भोपाल में बिजली कटौती ने तोड़ा रिकॉर्ड, मई में 14,974 बार गुल हुई लाइट

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बिजली कंपनी द्वारा साल भर चलाए जाने वाले ‘मेंटेनेंस’ के दावों की पोल खुल गई है। बिजली कटौती से बेहाल भोपालवासियों को इस साल मई के भीषण गर्मी वाले महीने में रिकॉर्ड तोड़ पावर कट का सामना करना पड़ा। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा एक्सेस की गई डिस्कॉम की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मई महीने में शहर में कुल 14,974 बार बिजली गुल हुई। इसका औसत निकाला जाए तो शहर में हर तीन मिनट में एक बार बिजली कटौती दर्ज की गई।

हर 6 मिनट में लंबी कटौती
रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, कुल कटौतियों में से 6,896 बिजली कट ऐसे थे जो 5 मिनट से ज्यादा समय तक खिंचे। यानी करीब हर साढ़े छह मिनट में शहर के किसी न किसी हिस्से में लंबी बिजली कटौती हुई। हालांकि, मई 2025 (18,767 पावर कट) की तुलना में इस बार का आंकड़ा थोड़ा कम है, लेकिन पिछले साल मई में भारी बारिश और तूफान थे। इस साल बिना किसी बड़े मौसम बदलाव के इतनी बड़ी संख्या में ट्रिपिंग होना डिस्कॉम के मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इन इलाकों में सबसे बुरा हाल
फीडर-वार आंतरिक आंकड़ों से पता चला है कि भोपाल के नबी बाग फीडर में मई के दौरान सबसे ज्यादा 107 बार ट्रिपिंग हुई। इसके बाद मालीखेड़ी में 105 और विश्वकर्मा नगर में 97 बार बिजली गुल हुई। सीटीओ और आदमपुर फीडर में भी 95-95 बार ट्रिपिंग दर्ज की गई।

वीआईपी फीडर रहे पूरी तरह सुरक्षित
हैरानी की बात यह है कि जहां आम जनता वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और कटौती से जूझ रही थी, वहीं शहर के 514 फीडर में से 36 फीडर ऐसे थे जहां एक बार भी ट्रिपिंग नहीं हुई। इनमें राज्य सचिवालय (वल्लभ भवन), भोपाल कलेक्टरेट और कुछ प्रीमियम आवासीय इलाके शामिल हैं। दूसरी ओर, डिस्कॉम के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भोपाल की भौगोलिक स्थिति और हरियाली के कारण पेड़ की शाखाएं ओवरहेड लाइनों पर गिर जाती हैं, जिससे यह ट्रिपिंग होती है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, लोकायुक्त के SPE विंग को RTI से बाहर रखने वाली अधिसूचना रद्द

भोपाल 
 सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस सरकारी अधिसूचना को रद कर दिया है, जिसके जरिए लोकायुक्त के स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) को RTI कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी को इस तरह की छूट देना कानून के अनुरूप नहीं है।

‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट (SPE) मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की जांच करती है। ऐसे में इसे RTI अधिनियम की धारा 24(4) के अंतर्गत आने वाले ‘खुफिया एवं सुरक्षा संगठन’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता
अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से RTI कानून में निर्धारित सीमाओं से आगे बढ़कर SPE को छूट देने का प्रयास किया था, जो विधिसम्मत नहीं है। न्यायालय ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार की जांच करने वाली संस्थाओं को RTI के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
इस मामले पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2021 के फैसले को बरकरार रखा है. दरअसल, इससे पहले राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें एसपीई को आरटीआई से बाहर रखना गलत माना गया. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश लोकायुक्त की SPE ब्रांच से भी RTI द्वारा जानकारियां मांगी जा सकेंगी। 

मध्य प्रदेश सरकार का 2011 का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसमें लोकायुक्त की स्पेशल पुलिस एस्टेबलिशमेंट (एसपीई) को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर किया गया था. मध्य प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2011 को ये अधिसूचना जारी की थी. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये अधिसूचना “कानून के हिसाब से गलत” है। 

कोर्ट ने आगे कहा, “हमारी राय है कि मध्य प्रदेश राज्य के GAD (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट) का 25.08.2011 का नोटिफिकेशन, जिसमें SPE को 2005 के एक्ट के सेक्शन 24(4) के तहत उसके दायरे से बाहर करने की मांग की गई थी, कानून के हिसाब से गलत होने के कारण रद्द किया जा सकता है, क्योंकि इसमें उन मामलों के लिए भी प्रावधान है जो 1947 के एक्ट के सेक्शन 7 के तहत नहीं आते हैं। 

