विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को मिले अधिक से अधिक अवसर : राज्यपाल पटेल

विद्यार्थियों में कौशल, योग और सामाजिक सरोकार करें विकसित  
विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक लोकभवन में

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की संकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रदेश के युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालयों द्वारा अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों से सतत् विचार-विमर्श करते रहे है जिसमें युवा भी शामिल है। विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के जज्बे को और अधिक सुदृढ़ करने में अपना सक्रिय योगदान दें। राज्यपाल पटेल गुरूवार को लोकभवन में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 102वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के संचालन एवं समन्वय संबंधी विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।

राज्यपाल पटेल ने विश्वविद्यालयों को सेवायोजित पूर्व विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक 2 वर्ष में प्लेसमेंट सम्मेलन आयोजित करने की सलाह दी है। प्लेसमेंट सम्मेलन में वर्तमान छात्र-छात्राओं को प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। विश्वविद्यालय का गौरव भी बढ़ेगा। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के लगभग 200 देशों में किये गये योगाभ्यास से योग की वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को योग को नियमित गतिविधियों को मासिक साप्ताहिक आयोजन के क्रम में शुरू करना चाहिए। इसकी शुरुआत छात्रावासों से की जा सकती है। उन्होंने रोजगारोन्मुखी प्रमाण-पत्र एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को गरीब एवं वंचित परिवारों की आत्मनिर्भरता में व्यवहारिक पहल बताया। कृषि संबद्ध विभिन्न कार्यों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था विकसित किए जाने पर बल दिया।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के विश्वास के साथ उन्हें विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने भेजते हैं। इस विश्वास को बनाये रखना कुलगुरुओं और प्राध्यापकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान और कौशल के साथ सामाजिक संवेदनशीलता से भी जोड़ना जरूरी है। विश्वविद्यालय गाँव को गोद लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद और विकास गतिविधियों में विद्यार्थियों को सहभागी बनाएं। पिछड़े समुदायों एवं क्षेत्रों के विकास की अभूतपूर्व योजना पीएम-जनमन, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए विद्यार्थियों को भी जोड़े। महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को गाँवों का भ्रमण करवाएं। इससे प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों को भावी जीवन में वंचित और गरीब वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों द्वारा वित्तीय प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रावधानों और निर्देशों का उल्लंघन गंभीर अनियमितता है। कुलगुरू वित्तीय निर्देशों की सीमा का कड़ाई से पालन करें। मंत्री परमार ने कहा कि कॉमन पोर्टल के माध्यम से एकीकृत ई-प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ना निजी विश्वविद्यालयों के लिए स्वैच्छिक है, किन्तु विश्वविद्यालय में प्रवेश होने की सूचना आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित होने की ऑटोमेडेट व्यवस्था की जाना अनिवार्य है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, लोकभवन एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल-आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

भोपाल 

भारतीय संस्कृति में जल को केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का साक्षात स्वरूप और चेतना का प्रतीक माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में ‘अपः पुरुषरूपेण’ कहकर जल की वंदना की गई है, जिसका सीधा अर्थ है कि जल में ही साक्षात ईश्वर का वास है। इसी पावन और दूरदर्शी सोच को आत्मसात करते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैमाना बनाते हुए ‘हर घर जल’ के संकल्प को साकार किया। उनके मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहलें हुईं, जिन्होंने देश को जल संरक्षण की एक नई दिशा दी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के इसी वैश्विक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में जल क्रांति का सूत्रपात किया है। उन्होंने जल संरक्षण को एक सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाते हुए संस्कृति, आदत और राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बना दिया है, जिसके कारण आज उन्हें संपूर्ण प्रदेश में एक जनप्रिय ‘जल नायक’ के रूप में देखा जा रहा है।

उज्जैन विकास प्राधिकरण से मुख्यमंत्री पद तक: 22 वर्षों से अधिक का भागीरथ संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की जल संपदा को सहेजने और पर्यावरण संरक्षण की यह यात्रा कोई तात्कालिक प्रयास नहीं है, बल्कि इसके पीछे 22 वर्षों से अधिक का अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और दूरगामी सोच है। इस यात्रा की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने उज्जैन की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने को अपने जीवन का मुख्य ध्येय बना लिया। महान सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, उनके नवरत्नों की गौरवशाली परंपरा तथा मालवा की जीवनदायिनी माँ शिप्रा के संरक्षण और जल संवर्धन के प्रति उनकी गहरी आस्था ने एक व्यापक सांस्कृतिक चेतना को जन्म दिया। उनके द्वारा आरंभ की गयी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा धार्मिक आस्था को सशक्त करने के साथ-साथ उज्जैन और शिप्रा नदी से जुड़े सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं पर्यटन महत्व को पुनर्स्थापित कर रही है। इस पहल के माध्यम से शिप्रा के घाटों, तीर्थ स्थलों और प्राचीन परंपराओं को जनभागीदारी से जोड़ते हुए नदी संरक्षण महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक परंपराओं के संरक्षण, स्थानीय अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा जन सामान्य सीधे जुड़ रहा है। एक युवा जननेता के रूप में उन्होंने तत्कालीन समय में ही यह समझ लिया था कि बिना जल स्रोतों के संरक्षण के किसी भी सभ्यता या नगर का विकास दीर्घकालिक नहीं हो सकता और अगर इस चिंता पर समाधान के कार्य नहीं किए गए तो भविष्य के लिए सकंट पैदा होगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक की अपनी यात्रा में डॉ. मोहन यादव ने हमेशा जल संवर्धन के मुद्दों को शीर्ष प्राथमिकता पर रखा। वे समय-समय पर तत्कालीन मुख्यमंत्रियों और नीति-निर्माताओं को माँ शिप्रा के संरक्षण एवं जल संवर्धन के लिए प्रेरित करते रहे। वर्षों से उनके मन में नदियों और पर्यावरण के प्रति जो संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता रही, वही आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जैसे विराट जनआंदोलन के रूप में साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले दो दशकों में जल संरक्षण के जो बीज बोए थे, वे आज एक विशाल वटवृक्ष बनकर पूरे मध्यप्रदेश को अपनी शीतलता और समृद्धि से सराबोर कर रहे हैं। उनकी इसी सजगता, दूरदर्शिता और अटूट निष्ठा ने उन्हें मध्यप्रदेश के ‘जल नायक’ के रूप में स्थापित किया है।

