बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में भीषण आग, धमाकों से दहला इलाका; 70 फीट तक उठीं लपटें

भोपाल
भोपाल के बैरागढ़ रोड पर शुक्रवार तड़के उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक पटाखा दुकान में भीषण आग भड़क उठी। आग लगते ही दुकान में रखे पटाखे एक के बाद एक फटने लगे और पूरे इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें गूंजने लगीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें करीब 70 फीट ऊंचाई तक पहुंच गईं। घटना हलालपुरा स्थित मुख्य सड़क किनारे संचालित एक पटाखा दुकान की है। तड़के करीब 3:30 बजे लगी आग ने कुछ ही मिनटों में पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भयावह थी कि दूर-दूर तक आसमान लाल दिखाई देने लगा। लगातार हो रहे धमाकों के कारण आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। तीन घंटे तक चलता रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
आग की सूचना मिलते ही फतेहगढ़, बैरागढ़ और गांधीनगर समेत कई फायर स्टेशनों से दमकल वाहन मौके पर पहुंच गए। पटाखों में लगातार हो रहे विस्फोटों के बीच फायर ब्रिगेड कर्मियों ने मोर्चा संभाला। करीब साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। सुबह तक दुकान से धुआं निकलता रहा।

साढ़े 3 घंटे बाद काबू में आ पाई जानकारी के अनुसार, बैरागढ़ रोड स्थित सुंदर वन गार्डन के ठीक सामने सोनी पटाखा दुकान में तड़के करीब साढ़े 3 बजे आग लगी। सूचना मिलने पर फतेहगढ़, बैरागढ़, गांधीनगर समेत कई फायर स्टेशनों से दमकलें मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने लगी। फायर फाइटर शाहनाबाज अहमद ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। करीब तीन घंटे में आग काबू आ सकी। आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है।पटाखा मार्केट से कुछ दूर है यह दुकान जानकारी के अनुसार, हलालपुरा में ही बड़ा पटाखा मार्केट है। जिस दुकान में आग लगी, वह कुछ ही दूर है। इसके पास पेट्रोल पंप भी है। दुकान में लाखों का कई किलो पटाखा भरा था, जो पूरी तरह से जल गया।

एक तरफ की सड़क बंद कराई जानकारी मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और एक तरफ की सड़क से ट्रैफिक बंद कराया। दुकान सड़क से सटकर होने की वजह से पटाखें उड़कर यहां पर आ रहे थे। बिजली कंपनी ने इलाके की लाइट बंद की। इसके बाद दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाया। सुबह 7 बजे तक आग काबू में आ पाई।

दिन में लगती तो हो सकता था बड़ा हादसा
जिस स्थान पर आग लगी, वह शहर की व्यस्त सड़कों में से एक है। दिनभर यहां भारी ट्रैफिक रहता है और सड़क किनारे बड़ी संख्या में वाहन खड़े रहते हैं। राहत की बात यह रही कि हादसा देर रात हुआ, जब सड़क पर आवाजाही बेहद कम थी। यदि दिन के समय आग लगती तो जनहानि और बड़े नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

पेट्रोल पंप और पटाखा बाजार के पास थी दुकान
जिस दुकान में आग लगी, वह हलालपुरा के बड़े पटाखा बाजार से कुछ ही दूरी पर स्थित है। इसके नजदीक पेट्रोल पंप भी मौजूद है। दुकान में बड़ी मात्रा में पटाखों का स्टॉक रखा हुआ था, जो आग की चपेट में आने से पूरी तरह जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।

सड़क बंद कर रोका गया ट्रैफिक
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर सड़क के एक हिस्से पर यातायात रोक दिया गया। धमाकों के साथ पटाखों के टुकड़े और चिंगारियां सड़क तक पहुंच रही थीं। सुरक्षा के मद्देनजर बिजली कंपनी ने भी इलाके की बिजली आपूर्ति बंद कर दी, जिसके बाद दमकलकर्मियों को आग बुझाने में आसानी हुई।

आग लगने के कारणों की जांच शुरू
फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस और संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आग के कारण दुकान में रखा पूरा पटाखा स्टॉक नष्ट हो गया, जबकि समय रहते आग पर काबू पा लेने से आसपास की दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को सुरक्षित बचा लिया गया। 

शिक्षा, श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम : मंत्री परमार

शिक्षा, श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम : मंत्री परमार

सेज करियर डे-2026 में 4500 से अधिक चयनित विद्यार्थियों की उपलब्धियों का हुआ सम्मान

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि शिक्षा केवल विषयविद बनाने का साधन नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम है। शिक्षित और संस्कारित युवा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

मंत्री परमार भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित “सेज करियर डे-2026” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में वर्ष 2024 से 2026 के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित 4 हजार 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया तथा चयनित विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।

मंत्री परमार ने कहा कि सेज यूनिवर्सिटी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ें तथा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश और समाज के विकास में करें। मंत्री परमार ने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मंत्री परमार ने युवाओं से कहा कि” आपने अभी अपने पंख फैलाए हैं, आपकी उड़ान अभी बाकी है। जीवन की प्रत्येक चुनौती आपको और अधिक सशक्त बनाती है।” उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

