भोपाल का आदमपुर खंती मॉडल बना मिसाल, 54 दिन में साफ हुआ 92 हजार टन कचरा; 330 दिन में खत्म होगा कचरे का पहाड़

भोपाल
राजधानी भोपाल को सालों पुराने बदबूदार कचरे के पहाड़ से मुक्ति मिलने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। आदमपुर खंती में वर्षों से जमा ‘लिगेसी वेस्ट’ (पुराने कचरे) का नामोनिशान मिटाने के लिए नगर निगम का महा-अभियान फुल स्पीड में चल रहा है।

महज 54 दिनों के भीतर हाईटेक मशीनों ने 92 हजार टन (करीब 14 प्रतिशत) कचरे को प्रोसेस कर पूरी तरह खत्म कर दिया है।

हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बीच एक वैश्विक संकट ने भोपाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगा दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कचरे से कोयला बनाने वाले देश के दूसरे सबसे बड़े प्लांट के कुछ अहम पुर्जे (पार्स) अटक गए हैं।

लेगेसी वेस्ट की प्रोसेसिंग का काम 22 अप्रैल से शुरू किया गया था। इसके लिए दो हाईटेक मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं। बज्र-250 मशीन हर घंटे 250 टन और बज्र-300 मशीन हर घंटे 300 टन कचरा प्रोसेस कर रही है। दूसरी मशीन ने 6 मई से काम शुरू किया था। पूरी साइट को 330 दिनों के भीतर साफ करना अनिवार्य है। इसमें बारिश के सीजन को भी वर्किंग डेज में शामिल किया गया है।

330 दिन में पूरी साइट साफ करने की शर्त…

    पूरे 6 लाख टन से ज्यादा लेगेसी वेस्ट का निष्पादन 330 दिनों में करना होगा।
    बारिश के सीजन को भी वर्किंग डेज में शामिल किया गया है।

    तय समय में काम पूरा नहीं होने पर कंपनी पर जुर्माना लगेगा।

    कचरा निष्पादन, साइट सुरक्षा, आग रोकथाम और धुआं नियंत्रण की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

    खंती में आग लगने या नियंत्रण नहीं होने पर 10 लाख रुपए प्रतिदिन की पेनल्टी तय है।

ईरान-अमेरिकी तनाव से अटका कचरे से कोयला बनाने वाला प्लांट भोपाल में सूखे कचरे से कोयला (टोरीफाइड चारकोल) बनाने का काम भी शुरू हो गया है। आदमपुर खंती में लगे इस प्लांट के ट्रायल में 20 टन कचरे से सफलतापूर्वक कोयला बनाया जा चुका है। नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की टीम ने प्लांट के कचरा सेग्रीगेशन (छंटाई) की तारीफ करते हुए ओके रिपोर्ट दे दी है।

इस कोयले का उपयोग बिजली संयंत्रों में होगा। यह देश का दूसरा टोरीफाइड चारकोल प्लांट है। हालांकि, ईरान-अमेरिकी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से प्लांट के कुछ अहम पुर्जे (पार्ट्स) नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण प्लांट को पूरी क्षमता के साथ शुरू करने का मामला अटका हुआ है।

हर घंटे 550 टन कचरे का खात्मा; दिन-रात चल रही हैं दो ‘दानवाकार’ मशीनें
आदमपुर खंती में कुल 6 लाख टन से ज्यादा पुराना कचरा जमा है। इसे खत्म करने के लिए नगर निगम ने कंपनी को 330 दिनों की सख्त समय-सीमा दी है। कचरा निष्पादन का यह काम 22 अप्रैल से शुरू हुआ था, जिसमें दो अत्याधुनिक मशीनें दिन-रात जुटी हैं:

बज़-250 मशीन: यह मशीन हर घंटे 250 टन कचरे को प्रोसेस कर रही है (22 अप्रैल से चालू)।

बज़-300 मशीन: इस दूसरी बड़ी मशीन ने 6 मई से काम शुरू किया, जो हर घंटे 300 टन कचरा साफ करती है।

नो वेकेशन इन मानसून: इस बार मानसून और बारिश के सीजन को भी ‘वर्किंग डेज’ में शामिल किया गया है, यानी बारिश में भी काम नहीं रुकेगा।

330 दिन में साइट साफ करने की शर्तें… नहीं तो ₹10 लाख प्रतिदिन का जुर्माना

नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी के सामने बेहद कड़े नियम और पेनाल्टी की शर्तें रखी हैं।

– तय समय (330 दिन) में काम पूरा नहीं होने पर कंपनी पर भारी जुर्माना लगेगा।

– कचरा निष्पादन, साइट की सुरक्षा, आग की रोकथाम और धुएं पर नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

– खंती में आग लगने या उस पर तुरंत नियंत्रण नहीं होने की स्थिति में कंपनी पर 10 लाख रुपये प्रतिदिन की पेनाल्टी (जुर्माना) तय की गई है।

कचरे से बनेगा कोयला, लेकिन इंटरनेशनल टेंशन से अटका फुल-ऑपरेशन
कचरे के पहाड़ को खत्म करने के साथ ही भोपाल में सूखे कचरे से कोयला (टोरीफाइड चारकोल) बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। आदमपुर खंती में लगे इस विशेष प्लांट के ट्रायल रन में 20 टन कचरे से सफलतापूर्वक कोयला बनाया जा चुका है।

