तय समय में पूर्ण करें कार्य, ढिलाई बर्दाश्त नहीं : राज्यमंत्री गौर

भोपाल

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही और अनावश्यक विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा दोषी एजेंसियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि बावड़िया कला चौराहा (अपोलो सेज अस्पताल) से ऑशिमा मॉल तक प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा इसी माह के अंत तक निर्माण कार्य प्रारंभ होने की संभावना है। इस पर राज्यमंत्री  गौर ने कार्य को गति देने के निर्देश दिए।

उन्होंने बाबूलाल गौर सेतु, बावड़िया में प्रस्तावित मरम्मत एवं लेफ्ट टर्न निर्माण कार्य बारिश के बाद तत्काल प्रारंभ करने को कहा। पिपलानी से खजूरी रोड निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है तथा नाली निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए  गौर ने संबंधित ठेकेदार की लापरवाही पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

खेजड़ा बरामद पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान उन्होंने निर्देशित किया कि पहले सड़क निर्माण पूरा किया जाए, उसके बाद पोल शिफ्टिंग एवं विद्युत व्यवस्था से जुड़े कार्य किए जाएं। ग्लोबल स्किल पार्क के समीप पुलिया एवं अतिक्रमण के कारण मार्ग निर्माण बाधित होने पर पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में शीघ्र अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने के निर्देश दिये।

राज्यमंत्री  गौर ने पुलिस थाना बागसेवनिया से एचडीएफसी बैंक तक मार्ग, गुलमोहर से आकृति इको सिटी, अरविंद विहार कॉलोनी मार्ग, बागमुगालिया एक्सटेंशन मार्ग, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कटारा हिल्स-गायत्री विहार-नंदगांव मार्ग, आदर्श नगर-प्रधान मंडपम-साधना एन्क्लेव मार्ग, कुंजन नगर फेस-1 से बागसेवनिया सीसी नहर रोड, अवधपुरी क्रिस्टल आइडियल गेट तक मार्ग, स्वर्ण जयंती पार्क से गुलमोहर मार्ग, बाबरिया चौराहे से विरासा हाइट्स मार्ग, अयोध्या बायपास से ग्राम कोलुआ करारिया मार्ग, एम्स अस्पताल से डीआरएम पहुंच मार्ग तथा साकेत नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल से 9 बीडीए कॉम्प्लेक्स तक क्षतिग्रस्त मार्ग के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की।

राज्यमंत्री  गौर ने निर्देश दिए कि जिन कार्यों की स्वीकृति मिल चुकी है, उन्हें तत्काल प्रारंभ किया जाए और प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण कर जनता को राहत पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में लोक निर्माण विभाग, नगर निगम तथा विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

“सेफ क्लिक 2.0” अभियान में जागरूकता के साथ राहत भी दे रही मध्यप्रदेश पुलिस

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित राज्यव्यापी साइबर जागरूकता अभियान “सेफ क्लिक 2.0” के अंतर्गत प्रदेशभर में जहां नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है, वहीं साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने की दिशा में भी प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। अभियान के प्रारंभिक दिनों में ही देवास एवं खरगोन पुलिस ने साइबर फ्रॉड पीड़ितों को उनकी ठगी गई राशि वापस दिलाकर आमजन का विश्वास मजबूत किया है।

अभियान के तहत पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी विद्यालयों, महाविद्यालयों, हाट-बाजारों, सार्वजनिक स्थलों तथा पुलिस चौपालों के माध्यम से नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, मैट्रिमोनियल स्कैम, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, क्यूआर कोड फ्रॉड एवं अन्य साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में जागरूक कर रहे हैं। साथ ही साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं डायल-112 पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

देवास जिले में पुलिस अधीक्षक  पुनीत गेहलोद के निर्देशन में अभियान के दौरान विभिन्न थाना क्षेत्रों के 16 साइबर फ्रॉड पीड़ितों की कुल 3 लाख 98 हजार 719 रुपये की राशि वापस कराई गई। शिकायत प्राप्त होते ही थाना स्तर पर पदस्थ साइबर मित्रों एवं जिला साइबर सेल द्वारा एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकों एवं एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप ठगी गई राशि होल्ड कराकर पीड़ितों के खातों में वापस कराई जा सकी।

