65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के देव मीणा ने रचा इतिहास

65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश एथलेटिक्स अकादमी के देव मीणा ने रचा इतिहास

स्वर्ण पदक के साथ बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

भोपाल

भुवनेश्वर में 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित 65वीं राष्ट्रीय अंतर्राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के प्रथम दिवस सायंकालीन सत्र में मध्यप्रदेश राज्य एथलेटिक्स अकादमी के खिलाड़ी देव मीणा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पोल वॉल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

देव ने न केवल नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया, बल्कि आगामी एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर भारतीय एथलेटिक्स में मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। उनकी इस उपलब्धि ने प्रतियोगिता के पहले ही दिन प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव का अवसर प्रदान किया।

देव मीणा ने बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

पोल वॉल्ट स्पर्धा में देव मीणा ने 5.46 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया। देव की इस उपलब्धि ने उन्हें देश के शीर्ष पोल वॉल्टरों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है।

एशियाई खेल 2026 के लिए किया क्वालीफाई

राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाले देव मीणा ने आगामी एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि मध्यप्रदेश और देश के लिए भी गर्व का विषय है।

प्रदेश की एथलेटिक्स प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन

देव मीणा का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनकी सफलता खिलाड़ियों की मेहनत, समर्पण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है।

खेल मंत्री श्री सारंग ने दी बधाई

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने देव मीणा को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाना और एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देव आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी देश और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

देव मीणा की यह उपलब्धि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रशिक्षण के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया जा सकता है।

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने में महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण : मंत्री परमार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने में महाविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण : मंत्री परमार

मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल की शोध पत्रिका एवं जर्नल का विमोचन

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध की सशक्त संस्कृति विकसित होने से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्राप्त होगी तथा देश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार बुधवार को भोपाल स्थित अपने निवास कार्यालय में शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका एवं जर्नल का विमोचन कर अपने विचार साझा कर रहे थे। मंत्री परमार ने कहा कि शोध पत्रिकाएं एवं जर्नल ज्ञान के सृजन, संरक्षण एवं प्रसार के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे प्रकाशनों से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध कार्यों को व्यापक मंच प्रदान करने का अवसर मिलता है तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य शिक्षा को रोजगारपरक, शोधोन्मुख एवं समाजोपयोगी बनाना है।

मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में ऐसे प्रयास प्रदेश की उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे।

उल्लेखनीय है कि शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय, भोपाल द्वारा “रोजगारपरक शिक्षा के विविध आयाम” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया था। इस वेबिनार का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा को रोजगारपरक बनाने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जागरूक करने तथा शिक्षण संस्थानों, शोध एवं उद्योग जगत के मध्य समन्वय स्थापित करना था। वेबिनार में देशभर के विभिन्न शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों की सहभागिता रही तथा 54 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिन्हें समीक्षित एवं संकलित कर शोध जर्नल के रूप में प्रकाशित किया गया।

इस अवसर पर शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता मोदी, समन्वयक डॉ. अलका प्रधान, डॉ. आर. एस. रघुवंशी, शोध एवं प्रकाशन समिति के सदस्य डॉ. चन्द्रभान माकोड़े, डॉ. उमाशंकर पटेल, डॉ. नीतू शर्मा तथा डॉ. एल.एन. गौड़ सहित महाविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

 

अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 27 जून को

अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 27 जून को

सशक्त उद्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश समिट रवीन्द्र भवन में
मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल
2000 प्रतिभागी-विभागों की प्रगति की प्रदर्शनी और 3 विशेष सत्र होंगे आकर्षण

भोपाल 

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 पर ‘सशक्त उ‌द्यमी समृद्ध मध्यप्रदेश समिट’ शनिवार 27 जून  को रविन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्‌यम विभाग द्वारा किया जा रहा है। सू्क्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप और मुख्य सचिव अनुराग जैन समिट में विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव भूमि आवंटन, भूमिपूजन, लोकार्पण तथा एमएसएमई, स्टार्टअप एवं स्वरोजगार लाभार्थियों को चेक प्रदान करेंगे। समिट में खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र एवं परिधान तथा अभियांत्रिकी क्षेत्रों के एमएसएमई के लिए बायर-सेलर मीट आयोजित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एमएसएमई प्रदर्शनी एवं ईज़ ऑफ डूइंग क्लिनिक का उ‌द्घाटन करेंगे। प्रदर्शनी में लगभग 50 स्टॉल होंगे, जिनमें एमएसएमई, स्टार्टअप, विभागीय स्टॉल, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ओ.डी.ओ.पी, योजना लाभार्थी, महिला स्व-सहायता समूह, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी भोपाल, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर भोपाल, भारतीय मानक ब्यूरो, GeM, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एन.आइ.टी.टी.आर) तथा बैंकों के प्रतिनिधि सम्मिलित रहेंगे, जो प्रतिभागियों को संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान करेंगे। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पी.एफ.आर.डी.ए) भी समिट में भाग लेंगे।

मुख्य सत्र में प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेन्द्र कुमार सिंह स्वागत उद्‌बोधन देंगे। इस दौरान एमएसएमई, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण एवं कुटीर उद्‌योग, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्‌योगिकी, एसआरएलएम (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) तथा आईपीआईपी विभागों की विगत ढाई वर्ष की उपलब्धियों एवं आगामी ढाई वर्ष की कार्ययोजना पर आधारित लघु वीडियो फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा। एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के समर्थन के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया जाएगा, जिनमें आरएजेडओआरपीएवाय (आरजीपीएक्स प्रा. लि.). प्लग एण्ड प्ले इंडिया प्रा. लि. तथा बीआईसीसीआई (बैकवर्ड क्लासेज़ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) सम्मिलित है। एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप और मुख्य सचिव अनुराग जैन भी समिट को संबांधित करेंगे।

समिट में राज्य के उद्‌यमशील पारिस्थितिकी तंत्र के 2000 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें एमएसएमई, उ‌द्यमी, स्टार्टअप, वित्तीय संस्थान, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एवं महिला स्व-सहायता को एक ही सशक्त मंच दिया गया है। समिट में विगत ढाई वर्षों की समस्त संबद्ध विभागीय उपलब्धियों तथा आगामी ढाई वर्षों की कार्ययोजना प्रदर्शित होगी। एमओयू का आदान-प्रदान, राज्य में एमएसएमई एवं स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध संस्थागत सहयोग को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम होंगे।

 3 विषयगत सत्र भी होंगे

समिट में तीन विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रथम सत्र, ‘ नये बाजार, नई उडान’ (एमएसएमई एवं एसएचजी के लिए नए बाजार अवसर) में एफआईईओ, सीएसआईआर-एएमपीआरआई ओएनडीसी, ईसीजीसी एवं इंडिया पोस्ट के पैनलिस्ट भाग लेंगे। दवितीय सत्र ‘पूंजी तक पहुँच’ (फंडिंग द नेक्स्ट जनरेशन एमएसएमई), में एनपीसीएल, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आरएक्सआईएल ट्रेन्ड्स प्लेटफॉर्म, आरएजेडओआरपीएवाय एवं नाबार्ड के पैनलिस्ट सम्मिलित हैं। तृतीय सत्र ‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेण्डर्ड’ (बीआईएस) के सहयोग से उत्पाद गुणवत्ता पर होगा।

उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ‌द्वारा अप्रैल 2017 में पारित संकल्प के माध्यम से प्रत्येक वर्ष 27 जून को ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्‌यम दिवस” के रूप में घोषित किया गया है। यह दिवस सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजीएस) की प्राप्ति में एमएसएमई की अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरुकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह वर्ष अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के आयोजन का दसवां वर्ष है।

मेधावी प्रतिभाओं का अभिनंदन : शिक्षा, संस्कार और चेतना के संगम का बना प्रेरक आयोजन

मेधावी प्रतिभाओं का अभिनंदन : शिक्षा, संस्कार और चेतना के संगम का बना प्रेरक आयोजन

भोपाल
 प्रतिभा जब सम्मान पाती है तो वह केवल व्यक्ति का उत्साह नहीं बढ़ाती, बल्कि समाज के भविष्य को दिशा देती है। इसी भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश प्रेस क्लब एवं महर्षि संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में शहर के मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, संस्कार, चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उत्सव बन गया।

समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पूर्व कमिश्नर शहडोल संभाग डॉ.राजीव शर्मा रहे। विशिष्ट अतिथियों में महर्षि संस्थान के डायरेक्टर श्री मनीष सिन्हा, मध्यप्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ.नवीन आनंद जोशी, संयुक्त सचिव अजय सिंह तथा मीडिया टुडे के डायरेक्टर अनुज यादव उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ.नवीन आनंद जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा को केवल अंक प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का विचारक, नीति निर्माता और समाज का नेतृत्वकर्ता होगा। इसलिए युवाओं में ज्ञान के साथ संस्कार, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी उतना ही आवश्यक है।

डॉ.जोशी ने अपने उद्बोधन में मध्यप्रदेश प्रेस क्लब द्वारा समाजहित, जनजागरण, शिक्षा प्रोत्साहन एवं सकारात्मक सामाजिक चेतना के लिए देशभर में संचालित विविध अभियानों और आयोजनों की जानकारी देते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का दायित्व भी निभाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अध्ययन के साथ मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति रही। मधुर सैन्य धुनों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रीय भाव से ओतप्रोत कर दिया और उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा अतिथियों में उत्साह का संचार किया।

इस अवसर पर महर्षि संस्थान द्वारा ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन (भावातीत ध्यान) की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि मानसिक शांति, एकाग्रता और आंतरिक चेतना का विकास आधुनिक शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। संस्थान के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन के महत्व से भी अवगत कराया। अजय सिंह ने विद्यार्थियों को तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग और परिवार व शिक्षकों के साथ सतत संवाद बनाए रखने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यालयों के प्राचार्यों एवं अभिभावकों ने विद्यार्थियों को सम्मानित करने की इस अभिनव पहल के लिए मध्यप्रदेश प्रेस क्लब एवं महर्षि संस्थान की सराहना की तथा इसे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला आयोजन बताया।
कार्यक्रम का संचालन महर्षि संस्थान के  उद्घोषक प्रियम पटेरिया ने किया। अंत में राष्ट्र निर्माण में शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक चिंतन की भूमिका को रेखांकित करते हुए समारोह का समापन हुआ।

यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जब प्रतिभा को सम्मान, शिक्षा को मूल्य और युवाओं को सही दिशा मिलती है, तब एक सशक्त राष्ट्र की नींव तैयार होती है।

सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की जरूरत, हर नागरिक बने डिजिटली जागरूक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की जरूरत, हर नागरिक बने डिजिटली जागरूक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सायबर अपराध में “सावधानी ही है सबसे बड़ा बचाव
सायबर सुरक्षा के 3 सूत्र अपनाएं- जागरूकता, सावधानी और सहभागिता
सायबर धोखाधड़ी होने पर अविलंब 1930 पर करें शिकायत
 अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी और बैंकिंग जानकारी भी किसी से साझा न करें
 संकटमोचक हनुमान जी की भूमिका में हमेशा रहती है मध्यप्रदेश पुलिस
कोई अनजान लिंक मिले, कोई डराये धमकाए तो रुको, सोचो और फिर एक्शन लो
सायबर जागरूकता पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए बुकलेट्स तथा अभियान का वीडियो किया लाँच
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान सेफ क्लिक 2.0 का किया शुभारंभ
24 जून से 8 जुलाई तक चलेगा यह राज्य व्यापी जागरूकता अभियान

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र ‘जागरूकता, सावधानी और सहभागिता’ के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत “सेफ क्लिक 2.0” के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का “सेफ क्लिक 2.0” सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले “सेफ क्लिक 2.0” अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है।

लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो “रुको, सोचो और फिर एक्शन लो”। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “सेफ क्लिक 2.0” अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है।

जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की ई-जीरो एफआईआर दर्ज कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही  हेल्पलाइन नम्बर 1930 से पीड़ितों को त्वरित सहायता भी उपलब्ध हो रही है। सायबर धोखाधड़ी से संबंधित राशि को बैंक खाते में रोकने और अकाउंट होल्डर को दिलवाने में प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में कुल 135 करोड़ राशि होल्ड कराई गई। पीड़ितों को भी राशि दिलवाई गई। पुलिस सायबर अपराध से जुड़े सिस्टम को चि‍न्हित कर ठोस कार्रवाई कर रही है। म्यूल अकाउंट्स और सायबर स्लेवरी से जुड़े लोगों की पहचान भी की जा रही है।

सायबर अपराध रोकने चलाये जा रहे हैं विशेष अभियान

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा विशेष अभियान “ऑपरेशन फास्ट”, “ऑपरेशन फेस्ट”, “ऑपरेशन मैट्रिक्स”, “ऑपरेशन नयन” संचालित किए गए। मध्यप्रदेश पुलिस को डीएससीआई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

जन जागरूकता सबसे बड़ी शक्ति सायबर अपराध रोकथाम के लिये

सायबर अपराधों की रोकथाम और जन जागरुकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। मप्र पुलिस ने करोड़ों लोगों को अपने जागरुकता अभियान से जोड़ा है। पहला “सेफ क्लिक” अभियान जन जागरुकता का विषय बना था। इससे डिजिटल अरेस्ट पर बहुत हद तक रोक भी लगी थी। उन्होंने कहा कि “सेफ क्लिक 2.0” अभियान से इन प्रयासों को और ज्यादा गति मिलेगी, इस अभियान का मूल मंत्र है। सावधानी ही बचाव है। पुलिस गांव-गांव तक लोगों को “सेफ क्लिक” के लिए जागरुक करेगी। जनता को बैंकिंग सुरक्षा, महिला सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूक करेंगे। इसमें सायबर हेल्पलाइन 1930 का व्यापक प्रचार प्रसार भी शामिल है।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सायबर सुरक्षा) ए. साईं मनोहर ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले 2 सप्ताह में मध्यप्रदेश पुलिस इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए काम करेगी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सहित सोशल मीडिया इन्फलूएंसर्स भी उपस्थित थे। 

 

अब ट्रेन टिकट में मिलेगी फेवरेट सीट, बुकिंग होगी और फास्ट; यात्रियों को बड़ी राहत

भोपाल 

ट्रेन टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट हैंग होना, सीट उपलब्धता देखने में देरी और तत्काल टिकट के समय सर्वर पर बढ़ते दबाव जैसी परेशानियां अब जल्द ही बीते दिनों की बात हो सकती हैं। रेलवे अपने करीब चार दशक पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) को आधुनिक क्लाउड आधारित तकनीक से बदलने जा रहा है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग की रफ्तार पांच गुना तक बढ़ जाएगी और यात्रियों को बस और एयरलाइन की तर्ज पर अपनी पसंद की सीट चुनने की सुविधा भी मिलेगी।

वर्तमान पीआरएस वर्ष 1986 से काम कर रहा है। इसी नेटवर्क के जरिए रेलवे आरक्षण काउंटर, आइआरसीटीसी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर टिकट बुकिंग की जाती है। मध्यप्रदेश सहित देश में होने वाली करीब 88 प्रतिशत ऑनलाइन टिकट बुकिंग इसी सिस्टम से संचालित होती है। बढ़ती यात्री संख्या और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए रेलवे ने इसे अपग्रेड करने का फैसला लिया है।

कई गुना हो जाएगी क्षमता
रेलवे सूत्रों के अनुसार अभी सिस्टम एक मिनट में करीब 32 हजार टिकट बुक करने में सक्षम है। नया क्लाउड आधारित सिस्टम यह क्षमता बढ़ाकर 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट तक पहुंचा देगा। वहीं सीट उपलब्धता जांचने की क्षमता भी 4 लाख से बढ़कर 40 लाख रिक्वेस्ट प्रति मिनट हो जाएगी। इसका सीधा फायदा त्योहारों, गर्मी की छुट्टियों और अन्य व्यस्त सीजन में मिलेगा, जब टिकटों की मांग अचानक बढ़ जाती है।

बहुभाषी इंटरफेस से बुकिंग
आसान नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यात्रियों को सीट चयन का विकल्प देना होगी। बस और फ्लाइट बुकिंग की तरह यात्री कोच में उपलब्ध सीटों में से अपनी पसंद की सीट चुन सकेंगे। परिवार या समूह में यात्रा करने वाले लोग एक साथ बैठने के लिए सीटें चुन पाएंगे। दिव्यांगजन और मरीजों के लिए भी विशेष सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। साथ ही बहुभाषी इंटरफेस के कारण टिकट बुकिंग और आसान हो जाएगी।

रेल वन ऐप निभाएगा मुख्य भूमिका
नई व्यवस्था में रेलवन ऐप मुख्य प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाएगा। एआइ आधारित यह ऐप वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का भी अनुमान बताएगा। रेलवे का दावा है नई तकनीक से टिकट बुकिंग प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी, जिससे यात्रियों का सफर और आसान होगा।

5 बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, MPPSC पास कर अफसर बनी किसान की बेटी राधा

राजगढ़

जब हौसले मजबूत हों और आंखों में कुछ कर गुजरने का ख्वाब हो, तो गरीबी और विपरीत परिस्थितियां भी रास्ता छोड़ देती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की रहने वाली राधा चंद्रवंशी की। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के घोषित हुए नतीजों में ब्यावरा के छोटे से गांव कचनारिया की बेटी राधा ने कामयाबी का ऐसा परचम लहराया है, जिसने पूरे जिले का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। गरीब किसान की लाडली राधा चंद्रवंशी ने MPPSC में 50वीं रैंक हासिल की है और वो खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनी हैं।

आसानी से नहीं मिली सफलता
राधा की यह सफलता आसानी से नहीं मिली। इसके पीछे आंसुओं, त्याग और अंतहीन रातों की मेहनत छुपी है। साल 2019 से पीएससी की तैयारी कर रही राधा ने पांच बार राज्य सेवा परीक्षा दी। कई बार प्री नहीं निकला, तो तीन बार मुख्य परीक्षा (मेंस) की दहलीज पर पहुंचकर सपना टूट गया, लेकिन राधा ने हार नहीं मानी। करीब 17 साल बाद जब एफएसओ की भर्ती निकली, तो उन्होंने हिंदी माध्यम से केवल छह महीने में दिन-रात एक करके पूरा सिलेबस खत्म किया और पहले ही प्रयास में अफसर बनकर दिखाया।

साधारण किसान की बेटी बनी अफसर
राधा चंद्रवंशी के पिता कालूराम चंद्रवंशी एक साधारण किसान हैं। उन्होंने तंगहाली के बावजूद अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। गांव के सरकारी स्कूल और ब्यावरा की कन्या शाला से 12वीं करने के बाद राधा पढ़ाई के लिए इंदौर गईं। आज वह अपने पूरे परिवार में न सिर्फ एकमात्र उच्च शिक्षा हासिल करने वाली बेटी हैं, बल्कि सीधे क्लास-2 अधिकारी बन चुकी हैं। जब परिणाम आया तो पिता की पथराई आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव ने मिठाइयां बांटकर अपनी इस बेटी का स्वागत किया।

‘मेहनत में ईमानदारी रखो, कामयाबी जरूर कदम चूमेगी’
राधा ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के विश्वास और अपनी निरंतरता को दिया है। वह कहती हैं, हालात चाहे कितने भी बुरे हों, अगर आपका लक्ष्य साफ है और आप ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं, तो सफलता मिलकर ही रहेगी। असफलताओं से घबराने की बजाय सिलेबस के अनुसार लगातार रिवीजन करते रहना चाहिए। अब राधा का अगला सपना यूपीएससी पास कर देश की सेवा करना है। 5 बार की असफलता के बाद कामयाबी मिलने की राधा चंद्रवंशी की ये कहानी उन हजारों युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है जो असफलता मिलने पर निराश हो जाते हैं।

इंदौर मेट्रो परियोजना को मिलेगी रफ्तार, थाइलैंड से आ रही 4 TBM मशीनें

इंदौर 

इंदौर के बहुप्रतीक्षित मेट्रो अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट की तैयारियां तेज हो गई हैं। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन और आगे खजराना तक बनने वाले भूमिगत कॉरिडोर के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) जल्द इंदौर पहुंचने वाली हैं। खास बात यह है कि, रेलवे स्टेशन से दो मशीनें और आएंगी। ये एक साथ सुरंग निर्माण शुरू करेंगी जो अलग-अलग ट्रैक तैयार करते हुए आगे बढ़ेंगी और बाद में एयरपोर्ट की ओर से आने वाले रूट से जुड़ जाएंगी।

मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट में कुल चार टीबीएम काम करेंगी। इनमें से पहली दो मशीनों के जून माह के अंत तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। ये अत्याधुनिक मशीनें थाईलैंड से लाई जा रही हैं। इनके पहुंचते ही एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरंग निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारी और सॉफ्टवेयर कॉन्फिग्रेशन का काम भी अंतिम चरण में है।

काम की गति बढ़ाने की कवायद
अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट क्षेत्र में विशेष शाफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, जहां से मशीनों को जमीन के नीचे उतारा जाएगा। इसके बाद टीबीएम धीरे-धीरे सुरंग बनाते हुए रेलवे स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ेंगी। इस दौरान दोनों ट्रैक समानांतर रूप से विकसित किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्य की गति बढ़ सके। दूसरे चरण में खजराना से रेलवे स्टेशन के बीच बनने वाले अंडरग्राउंड हिस्से के लिए भी दो अतिरिक्त टीबीएम लगाई जाएंगी। ये मशीनें रेलवे स्टेशन से अपना काम शुरू करेंगी और विभिन्न भूमिगत स्टेशनों से गुजरते हुए खजराना तक सुरंग तैयार करेंगी।

आपस में जुड़ जाएंगे दोनों अंडरग्राउंड रूट
पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग इस तरह की गई है कि, एयरपोर्ट और खजराना की दिशा से बनने वाले दोनों अंडरग्राउंड रूट बीच में आपस में जुड़ जाएंगे। इससे पूरा भूमिगत कॉरिडोर एक सतत नेटवर्क के रूप में तैयार होगा और संचालन में सुविधा मिलेगी।

टेंडर जल्द ही
हालांकि, मशीनों के संचालन से पहले तकनीकी परीक्षण और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं, लेकिन मेट्रो प्रबंधन ने निर्माण के अगले चरण की विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस रूट के लिए भी जल्दी टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और कंपनी को कम अलर्ट कर दिया जाएगा इसके बाद में कंपनी अपने स्तर पर भी परीक्षण शुरू करेगी।

14 लाख सालाना कमाने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा मेंटिनेंस, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

भोपाल 

भोपाल की रहने वाली एक महिला की ओर से पति से अंतरिम भरण-पोषण (मेंटिनेंस) की मांग को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति को भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ का जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि यह मांग पति से “एक पाउंड मांस” वसूलने के प्रयास जैसी प्रतीत होती है, जिसकी अनुमति न्यायालय नहीं दे सकता।

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने की। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें तलाक संबंधी लंबित प्रकरण के दौरान अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था।

2022 में हुई थी शादी, 2023 से अलग रह रहे
दंपति का विवाह 4 नवंबर 2022 को हुआ था। 2023 से दोनों अलग रह रहे हैं। पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, जबकि पत्नी ने अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी।

फैमिली कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि तलाक प्रकरण लंबित रहने के दौरान महिला को कोई मेंटिनेंस नहीं दिया जाएगा। इसी आदेश को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

पहले 20 लाख, अब 14 लाख सालाना आय का दावा
महिला ने अदालत में स्वीकार किया कि वह नौकरी करती हैं। पहले उनकी वार्षिक आय लगभग 20 लाख रुपए थी, जबकि पति की आय 30 लाख रुपए से ज्यादा बताई गई थी। बाद में महिला ने कहा कि उनकी आय घटकर करीब 14 लाख रुपए सालाना रह गई है, इसलिए उन्हें आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने वेतन रिकॉर्ड देखे
हाईकोर्ट ने महिला की आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। रिकॉर्ड के अनुसार महिला की मासिक आय लगभग 1.25 लाख रुपए है, जिससे उनकी वार्षिक आय करीब 14.81 लाख रुपए बनती है।

अदालत ने कहा कि यह आय स्वयं का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में महिला को आर्थिक रूप से आश्रित नहीं माना जा सकता।

कोई संतान नहीं, आय में भी बड़ा अंतर नहीं
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि दंपति की कोई संतान नहीं है। साथ ही पति और पत्नी की आय में इतना बड़ा अंतर भी नहीं है कि आर्थिक निर्भरता का आधार बनाया जा सके।

अदालत ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद या आश्रित जीवनसाथी की सहायता करना है, न कि समान आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति को अतिरिक्त वित्तीय लाभ देना।

फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के आदेश को यथावत रखा।

अदालत ने अपने फैसले में दोहराया कि मेंटिनेंस का प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर जीवनसाथी की मदद के लिए है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं पर्याप्त आय अर्जित कर रहा है और अपना खर्च उठाने में सक्षम है, तो उसे भरण-पोषण का लाभ नहीं दिया जा सकता।

