साइबर अपराधों के विरुद्ध 15 दिवसीय “Safe Click 2.0” वृहद जनजागरूकता अभियान चलेगा

भोपाल 

प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम तथा नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 दिवसीय प्रदेशव्यापी साइबर वृहद जन-जागरूकता अभियान 24 जून से 8 जुलाई तक “Safe Click 2.0” नाम से प्रारंभ किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक साइबर अपराधों से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाना है।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्‍यम से समस्‍त जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि इस अभियान को अधिक व्यापक, प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित स्वरूप में संचालित किया जाए।

डीजीपी ने कहा कि फरवरी 2025 में संचालित साइबर जागरूकता प्रयासों में सभी इकाइयों द्वारा सराहनीय कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों की घटनाओं में कमी देखने को मिली।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए जनता को निरंतर जागरूक करना आवश्यक है तथा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मिलकर इस अभियान को सफल बनाना होगा।

अभियान के दौरान प्रदेशभर में विभिन्न स्तरों पर व्यापक जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें संस्थागत गतिविधियों के अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, शासकीय कार्यालयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य संस्थानों में साइबर सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सामुदायिक जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ग्राम पंचायतों, नगरीय क्षेत्रों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों को साइबर अपराधों के नए तौर-तरीकों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी।

अभियान के अंतर्गत जागरूकता वाहन के माध्यम से जनसंदेश प्रसारित किए जाएंगे, साइबर सुरक्षा मेले आयोजित होंगे तथा युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए “स्कैम हैकथॉन” जैसे नवाचार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति प्रतिबद्ध करने हेतु साइबर सुरक्षा शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही “मानव क्यूआर कोड” जैसी अभिनव गतिविधियों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संदेशों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। अभियान अवधि में साइबर जागरूकता श्रृंखला के तहत विभिन्न विषयों पर नियमित जनसंपर्क एवं संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि, साइबर ठगी अथवा फर्जी संदेश की सूचना तत्काल पुलिस एवं साइबर हेल्पलाइन को दें तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाकर साइबर सुरक्षित मध्यप्रदेश के निर्माण में सहभागी बनें।

 

कृषक कल्याण वर्ष में अन्नदाताओं के सम्मान और सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट कर किसान कल्याण के निर्णयों के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों के कल्याण के कार्य निरंतर होंगे। अन्नदाता को सम्मान के साथ उन्हें अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से प्रतिनिधि मंडल ने गेहूं खरीदी में मध्यप्रदेश की उपलब्धि के लिए हर्ष व्यक्त करते हुए किसानों के लिए की गई बेहतर व्यवस्था के लिए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश ने समर्थन मूल्य पर 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मे.टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। किसान संख्या की दृष्टि से मध्यप्रदेश भारत में प्रथम है। उपार्जन की दृष्टि से पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर रहा है। प्रदेश में 9अप्रैल से 28 मई की अवधि में उपार्जन किया गया। समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल के साथ ही 40रुपए बोनस राशि मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2625 रुपए प्रति क्विंटल के भुगतान की व्यवस्था करवाई गई। किसानों को 27 हजार 196.48 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान प्रदेश में किया जा चुका है।

किसानों ने ऋण अदायगी के लिए 31 मार्च की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मई किए जाने और विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा देने का प्रावधान करने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने कहा कि राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में लिए गए निर्णय प्रशंसनीय हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट कर किसानों ने कृषक हित से संबंधित कुछ सुझाव भी दिए। इनमें मूंग खरीद व्यवस्था और मूंग-उड़द के लिए पंजीयन की प्रक्रिया पूर्ण करवाने, नहरों को तालाबों से जोड़ने के सुझाव शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में  कमल सिंह आंजना,  चंद्रकांत गौर के साथ  सर्वज्ञ दीवान,  लक्ष्मी नारायण पटेल,  प्रह्लाद पटेल आदि शामिल थे।

 

नीट (UG) परीक्षा-2026 की सुरक्षा एवं निष्पक्ष संचालन को लेकर तैयारियों की व्यापक समीक्षा

