जीआरपी इंदौर ने अंतर्राज्यीय शातिर चोर को किया गिरफ्तार

भोपाल

रेल यात्रियों की सुरक्षा एवं अपराधियों के विरुद्ध लगातार की जा रही कार्यवाहियों के क्रम में मध्यप्रदेश पुलिस की रेल इकाई (जीआरपी) को एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। जीआरपी इंदौर ने सूक्ष्म विवेचना, तकनीकी विश्लेषण एवं लगातार की गई कार्रवाई के परिणामस्वरूप एक अंतर्राज्यीय शातिर चोर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से लगभग 15 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

16 मार्च को इंदौर निवासी फरियादिया ने रिपोर्ट दर्ज की थी कि वह  अपने पति के साथ ट्रेन में अहमदाबाद से इंदौर की यात्रा कर रही थीं। यात्रा के दौरान उन्होंने अपना पर्स सिरहाने रखकर विश्राम किया था। इंदौर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर उन्हें ज्ञात हुआ कि अज्ञात व्यक्ति उनका पर्स चोरी कर ले गया है। चोरी गए सामान में लगभग 11.8 तोला सोने के आभूषण, मोबाइल फोन एवं नगदी शामिल थी। फरियादिया की रिपोर्ट पर थाना जीआरपी इंदौर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रेल इंदौरअरविंद तिवारी के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित कर जांच प्रारंभ की। विवेचना के दौरान टीम ने इंदौर से रतलाम तक रेलवे मार्ग पर विभिन्न स्टेशनों पर लगे 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का विस्तृत परीक्षण किया। लगातार फुटेज विश्लेषण एवं साइबर सेल की तकनीकी सहायता से संदिग्ध आरोपी की पहचान स्थापित की गई।

जांच के दौरान आरोपी की गतिविधियों एवं लोकेशन का लगातार विश्लेषण किया गया। आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। उसकी तलाश में पुलिस टीमों को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना तथा दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के अनेक शहरों में भेजा गया। लगातार प्रयासों के बाद आरोपी को नीमच से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। आरोपी की निशानदेही पर चोरी गया एक सोने का हार, दो सोने के कंगन, चार सोने की अंगूठियां, एक जोड़ी सोने के टॉप्स तथा चोरी किया गया लेडीज पर्स सहित लगभग 15 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु एवं कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों में अपराध करना स्वीकार किया।

मध्यप्रदेश पुलिस रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। यात्रियों से अपील है कि यात्रा के दौरान अपने सामान की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल रेलवे पुलिस को दें।

 

आईईएचई एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के बीच हुआ एमओयू

भोपाल

उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान, भोपाल एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड, रांची के बीच गुरुवार को एक एमओयू हुआ है। एमओयू के अंतर्गत रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी एक्सचेंज, वैज्ञानिक शोध, अकादमिक प्रोजेक्ट्स, सेमिनार, कॉन्फ्रेंस एवं संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। एमओयू से दोनों संस्थाओं के विद्यार्थियों, रिसर्च स्कॉलर्स एवं फैकल्टी को लाभ होगा। साथ ही दोनों संस्थाओं के बीच जॉइंट रिसर्च प्रोजेक्ट एवं पेटेंट पर भी कार्य किया जाएगा। इस दौरान आईईएचई संस्थान द्वारा संस्थान की अकादमिक गतिविधि, रिसर्च कार्यों एवं उपलब्धियों के बारे में प्रेजेंटेशन दिया गया।

एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान एक मॉनिटरिंग टीम गठित करेंगे। एमओयू के दौरान सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखंड के कुलगुरु, प्रोफेसर सारंग मेढेकर, रजिस्ट्रार,के. खोसला राव, डीन (आर एंड डी), प्रोफेसर मनोज कुमार तथा आईईएचई के संचालक, डॉक्टर प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर अनुज, प्रोफेसर शैलजा दुबे, प्रोफेसर बी.के. सिन्हा, प्रोफेसर अमित जैन, प्रोफेसर महेंद्र सिंघई, प्रोफेसर सभाकांत द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।

 

MP हाईकोर्ट की नई गाइडलाइन, ईंधन बचाने के लिए कार-पूलिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जोर