आस्था की जीवनदायिनी माँ शिप्रा का पुनरुद्धार और अविरल प्रवाह

मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है और इसी मायके की सबसे पवित्र और पूजनीय नदियों में से एक है माँ शिप्रा। मालवा की गंगा कही जाने वाली और प्राचीन नगरी अवंती को अपने आंचल में समेटने वाली शिप्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र है। इसी पावन तट पर विश्व प्रसिद्ध ‘सिंहस्थ’ महापर्व का आयोजन होता है, जहाँ बाबा महाकाल की छत्रछाया में देश-विदेश से आए श्रद्धालु पुण्य लाभ कमाते हैं। परंतु, समय के साथ बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विकास के कारण शिप्रा के आंचल पर प्रदूषण का साया मंडराने लगा था। इंदौर से आने वाली खान नदी और सीवरेज का गंदा पानी इसमें मिलने से इसकी पवित्रता प्रभावित हो रही थी। जब आस्था की इस जीवनदायिनी पर संकट आया, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे अपनी व्यक्तिगत और शासकीय प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा। इंदौर जिले के निकट काकरी बर्डी पहाड़ी से निकलने वाली 195 किलोमीटर लंबी इस पवित्र नदी को प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाना उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प बन गया।

साल 2024 की शुरुआत से ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिप्रा नदी के जीर्णोद्धार के लिए स्वयं कमान संभाली और एक के बाद एक कई उच्च स्तरीय बैठकें कर कड़े निर्णय लिए। उन्होंने 7 जनवरी 2024 को उज्जैन में आयोजित पहली बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सीवरेज का गंदा पानी शिप्रा में मिलना तुरंत रोका जाए। इसके लिए उन्होंने सांवेर, रामवासा, पंथपिपलई और राघौपिपल्या में स्टॉपडैम और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की व्यापक कार्ययोजना तैयार करवाई। टाटा प्रोजेक्ट्स के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि नृसिंह घाट से लेकर रामघाट तक गंदगी का एक कतरा भी दिखाई नहीं देना चाहिए। इसके बाद 13 फरवरी 2024 को हुई दूसरी बैठक में उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कान्ह नदी के गंदे पानी का ट्रीटमेंट धर्मपुरी से ही शुरू किया जाए और उस साफ किए गए पानी को डायवर्ट कर किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाए, ताकि नदी में केवल शुद्ध जल ही प्रवाहित हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह मुहिम यहीं नहीं रुकी। उन्होंने 2 जुलाई 2024 को तीसरी उच्च स्तरीय बैठक लेकर प्रगति की समीक्षा की और कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। जल संरक्षण के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता का परिणाम था कि 1 दिसंबर 2024 को उज्जैन में केंद्रीय मंत्री श्री जेपी नड्डा की गरिमामयी उपस्थिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एक ऐसी अभिनव कार्ययोजना पर काम कर रही है जिससे न्यूनतम लागत में शिप्रा नदी अविरल होगी और आगामी सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालु किसी अन्य बाहरी नदी के पानी से नहीं, बल्कि माँ शिप्रा के ही शुद्ध और पावन जल से स्नान करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केवल बंद कमरों में निर्देश नहीं दिए, बल्कि स्वयं ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत उज्जैन के रामघाट पर हाथों में झाड़ू थामकर स्वच्छता गतिविधियों में हिस्सा लिया और मां शिप्रा का पूजन-अभिषेक कर श्रमदान की अलख जगाई। नदियों के संरक्षण के इसी संकल्प के तहत उन्होंने 26 मई साल 2026 को माँ शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में सहभागिता कर नदी को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित की, जिसने पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक नई दिव्य प्रेरणा का संचार किया।

सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: सिंहस्थ 2028 का दिव्य संकल्प

एक कुशल जल नायक के दूरदर्शी विज़न का ही परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश में ₹614.53 करोड़ की भारी-भरकम लागत वाली ‘सेवरखेड़ी–सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना’ पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत उज्जैन के ग्राम सेवरखेड़ी में शिप्रा नदी पर एक विशाल बैराज का निर्माण किया जा रहा है। आधुनिक पंपिंग सिस्टम के ज़रिये सिलारखेड़ी जलाशय में पानी इकट्ठा किया जाएगा और आवश्यकतानुसार उसे शिप्रा नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी में जल का स्तर हमेशा बना रहेगा। इस भगीरथ प्रयास का लगभग 50 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। इस परियोजना से न केवल उज्जैन शहर की पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि भविष्य में होने वाले सभी धार्मिक पर्वों पर शिप्रा नदी हमेशा अविरल और निर्मल बहती रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मुख्य लक्ष्य सिंहस्थ 2028 के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलौकिक और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है। इसके लिए उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर लंबे आधुनिक और सुविधायुक्त घाटों का निर्माण कार्य अत्यंत तीव्र गति से जारी है। यह भव्य इंफ्रास्ट्रक्चर इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि महापर्व के दौरान 24 घंटे में 5 करोड़ श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के सुगमता से पवित्र स्नान कर सकेंगे।

