साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों के नए दौर में उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष से मिली सीख पर तय होगी भविष्य की शैक्षणिक रणनीति

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने किया।

टीएलपीएस रिपोर्ट ने दिखाई कक्षा-कक्ष में बदलाव की वास्तविक तस्वीर

कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज है। रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में होने वाला सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पर बनी साझा रणनीति

‘स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियों को अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी एवं शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा, प्रभावी अकादमिक सहयोग और सतत मार्गदर्शन को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए।

अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों और अकादमिक नेतृत्व से किया सीधा संवाद

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए।

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

समापन सत्र में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे।

30 जून तक 2 लाख 93 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश पोर्टल पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में 5,48,778 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 4,68,539 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा 2, 93, 257 विद्यार्थियों ने विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर लिया है।

पिछले वर्ष कि तुलना में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेश में 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 30 जून तक 2,06,482 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 2,93,257 हो गई है। यानी एक वर्ष में 86,775 अधिक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, ऑनलाइन, सरल एवं विद्यार्थी-केंद्रित प्रवेश व्यवस्था, महाविद्यालयों में समयबद्ध दस्तावेज सत्यापन तथा प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

विद्यार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने रिक्त सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया को और अधिक सरल बना दिया है। अब जिन शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में सीटें रिक्त हैं, वहाँ इच्छुक विद्यार्थी सीधे संबंधित महाविद्यालय पहुँचकर उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन एवं सीट आवंटन की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करा सकेंगे। सीट आवंटित होने के तुरंत बाद विद्यार्थी उसी दिन निर्धारित शुल्क जमा कर प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को किसी अतिरिक्त चरण अथवा प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा और रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया तेजी से पूर्ण हो सकेगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी पात्र विद्यार्थियों से आग्रह किया है कि वे अपने निकटतम शासकीय अथवा अशासकीय महाविद्यालय में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर इस विशेष सुविधा का लाभ उठाएँ तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना प्रवेश सुनिश्चित करें।

 

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

वर्ष 2030 तक उदानिकी फसलों का क्षेत्र 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ेगा

भोपाल
मध्यप्रदेश ने इतिहास बनाते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जी आई टैग हासिल करने में सफलता हासिल की है। देश में यह पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जीआई टैग मिला है। इनमें गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बेंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौरी की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल है

इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी, अशोक नगर की खिरनी को जी आई टैग दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कृषक कल्याण वर्ष में यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के आय को दो गुना बढ़ाने के लिए उनसे उदयानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आव्हान किया है। फिलहाल 28 लाख हेक्टेयर में उदयानिकी फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है।

कुम्भराज धनिया

कुम्भराज धनिया गुना जिले में लगभग 60 वर्षों से उगाया जा रहा है। यह किस्म 85-90 दिन में पककर तैयार होती है। इसकी उपज लगभग 12-15 कुंटल प्रति हेक्टर प्राप्त होती है। इसमें लगभग 0.4 से 0.50 प्रतिशित वाष्पशील तेल है, जिसकी वजह से इसमें बहुत अच्छी खुशबू व मिठास आती है। धनिया गुना जिले से अन्य देशो को निर्यात किया जा रहा है। कुम्भराज धनिया का स्वाद दूसरे धनिया की तुलना में तेज और बेहतर है, इसका चमकीला हरा रंग, उत्तम आकृत्ति और माप तथा शानदार सुगंध है। अकेले गुना में सालाना लगभग 32,000 मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है जो पूरे देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत है।

बरमान भटे

नर्मदा की बालुई मिट्टी में पैदा होने वाले भटे का जायका कुछ अलग ही है। यही कारण है कि बाहर से भी लोग अक्सर अपने माध्यमों से बरमान के भटे को बुलाते है, मंडियों में बरमान के भटे की तलाश रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नर्मदा किनारे कम तापमान होने की वजह से यहां के भटे का स्वाद अलग रहता है।

बैतूल का गजर‍िया आम

बैतूल जिले में खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ किले जो 500 साल से ज्यादा पुराने किलो में आते हैं। जो यह बताते है की बैतूल गोंड राजाओ का केंद्र था। भारत वर्ष का सर्वसुलभ एवं लगभग हर प्रान्त में आसानी से उगाया जा सकने वाला फल आम है। ताजे फल के उपयोग के अतिरिक्त आम के फलों से अनेक परिरक्षित पदार्थ बनाये जाते हैं। कच्चे आम का अचार, अमचूर आदि बनाये जाते जबकि पके आम से स्क्वैश, जूस, शर्बत, जैम, अमावट आदि बनाये जाते हैं। अधिकतर आम के बाग अवैज्ञानिक तरीके से लगाये गये हैं, इनकी उत्पादकता अत्यन्त कम है।