जबलपुर 

देश में ईंधन संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और न्यायिक कार्यों को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप जारी इस एडवाइजरी को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर लागू किया गया है।

यह निर्देश मप्र हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर, इंदौर एवं ग्वालियर खंडपीठों के साथ-साथ प्रदेश की सभी जिला अदालतों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं पर लागू होंगे। नई गाइडलाइन के तहत न्यायालयों में उपलब्ध सरकारी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित और व्यवस्थित किया जाएगा।

निर्देशों के तहत पूल वाहनों का उपयोग केवल न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों के निवास स्थान के आधार पर रूट-वाइज तथा लोकैलिटी-वाइज वाहन योजना तैयार की जाएगी। वाहनों की अधिकतम बैठने की क्षमता का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। किसी अधिकारी या कर्मचारी को व्यक्तिगत वाहन सुविधा केवल आपातकाल, सुरक्षा, प्रोटोकॉल अथवा चिकित्सीय आवश्यकता की स्थिति में ही उपलब्ध होगी।

अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को कार-पूलिंग की सलाह दी गई है। हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं और कर्मचारियों से सार्वजनिक परिवहन, कार-पूलिंग तथा टू-व्हीलर पूलिंग को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, अधिक व्यस्त मार्गों पर आवश्यकता के अनुसार मिनी बस, ट्रैवलर या अन्य साझा परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जा सकती है।

ये अपील की गई
गाइडलाइन में अधिवक्ताओं से विशेष रूप से अपील की गई है कि जहां संभव हो, वे अपने मामलों की सुनवाई और पैरवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करें। प्रशासनिक बैठकों और आधिकारिक चर्चाओं का आयोजन भी वर्चुअल माध्यम से किया जाएगा। वकीलों और न्यायालय प्रशासन के बीच संवाद को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अनावश्यक यात्रा से बचकर ईंधन की बचत सुनिश्चित की जाएगी।

हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वाहनों के उपयोग और ईंधन खपत की दैनिक निगरानी करें। वाहनों की उपलब्धता और उपयोग को कार्य की आवश्यकता तथा प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाएगी।

यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी रूप से लागू
हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी रूप से लागू की गई है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन संरक्षण के प्रयासों में न्यायपालिका भी योगदान दे सके और न्यायिक कार्य प्रभावित न हों। निर्देशों में कहा गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के लिए इन उपायों का पालन अनिवार्य होगा।

 

 

शैक्षणिक पाठ्यक्रम में नशे के दुष्परिणामों पर जानकारी देना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिव्यांगजन के आवागमन के लिए सभी शासकीय भवनों को बाधारहित बनाना आवश्यक है। बच्चों में दिव्यांगता के बारे में संवेदनशीलता विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में आवश्यक सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नशामुक्ति के लिए चलायें जा रहे अभियान के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे के दुष्परिणामों से किशोरों और युवाओं को समय रहते परिचित कराना जरूरी है। नशे के विरूद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्कूली और महाविद्यालयीन स्तरों के पाठ्यक्रमों में नशे के विरूद्ध जागरूकता पर केंद्रित सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांगजन को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी क्षमता अनुसार कौशल उन्नयन की गतिविधियां भी संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उक्त निर्देश सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में गुरूवार को हुई बैठक में विभाग के मंत्रीनारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिवअनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।

दिव्यांगजन के लिए की गई है 168 स्मार्ट क्लास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन्म दिवस, विवाह वर्षगांठ जैसे शुभ अवसरों और परिजन की स्मृति में जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भारतीय संस्कृति में रही है। उन्होंने ऐसी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक पहल को, प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर निराश्रितों को भोजन कराने के लिए निश्चित व्यवस्था के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सेवा पखवाड़ा अभियान वर्ष 2025 अंतर्गत प्रदेश में 6 करोड़ 52 लाख रुपए के कृत्रिम अंग एवं सहायक यंत्र दिव्यागंजन को उपलब्ध कराये गये। प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए संचालित विशेष विद्यालयों में दिव्यांगजन के लिए 168 स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं। नशामुक्ति भारत अभियान के अंतर्गत 12 हजार वालेंटियर्स बनाये गये हैं, जो नशे के दुष्परिणामों से जन सामान्य को अवगत करा रहे हैं। दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें रोजगार उपलबध कराने के लिए भारत सरकार से प्राप्त पुरस्कार संस्थानों से एमओयू किया गया है। इन संस्थाओं द्वारा 12 दिव्यांगजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वृद्धजनों की देखभाल के लिए 54 प्रतिभागियों को केयर-गिवर का प्रशिक्षण दिलवाया गया। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिवनीरज मंडलोई,संजय शुक्ला,मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