क्यों उठी लोकायुक्त SPE पर आरटीआई की मांग?
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा के मामले से हुई. कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के कटनी जिले के माधव नगर थाने के प्रभारी थे. 11 अप्रैल 2017 को उनपर भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर हुई. इसके बाद 2020 में अभियोजन की स्वीकृति मिली. इस दौरान कामता प्रसाद मिश्रा ने आरटीआई आवेदन दायर कर लोकायुक्त से जानकारियां मांगी, जिसे SPE ने खारिज कर दिया। 

हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
इसके बाद याचिकाकर्ता कामता प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचे. 2021 में हाईकोर्ट ने SPE के आदेश को रद्द कर याचिकाकर्ता को मांगी गई जानकारी प्रदान करने के निर्देश दिए, लेकिन एसपीई ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी. हालांकि, 15 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहरा दिया। 

समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि समाज में समता के भाव का विशेष महत्व है। विभाजन की रेखाएं समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवनकाल में यह महत्वपूर्ण कार्य किया। मध्यप्रदेश और पंजाब के रिश्ते प्रगाढ़ होंगे, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी ने विभिन्न युक्तियों से समाजों, वर्गों और प्रदेशों को परस्पर जोड़ने के महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस क्रम में प्रधानमंत्री  मोदी ने पंचतीर्थ के विकास की पहल की। इसके फलस्वरूप आज भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े विभिन्न पावन स्थलों के समुचित विकास के लिए कार्य हो रहा है। श्रद्धालु नागरिक इन स्थानों की यात्रा के लिए उत्सुक हुए हैं। सामाजिक समरसता का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंभ प्रभार)  गौतम टेटवाल, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष  कैलाश जाटव, सदस्य  बारेलाल,  रामलाल, विधायक सु ऊषा ठाकुर के अलावा, सु नेहा बग्गा उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गत 14 मई से मोहाली (चंड़ीगढ़) से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों का मुख्यमंत्री निवास में स्वागत कर रहे थे। यह यात्रा आगामी 21 जून को दिल्ली में पूर्ण होगी। यात्रा के स्थानों में डॉ. अंबेडकर की जन्मस्थली डॉ. अंबडेकर नगर (महू), दीक्षा भूमि नागपुर, इंदु मिल मुंबई, निर्वाण स्थल दिल्ली शामिल हैं। यात्रा के संयोजक  एस.आर. लद्धड़ और सह-संयोजक  मनोज चंदल हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की उन्नति आवश्यक है। सभी वर्गों का आपसी सद्भाव महत्वपूर्ण है। अनेक दल और व्यक्ति सिर्फ समाज को बांटने और महापुरूषों के अपमान का कार्य करते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में सामाजिक समानता के भाव को स्थापित किया जा रहा है। डॉ. अंबेडकर के योगदान का स्मरण ही नहीं किया जा रहा बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने का कार्य भी किया जा रहा है।

आत्मीय स्वागत से प्रसन्न हुए तीर्थ यात्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंजाब से प्रारंभ पंचतीर्थ यात्रा का मध्यप्रदेश में स्वागत करते हुए आगामी यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। पंचतीर्थ यात्रा के यात्रियों को बाबा महाकाल की प्रतिमा भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री निवास पहुंचे तीर्थ यात्रियों ने मध्यप्रदेश में हुई आवभगत के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया और उनके साथ छायाचित्र भी खिंचवाए। कार्यक्रम का संचालन  राहुल कोठारी ने किया।

 

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सबसे पहले मध्यप्रदेश हुआ नक्सलमुक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने की प्रशंसा – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को दी सरकार की उपलब्धियों की जानकारी

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश ने ही नक्सलवाद को समाप्त किया है। लाल सलाम को आखिरी सलाम करने में मध्यप्रदेश ने बाजी मारी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 जून को नई दिल्ली में हुई नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के विकास के हर मामले में सदैव अग्रणी रहने की क्रियाशीलता की सराहना की। इस वर्ष बैठक का विषय “विकसित भारत @2047 के लिये समावेशी मानव विकास” था। पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद् की बैठक में भाग लिया। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल की बैठक में विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई। देश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज करने पर चर्चा हुई। भविष्य में युवाओं के विकास पर सरकार का विशेष रूप से जोर रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी को मध्यप्रदेश आयुष्मान योजना, नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन, पीएम मित्र पार्क निर्माण सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण को बीते सप्ताह मप्र सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में मिली विशेष उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में हो रहे उच्च कोटि के कामों की भी प्रशंसा की है।

