मध्य प्रदेश की जेलों में बड़ा बदलाव, 58 साल पुराने बंदी नियमों में संशोधन की तैयारी

भोपाल
राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में कुछ बदलाव किए हैं। इसमें अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियम हटाकर उनकी जगह नए जोड़े गए हैं। पहली बार मैन्युअल में निर्धारित किया गया है की जेल में पांच कैदियों के बीच में एक शौचालय सीट होगी। हालांकि, अभी आठ कैदियों पर एक शौचालय बनाने के निर्देश जेल मुख्यालय की तरफ से थे।
आदतन और गैर आदतन अपराधी को किया परिभाषित
दूसरा बड़ा बदलाव यह कि आदतन और गैर आदतन अपराधी को पहली बार परिभाषित किया गया है। लगातार पांच वर्ष की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग अवसरों पर एक या एक से अधिक अपराधों में सजा पा चुके अपराधी को आदतन और अन्य को गैर आदतन माना जाएगा। दोनों को रखने की व्यवस्था व कुछ और शर्तें अलग-अलग रहेंगी।

भेदभाव करने वाले कैदियों को मिलेगी अनोखी सजा
भोजन बनाने वाली टोली में गैर आदतन अपराधी ही होंगे। यदि कोई कैदी भेदभावपूर्ण रवैया रखते हुए टोली द्वारा तैयार खाना खाने से आपत्ति करता है तो दंडस्वरूप उस बंदी को भोजन बनाने में लगाया जाएगा और उसे समस्त कैदियों का भोजन पकाना होगा।

पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्रीय एवं जिला जेल जहां कैदियों की संख्या अधिक है वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई का काम किया जाएगा। कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए व्यवस्था की जाएगी।

संशोधित नियमों में दोषसिद्ध कैदियों को दो श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया गया है। पहली श्रेणी आदतन अपराधियों की होगी जबकि दूसरी श्रेणी गैर-आदतन अपराधियों की। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मामलों में दो से अधिक बार सजा प्राप्त कर चुका है और उसकी सजा किसी अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि पांच वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताए गए समय को शामिल नहीं किया जाएगा। बाकी सभी दोषसिद्ध कैदी गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखे जाएंगे। जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने कई नए मानक तय किए हैं। अब हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रत्येक पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शौचालयों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांग बंदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में वेस्टर्न सीट वाले शौचालय भी बनाए जाएंगे।

रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी
रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो।

कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर
नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।

एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी
मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं।

जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी शौचालयों में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़े मग की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों के भीतर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा मूत्रालय बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी और साबुन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भोजन बनाने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल गैर-आदतन और स्वस्थ बंदियों को ही भोजन तैयार करने वाली टोली में शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। रसोई में प्रवेश करने वाले बंदियों को स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ धोना भी जरूरी किया गया है। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाता पाया गया या भोजन को दूषित करने की कोशिश करता है तो उसे तत्काल उस कार्य से हटा दिया जाएगा।

पहली बार रोटी बनाने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आटा स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा और रोटियों के लिए समान आकार की लोइयां तैयार की जाएंगी। रोटियों को ठीक तरीके से बेलकर गर्म तवे पर संतुलित तापमान में सेंका जाएगा ताकि वे कच्ची या जली हुई न रहें। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। जेल विभाग का कहना है कि इससे भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी बंदियों को एक समान भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को भी विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार आवश्यकता होने पर उन्हें निर्धारित समय से पहले बैरक से बाहर निकलने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके लिए मुख्य प्रहरी की मंजूरी आवश्यक होगी। हालांकि यह सुविधा केवल अल्प अवधि की सजा काट रहे बंदियों को ही दी जाएगी। कपड़ों की सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब प्रत्येक बंदी को नियमित रूप से साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। कपड़े, कंबल और बिस्तरों की समय-समय पर धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती कैदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में जरूरत के अनुसार वाशिंग मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

मध्य प्रदेश की जेलों में वर्तमान में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। राज्य की 132 जेलों में करीब 45 हजार से 48 हजार कैदी निरुद्ध हैं जबकि कुल स्वीकृत क्षमता लगभग 30 हजार के आसपास है। इनमें बड़ी संख्या विचाराधीन बंदियों की है। भीड़भाड़ के कारण स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार चुनौतियां सामने आती रही हैं। जेल विभाग का मानना है कि नए संशोधन जेल प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। साथ ही बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन स्तर में भी सुधार होगा। आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान से सुरक्षा प्रबंधन मजबूत होगा जबकि भोजन और सफाई संबंधी नए नियम जेलों को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित करने में सहायक साबित हो सकते हैं।

