होगी। यानी करदाता और उनके अधिवक्ता आवश्यकता अनुसार न्यायाधिकरण में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के साथ-साथ वर्चुअल माध्यम से भी अपनी पैरवी कर सकेंगे।

लंबे समय से लंबित थे हजारों कर विवाद

जीएसटी लागू होने के बाद अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन में हुई देरी के कारण देशभर में बड़ी संख्या में द्वितीय अपीलें लंबित थीं। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा। प्रदेश में अनेक करदाता अंतिम न्यायिक मंच उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्षों से अपने मामलों के निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब न्यायाधिकरण की नियमित सुनवाई शुरू होने से कर विवादों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और करदाताओं को समयबद्ध न्याय मिल सकेगा।

पुराने वैट मामलों के निस्तारण की भी बड़ी चुनौती

जीएसटी मामलों के अलावा मध्यप्रदेश में पूर्व कर कानूनों, विशेषकर वैट से संबंधित करीब 3,500 अपीलें भी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। कर विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत किए जाने पर इन मामलों के निस्तारण में भी तेजी लाई जा सकेगी।

व्यापारिक संगठनों की लंबे समय से थी मांग

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन और नियमित सुनवाई की मांग विभिन्न व्यापारिक संगठनों, उद्योग संघों और टैक्स प्रोफेशनल्स द्वारा लंबे समय से की जा रही थी। उनका कहना था कि अंतिम अपीलीय मंच उपलब्ध नहीं होने से करदाताओं को अनावश्यक आर्थिक और कानूनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

करदाताओं को मिलेगा प्रभावी न्यायिक मंच : मनोज पारख

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल के अध्यक्ष एडवोकेट मनोज कुमार पारख ने कहा कि GSTAT की नियमित सुनवाई शुरू होना करदाताओं और उद्योग जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि अब वर्षों से लंबित विवादों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, जिससे कर प्रशासन और व्यापार जगत दोनों को लाभ मिलेगा। न्यायिक प्रक्रिया में गति आने से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और करदाताओं का विश्वास भी मजबूत होगा।

30 जून तक अपील दाखिल करने का अंतिम अवसर

एडवोकेट मनोज पारख ने करदाताओं और कर सलाहकारों को आगाह करते हुए कहा कि वर्तमान में 30 जून 2026 GSTAT के समक्ष अपील दायर करने की महत्वपूर्ण अंतिम तिथि है। पात्र करदाताओं को निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे अपील के अधिकार से वंचित न हों।

उन्होंने कहा कि समय पर अपील दाखिल करने से करदाताओं को कानूनी राहत प्राप्त करने का पूरा अवसर मिलेगा।

कर व्यवस्था में बढ़ेगी पारदर्शिता और विश्वास

कर विशेषज्ञों का मानना है कि GSTAT की शुरुआत से न केवल विवादों का शीघ्र समाधान होगा बल्कि कर प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा। उद्योग जगत को इससे बड़ी राहत मिलेगी और निवेश एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी सकारात्मक वातावरण मिलेगा।


GSTAT से जुड़ी प्रमुख बातें

  • करीब 9 वर्ष बाद मध्यप्रदेश में द्वितीय अपीलों की नियमित सुनवाई शुरू।
  • भोपाल बेंच में 300 से अधिक अपीलें सुनवाई के लिए सूचीबद्ध।
  • 26 जून 2026 से सुनवाई प्रारंभ।
  • प्रत्येक गुरुवार और शुक्रवार होगी सुनवाई।
  • हाइब्रिड मोड (फिजिकल + वर्चुअल) में होगी कार्यवाही।
  • प्रदेश में लगभग 3,500 पुराने वैट अपीलों के निस्तारण की भी चुनौती।
  • 30 जून 2026 तक GSTAT में अपील दाखिल करने की महत्वपूर्ण समय-सीमा।

क्या है GSTAT?

