राष्ट्रपति मुर्मु का बैतूल प्रथम आगमन पर परम्परागत लोक नृत्य की प्रस्तुति से किया स्वागत

भोपाल

राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु का गुरुवार को बैतूल प्रथम आगमन पर गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने परंपरागत लोक नृत्य की प्रस्तुति कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन में शामिल हुईं। राष्ट्रपति  मुर्मु के साथ ब्रह्मकुमारी संस्था के सदस्यों ने सामूहिक फोटो क्लिक करवाया।

राष्ट्रपति  मुर्मु के आगमन पर घोड़ाडोंगरी विधायक  गंगा उईके, भैंसदेही विधायक श्री महेंद्र सिंह चौहान, मुलताई विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर राष्ट्रपति का स्वागत किया।

राष्ट्रपति ने रुद्राक्ष का पौधा रोपा

राष्ट्रपति  मुर्मु ने बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पवित्र एवं औषधीय गुणों से भरपूर रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जनजातीय कार्य विभाग श्री दुर्गादास उइके, प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

 

PM मोदी के ‘कार पूल’ संदेश की हाईकोर्ट में गूंज, पार्किंग संकट पर वकीलों से साथ आने की अपील

 जबलपुर
कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने गुरुवार को हाई कोर्ट के सामने प्रस्तावित 117 करोड़ रुपये के अधिवक्ता चैंबर और मल्टीलेवल पार्किंग प्रोजेक्ट को लेकर दायर याचिका का महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सहित पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने केवल अधिवक्ता चैंबर निर्माण प्रक्रिया लंबित होने पर असंतोष जताया।

इसके साथ ही हाई कर्ट परिसर के आसपास बढ़ते यातायात और पार्किंग संकट पर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी कर दी। दिलचस्प यह है कि अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए कार पूलिंग और यातायात अनुशासन के संदेशों की प्रतिध्वनि भी सुनाई दी।

युगलपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष धन्य कुमार जैन की याचिका का निराकरण करते हुए स्पष्ट किया कि अब जबकि टेंडर प्रक्रिया जारी हो चुकी है, याचिका को लंबित रखने का औचित्य नहीं रह जाता। हालांकि कोर्ट ने यह रास्ता खुला रखा कि यदि भविष्य में राज्य सरकार परियोजना को लेकर अनावश्यक विलंब करती है तो याचिकाकर्ता पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष जताया
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि हाई कोर्ट के गेट नंबर-चार के सामने आधुनिक अधिवक्ता चैंबर और बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसका टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष व्यक्त किया।

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पार्किंग व्यवस्था को लेकर रहा। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे हाई कोर्ट परिसर के निकट अनावश्यक वाहन खड़े करने के बजाय पिक एंड ड्राप व्यवस्था को बढ़ावा दें। अधिवक्ताओं से भी वाहन साझा (कार पूलिंग) करने की व्यवस्था अपनाने की अपेक्षा जताई गई। वहीं यातायात पुलिस को क्षेत्र की सतत निगरानी कर पार्किंग अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं
दरअसल, चार मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एससी शर्मा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत व तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की उपस्थिति में परियोजना का भूमिपूजन हुआ था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से बार एसोसिएशन ने चिंता जताई थी।

न्यायालय के आदेश ने यह संदेश भी दिया है कि केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं है। यातायात अनुशासन, कार पूलिंग और पिक एंड ड्राप संस्कृति अपनाए बिना न्यायालय परिसर की भीड़भाड़ कम नहीं होगी। यही कारण है कि एक साधारण दिखने वाली याचिका का पटाक्षेप, न्यायालय परिसर की भावी यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नजीर बनकर उभरा है।

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति मुर्मु

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु

जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक
सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज के सशक्तिकरण”कार्यक्रम को किया संबोधित

बैतूल
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

   राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया। महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।

 राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मन, शरीर और आध्यात्मिक चेतना को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान लंबे समय से जनजातीय समाज के साथ मिलकर प्राकृतिक जीवन शैली और प्रकृति संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा है।

  राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि तेजी से बदलते वर्तमान दौर में जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना आवश्यक है, जिससे वे आधुनिक संसाधनों का लाभ उठा सकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत सुरक्षित बनी रहे।

राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान पिछले कई दशकों से बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों के प्रसार, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से संस्थान ने हजारों लोगों के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार किया है। जनजातीय समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जब सेवा और अध्यात्म का संगम होता है, तब समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। यह महासम्मेलन उसी संगम का सशक्त उदाहरण है और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष @2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए अधिक प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक चेतना और मानव कल्याण ही समावेशी एवं विकसित भारत की आधारशिला बनेंगे।

आध्यात्मिक जागृति जनजातीय समाज के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक मूल्यों के माध्यम से समाज को उन्नत, संस्कारित एवं सम्मानपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन के लिए प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए संस्था के सभी भाई-बहनों को शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि उनका प्रजापिता ब्रह्मकुमारी संस्था से वर्ष 1995 से आत्मीय जुड़ाव रहा है। नवसारी में उनके निवास के सामने स्थित ब्रह्मकुमारी केंद्र से लेकर माउंट आबू, गांधीनगर सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें सहभागी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा आध्यात्मिक जागरण के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य सराहनीय एवं अनुकरणीय है।

राज्यपाल पटेल ने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कहा कि प्रतिदिन कुछ समय ध्यान एवं मेडिटेशन के लिए निकालने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। ऐसे आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सद्भाव का संचार करते हैं तथा समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण: केंद्रीय मंत्री उइके

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि ओडिशा के एक छोटे से जनजातीय गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु भारतीय लोकतंत्र की शक्ति, संविधान की महानता और सामाजिक समरसता की जीवंत मिसाल हैं। केंद्रीय मंत्री उइके ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु का जीवन संघर्ष, समर्पण, सेवा और कर्तव्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपनी कर्मठता, धैर्य और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद को सुशोभित किया है, अपितु देश की प्रत्येक बेटी, जनजातीय समाज और आम नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के बैतूल आगमन से जिले का प्रत्येक जनजातीय परिवार स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनका नेतृत्व सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सभी को प्रेरित करता है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु के आगमन पर अनहद संगीत महाविद्यालय बैतूल की 7 सदस्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक और मनमोहक स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, ब्रह्मकुमारी संस्थान से राजयोगिनी शैलजा दीदी, राजयोगिनी मंजू दीदी, राजयोगी डॉ बी के नथमल जी उपस्थित हैं।

 

मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून की मार, 13 जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं; एक्सपर्ट बोले- 4 इंच पानी के बाद ही करें बोवनी

भोपाल 

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति धीमी पड़ने से कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। राज्य के कई जिलों में जून के पहले 17 दिनों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सोयाबीन, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई रुक गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के बिना बोवनी करने से फसल खराब हो सकती है।

राज्य में इस महीने अब तक औसत बारिश सामान्य से काफी कम रही है। कुछ जिलों में तो बारिश का आंकड़ा शून्य या आधा इंच से भी नीचे है। इससे बारिश पर निर्भर छोटे और मध्यम किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां किसान इंतजार कर रहे हैं।

प्रभावित जिलों की स्थिति
मौसम विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर, टीकमगढ़, दमोह, रीवा, शहडोल, बालाघाट, कटनी, भिंड, दतिया, धार, खरगोन, बड़वानी और मैहर जैसे जिलों में बारिश बेहद कम या न के बराबर रही है। कई अन्य जिलों में भी 1-2 इंच से कम पानी गिरा है, जो बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। भोपाल और आसपास के कुछ इलाकों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई, लेकिन पूरे राज्य का औसत सामान्य से 25-35 प्रतिशत कम रहा।