समान नागरिक संहिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में नीति निर्माण जनसामान्य के सुझावों मांगे जा रहें है। अच्छी नीति निर्माण के लिए बेहतर जनभागीदारी आवश्यक है। प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या सुझाव आमंत्रित करने के लिए सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाये जायें। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में 22 जून तक सुझाव आमंत्रित किये गये हैं। समान नागरिक संहिता की वेबसाइट (ucc.mp.gov.in) पर सुझाव देने की प्रक्रिया भी बहुत सरल है। मुख्यमंत्री ने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में समान नागरिक संहिता के संबंध में और उसमें सुझाव देने के लिये अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस – स्वस्थ आयु के लिये योग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को प्रदेश में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने अंतराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दी। विश्व के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग अपना चुके है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिये योग’ रखी गई है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए निर्धारित गतिविधियों का प्रदेश में अक्षरश: पालन किया जाएगा।

एमपी टूरिज्म को मिला “कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार”

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग को मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित ’10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स (EEA) 2026′ में “कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता पुरस्कार” प्राप्त हुआ है। एमपी टूरिज्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना प्रदेश के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। इसे देश के इवेंट, एक्जीबिशन और माइस (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग एंड एक्जीबिशन) सेक्टर के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। पर्यटन निगम को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में 20 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और राज्य महत्व के बड़े सम्मेलनों के सफल एवं बेहतरीन प्रबंधन के लिए दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी।

प्रदेश को मिला उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गत 15 जून को गोवा में ग्लोबल विंड डे – 2026 पर मध्यप्रदेश को उभरती नवकरणीय ऊर्जा अवसंरचना उत्कृष्टता सम्मान प्रदान किया है। हमारा मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में से है और हम प्रदेश में इस दिशा में लगातार काम कर रहें है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश को यह केंद्रीय सम्मान प्राप्त होने पर विभागीय मंत्री एवं अधिकारियों को बधाई दी।

प्रदेश में स्थापित होगा सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को जानकारी दी कि गत 15 जून को भोपाल में सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिये कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सायबर क्राइम के अदृश्य खतरों से निपटने के लिये सभी आवश्यक प्रबंधन करना वर्तमान दौर की जरूरत है। प्रदेश में सायबर सुरक्षा के लिये एक सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा। यह सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में यह ठोस कदम है। यह सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

एमएसएमई यूनिट्स को प्रोत्साहन राशि का वितरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 14 जून को सिंगल क्लिक से प्रदेश की 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया है। इसमें 6 ईटीपी निर्मित करने वाली इकाइयों को 2 करोड़ 2 लाख की रुपये सहायता, विशेष पैकेज के तहत इकाइयों को 1 करोड़ 7 लाख रुपये मण्डी शुल्क की प्रतिपूर्ति और 11 इकाईयों को विद्युत टैरिफ के रूप में 3 करोड़ 69 लाख रुपये का वितरण भी किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण राशि, भू-आवंटन पत्रक तथा स्टार्ट-अप नीति 2025 के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि का वितरण भी इस दौरान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में औद्योगिक परिदृश्य बदलने के लिये कृत संकल्पित है और इस क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बड़े उद्योगों के अलावा हमारा पूरा ध्यान एमएसएमई की ओर भी है, जिनका प्रदेश के औद्योगिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है।

 

देवकीनंदन ठाकुर ने विवाह परंपराओं पर उठाए सवाल, मंदिरों के लिए सनातन बोर्ड की मांग

भोपाल 

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने रात में होने वाले विवाह, शादियों में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति, मंदिरों के प्रबंधन और राम मंदिर दान पात्र विवाद जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार समय का विभाजन देवताओं, पितरों और दैत्यों के समय में किया गया है। रात का समय दैत्यों का माना जाता है, इसलिए हिंदू समाज को रात में विवाह करने से बचना चाहिए। दैत्यों के समय में विवाह करके दैवीय और आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय परंपरा में ‘गोधूलि बेला’ को विवाह के लिए सबसे शुभ और उत्तम समय माना जाता था। उस समय विवाह के सभी प्रमुख संस्कार और फेरे दिन में ही संपन्न होते थे। मुगल आक्रांताओं के दौर में जब बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर खतरा मंडराने लगा था, तब मजबूरी और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों ने रात के समय छिपकर विवाह करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह एक परंपरा का रूप बन गई।

देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई
उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और वैसा कोई खतरा नहीं है, इसलिए समाज को शोर-शराबे और अनावश्यक दिखावे से दूर रहकर फिर से दिन में विवाह करने की पवित्र परंपरा की ओर लौटना चाहिए।

शादियों में मद्यपान के सेवन को लेकर भी देवकीनंदन ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विवाह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है। ऐसे पवित्र अवसर पर मद्यपान करना अत्यंत दूषित विषय है। इसका नकारात्मक प्रभाव केवल परिवार पर ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों और बच्चों के जीवन पर भी पड़ता है। विवाह को जितना अधिक पवित्र रखा जाएगा, समाज उतना ही स्वस्थ और संस्कारित बनेगा।