‘जल गंगा संवर्धन अभियान’: जन आंदोलन से राज्यव्यापी कायाकल्प

भारतीय संस्कृति में यह अनादि काल से माना गया है कि पृथ्वी, पर्वत, नदी और पेड़-पौधों में साक्षात जीवंतता है और वे हमारे लिए परम पूजनीय हैं। जिस प्रकार मानव देह में धमनियों के माध्यम से रक्त का संचार होता है, ठीक उसी प्रकार नदियां भी इस पृथ्वी पर साक्षात जीवन का संचार करती हैं। यही कारण है कि हम सबके अस्तित्व के लिए नदियों का अक्षुण्ण और निरंतर प्रवाह अनिवार्य है। नदियों के प्रवाह को दूषित करना या उनमें मानवीय अवरोध उत्पन्न करना, वास्तव में मानव जीवन की प्रगति में अवरोध उत्पन्न करने के समान है। इसी पावन और वैज्ञानिक दृष्टि को आत्मसात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल स्रोतों के संरक्षण को सर्वोपरि माना और विश्व पर्यावरण दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर 5 जून 2024 को रायसेन जिले के झिरी बहेडा स्थित बेतवा नदी के पावन उद्गम स्थल पर ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया। इस पुनीत अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेतवा नदी के उद्गम स्थल की वैदिक रीति से पूजा-अर्चना की तथा वहां बरगद का पौधा रोपकर संपूर्ण प्रदेश में इस अभियान को एक महा-आंदोलन का रूप दे दिया।

हाल ही में जारी हुई यूनिसेफ की क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट ने संपूर्ण विश्व को जलवायु परिवर्तन और जल संकट के प्रति सचेत किया है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के करीब 180 करोड़ बच्चे जल संकट और सूखे के सीधे खतरे में हैं, जबकि राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे चिंताजनक वैश्विक और राष्ट्रीय परिदृश्य में मध्यप्रदेश की स्थिति आज जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भगीरथ प्रयासों से काफी सुदृढ़ है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और चेकडैम का संरक्षण, संवर्धन, गहरीकरण और जीर्णोद्धार करना है।

मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियाँ और तालाब हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, और इनका पुनरुद्धार न केवल जल संकट से मुक्ति दिला रहा है बल्कि हमारे सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित कर पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत 3,61,001 कार्यों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2,40,386 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं। प्रदेश का हर जिला, प्रशासन और वहां का हर नागरिक इस जल संरक्षण महायज्ञ में अपनी सर्वश्रेष्ठ आहुति दे रहा है।

जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0: पूरे देश में मध्यप्रदेश और उसके जिलों का शानदार प्रदर्शन

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0’ डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देश भर में अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। पानी बचाने और जल स्रोतों को सहेजने के पूरे हो चुके कार्यों के आधार पर हमारा मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर चमक रहा है। राज्य में अब तक 21,90,930 कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं, जबकि 1,81,506 कार्यों पर अभी तेज़ी से काम चल रहा है। केवल राज्य ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के जिलों ने भी राष्ट्रीय रैंकिंग में बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत के शीर्ष 10 जिलों की सूची में प्रदेश का डिंडोरी जिला तीसरे स्थान पर, खंडवा (पूर्वी निमार) पांचवें स्थान पर और शहडोल जिला नौवें स्थान पर अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। शहरों की बात करें तो नगर निगमों की श्रेणी में भी प्रदेश का सुंदर प्रदर्शन रहा है, जिसमें खंडवा नगर निगम ने देश भर में दूसरा स्थान और इंदौर नगर निगम ने पांचवां स्थान पाया है। यह सफलता दर्शाती है कि पानी की हर बूंद को सहेजने के इस पुनीत कार्य में मध्यप्रदेश का प्रशासन और वहां की जनता कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं।

कृषि समृद्धि और जल संचय जनभागीदारी का व्यवहारिक मॉडल

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कृषि समृद्धि और जल संचय जनभागीदारी के व्यवहारिक मॉडल जल गंगा संवर्धन अभियान के लिए राज्य सरकार द्वारा 10,475.14 करोड़ रूपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। धरातल पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संचय को मजबूती देने के लिए रिकॉर्ड कार्य हुए हैं। इसके तहत राज्य में 65,763 फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) का निर्माण कर उन्हें भौतिक रूप से पूर्ण किया गया है, जबकि कूप पुनर्भरण के लिए 96,670 डग वेल रीचार्ज संरचनाएं तैयार की गई हैं। इसके अतिरिक्त, व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं रीचार्ज से जुड़े 34,488 कार्यों को पूरा किया गया है। जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के उद्देश्य से प्रदेश में 208 भव्य अमृत सरोवरों का निर्माण व विकास सुनिश्चित किया गया है, 3,129 पारंपरिक जल संरचनाओं का मरम्मत और रखरखाव कर उन्हें नया जीवन दिया गया। साथ ही 5,448 वॉटरशेड संबंधी कार्यों को सफलता के साथ धरातल पर उतारा गया है।

जल चौपालों और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलों, ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी तकनीकों के प्रति प्रशिक्षित किया जा रहा है। “प्रति बूंद अधिक फसल” और “कम पानी में अधिक उत्पादन” के इस मंत्र ने न केवल भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है, बल्कि किसानों की लागत को कम कर उनके उत्पादन और आय में वृद्धि की है। यह मॉडल इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि जल नीतियों को जनभागीदारी और कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जाए, तो वे राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा स्तंभ बन सकती हैं।

‘सदानीरा समागम’: वैश्विक पटल पर गूंजा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल

जल नायक मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इन अभिनव और दूरदर्शी प्रयासों की गूंज अब केवल मध्यप्रदेश या भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भरपूर सराहना मिल रही है। वीर भारत न्यास द्वारा भोपाल के भारत भवन में आयोजित ‘सदानीरा समागम’ ने जल संरक्षण को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस ऐतिहासिक समागम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और इक्वाडोर जैसे विभिन्न देशों के राजनयिकों, राजदूतों और नीति विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

समागम में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा संचालित जल प्रबंधन के ‘मध्यप्रदेश मॉडल’ को आज की सबसे बड़ी वैश्विक आवश्यकता बताया। उन्होंने जनभागीदारी और शासकीय संकल्प के इस अनूठे समन्वय की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इस मॉडल को अपने-अपने देशों में भी लागू करने की तीव्र इच्छा जताई। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मिली यह स्वीकृति इस बात को प्रमाणित करती है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश जल-आत्मनिर्भरता की दिशा में विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम हो रहा है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सुरक्षित और जल-संपन्न मध्यप्रदेश की सुदृढ़ नींव का संकल्प

जल संरक्षण अब मात्र एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक और नैतिक कर्तव्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में महिलाओं, युवाओं और कृषकों की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को एक पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी बना दिया है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ और ‘जल संचय जनभागीदारी’ जैसे प्रयास केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सुरक्षित और जल-संपन्न मध्यप्रदेश की सुदृढ़ नींव रख रहे हैं। मध्यप्रदेश आज जल संरचनाओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि, नदियों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में देश का एक अनुकरणीय राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के ‘जल नायक’ के रूप में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास आने वाले समय में स्वर्णिम मध्यप्रदेश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होंगे। स्वच्छ, समृद्ध और जल-आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का यह सपना तभी पूर्णता को प्राप्त करेगा, जब हर नागरिक इस महा-अभियान से जुड़कर जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लेगा। आइए, हम सब मिलकर इस जल-आंदोलन के सहभागी बनें और प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री के संकल्पों को सिद्ध कर राज्य को प्रगति के शिखर पर ले जाएं।

 

श्रीराम तिवारी

 

आपातकाल के 51 साल: ‘संविधान हत्या दिवस’ पर BJP का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और कार्यक्रम

भोपाल 

आज आपातकाल की 51वीं बरसी है. भारतीय जनता पार्टी इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रुप में मनाती है. आज प्रदेशभर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, संगोष्ठियों की प्रदर्शनी, व्याख्यान, छात्र युवा कार्यक्रम और जन जागरूकता गतिविधियां बीजेपी की ओर से आयोजित की जा रही हैं। आपातकाल दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। समारोह में लोकतंत्र सेनानी संघ के पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से आए मीसाबंदी परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। आयोजकों के अनुसार करीब दो हजार परिवार इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंच से लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित कर उनके योगदान को याद करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन लोगों के प्रति सम्मान प्रकट करना है जिन्होंने उस दौर में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 

इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया- सीएम 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 25 जून, 1975… देश में लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन, जब इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया। इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरियों को सादर नमन करता हूं। आइए, संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे। 

25 जून 1975 को लागू हुआ था आपातकाल
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि में कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

आपातकाल दिवस क्या है?
‘इमरजेंसी डे’ भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के एक अहम और विवादित दौर की याद दिलाता है. यह उस समय को दर्शाता है जब 25 जून 1975 की रात को पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू किया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में घोषित यह आपातकाल लगभग 21 महीनों तक, यानी 21 मार्च 1977 तक लागू रहा. इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गई, प्रेस और मीडिया की आज़ादी पर कड़े नियंत्रण लागू किए गए और सेंसरशिप लागू की गई थी.  इसके अलावा सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था. यह दौर भारतीय राजनीति और लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम अध्याय के तौर पर याद किया जाता है। 

मानहानि मामले में राहुल गांधी का यू-टर्न, बोले- बयान का आशय शिवराज या कार्तिकेय से नहीं था

जबलपुर 

कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहे बहुचर्चित मानहानि विवाद में समझौते की संभावनाओं के संकेत उभरते दिखाई दिए हैं। हाई कोर्ट में राहुल गांधी ने एक विस्तृत लिखित आवेदन प्रस्तुत कर कहा है कि उनके वर्ष 2018 के चुनावी भाषण को गलत संदर्भ में लिया गया, जबकि उनका आशय न तो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से था और न ही कार्तिकेय सिंह चौहान से।

बुधवार को न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने राहुल गांधी का आवेदन रिकॉर्ड पर लेते हुए कार्तिकेय सिंह चौहान से लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की सुनवाई 25 जून को पुनः होगी।

‘राहुल गांधी ने पैर पकड़ कर माफी मांगी’
बीजेपी नेता और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने एक्स पर लिखा है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से ‘पैर पकड़ कर माफी मांगी’ है। बग्गा ने दावा किया है कि राहुल गांधी ने शिवराज सिंह चौहान के बेटे के खिलाफ झूठे आरोप लगाए और इसकी वजह से उन्हें मानहानि के केस का सामना करना पड़ा।

राहुल गांधी के आवेदन में क्या था?
अब वहीं, राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में दायर आवेदन में कहा गया है कि उनका बयान कार्तिकेय सिंह के संबंध में नहीं था. उनके वकील ने कोर्ट में बताया कि जिस टिप्पणी को लेकर विवाद हुआ, उसका संबंध कार्तिकेय सिंह से नहीं था और अगर किसी तरह की गलतफहमी हुई है तो इसके लिए उन्हें बहुत खेद है। 