देश के इस दूसरे टोरीफाइड चारकोल प्लांट की नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) की टीम ने भी जांच की है और कचरा सेग्रीगेशन (छंटाई) की तारीफ करते हुए अपनी ‘ओके रिपोर्ट’ दे दी है। इस कोयले का उपयोग देश के बड़े बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में होगा।

पुर्जों का इंतजार: यह प्लांट भोपाल के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, लेकिन ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से इस प्लांट के कुछ बेहद अहम टेक्निकल पार्ट्स (पुर्जे) भारत नहीं आ पा रहे हैं। यही वजह है कि कोयला बनाने का यह प्लांट अभी तक अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं हो पाया है।

 

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला

भोपाल

मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सब स्टेशन संचालन एवं सुरक्षा से संबंधित व्यापक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन जिले के नागदा, धार जिले के बदनावर व राजगढ़ टेस्टिंग डिवीज़न मुख्यालयों मे प्रशिक्षण कार्यशाला अधीक्षण अभियंता शेखर फटाले के मार्गदर्शन में हुई।

जिनमें सब स्टेशन मेंटेनेंस एवं ऑपरेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं को बिंदुवार समझाया गया एवं कार्यस्थल पर लापरवाही रोकने के महत्व पर विशेष जोर देते हुए दुर्घटनाओं से बचाव के लिये व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जिससे कार्मिकों एवं उपकरणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सुरक्षित कार्यशैली से कराया गया अवगत

प्रशिक्षण में फटाले ने एम.पी. ट्रांसको की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत निर्धारित स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) एवं सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग तथा निर्बाध एवं सुरक्षित विद्युत पारेषण बनाए रखने के लिये समन्वित टीमवर्क के रूप में कार्य करने के प्रति जागरूक भी किया गया। कार्यशालाओं में क्षेत्र के अभियंताओं एवं तकनीकी स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता की।

 

गृहिणियों के काम की क्या है आर्थिक कीमत? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद GDP में शामिल करने पर छिड़ी बहस

भोपाल

सर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को “राष्ट्र निर्माता” मानते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों में “घरेलू देखभाल की हानि” नामक मुआवज़े का एक अलग मद बनाया और इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि अनिवार्य की।

टीसर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून को फैसला सुनाया कि मोटर दुर्घटना में मृत्यु होने पर मुआवज़ा तय करते समय गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक घरेलू श्रम को एक स्वतंत्र आर्थिक मूल्य दिया जाना चाहिए। इसके लिए न्यायालय ने प्रति माह ₹30,000 की न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की। गृहिणियों को “राष्ट्र निर्माता” मानते हुए, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मोटर दुर्घटना दावों में “घरेलू देखभाल की हानि” नामक मुआवज़े का एक अलग मद बनाया और इस राशि में हर तीन साल में 10% की वृद्धि अनिवार्य की।

विवाद क्या था?
यह फैसला पंजाब में एक मोटर दुर्घटना के दावे से संबंधित अपील पर आया है। नवंबर 2001 में एक सड़क दुर्घटना में रेशमा नाम की महिला की मृत्यु के बाद, उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संपर्क किया। दिसंबर 2003 में, न्यायाधिकरण ने ₹2.42 लाख का मुआवजा दिया। इससे असंतुष्ट होकर परिवार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपील की। ​​दिसंबर 2024 में, उच्च न्यायालय ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹8.43 लाख कर दी, साथ ही दावा याचिका दायर करने की तारीख से 7.5% की दर से ब्याज भी लगाया। न्यायालय ने कहा कि यदि राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर नहीं किया जाता है, तो ब्याज दर बढ़कर 9% प्रति वर्ष हो जाएगी, और यदि भुगतान में छह महीने से अधिक की देरी होती है, तो यह 12% प्रति वर्ष हो जाएगी। मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होकर परिवार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

 सुबह की पहली चाय से लेकर रात के अंतिम काम तक, करोड़ों भारतीय गृहिणियां बिना वेतन, बिना छुट्टी और बिना किसी औपचारिक मान्यता के लगातार काम करती हैं। खाना बनाना, बच्चों की परवरिश, बुजुर्गों की देखभाल, घर का बजट संभालना, परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और भावनात्मक सहारा बनना—ये ऐसे कार्य हैं जिन पर पूरे परिवार की नींव टिकी होती है।

इसके बावजूद देश की आर्थिक व्यवस्था में इन कार्यों को लगभग अदृश्य माना जाता है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने गृहिणियों को राष्ट्रनिर्माता बताते हुए उनके श्रम को आर्थिक मूल्य देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या गृहिणियों के अवैतनिक श्रम को देश की जीडीपी और आर्थिक गणनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

जीडीपी में क्यों नहीं दिखता गृहिणियों का योगदान?
    सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश में होने वाली आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन करता है, लेकिन इसमें केवल वही कार्य शामिल होते हैं जिनमें पैसों का लेन-देन होता है। यही कारण है कि यदि कोई महिला अपने परिवार के लिए भोजन तैयार करती है तो उसका आर्थिक मूल्य नहीं गिना जाता, लेकिन वही भोजन किसी होटल या रेस्टोरेंट में तैयार हो तो वह जीडीपी का हिस्सा बन जाता है।

    इसी तरह यदि कोई बेटी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करती है तो उसका योगदान आर्थिक आंकड़ों में दर्ज नहीं होता, जबकि किसी अस्पताल या केयर सेंटर द्वारा दी गई वही सेवा जीडीपी में शामिल हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही वह बड़ी खामी है जिसके कारण महिलाओं के घरेलू श्रम का वास्तविक मूल्य सामने नहीं आ पाता।

भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी अनदेखी सब्सिडी
    विकास विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह के अनुसार भारत का विकास मॉडल करोड़ों महिलाओं द्वारा दिए जा रहे मुफ्त श्रम पर आधारित है। उनका कहना है कि देश की लाखों गृहिणियां ऐसी सेवाएं दे रही हैं जिनके लिए यदि पेशेवर कर्मचारी रखे जाएं तो भारी आर्थिक खर्च आएगा।

    एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में गृहिणियों के अवैतनिक श्रम का आर्थिक मूल्य देश की जीडीपी का लगभग 15 से 17 प्रतिशत तक हो सकता है। यह योगदान कई बड़े आर्थिक क्षेत्रों के बराबर या उनसे अधिक माना जाता है। इसके बावजूद गृहिणियों को आधिकारिक रूप से “आर्थिक रूप से निष्क्रिय” श्रेणी में रखा जाता है।

समय का सबसे बड़ा निवेश महिलाएं कर रही हैं
    भारत सरकार के टाइम-यूज सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय महिलाएं प्रतिदिन औसतन सात घंटे घरेलू कार्यों में लगाती हैं। इसके विपरीत पुरुष औसतन केवल एक घंटा घरेलू कार्यों के लिए देते हैं।

    यह अंतर केवल श्रम का नहीं बल्कि अवसरों का भी है। घरेलू जिम्मेदारियों के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं नौकरी, व्यवसाय, उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के अवसरों से दूर रह जाती हैं। यही कारण है कि भारत में महिला श्रम भागीदारी दर अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

घरेलू श्रम के तीन बड़े स्तंभ

    गृहिणियों का योगदान केवल खाना बनाने तक सीमित नहीं है।
    भोजन और पोषण
    परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए संतुलित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन की व्यवस्था करना।
    बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल
    शिक्षा, स्वास्थ्य, भावनात्मक समर्थन और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
    घर का प्रबंधन
    सफाई, बजट, खरीदारी, समय प्रबंधन और दैनिक आवश्यकताओं का संचालन करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी सेवाओं के लिए अलग-अलग पेशेवर कर्मचारी नियुक्त किए जाएं तो प्रति परिवार कम से कम 15 हजार रुपये प्रतिमाह या उससे अधिक का खर्च आ सकता है।

दुनिया के कई देशों ने दी है मान्यता
    घरेलू श्रम को औपचारिक मान्यता देने के प्रयास दुनिया के कई देशों में किए गए हैं।
    स्वीडन में बच्चों और परिवार की देखभाल में बिताए गए वर्षों के आधार पर महिलाओं को पेंशन क्रेडिट दिया जाता है। इससे उनकी सामाजिक सुरक्षा मजबूत होती है।

    कनाडा नियमित सर्वेक्षणों के माध्यम से घरेलू कार्यों में खर्च होने वाले समय का आकलन करता है और इन आंकड़ों का उपयोग सार्वजनिक नीतियां बनाने में करता है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भी ऐसी व्यवस्थाओं से सीख लेकर महिलाओं के श्रम को अधिक सम्मान और सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?
    उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान गृहिणियों को राष्ट्रनिर्माता बताया। न्यायालय ने कहा कि घरेलू कार्यों का समाज और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

    यह टिप्पणी केवल भावनात्मक नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे भविष्य में गृहिणियों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और आर्थिक मान्यता से जुड़े नए रास्ते खुल सकते हैं।

क्या गृहिणियों को वेतन मिलना चाहिए?
    इस विषय पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। कुछ लोगों का मानना है कि घरेलू श्रम को प्रत्यक्ष वेतन देना व्यावहारिक नहीं होगा, लेकिन इसके लिए पेंशन, बीमा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक पहचान जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं।

दूसरी ओर कुछ लोगों का तर्क है कि परिवार में गृहिणी के सभी खर्च पति द्वारा वहन किए जाते हैं, इसलिए अलग से आर्थिक मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं है। हालांकि महिला अधिकारों और विकास नीति के विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्थिक निर्भरता और आर्थिक मान्यता दोनों अलग विषय हैं।

इसके क्या परिणाम होंगे?
इस फैसले में ₹30,000 की राशि तक पहुंचने के लिए किसी विशिष्ट गणितीय या अनुभवजन्य आधार का उल्लेख नहीं किया गया है, हालांकि इसमें यह स्वीकार किया गया है कि “सख्त गणितीय गणना” गृहणियों की आर्थिक, सामाजिक और राष्ट्र निर्माण में भूमिका को पूरी तरह से नहीं दर्शा सकती। हालांकि न्यायालय ने पहले भी गृहणियों की सेवाओं को केवल इसलिए आर्थिक मूल्यहीन मानने के खिलाफ चेतावनी दी है क्योंकि वे औपचारिक आय उत्पन्न नहीं करती हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इसने घरेलू देखभाल के नुकसान का आकलन करने के लिए एक ठोस न्यूनतम मानदंड निर्धारित किया है।

देश की जीडीपी का 7 प्रतिशत तक हो सकता है गृहणियों के श्रम का आर्थिक मूल्य

घरों में करोड़ों गृहणियां (Housewives) जो अवैतनिक श्रम करती हैं, उनके श्रम का आर्थिक मूल्य जीडीपी का 7 प्रतिशत तक हो सकता है. उद्योग संघ फिक्की लेडीस आर्गनाइजेशन (FICCI Ladies Organization) की अध्यक्ष सुधा शिवकुमार ने  बातचीत में यह अहम बात कही. फिलहाल घरों में गृहणियों द्वारा किए गए काम को औपचारिक तौर पर श्रम के रूप में नहीं पहचाना जाता है. इसे GDP के आकलन में भी शामिल नहीं किया जाता है। 