खरगोन मिर्च

खरगोन जिले की मिर्च सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। जिले में साल दर साल मिर्च की खेती का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ रहा है। सबसे बड़ी मिर्च मण्डियों में से एक यहाँ खरगोन जिले में सनावद के पास बेदिया में स्थित है। निमाड़ और मालवा क्षेत्र राज्य के सर्वाधिक मिर्च उत्पादक क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की लाल मिर्च चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब को निर्यात की जाती है।

खुरासानी इमली

मांडव की माटी का जादू ऐसा है कि जो भी यहां आया, यहीं का होकर रह गया। अलग-अलग सभ्यताओं के राजवंश हों या भेंर की वनस्पतियां, सभी यहां की मिट्टी के साथ एक हो गए। ऐसा ही एक उदाहरण अफ्रीका के शुष्क राज्य का बाओबाब है। 14 वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान मांडव लाया गया था और इसका नाम ‘बाओबाब से बदलकर खुरासानी इमली कर दिया गया था। इसे एक और नाम मांडवी इमली से भी जाना जाता है। यह पेड़ ऐसा लगता है जैसे किसी ने जड़ों सहित इसको उल्टा लगा दिया हो। ऊपर और तना नीचे, पत्तियाँ केवल वर्षा ऋतु में ही बढ़ती हैं।

सीताफल

सिवनी जिले में 656 हेक्टेयर क्षेत्र में 6500 मीट्रिक टन से अधिक सीताफल का उत्पादन होता है। सीताफल का वजन 600 से 700 ग्राम होने के कारण इसका नाम जंब सीताफल रखा गया है। अपने विशिष्ट आकार और स्वाद के कारण इसकी प्रदेश और देश में भी अच्छी मांग है।

मालवी आलू

भारतीय आलू रोग प्रतिरोधकता, आकार, माप, त्वचा, रंग आदि के मामले में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को पूरा करता है और आलू का प्रसंस्करण इसे अधिक आर्थिक मूल्य देता है। भारत के भीतर, मध्य प्रदेश राज्य वर्तमान में आलू का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य की हिस्सेदारी 6.68 प्रतिशत थी और 2014-15 से 2018-19 के बीच पांच वर्षों के लिए उत्पादन औसत 3225.95 है। मध्य प्रदेश के कई कृषि जलवायु क्षेत्रों में से, मालवा क्षेत्र मध्य प्रदेश में आलू उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

हरी मटर जबलपुर

हरी मटर जबलपुर की एक लोकप्रिय सब्जी और प्रमुख रबी फसल है। ये काफी पौष्टिक भी होते हैं और इनमें उचित मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हरी मटर या “गार्डन मटर”, छोटे, गोलाकार बीज हैं जो पाएसम सटाईवम पौधे द्वारा उत्पादित फली से आते हैं। वे सैकड़ों वर्षों से मानव आहार का हिस्सा रहे हैं और दुनिया भर में खाए जाते हैं। फसल अवधि 40-60 दिन है। जिले में वर्ष 2018-19 में हरी मटर की कुल बुआई 31,360 हेक्टेयर क्षेत्र में की गयी है तथा वर्ष 2018-19 का वार्षिक उत्पादन 52,500 टन है।

गराडू

गराडू (हायस्कोरियालाटा) मालवा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख फसलों में से एक है। यह रतालू की विभिन्न प्रजातियों में से एक है और स्वतंत्र रूप से खेती की गई है। मालवा में गराडू एकमात्र ऐसा है जिसकी नियमित रूप से खेती की जाती है और खाई जाती है, गराडू की उत्पत्ति का केंद्र लगभग मालवा प्लेटू है और भारत का अन्य भाग भी हो सकता है। गराडू को पर्यंत रतालू के नाम से भी जाना जाता है। गराडू (बैंगनी रतालू) मालवा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है, इसकी सत्र में विभिन्त्र पारंपरिक और आधुनिक मिठाइयों में उपयोग किया जाता है।