भोपाल

प्रदेश में 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) के सुरक्षित, पारदर्शी एवं निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। बैठक में परीक्षा से संबंधित संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था, अंतर-विभागीय समन्वय, साइबर निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा तथा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा प्रश्नपत्रों के प्राप्त होने से लेकर उनके सुरक्षित भंडारण, परीक्षा केंद्रों तक परिवहन, परीक्षा संपन्न होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं एवं सामग्री की सुरक्षित वापसी तक संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्णतः सुरक्षित एवं त्रुटिरहित बनाए रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा में चूक की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी जिलों में पुलिस, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA), शिक्षा विभाग, बैंकिंग संस्थाओं तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी पुलिस अधीक्षक 20 जून तक परीक्षा केंद्रों, प्रश्नपत्र भंडारण स्थलों एवं संबंधित बैंकों का स्वयं निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण करें। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD), सुरक्षा बलों की तैनाती तथा अभ्यर्थियों की प्रवेश व्यवस्था का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।

डीजीपी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से अपने जिले के प्रत्येक परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करें तथा प्रश्न-पत्रों के परिवहन, स्ट्रांग रूम, गोपनीय सामग्री की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समुचित समीक्षा कर सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करें।

उन्‍होनें कहा कि साइबर माध्यमों से होने वाली किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नजर रखने के लिए प्रदेश के 38 साइबर कमांडो सक्रिय रहेंगे। उन्होंने पेपर लीक, अफवाहों एवं अनुचित साधनों के उपयोग को रोकने के लिए साइबर निगरानी को और सुदृढ़ करने, सोशल मीडिया गतिविधियों पर सतत नजर रखने तथा पूर्व में परीक्षा संबंधी अपराधों में संलिप्त रहे व्यक्तियों एवं संदिग्ध तत्वों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए। डीजीपी ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी अधिकारी पूर्ण संवेदनशीलता, समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रामक सूचना, पेपर लीक संबंधी दुष्प्रचार अथवा अनुचित गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई की जाए। उन्होंने “पेपर लीक के प्रति शून्य सहिष्णुता” (Zero Tolerance) की नीति अपनाने के निर्देश दिए।

पुलिस महानिदेशक ने बैठक में यह भी निर्देश दिए कि परीक्षा अवधि के दौरान होटल, लॉज, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों की आवश्यक जांच की जाए। जिला स्तरीय समन्वय समितियां लगातार सक्रिय रहें तथा अंतिम 72 घंटों के दौरान विशेष सतर्कता बरती जाए। परीक्षा समाप्ति के बाद प्रश्नपत्रों एवं अन्य गोपनीय सामग्री की सुरक्षित वापसी प्रक्रिया को भी उतनी ही गंभीरता से संचालित किया जाए जितनी गंभीरता से परीक्षा पूर्व सुरक्षा व्यवस्था संचालित की जाती है।

बैठक में बताया गया कि मध्‍यप्रदेश में 283 परीक्षा केन्‍द्रों पर लगभग 1 लाख 18 हजार अभ्‍यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इंदौर, भोपाल, ग्‍वालियर एवं जबलपुर में सर्वाधिक परीक्षा केन्‍द्र बनाए गए हैं।

बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।

 

अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगा सकेंगे कलेक्टर, सरकार ने सीमित किए अधिकार

भोपाल 

प्रदेश में अवैध कालोनी के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री रोकने या उस पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है। सरकार का कहना है कि अवैध कालोनी में रजिस्ट्री रोकने का निर्णय कलेक्टर नहीं ले सकते। अवैध कालोनी अधिनियम में तय प्रावधानों के अनुसार उनका अधिकार केवल संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई करने तक ही सीमित है। 

बिना न्यायिक आदेश के लीगली वैध नहीं
आपको बता दें वित्त विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी, स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। उनका कहना है कि इन स्थितियों के बिना खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं माना जा सकता। 

कलेक्टरों को निर्देश 
आपको बता दें वाणिज्यिक कर विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि रजिस्ट्री के दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता । वह केवल पक्षकारों के बीच हुई लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र एक सार्वजनिक साक्ष्य होता है। 

संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर जारी 
इस संबंध में ​सरकार के वित्त विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लेटर लिख कर जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन की जानकारी मांगी गई है। जिसके आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है।

रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारी और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। इन स्थितियों के बगैर खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश लीगली वैध नहीं है।

वाणिज्यिक कर विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं बल्कि पक्षकारों के बीच लिखा पढ़ी के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है।

सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर अवैध कालोनाइजेशन के आधार पर कुछ भूमि की खरीदी बिक्री पर रोक लगाने के साथ उनसे संबंधित दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रशासकीय रूप से या तो अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगाया गया है या अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति पत्र की जानकारी मांगी जा रही है।

प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर विभाग अमित राठौर ने यह पत्र जारी कर कहा है कि ऐसे आदेश या निर्देश के अवलोकन से यह भी साफ हुआ है कि इनमें से अधिकांश में प्रतिबंध के आधार स्वरूप किसी वैधानिक प्रा‌वधान का उल्लेख नहीं रहता है तथा जिन मामले में अधिनियम या नियम का उल्लेख किया भी जाता है तो उनमें रजिस्ट्री पर रोक संबंधी कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं होता है।

कई प्रकरणों में पंजीयन अधिकारी पर पंजीयन से पहले वैध कालोनी के संबंध में जांच का भार भी डाला गया है, यह नियम विरुद्ध है।

रजिस्ट्री से पहले पहचान और सहमति की पुष्टि अनिवार्य
प्रमुख सचिव  के अनुसार संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर कानून में स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी को दस्तावेज के पंजीयन से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान का सत्यापन करना होता है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति उसकी रजिस्ट्री के लिए अपनी सहमति दे रहा है।

उन्होंने कहा कि पंजीयन के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के साथ आवश्यक अभिलेखों की सूची और उनकी प्रक्रिया मध्यप्रदेश पंजीयन नियम, 1939 में निर्धारित की गई है। इन नियमों के तहत जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, केवल उन्हीं मामलों में पंजीयन अधिकारी रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकता है।

प्रमुख सचिव के अनुसार, नियमों में निर्धारित कारणों के अलावा किसी अन्य आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को अस्वीकार करने का अधिकार पंजीयन अधिकारी को प्राप्त नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही निर्णय लेना होगा।

विभाग की जांच में यह तथ्य आए सामने
विभाग द्वारा किए गए परीक्षण के बाद यह स्थिति पाई गई है।

    खरीदी-बिक्री और प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर रोक के अलावा संबंधित प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पर भी सीधे तौर पर रोक लगी है।

    रजिस्ट्री पर रोक का स्पष्ट उल्लेख न करते हुए सब रजिस्ट्रार या जिला रजिस्ट्रार को आदेश या निर्देश जारी किए गए हैं।

    रजिस्ट्री से पहले ऐसे निषेधात्मक आदेश या पत्र जारी करने वाले प्राधिकारी की अनुमति लेने की अपेक्षा की गई है।

    रजिस्ट्री से पूर्व वैध कालोनी के लिए सभी दस्तावेजों की नियमानुसार जांच की अपेक्षा सब रजिस्ट्रार से की गई है।

कालोनी विकास नियम भी स्पष्ट नहीं होते
प्रमुख सचिव ने कहा है कि कई पत्रों में मध्यप्रदेश
नगरपालिका कालोनी विकास नियम 2021 के नियम का उल्लेख कर रजिस्ट्री पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की शर्त लगाई गई है। यह नियम तय तारीख के पूर्व अस्तित्व में आई अनधिकृत कालोनी के परिप्रेक्ष्य में है। इसलिए रजिस्ट्री पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते।

रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करना जरूरी

प्रमुख सचिव राठौर ने कहा है कि पंजीयन अधिनियम 1908 के अंतर्गत रजिस्टर्ड होने वाले दस्तावेजों के संबंध में स्थिति स्पष्ट है। इस अधिनियम को लेकर काम करने वाले पंजीयन अधिकारी के लिए पंजीयन पूर्व जांच में प्रावधान अधिनियम में व्यवस्था है।

इसके अनुसार पंजीयन अधिकारी को रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान तथा रजिस्ट्री की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। पंजीयन के लिए पेश किए जाने वाले दस्तावेज के साथ नियमानुसार अपेक्षित दस्तावजों के संबंध में मध्यप्रदेश पंजीयन नियम 1939 के नियम में प्रावधान किए गए हैं। पंजीयन नियम में बताई गई परिस्थितियों में पंजीयन अधिकारी दस्तावेज की रजिस्ट्री इनकार करने में सक्षम है। इसके अलावा अन्य किसी भी आधार पर दस्तावेज के पंजीयन से इनकार करने में पंजीयन अधिकारी वैधानिक रूप से सक्षम नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अवैध माना है
सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश को अलग-अलग निर्णय में अवैध माना है। इन तथ्यों के आधार पर प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर ने कहा है कि अवैधानिक रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर नगरीय आवास और विकास विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अधिनियमों, नियमों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1956, मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 या अन्य किसी अधिनियम के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी या सक्षम न्यायालय द्वारा संपत्ति विशेष का स्पष्ट ब्यौरा देते हुए न्यायिक और अर्द्ध न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही आदेश जारी कर सकता है।