इसी प्रकार खरगोन जिले में पुलिस अधीक्षक  रविन्द्र वर्मा के निर्देशन में साइबर सेल द्वारा दो अलग-अलग साइबर ठगी प्रकरणों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए 74 हजार 956 रुपये की राशि वापस कराई गई। एक प्रकरण में मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से विदेश से उपहार भेजने का झांसा देकर कस्टम शुल्क के नाम पर ठगी की गई थी, जबकि दूसरे मामले में ऑनलाइन निवेश पर अधिक लाभ का प्रलोभन देकर धोखाधड़ी की गई थी। शिकायत प्राप्त होने पर साइबर सेल ने तत्काल एनसीआरपी पोर्टल पर प्रकरण दर्ज कर संबंधित बैंक खातों को होल्ड कराया तथा आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण कर राशि वापस दिलाई।

दोनों जिलों में की गई इन कार्यवाहियों के माध्यम से कुल 4 लाख 73 हजार 675 रुपये की राशि साइबर ठगी के पीड़ितों को वापस कराई गई है। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर नागरिकों ने मध्यप्रदेश पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया है।

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग अथवा व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। सोशल मीडिया, मैट्रिमोनियल वेबसाइट, निवेश योजनाओं अथवा अन्य ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त आकर्षक ऑफर एवं अधिक मुनाफे के प्रलोभन से सावधान रहें। किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930, डायल-112 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर राशि सुरक्षित कराई जा सके।

 

कटनी पुलिस की बड़ी उपलब्धि

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिकों को बेहतर, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप कटनी जिले के 13 पुलिस थाने, 02 अनुविभागीय पुलिस कार्यालय एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालयको अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्यप्रणाली विकसित करने पर आईएसओ (ISO) प्रमाणन प्राप्त हुआ है।जनशिकायतों का निर्धारित समय पर निराकरण, अपराधियों को पकडऩे, थाने के रखरखाव और रिकार्ड कम्प्यूटराइज्ड होने के अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने पर यह प्रमाण पत्र जारी हुआ है। इससे कटनी जिले की प्रदेशभर में अलग ही पहचान बन गई है।

29 जून को आयोजित समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, जबलपुर जोन  प्रमोद वर्मा, कलेक्टर कटनी  आशीष तिवारी तथा पुलिस अधीक्षक कटनी  अभिनय विश्वकर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में यह प्रमाणन प्रदान किया गया।

अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर परखी गई पुलिस कार्यप्रणाली

आईएसओ प्रमाणन के लिए पुलिस थानों एवं कार्यालयों का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया गया। इसमें पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों कीव्यवहार कुशलता, शिकायतकर्ताओं के प्रति संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार, शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण, समयबद्ध एफआईआर पंजीयन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता, महिला एवं पुरुषों के लिए पृथक व्यवस्थाएं, अभिलेखों एवं रजिस्टरों का वैज्ञानिक एवं अद्यतन संधारण, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन, जप्ती माल एवं अपराध संबंधी अभिलेखों का व्यवस्थित रख-रखाव, सीसीटीएनएस के माध्यम से सूचना का आदान-प्रदान, ऑनलाइन एफआईआर एवं उसकी समयबद्ध उपलब्धता, शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की नियमित जानकारी, उत्तरदायित्व निर्धारण, पारदर्शिता, स्वच्छ एवं सुरक्षित कार्यस्थल तथा सतत गुणवत्ता सुधार जैसे विभिन्न मानकों का गहन परीक्षण किया गया। इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कटनी पुलिस की पुलिस इकाइयों एवं कार्यालयों ने आईएसओ प्रमाणन प्राप्त किया।

इन्हें मिला आइएसओ प्रमाणन

पुलिस अधीक्षक कार्यालय कटनी, अनुविभागीय अधिकारी पुलिसकार्यालय विजयराघवगढ़ एवं स्लीमनाबाद, थाना कोतवाली, थाना कुठला, थाना माधवनगर, थाना यातायात, थाना एनकेजे, थाना स्लीमनाबाद, थाना उमरिया पान, थाना बहोरीबंद, थाना ढीमरखेड़ा, थाना रीठी, थाना बड़वारा, थाना बरही एवं थाना विजयराघवगढ़ को आईएसओ प्रमाणन प्रदान किया गया।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग, आधुनिक प्रबंधन प्रणाली तथा सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। यह उपलब्धि न केवल कटनी पुलिस, बल्कि संपूर्ण मध्यप्रदेश पुलिस के लिए गौरव का विषय है और जनसेवा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल पुलिस को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बनाने के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल सिद्ध होगी।