गृहिणी के रूप में करोड़ों घरों में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अवैतनिक श्रम बेहद महत्वपूर्ण है, और देश की जीडीपी के आकलन में इसके आर्थिक मूल्य को भी शामिल किया जाना चाहिए. उद्योग संघ फिक्की लेडीस आर्गनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। 

 आर्गनाइजेशन की अध्यक्ष सुधा शिवकुमार ने कहा, गृहणियों के अवैतनिक श्रम को महत्व देना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका आर्थिक मूल्य देश की जीडीपी का 7 फीसदी तक हो सकता है। 

सुधा शिवकुमार ने कहा, “इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन, संयुक्त राष्ट्र और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) ने गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक कार्यों के आर्थिक मूल्यांकन पर कई अध्ययन किए हैं. एक सामान्य गणना के अनुसार गृहिणियों द्वारा किए गए अवैतनिक कार्यों का आर्थिक मूल्य सकल घरेलू उत्पाद के 7% तक हो सकता है। 

 

ओपन गोल्ड कप एमपी स्टेट ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सतना की मान्या पांडे ने जीता स्वर्ण पदक

ओपन गोल्ड  कप एमपी स्टेट ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सतना की मान्या पांडे ने जीता स्वर्ण पदक

सतना
 सागर जिले में आयोजित ओपन गोल्ड  कप एमपी स्टेट ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2026 में सतना की होनहार खिलाड़ी एवं पत्रकार मृदुल पांडेय की प्रतिभाशाली बेटी मान्या पांडे  ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्री सब जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम प्रदेश भर में रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से खेल प्रेमियों, प्रशिक्षकों और शहरवासियों में उत्साह का माहौल है।

बीते 12 से 14 जून तक  चली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से सैकड़ों खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में अलग-अलग आयु और भार वर्गों में मुकाबले आयोजित किए गए, जिनमें प्री सब जूनियर वर्ग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस वर्ग में मान्या पांडे ने अपने उत्कृष्ट खेल कौशल, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिचय देते हुए सभी मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। सतना मार्शल आर्ट अकादमी के संस्थापक एवं मुख्य प्रशिक्षक संदीप भारती ने बताया कि मान्या ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन तकनीक और संयम का प्रदर्शन किया। विपक्षी खिलाडिय़ों की कठिन चुनौती के बाद भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मान्या की मेहनत, समर्पण और नियमित अभ्यास का परिणाम है।

कोच संदीप भारती ने यह भी बताया कि अकादमी के अन्य खिलाडिय़ों ने भी प्रतियोगिता में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कई खिलाडिय़ों ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सतना की खेल प्रतिभा का परिचय दिया। खिलाडिय़ों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सतना में ताइक्वांडो खेल के प्रति बढ़ती रुचि और बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था प्रतिभाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। मान्या पांडे की इस उपलब्धि पर खेल जगत से जुड़े लोगों, शिक्षकों, अभिभावकों और शहरवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। खेल प्रेमियों ने विश्वास जताया है कि मान्या भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सतना, मध्य प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित करेंगी।

ATS की बड़ी कार्रवाई, आतंकी साजिश में राजस्थान से तीसरा आरोपी गिरफ्तार; MP में नेटवर्क फैलाने की थी योजना

भोपाल/अलवर
एमपी एटीएस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी साजिश से जुड़े मामले में तीसरे आरोपी शाकिर मेव को गिरफ्तार किया है। उसे राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से पकड़ा गया। शाकिर मेव सेकंड हेड कमांडर की भूमिका में था और साजिश में अहम भूमिका निभाता था। आरोपी को न्यायालय में पेश कर 20 जून तक रिमांड पर लिया है।

दूसरी ओर, भोपाल के काजी कैंप से गिरफ्तार मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ में जांच एजेंसियों को चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक उसे कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क सौंप रखा था।

जांच में यह भी सामने आया है कि उसे “लश्कर कमांडर” के नाम से नई पहचान दी गई थी, जिसके जरिए वह सोशल मीडिया नेटवर्क को बढ़ाने और युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था।

यह पहचान उसके साथी नईम अब्दुल्ला ने उपलब्ध कराई थी। दोनों को रिमांड पर लेकर अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है। जांच में पाकिस्तानी संपर्क, डिजिटल नेटवर्क, टारगेट किलिंग की साजिश और फंडिंग से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल हो रही है।

टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश
शुरुआती जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम और वाट्सएप ग्रुप्स के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। फराज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा करने के लिए ग्रुप बनाता था। वह पिछले करीब चार वर्षों से डिजिटल गतिविधियों में सक्रिय था। अब एटीएस डिजिटल गतिविधियों, विदेशी फंडिंग और पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

फराज का साथी नईम देवबंद से गिरफ्तार
इधर, फराज की निशानदेही पर उसके साथी नईम अब्दुल्ला को देवबंद से शनिवार को गिरफ्तार किया गया। देवबंद से गिरफ्तारी को जांच में अहम कड़ी माना जा रहा है क्योंकि इससे नेटवर्क के कनेक्शन और लिंक की दिशा स्पष्ट हो रही है। दोनों को अदालत में पेश करने के बाद 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है।