आज तीन जिलों में हीटवेव का अलर्ट, 28 में बारिश होगी
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के 3 जिले रतलाम, छिंदवाड़ा-बालाघाट में हीट वेव का अलर्ट है। वहीं, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी-बारिश का दौर रहेगा। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया और शहडोल में गर्मी का असर रहेगा।

मानसून की रफ्तार धीमी, सामान्य तारीख निकल चुकी
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। पिछले वर्षों में 2021 में मानसून सबसे जल्दी 9 जून को पहुंचा था, जबकि 2018 में सबसे देर से 25 जून को प्रवेश हुआ था। वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी। इस वर्ष मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है और इसके लगभग एक सप्ताह देरी से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि जून महीने की बारिश का आंकड़ा अभी काफी पीछे चल रहा है।

जून में अब तक 35% कम बारिश
1 जून से 16 जून के बीच मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। जहां इस अवधि तक औसतन करीब डेढ़ इंच बारिश होनी चाहिए थी, वहां वास्तविक वर्षा इससे काफी कम रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य का आधा पानी भी नहीं बरस पाया है।

इन 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश
अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, इंदौर, झाबुआ, खरगोन, रतलाम, उज्जैन और विदिशा जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। 

बीज खराब होने का खतरा बढ़ा मानसून के समय पर आने की संभावना के चलते प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी। उन पर बीज खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पानी के अभाव में बीज खराब हो सकता है। ऐसे में किसानों को दोबारा बोवनी करना पड़ेगी। हालांकि, उन किसानों के लिए राहत है, जिनके पर सिंचाई के लिए पानी है।

भोपाल-राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा इससे पहले बुधवार को प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिर गया। बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी बारिश दर्ज की गई।

मौसम में ठंडक घुलने से दिन के तापमान में भी गिरावट आई है। बैतूल में एक ही दिन में 10 डिग्री की गिरावट हुई और पारा 26.5 डिग्री पर आ गया। शिवपुरी-पचमढ़ी में पारा 34 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.9 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, सागर में 37 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री, श्योपुर-धार में 37.4 डिग्री, मंडला में 37.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 34.8 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री, जबलपुर में 39.3 डिग्री और ग्वालियर में 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों की चेतावनी
कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि बुवाई के लिए मिट्टी में कम से कम 4 इंच (लगभग 100 मिमी) बारिश का होना जरूरी है। इससे जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और बीज अच्छे से अंकुरित होंगे। जल्दबाजी में बोई गई फसल सूखे के कारण नष्ट हो सकती है, जिससे किसानों को दोबारा खर्च उठाना पड़ सकता है।

मानसून की संभावना
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्य प्रदेश में 21 से 24 जून के आसपास पहुंच सकता है। इस बार समग्र मौसम पूर्वानुमान सामान्य से थोड़ा कम बारिश का इशारा कर रहा है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 

जनजातीय महासम्मेलन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन, बोलीं- अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण से बनेगा विकसित भारत

बैतूल 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार करती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

राष्ट्रपति बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन का शुभारंभ करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सराहना की।

राष्ट्रगीत के साथ शुरुआत, दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। मंच पर उन्हें मोमेंटो भेंट कर उनका सम्मान किया गया।इस अवसर पर कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसके बाद महासम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई।

राष्ट्रपति बोलीं- जनजातीय समाज ने परंपरा काे संभालकर रखा उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है। उनके जीवन में संवेदना, सहयोग, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की गहरी जड़ें हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति के प्रति जुड़ाव और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण का दृष्टिकोण आज के समय में पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

बोलीं- राष्ट्र निर्माण में सबकी भूमिका अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर हिस्सा भारत की आत्मा का अभिन्न अंग है और राष्ट्र निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है।

राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा। साथ ही उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी से मिलकर काम करने की अपील की।

मंच पर मौजूद रहे राज्यपाल और विशिष्ट अतिथि इस विशाल महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। मंच पर उनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, प्रदेश के राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और संस्था के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल मौजूद रहे।

साथ ही, माउंट आबू से आईं लीना बहन और शैलजा बहन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