GST Appellate Tribunal (GSTAT) वस्तु एवं सेवा कर कानून के अंतर्गत गठित एक वैधानिक अपीलीय न्यायाधिकरण है, जहां प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेशों के विरुद्ध द्वितीय अपील की जाती है। इसका उद्देश्य कर विवादों का विशेषज्ञ और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है, जिससे करदाताओं को उच्च न्यायालय जाने से पहले प्रभावी न्यायिक मंच उपलब्ध हो सके।

MP School Education: विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू, जानें पूरी जानकारी

भोपाल
 समग्र शिक्षा अभियान मिशन के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विकासखंड अकादमिक समन्वयक और जन शिक्षक के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को 20 सितंबर 2026 तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं।

निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक विकासखंड स्रोत केंद्र कार्यालय में विकासखंड अकादमिक समन्वयक के पांच पद भरे जाएंगे। वहीं, प्रत्येक 21 विद्यालयों पर एक जनशिक्षा केंद्र के मान से प्रति जनशिक्षा केंद्र में 2 जन शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

52 वर्ष से अधिक न हो आयु
राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने बताया कि विकासखंड अकादमिक समन्वयक एवं जन शिक्षक के लिए वही उच्च श्रेणी या माध्यमिक शिक्षक पात्र होंगे, जिनकी आयु 1 जनवरी 2026 की स्थिति में 52 वर्ष से अधिक न हो। साथ ही उनके विरुद्ध कोई विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या लंबे समय तक अनुपस्थित रहने की शिकायत लंबित नहीं होनी चाहिए।

चयन के लिए बनेगी समिति
चयन प्रक्रिया के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त (जनजातीय कार्य), प्राचार्य डाइट, जिला परियोजना समन्वयक, सहायक परियोजना समन्वयक तथा कलेक्टर का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।

यह रहेगा चयन कार्यक्रम

– 25 जुलाई तक विषय एवं समूहवार वरिष्ठता सूची तैयार होगी।

– 5 अगस्त को जिला स्तर पर काउंसलिंग आयोजित की जाएगी।

– 13 अगस्त को अंतिम चयन सूची प्रकाशित की जाएगी।

– 20 सितंबर तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

MP में निर्माण कार्य के नए नियम: बिना सूचना घर या दुकान बनाई तो हो सकती है जेल, श्रम विभाग का सख्त आदेश

भोपाल
 मध्य प्रदेश में अब घर, दुकान, बहुमंजिला इमारत या किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मकान मालिकों, ठेकेदारों और बिल्डर्स को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। श्रम विभाग ने नए और सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम शुरू करने से कम से कम 30 दिन पहले इसकी लिखित या ऑनलाइन सूचना विभाग को देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।

श्रम विभाग के अनुसार, नियमों की अनदेखी करने वाले नियोक्ताओं और बिल्डर्स के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की हवा खाने से लेकर भारी जुर्माने तक का प्रावधान शामिल है।

क्यों सख्त हुआ श्रम विभाग?
श्रम विभाग ने यह कदम निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए उठाया है। ‘भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ के तहत अब हर कंस्ट्रक्शन साइट पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य होगी।

‘श्रम सेवा पोर्टल’ पर देनी होगी तमाम जानकारी
नियोजकों को ‘श्रम सेवा पोर्टल’ मोबाइल ऐप के जरिए निर्माण स्थल की सटीक लोकेशन, वहां काम कर रहे श्रमिकों की कुल संख्या और उन्हें दी जा रही मूलभूत सुविधाओं (जैसे साफ पानी, शौचालय आदि) का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज करना होगा।

30 दिन पहले सूचना नहीं दी, तो 3 महीने की जेल
भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण अधिनियम 1996 के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई भी नियोक्ता धारा 46 के तहत काम शुरू होने की पूर्व सूचना देने में विफल रहता है, तो उसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
दोषी पाए जाने पर संबंधित बिल्डर, ठेकेदार या मकान मालिक को 3 महीने तक का कारावास , 2 हजार रुपए तक का जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी निर्माण विभागों जिनमें PWD, नगर निगम आदि को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे भी कोई भी काम शुरू करने से पहले श्रम विभाग को अनिवार्य रूप से लूप में लें।