BJP ने साधा राहुल गांधी पर निशाना
वहीं, इस मामले को लेकर बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राहुल गांधी को शायद अपने नाम के साथ ‘सॉरी’ जोड़ लेना चाहिए, क्योंकि उन्हें कई बार अपने बयानों पर माफी मांगनी पड़ी है. अमित मालवीय ने कहा कि अगर राहुल गांधी का बयान कार्तिकेय सिंह के बारे में नहीं था, तो फिर उनका नाम क्यों लिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अक्सर बिना वजह बड़े-बड़े आरोप लगाते हैं और बाद में कोर्ट या तथ्यों के सामने आने पर अपने बयान से पीछे हट जाते हैं। 

मालवीय ने आगे कहा कि विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति से जिम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है. उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान देते समय फैक्ट्स की जांच कर लेनी चाहिए। 

तेजिंदर बग्गा का दावा
बीजेपी नेता और भाजपा युवा मो
र्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से जुड़े मानहानि मामले में पैर पकड़कर माफी मांगी है। 

    राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के बेटे कार्तिकेय सिंह से पैर पकड़ कर माफ़ी माफ़ी । राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह पर झूठे आरोप लगाए थे और मानहानि का केस झेल रहे थे ।

बग्गा का आरोप है कि राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हुआ. हालांकि, मामले में कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और अदालत में सुनवाई चल रही है। 

राहुल के वकील ने दी यह दलील
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अजय गुप्ता ने दलील दी कि झाबुआ में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित बयान में मध्य प्रदेश नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के एक पूर्व मुख्यमंत्री का संदर्भ था। आवेदन में यह भी कहा गया कि बयान को लेकर यदि कोई भ्रम उत्पन्न हुआ, तो उस पर पहले ही खेद व्यक्त किया जा चुका है। 

कार्तिकेय सिंह ने लगाया मानहानि केस
दरअसल, कार्तिकेय सिंह चौहान ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण का उल्लेख करते हुए ऐसा वक्तव्य दिया, जिससे उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मामला दायर किया था। कोर्ट से राहुल गांधी को समन जारी हुआ था। 

इसी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी हाई कोर्ट पहुंचे हैं। अब उनके ताजा स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने प्रतिपक्ष का पक्ष जानना जरूरी माना है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा है कि मामला टकराव के बजाय सहमति के रास्ते की ओर बढ़ सकता है। आज की सुनवाई इस बहुचर्चित विवाद की दिशा तय कर सकती है।

राहुल गांधी ने कार्तिकेय सिंह से खेद जताया

    दरअसल, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका डाली है।
    इस याचिका में उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह के खिलाफ अपने कथित अपमानजनक बयान के लिए खेद प्रकट किया है।
    याचिका में राहुल गांधी की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने जो टिप्पणी की थी, उसका कार्तिकेय सिंह से संबंध नहीं था।

राहुल गांधी के खिलाफ किया मानहानि केस

    इससे पहले कार्तिकेय सिंह ने भोपाल की एक अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत की थी।
    उनका आरोप है कि राहुल गांधी के बयान से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।
    एमपी-एमएलए कोर्ट में कार्तिकेय सिंह की ओर से दायर शिकायत में कहा गया कि 2018 में झाबुआ की एक चुनावी रैली में राहुल गांधी ने पनामा पेपर लीक स्कैंडल का जिक्र करते हुए, उससे उनका नाम जोड़ दिया।
    इसी शिकायत के आधार पर अदालत ने राहुल गांधी को उसके सामने निजी तौर पर पेश होने के लिए समन जारी किया था।
    लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसी समन और मानहानि की कार्यवाही को खारिज करने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया है।

 

पढ़ाई के बाद साथ करते थे नौकरी, अशोकनगर में कार के अंदर युवक-युवती की लाश मिलने से सनसनी

अशोकनगर
 मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में एक कार के अंदर युवक-युवती की लाश मिली है। कार के अंदर खून फैला हुआ है। अटकलें हैं कि युवती की हत्या धारदार हथियार से गला रेतकर की गई है। वहीं, युवकी की मौत गोली लगने से बताया जा रहा है।

देर रात मिली है लाश
मामला बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात 3 बजे की है। शहर के ईसागढ़ रोड स्थित महाना गांव में युवक-युवती का शव मिला है। घटना की सूचना मिलते ही अशोकनगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है। इसके बाद आगे की जांच शुरू कर दी है।

आगे की सीट पर पड़े थे दोनों के शव
जीप के आगे की सीट पर युवक-युवती के शव पड़े थे। प्रारंभिक जांच में युवक के सिर में गोली लगने का निशान मिला है, जबकि युवती के शरीर पर व गले को रेतने के भी गहरे निशान मिले हैं। पुलिस को कार के अंदर से एक पिस्टल पेपर कटर भी बरामद हुआ है।

एक दिन पहले घर से हुए थे लापता
जानकारी के अनुसार, अशोकनगर निवासी युवक रितिक सोनी 26 साल और युवती मुस्कान जैन पुत्री विवेक जैन 24 साल जो एक दिन पहले अपने घर से लापता हुए थे। इसके बाद दोनों के परिवार दोनों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

मोबाइल लोकेशन से घटना स्थल पहुंची पुलिस
पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों की तलाश शुरू की गई। फिर पुलिस घटनास्थल तक पहुंची। अशोकनगर पुलिस ने देखा कि दोनों शव खून से सने हुए थे। इसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

सूचना मिलने पर टीम महाना गांव के पास पहुंची, जहां जीप में दोनों शव मिले। उन्होंने पुष्टि की कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट हो पाएगा।