नेशनल कराटे चैंपियनशिप में इंदौर का जलवा, नन्हे खिलाड़ियों ने जीते गोल्ड मेडल

इंदौर 

उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित हुई राष्ट्रीय स्तर की कराटे प्रतियोगिता में इंदौर के होनहार खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 4 से 7 जून 2026 तक संचालित हुई केआईओ (KIO) राष्ट्रीय सब-जूनियर, कैडेट एवं जूनियर कराटे चैंपियनशिप 2026 में इंदौर के युवा कराटेबाजों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय दिया। इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप में खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल छह पदक अपने नाम किए, जिसमें एक स्वर्ण पदक और पांच कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार सफलता से खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी वॉरियर मार्शल आर्ट्स अकादमी का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है।
 
पदक विजेताओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन
कराटे अकादमी के मुख्य कोच राहुल जाट ने प्रतियोगिता के परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि चैंपियनशिप में इंदौर की प्रतिभावान खिलाड़ी यशस्वी सोनी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए अपनी श्रेणी में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके साथ ही अकादमी के अन्य होनहार खिलाड़ियों में होमेश गुर्जर, मानवी मिश्रा, श्रुत जैन, पहर शर्मा और स्तुति गौर ने भी कड़े मुकाबलों में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए देश भर से आए प्रतिद्वंदियों को मात दी और कांस्य पदक जीतकर शहर का गौरव बढ़ाया।

राष्ट्रीय मंच पर खिलाड़ियों का सराहनीय प्रयास
पदक विजेताओं के अतिरिक्त इंदौर के अन्य कराटे खिलाड़ियों ने भी इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपनी तकनीकी और जुझारू क्षमता से सभी को प्रभावित किया। कोच राहुल जाट के अनुसार प्रतियोगिता के विभिन्न मुकाबलों में दिया चतुर्वेदी, काव्या गुर्जर, राजविका परमार, अद्विका चौधरी, भाव्या परमार तथा रोनित थापा ने भी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। भले ही ये खिलाड़ी पदक तालिका में स्थान बनाने से चूक गए, लेकिन राष्ट्रीय मंच पर उनके इस जुझारू खेल प्रदर्शन ने खेल अकादमी के सम्मान को और अधिक बढ़ाया है।

खेल प्रेमियों और पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
इंदौर के मार्शल आर्ट्स खिलाड़ियों की इस अभूतपूर्व राष्ट्रीय उपलब्धि पर स्थानीय खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों के अभिभावकों ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। खिलाड़ियों की इस बड़ी सफलता पर इंदौर जिला सेइकोकाई के अध्यक्ष अजय शुक्ला, संगठन के सचिव मयूर यादव तथा अमेय शर्मा ने सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी। पदाधिकारियों ने खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि इंदौर के इन बच्चों ने राष्ट्रीय स्तर पर शहर का मान बढ़ाया है और उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। 

 

अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें! मध्य प्रदेश से जुड़े 6 साल पुराने मामले ने गिरफ्तारी की आशंका बढ़ाई

जबलपुर /कोलकाता

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति तत्काल ट्रायल कोर्ट को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।यह मामला नवंबर 2020 में कोलकाता की एक राजनीतिक रैली के दौरान भाजपा नेता आकाश विजय वर्गीय को कथित रूप से ‘गुंडा’ कहे जाने से जुड़ा है। इस टिप्पणी के खिलाफ आकाश विजयवर्गीय ने एमपी-एमएलए कोर्ट का रुख किया था। एमपी/एमएलए कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब हाईकोर्ट ने उस राहत को समाप्त करते हुए अंतरिम स्थगन आदेश रद्द कर दिया है।