नरसिंहपुर गुड़

भारत दुनिया का एक प्रमुख गुड़ उत्पादक देश है, यह दुनिया में लगभग 58 प्रतिशत गुड़ उत्पादन में योगदान देता है। गुड़ उद्योग मध्य प्रदेश में बहुत लोकप्रिय है, यह भारत में लगभग 6 प्रतिशत गुड़ उत्पादन का योगदान देता है। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर जिला गुड़ निर्माण के लिए लोकप्रिय है। यहां ज्यादातर काली कपास मिट्टी है जिसमें मिट्टी की मात्रा 60-65% है, पानी धारण करने की क्षमता अधिक है। सितंबर-अक्टूबर में बोए गए गने के साथ सहफसली खेती। मध्य प्रदेश के कुल गत्रा क्षेत्र का लगभग 65% (लगभग 75000 हेक्टेयर) नरसिंहपुर जिले में है। इसे मध्य प्रदेश का चीनी का कटोरा कहा जाता है। इस जिले में 2500-3000 टीसीडी क्षमता वाली 09-10 चीनी मिलें है, लेकिन गन्ना विकास गतिविधियां नहीं कर रही हैं। ऐसे में किसान अब गुड़ उत्पादन उद्यमिता विकसित करने के लिए काफी उत्सुक हैं।

जबलपुर सिंघारा

सिंघाड़ा की खेती के लिए सात महीने की मेहनत लगती है. पौधे को अपने पूर्ण आकार में विकसित होने में चार महीने लगते हैं और फल आने में तीन महीने और लगते हैं। बुआई का मौसम मई-जून के गर्मियों के महीनों में शुरू होता है। किसान एक छोटे पोखर पा छोटे जलाशय में बीज बोते हैं। एक महीने के भीतर, पौधा एक बेल में बदल जाता है जिसे बाद में बड़े तालाब में प्रत्यारोपित किया जाता है। फलों की तुड़ाई दिसम्बर-जनवरी माह में की जाती है। जबलपुर, सतना और आसपास के जिलों में सिंधारा की खेती करने वाले लगभग 4,500 किसान हैं, जो मध्य प्रदेश में सिंधारा के मुख्य हितधारक हैं। ताजा सिंघाड़ा अपनी उच्च जल सामग्री (80%), स्टार्च (52%), प्रोटीन (1.87%) और टीएसएस (7-8%) के लिए जाना जाता है।

नूरजहाँ आम

मध्य प्रदेश का कट्टीवाड़ा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, हाल ही में, इसने एक और अनोखे आकर्षण नूरजहाँ आम के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल की है। इनका वजन 3-3.5 किलोग्राम होता है और यह एक फुट तक लंबे हो सकते हैं। इस किस्म के उत्पादकों का मानना है कि यह सैकड़ों साल पहले अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश तक पहुंची थी। और जबकि इस फल के कई उत्पादक हैं, इस किस्म के सबसे प्रसिद्ध आम नूरजहाँ मैंगो फार्म्स से आते हैं, जिसका स्वामित्व और प्रबंधन किया जाता है।

 

सिवनी में 1 जुलाई को धान महोत्सव, CM मोहन यादव किसानों को देंगे ₹2.82 करोड़ और विकास कार्यों की सौगात

सिवनी 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई यानी आज  सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित धान महोत्सव में शामिल होने आ रहे हैं। इसके लिए आयोजन स्थल पर बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, यातायात सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस आयोजन में मुख्यमंत्री किसानों को सौगात देंगे तो वहीं कृषि, श्रीअन्न संवर्धन और विकास कार्यों को समर्पित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिंगल क्लिक के माध्यम से कोदो एवं कुटकी उत्पादक प्रदेश के 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि अंतरित करेंगे। ये राशि 1000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा।

विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे सीएम
कलेक्टर नेहा मीना ने बताया कि, कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही, विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली थीम आधारित विकास प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी में धान बुवाई के कृषि यंत्र, प्राकृतिक बीजों की प्रदर्शनी, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक फार्मिंग मॉडल, जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद तथा पोषण आहार का प्रदर्शन किया जाएगा। कृषिका ऐप की जानकारी भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।

इस दिशा में अहम कदम है धान महोत्सव
श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषक तत्व से भरपूर होते हैं और इन्हें कम पानी में उगाया जा सकता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन गए हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारें श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, जिनमें प्रोत्साहन राशि और बाजार लिंकेज शामिल हैं। ये पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि उपभोक्ताओं को स्वस्थ खाद्य विकल्प भी प्रदान करती है। सिवनी में धान महोत्सव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री का दौरा जिले के विकास कार्यों की समीक्षा और नई परियोजनाओं की घोषणा के लिए अहम माना जा रहा है। इन दौरों से स्थानीय प्रशासन को जनता से सीधे जुडऩे और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री का सिवनी दौरा क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की विकास रणनीतियों को आकार देने में सहायक होगा। यह अवसर स्थानीय जनता के लिए भी अपनी अपेक्षाएं व्यक्त करने का एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है।