भुवनेश शर्मा, देहात थाना प्रभारी

एक साथ दोनों करते थे जॉब
बताया जा रहा है कि दोनों युवक-युवती एक साथ पढ़ते थे। फिर एक साथ एक प्राइवेट कंपनी में दोनों जॉब करते थे। युवक का इंदौर में कार इंटीरियर से जुड़ा व्यापार था और 15 दिन पहले ही रितिक अशोकनगर आया था। घटना के बाद मृतक युवक के पिता ने मामले में दोनों की हत्या की आशंका जताई है और फोरेंसिक जांच की मांग की है। हालांकि पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला।

 

उज्जैन में मोहर्रम जुलूस का VIDEO वायरल, हवा में लटकी वैन को विस्फोट से उड़ाने का प्रदर्शन

उज्जैन

उज्जैन के बड़नगर में 23 जून की रात जो हुआ, उसने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस अनुमति पर सवाल खड़ा कर दिया है। अडान मोहल्ले से निकले मोहर्रम के जुलूस में क्रेन से करीब 40 फीट ऊपर एक टाटा मैजिक वैन लटकाई गई। वैन पर दो युवक सवार होकर लाल झंडे लहराते रहे और फिर अचानक धमाके के साथ वैन को हवा में उड़ा दिया गया।

यह जानलेवा स्टंट 23 जून का है, जब बड़नगर के अडान मोहल्ले से 23 जून को मोहर्रम का जुलूस निकाला गया था. इसमें भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल थे. इसी दौरान कुछ बदमाशों ने एक कार को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊपर लटकाया और फिर उसमें विस्फोट लगाकर उड़ा दिया ओर वीडियो ओर फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। 

कार में हुए कई धमाके
वायरल वीडियो में धमाके से पहले दो युवक लाल झंडे लहराते हुए भी दिखाई दे रहे हैं. वायरल वीडियो जिस इंस्टाग्राम आईडी परवेज एडिट्स_2.0 से शेयर किया गया, उसमें कार विस्फोट के अलावा कई अन्य खतरनाक करतब और धमाकों के वीडियो भी सामने आए हैं. वहीं, हुसैनी अखाड़ा शाहजलालपुरा में भी युवकों के खतरनाक प्रदर्शन के वीडियो सामने आए हैं।

पहले लिखा ले फिर आ गए
जुलूस में शेरे अडान अखाड़ा बड़नगर के पोस्टर लगाकर बड़ी संख्या में भीड़ जुटाई गई थी. कार पर विस्फोट से पहले “ले फिर आ गए” लिखा हुआ नजर आ रहा था. वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. मामले में हरिद्वार के संत स्वामी शिवानंद गिरी ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाए कि जब धार्मिक आयोजनों में पटाखों और अन्य गतिविधियों प्रतिबंध है तो खुलेआम विस्फोट जैसी गतिविधियों की अनुमति कैसे दी जा रही है। 

कार्रवाई की तैयारी
मामले में बड़नगर टीआई कमलेश सिंगार ने बताया कि आयोजकों से पूछताछ कर जांच पूरी कर ली है. जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री क्या थी और इसके लिए अनुमति ली गई थी या नहीं। 

वीडियो देखकर हरिद्वार के संत स्वामी शिवानंद गिरी भड़क गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उज्जैन में दही-हांडी और पटाखों पर तो प्रतिबंध लग जाता है, फिर गाड़ी को विस्फोट कर उड़ाने जैसी गतिविधि की अनुमति कैसे मिल गई? वहीं, हिंदू जागरण मंच के रितेश माहेश्वरी ने बताया कि वैन पर आपत्तिजनक पोस्टर भी लगे थे। सवाल यह है कि जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति दी थी या नहीं?

वैन पर लिखा हुआ था ‘ले फिर आ गए’
वैन पर लिखा हुआ था ‘ले फिर आ गए’। एक इंस्टाग्राम आईडी परवेज एडिट्स 2.0 पर इस घटना का वीडियो वायरल भी किया गया। इसके अलावा और भी अन्य वीडियो इस आईडी पर थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस तरह का विस्फोट करके कुछ लोग क्या संदेश देना चाहते हैं, इस पर भी पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। इस तरह की हरकत की हिंदूवादी संगठनों ने निंदा की है।

वीडियो वायरल होने के बाद हरिद्वार के संत स्वामी शिवानंद गिरी ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसा लगता है जैसे संदेश दिया जा रहा हो कि ‘हम काफिरों की गाड़ियों को इसी तरह उड़ा देंगे।’

हिंदू जागरण मंच के रितेश माहेश्वरी ने कहा कि सकल हिंदू समाज की मांग है कि जिला प्रशासन स्पष्ट करे कि इस तरह की गतिविधि की अनुमति दी गई थी या नहीं। मामले को लेकर बड़नगर थाना प्रभारी कमलेश सिंगार ने बताया कि मामले की जानकारी मिल गई है। आयोजकों से पूछताछ कर जांच की जा रही है। जल्द कार्रवाई की जाएगी।

जानें पुलिस ने इस मामले पर क्या कहा?
बड़नगर टीआई कमलेश सिंगार ने कहा कि वीडियो संज्ञान में आया है। आयोजकों से पूछताछ की जा रही है। विस्फोट किस सामग्री से किया गया और इसके लिए अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

हिंदू जागरण मंच के रितेश माहेश्वरी ने बताया कि मोहर्रम के जुलूस के दौरान एक बड़ी क्रेन पर एक वैन लटकाई गई थी, जिस पर कई आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए थे। उन्होंने कहा कि सकल हिंदू समाज की मांग है कि जिला प्रशासन स्पष्ट करे कि इस तरह की गतिविधि की अनुमति दी गई थी या नहीं। इस घटनाक्रम से जुड़े कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर भी अपलोड किए गए हैं।