हाईकोर्ट ने जानें क्यों जताई नाराजगी?
गौरतलब है कि आठ मई को हुई सुनवाई के दौरान भी उनके वकील की अनुपस्थिति पर अदालत ने नाराजगी जताई थी और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगली तारीख पर बहस नहीं होने की स्थिति में अंतरिम राहत जारी नहीं रहेगी।बीते दिनहुई सुनवाई में भी अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ। पासओवर के बाद भी जब कोई पक्षकार अदालत में पेश नहीं हुआ तो हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक समाप्त कर दी।

कोर्ट नाराज क्यों हुआ?
मामले की सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर हाई कोर्ट की बेंच ने 12 नवंबर 2025 को गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी थी।

हालांकि, बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई भी प्रतिनिधि या वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसे गंभीरता से लेते हुए बेंच ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता खुद ही इस याचिका को आगे बढ़ाने में विशेष रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए गिरफ्तारी वारंट पर लगाई गई अंतरिम रोक हटाई जाती है।

ईडी की अभिषेक से सुनवाई
वहीं, इस मामले के अलावा अभिषेक बनर्जी से ईडी भी पूछताछ कर रही है। बंगाल के कथित शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर 16 जून को उनसे 11 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। इसके अलावा अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो अन्य मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। अभिषेक बनर्जी को अपने संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा है कि वह इन मामलों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के सामने कभी भी सरेंडर नहीं करेंगे। अभिषेक ने दावा किया कि अगर उनका गला भी काट दिया जाए, तब भी वह डरकर पीछे नहीं हटेंगे।

अभिषेक बनर्जी की हो सकती है गिरफ्तारी
अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ जारी अरेस्ट वारंट पर लगी रोक को हटा दिया है। इससे बनर्जी की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश पुलिस जल्द ही पश्चिम बंगाल जाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। यह भी संभव है कि एमपी पुलिस के ऐक्शन से पहले वह सुप्रीम कोर्ट जाकर राहत की मांग करें।

6 साल पहले कोलकाता में दिया था बयान
सांसद अभिषेक बनर्जी के अरेस्ट वारंट से स्टे हटाते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि आदेश की कॉपी तुरंत ट्रायल कोर्ट को भेजी जाए। यह मामला 6 साल पुराना है, जब नवंबर 2020 में एक चुनावी रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने आकाश विजयवर्गीय के लिए कथित तौर पर ‘गुंडा’ वाला बयान दिया था। आकाश विजयवर्गीय ने एमपी-एमएलए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे, जिसके बाद अभिषेक बनर्जी ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। याचिका में कहा गया था कि वह वर्तमान में एक सांसद हैं, ऐसे में उनके फरार होने की संभावना नहीं है। इस बीच पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेता अभिजीत दास की शिकायत पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले में दो एफआईआर दर्ज की गई है।

बंगाल में ताबड़तोड़ एक्शन
जानकारी के लिए बता दें कि जब से पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनी है, टीएमसी के कई नेताओं के खिलाफ एक्शन हुआ। कई मामलों में आरोपियों की सार्वजनिक परेड भी निकाली गई। बात चाहे पुष्पा उर्फ जहांगीर खान की हो या फिर शाहीन मोल्ला की, प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

हालांकि, इस तरह की सार्वजनिक परेड को लेकर टीएमसी ने भी विरोध दर्ज कराया है। मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है जहां राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा गया है।

महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक, उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक, उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल में हो रही वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक की स्थापना, लोकार्पण जल्द ही
समाज के युवाओं को पार्थ योजना से पुलिस एवं सेना में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलायेगी सरकार
स्कूली कक्षाओं में पढ़ाई जायेगी महाराणा प्रताप की जीवनी
महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पर हुआ राज्य स्तरीय समारोह
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में सहभागिता कर महाराणा प्रताप को अर्पित किए श्रद्धासुमन