उन्होंने राम मंदिर दान पात्र विवाद पर बोलते हुए शास्त्रों का जिक्र किया और कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करता है, उसे 60 हजार वर्षों तक विष्ठा (मल) का कीड़ा बनकर कष्ट भोगना पड़ता है। यदि लोगों को इस बात का वास्तविक ज्ञान हो जाए तो कोई भी मंदिर का एक रुपया तक चुराने की हिम्मत नहीं करेगा।

मंदिरों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप का विरोध करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने ‘सनातन बोर्ड’ के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संचालन धर्म के जानकार, मर्मज्ञ और धर्मनिष्ठ लोगों के हाथों में होना चाहिए। इस बोर्ड का अध्यक्ष चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बनाया जाना चाहिए, ताकि सनातन धर्म और धार्मिक संस्थाओं का संचालन सही दिशा में हो सके।

‘फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं’
न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अदालतों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी हो जाती है कि फैसला आने तक वर्षों बीत जाते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा न हो कि फैसला आने से पहले ही आरोपी की हार्ट अटैक से मौत हो जाए और भगवान राम अपनी दक्षिणा की प्रतीक्षा करते रह जाएं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने श्रीराम की मर्यादा का उल्लंघन किया है और गलती की है, उनसे तुरंत धन वापस लिया जाना चाहिए। मामले को वर्षों तक अदालतों में घसीटने से बेहतर है कि दोषियों को तत्काल उनके पदों से हटाया जाए। 

बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति

बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति के प्रस्ताव पर उप समिति गठित
रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी
इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति
प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2,381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति
श्रमिक कल्याण संबंधी योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति
जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति
रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति
स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को बड़ी रफ्तार देते हुए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया। राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ‘मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 लागू करने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है। समिति सभी संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर चलाने का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया।

वन्य-प्राणी संरक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के तहत 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देते हुए जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक व आवासीय सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है।

मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन,औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये तथा स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन व ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सभी निर्णय आगामी पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के समग्र, समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी पहल है।

इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500.80करोड़रूपये में 5 हजार 388.58 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889.38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त उ‌द्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6 हजार 582.91 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1,696 करोड़ 74 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 214 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्त पोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 3,496 करोड़ 15 लाख रूपये का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 656 करोड़ 96 लाख रूपये एवं आईडीसीकी लागत के लिए 518 करोड़ 42 लाख रूपये का अतिरिक्त ऋण शामिल है।

प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के सोलहवें केन्द्रीय वित आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए कुल 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

स्वीकृति अनुसार प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (नॉन-रिकरिंग), प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (रिकरिंग) और प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (प्रोजेक्ट एलिफेंट) के लिए एक हजार 131 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन तीनों योजनाओं से वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर बनाई गई प्रबंध योजना का क्रियान्वयन किया जाना है, जिसमें मुख्यतः प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्त्रोतों का विकास, वन मार्गो का रखरखाव आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं उनका रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैम्प निर्माण, दवाईयां क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था आदि कार्य किए जायेंगे।

ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के लिए एक हजार 250 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य-प्राणियों के संवेदनशील आवास स्थलों को एवं वन्य-प्राणियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे ग्रामों को संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वसित करना है। इसमें ग्रामीणों के अचल सम्पत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा का भुगतान किया जाता है। योजना का क्रियान्वयन संजय टाइगर रिजर्व, सतपुडा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों में किया जायेगा।

श्रमिक कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा श्रमिक कल्याण से संबंधित श्रम विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय के संचालन के लिए 57 करोड़ 48 लाख, श्रम कानूनों के कार्यान्वयन के लिए अमला के लिए 289 करोड़ 89 लाख, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए 75 करोड़ 52 लाख, विभागीय परिसंपति के लिए 1 करोड़ 20 लाख, श्रम कल्याण निधि की स्थापना के लिए 95 करोड़, इंदौर में स्थित हायजिन लैब का आधुनिकीकरण के लिए 0.60 करोड़, बाल श्रमिक सर्वेक्षण/पूनर्वास योजना के लिए 4 करोड, बंधक मजदूरों की पुनर्वास योजना के लिए 4 करोड़, नेशनल डेटाबेस अंसगठित श्रमिक के लिए एक करोड़ 25 लाख, प्रवासी श्रमिक आयोग के लिए 0.05 करोड़, असंगठित शहरी/ग्रामीण कर्मकार मंडल की स्थापना के लिए 0.0005 करोड़, मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के लिए 0.0005 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी के साथ पूंजीगत मद की विद्यमान योजना श्रम आयुक्त के लिए 1 करोड़ 9 लाख, श्रम कानूनों के कार्यन्वयन के लिए अमला के लिए 0.67 करोड़, औ‌द्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए 0.22 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत संचालनालय, स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण सम्बन्धी योजना के 16वें वित्त आयोग की अवधि एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। स्थानीय निधि संपरीक्षा के लिये 491 करोड़ 75 लाख और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिये 00.70 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा, प्रदेश की विभिन्न स्थानीय निकायों के लेखों की संपरीक्षा सम्पादित करता है तथा इन निकायों के अंतर्गत आने वाले स्थापना प्रकरणों के वेतन निर्धारण एवं पेंशन प्रकरणों का निराकरण भी किया जाता है।

मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीतिके प्रस्ताव पर उपसमिति गठित

मंत्रि-परिषद ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को लागू किए जाने के प्रस्ताव पर 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है। उप समिति प्रदेश मेंविश्वस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करना, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार विशेषज्ञ व एमबीबीएस डॉक्टर तैयार करना, गरीब मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार की गारंटी, अन्य राज्यों में मरीजों के पलायन को कम करना, स्वास्थ्य संकेत कों एमएमआर और आइएमआर में सुधार करने एवं रोगियों को उन्नत सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने आदि का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी।

रीवा, देवास और गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने रीवा, देवास तथा गुना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन आउटसोर्स प्रणाली से किए जाने संबंधी पायलट परियोजना संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश के कुल तीन ज़िलों रीवा, देवास तथा गुना में चिह्नित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों जहाँ चिकित्सकों के अधिकांश पद रिक्त है, उनका संचालन आउटसोर्स प्रणाली से किए जाने हेतु पायलट परियोजना संचालित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। उक्त प्रणाली अंतर्गत संदर्भित संस्थाओं के संचालन के लिए निविदा के निर्माण एवं समापक रूप प्रदायगी का कार्य दायित्व लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रदत्त किए जाने एवं निविदा प्रक्रिया एमपीपी एचएससीएल के माध्यम से किए जाने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है।

इस निर्णय से केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं आम जनता को बेहतर ढंग से मिल पाएगी और उन्हें छोटी बीमारियों के लिए जिला अस्पताल आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पाँच वर्षों के दौरान योजना का मूल्यांकन किया जाएगा और परिणाम अच्छे मिलने पर इसका विस्तार प्रदेश के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए भी किया जा सकेगा।

जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने जनजातीय कार्य विभाग की एच्छिक संस्थाओं को शैक्षणिक और अन्य कल्याणकारी प्रवृत्तियों के लिए अनुदान संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च 2031 में निरंतर संचालन के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।  

इस योजना के तहत प्रदेश के 22 जिलों में कार्यरत 32 अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं द्वारा संचालित शैक्षणिक, छात्रावास, आश्रम शाला, बालवाडी, आरोग्य केन्द्र आदि संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन भते एवं संचालन के लिए अनुदान दिया जाता है। अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं द्वारा जनजातीय छात्र/छात्राओं की आवश्यकता वाले छात्र/छात्राओं की मैपिंग कर चयन किया जाता है। योजना मुख्य रूप से जनजातीय वर्ग के लिए संचालित है। दिव्यांगजनों को नियमानुसार लाभ दिया जाता है। छात्र-छात्राओं को आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जेंडर समानता का उचित ध्यान रखते हुए लाभान्वित किया जाता है।

रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने रेशम संचालनालय में संचालित 8 कार्यक्रमों योजनाओं की निरंतरता के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक की अनुमानित वित्तीय लागत 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृत राशि से रेशम समृद्धि योजना का संचालन, रेशम उद्योग का विकास कार्य, रेशम उद्योग की योजनाओं का क्रियान्वयन, टसर रेशम विकास एवं विस्तार कार्यक्रम, कुटीर एवं ग्रामोद्योग उत्पादों का प्रमोशन, ब्राण्ड बिल्डिंग एवं विपणन अधोसंरचना, एकीकृत क्लस्टर विकास कार्यक्रम और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के साथ रेशम केन्द्रों पर सिंचाई सुविधाएं एवं अन्य निर्माण कार्य किए जायेंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के रेशम ककून उत्पादकों, रेशम धागाकरण हितग्राहियों, बुनकरों एवं उद्यमियों की आय में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय स्तर पर सतत् रोजगार के साथ-साथ आजीविका के साधन उपलब्ध कराना है।

 

ATS की बड़ी कार्रवाई, धार से संदिग्ध हाजी अजहर गिरफ्तार; पाकिस्तान भेजी गई तस्वीरों के मिले सुराग

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाद एमपी एटीएस ने धार जिले से एक और संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। संदिग्ध की पहचान हाजी अजहर के रूप में हुई है। इससे पहले एटीएस ने भोपाल से मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान टीम को कई अहम सुराग मिले हैं। अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है।

टीम ने इससे पहले नईम अब्दुल्ला को पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर हरियाणा के नूंह से एक संदिग्ध को पूछताछ के लिए भोपाल लाया गया है। मोहम्मद फराज और नईम अब्दुल्ला से पूछताछ हो रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों की निशानदेही पर हुई कार्रवाई में जांच एजेंसी को कई अहम डिजिटल इनपुट मिले हैं।