फराज को एटीएस ने हिरासत में लिया था
गुरुवार तड़के करीब 3:30 बजे काजी कैंप स्थित घर पर एटीएस की टीम ने दबिश दी थी। कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी। करीब 12 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम में तीन महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। टीम ने पहले घर को चारों तरफ से घेर लिया, फिर छत के रास्ते अंदर पहुंचकर फराज को हिरासत में लिया।

डॉक्टर के क्लिनिक पर काम करता था फराज
जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज मोहल्ले में ही एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने देवबंद में रहकर धार्मिक शिक्षा ली थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी नईम अब्दुल्ला से हुई थी।

नईम के जरिए फराज का संपर्क कथित रूप से विदेशी हैंडलर्स से हुआ। जांच एजेंसी को आशंका है कि दोनों के माध्यम से एक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी। अब एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क से प्रदेश में कितने लोग जुड़े थे।

मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच
फराज का मोबाइल जब्त कर फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल डेटा से उसके संपर्कों, गतिविधियों और कथित फंडिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच जारी है।

पूछताछ में सामने आया है कि फराज चार वर्षों से टेलीग्राम और वाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर कई ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। उसके संपर्कों की सूची तैयार की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके। उसके मोबाइल की CDR भी खंगाली जा रही है।

विदेशी फंडिंग की हो रही जांच
फराज ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसके पिता बैटरी रिपेयरिंग का काम करते हैं। परिवार में वह इकलौता लड़का है। बताया गया है कि पाकिस्तानी हैंडलर्स उसे गरीब तबके के युवाओं को जोड़ने और मिशन आगे बढ़ाने की सलाह देते थे। एटीएस उसके बैंकिंग रिकॉर्ड्स भी खंगाल रही है ताकि विदेशी फंडिंग का खुलासा हो सके।

स्कूटी से 12वीं टॉपर चांदनी के घर पहुंचे CM मोहन यादव, तंग गलियों में देख लोग रह गए हैरान

भोपाल
 विकसित भारत संकल्प अभियान के तहत सीएम मोहन यादव 15 जून को भोपाल के भीम नगर पहुंचे। सीएम ईवी स्कूटी से गलियों में पहुंचे थे। इस दौरान यहां के लोगों से उन्होंने संवाद किया और उनका हाल-चाल जाना है। साथ ही वह 12वीं की टॉपर चांदनी विश्वकर्मा के घर भी गए।

12वीं टॉपर के घर पहुंच गए सीएम मोहन यादव
सीएम मोहन यादव अपना काफिला छोड़कर ईवी स्कूटी से 12वीं टॉपर के घर पहुंचे । भीम नगर में चांदनी विश्वकर्मा का परिवार रहता है। सीएम को अपने घर में देखकर परिवार के लोग स्तब्ध थे। मोहन यादव ने परिवार के सभी सदस्यों से बात की है। साथ ही चांदनी के परिजनों के साथ सीएम ने सेल्फी भी ली है।

चांदनी को भविष्य की दी शुभकामनाएं
इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा कि 12वीं बोर्ड परीक्षा में अद्वितीय प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली चांदनी विश्वकर्मा के घर पहुंचकर उनके परिजनों से भेंट की। चांदनी को उसकी सफलता के लिए सीएम ने उसे बधाई दी। साथ ही कहा कि चांदनी ने विषम परिस्थितियों के बीच भी अपने परिश्रम, लगन और दृढ़ संकल्प से जो सफलता अर्जित की है, वह प्रेरणादायी है। उनकी उपलब्धि न सिर्फ अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए भी गर्व का विषय है।

आमजनों से की बात
सीएम यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफलतम 12 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर हमने पार्टी पदाधिकारियों के साथ यहां जनता से संपर्क-संवाद दिया। यहां तक आने के लिए ईवी का इस्तेमाल किया । इसे चलाकर अच्छा भी लगा। ईवी केवल पेट्रोल के दाम ही नहीं बचाती, बल्कि हमारे कई अन्य तरह के खर्चे भी कम करती है।

जनता रह गई अचंभित
गौरतलब है कि भीम नगर का माहौल पूरी तरह से बदला हुआ था। अमूमन अपने-अपने कामों में मशरूफ रहने वाले भीम नगर के लोग आज बेहद उत्साहित और जागरूक दिखाई दिए। सीएम को अचानक अपने सामने देख लोग अचंभित हो गए। लोगों को समझ में ही नहीं आया कि अचानक क्या हो गया। इस बीच सीएम ने वहां के लोगों से बात शुरू कर दी। उन्होंने बेटियों को गोद में लेकर दुलार किया और सेल्फी ली। इस दौरान जनता से उन्हें अपना पूरा हाल कह सुनाया। सीएम डॉ. यादव ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी जिंदगी भविष्य में और भी बेहतर होगी।

 

भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश, सीहोर में 61 किमी/घंटा की रफ्तार से चली आंधी; जानें MP में कब पहुंचेगा मानसून

भोपाल/जबलपुर /इंदौर 

मध्य प्रदेश में इन दिनों मानसून की दस्तक से पहले की प्री-मानसून गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। रविवार (14 जून) को राज्य के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बदला रहा और 30 से अधिक शहरों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। राजधानी भोपाल समेत उज्जैन, इंदौर, नर्मदापुरम और जबलपुर संभाग के अधिकांश जिलों में बादलों ने जमकर हाजिरी लगाई। इसके साथ ही रायसेन और नरसिंहपुर जैसे इलाकों में तेज धूलभरी आंधी चली, जबकि सीहोर में हवाओं की रफ्तार 72 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। इस दौरान प्रदेश में सबसे ज्यादा 42 मिलीमीटर बारिश उदयपुरा में मापी गई।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है. एमपी में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं और इसी के चलते आज (सोमवार) भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर, चंबल, शहडोल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून सामान्य तारीख से तीन से चार दिन की देरी से आगे बढ़ रहा है और 15 से 18 जून के बीच मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। 