 

यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा ने सराहा प्रदेश का “महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन स्थल” मॉडल

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा’ के विज़न को साकार करते हुए एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल (STDW)’ परियोजना चलाई जा रही है। इसी क्रम में टूरिज्म बोर्ड में एक विशेष सत्र में यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु शोको इशिकावा ने परियोजना की प्रशिक्षित बालिकाओं से सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों व उपलब्धियों को जाना। यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु शोको इशिकावा ने प्रशिक्षित बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और कौशल की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी पर्यटन के वैश्विक दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत है

महिला पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित राज्य बनाने का संकल्प

एमपी टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक  अभय अरविंद बेडेकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को महिला पर्यटकों के लिए देश का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील पर्यटन गंतव्य बनाना है। प्रदेश में सुरक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता के समन्वित प्रयासों से महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा पर्यटन क्षेत्र अधिक समावेशी बन रहा है।

हस्तनिर्मित उपहारों में दिखी आत्मनिर्भरता की झलक

STDW प्रोजेक्ट पर हुए संवाद के दौरान परियोजना से जुड़ी महिलाओं एवं बालिकाओं ने अपने कौशल का परिचय देते हुए अतिथियों को स्वयं निर्मित हस्तशिल्प भेंट किए। इनमें हस्तनिर्मित स्मृति चिन्ह, फैब्रिक ज्वेलरी, फेंगशुई कलाकृतियां शामिल हैं। इन उत्पादों ने न केवल स्थानीय कला और रचनात्मकता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि परियोजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।

बैठक के दौरान यूएन विमेन के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के तहत विकसित कौशल प्रशिक्षण मॉडल, सामुदायिक सहभागिता और महिलाओं के आत्मविश्वास में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी और प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर यूएन विमेन इंडिया की कंट्री डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव सु कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सु जोयात्री राय भी उपस्थित रहीं।

 

उड़ीसा के पेयजल मंत्री नायक ने जल निगम की नवाचार आधारित कार्यप्रणाली की सराहना की

भोपाल

उड़ीसा के पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। प्रतिनिधिमंडल ने निगम की संस्थागत व्यवस्था, परियोजना क्रियान्वयन प्रणाली, तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, संचालन एवं संधारण (ओ एंड एम), वित्तीय प्रबंधन तथा मानव संसाधन विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। मंत्री नायक ने मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा अपनाई गई आधुनिक और नवाचार आधारित व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इनमें से कई व्यवस्थाओं को उड़ीसा में भी लागू करेंगे।

प्रबंध संचालक, म.प्र. जल निगम के.वी.एस. चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रदेश में संचालित ग्रामीण नल-जल योजनाओं की प्रगति, डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था, रियल टाइम निगरानी प्रणाली, परियोजनाओं के संचालन एवं संधारण मॉडल, ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपयोग एवं विद्युत भुगतान की व्यवस्था, क्षमता विकास (ट्रेनिंग) कार्यक्रमों तथा तकनीक आधारित प्रबंधन प्रणाली पर विस्तृत जानकारी साझा की। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश जल निगम के संस्थागत ढांचे, सुशासन, वित्तीय मॉडल, परियोजना क्रियान्वयन, ‘जल रेखा’ एवं ‘पंचायत दर्पण’ जैसे तकनीकी नवाचारों की कार्यप्रणाली तथा ग्रामीण जलापूर्ति प्रबंधन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इन व्यवस्थाओं को ग्रामीण पेयजल सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए उपयोगी बताते हुए इनके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की।

बैठक में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच संस्थागत ढांचे, वित्तीय स्वायत्तता, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल गवर्नेंस तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उड़ीसा के पेयजल मंत्री नायक ने कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम ने जिस पेशेवर एवं परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली को विकसित किया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल है। अध्ययन भ्रमण के माध्यम से प्राप्त अनुभव उड़ीसा में ग्रामीण जल प्रदाय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उड़ीसा के प्रतिनिधिमंडल में पंचायती राज एवं पेयजल विभाग के आयुक्त-सह-सचिव गिरिश एस.एन., पेयजल एवं स्वच्छता निदेशक विनीत भारद्वाज, अतिरिक्त सचिव श्रीमती मधुस्मिता सामल, इंजीनियर-इन-चीफ रत्नाकर सियाल सहित विभाग एवं स्टेट पीएमयू के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक में मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की।