पाकिस्तान के नंबर पर होती थी बात
सूत्रों के अनुसार में इस बात का खुलासा हुआ है कि संदिग्धों के मोबाइल फोन पर पाकिस्तान के नंबर मिले हैं। जांच के दौरान यह पाया गया है कि संदिग्ध पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नंबरों से बात करते थे। फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि यह लोग किस नेटवर्क के संपर्क ने और क्या काम करते थे।

भोपाल से गिरफ्तार संदिग्ध मोहम्मद फराज के मोबाइल की डिजिटल सबूत मिले हैं। इस सबूतों से साफ होता है कि वह विदेशी नेटवर्क के संपर्क में था और बातचीत के लिए एक स्पेशल ऐप का इस्तेमाल करता था। मामले का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसी मोहम्मद फराज के चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है।

यूपी के शहरों की भेजी गई तस्वीरें
सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि नईम अब्दुल्ला ने उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेज हैं। फराज के मोबाइल फोन की डिजिटल जांच में ऐसे सबूत मिले हैं।

    MP में ATS की बड़ी कार्रवाई
    धार से एक संदिग्ध को किया गिरफ्तार
    भोपाल से मोहम्मद फराज की हुई थी गिरफ्तारी
    जांच में खुलासा, यूपी के कई शहर की भेजी गई फोटो

आर्थिक लेनदेन की जांच
जांच एजेंसी गिरफ्तार सभी संदिग्धों के आर्थिक लेन देन की जांच भी कर रही है। फिलहाल इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। टीम ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है।

एयरफोर्स अधिकारी की पत्नी से कथित दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का मामला, मौलाना समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप

छिंदवाड़ा 
 मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के एक मौलाना का बड़ा कांड सामने आया है। यहां आरोप मौलाना ने एक एयरफोर्स अफसर की पत्नी को जबरन कलमा पढ़ाया और दोस्तों के से पीड़िता को ब्लैकमेल करके दुष्कर्म करवाया। आरोप है कि मौलाना और उसके साथियों ने महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर लगभग सवा तीन लाख रुपए ऐंठे हैं। फिलहाल छिंदवाड़ा का रहने वाला आरोपी मौलाना पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसके दो सहयोगी गिरफ्तार हो चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता महाराष्ट्र के नागपुर में भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी की पत्नी है। उसने पुलिस में दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय पीड़िता नागपुर में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है। पति नौकरी के कारण अकसर दूसरे शहर में रहते थे। फरवरी 2025 में पीड़िता के पुराने सहपाठी अयाज ताज मदारे ने जमीन खरीदने की इच्छा जताई और बात करने के लिए वर्धा रोड स्थित एक होटल में बुलाया। पीड़िता का आरोप है कि होटल में बातचीत के दौरान आरोपी ने उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। जिसके बाद वह बेहोश हो गई। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और आपत्तिजनक फोटो व वीडियो बना लिए। जब पीड़िता को होश आया तो उसे अपने साथ हुई हैवानियत की जानकारी लगी। उसका आरोप है कि आरोपी यही नहीं रूका उसने बाद में उसकी वीडियो और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का सिलसिला
पीड़िता के मुताबिक, आरोपी कई महीनों तक उसे ब्लैकमेल करता रहा। वीडियो और तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उसने उससे कई बार पैसे लिए। थोड़े थोड़े करके आरोपी ने उससे लगभग 3 लाख 9 हजार रुपये वसूले गए। हद तो तब हो गई जब मई 2025 में आरोपी ने महिला को नागपुर के समीप कलमेश्वर क्षेत्र बुलाया। वहां उसकी मुलाकात अमीन शेख और छिंदवाड़ा के रहने वाले एक मौलाना से करवाई। तीनों ने मिलकर उससे कलमा पढ़वाया गया और धर्म परिवर्तन का दवाब बनाया। इस दौरान कई तंत्र-मंत्र जैसी गतिविधियां कराई गईं। महिला का आरोप है कि उसकी यह सब उसकी इच्छा के विरुद्ध किया गया और उसे मानसिक रूप से डराने का प्रयास किया गया।

 

ट्विशा शर्मा केस: सास और पति समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी

भोपाल 

भोपाल के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। अदालत ने इस मामले में आरोपी ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह कि न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। CBI ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। अब दोनों आरोपी 30 जून तक जेल में रहेंगे। फिलहाल दोनों आरोपी भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद हैं।

कोर्ट में दोनों आरोपियों की वर्चुअल सुनवाई की गई। सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह फैसला लिया गया। आज की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने मामले की मीडिया ट्रायल पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो रही है। गिरिबाला के वकील जॉर्ज कार्लो ने कोर्ट में कहा, मीडिया को मामलें से दूर रखा जाए।