‘श्रम प्रहरी’ बनकर आम जनता भी दे सकेगी सूचना
निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने और मजदूरों के हक की रक्षा के लिए विभाग ने आम नागरिकों को भी एक बड़ी ताकत दी है। शहर का कोई भी जागरूक नागरिक ‘श्रम प्रहरी’ की भूमिका निभा सकता है।

शिकायत के किलए टोल फ्री नंबर जारी
अगर आपके आसपास कोई ऐसा निर्माण कार्य चल रहा है, जिसकी सूचना श्रम विभाग को नहीं दी गई है या जहां मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है, तो आप इसकी गुप्त शिकायत विभाग के विशेष कंट्रोल रूम नंबर पर कर सकते हैं। इसके लिए श्रम प्रहरी हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर: 1800-233-8888 दिया गया है।

MP को मिली बड़ी मेजबानी, इंदौर में पहली बार होगी विश्व स्नूकर चैंपियनशिप; नवंबर में होगा आयोजन

इंदौर
 दुनिया को स्नूकर का खेल सिखाने वाले मध्य प्रदेश में 100 साल में पहली बार विश्व स्नूकर चैंपियनशिप होने जा रही है। यह प्रतिष्ठित आयोजन 12 से 23 नवंबर तक इंदौर के यशवंत क्लब में होगा। इस दौरान दुनिया के करीब 50 देशों के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने आएंगे। चैंपियनशिप का कुल व्यय पांच करोड़ रुपये होगा। कुल पुरस्कार राशि 40 हजार डालर यानी 37 लाख, 75 हजार रुपये के करीब होगी।

भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ के सचिव सुनील बजाज ने बताया कि देश में 2014 में बेंगलुरू में विश्व चैंपियनशिप हुई थी, जिसके बाद अब यह टूर्नामेंट भारत में होने जा रहा है। भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ की स्थापना के 100 वर्ष के यादगार अवसर पर इंदौर को मेजबानी के लिए चुना गया है।

विश्व चैंपियनशिप के दौरान पुरुष और महिला दोनों वर्गों के मैच होंगे। पुरुषों के वर्ग में 100 से 125 के करीब खिलाड़ी हिस्सा लेंगे जबकि महिला वर्गों में 40 से 60 खिलाड़ी शामिल होंगी। इनमें 15 के करीब विश्व चैंपियन खिलाड़ी भी होंगे। स्पर्धा के मुकाबले 12 टेबलों पर खेले जाएंगे जबकि पांच टेबलें अभ्यास के लिए होंगी। विश्व चैंपियनशिप के लिए 17 टेबलें बाहर से आयात की जा रही हैं।

मध्य प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाए
हाल ही में चीन में वर्ल्ड टीम स्नूकर चैंपियनशिप में रजत विजेता भारतीय टीम में इंदौर के केतन चावला भी शामिल थे। नेहरू स्टेडियम स्थित अकादमी में केतन चावला को मप्र बिलियर्ड्स व स्नूकर संघ द्वारा सम्मानित किया गया। उनसे पहले मप्र की खिलाड़ी अमी कमानी, सान्वी शाह, इशिका शाह, कनिष्का जुरानी, ऋतिक जैन, ओवेश खान सहित कई अन्य युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।

 

Aadhaar Update: 1 जुलाई से ईमेल आईडी अपडेट करना होगा मुफ्त, UIDAI ने खत्म की ₹75 फीस

 ग्वालियर
 यदि आपके आधार कार्ड में अभी तक ईमेल आईडी अपडेट नहीं है या आप उसे बदलना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद अच्छी और राहत भरी खबर है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि यूआईडीएआई ने एक नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए आधार कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस नए नियम के तहत अब आधार कार्ड पर ईमेल आईडी अपडेट कराने के लिए नागरिकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा, यह सेवा पूरी तरह से मुफ्त कर दी गई है।

यह नया नियम आगामी एक जुलाई से पूरे देश के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल अंचल में भी लागू होने जा रहा है। सरकार के इस कदम से उन करोड़ों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा जो अपने आधार को डिजिटल रूप से अधिक सुरक्षित और अपडेटेड रखना चाहते हैं। मुफ्त में ईमेल अपडेट छह महीने तक कर सकते हैं।