इस तरह की प्रॉपर्टी के ट्रांसफर, बिक्री पर रोक लगाए जाने की स्थिति में ऐसे आदेशों का नियमानुसार पालन किए जाने की भी आवश्यकता व्यक्त की है।

प्रतिबंध लगाया जाना लीगली वैध नहीं, प्रतिबंध खत्म करें
राठौर ने कहा है कि जहां तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो दस्तावेज का पंजीयन स्वत्व का प्रमाण नहीं होकर पक्षकारों के बीच संव्यवहार के संबंध में मात्र सार्वजनिक साक्ष्य बनाता है। इसलिए दस्तावेजों की रजिस्ट्री पर बिना सक्षम अधिकारता और स्पष्ट न्यायिक और अर्द्धन्यायिक आदेश के बिना प्रकरण के अधीन प्रतिबंध लगाया जाना या खरीदी बिक्री पर रोक संबंधी आदेश, निर्देश के पंजीयन अधिकारियों से पालन करना लीगली वैध नहीं है।

राठौर ने कहा कि दस्तावेजों के पंजीयन पर कोई विधि विरुद्ध प्रतिबंध नहीं लगाए गए। अगर इस तरह के प्रतिबंध प्रभावशील हैं तो उन्हें तत्काल समाप्त किया जाए। कुछ प्राधिकारियों द्वारा सामान्य पत्राचार या बिना सक्षम प्राधिकारिता के अवैधानिक रूप से दस्तावेज की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है तो न्यायसंगत नहीं है।

ऐसे निर्देश या आदेश निष्फल मान्य किए जाएं। यह भी कहा गया है कि ये निर्देश नगरीय आवास और विकास ‌विभाग तथा पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की सहमति से जारी किए जा रहे हैं।

एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले, इंदौर मेट्रो समेत कई परियोजनाओं पर ₹24,200 करोड़ खर्च को मंजूरी

 भोपाल

भोपाल के बाद सरकार ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की लागत में वृद्धि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। अब इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की कुल लागत 19,472 करोड़ रुपये होगी। इसमें 6,582 करोड़ रुपये की ऋण राशि भी शामिल है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति दी गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने बताया कि मेट्रो रेल परियोजना की लागत में भूमिगत लाइन सहित अन्य कारण से वृद्धि हुई है। इसकी मूल लागत 7,500 करोड़ रुपये थी, जिसमें 5,388 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889 करोड़ रुपये होगी। इसके अतिरिक्त परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6,582 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

प्रोजेक्ट टाइगर, एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ की स्वीकृति

बैठक में प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलीफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा संबंधी योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक चलाने की स्वीकृति दी गई। इस अवधि में 2,381 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इससे प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्रोतों का विकास, वन मार्गों का रखरखाव, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण, दवाई क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था के काम होंगे। संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती और रातापानी टाइगर रिजर्व के साथ ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों का पुनर्वास किया जाएगा।
श्रमिक कल्याण, शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना रहेगी निरंतर

बैठक में श्रमिक कल्याण, जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक सुविधाओं और रेशम उत्पादन तथा 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखी जाने वाली योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण, बाल श्रमिक सर्वेक्षण, बंधक मजदूरों का पुनर्वास, असंगठित शहरी व ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं।

 

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व हुआ “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में प्रतिष्ठित पुरस्कार से पुरस्कृत

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश के गौरव एवं विश्व प्रसिद्ध वन्यजीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को “इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्स-2026” में “Editor’s Choice Award – Best Wildlife Destination” श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को वन्यजीव संरक्षण, उत्कृष्ट पर्यटन प्रबंधन, पर्यटकों को उच्च स्तरीय अनुभव प्रदान करने तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  गजेंद्र सिंह शेखावत एवं मुख्यमंत्री गोवा, डॉ. प्रमोद सावंत द्वारा गोवा में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की ओर से फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय, बाँधवगढ़ टाइगर रिज़र्व तथा अपर मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव  एल. कृष्णमूर्ति ने प्राप्त किया।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य एवं प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। पुरस्कार बाँधवगढ़ में कार्यरत समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय समुदायों तथा संरक्षण सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

पुरस्कार न केवल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गौरव का क्षण है तथा राज्य की पहचान को देश के अग्रणी वन्यजीव पर्यटन गंतव्यों में और अधिक सुदृढ़ करता है। 

मोहर्रम, ताजिया जुलूस और राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण को लेकर सुरक्षा तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा

भोपाल 

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा की अध्‍यक्षता में पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक की वीडियों कॉफ्रेंस आयोजित की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने सभी जोनल पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि मोहर्रम, ताजिया जुलूसों, अन्य धार्मिक आयोजनों, महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित भ्रमण तथा वीआईपी कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा योजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि आगामी त्योहारों एवं आयोजनों के दौरान परंपरागत रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, जुलूस मार्गों, धार्मिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाए। शांति समितियों, धर्मगुरुओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर सामाजिक समरसता एवं आपसी सौहार्द का वातावरण बनाए रखा जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित होने वाली भ्रामक सूचनाओं, अफवाहों एवं आपत्तिजनक सामग्री पर सतत निगरानी रखी जाए तथा किसी भी प्रकार की भड़काऊ अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि के विरुद्ध त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में खुफिया तंत्र को सक्रिय रखते हुए संभावित चुनौतियों का समय रहते आकलन कर आवश्यक निवारक कदम उठाए जाएं।

डीजीपी ने कहा कि उपलब्ध पुलिस बल, दंगा नियंत्रण उपकरणों, वाहनों, संचार संसाधनों, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा कर उन्हें पूर्णतः सक्रिय एवं तैयार रखा जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं, वहां उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी स्थिति में महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों एवं पुलिस प्रतिष्ठानों की निगरानी व्यवस्था बाधित न होने पाए।

बैठक में महामहिम राष्ट्रपति के प्रस्तावित मध्यप्रदेश भ्रमण सहित अन्य वीआईपी एवं वीवीआईपी कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल, रूट सुरक्षा, एंटी-सबोटेज जांच, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण एवं समन्वित सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों एवं एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने पर बल दिया गया।

बैठक में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर, उप पुलिस महानिरीक्षक  तरूण नायक, पीएसओ टू डीजीपी डॉ. विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन, पुलिस अधीक्षक एटीएस  प्रणय नागवंशी, एवं एआईजी मती विनीता मालवीय उपस्थित रहे।

 

भोपाल में बिजली कटौती ने तोड़ा रिकॉर्ड, मई में 14,974 बार गुल हुई लाइट

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली कंपनी द्वारा साल भर चलाए जाने वाले ‘मेंटेनेंस’ के दावों की पोल खुल गई है। बिजली कटौती से बेहाल भोपालवासियों को इस साल मई के भीषण गर्मी वाले महीने में रिकॉर्ड तोड़ पावर कट का सामना करना पड़ा। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा एक्सेस की गई डिस्कॉम की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मई महीने में शहर में कुल 14,974 बार बिजली गुल हुई। इसका औसत निकाला जाए तो शहर में हर तीन मिनट में एक बार बिजली कटौती दर्ज की गई।

हर 6 मिनट में लंबी कटौती
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, कुल कटौतियों में से 6,896 बिजली कट ऐसे थे जो 5 मिनट से ज्यादा समय तक खिंचे। यानी करीब हर साढ़े छह मिनट में शहर के किसी न किसी हिस्से में लंबी बिजली कटौती हुई। हालांकि, मई 2025 (18,767 पावर कट) की तुलना में इस बार का आंकड़ा थोड़ा कम है, लेकिन पिछले साल मई में भारी बारिश और तूफान थे। इस साल बिना किसी बड़े मौसम बदलाव के इतनी बड़ी संख्या में ट्रिपिंग होना डिस्कॉम के मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इन इलाकों में सबसे बुरा हाल
फीडर-वार आंतरिक आंकड़ों से पता चला है कि भोपाल के नबी बाग फीडर में मई के दौरान सबसे ज्यादा 107 बार ट्रिपिंग हुई। इसके बाद मालीखेड़ी में 105 और विश्वकर्मा नगर में 97 बार बिजली गुल हुई। सीटीओ और आदमपुर फीडर में भी 95-95 बार ट्रिपिंग दर्ज की गई।

वीआईपी फीडर रहे पूरी तरह सुरक्षित
हैरानी की बात यह है कि जहां आम जनता वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और कटौती से जूझ रही थी, वहीं शहर के 514 फीडर में से 36 फीडर ऐसे थे जहां एक बार भी ट्रिपिंग नहीं हुई। इनमें राज्य सचिवालय (वल्लभ भवन), भोपाल कलेक्टरेट और कुछ प्रीमियम आवासीय इलाके शामिल हैं। दूसरी ओर, डिस्कॉम के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भोपाल की भौगोलिक स्थिति और हरियाली के कारण पेड़ की शाखाएं ओवरहेड लाइनों पर गिर जाती हैं, जिससे यह ट्रिपिंग होती है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लोकायुक्त के SPE विंग को RTI से बाहर रखने वाली अधिसूचना रद्द