गिरिबाला और समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत बढ़ी
गिरिबाला सिंह वकील ने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि  ट्विशा के परिजनों और वकीलों को भी मीडिया में बयान देने से रोका जाए। वहीं, आज की सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट से कहा, फॉरेंसिक और डिजिटल एविडेंस की स्टडी कर रहे हैं, केस से जुड़ कुछ और लोगों से पूछताछ बाकी है। CBI ने कोर्ट में कहा कि हमें अभी ट्विशा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच एजेंसी की मांग पर कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी।

30 जून तक कर जेल में रहेंगे दोनों आरोपी
समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को 2 जून को भोपाल की सेंट्रल जेल भेजा गया था। उस समय भोपाल कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखने के आदेश दिए थे। अब रिमांड बढ़ाकर 30 जून तक कर दी गई है।

जेल में VIP ट्रीटमेंट देने का आरोप
समर्थ और गिरिबाला सिंह को जेल में विशेष सुविधाएं देने का भी आरोप लगा। जेल जाने के एक दिन बाद दोनों आरोपियों को बैरक से निकालकर जेल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया था, जिसके बाद भारी बवाल मचा था। ट्विशा के परिवार ने इस VIP ट्रीटमेंट का विरोध जताया था।

कैस हुई थी ट्विशा की मौत
बता दें कि भोपाल में पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव ससुराल के टेरेस पर फांसी के फंदे पर लटका मिला। परिवार ने दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मामले की जांच अब CBI कर रही है।

जेल में वकील से मिलने की छूट मांगने कोर्ट पहुंचीं गिरिबाला सिंह
बता दें, ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को भोपाल निवासी समर्थ सिंह से हुई थी, जो पेशे से वकील हैं. परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को कम दहेज लाने को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था. परिवार का कहना है कि शादी के कुछ ही समय बाद से उसके साथ लगातार मानसिक और अन्य प्रकार का उत्पीड़न किया जाने लगा था। 

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य घटना वाली रात की आखिरी फोन कॉल भी है. 12 मई 2026 की रात 9 बजकर 41 मिनट पर ट्विशा ने अपनी मां से बात की थी. परिजनों का दावा है कि बातचीत के दौरान फोन के बैकग्राउंड में उसके पति समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी. इसके कुछ ही क्षण बाद फोन अचानक कट गया। 

परिजनों के अनुसार जब बाद में दोबारा फोन किया गया तो कॉल उठाने वाली गिरिबाला सिंह थीं. उन्होंने सीधे ट्विशा की मौत की जानकारी दी. इस घटनाक्रम ने परिवार की शंकाओं को और बढ़ा दिया. रिकॉर्ड के अनुसार उसी रात करीब 10 बजकर 20 मिनट पर समर्थ सिंह ट्विशा को बेहोशी की हालत में भोपाल एम्स लेकर पहुंचे थे. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

15 मई 2026 को सामने आई शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को और उलझा दिया. रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया, लेकिन साथ ही ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान भी मिलने की बात कही गई. रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें मौत से पहले लगी थीं और संभव है कि किसी कुंद वस्तु के प्रहार से लगी हों। 

दहेज प्रताड़ना के आरोपों के बीच CBI जांच पर टिकी सबकी नजर
बाद में मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) ने भी की और पति समर्थ सिंह से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स में दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया और CBI ने भी इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की. अब इस पूरे मामले में दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. CBI का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. फिलहाल गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच जारी है। 

राजस्थान में MP पुलिस पर बड़ा एक्शन, दो TI समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज

आगर मालवा 
मध्य प्रदेश के आगर मालवा पुलिस की कार्रवाई पर राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट ने दो टीआई समेत 100 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन पिछले दो दिनों से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बीती रात प्रकरण दर्ज हुआ है। तत्कालीन एसपी विनोद सिंह ने बताया था कि 28 जनवरी को दी गई दबिश के दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया था।

राजस्थान में मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत 100 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में हुई NDPS कार्रवाई से जुड़ा है।
चौमहला कोर्ट के 13 जून को दिए आदेश पर डग थाने में सोमवार (15 जून) को आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस ने कहा कि जांच में अन्य आरोपियों की पहचान भी की जाएगी।

बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ पकड़ने का दावा किया था
21 जनवरी 2026 को आगर पुलिस ने फैजान नाम के युवक को 330 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया था कि ड्रग्स घाटाखेड़ी के शाहिर, मुनव्वर और ताहिर से लाया था।

एसपी विनोद सिंह के मुताबिक फैजान की निशानदेही पर 28 जनवरी को 80 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ दबिश दी गई थी। यहां बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद करने का दावा किया गया था। इस दौरान दो भाई शाहिर खान और मुनव्वर उर्फ राजा गिरफ्तार किए गए थे।