धर्मेंद्र प्रधान का ऐलान: 21 जून को दोबारा होगी NEET परीक्षा, छात्रों से कहा- पढ़ाई पर रखें पूरा फोकस

भोपाल 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शुक्रवार रात भोपाल पहुंचे। भोपाल एयरपोर्ट पर दैनिक भास्कर ने प्रधान से पूछा कि नीट पेपरलीक मामले में लगातार आपके इस्तीफे की मांग हो रही है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- नीट की परीक्षा दोबारा 21 जून को होगी। 

21 जून को बहुत व्यवस्थित तरीके से नीट की परीक्षा की जाएगी। मैं आपके माध्यम से अपील करता हूं सभी समाज का सहयोग चाहिए। एनटीए ने परीक्षार्थियों को 15 मिनट का और एक्स्ट्रा टाइम देने का तय किया है।

प्रधान बोले- टीएमसी कोई पार्टी नहीं पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस में लगातार हो रही टूट पर धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा- वो तो उनका अंदरुनी मामला है वो कह पाएंगे क्या हो रहा है वहां तो बंगाल की जनता ने बीजेपी को बहुत बड़ा आशीर्वाद दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा जताया।

हमारे नए मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं लोगों का दिल जीत रहे हैं बंगाल की भूमि को एक बार फिर नई ऊंचाई तक ले जाने का काम कर रहे हैं। तृणमूल तो कोई पार्टी नहीं दो परिवार की एक व्यवस्था थी उनके बारे में वो जानें।

नीट यूजी का एग्जाम का टाइम 15 मिनट बढ़ा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने NEET UG रीएग्‍जाम में कुछ बदलाव किए हैं। नए नोटिस के तहत, परीक्षा का समय अब 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया गया है। इसके अलावा आंसर शीट में रफ वर्क के लिए भी जगह बढ़ाई गई है। NEET UG 2026 इस साल पेपर लीक के चलते रद्द कर दिया गया था। रीएग्‍जाम अब 21 जून को आयोजित किया जाना है जिसे लेकर नए बदलाव किए गए हैं।

NEET-UG परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को NTA ने इसे रद्द कर दिया। मामले की जांच CBI कर रही है और अब 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा होगी।

लॉकडाउन में रहेंगे पेपर सेटर्स
एग्जाम होने तक पेपर सेटर्स को कड़े प्रतिबंध का पालन करना होगा। उन्‍हें 21 जून तक लॉकडाउन में रखा जाएगा ताकि पेपर लीक होने की आशंका न रहे। एग्जाम आयोजन के लिए देश भर के 551 शहर और विदेशों में 14 शहरों को चुना गया है।

पेपर ले जाने के लिए एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल
अधिकारियों के अनुसार एग्जाम से संबंधित सभी काम जैसे प्रश्नों की सेटिंग, ट्रांसलेशन, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रिब्यूशन की कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सरकार द्वारा क्वेश्चन पेपर से संबंधित सभी सामान ले जाने के लिए इंडियन एयरफोर्स एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा।

डिजिटल क्षेत्र में अधिकारी 24 घंटे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग पर नजर जमाए हुए हैं ताकि फेक क्वेश्चन पेपर, गलत सूचनाओं और संदिग्ध गतिविधियों को एग्जाम से दूर रखा जा सके।

एक्सपर्ट को खुद पता नहीं होगा कि किस एग्जाम के पेपर बना रहे हैं
NTA ऐसा नया सिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले एक्पर्ट्स को भी पता नहीं होगा कि वह किस एग्जाम के क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की नई योजना के तहत अलग-अलग सब्जेक्ट के एक्सपर्ट्स सिर्फ प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों को एक बड़े डिजिटल बैंक में रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इसमें करीब 10 हजार प्रश्न हो सकते हैं। बाद में टेक्निक की मदद से इन प्रश्नों से फाइनल एग्जाम पेपर तैयार होगा।

NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।

इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं।

भोपाल में ATS का बड़ा खुलासा: कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का भंडाफोड़, मोहम्मद फराज गिरफ्तार