छह महीने के लिए खुली है मुफ्त सुविधा की खिड़की
यूआईडीएआई द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आम जनता को सहूलियत देने के लिए प्रशासन ने छह महीने की एक विशेष समय-सीमा तय की है। इसके अंतर्गत, नागरिक जुलाई से लेकर दिसंबर तक कभी भी अपनी ईमेल आईडी को आधार कार्ड में बिल्कुल मुफ्त में अपडेट करवा सकते हैं। आपको बता दें कि इस नए नियम के लागू होने से पहले तक, आधार कार्ड में ईमेल आईडी जुड़वाने या उसमें किसी भी तरह का संशोधन कराने के लिए उपभोक्ताओं को 75 रुपये का निर्धारित शुल्क देना पड़ता था, जिसे अब पूरी तरह से हटा लिया गया है।

ईमेल आईडी अपडेट होना क्यों है जरूरी
    सुरक्षित ओटीपी:
कई बार मोबाइल नेटवर्क न होने या सिम बंद होने की स्थिति में आधार से जुड़े जरूरी काम रुक जाते हैं। ईमेल आईडी अपडेट होने पर आधार वेरिफिकेशन का ओटीपी आपकी मेल पर भी आ जाता है।

    फर्जीवाड़े पर रोक: यदि कोई आपके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो तुरंत आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर अलर्ट आ जाता है, जिससे आप होने वाले फ्राड से बच सकते हैं।

    ऑनलाइन सेवाएं: कई सरकारी और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन में ईमेल आईडी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

BJP के 7 लाख कार्यकर्ताओं की होगी ऑनलाइन परीक्षा, ऐप पर सवालों के जवाब देने पर मिलेगा डिजिटल सर्टिफिकेट

भोपाल
 भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आज देशभर में बूथ और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस दौरान करीब 7 लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन ऐप के माध्यम से कराई जाएगी। पार्टी के अनुसार, 65 हजार से अधिक बूथ समितियों के कार्यकर्ता और मंडल स्तर के मोर्चा पदाधिकारी इस डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य संगठन को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा एवं योजनाओं की बेहतर जानकारी देना है।

संगठन ऐप के जरिए होगा प्रशिक्षण
डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम के तहत कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा, संगठन का सफर, नेतृत्व और केंद्र की मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संगठन ऐप पर ऑनलाइन परीक्षा आयोजित होगी।

संगठन एप के जरिए मिलेगी ट्रेनिंग
बीजेपी की 65 हजार से ज्यादा बूथ समितियों में शामिल कार्यकर्ताओं और मंडल स्तर के 6 मोर्चों की कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारियों को संगठन एप के जरिए डिजिटल लर्निंग यानी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में चार पाठ्यक्रम संगठन एप पर दिए जाएंगे।

इनमें बीजेपी की विचारधारा, पार्टी का सफर, नेतृत्व, मोदी सरकार की विकास योजनाएं जैसे चार पाठ्यक्रम शामिल होंगे।

कार्यकर्ता अपने मोबाइल पर हर पाठ्यक्रम के वीडियो देखकर उस पाठ्यक्रम से संबंधित शब्दावली के उत्तर ऑनलाइन दर्ज करेंगे। चारों पाठ्यक्रमों के सवाल-जवाब पूरे होने के बाद उनके मोबाइल पर प्रशिक्षित होने का सर्टिफिकेट जनरेट होगा।

इस प्रशिक्षण को लेकर सभी जिला अध्यक्षों को कार्ययोजना भेज दी गई है। यह महाअभियान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से शुरू होकर उनकी जयंती 6 जुलाई 2026 तक पूरे 14 दिनों तक चलेगा।

बीजेपी क्यों और कैसे कराने जा रही है यह कोर्स?
बीजेपी इस बड़े अभियान को पूरी तरह अचूक बनाने के लिए इसे अपने नियमित कार्यक्रमों से जोड़ रही है। रणनीति के अनुसार, बूथ अध्यक्ष और ‘मन की बात’ प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम के तुरंत बाद बूथ समिति के सभी सदस्यों को मौके पर ही संगठन ऐप खुलवाकर डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का प्रशिक्षण पूरा कराया जाए और सर्टिफिकेट डाउनलोड करवाया जाए ।