धार्मिक पहचान छिपाकर शादी का मामला, कोर्ट ने पत्नी-बेटी के लिए ₹20 हजार मासिक भरण-पोषण का आदेश दिया

 इंदौर
 धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने और बाद में मतांतरण के लिए दबाव बनाने से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने कहा कि यदि किसी महिला से धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह किया और उससे संतान भी जन्मीं हो, तो केवल विवाह की वैधता के तकनीकी आधार पर महिला को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने पीड़िता और उसकी अवयस्क पुत्री के लिए 10-10 हजार रुपये, यानी कुल 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण मंजूर किया है।

याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि 23 फरवरी 2020 को कोरोना के दौरान मुस्तफा ने स्वयं को हिंदू बताकर एक महिला से मंदिर में विवाह किया था।

जब महिला गर्भवती हुई, तब उसे आधार कार्ड के माध्यम से पति की वास्तविक धार्मिक पहचान का पता चला। आरोप है कि इसके बाद पति ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की गई।

महिला ने परिवार न्यायालय में भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन 2023 में परिवार न्यायालय ने यह कहते हुए उसका आवेदन निरस्त कर दिया कि वह कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है।

अदालत ने केवल उसकी पुत्री के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण मंजूर किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए महिला ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसके बाद अदालत ने परिवार न्यायालय के फैसले को पलटते हुए दोनों के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपये भरण-पोषण की राशि का आदेश दिया।

 

CA इंटरमीडिएट में भोपाल के ईशान का जलवा, देश के टॉप-15 में बनाई जगह

भोपाल
 द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने सीए इंटरमीडिएट परीक्षा मई 2026 के परिणाम जारी कर दिए हैं. इस परीक्षा में भोपाल परीक्षा केंद्र के छात्र ईशान मुकेश मंगल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में 15वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है. ईशान मुकेश मंगल ने 600 में से 476 अंक (79.33 प्रतिशत) हासिल कर भोपाल में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। 

ईशान मुकेश ने देश में रोशन किया भोपाल का नाम
वहीं, भोपाल में दूसरे स्थान पर मान्या गोस्वामी (64.50 प्रतिशत) रहीं. जबकि मोहित कछवानी और नंदिनी गुप्ता ने 62.83 प्रतिशत अंकों के साथ संयुक्त रूप से तीसरा और सक्षम अग्रवाल (58.67 प्रतिशत) ने चौथा स्थान प्राप्त किया है. इस परीक्षा में भोपाल से दोनों ग्रुप में शामिल हुए 215 उम्मीदवारों में से 13 छात्रों ने दोनों ग्रुपों को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है। 

9 महीने की मेहनत में पाई सफलता
ईशान ने ईटीवी भारत को बताया, “सीए फाउंडेशन का परिणाम जारी होते ही आगे की पढ़ाई का एक खाका खींच लिया था. 9 महीनों में समय का पूरा सदुपयोग किया. इसके लिए सिलेबस को भी छोटे-छोटे भागो में बांट कर पढ़ाई की. शुरुआत के चार महीनों में ग्रुप-2 के सभी विषयों के साथ-साथ टैक्सेशन के पाठ्यक्रम को पूरा किया। 

शॉर्ट फॉर्म तकनीक ने दिलाई सफलता
उन्होंने आगे बताया, “ग्रुप-1 की पढ़ाई के साथ ही रिवीजन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी और अंतिम ढाई महीने केवल रिवीजन पर केंद्रित रखा. टैक्सेशन विषय को बार-बार प्रोविजन्स पढ़कर मजबूत किया. वहीं, ऑडिट जैसे थ्योरी विषय को सरल रूप में याद रखने के लिए शिक्षकों द्वारा सिखाई गई शार्ट फॉर्म तकनीक का उपयोग किया। 