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन वीरता, शौर्य, पराक्रम, त्याग का प्रतीक है। उनका नाम स्मरण करते ही मन श्रद्धा से भर जाता है। महाराणा प्रताप ने तमाम कठिनाइयों के बीच भी ‘राष्ट्र प्रथम’ को सर्वोपरि रखा। समाज का हर वर्ग देश की अस्मिता और आत्म सम्मान के लिए महाराणा प्रताप को एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में देखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि महाराणा प्रताप सिर्फ़ एक राजा नहीं, स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अनुपम प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहस और वीरता मनुष्य का आभूषण है। यह पराक्रमी राजा का नैसर्गिक गुण होता है। महाराणा प्रताप वीरता के पर्याय हैं। उन्होंने जीवन में अनेक कष्ट सहे, पर अपने लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं हुए। उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर भोपाल के महाराणा प्रताप नगर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में यह उद्गार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिसोदिया-राजपूत-क्षत्रिय समुदाय द्वारा आयोजित इस सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता कर महान योद्धा महाराणा प्रताप को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज के प्रतिभाशाली डाक्टर, युवाओं, खिलाड़ियों और समाजसेवियों को मंच से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन किया है और आज इसी बोर्ड के माध्यम से यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम किया गया है। हमारी सरकार महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करते हुए इसे और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सेना और पुलिस बल में युवाओं की भर्ती के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से “पार्थ योजना” की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत तैयारी कर रहे युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश के अधिकांश जिले इस योजना के दायरे में ले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि क्षत्रिय समाज के सभी युवाओं को भी इसी योजना में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटर्नशिप की व्यवस्था और समायोजन के लिए भी प्रभावी पहल की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराणा प्रताप लोक निर्माण का शेष कार्य तेजी से पूरा कराकर इसका बहुत जल्द लोकार्पण किया जाएगा। म.प्र.पर्यटन विकास निगम और महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के समन्वय से सरकार महाराणा प्रताप के स्वर्णिम अतीत को दुनिया के सामने लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि

मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिसने महाराणा प्रताप की जयंती पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की जीवनी अब स्कूलों में पढ़ाई जायेगी। हम महाराणा प्रताप के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने जा रहे हैं। इससे हमारी भावी पीढ़ी महाराणा की वीरता और देशभक्ति से प्रेरणा लेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सभी देशों में अपना अग्रणी स्थान बना रहा है। हमारी सरकार विरासत से विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए भारत के गौरवशाली अतीत को दुनिया के सामने लाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप अद्वितीय वीरता, शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणा स्त्रोत हैं। आज इस जयंती समारोह में महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के बैनर तले संपूर्ण क्षत्रिय समाज एक मंच पर आया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अत्यंत बलशाली महाराणा प्रताप का कवच 72 किलो और भाला 80 किलोग्राम वजनी था। यह उनके अद्भुत व्यक्तित्व का परिचायक है। उन्होंने हर युद्ध में महान शौर्य दिखाया। महाराणा प्रताप के घोड़े “चेतक” के साथ उनके लगाव की कहानियां सुनकर मन रोमांचित हो जाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ की स्थापना कर विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से उनके उत्कृष्ट जीवन से दुनिया का परिचय कराया है। युवाओं को सम्राट विक्रमादित्य पर शोक के लिए फैलोशिप प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही उज्जैन में मां क्षिप्रा के किनारे शहीद दुर्गादास राठौर का भव्य संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का जो संकल्प दिया है, उसकी प्रेरणा हमें महाराणा प्रताप से ही मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मातृभूमि, संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया , परंतु विकट विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया। इतिहास गवाह है कि महाराणा प्रताप को जीवन के कठिनतम समय में घास की रोटियां तक खानी पड़ीं, तब भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। अपने नाम के अनुरूप वे सचमुच प्रतापी थे। उनका गौरवशाली व्यक्तित्व भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अमर रहेगा। मुख्यमंत्री ने देश-प्रदेश के युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन एक प्रकार से प्रदेश में शौर्य की स्थापना करने जैसा है। कुछ व्यक्तित्व समय, युग और जाति के साथ नहीं बंधते हैं। वे सदैव मानव कल्याण, स्वाभिमान और देश के कल्याण के लिए होते हैं। महाराणा प्रताप ने कल्याण बोर्ड बनाकर एक महान वीर के गुणों से परिचित कराने का प्रशंसनीय कार्य किया है। देश के कई राज्य मध्यप्रदेश की योजनाओं का अनुसरण कर रहे हैं। महाराणा प्रताप के समान ही छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह ने भारतीय इतिहास में बलिदान और वीरता का नया इतिहास गढ़ा। आज देश में रामराज्य का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी महाराणा प्रताप की तरह कभी किसी के सामने झुकते नहीं हैं। उन्हें दुनिया के कई देशों ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कभी समझौता नहीं किया। हल्दी घाटी के भीषण युद्ध के बाद उन्होंने जंगल में रहकर घास की रोटियां खाईं, लेकिन अपने जीवन में पराधीनता स्वीकार नहीं की। अकबर भी उनकी वीरता का कायल था। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए महाराणा प्रताप के जीवन मूल्य युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