कलेक्टर ने व्यवस्थाएं परखीं
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम स्थल पॉलिटेक्निक ग्राउंड, हेलीपैड स्थल, सेफ हाउस और सुकतरा हवाई पट्टी का निरीक्षण किया। उन्होंने इन सभी स्थानों पर चल रही तैयारियों का जायजा किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मंच की व्यवस्था, दर्शकों की बैठक व्यवस्था, पार्किंग स्थल, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, साफ सफाई और यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक पहलुओं का बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने तथा प्रत्येक व्यवस्था को व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का होगा कायाकल्प, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

उज्जैन
 सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने सात प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं बल्कि मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित धार्मिक परिसरों में बदलना है, ताकि श्रद्धालुओं को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिल सके।

उल्लेखनीय है कि ज्योतर्लिंग परिसर में महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी बढ़ती धार्मिक पर्यटन गतिविधि को देखते हुए उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों के विकास की तैयारी की गई है।

इन मंदिरों का होगा कायाकल्प
मध्य प्रदेश सरकार से तैयार इस योजना में महाकाल ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सिद्धवट, श्री अंगारेश्वर मंदिर, श्री सांदीपनि आश्रम, श्री भूखी माता मंदिर और श्री नवग्रह शनि मंदिर को शामिल किया गया है। प्रत्येक मंदिर के आसपास उपलब्ध भूमि, श्रद्धालुओं की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई गई हैं।

ये सुविधाएं होंगी विकसित
योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर परिसरों के विस्तार से जुड़ा है। असल में, कई प्रमुख मंदिरों में वर्तमान में सीमित स्थान होने के कारण पर्व और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ से अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आवश्यकता अतिरिक्त भूमि शामिल कर इन मंदिरों में खुले और बड़े परिसर विकसित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्थित भीड़ से राहत देने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तैयार किए जाएंगे।

प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और समयबद्ध हो सके। मास्टर प्लान के अनुसार, इन मंदिरों के आसपास बड़े पार्किंग हब और फेसिलिटी सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सुरक्षा पर भी विशेष फोकस
मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को भी योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि सिंहस्थ और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले कर रहे आस्था की वकालत: सीएम योगी

रामपुर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आस्था व विरासत के अपमान पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग 2017 से पहले कांवड़ यात्रा रोकने, त्योहारों पर बंदिशें लगाने और ‘जय श्रीराम’ बोलने पर लाठी-गोली चलवाते थे, आज वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख आस्था की वकालत कर रहे हैं। जो कांग्रेस प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व को ही नकार चुकी थी, वह भी ‘राम सबके हैं’ कहकर अयोध्या जाने के लिए मचल रही है। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना ‘कालनेमी’ के छल-कपट से करते हुए कहा कि जनता इनके झूठ व दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को रामपुर जनपद के मिलक व बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों की ₹700 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इंटरमीडिएट/हाईस्कूल परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित किए। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि और मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मानित भी किया।

प्रभु श्रीराम जानते हैं कौन सही और कौन बुरा

सीएम योगी ने कहा कि देखिए रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले रामभक्ति की दुहाई दे रहे हैं, वकालत कर रहे हैं। यह रामभक्तों की, आपके वोटबैंक की ताकत है कि ये पार्टियां आपकी पिछलग्गू बन रही हैं। उन्हें अपने पापों, कर्मों पर पश्चाताप भी होता होगा। लेकिन, प्रभु श्रीराम तो जग नियंता हैं, ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उन्हें पता है कि कौन सही है और कौन बुरा। दरअसल, सपा-कांग्रेस को चिढ़ यह है कि अयोध्याधाम, काशी-विश्वनाथ धाम, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज धाम, नैमिषारण्य, शुक्रतीर्थ इतने सुंदर कैसे हो गए। वे इसे रोकना चाहते थे, नहीं कर सके तो चिढ़ गए। कुछ नहीं मिला तो झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने लगे।