रोजाना 9 से 10 घंटे अध्ययन
ईशान ने आगे बताया, “नियमित दिनचर्या में रोजाना 9 से 10 घंटे अध्ययन करते थे, जिसे मुख्य परीक्षा से एक महीना पहले बढ़ाकर 12 घंटे तक कर दिया था. विषयों को समझने के लिए क्लासेस की मदद ली और खुद के मूल्यांकन के लिए सेल्फ स्टडी का सहारा लिया. वहीं, अंतिम समय में किसी भी तरह के मानसिक तनाव से बचने के लिए कोई भी नया टॉपिक नहीं छुआ. बस पहले से पढ़े गए नोट्स का ही अभ्यास किया. इस दौरान इंस्टाग्राम जैसे मनोरंजन आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूरी बना ली थी। 

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, छतरपुर के 54 गांवों से होगा भूमि अधिग्रहण

छतरपुर 

बुंदेलखंड क्षेत्र के कायाकल्प के लिए प्रस्तावित महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब तेजी से धरातल पर उतर रही है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए छतरपुर जिले के 54 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने तीव्र गति पकड़ ली है। वहीं, परियोजना के विस्तार के क्रम में उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में भी प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई है। कलेक्टर की वर्तमान गाइडलाइन दर का चार गुना मुआवजा मिलेगा।

छतरपुर में धारा 11 का प्रकाशन पूरा
छतरपुर जिले में परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। परियोजना की कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता ने बताया कि जिले के 54 प्रभावित गांवों के लिए भूमि अधिग्रहण की धारा 11 वैधानिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। धारा 19 की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नहर परियोजना प्रभावित किसानों को उनकी जमीन के बदले सरकारी गाइडलाइन से चार गुना अधिक मुआवजा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। प्रशासन अब मुआवजा वितरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए तत्पर है।

उत्तर प्रदेश में भी प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार
परियोजना की व्यापकता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश में भी कार्य ने गति पकड़ी है। केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई (सीमांकन) के लिए 15 जून 2026 को निविदा जारी कर दी गई है। यह निविदा झांसी जिले में केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना के तहत नहर निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के हिस्से में आने वाले गांवों की भूमि की नपाई के कार्य के लिए जारी की गई है, जिससे परियोजना के इस हिस्से में भी निर्माण कार्य की नींव रखी जा सके।

पारदर्शिता का अधिकार
मुआवजे की राशि तय करने के लिए गांव की सरकारी गाइडलाइन और क्षेत्र में हाल ही में हुई जमीनों की रजिस्ट्री की औसत दर में से जो भी अधिक होगा, उसी को आधार मानकर भुगतान किया जाएगा।

एक्सपेरिमेंट ने बर्बाद किए कीमती दो साल
परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुरुआत में अधिकारियों ने 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर के एक बड़े हिस्से (लगभग 65 किमी) को भूमिगत सुरंग के जरिए ले जाने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रयोगात्मक मॉडल के पीछे तर्क दिया गया था कि इससे भूमि अधिग्रहण कम होगा और पानी का वाष्पीकरण रुकेगा। लेकिन हकीकत के धरातल पर यह योजना अत्यधिक महंगी और जोखिम भरी साबित हुई। लंबे समय तक चले विचार-मंथन के बाद अंतत: इस टनल प्रस्ताव को अव्यावहारिक मानकर निरस्त कर दिया गया है।

इस तकनीकी हेर-फेर के चक्कर में परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से लिंक नहर का काम दो साल पिछड़ गया है। नहर का मार्ग आबादी वाले क्षेत्रों के बाहर से निर्धारित किया गया है. जिससे किसी भी गांव के पूर्ण विस्थापन का संकट नहीं है। नहर की मुख्य संरचना और सर्विस रोड के निर्माण के लिए 100 मीटर चौड़ी पट्टी में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करेगी, बल्कि कानून के तहत मिलने वाले उचित मुआवजे से स्थानीय किसानों के आर्थिक स्तर में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगी।