राज्य में जून माह के पहले पखवाड़े में सामान्य से ज्यादा प्री-मानसूनी बारिश दर्ज की जा चुकी है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 65 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है. वहीं मानसून की औपचारिक एंट्री अभी बाकी है. जिसके बाद बारिश का आंकड़ा बढ़ सकता है. दूसरी ओर मालवा-निमाड़ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में चिलचिलाती गर्मी का असर भी बना हुआ है. ऐसे में सोमवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के दो रूप देखने को मिल सकते हैं. कहीं तेज धूप और उमस होगी, तो कहीं आंधी, तेज हवा और बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। 

आज इन जिलों में होगी बारिश!
मौसम विभाग के अनुसार आज जबलपुर, मुरैना, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, कटनी, आगर-मालवा, विदिशा, अशोकनगर, भिंड, पन्ना, दतिया, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, मंडला, राजगढ़, छिंदवाड़ा, दमोह, पांढुर्णा, सिवनी, सागर, बालाघाट, अनूपपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और डिंडौरी जिले में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 

तापमान में गिरावट और पचमढ़ी में बढ़ी ठंडक
तेज आंधी-तूफान और बारिश के चलते पूरे प्रदेश के तापमान में औसतन 5 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। राज्य के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से भी नीचे गिरकर 18.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिससे वहां अच्छी-खासी ठंडक महसूस की जा रही है। दूसरी ओर, रविवार को राजगढ़ जिला 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म इलाका रहा। इसके अलावा खंडवा में 40.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 40.4 डिग्री और खरगोन में पारा 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का 30 से ज्यादा शहरों के लिए अलर्ट
मौसम विभाग ने राज्य के एक बड़े हिस्से के लिए चेतावनी जारी करते हुए सजग रहने को कहा है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सीहोर, सिवनी, दमोह, दतिया, सतना और श्योपुरकलां सहित 30 से अधिक प्रमुख शहरों के लिए बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।

इन तीन जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ और आगे का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने विदिशा, रायसेन और सागर जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इन तीनों जिलों में मौसम ज्यादा खराब रह सकता है और यहाँ 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ ही बिजली चमकने और बारिश होने की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 24 घंटों तक प्रदेश के मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा और यह ऐसा ही बना रहेगा। हालांकि, इसके बाद आने वाले दिनों में तापमान में फिर से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

भोपाल में दिनभर बारिश…पारा लुढ़का, शिवपुरी में 33.2 डिग्री पहुंचा
रविवार को प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी और बारिश वाला मौसम रहा। भोपाल में रुक-रुककर पूरे दिन बारिश हुई। सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश हुई। कई इलाकों में तेज हवाओं से बिजली गुल हो गई, जबकि रायसेन में मकानों के छप्पर उड़ गए। खरगोन में निंदाई और बुआई का काम प्रभावित हुआ।

आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार, 5 बड़े शहरों में तापमान 40 डिग्री से नीचे चल रहा है। भोपाल में 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

खजुराहो समेत 4 जगहों पर पारा 40 डिग्री
खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ही ऐसे शहर रहे, जहां तापमान 40 डिग्री या इससे अधिक रहा हो। बाकी सभी शहरों में इससे कम ही दर्ज किया गया। शिवपुरी में सबसे कम 33.2 डिग्री, पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री, नर्मदापुरम-श्योपुर में 36.6 डिग्री, बैतूल में 36.7 डिग्री और शाजापुर में 36.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

इंदौर में सुबह से गरजा बुलडोजर, 100 से ज्यादा निर्माण ध्वस्त; मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

इंदौर 

इंदौर में आज सुबह से ही गुटकेश्वर मंदिर से लेकर सदर बाजार रोड तक बुलडोजर चलना शुरू हो गया। सड़क चौड़ीकरण निर्माण कार्य में बाधक बन रहे अवैध ढांचों और निर्माणों को हटाने की बड़ी कार्रवाई निगम के रिमूवल विभाग द्वारा की जा रही है। क्षेत्र के विकास और सुगम यातायात के लिहाज से इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक सड़क मार्ग पर कई वर्षों से लोग स्थाई और अस्थाई निर्माण कर चुके थे, जिससे रोजाना यातायात बाधित हो रहा था। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए निगम ने पहले से ही पूरी रणनीति तैयार कर ली थी ताकि मौके पर किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित न हो। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर अपर आयुक्त प्रखर सिंह, अभय राजनगवंकर, रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरे, भवन अधिकारी पल्लवी पाल, रिमूवल सहायक बबलू कल्याणे एवं अन्य विभागीय अधिकारी तथा भारी पुलिस बल मौजूद है। 

इंदौर में मास्टर प्लान सड़क पर बड़ी कार्रवाई
शहर के विकास को नई गति देने के उद्देश्य से इंदौर में मास्टर प्लान की सड़कों पर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई देखने को मिल रही है। निगम प्रशासन शहर के उन सभी प्रमुख मार्गों को चिन्हित कर चुका है जहां यातायात का दबाव बहुत अधिक रहता है लेकिन सड़कों की चौड़ाई कम होने के कारण रोजाना जाम की स्थिति बनती है। इसी कड़ी में गुटकेश्वर मंदिर मार्ग को भी शामिल किया गया है। मास्टर प्लान के तहत की जा रही इस कार्रवाई से आने वाले समय में क्षेत्र की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी और लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।

गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार तक सड़क चौड़ीकरण अभियान शुरू
निगम के रिमूवल अमले ने सुबह तय समय पर पहुंचकर गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार तक सड़क चौड़ीकरण का अभियान पूरी मुस्तैदी के साथ शुरू कर दिया। जैसे ही निगम की जेसीबी और पोकलेन मशीनें इलाके में पहुंचीं, वहां हड़कंप मच गया। हालांकि निगम ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क मार्ग के दोनों तरफ फैले उन सभी अतिक्रमणों को पूरी तरह से साफ करना है जो लंबे समय से सड़क निर्माण के कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे।

निगम और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर मौजूद
कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध की स्थिति से निपटने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर निगम और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम भारी संख्या में मौके पर तैनात रही। पुलिस अधिकारियों ने पूरे संवेदनशील इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और रिमूवल अमले को सुरक्षित माहौल प्रदान किया। संयुक्त टीम की मौजूदगी के कारण किसी भी असमाजिक तत्व को कार्रवाई में बाधा डालने का मौका नहीं मिला और निगम की टीम बिना किसी बड़े व्यवधान के अपना काम करती रही।

100 से अधिक बाधकों को हटाने की कार्रवाई जारी
निगम अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे मार्ग पर सर्वे के दौरान 100 से अधिक बाधकों को चिन्हित किया गया था, जिन्हें हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है। इन बाधकों में दुकानों के आगे निकले हुए ओटले, अवैध रूप से बनाई गई सीढ़ियां, शेड और पक्के निर्माण शामिल हैं। निगम का दस्ता एक सिरे से सभी चिन्हित किए गए बाधकों को जमींदोज करता हुआ आगे बढ़ रहा है ताकि सड़क निर्माण के लिए पूरी जमीन खाली कराई जा सके।

कई प्रभावितों ने खुद ही तोड़े बाधक हिस्से
इस पूरी मुहिम के दौरान एक सकारात्मक तस्वीर भी देखने को मिली जहां कई प्रभावित मकान और दुकान मालिकों ने निगम की कार्रवाई का विरोध करने के बजाय समझदारी दिखाई। इन प्रभावितों ने प्रशासन की बात को समझा और अपने निर्माण के बाधक हिस्सों को खुद ही हथौड़े लेकर तोड़ना शुरू कर दिया। लोगों द्वारा स्वयं अतिक्रमण हटाए जाने से निगम अमले को भी काफी सहूलियत हुई और काम की गति में तेजी आई।

मास्टर प्लान के तहत 60 फीट चौड़ी होगी सड़क
यह पूरी कवायद शहर के मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने के लिए की जा रही है, जिसके तहत इस मार्ग को कुल 60 फीट चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में सड़क की चौड़ाई काफी कम होने के कारण यहां से बड़े वाहनों का गुजरना बेहद मुश्किल होता था। सड़क के 60 फीट चौड़ा हो जाने के बाद न केवल वाहन चालकों को आसानी होगी, बल्कि दोनों तरफ पैदल चलने वालों के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सकेगी।

क्षेत्र में यातायात सुधार के लिए चल रही कार्रवाई
सदर बाजार और गुटकेश्वर मंदिर मार्ग पर रहने वाले स्थानीय निवासियों और यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को लंबे समय से भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा था। त्योहारों और व्यावसायिक समय में स्थिति और ज्यादा बदतर हो जाती थी। इसी क्षेत्र में यातायात सुधार के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह बड़ी कार्रवाई की जा रही है ताकि आने वाले समय में ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके और सुचारू आवागमन सुनिश्चित हो।

निगम का दावा पूर्व सूचना के बाद शुरू की गई मुहिम
अक्सर ऐसी कार्रवाइयों के बाद यह आरोप लगते हैं कि प्रशासन ने अचानक कार्रवाई की, लेकिन इस मामले में नगर निगम ने साफ किया है कि यह पूरी मुहिम प्रभावितों को पूर्व सूचना देने के बाद ही शुरू की गई है। निगम अधिकारियों का दावा है कि सभी बाधक निर्माणकर्ताओं को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे और उन्हें स्वयं अपना अतिक्रमण हटाने की पर्याप्त मोहलत भी दी गई थी। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद ही निगम ने यह कदम उठाया है। 

उज्जैन रामघाट पर अनोखी पहल, तीर्थ पुरोहित दक्षिणा में मांग रहे शिप्रा को स्वच्छ रखने का संकल्प

उज्जैन 

शिप्रा सहित देशभर के नदी-तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए रामघाट के तीर्थ पुरोहितों ने अनूठा नवाचार शुरू किया है। अब यहाँ पूजा-आरती के बाद श्रद्धालुओं से नकद दक्षिणा के बजाय सिर्फ नदी स्वच्छता का संकल्प मांगा जा रहा है।
हर शाम होने वाली शिप्रा सांध्य आरती के समापन पर पुरोहित भक्तों को नदी स्वच्छ रखने का वचन दिलाते हैं। श्री क्षेत्र तीर्थ पुरोहित पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने बताया कि मात्र 51 दिन में करीब 2.50 लाख लोगों को यह संकल्प दिलाया जा चुका है।