 

जल से ही प्रकृति का उद्भव और जीवन का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

जल गंगा संवर्धन अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल से ही प्रकृति का उद्भव और जीवन का विकास है। सबसे पहले पृथ्वी पर जलचर आए। जल से ही जीवन है। जल तत्व में सभी तत्व समाहित हैं। हम जब जल संरचनाओं को देखते हैं तो हमारा मन आनंद से भर जाता है। जल से स्नान के बाद हमें ताज़गी मिलती है। हमारे पूर्वजों ने जल के महत्व को समझा और निरंतर जल संरचनाओं का निर्माण किया। आज हमारा दायित्व है कि हम उन सब का संरक्षण करें एवं उन्हें सहेजें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन का अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में भी गत 3 वर्षों से यह अभियान वृहद रूप से जन सहयोग से चलाया जा रहा है और बड़ी संख्या में जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनरुद्धार किया गया है। आज यहां जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन कार्यक्रम है, परंतु मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल अलनीनो के प्रभाव से कम वर्षा का अनुमान है, इसलिये प्रदेश में अमृत सरोवर रैन वॉटर हार्वेस्टिंग, नदी संरक्षण जैसे जल स्रोतों के संरक्षण कार्य निरंतर जारी रहेंगे। गत 19 मार्च से लगभग 100 दिन प्रदेश में चले जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत प्रदेश में जल संवर्धन के 10 हज़ार 514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हज़ार कार्य कराए गए। इन कार्यों में भरपूर जन समर्थन एवं जन सहयोग मिला है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को राजगढ़ जिले के भैंसवा माता क्षेत्र में प्रदेश में चले जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 252 करोड़ 65 लाख रुपए के 31 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। उन्होंने भैंसवा माता क्षेत्र के विकास के लिए 20 करोड़ रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में पंच तत्वों, विशेष रूप से जल का विशेष महत्व है। हमारे यहां हर पवित्र कार्य जल के साथ ही होता है। प्रसिद्ध कवि रहीम ने भी पानी की महत्ता बताई। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राजगढ़ जिले में बहुत अच्छा कार्य हुआ है। इस कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में चिन्हित छह सर्वश्रेष्ठ जिलों में राजगढ़ जिले का भी नाम शामिल है। इसके लिए उन्होंने सभी संबंधितों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि का आधार सिंचाई की सुविधा है। गत 20 वर्षों में हमारी सरकारों में प्रदेश में सिंचाई के रकबे में तेजी से वृद्धि हुई है। हर खेत तक पानी पहुंचाना हमारा संकल्प है और हम उसे पूरा कर रहे हैं। हमारी सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम भी दिलवाया जा रहा है। हमारी सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रुपए कर दिया है। किसानों को किसान सम्मन निधि दी जाती है। हमारी सवा करोड़ बहनों को लाडली बहना योजना का लाभ दिया जा रहा है। बच्चों को उनकी शिक्षा के लिए हर संभव सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय बनाए जा रहे हैं, जो उत्कृष्ट शिक्षा के केंद्र हैं। ये विद्यालय हमें सांदीपनि ऋषि, भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की याद दिलाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता एवं प्रेम को आज पूरी दुनिया याद करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि विश्व का सबसे बड़ा मेला, हमारी सनातन संस्कृति का प्रतिबिंब, सिंहस्थ उज्जैन मध्यप्रदेश में आयोजित होता है। इसे भव्य, दिव्य बनाने और श्रद्धालुओं के स्नान आदि की सुविधाओं के लिए उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के स्वच्छ एवं पावन जल में सहजता एवं सुविधापूर्वक, बिना किसी परेशानी के स्नान एवं उज्जैन तीर्थ के दर्शन हो सकें।

पानी की प्रत्येक बूंद का संरक्षण कर भावी पीढ़ी का भविष्य करें सुरक्षित : मंत्री पटेल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक हुए सभी कार्य प्रामाणिकता के साथ हुए है। इस साल बारिश के मौसम में कम वर्षा का अनुमान है इसलिए जल संचयन और जल स्त्रोतों का संरक्षण निरंतर जारी रखना आवश्यक है। हम सभी को पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है। राज्य सरकार और सभी अधिकारी-कर्मचारी जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्री पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन को मां भैंसवा के पवित्र स्थल पर रखने के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण के लिए किए भगीरथी प्रयास : राज्यमंत्री डॉ.टेटवाल

तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाएं को बढ़ाने के लिए भागीरथी प्रयास किए हैं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। जल संरक्षण के इस अभियान में पंचायतों को जोड़कर जनभागीदारी से कुएं, बावड़ी, तालाब, नदियों की सफाई और प्राचीन जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया है। राज्यमंत्री टेटवाल ने सांदीपनि विद्यालय, पीकेसी परियोजना से पानी, भैंसवा माता लोक निर्माण सहित अनेक निर्माण कार्यों की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

सांसद रोमल नागर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में विरासत से विकास की यात्रा अनवरत जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर भगवान बाबा महाकाल और मां बिजासन की विशेष कृपा है। सारंगपुर में 251 करोड़ रूपए की लागत से भैंसवा माता धार्मिक स्थल शेत्र का विकास किया जा रहा हैl रोजगार के स्थानीय साधन उपलब्ध कराते हुए यहां बहनों को कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। साथ ही संस्कृत वैदिक पाठशाला, गोशाला, योग केंद्र और सामुदायिक भवन तैयार करने के कार्य किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के यह प्रयास समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजगढ़ जिले के सारंगपुर विकासखण्ड में प्रसिद्ध भैंसवा माता मंदिर में दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने दूधतलाई पर पहुंचकर पवित्र गंगा-पूजन किया। पर्यावरण संरक्षण और जीव-दया के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पशुओं को चारा खिलाया और गौ-पूजन भी किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बेलपत्र का पौध-रोपण किया और नागरिकों को हरित पर्यावरण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2.0’ की विकास प्रदर्शनी का गहन अवलोकन किया और जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारंपरिक रूप से ‘कन्या पाद पूजन’ और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत राजगढ़ जिले में हुए विभिन्न विकास कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया। साथ ही राजगढ़ की स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को वैश्विक पटल पर लाने के उद्देश्य से जिला पुरातत्व एवं राजगढ़ पर्यटन पर केंद्रित एक विशेष प्रमोशनल फिल्म, आकर्षक कॉफी टेबल बुक तथा आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स का अनावरण भी किया।  

जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को 21 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की राशि के हितलाभ वितरित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत मंच से हितग्राहियों को 21 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की राशि के लाभ और वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए। इसके तहत मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 405 समूहों को कुल 20 करोड़ रुपये का बैंक ऋण वितरित किया गया, जिसमें श्रीमती कृष्णा भिलाला, श्रीमती रानी भिलाला और श्रीमती माया वर्मा प्रमुख रूप से लाभान्वित हुईं। पशुपालन विभाग की डॉ.भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत हितग्राही मंगलेश पाटीदार को 36 लाख रुपये और श्रीमती विमल यादव को 35.70 लाख रुपये की राशि के हितलाभ सौंपे गए। इसी तरह, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत कार्तिक माहेश्वरी (पार्वती एंटरप्राइजेस) को 22.50 लाख रुपये और राहुल परमार (अयोध्या ऑयल मिल) को 27.37 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत किराना व्यवसाय के लिए मनीष कुमार गुप्ता को 10 लाख रुपये और डेयरी प्रोडक्ट के लिए हितेष शर्मा को 5 लाख रुपये के चेक प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मनोज पाटीदार और बलराम को मिनी स्प्रिंकलर सेट के लिए प्रत्येक को 79 हजार 545 रुपये का अनुदान दिया गया, जबकि पी।एम। स्वनिधि योजना, नगरीय आवास विकास और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रियंका जाटव, मांगी बाई, पूजा साहू सहित अन्य हितग्राहियों को 50 हजार रुपये के चेक और गृह प्रवेश के आवंटन पत्र वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा सारंगपुर क्षेत्र के विकास के लिए की गई प्रमुख घोषणाएं

1. सारंगपुर नगर के अंदर जीर्ण-शीर्ण पड़े शासकीय भवनों एवं आवासों का रेडेंसिफिकेशन योजना अंतर्गत पुनर्निर्माण किया जाएगा।

2. शासन संधारित अंबे माता मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

3. नवीन स्वीकृत फोर लेन में हाउसिंग बोर्ड द्वारा आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी।

4. पचोर और सारंगपुर क्षेत्र में विकास के लिए सड़को का निर्माण किया जाएगा।

5. सारंगपुर-संडावता मार्ग पर उतावली नदी पर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा।

6. करौंदी से हीरापुरा तक 2 किमी सड़क के निर्माण सहित आवश्यक अन्य सभी मार्गों का निर्माण किया जाएगा।

7. भैंसवा माता लोक के विकास, निर्माण और सौंदर्गीकरण के लिए 20 करोड़ रूपये।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, विधायक नरसिंहगढ़ मोहन शर्मा, विधायक राजगढ़ अमर सिंह यादव, विधायक खिलचीपुर, हजारीलाल दांगी, ज्ञानसिंह गुर्जर, भोपाल संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा सहित जन प्रतिनिधिगण व बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

 

 

आने वाली पीढ़ियां गुनगुनाएंगी जन परिषद के गीत : दीपक वोहरा

भोपाल 

जन परिषद के 37वें वार्षिक एवं सम्मान समारोह का आयोजन रवीन्द्र भवन, भोपाल में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में भारत के पूर्व राजदूत एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अग्रणी ज्ञातादीपक वोहरा,  डीजीपी ** कैलाश मकवाना, एसीएस ** अनुपम राजन तथा एयर मार्शलप्रमोद वास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।समारोह एल आई सी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया ।

अपने प्रेरक उद्बोधन में पूर्व राजदूतदीपक वोहरा ने कहा कि जन परिषद की 37 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसके सेवा कार्यों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित पहचान को देखते हुए यह विश्वासपूर्वक कहा जा सकता है कि आने वाली पीढ़ियां जन परिषद के रचनात्मक गीतों को गुनगुनाएंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्व अनेक चुनौतियों और अस्थिरताओं के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में जन परिषद जैसी संस्थाएं समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रही हैं।

 वोहरा ने कहा कि वे इन दिनों अत्यंत व्यस्त थे और भोपाल आने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन जब उन्होंने जन परिषद के इतिहास, उपलब्धियों और कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा भोपाल के अपने मित्रों से संस्था के संबंध में चर्चा की, तो सभी ने जन परिषद की इतनी प्रशंसा की कि वे स्वयं को इस कार्यक्रम में आने से रोक नहीं सके। उन्होंने जन परिषद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्था के लिए 37 वर्षों तक निरंतर सक्रिय और प्रभावी बने रहना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।दीपक वोहरा जी ने आचार्य चाणक्य के छह सूत्रों को सरल एवं प्रेरक ढंग से प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की ओर नहीं देख रहा है, बल्कि पूरा विश्व आशा और विश्वास की दृष्टि से भारत की ओर देख रहा है।

उन्होंने उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे इन सूत्रों को अपने घरों तक पहुँचाएँ और अपने बच्चों को भी इनके बारे में अवश्य बताएं, ताकि उनमें संस्कार, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित हो।
उन्होंने बताया कि जन परिषद ने देशभर में 300 से अधिक इकाइयों एवं सहयोगी संगठनों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यदि देश में जन परिषद जैसी सैकड़ों संस्थाएं और विकसित हो जाएं, तो राष्ट्र के सामाजिक और रचनात्मक वातावरण में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने जन परिषद को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
एसीएसअनुपम राजन ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज के विकास में जनभागीदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जन परिषद ने विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो प्रयास किया है, वह अनुकरणीय है।
एयर मार्शलप्रमोद वास्तव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और समर्पण अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में जन परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीपीएन.के. त्रिपाठी ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था की 37 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जन परिषद समाज, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम का वार्षिक प्रतिवेदन महेंद्र जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें संस्था की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों, सामाजिक अभियानों, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरण तथा सेवा परियोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संयोजकरामजी वास्तव ने किया तथा अंत मेंअजय वास्तव (नीलू जी) ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में जन परिषद के पदाधिकारी, सदस्यगण, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, पत्रकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

विभिन्न सम्मानों से सम्मानित विभूतियां

समारोह में एंबेसडर ऑफ एक्सीलेंस सम्मान से पूर्व राजदूतदीपक वोहरा (नई दिल्ली) को सम्मानित किया गया। एक्सीलेंट गार्जियन ऑफ द हार्ट सम्मान से डॉ. सुब्रतो मंडल को सम्मानित किया गया।
कवि प्रदीप चौबे सम्मानप्रेमचंद द्वितीय (बड़नगर) को, सांसद विजय खंडेलवाल सम्मानमनोज तिवारी (गढ़ाकोटा) को तथा ललित

वास्तव सम्मानमोहन परिहार को प्रदान किया गया।

कुलभूषण दल्लौरी सम्मान सेललित अग्रवाल (इंदौर),अमित शर्मा एवंआशीष वास्तव को सम्मानित किया गया।
राजकमल वास्तव सम्मान डॉ. रूबी खान को प्रदान किया गया।

मां प्रभादेवी सम्मान सेउरज मिश्रा, मती शिल्पी अभिषेक भार्गव (गढ़ाकोटा),अतुल बनारसी,अंशुमन खरे, डॉ. प्रगति सेठ (झांसी)तथामोहन अग्रवाल को सम्मानित किया गया।

लक्ष्मी रायकवार सम्मानकमल सिंह को, डॉ. मंगल प्रसाद अग्रवाल सम्मानभरत तिवारी (सागर) को तथा प्रकाश प्रलय सम्मानगौरीशंकर धाकड़ (बरेली) को प्रदान किया गया।
पत्रकार के.के. अग्निहोत्री सम्मान सेधर्मेंद्र सिंह (भोपाल) एवंओमप्रकाश चौरसिया (गंजबासोदा) को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बेस्ट चैप्टर सम्मान आष्टा, छिंदवाड़ा, सागर एवं मुलताई चैप्टर्स को प्रदान किया गया।
वहीं एक्टिव मेंबर्स ऑफ द ईयर के रूप मेंविनोद वास्तव,दुर्गेश रैकवार,नितिन वास्तव,संदीप गोलू तथारामेश्वर को सम्मानित किया गया।

 

नमामि गंगे मिशन अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिये क्षमता वर्धन कार्यशाला

नमामि गंगे मिशन अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिये क्षमता वर्धन कार्यशाला

प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए : राज्यमंत्री बागरी

भोपाल

राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी के मुख्य आतिथ्य में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत बेतवा नदी के वैज्ञानिक एवं समग्र पुनर्जीवन के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने संबंधी दो दिवसीय क्षमता वर्धन कार्यशाला का शुभारंभ भोपाल में किया गया।

राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि भारत में नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का केंद्र हैं। आमजन नदियों के जल को सर्वाधिक शुद्ध एवं पवित्र मानते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में डीपीआर तैयार करने संबंधी दिया जाने वाला प्रशिक्षण व्यावहारिक, सार्थक एवं प्रभावी होना चाहिए, जिससे भविष्य में तैयार होने वाली परियोजनाएँ नदी संरक्षण के उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।

राज्यमंत्री श्रीमती बागरी ने कहा कि डीपीआर तैयार करते समय प्राकृतिक स्रोतों की उपयोगिता तथा उनके संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति की पूजा का मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण है, क्योंकि नदियों और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। वृक्ष प्राकृतिक रूप से नदियों को स्वच्छ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बरसाती नालों की नियमित सफाई पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे नदियों को प्रदूषण से बचाने में प्रभावी सहायता मिलती है। उन्होंने बहुउद्देशीय कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के कार्यकारी निदेशक बृजेन्द्र स्वरूप ने कहा कि नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत गंगा की सहायक नदियों, विशेष रूप से बेतवा नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप नमामि गंगे मिशन कार्य कर रहा है। उन्होंने मिशन के पाँच प्रमुख स्तंभों— अविरल गंगा, निर्मल गंगा, जन गंगा, ज्ञान गंगा और अर्थ गंगा—की जानकारी देते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डाला।

नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे ने सभी आमंत्रित विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह दो दिवसीय कार्यशाला बेतवा नदी के पुनर्जीवन के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी।

कार्यक्रम में नमामि गंगे मिशन के निदेशक धीरज जोशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय पर्यावरण विशेषज्ञ सीताराम टैगोर ने किया।

 

डिफॉल्टरों को दोबारा लीज देने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

ग्वालियर 
मध्य प्रदेश में खनिज
विभाग के अफसरों और खनन माफिया की सांठगांठ से चल रहे घोटाले को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से सीधे पूछा।

जब अवैध खनन करने वालों पर करोड़ों रुपए की पेनल्टी बकाया है, तो उनसे अभी तक वसूली क्यों नहीं की गई? सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले इन डिफॉल्टरों को वापस खनन लीज किस आधार पर दे दी गई?