टीआई बोले- पूछताछ कर जल्द कार्रवाई करेंगे
बड़नगर थाना प्रभारी कमलेश सिंगार ने बताया कि मामले की जानकारी मिल गई है। आयोजकों से पूछताछ कर जांच की जा रही है। जल्द कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपदा में बचाव पर ब्रेल लिपि में प्रकाशित पुस्तक का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपदा में बचाव पर ब्रेल लिपि में प्रकाशित पुस्तक का किया लोकार्पण

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नि:शक्तजन के लिए आग, हीटवेब (लू) और आकाशीय बिजली से बचाव के संबंध में ब्रेललिपि में प्रकाशित पुस्तक का गुरूवार को मंत्रालय में लोकार्पण किया। पुस्तक का मुद्रण आपदा प्रबंध संस्थान भोपाल द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से कराया गया है।

केरल और असम के बाद नि:शक्तजन के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इस तरह की पहल मध्यप्रदेश द्वारा की गई है। दृष्टिबाधित भाई-बहनों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय शुक्ला, प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर उपस्थित थी।

 

₹60 की पानी की बोतल ₹175 में बेचना पड़ा महंगा, भोपाल के होटल रेडिसन को चुकाने होंगे ₹8 हजार

भोपाल

60 रुपए की पानी की बोतल पर 175 रुपए वसूलने वाले भोपाल के एक बड़े होटल पर उपभोक्ता आयोग का फैसला आया है। आयोग ने माना कि होटल एमआरपी से ज्यादा कीमत ले सकता है, लेकिन उसी राशि पर अलग से जीएसटी वसूलना गलत है।
होटल को उपभोक्ता से अतिरिक्त लिए गए 10.80 रुपए लौटाने, 5 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 3 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए गए हैं। तय अवधि में भुगतान नहीं करने पर होटल को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

पानी की बोतल की कीमत देखकर आपत्ति जताई
मामला अप्रैल 2022 का है। रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए गए थे। भोजन के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल ली। बोतल पर एमआरपी 60 रुपए अंकित थी, लेकिन बिल में इसके 175 रुपए जोड़े गए।

जब बिल आया तो कुल राशि 6809.88 रुपए थी। पानी की बोतल की कीमत देखकर हुकुम सिंह ने आपत्ति जताई, लेकिन होटल प्रबंधन ने राशि वापस नहीं की। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने जून 2026 में फैसला सुनाया।

होटल प्रबंधन बोला- MRP से ज्यादा कीमत लेना जायज
होटल प्रबंधन ने आयोग के सामने तर्क दिया कि होटल और रेस्टोरेंट में बेची जाने वाली वस्तुएं सिर्फ उत्पाद नहीं होतीं। उनके साथ एयर कंडीशनिंग, बैठने की सुविधा, लाउंज, संगीत, सर्विस और अन्य आतिथ्य सेवाएं भी दी जाती हैं।

होटल का कहना था कि इसलिए मेन्यू कार्ड में दर्ज कीमतें लागू होती हैं। बोतल पर अंकित एमआरपी रिटेल दुकानों के लिए होती है, होटल में परोसी जाने वाली वस्तुओं पर नहीं। होटल ने यह भी कहा कि मेन्यू में पहले से स्पष्ट था कि जीएसटी अलग से लिया जाएगा।

आयोग ने कहा: कीमत सही, लेकिन टैक्स वसूली में गलती
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए माना कि होटल में एमआरपी से ज्यादा कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है और इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।

हालांकि आयोग ने कहा कि 175 रुपए की कीमत में ही जीएसटी शामिल माना जाएगा। ऐसे में होटल द्वारा उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी के रूप में अतिरिक्त 10.80 रुपए वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी है।

शिकायतकर्ता बोले- स्टाफ ने बदसलूकी भी की
शिकायतकर्ता हुकुम सिंह ठाकुर का कहना है कि कीमत पर आपत्ति जताने पर होटल स्टाफ ने उनके साथ बहस की और अभद्र व्यवहार भी किया। इसी के बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि आयोग ने अतिरिक्त जीएसटी वसूली को गलत माना, लेकिन एमआरपी से अधिक कीमत वसूले जाने के मुद्दे पर उन्हें आंशिक राहत ही मिली।

वकील बोले- मामला उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है
परिवादी (शिकायत) पक्ष के वकील शशिकांत वर्मा ने कहा कि मामला सिर्फ 10.80 रुपए का नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा है। उनके अनुसार होटल और रेस्टोरेंट अक्सर सुविधाओं के नाम पर ऊंची कीमतें वसूलते हैं।

उन्होंने कहा कि आयोग का फैसला उपभोक्ताओं को यह संदेश देता है कि अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने पर न्याय मिल सकता है।

एमआरपी (MRP) को लेकर आयोग ने 2 केस का हवाला दिया
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया (सिविल अपील नं. 21790/2017, निर्णय दिनांक 12.12.2017) इसके अलावा आयोग ने एक और फैसले ITC Ltd vs K.C. Khanna (अपील नं. A/2013/2201, निर्णय दिनांक 04.09.2023) का जिक्र किया गया है।

इन फैसलों में माना गया कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन और रेलवे जैसे संस्थागत उपभोक्ता पैकेज्ड वस्तुएं खरीदकर अपनी सेवाओं के साथ ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं। इसलिए उन पर सामान्य रिटेल एमआरपी नियम उसी तरह लागू नहीं होते जैसे दुकानों पर होते हैं। इसी आधार पर आयोग ने माना कि होटल द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत लेना अपने आप में अवैध नहीं है।

46 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 2-3 दिन में पूरे प्रदेश को कवर करेगा मानसून

भोपाल
 मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में आखिरकार मानसून की एंट्री हो गई है। मौसम विभाग ने छिंदवाड़ा समेत 15 जिलों में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पिछले 24 घंटों में हुई अच्छी बारिश और दक्षिण-पश्चिम से आने वाली नमी युक्त हवाओं के आधार पर यह घोषणा की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून प्रदेश के शेष हिस्सों को भी कवर कर लेगा।

भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती
गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं सीधी जिले में लू चलने की संभावना है, जबकि ग्वालियर, मुरैना, भिंड, रीवा, सिंगरौली, मंदसौर और नीमच समेत कई जिलों में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा
मौसम विभाग के अनुसार आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी और डिंडौरी जिलों में मानसून पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में सबसे अंत में मानसून पहुंचेगा।

प्रदेश के बाकी हिस्सों को अगले 2 से 3 दिन में मानसून कवर कर लेगा। मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को प्रदेश के 46 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। सीधी में लू चल सकती है, जबकि नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, रीवा और सिंगरौली में उमस-भरी गर्मी रहेगी।

इन जिलों में आ चुका मानसून आलीराजपुर, इंदौर, हरदा, धार, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट, मंडला, बड़वानी, डिंडौरी में मानसून के आने की घोषणा हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो से चार दिन के अंदर मानसून पूरे प्रदेश में छा जाएगा। यह सबसे आखिरी में ग्वालियर-चंबल में मानसून पहुंचेगा।

9 दिन लेट हो गया मानसून
एमपी में मानसून की एंट्री की सामान्य तारीख 15 जून है, लेकिन इस बार यह 9 दिन लेट यानी, 24 जून को प्रदेश में आया। मानसून आ गया है? इसका आंकलन कैसे होता है? यह मौसम वैज्ञानिक अरुण कुमार से जाना। उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटे में 75 मिमी यानी, 3 इंच बारिश हो गई।

सीमा से जुड़े जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी रहा। कई जिलों में पर्याप्त बारिश हुई और दक्षिण-पश्चिम से नमी वाली मानसूनी हवाएं भी आईं। इन्हीं के अध्ययन से मानसून की एंट्री की अधिकारिक घोषणा की जाती है।

इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून
मौसम विभाग ने अलीराजपुर, बड़वानी, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले दो से चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।

नौ दिन की देरी से हुई एंट्री
मध्य प्रदेश में मानसून की सामान्य आगमन तिथि 15 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार यह 24 जून को पहुंचा। यानी मानसून निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से आया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि वर्षा की मात्रा, नमी वाली हवाओं की दिशा और उनके प्रभाव क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। छिंदवाड़ा में पिछले 24 घंटों के दौरान 75 मिमी से अधिक बारिश दर्ज होने के साथ दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में लगातार सक्रिय मानसूनी गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।

बारिश का कोटा अभी भी आधा अधूरा
मानसून के देर से आने का असर शुरुआती सीजन पर साफ दिखाई दे रहा है। प्रदेश में 1 जून से 24 जून तक औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 48 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। 

इस साल कम बरसात की आशंका
भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत 47 जिलों में बारिश का स्तर औसत से नीचे रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान करीब 37.3 इंच वर्षा होती है, लेकिन इस बार यह आंकड़ा 30 से 32 इंच के बीच रहने की संभावना जताई गई है।

केवल सात जिलों में सामान्य से अधिक बारिश
अब तक के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, गुना, मंदसौर, नीमच और श्योपुर ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके विपरीत इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, बालाघाट, धार, खरगोन, रायसेन, सीहोर समेत 48 जिलों में वर्षा का स्तर सामान्य से कम बना हुआ है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा। 

विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है
इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य तिथि 15 जून के बजाय 24 जून को पहुंचा, यानी करीब 9 दिन की देरी से। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं होती, बल्कि लगातार वर्षा, हवा की दिशा, नमी और अन्य मौसमीय संकेतकों का विश्लेषण करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाती है।

खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी
हालांकि इस बार मानसून के बावजूद बारिश को लेकर चिंता बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेश के 47 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। 1 जून से 24 जून तक प्रदेश में औसतन 84.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 42 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 50 प्रतिशत कम है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों की बारिश प्रदेश की जल स्थिति और खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

 

SPS से IPS प्रमोशन पर आज फैसला, 9 अफसरों की किस्मत का होगा निर्णय

भोपाल 

मध्य प्रदेश के 9 राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आईपीएस अवार्ड करने गुरुवार को डीपीसी मीटिंग होगी। गृह विभाग के प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग ने इस तारीख को मंजूरी दी थी जिसके बाद आज यह बैठक होने वाली है। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी और संघ लोक सेवा आयोग। 

आईपीएस अवार्ड के लिए गृह विभाग की प्रक्रिया सामान्य प्रशासन विभाग से आगे चल रही है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की डीपीसी के लिए अभी तक सामान्य प्रशासन विभाग प्रस्ताव नहीं भेज पाया है। दूसरी ओर राज्य पुलिस सेवा के अफसरों की प्रस्तावित डीपीसी की बैठक में इस बार 1997 और 1998 बैच के अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा।

राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा के लिए जिन अफसरों के नाम पर विचार किया जाएगा उनमें 1997 बैच के सीताराम ससत्या, अमृत मीणा, वर्ष 1998 बैच के निमिषा पांडेय, राजेश मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सब्यसाची सर्राफ, समर वर्मा, सत्येन्द्र सिंह तोमर समेत कुल 27 नाम शामिल हैं।

इनकी पदोन्नति अटक सकती है
इसमें से अमृत मीणा की जाति प्रमाण पत्र और राजेश मिश्रा की विभागीय जांच के चलते डीपीसी अटक सकती है और इनका लिफाफा बंद हो सकता है। अंतिम दौर में सीताराम ससत्या के नाम को लेकर भी शिकायत के चलते डीपीसी में उनका नाम कटने के कयास लगाए जा रहे हैं।

 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu