उज्जैन में नर्मदा एक्सप्रेस में धक्का लगने पर विवाद, युवक पर चाकू से हमला; हालत गंभीर

उज्जैन.

नर्मदा एक्सप्रेस के जनरल कोच में युवक पर जानलेवा हमला हो गया। कोच के गेट पर खड़े एक युवक को भीड़ में धक्का लग गया था। इस पर उसने चाकू निकालकर युवक पर हमला कर दिया। दोस्तों ने घायल को बचाया और आरोपित को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। उपचार के लिए घायल को चरक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां उसकी हालत नाजुक होने पर उसे इंदौर रैफर किया गया है।

जीआरपी ने बताया कि अंशुमान पुत्र दिलीप कुमार तिवारी उम्र 20 वर्ष निवासी ग्राम सिलोटा रामनगर जिला बाराबंकी उत्तर प्रदेश किसी काम से इंदौर आया था। जहां से वह शुक्रवार को अपने साथियों के साथ ट्रेन संख्या 18233 नर्मदा एक्सप्रेस के जनरल कोच में इंदौर से उज्जैन की यात्रा कर रहा था। कोच में बहुत अधिक भीड थी।

उज्जैन स्टेशन पर उतरने के लिए तिवारी कोच के गेट पर खड़ा था। ट्रेन की गति अचानक से धीमी होने के कारण तिवारी सामने खड़े एक व्यक्ति से टकरा गया था। जिससे आक्रोशित होकर सामने वाले व्यक्ति ने उसे गालियां देना शुरू कर दी थी। तिवारी ने उसे गाली देने से मना किया तो उसने जेब से चाकू निकालकर तिवारी पर हमला कर दिया। सिर में कान के पीछे और पेट पर चाकू लगने से तिवारी घायल हो गया। तिवारी ने चाकू पकड़ लिया था। इससे उसके हाथ में भी चोट लग गई थी।

महाकाल मंदिर क्षेत्र में तिलक लगाता है आरोपित
तिवारी के साथी देवा राजपूत ,लवलीन पांडे, और रामनाथ गुप्ता ने उसे बचाया। चाकू मारने वाले आरोपित ने अपना नाम अरुण वर्मन उर्फ लल्ला बताया था। घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जहां से उसे इंदौर रैफर कर दिया गया। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 115(2),118(1),296(b), 351(2),बीएनएस व 25 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जीआरपी ने बताया कि आरोपित अरुण महाकाल मंदिर क्षेत्र में दर्शनार्थियों को तिलक लगाने का काम करता है।

जबलपुर में योग दिवस 2026: राष्ट्रपति मुर्मु ने योग को बताया भारत का अमूल्य उपहार

जबलपुर
राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि हम भारत की उस महान योग परंपरा का उत्सव मना रहे हैं, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन का मार्ग प्रदान किया है। योग विश्व समुदाय को हमारी सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल उपहार है। यह हमारे ऋषियों-मुनियों की हजारों वर्षों की साधना का परिणाम है। जिस भारतभूमि ने पूरे विश्व को योग का अमूल्य ज्ञान प्रदान किया, आज उसी पावन धरती से स्वास्थ्य, संतुलन, शांति और आत्मकल्याण का संदेश पुनः समस्त विश्व में प्रसारित किया जा रहा है। “योग स्वस्थ आयु के लिए” थीम पर राष्‍ट्रीय स्‍तरीय कार्यक्रम कलकत्‍ता में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के मुख्‍य आतिथ्‍य में आयोजित किया गया। साथ ही राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम महामहिम राष्‍ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु के मुख्‍य आतिथ्‍य में जबलपुर के गैरीसन ग्राउंड में राज्यस्तरीय योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के कोलकाता से आयोजित कार्यक्रम का लोगो ने सजीव प्रसारण देखा व सुना।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्‍यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, राज्‍यसभा सांसद सुमित्रा वाल्‍मीक, सांसद आशीष दुबे, विधायक सर्वश्री अजय विश्‍नोई, अशोक रोहाणी, सुशील तिवारी इंदु, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्‍नू, मुख्‍य सचिव अनुराग जैन, मध्‍यप्रदेश तीर्थ क्षेत्र एवं मेला प्राधिकरण अध्‍यक्ष विनोद गोंटिया, भाजपा नगर अध्‍यक्ष रत्‍नेश सोनकर, भाजपा ग्रामीण अध्‍यक्ष राजकुमार पटेल, भाजपा प्रदेश कोषाध्‍यक्ष अखिलेश जैन, प्रदेश महिला भाजपा अध्‍यक्ष अश्विनी परांजपे, नगर निगम अध्‍यक्ष रिकुंज विज,  संभागायुक्‍त धनंजय सिंह, कलेक्‍टर राघवेन्‍द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्‍याय, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा लगभग 5 हजार योग साधकों ने सहभागिता कर सामूहिक योगाभ्यास किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामहिम राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नागरिकों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्‍होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को जीवन की सफलता का आधार माना गया है। योग उसी संतुलन को स्थापित करने का मार्ग है। ‘योग’ शब्द का अर्थ है जोड़ना  व्यक्ति को स्वयं से, समाज को प्रकृति से और सम्पूर्ण मानवता को व्यापक विश्व चेतना से जोड़ना। योग एक सशक्त माध्यम है, जो हमें आंतरिक शांति, संतुलन और सामूहिक कल्याण की दिशा में आगे बढ़ाता है। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब योग मानवता को शांति, संतुलन, समरसता और सामूहिक कल्याण का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वर्ष 2014 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इस पहल से योग को विश्व कल्याण के एक सशक्त माध्यम के रूप में नई पहचान और व्यापक स्वीकार्यता मिली है। आज दुनिया के अनेक देशों में करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। योग अब जीवन शैली का अंग बनता जा रहा है। विदेशों में भी योग के प्रति लोगों का आकर्षण निरंतर बढ़ रहा है, और यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रेरक उदाहरण है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” है। यह थीम समाज के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य, सक्रियता, आत्मनिर्भरता और गरिमापूर्ण जीवन में योग की उपयोगिता को रेखांकित करती है। योग बढ़ती आयु में भी व्यक्ति को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में बहुत सहायक है।

योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन को शांति और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है। आज की व्यस्त जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां हमारे सामने एक बड़ी चुनौती हैं। इनकी रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य के लिए योग एक सरल, प्रभावी और सुलभ उपाय है।

यह प्रसन्नता का विषय है कि भारत सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। सामूहिक प्रयासों से योग जन-जन तक पहुंचेगा और सामूहिक मानवता के कल्याण का आधार बनेगा। उन्‍होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्‍प दिलाया।

योग को दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लें – राज्यपाल मंगुभाई पटेल
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ बनाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि यह संपूर्ण जीवन को संतुलित, सरल और आनंदमयी बनाने की पद्धति है। भारतीय ज्ञान परंपरा ने स्वस्थ जीवन का जो मार्ग दिखाया था, आज पूरी दुनिया उसे अपना रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा भारतीय योग को अंतरराष्ट्रीय सम्‍मान दिया गया। योग को पूरी दुनिया में सम्मान दिलवाने में प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदृष्टि और अटूट प्रतिबद्धता के प्रति आभार व्यक्त करना हम सभी का कर्तव्य है।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राणायाम के जरिए हम नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच को  अपनाते हैं। ध्यान हमें अपने अंदर झांकने का अवसर देता है और मन की शांति प्रदान करता है। रोजाना केवल 20 से 30 मिनट का योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायाम हमारे लिए प्रभावी और सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे सरल माध्यम है। आज  योग को आत्मिक उन्नति का माध्यम बनाकर दैनिक दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प लें। स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और योग बने जीवन का धन। यही विकसित भारत का पथ है।

वैश्विक शांति के लिए योग  एकमात्र उपाय – मुख्यमंत्री डॉ यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस दुनियाभर में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम -योग फॉर हेल्दी एजिंग है। योग दिवस वैश्विक शांति और वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण होने पर यह सुखद संयोग बना है, इस वर्ष राष्ट्रीय कार्यक्रम का नेतृत्व प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी कोलकाता से किया गया । दुनिया के करीब 2500 स्थानों पर योगाभ्यास किया , 210 से अधिक दूतावासों ने भी  भागीदारी की । भारत ने योग के रूप में दुनिया को मानव कल्याण का उपहार सौंपा है। योग का अर्थ है जोड़ना, भारत ने अपने ज्ञान- विवेक और विचार से सदैव सभी को एक-दूसरे से जोड़ा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा, हमारी आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध सनातन संस्कृति का वैश्विक पटल पर परिचय कराया है। जब 2015 में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्व योग दिवस का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सभा में रखा तो 175 से ज्यादा देशों ने इसका ऐतिहासिक समर्थन किया था। इस वर्ष सामूहिक योग सत्रों में करीब 30 से 35 करोड़ लोग शामिल हो रहे हैं। मध्यप्रदेश के कोने-कोने को योग से जोड़ने के लिए हर घर योग अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि देव शंकर और आष्टांग योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि को नमन करते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम संस्कारधानी जबलपुर में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति ने सदैव संसार को एक परिवार के रूप में देखा है। हमने कभी भौगोलिक सीमाओं तक अपनी सोच को  सीमित नहीं किया है, अपितु विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम का अमर संदेश दिया , हमारे ऋषियों ने सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामय: की कामना की। मध्यप्रदेश योगियों की तपोस्थली रही है। भगवान श्री कृष्ण को मध्य प्रदेश की धरती  पर योग का ज्ञान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपन्नता गौरवशाली इतिहास का अभिन्न अंग रही है। योगेश्वर श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की,यहां उन्होंने 64 कला और 14 विद्याओं का गहन अध्ययन किया, इनमें योग विज्ञान सबसे प्रमुख था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया के 200 से अधिक देशों में योगाभ्यास हो रहा है। यह भारत की गौरवशाली संस्कृति का प्रतीक है। भारत एक बार फिर दुनिया को हमारी समृद्ध संस्कृति से परिचित करा रहा है।

MP के मंदिरों में दान व्यवस्था होगी हाईटेक, QR कोड और ऑनलाइन भुगतान से बढ़ेगी पारदर्शिता

खंडवा.

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद के बीच मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के प्रमुख मंदिरों की दान और प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की तैयारी कर रही है। देश के प्रतिष्ठित मंदिरों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर नया मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसे महाकाल एवं ओंकारेश्वर सहित प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में लागू किया जाएगा।

दान और चढ़ावे का होगा पारदर्शी प्रबंधन
ओंकारेश्वर प्रवास पर पहुंचे धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे के पारदर्शी प्रबंधन को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए विशेषज्ञ समिति गठित की जाएगी, जो देश के प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर कार्ययोजना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास और आस्था की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उज्जैन और ओंकारेश्वर की सतत निगरानी
मौजूदा व्यवस्था ओंकारेश्वर दान पेटियां प्रशासन और मंदिर समिति की मौजूदगी में तय दिनों पर खोली जाती हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है। शीघ्र दर्शन से प्राप्त राशि पूरी तरह ऑनलाइन जमा होती है। दान राशि के उपयोग और गणना पर सतत निगरानी रखी जाती है। महाकाल मंदिर नकद, ऑनलाइन और क्यूआर कोड से दान की व्यवस्था है। भेंट पेटियों की राशि पारदर्शी कांच कक्ष में सीसीटीवी निगरानी के बीच गिनी जाती है। बैंक कर्मचारी राशि सीधे मंदिर खाते में जमा करते हैं। दान राशि से श्रद्धालु सुविधाएं, निर्माण कार्य और सेवा प्रकल्प संचालित होते हैं। आय-व्यय की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रकल्पों की पृथक लेखा व्यवस्था विकसित की जा रही है।

पारदर्शिता के प्रमुख उपाय

  • दान पेटियों की निगरानी वीडियोग्राफी और सीसीटीवी रिकार्डिंग
  • ऑनलाइन दान और क्यूआर कोड व्यवस्था
  • बैंक के माध्यम से राशि जमा
  • आय-व्यय का पृथक लेखा-जोखा
  • प्रशासनिक निगरानी में गणना प्रक्रिया।

ग्वालियर में इंसानियत शर्मसार: चोरी के शक में बच्ची को कीलों वाले डंडे से पीटा, आरोपी आमीन जेल भेजा गया

ग्वालियर.

पुरानी छावनी स्थित बरा गांव में आठ वर्षीय मासूम बालिका को बेरहमी से पीटने वाला आरोपी आमीन खान जेल भेज दिया गया है। बच्ची के शव को स्वजन के सुपुर्द कर दिया था। स्वजन ने शव को दफना दिया। आमीन खान ने पूछताछ में अपना जुर्म कुबूल किया है।

उसने कहा कि डंडे से मारपीट की थी, लेकिन उसे यह नहीं लगा था कि उसकी मौत हो जाएगी। बरा गांव में रहने वाली आठ वर्षीय बालिका के पिता मजदूरी करते हैं। वह गुरुवार को काम पर गए थे। बच्ची आसपास के बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी वह पड़ोस में रहने वाले आमीन खान के घर पहुंच गई। आमीन खान के घर के दरवाजे पर ताला लटका था। इस ताले पर लटककर खोल लिया, फिर घर के अंदर पहुंची। यहां गुल्लक में रुपये व आमीन की पत्नी रेशमा का सोने का पेंडेंट रखा हुआ था। जब आमीन घर पहुंचा तब चोरी होने का पता लगा।

आसपास के लोगों ने आठ वर्षीय बालिका का नाम बताया। इसके बाद आमीन उसे घर से पकड़कर ले आया। उसने घर के अंदर बालिका को बंधक बना लिया और हाथ-पैर बांधकर बेरहमी से डंडे बरसाए। रात में उसे आमीन घर छोड़कर आया। सुबह बालिका मृत अवस्था में मिली। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने इस मामले में बालिका के पिता की ओर से आमीन खान व उसकी पत्नी रेशमा खान पर एफआइआर दर्ज की है। आमीन को हिरासत में ले लिया था। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने मारपीट करना स्वीकार किया। उसने बताया कि उसने इस उद्देश्य से नहीं पीटा था कि उसकी मौत हो जाए।

बच्ची कितना तड़पी होगी…
बालिका के शरीर पर चोट के निशान और डंडे में लगी कील से लगी चोट बताती है वह कितनी तड़पी होगी। उसके पंजे, पिंडली व कलाई में डंडे की कील के 17 निशान हैं। वहीं पुलिस ने फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट की मदद से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं, जिससे इस मामले में दोषसिद्धि हो सके। आसपास रहने वाले लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। इस संबंध में पुरानी छावनी थाना प्रभारी डा. संतोष यादव ने बताया कि बच्ची की पीट-पीटकर हत्या के मामले में आरोपित आमीन खान को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। उसने अपना जुर्म स्वीकार किया है।

सिलिकॉन वैली में धड़कता है भारतीय संगीत का दिल

– सुनील कुमार गुप्ता

बैंगलुरु। भारत की आईटी राजधानी और सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बैंगलुरु में एक ऐसी जगह है, जहां कदम रखते ही आधुनिक तकनीक और सदियों पुरानी सांगीतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान है इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम (IME)—देश का पहला इंटरैक्टिव संगीत संग्रहालय, जो भारतीय संगीत की जड़ों, उसके विकास, विविधताओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यहां पहुंचकर केवल संगीत सुनाई नहीं देता, बल्कि उसे महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि यह संग्रहालय हर संगीत प्रेमी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।

10 वर्षों की मेहनत से साकार हुआ अनूठा सपना

करीब 50 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल, तीन मंजिलों और नौ कला दीर्घाओं (गैलरी) में फैला यह संग्रहालय वर्षों की शोध, तकनीकी नवाचार और संगीत विशेषज्ञों की अथक मेहनत का परिणाम है। लगभग एक दशक तक संगीत मर्मज्ञों, इतिहासकारों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर इसे तैयार किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित हो सकें।

जेपी नगर के सातवें ब्लॉक स्थित ब्रिगेड मिलेनियम एवेन्यू में स्थापित इस संग्रहालय का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के उद्भव, विकास और उसके सांस्कृतिक महत्व के प्रति सम्मान जगाना है।

जहां संगीत को देखा भी जा सकता है और महसूस भी

आईएमई की नौ गैलरियां भारतीय संगीत की विविध विधाओं—लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड, पॉप, इंडी और समकालीन संगीत—को अत्यंत रोचक और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करती हैं। ऑडियो-विजुअल तकनीक और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से आगंतुक न केवल विभिन्न शैलियों को सुन सकते हैं, बल्कि स्वयं संगीत रचने और वाद्ययंत्रों के साथ प्रयोग करने का अवसर भी प्राप्त करते हैं।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लिए यह संग्रहालय सीखने और आनंद लेने का अनूठा माध्यम है। यहां संगीत के नौ रस, विभिन्न घरानों, रागों, गायन के समय और महान संगीतकारों के योगदान को सहज भाषा में समझाया गया है।

स्टार गैलरी में सजे भारतीय संगीत के अमूल्य खजाने

संग्रहालय की सबसे आकर्षक जगहों में से एक है स्टार गैलरी, जहां भारतीय संगीत के महान उस्तादों और कलाकारों से जुड़ी दुर्लभ धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। यहां उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, जिसे उनके परिवार ने संग्रहालय को भेंट किया, विशेष आकर्षण का केंद्र है।

इसके अलावा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का तंबूरा, पंडित भीमसेन जोशी और पंडित जसराज की पोशाकें तथा पंडित रविशंकर सहित भारतीय संगीत के लगभग सौ महान कलाकारों की जानकारी, रिकॉर्डिंग और योगदान को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

ग्रामोफोन से मोबाइल तक संगीत की यात्रा

‘रीचिंग आउट’ गैलरी संगीत रिकॉर्डिंग तकनीक के विकास की रोमांचक कहानी सुनाती है। यहां ग्रामोफोन, रेडियो, सीडी, बाइस्कोप, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तक के सफर को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। यह अनुभाग बताता है कि तकनीक ने किस प्रकार संगीत को घर-घर तक पहुंचाया।

गीतों में छिपा इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज

स्टोरीज़ थ्रू सॉन्ग्स’ गैलरी में हिंदी फिल्म संगीत के विभिन्न दौरों की झलक देखने को मिलती है। वहीं ‘सॉन्ग्स ऑफ स्ट्रगल’ अनुभाग यह दर्शाता है कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का भी प्रभावशाली साधन रहा है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को प्रेरित करने वाले गीतों, विरोध और जनजागरण की धुनों को यहां सहेजा गया है। विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 35 से अधिक संस्करण, महात्मा गांधी द्वारा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी को लिखा गया पत्र, तथा देशभक्ति गीतों का समृद्ध संकलन इस गैलरी को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।

लोक परंपराओं से लेकर रामकथा तक संगीत का विस्तार

संग्रहालय यह भी दर्शाता है कि भारतीय समाज में जन्म, विवाह, त्योहार, श्रम, उत्सव और यहां तक कि शोक के अवसरों पर भी गीतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रामकथा सुनाती लकड़ी की कांवड़ किताब, कठपुतली कला, लोक भित्ति चित्र और लोक परंपराओं से जुड़े प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि संगीत भारतीय जीवन का अभिन्न अंग रहा है।

एक विशेष कोना महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित है, जहां उनके विचारों और संगीत से जुड़े योगदान को रेखांकित किया गया है।

100 से अधिक वाद्ययंत्रों का जीवंत संसार

इंस्ट्रूमेंट गैलरी में देशभर के 100 से अधिक पारंपरिक और आधुनिक वाद्ययंत्र प्रदर्शित किए गए हैं। यहां मयूर वीणा, नाग के आकार का वाद्य, पैरों से बजाया जाने वाला हारमोनियम, ब्रास बैंड के उपकरण, वायलिन और अनेक दुर्लभ यंत्रों की बनावट, इतिहास और वादन शैली को विस्तार से समझाया गया है।

‘लिविंग ट्रेडिशन’ गैलरी में श्रुति, राग, ताल, ध्रुपद, ख्याल और घराने जैसी भारतीय शास्त्रीय संगीत की मूल अवधारणाओं को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

इंडी पॉप, रॉक और आधुनिक संगीत की भी झलक

यह संग्रहालय केवल परंपरा तक सीमित नहीं है। इंडी पॉप, रॉक और हाइब्रिड संगीत के विकास, उनके प्रमुख कलाकारों और सांस्कृतिक प्रभावों को भी यहां स्थान दिया गया है। दलेर मेहंदी की पोशाक, इंटरैक्टिव टच स्क्रीन और मिनी थिएटर जैसी आधुनिक प्रस्तुतियां युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

साउंड गार्डन: जहां पत्थर और धातु भी गाने लगते हैं

आईएमई का साउंड गार्डन अपने आप में अनूठा अनुभव है। यहां आगंतुक ध्वनि, कंपन और प्राकृतिक वस्तुओं के माध्यम से संगीत के विज्ञान को समझ सकते हैं। यह जानकर आश्चर्य होता है कि पत्थरों, धातुओं और अन्य सामान्य वस्तुओं से भी मधुर संगीत उत्पन्न किया जा सकता है।

हर भारतीय को एक बार अवश्य जाना चाहिए

आज जब सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर लगातार बहसें हो रही हैं, ऐसे समय में इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम भारतीय संगीत के संरक्षण और दस्तावेजीकरण का एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह केवल संग्रहालय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा से जुड़ने का अवसर है।

यदि आप कभी बैंगलुरु जाएं, तो इस संग्रहालय के लिए पर्याप्त समय निकालें। यहां जल्दीबाजी में नहीं, बल्कि शांत मन और खुले हृदय से जाइए। तब आप महसूस करेंगे कि भारतीय संगीत केवल सुरों का मेल नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की जीवंत धड़कन है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, डिग्री और मार्कशीट पर अब लिखा जाएगा ‘भारत’

 जबलपुर

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का रविवार को होने वाला दीक्षा समारोह इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति के साथ-साथ एक ऐतिहासिक परिवर्तन के कारण भी विशेष बन गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार अपनी उपाधियों, अंकसूची, स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्रों पर ‘इंडिया’ के स्थान पर आधिकारिक रूप से ‘भारत’ शब्द अंकित किया है। भारतीय पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को केंद्र में रखकर किए गए इस परिवर्तन से दीक्षा समारोह को नई पहचान मिलेगी।
आधिकारिक दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द की शुरुआत

कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जनवरी, 2025 से अपने पत्राचार और आधिकारिक दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द का उपयोग शुरू कर दिया था। बता दें, 21 जून को आयोजित 36वें दीक्षा समारोह की राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल अध्यक्षता करेंगे। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता और परंपरा

प्रो. वर्मा ने बताया कि भारतीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की इस पहल को व्यापक सराहना भी मिली। उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में सम्मानित भी किया गया था। उपाधियों और प्रमाण पत्रों पर ‘भारत’ अंकित करना विश्वविद्यालय की भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. वर्मा के अनुसार इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने सबसे पहले अपने आधिकारिक दस्तावेज में ‘भारत’ शब्द का प्रयोग शुरू किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।

 

दमोह के डायल-112 हीरोज 1 वर्ष 5 माह के मासूम को सकुशल दस्तयाब कर माँ के सुपुर्द किया

भोपाल

दमोह जिले के थाना हटा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी समन्वय से एक 1 वर्ष 5 माह मासूम बच्चे को सकुशल दस्तयाब कर उसकी माँ के सुपुर्द किया गया। समय पर की गई इस कार्रवाई से संभावित अनहोनी को टालते हुए बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी।

19 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना हटा क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने 1 वर्ष 5 माह के बच्चे को घर से साथ ले गया है। सूचना में बताया गया कि वह शराब के नशे में है तथा फोन पर परिजनों को लगातार धमकी दे रहा है और भ्रामक जानकारी एवं गलत लोकेशन बता रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल थाना हटा क्षेत्र में तैनात डायल-112 डायल 112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 वाहन को मौके पर रवाना किया गया तथा घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों एवं पीसीआर को भी दी गई।

मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री संजय आठिया एवं पायलट श्री हरेंद्र अहिरवार ने जानकारी एकत्रित कर बच्चे एवं उसके पिता की तलाश प्रारंभ की। चूँकि संबंधित व्यक्ति लगातार गलत लोकेशन बता रहा था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम स्टाफ प्रधान आरक्षक श्री नागेन्द्र तिवारी एवं आरक्षक श्री जुनैद मिर्जा द्वारा साइबर सेल के प्रधान आरक्षक श्री सौरभ टंडन के सहयोग से तकनीकी माध्यमों से लोकेशन ट्रेस की गई।

साइबर सेल से प्राप्त लोकेशन के आधार पर डायल-112 टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति एवं मासूम बच्चे को सकुशल दस्तयाब कर लिया। इसके उपरांत बच्चे को सुरक्षित उसकी माँ के सुपुर्द किया गया।

डायल-112 जवानों, कंट्रोल रूम स्टाफ एवं साइबर सेल के उत्कृष्ट समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई से एक मासूम बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा संवेदनशील मामलों में तकनीक एवं मानवीय दृष्टिकोण के समन्वय से आमजन की सुरक्षा हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

इंदौर पुलिस ने 48 घंटे में चोरी का किया खुलासा

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तथा अपराधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी  कार्रवाई के तहत इंदौर पुलिस को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। पुलिस थाना लसूड़िया की टीम ने कार शोरूम में हुई लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की सनसनीखेज चोरी का मात्र 48 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी गई संपूर्ण संपत्ति बरामद किया है।

17 जून को इंदौर स्थित पटेल मोटर्स मारुति कार शोरूम के ऑपरेशन मैनेजर सुरेन्द्र चौधरी द्वारा थाना लसूड़िया में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि शोरूम के केबिन में रखे एप्पल आईफोन, सोने के आभूषण तथा चांदी के सिक्के अज्ञात व्यक्ति द्वारा चोरी कर लिए गए हैं। शिकायत पर थाना लसूड़िया में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।

घटना की गंभीरता को देखते हुए इंदौर पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच के दौरान संदेह के आधार पर शोरूम में कार्यरत कर्मचारी लक्की बोरासी (19 वर्ष) निवासी बड़ी ग्वालटोली, इंदौर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह शोरूम में साफ-सफाई का कार्य करता था तथा उसे शोरूम की गतिविधियों एवं सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी विश्वास का लाभ उठाकर उसने पहले एप्पल आईफोन चोरी किया तथा बाद में अवसर पाकर शोरूम मालिक के केबिन स्थित लॉकर से मंदिर का सोने का छत्र एवं हीरे जड़ा मुकुट सहित अन्य कीमती सामग्री चोरी कर ली।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लगभग 1 किलो 426 ग्राम वजनी सोने का छत्र, हीरे जड़ा मुकुट, 12 चांदी के सिक्के, एक एप्पल आईफोन तथा एक मोटरसाइकिल सहित  लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की  है।

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपने महंगे शौक एवं ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस द्वारा आरोपी का रिमांड प्राप्त कर उससे अन्य अपराधों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की गई यह त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई अपराध नियंत्रण, वैज्ञानिक विवेचना तथा नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है। प्रदेश में संपत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

दहेज की मांग ने तोड़ा रिश्ता, वरमाला के बाद बारात लेकर लौट गया दूल्हा

 खुरई 

खुरई में बेगमगंज से आई बारात दहेज की मांग पूरी नहीं होने के कारण वापस लौट गई। वरमाला के बाद तीन बहनों में सबसे बड़ी निशा रात भर फेरों का इंतजार करती रही, लेकिन वर पक्ष मारपीट कर भाग गया था। अब निशा बंसल इंसाफ चाहती है, उसे उस लड़के से शादी नहीं करनी है।
वरमाला के बाद डीजे की धुन के बीच शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला सागर जिले की खुरई तहसील का है। जहां लंबी तैयारियों के बाद शहरी थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक कॉलेज रोड स्थित भगवान दास चंदेल वार्ड में एक परिवार में शादी की शहनाई सुनाई दे रही थी। वरमाला की रस्म पूरी होने के बाद शादी की अन्य तैयारियां चल रही थीं। डीजे पर लोग नाच रहे थे और विवाह की मुख्य रस्म शुरू होने वाली थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति निर्मित हो गई, विवाद में दूल्हा तक पगड़ी उतारकर झगड़े में शामिल हो गया।

आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हुआ था। वर पक्ष ने वधू पक्ष के साथ मारपीट भी की। इसके बाद वर पक्ष बिना शादी पूरी किए ही बारात लेकर वापस लौट गया।

रात भर फोन लगाते रहे परिजन, सुबह थाने पहुंचा मामला

हातों में मेहंदी लगाए दुल्हन पूरी रात इंतजार करती रही कि उसके फेरे होंगे, शादी होगी और विदाई के बाद वह ससुराल जाएगी। सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और दहेज के लोभियों ने धन को प्राथमिकता दी और बारात लेकर लौट गए।

दुल्हन के स्वजनों ने पूरी रात फोन के जरिए दूल्हे और उसके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया। परिजनों का आरोप है कि दहेज के कारण ही बारात लौटकर चली गई। इस मामले में लड़की पक्ष ने शनिवार को खुरई शहरी थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग की है।
बिन मां-बाप की बेटी अब मांग रही है इंसाफ

रायसेन जिले के बेगमगंज ग्राम गोपालपुरा से दूल्हा बना सुरेंद्र बंसल दहेज के चक्कर में विवाद करने लगा और मारपीट करना शुरू कर दी। दुल्हन निशा बंसल का कहना है कि उसके माता-पिता नहीं हैं। वह तीन बहनों में सबसे बड़ी है। दादी और चाचा हम तीनों बहनों का पालन-पोषण कर रहे हैं।

शादी पक्की होने के बाद अभी तक मेरी लड़के से बात नहीं हुई है। लड़के पक्ष वालों ने दहेज की मांग को लेकर जमकर विवाद किया। यहां तक कि मारपीट भी की। अब वह उस लड़के से शादी नहीं करना चाहती है, अब केवल इंसाफ चाहिए।
दो लाख रुपये नकद और बाइक की अड़ी

लड़की के चाचा नारायण बंसल ने कहा कि लड़के पक्ष के लोग दो लाख रुपये नकद और एक बाइक की मांग कर रहे थे। हम लोगों ने कहा कि लड़की के माता-पिता नहीं हैं, फिर भी हम लोगों ने उचित दहेज दिया है। इसके बाद भी वे मानने 

दूल्हे, पिता और भाई पर दर्ज हो रहा है दहेज एक्ट का मामला

खुरई शहरी थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि लड़की पक्ष की रिपोर्ट पर दूल्हा, दूल्हे के पिता और दूल्हे के भाई पर दहेज एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

 

बड़ा तालाब से टीटी नगर स्टेडियम तक गूंजा योग का संदेश

भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व सुबह पर राजधानी भोपाल में आयोजित योग कार्यक्रमों में उत्साह और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योग कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एवं सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने सहभागिता कर योगाभ्यास किया।

इस अवसर पर दोनों नेताओं ने योग को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन का आधार बताते हुए नागरिकों, विशेषकर युवाओं से नियमित योग अपनाने का आह्वान किया।

मंत्री सारंग बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब में आयोजित योग अभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। प्राकृतिक वातावरण में आयोजित इस योगाभ्यास में भोपाल के हजारों युवा, खिलाड़ी, खेल प्रेमी एवं नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए और सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारतीय योग परंपरा को अपना रही है। इस योग दिवस पर 21 जून को विश्व के 192 देश सामूहिक योग करेंगे, उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और सशक्त जीवन का माध्यम है।

युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी फिटनेस, स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक है तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के एक दिन पूर्व आयोजित इन कार्यक्रमों ने पूरे शहर को योगमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

 

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