218 किमी लंबी नहर और चार गुना मुआवजा
केन नदी पर निर्माणाधीन ढोड़न बांध से बेतवा नदी तक बनने वाली यह 218 किलोमीटर लंबी लिंक नहर बुंदेलखंड के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए संजीवनी साबित होगी। छतरपुर जिले से होकर गुजरने वाले इसके 107 किलोमीटर के हिस्से के लिए किसानों को मध्य प्रदेश भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा दिया जा रहा है। जिसको लेकर राज्य केबिनेट ने भी बीते माह चार गुना मुआवजा पर मुहर लगाई थी। परियोजना के लिए कुल 1488.42 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है जिसमें 54 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है।

विकासखंड/तहसील गांवों की संख्या मुख्य प्रभावित गांव

छत्तरपुर विकासखंड 17-बंधीकला, ईशानगर, लहेरा, दिदौल, राजापुरवा आदि

महाराजपुर तहसील 12-मऊ, नुना, पड़वाहा आदि

राजनगर विकासखंड 11- गंज, करी, पहरा, सीलोन, कोटा, बरद्वाहा आदि

नौगांव विकासखंड 07 – लुगासी, नयागांव, तिंदनी आदि

बिजावर व सटई तहसील 07-करोदिया, दिदौनियां आदि

रिश्तेदारों की संपत्ति पर कांग्रेस के आरोप, CM मोहन यादव के बचाव में उतरी मंत्रियों की फौज

भोपाल 

सीएम मोहन यादव और उनके परिवार पर जमीनों की खरीद फरोख्त के आरोप पर बीजेपी ने अब हमलावर रुख अपना लिया है। मामले में सीएम के बचाव में प्रदेश के मंत्रियों की फौज उतर आई। बीजेपी ने राज्य सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के बयानों के वीडियो जारी किए जिसमें सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह से लेकर तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने इस मामले में कांग्रेस पर पलटवार किया। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने तो सीएम CM Mohan Yadav पर गलत आरोप लगाने पर कांग्रेस को मानहानि का नोटिस देने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सीएम के रिश्तेदारों की संपत्ति भी जोड़ रही है।

प्रदेश कांग्रेस ने सीएम डॉ. मोहन यादव व उनके परिवार के सदस्यों पर कई एकड़ जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं। बुधवार को इस मामले में बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने न केवल सीएम पर लग रहे आरोपों का बचाव किया बल्कि रॉबर्ट वाड्रा के बहाने कांग्रेस को ही घेरा।

प्रदेश के लोक निर्माण विभाग यानि पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव पर बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी छवि खराब करने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है।

सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा
मंत्री राकेश सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जब रॉबर्ट वाड्रा का नाम भूमि घोटालों में आता है तो कांग्रेसी इसे व्यक्तिगत बताते हुए किनारा करते हैं जबकि सीएम मोहन यादव के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ा जाता है। उन्होंने मामले में कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि उसे मानहानि का नोटिस देंगे।

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकारी और निजी ट्रस्ट में अंतर होता है, यह कांग्रेस समझ नहीं पाई। जिस वीर भारत न्यास को 1 रुपए में उज्जैन में भूमि देने का आरोप लगाया जा रहा है, वह संस्कृति विभाग का हिस्सा है, न कि निजी न्यास। उन्होंने बताया कि अब लीगल सेल पूरे प्रकरण को देख रहा है।

बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए
सरकार के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों तुलसी सिलावट, चेतन काश्यप, कृष्णा गौर, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इंदर सिंह परमार ने भी जमीन विवाद पर सीएम मोहन यादव का पक्ष प्रस्तुत किया। इससे पहले शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी मामले में कांग्रेस पर सवाल दागे थे। बीजेपी ने सभी मंत्रियों के बयानों के बाकायदा वीडियो जारी किए हैं।

बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बुजुर्गों और असहाय लोगों का आदर करना हमारा धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