म.प्र. महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष केशव सिंह भदौरिया ने कहा कि महाराणा प्रताप की जीवन एक विचार की तरह है, जो कभी खत्म नहीं हो सकता है। महाराणा प्रताप ने अपने समय में अकबर जैसे मुगल शासकों से समझौता नहीं किया और जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने घास की रोटियां तक खाकर अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कार्य किया। हल्दीघाटी का युद्ध उनकी वीरता का प्रतीक है। राज्य सरकार ने महाराणा प्रताप के प्रेरक प्रसंग पाठ्यक्रम में शामिल किए हैं। यह एक वंदनीय प्रयास है। क्षत्रिय युवाओं को शस्त्र बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।

इस राज्य स्तरीय समारोह में खेल एवं युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, राहुल कोठारी, अरविन्द सिंह भदौरिया, जयपाल सिंह, सत्येंद्र भूषण सिंह, राजपाल सिंह और बालाजी जसवंत सिंह, महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अन्य पदाधिकारी, समाजजन एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

 

MP में 7 साल पुराना OBC आरक्षण विवाद निर्णायक मोड़ पर, 24 जून से हाई कोर्ट में नियमित सुनवाई

 जबलपुर
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और सात वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद मामले में अब सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ ने मामले की गंभीरता और इससे प्रभावित हजारों अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए 24 जून 2026 से प्रतिदिन सुनवाई (डे-टू-डे हियरिंग) करने का फैसला लिया है।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की विशेष युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण मामले में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी। इस दौरान ओबीसी आरक्षण विवाद से संबंधित 91 याचिकाएं और संबद्ध प्रकरण सूचीबद्ध थे।

सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय से मुख्य याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने वैकल्पिक रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के संदर्भ में अंतरिम आदेशों को निरस्त करने से जुड़े लंबित आवेदनों पर विचार करने की मांग भी रखी।

अधिवक्ता ठाकुर ने दलील दी कि आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में शासकीय नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं और हजारों अभ्यर्थी करीब सात साल से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मामले का शीघ्र निराकरण आवश्यक है।

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहली बार उनके समक्ष सूचीबद्ध हुआ है और सभी पक्षों को विस्तृत सुनवाई का समुचित अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने व्यापक और बहुस्तरीय विवाद का न्यायसंगत समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएं।

इसी को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 24 जून से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि नियमित सुनवाई से लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है और नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो सकता है।

    ओबीसी आरक्षण विवाद से राज्य की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं, चयन सूचियां व हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, अब निगाहें जाहिर तौर पर 24 जून पर टिकी हैं, जब हाई कोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले की नियमित सुनवाई आरंभ करेगा। उम्मीद की जा रही है कि लगातार सुनवाई से वर्षों से लंबित इस संवेदनशील संवैधानिक विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति हो सकेगी।

    -संदीप जैन, अधिवक्ता, मप्र हाई कोर्ट।

 

भोपाल बार संघ चुनाव में बड़ा झटका, नामांकन फीस 75% तक बढ़ी; प्रत्याशियों का बजट बिगड़ा

भोपाल
 राजधानी भोपाल बार संघ चुनाव इस बार प्रत्याशियों के लिए बेहद खर्चीला साबित हो रहा है, क्योंकि विभिन्न पदों की नामांकन फीस में 42% से लेकर रिकार्ड 75% तक की भारी वृद्धि की गई है। इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि (75%) सह-सचिव, कोषाध्यक्ष और पुस्तकालयाध्यक्ष के पदों पर देखी गई है, जिनकी फीस सीधे 20 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये कर दी गई है। वहीं सबसे बड़े यानी अध्यक्ष पद के लिए भी दो वर्ष पहले की तुलना में सीधे 42.85% (15,000 रुपये) का इजाफा किया गया है।

फीस में की गई यह बेतहाशा बढ़ोतरी
इस समय कोर्ट परिसर में उम्मीदवारों और वकीलों के बीच चर्चा और आक्रोश का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती इस बढ़ोतरी पर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ पाठक ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस प्रकार चुनाव लड़ने के लिए नामांकन शुल्क में 50 से 75 फीसदी तक की वृद्धि की गई है, उससे सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि जो अधिवक्ता आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनके लिए अब चुनाव लड़ना बेहद मुश्किल काम हो गया है।

इसके कारण कई योग्य उम्मीदवार चुनाव मैदान से दूर रहने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं, सचिव पद (जिसमें 60% की वृद्धि हुई है) का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी अनुराग दुबे ने भी इस बढ़ी हुई फीस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे उम्मीदवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है।

नियमों को ताक पर रख उड़ाई जा रही आचार संहिता की धज्जियां
चुनाव का प्रचार और जनसंपर्क कोर्ट परिसर में बहुत तेजी से चल रहा है, लेकिन इसके साथ ही चुनावी आचार संहिता के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक कोर्ट परिसर के भीतर किसी भी तरह के झंडे, बैनर या पोस्टर लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसके बावजूद, सख्त हिदायतों और पाबंदियों को ताक पर रखकर पूरे परिसर को प्रचार सामग्री से पाट दिया गया है। कोर्ट परिसर की दीवारों, खंभों और दरवाजों पर प्रत्याशियों के पोस्टर और झंडे साफ नजर आ रहे हैं, जिससे आचार संहिता का खुला उल्लंघन दिखाई दे रहा है।

क्यों बढ़ानी पड़ी फीस?
इस बार बारिश के मौसम को देखते हुए वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था करनी होगी, जिसके कारण टेंट का खर्च काफी महंगा होने वाला है। इसके अलावा, समय के साथ स्टेशनरी की लागत भी बढ़ गई है। कुल मिलाकर विगत दो वर्षों में महंगाई में काफी ज्यादा इजाफा हुआ है, इसी व्यावहारिक कारण से इस बार नामांकन फीस में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया है।” वासु वासवानी, मुख्य चुनाव अधिकारी, भोपाल बार काउंसिल।

विभिन्न पदों के लिए निर्धारित नामांकन फीस की तुलनात्मक तालिका

पद का नाम -वर्तमान निर्धारित फीस -दो वर्ष पहले की फीस- सीधे हुई बढ़ोतरी -कुल प्रतिशत वृद्धि (%)

अध्यक्ष- 50,000 रुपये -35,000 रुपये- 15,000 रुपये- 42.85% की वृद्धि

उपाध्यक्ष- 45,000 रुपये -30,000 रुपये- 15,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि

सचिव- 40,000 रुपय -25,000 रुपये- 15,000 रुपये- 60.00% की वृद्धि

सह-सचिव- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि

कोषाध्यक्ष- 35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि

पुस्तकालयाध्यक्ष-35,000 रुपये -20,000 रुपये- 15,000 रुपये- 75.00% की वृद्धि

वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-15,000 रुपये- 10,000 रुपये- 5,000 रुपये- 50.00% की वृद्धि

कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-7,500 रुपये- 5,000 रुपये- 2,500 रुपये- 50.00% की वृद्धि। 

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