पांच पॉइंट्स, जिनसे कार्रवाई पर उठे सवाल

  •     आगर मालवा के तत्कालीन एसपी विनोद कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्रवाई के दौरान दो बंदूकें, एक ग्राइंडर मशीन और दो ड्रम जब्त करने का दावा किया था। जांच के दौरान सामान नया दिखने पर सवाल उठे, लेकिन एसपी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया था।
  •     दावा किया गया कि कार्रवाई में राजस्थान पुलिस भी शामिल थी, लेकिन जांच में सामने आया कि उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी।
  •     एसपी विनोद कुमार सिंह ने कहा था कि ई-साक्ष्य ऐप से कार्रवाई की रिकॉर्डिंग की गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि वीडियोग्राफी नहीं हुई थी।
  •     पुलिस रिकॉर्ड में शाहिर की गिरफ्तारी सुबह 4:40 बजे, मुनव्वर की 4:45 बजे और जब्ती 5:40 बजे दर्शाई गई। जांच में वीडियोग्राफी और सीसीटीवी से सामने आया कि आगर पुलिस की डग थाना क्षेत्र में आखिरी मौजूदगी 5:05 बजे तक ही थी।
  •     बताया गया कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन घाटाखेड़ी में करीब 30 मिनट ही रुके थे। इसी दौरान तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती और अन्य कार्रवाई का दावा किया गया, जबकि इतने कम समय में NDPS अधिनियम की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं था।

परिवार ने शुरुआत से पुलिस कार्रवाई को फर्जी बताया
गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान शुरुआत से ही कार्रवाई को फर्जी बताते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने स्थानीय राजस्थान पुलिस को सूचना दिए बिना घर में प्रवेश किया, परिजन से बदसलूकी की और उनके बेटों को झूठे NDPS प्रकरण में फंसाया।

जानें जांच में क्या-क्या सामने आया?
कोर्ट के आदेश पर पुलिस विभाग के जांच अधिकारी द्वारा की गई जांच में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच में सामने आया कि पुलिस द्वारा किए गए जब्ती के दावे से संबंधित कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे और वीडियोग्राफी का दावा भी झूठा था। इसके अलावा, सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि मध्य प्रदेश पुलिस के वाहन गांव में केवल 30 मिनट ही रुके थे, जबकि इतने कम समय में एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है।

इस कार्रवाई पर अब कानूनी सवाल उठ रहे
इसी जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट और पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा व शुभम सहित पूरी टीम पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। ऐसे में अब कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा यहां से की गई पांच करोड़ की मादक पदार्थ जब्ती की कार्रवाई का खुलासा मध्य प्रदेश में टीम द्वारा किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई पर अब कानूनी सवाल उठ रहे हैं।

दस लाख रुपये मांगने का भी पुलिस पर आरोप
इस्तगासे में पीड़ित ने बताया कि उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने कहा कि किसान लोग इतने रुपये कहां से लाएंगे और रुपये देने में असमर्थता जताई, तो उन्हें आगर थाने ले जाया गया। वहां गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों के खिलाफ दो किलो एमडी, 1 किलो स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम, 2 राइफलें आदि यानी 5 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त होना बताकर केस दर्ज कर दिया गया।

जबकि इनके परिवार के घरों की तलाशी लेने पर 1 ग्राम सामग्री यानी कुछ भी नहीं मिला। केवल एक लाइसेंसशुदा एकनाली बंदूक, एक एयर गन और 7 मोबाइल जब्त किए गए। शाहिर खान और मनोवर खान को पकड़कर ले जाया गया था और वहां ले जाकर उनके ऊपर मादक पदार्थ की सामग्री का केस बना दिया गया।

तलाशी-गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े रिकॉर्ड नहीं मिले
हमीद खान ने 21 फरवरी 2026 को चौमहला कोर्ट में परिवाद (शिकायती आवेदन) दायर किया। कोर्ट ने उसी दिन जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ अमित को जांच के आदेश दिए। एसपी ने जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) भागचंद्र मीणा को सौंपी।

एएसपी मीणा ने आगर आकर दबिश में शामिल थाना प्रभारी शशि उपाध्याय समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान लिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई रिकॉर्ड नहीं मिले।

जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर FIR के आदेश
जांच रिपोर्ट और उपलब्ध सबूतों पर विचार के बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद डग थाने में शशि उपाध्याय, रूप सिंह राजपूत, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट, राहुल विश्वकर्मा, पुलिसकर्मी शुभम समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

जांच के बाद और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस आरोपों की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी। इसके बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। आशंका है कि जांच के बाद और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। साथ ही, धाराएं भी बढ़ सकती हैं।

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