निर्धन परिवार, वृद्धजन और दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अंत्योदय का संकल्प हो रहा है सिद्ध
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए 203 करोड़ 56 लाख रुपये
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय से हितग्राहियों को किया वर्चुअली संबोधित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है। हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण के लिए मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम से विभिन्न जिलों के हितग्राही वर्चुअली जुड़े।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में माह मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर कार्यक्रम में उपस्थित थी।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन सरकार के स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है। राज्य सरकार सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है। सरकार प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में राज्य सरकार ने किसान हितैषी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जाएगा और इसे चुकाने की समयावधि 31 मार्च नहीं होगी, बल्कि किसान जिस तारीख को कर्ज लेंगे, उसे अगले 12 माह की अवधि में ऋण भरना होगा।

10 साल में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग बाहर आए गरीबी से

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने मुफ्त राशन मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, जल-जीवन मिशन, उज्जवला योजना जैसी योजनाओं ने जन-कल्याण का इतिहास लिखा है। राज्य सरकार अधिकांश कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी है। सरकार गरीब, युवा, नारी और किसान कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से वरिष्ठजन, माताएं-बहनें और हितग्राही वर्चुअली सम्मिलत हुए।

 

मध्य प्रदेश में हर चुनाव लड़ेगी शिवसेना, राष्ट्रीय सचिव बोले- उद्धव के घमंड से टूटी पार्टी

छिन्दवाड़ा 
 शिवसेना मध्य प्रदेश में हर तरह के चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी उतारेगी. ये कहना है शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल का. छिंदावाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे अभिजीत ने कहा कि शिवसेना अब पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा में भी अपने कैंडिडेट उतारकर चुनाव लड़वाने जा रही है. इसके लिए पार्टी ने तैयारियां शुरू कर दी है। 

उद्धव के घमंड से टूट गई शिवसेना : अभिजीत
शिंदे गुट शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक अभिजीत अडसूल ने छिन्दवाड़ा में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया. कार्यकर्ताओं के इस सम्मेलन में उन्होंने पार्टी विस्तार की रणनीति के साथ ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को पार्टी से जोड़ने और सदस्यता अभियान चलाने की बात कही. महाराष्ट्र में चले ऑपरेशन टाइगर पर अभिजीत ने कहा, ” शिवसेना UBT को छोड़कर 6 सांसद शिवसेना शिंदे में शामिल हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण उद्धव ठाकरे की अकड़बाजी (घमंड) है क्योंकि वे कार्यकर्ताओं से ठीक से व्यवहार और उनसे मुलाकात भी ठीक से नहीं करते थे, जिसकी वजह से कार्यकता दूर होते गए और फिर उन्होंने लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे का साथ पकड़ लिया। 

2 साल पहले भी चला था एक ऑपरेशन
अभिजीत अडसूल ने कहा, ” 2 साल पहले भी एक ऐसा ही ऑपरेशन महाराष्ट्र में चला था क्योंकि शिवसेना के हाई कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यकर्ताओं को वक्त नहीं देते थे. 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ अलग हुए. शिंदे मुख्यमंत्री बने थे और हमने पार्टी को खड़ा करने के लिए बहुत मेहनत की लेकिन अपनी आंखों के सामने पार्टी की स्थिति खराब होती देखना पसंद नहीं था. इसलिए हमें उद्धव ठाकरे को अलग करना पड़ा क्योंकि बाला साहब ठाकरे ने जिस उद्देश्य से पार्टी का गठन किया था, वो अपने उद्देश्यों से भटक रही थी। 

बीजेपी और शिंदे शिवसेना के विचार एक : अभिजीत
शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अडसूल ने कहा, ” बालासाहेब ठाकरे के सपनों को सत्ता के लिए उद्धव ठाकरे ने उसी दिन तोड़ दिया था, जब कांग्रेस और NCP ने मिलकर सरकार बनाई थी, जिससे महाराष्ट्र का विकास रुक रहा था. शिंदे की सरकार बीजेपी के साथ बनी तो महाराष्ट्र ने फिर से विकास की रफ्तार पकड़ ली क्योंकि बीजेपी के साथ विचार भी मिलते हैं. अब केंद्र की सरकार और राज्य की सरकार मिलकर विकास कर रही है। 

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