भोपाल

मध्य प्रदेश ATS ने भोपाल से एक ऐसे कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसके तार पाकिस्तान, देवबंद, डार्क ऐप्स, जिहादी साहित्य, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग और अफगानिस्तान तक जाते बताए जा रहे हैं. पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार 35 वर्षीय मोहम्मद फराज को एजेंसी एक ऐसे इंटरस्टेट नेटवर्क की अहम कड़ी मान रही है, जिसे कथित तौर पर लोन वुल्फ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा था. निर्देश साफ थे. हथियार खरीदो, तैयार रहो और जरूरत पड़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार रहो. जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को मिलिशिया ट्रेनिंग के बाद दुनिया के दूसरे देशों में भी जिहाद के नाम पर लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी थी।

पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें
MP ATS के IG डॉ. आशीष ने बताया, “मोहम्मद फराज, जो पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है, उसे MP ATS ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया. अदालत ने उसे विस्तृत पूछताछ के लिए 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

जानकारी के अनुसार फराज भोपाल में एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था. बाहर से सामान्य जिंदगी, लेकिन मोबाइल और ऑनलाइन गतिविधियों में एजेंसियों को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर उसकी गहन जांच की जा रही है. ATS का दावा है कि वह कथित तौर पर स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था।

जांच के दौरान ATS ने आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें बरामद करने का दावा किया है. एजेंसी अब उसके डिजिटल डेटा, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन संपर्कों और संदिग्ध ग्रुप्स की परतें खोल रही है।

मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी
सूत्रों के अनुसार फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था. वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था. एजेंसियों को शक है कि वह कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच में प्रारंभिक तौर पर गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी सामने आने की बात कही जा रही है।

ATS के मुताबिक यह कार्रवाई खास इनपुट के आधार पर की गई. एजेंसी को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी WhatsApp ग्रुप से जुड़ा हुआ है और सीमा पार बैठे हैंडलर के निर्देश पर मध्य प्रदेश सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था. ATS का दावा है कि नईम ने ही फराज को पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा. इसके बाद फराज धीरे-धीरे इस नेटवर्क में गहराई तक उतरता चला गया।

मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई
जांच के दौरान देवबंद के एक मदरसे से जुड़े कुछ संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है. एजेंसियां अब इन संपर्कों की भूमिका की जांच कर रही हैं. ATS यह पता लगाने में जुटी है कि फराज किन-किन लोगों के संपर्क में था, क्या कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था और क्या स्थानीय स्तर पर भी उसे मदद मिल रही थी।

जांच एजेंसी के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज को कथित तौर पर जिहाद के लिए उकसाया. उसे बताया गया कि भारत में कई युवाओं को पहले ही तैयार किया जा चुका है और अब उसे भी इसी काम के लिए खुद को तैयार करना होगा. ATS सूत्रों का दावा है कि फराज इस कदर कट्टरपंथी हो चुका था कि वह हैंडलर के किसी भी आदेश को अंजाम देने के लिए तैयार था।

शुरुआती पूछताछ में फराज ने कथित तौर पर बताया कि वह Telegram और WhatsApp के जरिए भारत, पाकिस्तान और दूसरे देशों के कई संदिग्ध कट्टरपंथी समूहों से जुड़ा हुआ था. जांच में यह भी सामने आया है कि नईम अब्दुल्ला ने उसे मारे गए पाकिस्तानी आतंकी खालिद सैफुल्लाह का नाम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया था।

युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने का काम
ATS का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े युवाओं को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के जरिए दहशत फैलाने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था. उन्हें पासपोर्ट बनवाने को कहा गया था, ताकि आगे चलकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाकर कथित आतंकी प्रशिक्षण लिया जा सके ।

जांच एजेंसी के मुताबिक फराज ने पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर अपना पासपोर्ट भी बनवा लिया था. वह अफगानिस्तान या पश्चिम एशिया जाने के लिए तैयार था. एजेंसियां अब यह खंगाल रही हैं कि क्या उसकी विदेश यात्रा की कोई तारीख, रूट या फंडिंग चैनल भी तय किया गया था।