कांग्रेस-सपा का शासन अन्याय का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा शासनकाल अन्याय व अराजकता का प्रतीक रहा है। 2017 से पहले सपा की निरंकुश सत्ता में रामपुर के गरीबों और बाल्मीकि समुदाय की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जाता था और उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। विकास केवल सैफई व रामपुर के दो परिवारों तक सीमित था, जबकि बाकी जनता को विकास से वंचित रखा जाता था। बिजली देने में भी ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाई जाती थी, जिससे सैफई में बिजली आती थी लेकिन पीलीभीत व रामपुर जैसे क्षेत्र अंधेरे में रहते थे। जनता जनार्दन ने इस अन्यायी सत्ता को पलट कर पूरे राज्य में संदेश दिया। डबल इंजन सरकार में ‘पिक एंड चूज’ नहीं होता। बिजली सभी 75 जनपदों में आएगी। जहां भी आवश्यकता थी, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आईटीआई दिए। अब कोई विकास नहीं रोक सकता, नौजवान के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता, बहन-बेटी का अपमान नहीं कर सकता।
 
वसूली पर निकल पड़ती थी चाचा-भतीजा की जोड़ी
सीएम योगी ने कहा कि सपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते उद्योग बंद होते गए। अन्नदाता किसान हताश होकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। न तो गरीब कल्याण के लिए कोई योजना थी और न विकास कार्यों के लिए धन। युवाओं के भविष्य से जमकर खिलवाड़ किया गया। अराजकता का यह हाल था कि कोई सरकारी विज्ञापन निकलता था तो ‘चाचा-भतीजा की जोड़ी’ वसूली के लिए निकल पड़ती थी और कोर्ट को भर्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। सपा व कांग्रेस के इन्हीं पापों से यूपी बीमारू बना था।

विरासत और विकास का नया मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर की पावन धरा भगवान बामेश्वर महादेव, श्री पातलेश्वर महादेव, ओम नागेश्वर महादेव, कोसी मंदिर व मां बाला सुंदरी के दिव्य आशीर्वाद से निरंतर लाभान्वित है। सरकार इन पौराणिक व आध्यात्मिक विरासत स्थलों के पुनरुद्धार के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 2017 से पहले जहां त्योहारों पर रोक लगाई जाती थी। उपद्रव व दंगे होते थे, वहीं आज कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली, रामनवमी व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे सभी पर्व पूरी भव्यता व सुरक्षा के साथ मनाए जा रहे हैं। अयोध्या नगरी ब्रॉडगेज डबल रेलवे लाइन, फोर-लेन सड़क मार्ग और महर्षि बाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़कर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है।

आर्थिक प्रगति व इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं रहा, बल्कि यह भारत की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन चुका है। प्रदेश आज युवाओं को रोजगार और अन्नदाताओं को अनुदान देने में अग्रणी है। हम खाद्यान्न, दुग्ध, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में देश में पहले या दूसरे नंबर पर गिने जाते हैं। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना के माध्यम से रामपुर के पैच वर्क, जरी वर्क, वायलिन निर्माण व मेंथा उत्पादन जैसे पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान और युवाओं को नए रोजगार मिले हैं। रामपुर के प्रसिद्ध चाकू का दुरुपयोग समाजवादी पार्टी जनता की जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें प्रताड़ित करने में करती थी, लेकिन डबल इंजन सरकार में यही चाकू जनता की सुरक्षा में काम आ रहा है।

रामपुर में चौतरफा विकास

सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर-शामली नया इकोनॉमिक कॉरिडोर रामपुर से होकर गुजरेगा, जो गोरखपुर को सिलीगुड़ी और शामली को पानीपत से जोड़कर क्षेत्र में विकास को और मजबूत करेगा। रामपुर में ढांचागत विकास को गति देते हुए 3 मीटर चौड़ी सड़कों को 7 व 10 मीटर और फोर-लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल के पुनरुद्धार व विस्तारीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सर्वे रिपोर्ट आते ही सरकार वित्तीय राशि जारी करेगी।

सबका साथ-सबका विकास ही मूलमंत्र

 मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूलमंत्र के साथ डबल इंजन की सरकार तुष्टिकरण के बजाय आमजन के संतुष्टिकरण पर विश्वास करती है। प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स को राज्य सरकार द्वारा ₹5 लाख का सुरक्षा बीमा कवर प्रदान किया गया है। हर महीने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से लखनऊ से सीधे मॉनिटरिंग कर गरीबों को शत-प्रतिशत राशन मिल रहा है। रसोई गैस का सिलेंडर 2017 से पहले सपना था, आज हर गरीब के पास सिलेंडर अपना है। गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख का स्वास्थ्य कार्ड मिला है। कार्ड न होने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार के लिए संपूर्ण राशि दी जा रही है। प्रत्येक तहसील में फायर स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों और ‘प्रोजेक्ट अलंकार’ के माध्यम से इंटर कॉलेजों को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