यह तल्ख सवाल जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता अकरम खान द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किए हैं।

मामले में राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी है। अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी।

साल 2017 से कुंडली मारकर बैठे हैं रसूखदार
याचिका में बताया है कि जिले के खनन माफिया पर 305 करोड़ 97 लाख रुपए की भारी-भरकम जुर्माना राशि बकाया है।

यह वसूली साल 2017 से लंबित है, लेकिन खनिज विभाग इसे वसूलने में पूरी तरह नाकाम रहा। नियमानुसार जुर्माना न चुकाने पर खदान संचालकों को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर उनका खनन तुरंत रोका जाना चाहिए था। लेकिन, रसूखदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रसूखदारों को तोहफे में मिली नई लीज
याचिका में यह भी बताया कि हद तो यह हो गई कि पुराने करोड़ों रुपए दबाकर बैठे खनन माफियाओं की खदानें न सिर्फ रिन्यू (नवीनीकरण) कर दी गईं, बल्कि उन्हें नई जगहों पर खनन करने के लिए नई लीजें भी आवंटित कर दी गईं हैं। मतलब उनके पेनल्टी न चुकाने को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।

बिलौआ-बेरजा में 100 फीट तक खोद दी जमीन
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि ग्वालियर जिले के बिलौआ और बेरजा क्षेत्र में काले पत्थर (क्रशर गिट्टी) का सबसे बड़ा कारोबार है। यहां नियमों को ताक पर रखकर ऐसा अंधाधुंध अवैध खनन किया गया है जिसने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। बिलौआ में अवैध खनन करने वालों ने जमीन को 25 से 30 मीटर (करीब 100 फीट) गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया है।

माफिया की जेब में गया राजस्व
खनिज विभाग ने जब पूर्व में इनकी जांच की थी, तो बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन पाया गया था। माफिया यहां से कई हजार घनमीटर कीमती काला पत्थर निकालकर बाजार में बेच चुके हैं। जो करोड़ों रुपए सरकारी खजाने में आने चाहिए थे, वे सीधे माफिया की जेब में चले गए।

 

MP में 10 साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया तेज, आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी; सामान्य वर्ग ने जताई आपत्ति

भोपाल
 प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है। इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है, लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंगे, लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते हैं।

यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित (सामान्य) वर्ग नुकसान में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे हैं। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे हैं, जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है।

पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुड़े अधिकारियों के साथ सोमवार को मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे, यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति हो सकेगी।

यदि किसी संवर्ग में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा। वहीं, अनारक्षित श्रेणी में जितने भी पद आएंगे, उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अवसर मिलेगा, क्योंकि अनारक्षित का मतलब सभी वर्गों से लिया गया है। इसे मेरिट से भी जोड़ा गया है।

इसके मायने यह हुए कि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली ए प्लस प्लस रहती है और दूसरा कोई नहीं रहता है तो वह ऊपर आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के लिए तैयारी करके रख लें। वरिष्ठता सूची भी देख लें।

उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नति की तैयारी करने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसका आधार हाई कोर्ट द्वारा नियम पर किसी प्रकार का स्थगन न देने को बनाया गया है। वहीं, निर्णय सुरक्षित रखा गया है लेकिन अब संभावना यही है कि पहले बेंच गठित होगी और अंतिम सुनवाई करके निर्णय सुनाया जाएगा।

दो साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी।

दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी होंगे लाभान्वित
भले ही दस साल बाद पदोन्नति का अवसर बन रहा हो, मगर दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रतिनियुक्ति के पद भी पदोन्नति की श्रेणी में आएंगे। किसी के लिए कोई पद रोककर नहीं रखा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट कर दी गई है कि पदोन्नति 2025 के नियम लागू होने के बाद से दी जाएगी।

 

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