ATS सूत्रों के अनुसार युवाओं को भड़काने के लिए इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कथित प्रशिक्षण वीडियो, जिहादी साहित्य और डिजिटल दस्तावेज साझा किए जा रहे थे. फराज के मोबाइल से बरामद कथित सामग्री को एजेंसी उसके बयानों की पुष्टि करने वाला अहम डिजिटल सबूत मान रही है।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तानी हैंडलर ने फराज और इस ग्रुप से जुड़े अन्य युवाओं को प्रतिबंधित संगठन PFI के कथित Mission 2047 एजेंडे की ओर भी धकेलने की कोशिश की. आरोप है कि फराज से शपथ दिलवाई गई और लोकतांत्रिक व्यवस्था को न मानते हुए हथियारबंद संघर्ष के लिए तैयार रहने को कहा गया।

इस मामले में भोपाल के STF थाने में मोहम्मद फराज और देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) और 18 के तहत केस दर्ज किया गया है. नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है।

भोपाल पुलिस तक को नहीं थी इस एक्शन की जानकारी
आरोपी की गिरफ्तारी और पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई. सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन की जानकारी भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस तक को नहीं दी गई थी. ATS ने गिरफ्तारी से लेकर पूछताछ तक पूरे ऑपरेशन को बेहद सीमित दायरे में रखा।

अब ATS और अन्य एजेंसियां इस कथित पैन-इंडिया नेटवर्क की पूरी कुंडली खंगाल रही हैं. फराज के फोन, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, पासपोर्ट, विदेशी संपर्कों, देवबंद लिंक, डार्क ऐप्स और स्थानीय संपर्कों की जांच की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भोपाल से पकड़ा गया फराज सिर्फ एक कट्टरपंथी युवक था या फिर सीमा पार से रिमोट कंट्रोल हो रहे एक बड़े इंटरस्टेट मॉड्यूल का हिस्सा. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में देश के किन-किन शहरों से युवा जुड़े थे और क्या कोई बड़ा हमला अंजाम देने की तैयारी जमीन तक पहुंच चुकी थी. फराज फिलहाल 16 जून तक ATS रिमांड पर है. पूछताछ में एजेंसी के सामने तीन बड़े सवाल हैं. पाकिस्तान में बैठा हैंडलर कौन है, इंटरस्टेट ग्रुप में कितने लोग जुड़े हैं और क्या लोन वुल्फ हमलों की तैयारी सिर्फ मोबाइल स्क्रीन तक थी या उससे आगे भी बढ़ चुकी थी।

MP में तीसरी संतान वाले अफसर की नौकरी गई, CM के बयान के 3 दिन बाद विभाग ने किया बर्खास्त

भोपाल
मध्यप्रदेश की नौकरशाही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी नियमों और राजनीतिक घोषणाओं के बीच चल रहे टकराव को उजागर कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में स्पष्ट कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं छीनी जाएगी, लेकिन उनकी घोषणा के बाद ही सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को तीसरी संतान के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जिस नियम के तहत कार्रवाई हुई, उसी नियम को लेकर सरकार बदलाव के संकेत दे चुकी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री राहत का संदेश दे चुके थे, तब विभाग ने इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की?

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर को बर्खास्त करने का आदेश गुरुवार को जारी किया गया। यह शुक्रवार को सामने आया।

CM ने तीन संतान वाला प्रस्ताव किया था रद्द मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था।

मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

नौकरी के दौरान हुआ तीसरी संतान का जन्म
दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिका
यत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था।

दरअसल, अशोक सिंह परिहार पर आरोप था कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ। विभागीय जांच में आरोप सही पाए गए और दस्तावेजों के आधार पर यह स्थापित हुआ कि उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। जांच रिपोर्ट के बाद पंजीयन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।

दिलचस्प बात यह है कि परिहार ने अपनी सफाई में कहा था कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, लेकिन विभाग ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि 1992 से सरकारी सेवा में रहने वाला कर्मचारी नियमों से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकता।

जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही
जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।

अफसर ने कहा था- नियम की जानकारी नहीं
जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।

अब इस पूरे घटनाक्रम ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या मुख्यमंत्री की घोषणा केवल भविष्य की नियुक्तियों के लिए थी या वर्तमान कर्मचारियों पर भी लागू होनी थी? यदि सरकार नियम बदलना चाहती थी तो विभागों को स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिए गए? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या एक अधिकारी की नौकरी उस समय चली गई जब सरकार उसी नियम को बदलने की तैयारी में थी?