निवेश प्रस्तावों से मिली उद्योगों को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत का सम्मान हो या नौजवानों को नौकरी देने का संकल्प, सरकार हर मोर्चे पर प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों के नियुक्ति पत्र वितरण में रामपुर के युवाओं का नाम देखकर संतोष मिलता है। पहले जो युवा वंचित थे, आज प्रदेश की सेवाओं में चयनित होकर विकास में भागीदार बन रहे हैं। रामपुर, मिलक, बिलासपुर, स्वार व चमरौआ विधानसभा क्षेत्रों के युवा आज सरकारी नौकरियों और उद्योगों में अवसर पा रहे हैं। निवेश प्रस्तावों से उद्योगों को गति मिली है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, विधायक श्रीमती राजबाला सिंह, आकाश सक्सेना, शफीक अहमद अंसारी, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, हरी सिंह ढिल्लो, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, सूर्य प्रकाश पाल, पूर्व सांसद घनश्याम लोधी, पूर्व विधायक शिव बहादुर सक्सेना, भाजपा जिला अध्यक्ष हरीश गंगवार आदि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा में भारतीयता का होगा नवोदय: राज्यपाल पटेल

भोपाल 

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों को उच्च शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में भारतीयता का समावेश विकसित भारत की सुदृढ़ आधारशिला है। भारतीय संस्कृति, संस्कार और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन से आत्मनिर्भर, संस्कारित और विकसित भारत का निर्माण होगा।

राज्यपाल  पटेल मंगलवार को उज्जैन की कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के छठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में पीएचडी की 21 उपाधियों के साथ ही कुल 1 हजार 303 उपाधियां प्रदान की गई। विद्यार्थियों को 16 स्वर्ण पदक, 13 रजत पदक तथा 13 कांस्य पदक, कुल 42 पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल  पटेल ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया।

राज्यपाल  पटेल ने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा का केन्द्र हमारा देश था। विदेशों से अध्ययन के लिए विद्यार्थी आते थे। आज हमारे बच्चे विदेश जा रहे है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा से विकसित भारत @2047 बनाने की पहल की है। विकसित भारत में बच्चों को शिक्षा के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपेक्षा है कि संस्कृत की पहचान विश्व में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी पहल करें क्योंकि अच्छे संस्कारों के अंकुरण से ही संस्कृति का रक्षण संभव है। आज की पीढ़ी को संस्कृत और परंपराओं के ज्ञान की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्राचीन ज्ञान का बोध संस्कृत के माध्यम से ही संभव हो सकता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ग्रंथों के अध्ययन के लिए बच्चों को प्रेरित और संस्कारित आचरण की वैज्ञानिकता के बारे में बताने की भी जरूरत बताई है।

राज्यपाल  पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में सफलता के बाद भी अपने माता-पिता को कभी नहीं भूलें, क्योंकि उनकी बदौलत ही हमारा जीवन है। राज्यपाल  पटेल ने माता-पिता के प्रति सम्मान, भारतीय परंपराओं के प्रति आस्था तथा चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज घरों में ‘मातृ छाया’ और ‘पितृ छाया’ लिखा तो होता है, लेकिन घरों में बुजुर्ग माता-पिता नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों से ही संस्कृति सुरक्षित रहती है। संस्कृति संरक्षण से ही भारत को विकसित बनाने का स्वप्न साकार होगा।

भारत होगा दुनिया को उर्जा की पूर्ति करने वाला केंद्र

उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और मान्यताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति की वैज्ञानिकता को समझा था। उदाहरण देते हुए बताया कि सौर मंडल में सूर्य की शक्ति की वैज्ञानिकता का प्रतीक सूर्य देव को प्रणाम करने और अर्ध्य देने की परंपराएं है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में उर्जा को लेकर विवाद हो रहा है। वर्ष 2047 तक भारत दुनिया की उर्जा पूर्ति का केन्द्र और विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा में शामिल करने में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।

समारोह में महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानम् पुणे के संस्थापक स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज को महामहोपाध्याय (डी.लिट.) और  लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को विद्यावाचस्पति (डी.लिट.)की मानद उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण सारस्वत अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति निवास वरखेड़ी ने दिया। कार्यक्रम को स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने भी संबोधित किया। कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियां बताई। समारोह का संचालन डॉ. उपेंद्र भार्गव ने किया और आभार कुल सचिव डॉ. दिलीप सोनी ने माना।

समारोह के प्रारंभ में अकादमिक शोभायात्रा निकाली गई। राष्ट्रगान, विश्वविद्यालय कुलगान का गायन हुआ। राज्यपाल सहित सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