तीन सदस्यों की टीम भी बनाई
इसके साथ ही, शक्ति केंद्र प्रभारियों और मंडल कार्यकारिणी को सभी बूथों पर प्रवास (दौरा) करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे हर कार्यकर्ता के स्मार्टफोन में इस प्लेटफॉर्म की जानकारी और ट्रेनिंग सुनिश्चित कर सकें । बीजेपी यह कदम इसलिए उठा रही है ताकि उसका पूरा कैडर ‘कागज-रहित’ और ‘हाई-टेक’ हो सके। इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए जिलों में (1+2 सदस्यों की) विशेष डिजिटल प्रशिक्षण टीमें बनाई गई हैं, जिनकी कमान प्रदेश स्तर पर संयोजक शैलेन्द्र बरूआ (प्रदेश उपाध्यक्ष) और सदस्यों के रूप में राजेन्द्र सिंह, सुयश त्यागी संभाल रहे हैं।

6 जुलाई तक पूरा होगा अभियान
बीजेपी ने इस डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को 6 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पार्टी पहले ही जिला और मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर चुकी है। अब अंतिम चरण में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कार्यकर्ताओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि डिजिटल प्रशिक्षण से संगठन की कार्यशैली अधिक प्रभावी होगी और कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं व संगठनात्मक गतिविधियों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

 

MP में राज्य पुलिस सेवा के 8 अधिकारी बनेंगे IPS, DPC बैठक में नाम तय; 2 अफसरों पर नहीं हुआ विचार

 भोपाल
राज्य पुलिस सेवा के आठ (1997 बैच के एक और 1998 बैच के सात) अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत होंगे। गुरुवार को मंत्रालय में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में इनके नाम तय किए गए। लगभग दो माह में अधिसूचना जारी होने पर इन्हें आईपीएस संवर्ग आवंटित होगा।

कुल नौ पदों के लिए डीपीसी की बैठक की गई थी, जिसमें 1997 बैच के अमृत लाल मीणा का नाम विचार में लिया गया, पर निर्णय घोषित नहीं किया गया। मीणा का जाति प्रमाण पत्र का मामला छानबीन समिति में लंबित है। वहीं, राजेश मिश्रा और संदीप मिश्रा के नामों पर विचार नहीं किया। राजेश मिश्रा के विरुद्ध विभागीय जांच चल रही है, जबकि संदीप मिश्रा की एसीआर अनुकूल नहीं होने के चलते उन्हें बाहर रखा गया है।

डीपीसी में संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य संजय वर्मा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, डीजीपी कैलाश मकवाणा और एसीएस होम संजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।

27-28 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति
यह डीपीसी वर्ष 2025 के लिए हुई है। पदोन्नत होने वाले अधिकारियों को 2017 बैच आवंटित होगा। 27 से 28 वर्ष की सेवा के बाद इन्हें पदोन्नति मिलने जा रही है। बड़े राज्यों में सबसे देरी से पदोन्नति मध्य प्रदेश में ही हो रही है। तेलंगाना सहित कुछ राज्यों में तो 2010 से 2012 बैच तक के पुलिस अधिकारी पदोन्नत होकर आईपीएस बन चुके हैं। यानी पदोन्नति में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा 10 वर्ष पीछे चल रहे हैं।

बता दें, राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में 13 अधिकारियों की पदोन्नति के लिए भी शीघ्र डीपीसी की बैठक होने वाली है। इसमें वर्ष 2007 और 2008 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार चल रहा है।

ये अधिकारी होंगे पदोन्नत
1997 बैच के सीताराम सस्त्या, 1998 बैच की मनीषा पाठक सोनी, निमिषा पांडेय, मलय जैन, अमित सक्सेना, सुमन गुर्जर, सव्यसाची सराफ और समर वर्मा।

 

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