फिलहाल पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अभी तक कोई नया शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए विभाग ने मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई की है। वहीं अशोक सिंह परिहार के पास अब विभागीय अपील और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प मौजूद है।

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की नौकरी का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की उस खाई का भी है, जहां एक तरफ राजनीतिक घोषणा होती है और दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था के आधार पर फैसले जारी रहते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

MP Monsoon Update: कब आएगा मानसून? भीषण गर्मी से जूझ रहे जिलों को जल्द राहत, 60 Kmph तूफान का अलर्ट

भोपाल
 मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत और आफत दोनों एक साथ दरवाजे पर खड़ी हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके अगले 4 दिनों में मध्यप्रदेश में एंट्री करने की उम्मीद है। हालांकि, मानसून की आधिकारिक दस्तक से पहले ही प्रदेश का मौसम पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए कई जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

इन जिलों में ओलावृष्टि और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सिवनी जिलों में तेज हवाओं के साथ ओले गिरने की आशंका है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर और सागर समेत करीब 40 से अधिक जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।

दूसरी तरफ, पश्चिमी मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, धार और खरगोन जिलों में फिलहाल गर्मी और उमस का असर बना रहेगा।

एमपी में 4 दिन की देरी से आएगा मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल मध्यप्रदेश में मानसून अपने तय समय से 4 दिन की देरी से एंट्री करेगा। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से (बघेलखंड और महाकौशल के रास्ते) से 17-18 जून को मानसून दस्तक दे सकता है। इसके बाद अगले 10 से 15 दिनों में यह धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। तब तक प्रदेश में प्री-मानसून एक्टिविटीज का दौर इसी तरह जारी रहेगा।

मौसम का चल रहा खेल, कहीं भारी बारिश, कहीं सूखा
मौसम विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान में हो रही बारिश का वितरण बेहद असमान है। पिछले 24 घंटों में पूर्वी मध्यप्रदेश के छतरपुर (गौरिहार में सबसे ज्यादा 56 मिमी), पन्ना, सतना और रीवा में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, सतना में सामान्य से 893% और छतरपुर में 601% अधिक वर्षा हो चुकी है।

इन इलाकों में अभी भी सूखे जैसे हालात
इसके उलट, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम जैसे मध्य व पश्चिमी जिलों में अभी तक सूखे जैसे हालात हैं और लोग पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से रीवा और सतना में जहां रात का तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक गिर गया है, वहीं भोपाल-रायसेन में रातें अब भी गर्म हैं।

किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, बुआई में न करें जल्दबाजी
मौसम विशेषज्ञों ने खरीफ फसलों (सोयाबीन, धान, मक्का) की तैयारी कर रहे किसानों को विशेष सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में हो रही बारिश मुख्यतः स्थानीय बादलों और प्री-मानसून का नतीजा है, यह व्यापक मानसूनी वर्षा नहीं है।

14 जून को योग के ऑनलाइन सत्र में हर नागरिक हो शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

14 जून को योग के ऑनलाइन सत्र में हर नागरिक हो शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेशवासियों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की अपील
“घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” के संकल्प को साकार करने में बनें सहयोगी

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों से ऑनलाइन योग सत्र में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। आज अनेक राष्ट्र योग के महत्व को स्वीकार और अंगीकार कर चुके हैं। योग दिवस 21 जून पर अनेक आयोजनों के साथ ही 14 जून को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जा रहा है। बीस मिनिट के इस ऑनलाइन सत्र में कोई भी नागरिक हिस्सा ले सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : 2026 के सातवें काउन्ट डाउन के अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 14 जून, 2026 को प्रातः 06:15 बजे से 07:35 बजे तक एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र के आयोजन का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़ते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग समाज का निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें और योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाएं।

टोल फ्री नंबर सुविधा

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए टोल-फ्री नम्बर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की गई अपील में कहा है कि आइए, हम सभी मिलकर “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” के संकल्प के साथ अब हर घर योग को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सहभागी बनें और स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

मोहन यादव के फैसले का इंतजार, लाखों कर्मचारियों की प्रमोशन फाइल पर टिकी निगाहें

भोपाल
 मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है. दरअसल प्रदेश में पिछले 10 सालों से थमी हुई प्रमोशन की प्रक्रिया अब एक बार फिर कानूनी फेरबदल के भंवर में फंस गई है. हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित होने के बाद भी, मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरण के कारण अब नए सिरे से बेंच का गठन होगा और दोबारा सुनवाई की जाएगी. इससे न केवल सेवारत कर्मचारियों का इंतजार लंबा हो गया है, बल्कि राज्य की आगामी नई भर्तियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 