भोपाल 
 सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस सरकारी अधिसूचना को रद कर दिया है, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून के अनुरूप नहीं है।

‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जांच करती है। ऐसे में इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले ‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता
अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से RTI कानून में निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर SPE को छूट देने का प्रयास किया था, जो विधिसम्मत नहीं है। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को बरकरार रखा है. दरअसल, इससे पहले राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें एसपीई को आरटीआई से बाहर रखना गलत माना गया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश लोकायुक्त की SPE ब्रांच से भी RTI द्वारा जानकारियां मांगी जा सकेंगी। 

मध्य प्रदेश सरकार का 2011 का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें लोकायुक्त की स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट (एसपीई) को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर किया गया था. मध्य प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2011 को ये अधिसूचना जारी की थी. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये अधिसूचना “कानून के हिसाब से गलत” है। 

कोर्ट ने आगे कहा, “हमारी राय है कि मध्य प्रदेश राज्य के GAD (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) का 25.08.2011 का नोटिफिकेशन, जिसमें SPE को 2005 के एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत उसके दायरे से बाहर करने की मांग की गई थी, कानून के हिसाब से गलत होने के कारण रद्द किया जा सकता है, क्योंकि इसमें उन मामलों के लिए भी प्रावधान है जो 1947 के एक्ट के सेक्शन 7 के तहत नहीं आते हैं। 

क्यों उठी लोकायुक्त SPE पर आरटीआई की मांग?
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा के मामले से हुई. कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के कटनी जिले के माधव नगर थाने के प्रभारी थे. 11 अप्रैल 2017 को उनपर भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर हुई. इसके बाद 2020 में अभियोजन की स्वीकृति मिली. इस दौरान कामता प्रसाद मिश्रा ने आरटीआई आवेदन दायर कर लोकायुक्त से जानकारियां मांगी, जिसे SPE ने खारिज कर दिया। 

हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
इसके बाद याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचे. 2021 में हाईकोर्ट ने SPE के आदेश को रद्द कर याचिकाकर्ता को मांगी गई जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिए, लेकिन एसपीई ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी. हालांकि, 15 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहरा दिया। 

समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है। विभाजन की रेखाएं समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवनकाल में यह महत्वपूर्ण कार्य किया। मध्यप्रदेश और पंजाब के रिश्ते प्रगाढ़ होंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी ने विभिन्न युक्तियों से समाजों, वर्गों और प्रदेशों को परस्पर जोड़ने के महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस क्रम में प्रधानमंत्री  मोदी ने पंचतीर्थ के विकास की पहल की। इसके फलस्वरूप आज भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े विभिन्न पावन स्थलों के समुचित विकास के लिए कार्य हो रहा है। श्रद्धालु नागरिक इन स्थानों की यात्रा के लिए उत्सुक हुए हैं। सामाजिक समरसता का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंभ प्रभार)  गौतम टेटवाल, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष  कैलाश जाटव, सदस्य  बारेलाल,  रामलाल, विधायक सु ऊषा ठाकुर के अलावा, सु नेहा बग्गा उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गत 14 मई से मोहाली (चंड़ीगढ़) से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत कर रहे थे। यह यात्रा आगामी 21 जून को दिल्ली में पूर्ण होगी। यात्रा के स्थानों में डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली डॉ. अंबडेकर नगर (महू), दीक्षा भूमि नागपुर, इंदु मिल मुंबई, निर्वाण स्थल दिल्ली शामिल हैं। यात्रा के संयोजक  एस.आर. लद्धड़ और सह-संयोजक  मनोज चंदल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की उन्नति आवश्यक है। सभी वर्गों का आपसी सद्भाव महत्वपूर्ण है। अनेक दल और व्यक्ति सिर्फ समाज को बांटने और महापुरूषों के अपमान का कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समानता के भाव को स्थापित किया जा रहा है। डॉ. अंबेडकर के योगदान का स्मरण ही नहीं किया जा रहा बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का कार्य भी किया जा रहा है।

आत्मीय स्वागत से प्रसन्न हुए तीर्थ यात्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंजाब से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा का मध्यप्रदेश में स्वागत करते हुए आगामी यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों को बाबा महाकाल की प्रतिमा भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री निवास पहुंचे तीर्थ यात्रियों ने मध्यप्रदेश में हुई आवभगत के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया और उनके साथ छायाचित्र भी खिंचवाए। कार्यक्रम का संचालन  राहुल कोठारी ने किया।

 

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