दीक्षांत समारोह में सांसद  अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी संत  उमेश नाथ महाराज, विधायक  अनिल जैन कालूहेडा, कार्य परिषद् के सदस्य  गौरव धाकड़, डॉ. विश्वास व्यास, डॉ. हरीश व्यास, एडवोकेट गीतांजलि चौरसिया, डॉ. केशर सिंह चौहान एवं विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष और विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

भोपाल मेट्रो के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय से करें काम : आयुक्त भोंडवे

भोपाल

भोपाल मेट्रो परियोजना प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसके समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों का आपसी समन्वय अत्यंत आवश्यक है। विभागीय स्तर पर लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण करते हुए आपसी समन्वय के साथ कार्यों में गति लाई जाए जिससे नागरिकों को शीघ्र आधुनिक, सुरक्षित एवं सुगम मेट्रो परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने मंगलवार को भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के सुचारू संचालन के लिये विभिन्न विभागों के साथ स्टेकहोल्डर्स कोऑर्डिनेशन बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना की सफलता सामूहिक उत्तरदायित्व और अंतर-विभागीय सामंजस्य पर ही निर्भर है।

आयुक्त  भोंडवे द्वारा मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति की विस्तृत समीक्षा और विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित बैठक में मेट्रो परियोजना से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना जैसे सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों, जल निकासी तथा ड्रेनेज की सघन सफाई पर विस्तार से चर्चा हुई। वर्षा ऋतु के दृष्टिगत संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में नागरिकों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही परियोजना के मार्ग में आने वाले अतिक्रमणों को हटाने, सीवर एवं पेयजल पाइपलाइन की शिफ्टिंग, विभिन्न उपयोगिता सेवाओं (यूटिलिटी सर्विसेज) के त्वरित स्थानांतरण तथा होर्डिंग्स एवं वृक्षों के वैज्ञानिक विस्थापन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की भी गहन समीक्षा की गई। आयुक्त  भोंडवे ने लंबित कार्यों के शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित विभागों को तत्परता से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जिससे निर्माण कार्य में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्माण अवधि के दौरान सुगम यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच संवाद को अधिक जीवंत व निरंतर बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

बैठक में भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के वरिष्ठ अधिकारियों सहित आयुक्त नगर निगम भोपाल, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, पुलिस विभाग, विद्युत विभाग, एनएचएआई एवं एमएसएमई विभाग के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

 

पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 11 सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई

भोपाल 

पुलिस मुख्‍यालय की विभिन्‍न शाखाओं से माह जून में सेवानिवृत्‍त 11 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने मंगलवार  को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने सभी को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को उनके विभिन्‍न स्‍वत्‍व (क्‍लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये।

नवीन पुलिस मुख्‍यालय भवन कॉन्‍फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक श्री आदर्श कटियार,  श्री पंकज श्रीवास्‍तव,  अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक सोलोमन यश कुमार मिंज, पुलिस महानिरीक्षक श्री हरिनारायणचारी मिश्र एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे।

पुलिस मुख्‍यालय से सेवानिवृत्‍त उप पुलिस अधीक्षक अ.अ.वि.  शहनाज खान, निरीक्षक विशेष शाखा श्री प्रकाश नारायण लाम्‍बे, कार्यवाहक निरीक्षक एससीआरबी श्री संतोष कुमार सेन, कार्यवाहक आंकिक/सूबेदार (एम) प्रशिक्षण श्री जुल्फिकार अली खान, आंकिक/सूबेदार (एम) कार्मिक  सुमन अमोली, उप निरीक्षक अ.अ.वि. श्री आनंदीलाल, उप निरीक्षक अ.अ.वि. श्री भानसिंह यादव, उप निरीक्षक एससीआरबी श्री प्रकाश राजपूत, उप निरीक्षक (एम)  अ.अ.वि.  स्मिता दाणी, कार्यवाहक उप निरीक्षक विशेष शाखा श्री राजेन्‍द्र प्रसाद निगम तथा आरक्षक (एम) रा.औ.सु.बल सुश्री सुषमा रैकवार को पुलिस मुख्‍यालय परिवार ने मंगलवार को भावभीनी विदाई दी।

सहायक पुलिस महानिरीक्षक  अंशुमान अग्रवाल ने सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के कार्यकाल की जानकारी दी। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।

 

एक व्यक्ति सिर्फ एक बार ही बने प्रधानमंत्री’ याचिका पर MP हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को नोटिस