मई 2016 से पूरी तरह ठप है पदोन्नति व्यवस्था
मध्य प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति मई 2016 से पूरी तरह से रुकी हुई है. दरअसल हाईकोर्ट द्वारा पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त किए जाने के बाद से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है. सरकार ने प्रशासनिक काम सुचारू रूप से चलाने के लिए कई अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार तो सौंप दिया, लेकिन उन्हें इस पद का कोई वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं हुआ. पद रिक्त न होने के कारण नीचे के पदों पर नई नियुक्तियां भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। 

​नए नियम भी कोर्ट में उलझे, सामान्य वर्ग की आपत्ति
गौरतलब ​है कि, पदोन्नति का रास्ता साफ करने के लिए राज्य सरकार ने सभी पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श कर नए नियम तैयार किए थे. हालांकि सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इन नए नियमों पर गहरी आपत्ति जताते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गहन सुनवाई की. सरकार ने नए नियमों के पक्ष में कई मजबूत तर्क रखे और आखिरकार 17 फरवरी को अदालत ने इस पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। 

मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट जाने से फंसा पेच
कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी बताते हैं कि, ”​सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि सामान्य परिस्थितियों में सुरक्षित रखे गए फैसलों को 90 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए. इसी निर्देश के कारण कर्मचारियों में उम्मीद जागी थी कि जून के प्रथम सप्ताह में अंतिम निर्णय आ जाएगा. लेकिन इसी बीच मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हो गई. नियमानुसार अब इस मामले की सुनवाई के लिए पहले नई बेंच का गठन किया जाएगा और नए सिरे से पूरी बहस सुनी जाएगी, जिसमें काफी समय लग सकता है। 

​ढाई लाख पदों की नई भर्तियों भी पर पड़ेगा सीधा असर
विशेषज्ञ के अनुसार, इस कानूनी गतिरोध का सीधा असर राज्य सरकार के रोजगार लक्ष्यों पर भी पड़ रहा है. सरकार ने वर्ष 2028 तक ढाई लाख पदों पर भर्ती का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. वर्तमान में 78 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला लंबित होने से 13 प्रतिशत पद पहले से रुके हैं. अब प्रमोशन रुकने से पुराने पद खाली नहीं होंगे, जिससे स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नई भर्तियां पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई हैं। 

कपास किसानों को मोहन सरकार का बड़ा तोहफा, मंडी टैक्स आधा; ‘सफेद सोने’ की खेती को मिलेगा बढ़ावा

बुरहानपुर
 मध्यप्रदेश में कपास यानी सफेद सोना उगाने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. हाल ही में मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने कपास उत्पादक किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है, कपास पर लागू मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत (एक रुपए प्रति सैकड़ा) से घटाकर 0.50 प्रतिशत (50 पैसे प्रति सैकड़ा) कर दिया गया है, बीतें दिनों विधायक अर्चना चिटनीस ने मुख्यमंत्री के सामने कपास पर मंडी शुल्क घटाने की मांग रखी थी. अब सीएम ने चिटनिस की मांग पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. उइससे कपास उत्पादक किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। 

फिर खिल उठेगा कपास उद्योग
मोहन यादव सरकार के इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों, व्यापारियों सहित कृषि आधारित उद्योगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जाग उठी है. किसानों ने बताया कि बुरहानपुर में करीब एक दशक से ज्यादा समय से कपास उद्योग प्रभावित हो चुका है, अधिकांश जिनिंग फैक्ट्रियां बंद करके उद्योगपतियों ने पलायन किया है, लेकिन अब मंडी शुल्क कम किए जाने से दोबारा कपास जिनिंग शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। 

प्रदेश के इन कपास उत्पादक क्षेत्रों को होगा फायदा
इस निर्णय का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है, जो उद्योग पलायन कर चुके हैं, वह दोबारा लौट सकते हैं. खास बात यह है कि मोहन यादव सरकार के इस फैसले से न सिर्फ बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, इंदौर, आलीराजपुर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, क्षेत्र बल्कि संपूर्ण प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों और कपास आधारित उद्योगों को लाभ होगा. मध्य प्रदेश का में उत्पादित कपास अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश की जिनिंग, प्रेसिंग सहित प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचेगा, इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों में इजाफा होगा। 

मंडी शुल्क घटने से लाभ मिलेगा, रकबा बढ़ेगा
कपास उत्पादक किसान सुनील महाजन ने सीएम डॉ. मोहन यादव के निर्णय को स्वागत योग्य बताया है. किसान सुनील ने कहा, ” इससे कपास उत्पादक किसानों को लाभ होगा, साथ ही जो उद्योग पलायन कर चुके है, अब मंडी शुल्क घटाए जाने के बाद दोबारा जीवित होंगे. अब तक मंडी शुल्क ज्यादा होने के कारण कपास फसल से किसानों का मोहभंग हो गया था, लेकिन अब कपास का रकबा दोबारा बढ़ेगा, इससे जिनिंग फैक्ट्री संचालको भी लाभ मिलेगा. सरकार से मांग है कि भारतीय कपास निगम (CCI) का खरीदी केंद्र बुरहानपुर में स्थापित किया जाए और किसानों का पंजीयन किया जाए, इससे किसानों को राहत मिलेगी। 

सीएम के सामने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा : अर्चना चिटनिस
बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया, ” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर में निमाड़ इंडस्ट्रियल मीट में शिरकत की थी, यहां उन्होंने उद्यमी संवाद कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबोधित किया था, इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव से कपास पर मंडी शुल्क कम करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. हमने सीएम से कहा था कि महाराष्ट्र की तुलना में अधिक मंडी शुल्क होने से मध्य प्रदेश के किसान, व्यापारी सहित जिनिंग उद्योग प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना कर रहे हैं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मांग को गंभीरता से लिया, उन्होंने हाल ही में कैबिनेट की बैठक में शुल्क में कमी का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 

जबलपुर के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल 07 व्यक्तियों को त्वरित सहायता देकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

जबलपुर जिले के थाना मझौली क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में घायल हुए 07 व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की त्वरित सहायता से सभी घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी।

12 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना मझौली क्षेत्र अंतर्गत मनगवां गाँव में सुहार नदी के पास एक स्कॉर्पियो वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गया है, जिससे उसमें सवार 07 व्यक्ति घायल हो गए हैं तथा तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना मझौली क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ सैनिक श्री कमल सिंह एवं पायलट श्री नरेंद्र सिंह तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे। मौके पर ज्ञात हुआ कि स्कॉर्पियो वाहन का टायर फटने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया था, जिससे उसमें सवार सात लोग घायल हो गए।

डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित शासकीय अस्पताल मझौली पहुँचाया। समय पर मिली सहायता के कारण घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध हो सका।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं सहित हर संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर तत्पर है।

 

नरसिंहपुर पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

 

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में नरसिंहपुर पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर की गई 10 लाख रुपये की साइबर ठगी का सफल खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। त्वरित एवं तकनीकी जांच के परिणामस्वरूप पीड़ित से ठगी गई संपूर्ण राशि बरामद कर उसे वापस दिलाई गई है।

गाडरवारा निवासी आवेदक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर प्रदर्शित एक विज्ञापन के माध्यम से उसे “PROX TREND” नामक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में निवेश कर अधिक लाभ अर्जित करने का प्रलोभन दिया गया। विज्ञापन के झांसे में आकर उसने विभिन्न किश्तों में कुल 10 लाख रुपये निवेश कर दिए, लेकिन न तो उसे कोई लाभ प्राप्त हुआ और न ही उसकी राशि वापस मिली। धोखाधड़ी का एहसास होने पर उसने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत प्राप्त होते ही थाना गाडरवारा में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के निर्देशन में साइबर सेल नरसिंहपुर और थाना गाडरवारा की संयुक्त टीम गठित की गई।

टीम द्वारा तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रांजेक्शनों तथा डिजिटल विश्लेषण के आधार पर दो आरोपियों की पहचान की गई और उन्हें महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से धोखाधड़ी कर प्राप्त की गई संपूर्ण 10 लाख रुपये की राशि बरामद कर नियमानुसार पीड़ित को वापस दिलाई। आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इस कार्रवाई में भी त्वरित जांच, तकनीकी विश्लेषण एवं समन्वित प्रयासों के माध्यम से न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, बल्कि पीड़ित को उसकी पूरी राशि वापस दिलाने में भी सफलता प्राप्त हुई।

मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश अथवा कम समय में अधिक मुनाफे का प्रलोभन देने वाले विज्ञापनों एवं संदेशों से सतर्क रहें। किसी भी ऑनलाइन निवेश से पूर्व संबंधित प्लेटफॉर्म की वैधता की जांच अवश्य करें तथा साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

 

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