पुरोहितों का मानना है कि यदि यही जनभागीदारी देश के सभी धार्मिक घाटों पर लागू हो, तो बिना किसी भारी-भरकम बजट के जल संरचनाएं स्वच्छ हो सकेंगी।

वैष्णव तिलक और आभूषण अर्पित कर राजा स्वरूप श्रृंगार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया।

भगवान महाकाल का जटाधारी स्वरूप में चंदन, वैष्णव तिलक एवं आभूषण अर्पित कर राजाधिराज स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया।

इससे पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया। मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान कर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर दिव्य श्रृंगार किया गया।

श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पित करने के पश्चात भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों से निर्मित हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्प धारण कर भगवान महाकाल ने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। इसके बाद फल एवं मिष्ठान का भोग लगाया गया।

भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

 

मोबाइल फटने की अफवाह बनी मौत की वजह, मुरैना में चलती ट्रेन से कूदे यात्री; 4 की दर्दनाक मौत

मुरैना
 प्रदेश के मुरैना जिले के हेतमपुर और राजस्थान के  धौलपुर रेल खंड के बीच रविवार शाम खजुराहो उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने के बाद फैली आग की अफवाह से घबराए यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। इसके बाद कुछ यात्री ट्रेन से कूदकर समीप की दूसरी रेल लाइन पर आ गए। इसी बीच आई पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से तीन महिलाओं और एक मासूम बच्चे समेत कुल चार की दर्दनाक मौत हो गई।  

मृतकों में तीनों महिलाएं आगरा की 
मृतकों में आफरीन पत्नी नदीम खान (35) निवासी सुल्तानगंज की पुलिया, आगरा, उनका चार वर्षीय बेटा असद खान, शकुंतला पत्नी भूरी सिंह परमार (60) निवासी कचहरा थोक, रुनकता, आगरा तथा विरमा देवी पत्नी गिरधारी गिरि (60) निवासी गेसोरा, थाना महाजन, जिला बीकानेर (राजस्थान) शामिल हैं।

जनरल कोच से हुई अलार्म चेन पूलिंग
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रेन के एक कोच में किसी यात्री का चार्जिंग पर लगा मोबाइल फट गया था। इस कारण आग की अफवाह फैली। हादस रविवार शाम 4:15 बजे उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के हेतमपुर-धौलपुर रेलखंड पर हुआ। गाड़ी संख्या 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के जनरल कोच (इंजन से दूसरा कोच) में किसी ने अलार्म चेन पूलिंग किया था। इस कारण ट्रेन सेक्शन में रुक गई थी। ट्रेन रुकने के दौरान कुछ यात्री नीचे उतरकर समीपवर्ती रेलवे लाइन पर चले गए। इसी दौरान अप दिशा से आ रही गाड़ी संख्या 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आने से यात्रियों के हताहत होने की सूचना मिली। 

चीख पुकार मच गई
घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और मुरैना पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया तथा मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। 

मोबाइल ब्लास्ट की चर्चा से फैली दहशत
घटना उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के हेतमपुर-धौलपुर रेलखंड की है. गाड़ी संख्या 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस रविवार शाम करीब 4:15 बजे हेतमपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच चल रही थी. इसी दौरान एक कोच में मोबाइल फटने जैसी घटना की चर्चा फैल गई. देखते ही देखते यात्रियों में डर का माहौल बन गया. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि किसी यात्री ने अलार्म चेन पुलिंग कर दी, जिससे ट्रेन बीच रास्ते में रुक गई. ट्रेन रुकते ही कई यात्री जल्दबाजी में नीचे उतर गए। 

दूसरी लाइन पर पहुंच गए यात्री
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन से उतरने के बाद कुछ यात्री पास की दूसरी रेलवे लाइन की ओर चले गए. उसी समय दूसरी तरफ से गाड़ी संख्या 20424 फिरोजपुर-सिवनी पातालकोट एक्सप्रेस तेज गति से वहां से गुजर रही थी. ट्रैक पर मौजूद यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला और वे ट्रेन की चपेट में आ गए. इस हादसे में तीन महिलाओं और एक बच्चे सहित कुल चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। 

राहत और बचाव कार्य शुरू
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP), स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किया गया और प्रभावित यात्रियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचना दी.  रेलवे अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. मोबाइल ब्लास्ट की चर्चा के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जांच र रहा है। 

दिल्ली-मुंबई मार्ग पर यातायात प्रभावित
इस हादसे के चलते दिल्ली-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर कुछ समय के लिए रेल यातायात प्रभावित रहा। कई ट्रेनों को रास्ते में रोका गया, जबकि प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गईं। बाद में ट्रैक को क्लियर कर रेल यातायात सामान्य किया गया।

मोड़ होने से सामने से आ रही ट्रेन नहीं दिखी : डीआरएम
झांसी रेल मंडल के डीआरएम अनुरुद्ध कुमार के अनुसार, जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां रेलवे ट्रैक पर मोड़ होने के कारण यात्रियों को सामने से आ रही ट्रेन दिखाई नहीं दी। प्रारंभिक जांच में हादसे की मुख्य वजह आग लगने की अफवाह के बाद हुई चेन पुलिंग और यात्रियों का ट्रैक पर उतरना सामने आया है। यह हादसा केवल एक रेल दुर्घटना नहीं, बल्कि अफवाह, दहशत और जल्दबाजी का दर्दनाक परिणाम है, जिसने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रेन में आग लगने की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों का मानना है कि अफवाह के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस और रेलवे की टीमें सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

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