इंदौर 

एक व्यक्ति को एक ही बार प्रधानमंत्री बनाया जाए। देश में वन नेशन-वन पोस्ट की व्यवस्था लागू की जाए। इस मांग के साथ हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को जस्टिस संजीव एन. भट्ट की कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका आलीराजपुर के 70 वर्षीय वकील डॉ. शंकरलाल वागवान ने एमपी हाईकोर्ट इंदौर में दायर की है।

याचिका में एक व्यक्ति को एक ही बार PM बनने का आदेश जारी करने की मांग
याचिका में उन्होंने केंद्रीय चुनाव विभाग, कानून मंत्री और प्रधानमंत्री को पार्टी बनाया है। इसमें भारतीय संविधान के अनुच्छेदों का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि सभी व्यक्तियों को समानता का अधिकार है। ऐसे में सभी को एक बार देश का प्रधानमंत्री और देश का गृहमंत्री बनने का भी अधिकार है। यह तय करने के लिए कोर्ट वन नेशन-वन पोस्ट को लागू करते हुए एक व्यक्ति को केवल एक बार ही देश का प्रधानमंत्री बनने का आदेश जारी करे।

पहले भी लगाई जा चुकी है याचिका
बता दें कि इससे पहले भी इससे पूर्व भी उन्होंने याचिका दायर की थी, लेकिन याचिका में डिफेक्ट दूर करने के निर्देश दिए गए थे। डिफेक्ट दूर नहीं करने के चलते याचिका खारिज कर दी गई थी। उसी याचिका को दोबारा रिस्टोर करने के लिए यह याचिका दायर की गई है।

सोमवार को याचिकाकर्ता ने अपनी मांग कोर्ट के समक्ष रखी। इस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कानून मंत्रालय और प्रधानमंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने 3 अगस्त तक का समय दिया है। इसके बाद के सप्ताह में कोर्ट इस मामले की दोबारा सुनवाई करेगी।

क्या भारत में प्रधानमंत्री कार्यकाल की कोई सीमा है?
भारतीय संविधान में प्रधानमंत्री का कार्यकाल तो 5 साल का है, लेकिन एक ही व्यक्ति कितनी बार प्रधानमंत्री बनेगा ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इसके चलते एक ही व्यक्ति कई बार प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। दरअसल जब किसी व्यक्ति को जब लोकसभा से लगातार बहुमत से समर्थन मिलता रहे तो वह कितनी भी बार प्रधानमंत्री पद ग्रहण कर सकता है। भारतीय संविधान में केवल प्रधानमंत्री की आयु, संसद की सदस्यता और बहुमत के समर्थन जैसी ही शर्तें रखी गई हैं। यही कारण है कि कई नेता कई बार प्रधानमंत्री पद संभालते रहे हैं।

दुनिया के वो देश जहां भारत जैसी है प्रधानमंत्री कार्यकाल की स्थिति
एक्सपर्ट्स की मानें तो संसदीय लोकतंत्र वाले ज्यादातर देशों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कोई सीमा तय नहीं है। अगर भारत एक बार एक प्रधानमंत्री जैसी व्यवस्था को लागू करना चाहता है तो इसके लिए संवैधानिक संशोधन सहित व्यापक स्तर पर कानूनी और संसदीय प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है। उसके बाद ही यह व्यवस्था लाई जा सकती है।

    ब्रिटेन भी ऐसा ही देश है जहां प्रधानमंत्री की संख्या या कार्यकाल की कोई संवैधानिक सीमा नहीं है।
    कनाडा में भी एक व्यक्ति कितनी भी बार प्रधानमंत्री बन सकता है, बशर्ते की उसे संसद का विश्वास प्राप्त हो।
    आस्ट्रेलिया में भी प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है।
    जापान भी ऐसा ही देश है जहां प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है।

फैक्ट फाइल
किसने दायर की याचिका- डॉ. शंकरदयाल वागवान, 70 साल के अधिवक्ता, आलीराजपुर निवासी।
क्या है मांग- इन्होंने हाईकोर्ट में दर्ज याचिका में मांग की है कि देश में किसी भी व्यक्ति को केवल एक ही बार प्रधानमंत्री और एक ही बार गृहमंत्री बनाए जाने का आदेश जारी किया जाए।
पक्षकार- केंद्रीय चुनाव विभाग, कानून मंत्रालय और प्रधानमंत्री
हाईकोर्ट का आदेश- कोर्ट ने नोटिस जारी किया, केंद्र सरकार से 3 अगस्त तक जवाब तलब किया है।
अगली सुनवाई- 3 अगस्त के बाद कोर्ट सुनवाई की तारीख तय करेगा।

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