 

धार की टीही टनल का काम अधूरा, 60 मीटर खुदाई बाकी; 12 मीटर में बिछाया गया ट्रैक

इंदौर
 इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत टीही के आगे टनल बन रही है। टनल के एक हिस्से (टीही एंड, पी-1) पर 60 मीटर का काम बचा है। सारी मशीनरी और लेबर यहीं लगी हुई है। इसे रेलवे 15 दिन में पूरा कर लेगा। इसके बाद तीन किमी लंबी टनल की लाइनिंग का काम पूरा हो जाएगा।

इसी टनल के बीच के हिस्से में कट एंड कवर था, उसे रेलवे ने पूरा कर लिया है, अब यहां लिफ्ट और सीढ़ियों का काम चल रहा है। टनल के सबसे आखिरी हिस्से (पीथमपुर एंड, पी-2) में काम पूरा कर ट्रैक बिछाने के लिए यह हिस्सा दे दिया गया है।

कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों ने कहा– टनल का कुल 261 मीटर का काम बचा था, इसमें से 201 मीटर काम कर लिया है। बचा काम 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं टनल का लाइनिंग काम 8 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। दो पारियों में 12-12 घंटे की शिफ्ट में 300 मजदूर काम कर रहे हैं।

ऐसे तैयार हो रहा प्रोजेक्ट

    शिलान्यास: 18 फरवरी 2008
    लागत वर्तमान में: 1680 करोड़ से ज्यादा।
    कुल 200.97 किमी लंबी लाइन।

    वर्तमान स्थिति: टीही तक का काम पूरा हो गया है। दूसरी ओर दाहोद से कटवाड़ा और आगे कुछ हिस्से में काम चल रहा है।
    देरी का खामियाजा: 678.56 करोड़ रुपए लागत थी। प्रोजेक्ट के हर साल देरी के साथ लागत भी बढ़ती जा रही है।

टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे
हर दिन की टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। टीही एंड पर जिस हिस्से में टनल का काम चल रहा है, उससे 1208 मीटर आगे तक रेलवे ने ट्रैक बिछा लिया है। यहां बैलास्ट लेस ट्रैक बिछाया जा रहा है, जो आम ट्रैक से अलग और खास होता है। करीब 1800 मीटर से ज्यादा हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम बचा है। रेलवे का कहना है कि हर दिन 50 से ज्यादा मीटर हिस्से में ट्रैक का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। टनल के अंदर केबल-ट्रे, सीसीटीवी, ओएचई ब्रैकेट लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

फरवरी 2026 तक काम पूरा होना था
रेलवे ने पहले टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य फरवरी-2026 रखा था। अब संभावना है कि सितंबर-अक्टूबर तक धार तक ट्रेन चलाई जा सकती है। हालांकि रेलवे का कहना है कि टनल का काम काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समय लग रहा है। दो-तीन महीने का समय और लग सकता है। बारिश के कारण फिर काम की गति धीमी हो सकती है।

टनल की वजह से ही अटका है काम
रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने कहा- 2017-18 से टनल का काम चल रहा है। कोरोना के बाद कॉन्ट्रैक्ट भी शॉर्ट टर्मिनेट हुए। फिर नए सिरे से कॉन्ट्रैक्ट होकर काम शुरू हुआ। टनल की वजह से काफी समय लग गया। रेलवे को चाहिए कि अब तेजी से काम कर जल्द से जल्द पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा- 2007-08 में इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट तैयार हुआ और इसका शिलान्यास हुआ तब मूल प्रोजेक्ट में टीही के आगे टनल नहीं थी।

यह प्रोजेक्ट हमारे लिए महत्वपूर्ण
    इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट हमारे लिए सबसे अहम है। टीही टनल का काम जल्द पूरा हो और धार तक ट्रेन का संचालन शुरू हो, इसके लिए हम टाइम लाइन बनाकर काम काम कर रहे हैं। हर दिन की मॉनिटरिंग की जा रही है। टनल में हमने सारे संसाधन लगाए हैं, 300 से ज्यादा मजदूर 24 घंटे काम कर रहे हैं। – विनीत अभिषेक, सीपीआरओ, पश्चिम रेलवे

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