सेज ग्रुप के डायरेक्टर जनरल डॉ. सर्वेश शुक्ला ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रख्यात प्रबंधन गुरु एवं कॉलमिस्ट एन. रघुरामन ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए प्रतिबद्धता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। सेज ग्रुप की कार्यकारी निदेशक आर्किटेक्ट शिवानी अग्रवाल ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, कौशल विकास और समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में बताया गया कि इस वर्ष विद्यार्थियों का चयन आईबीएम, टीसीएस सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में हुआ है। वर्ष 2024 से 2026 के दौरान 575 से अधिक विद्यार्थियों को 5 से 10 लाख रुपये वार्षिक पैकेज तथा लगभग 50 विद्यार्थियों को 10 से 20 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नियुक्ति प्राप्त हुई है।

सेज यूनिवर्सिटी के चेयरमैन एवं चांसलर डॉ. संजीव अग्रवाल ने चयनित विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट टीम तथा अभिभावकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। समारोह में प्लेसमेंट प्राप्त विद्यार्थियों के साथ उच्च शिक्षा, शोध एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शिक्षाविद्, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

महिला सुरक्षा एवं गुमशुदा बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की राज्य महिला आयोग ने की सराहना

महिला सुरक्षा एवं गुमशुदा बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की राज्य महिला आयोग ने की सराहना

भोपाल

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव एवं सदस्य सुश्री साधना स्थापक ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा से महिला सुरक्षा, महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं बरामदगी तथा पीड़ित सहायता से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा गुमशुदा बालिकाओं की बरामदगी के संबंध में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने महिला एवं बालिका संबंधी अपराधों में प्रभावी कार्रवाई तथा संवेदनशील पुलिसिंग को और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने बताया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं के प्रत्येक प्रकरण में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। आधुनिक तकनीक, साइबर विश्लेषण, अंतरराज्यीय समन्वय एवं विशेष पुलिस टीमों के माध्यम से गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं सुरक्षित बरामदगी के मामलों में निरंतर सफलता प्राप्त हो रही है।

उन्होंने बताया कि दूरस्थ एवं अंतरराज्यीय गुमशुदगी के मामलों में भी समन्वित प्रयासों के माध्यम से बड़ी संख्या में बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की गई है। महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

बैठक में महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने, पीड़ित सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने तथा महिला एवं बालिका संबंधी मामलों में विभिन्न संस्थाओं के मध्य समन्वय बढ़ाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा के विशेष पुलिस महानिदेशक (SDG) श्री अनिल कुमार सहित महिला शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

मध्यप्रदेश समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बताई गईं मध्यप्रदेश की उपलब्धियां

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए किए जा रहे विशेष प्रयत्नों से अवगत करवाया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काउंसिल की बैठक में ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुशासन, समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब देंगे विकास को गति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश को नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा से पहले करने में सफलता मिली है। प्रदेश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज की जाएगी। युवाओं के विकास पर विशेष रूप से जोर रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश में बहनों और बेटियों की उन्नति, कृषक कल्याण, नए मेडीकल कॉलेजों के माध्यम से उपचार कार्य को गुणवत्तापूर्ण बनाते हुए बेहतर कार्य हो रहा है। इसी तरह आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रसर है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी की गई है। पीएममहाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को अनेक संकायों और विषयों के अध्ययन से जोड़ा गया है। कौशल विकास और औद्योगिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं। देश में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क की धार जिले में स्थापना हुई है, यहां शीघ्र ही इकाइयों द्वारा रिकार्ड समय में कार्य प्रारंभ हो रहा है। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के वेस्ट को निष्पादित करने के साथ ही प्रदेश में जनकल्याण की दृष्टि से अनेक नए कार्य प्रारंभ करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में मुख्यत: ‘मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल’, ‘उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास’, ‘स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण’ एवं ‘सभी के लिए समानता और गरिमा’ से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

 

CM डॉ. मोहन यादव ने ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से की मुलाकात, इंदौर में दिया भव्य रात्रि भोज

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से मुलाकात

इन्दौर में अतिथियों और प्रतिनिधियों के सम्मान में दिया रात्रि भोज

इन्दौर 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल कृषि मंत्रियों एवं अन्य विदेशी प्रतिनिधियों एवं अतिथियों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथियों का देश के दिल मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इन्दौर में स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी के सम्मान में रात्रि भोज भी दिया। अतिथियों के स्वागत के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और पर्यटन वैभव को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया।

रात्रि भोज एवं सांस्कृतिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सांसद शंकर लालवानी तथा सुकविता पाटीदार, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष के श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, सुउषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा तथा गोलू शुक्ला, सावन सोनकर, प्रताप करोसिया, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

Indian Railway में बढ़ा VIP Quota, ग्वालियर की 50+ ट्रेनों के हजारों यात्रियों की बढ़ेंगी परेशानियां

ग्वालियर

ग्वालियर से सफर करने वाले आम रेल यात्रियों के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं। एक तरफ जहां नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और नो-रूम के कारण आम जनता का सफर बेपटरी हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे प्रशासन आम यात्रियों को राहत देने के बजाय इमरजेंसी (आपातकालीन) कोटे का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें रेलवे का तर्क है कि वीआइपी लोगों को अचानक आना-जाना पड़ता है, इसलिए यह कोटा बढ़ाया जा रहा है। लेकिन इस कदम से सीधा फायदा सिर्फ रसूखदारों को मिलेगा, जबकि दो-दो महीने पहले टिकट बुक कराकर कतार में खड़ा आम आदमी कंफर्म सीट के लिए तरसता रह जाएगा।

कैंसर मरीजों को राहत, लेकिन आम जनता पर दोहरी मार
इस पूरे मामले में राहत की बात सिर्फ इतनी है कि रेलवे इस कोटे के तहत आम आदमी की श्रेणी में आने वाले कैंसर मरीजों को प्राथमिकता देता है। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए रेलवे का यह कदम सराहनीय है, लेकिन इसकी आड़ में वीआइपी सीटों की संख्या बढ़ाए जाने से सामान्य और स्लीपर क्लास के मध्यमवर्गीय यात्रियों का हक मारा जाना तय है।

ग्वालियर से इन ट्रेनों पर असर
ग्वालियर से शुरू होने वाली और यहां से गुजरने वाली लगभग 50 ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा लागू है। वीआइपी कोटा बढऩे से जिन प्रमुख ट्रेनों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, उनमें शामिल हैं। वंदे भारत, शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस, स्वर्ण जयंती, चंबल एक्सप्रेस, ताज एक्सप्रेस, बरौनी एक्सप्रेस, रतलाम इंटरसिटी और बुंदेलखंड एक्सप्रेस आदि शामिल है।

सीटों से ज्यादा आवेदन
रेलवे की वीआइपी पेटी सुबह होते ही आवेदनों से भर जाती है। रेल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कोटा सीमित है, जबकि सिफारिशों का दबाव उम्मीद से कहीं ज्यादा है। सुबह 10 बजे तक रेलवे कार्यालय में माननीयों के प्रतिनिधियों की कतार लग जाती है। कई बार अंतिम क्षणों तक झांसी संपर्क करना पड़ता है।

इन्हें मिलता है कोटा
रेलवे के अनुसार ट्रेनों में कोटा न्यायाधीश, सांसद, विधायक, मंत्री, कैंसर मरीज, एमसीओ (मिलिट्री), सीआरपीएफ और पुलिस आदि को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाता है। इसमें से कुछ का कोटा तो लगभग हर एक दो दिन में लगता ही है।

मंजूरी मिलते ही बढ़ाया जाएगा इमरजेंसी कोटा
हमारे यहां से निकलने वाली कुछ ट्रेनों में भारी मांग को देखते हुए कोटा बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कुछ चुनिंदा ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा बढ़ जाएगा।
-अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम (झांसी मंडल)

भोपाल बनेगा ‘सिलेंडर फ्री’ शहर! 4 बड़ी कॉलोनियों में 100% PNG कनेक्शन देने की तैयारी

भोपाल
 मध्य प्रदेश में पिछले तीन महीनों से चल रही एलपीजी (घरेलू गैस सिलेंडर) की भारी किल्लत से आम जनता परेशान है। राजधानी भोपाल में भी यह संकट लगातार बना हुआ है और गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की बुकिंग को लेकर लोग चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को ही एक गैस एजेंसी पर सिलेंडर न मिलने को लेकर उपभोक्ताओं ने भारी हंगामा किया। इस बड़े संकट से निपटने के लिए अब खाद्य विभाग भोपाल को ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत जिन इलाकों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भविष्य में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।

चार बड़ी कॉलोनियों से होगी शुरुआत
फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में ‘थिंक गैस’ कंपनी के जरिए घरों तक सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। यह लाइन मिसरोद से शुरू होकर होशंगाबाद रोड के दोनों तरफ की कॉलोनियों को कवर कर रही है। वर्तमान में बावड़ियाकलां, सलैया, अयोध्या बायपास, अवधपुरी और साकेत नगर के अधिकांश घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब विभाग ने योजना बनाई है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछ रही है, वहां पहले शत-प्रतिशत (100%) घरों को कनेक्शन दिया जाए और उसके बाद ही अगली कॉलोनी में काम शुरू हो। इसके लिए पहले चरण में चार बड़ी कॉलोनियों— बावड़ियाकलां की केराल केनसिप, अवधपुरी की सौम्या पार्कलैंड, अयोध्या बायपास की सागर लैक व्यू होम्स और सलैया की आकृति ग्रीन को चुना गया है।

172 कॉलोनियों के सामने से गुजर रही है लाइन
अधिकारियों के मुताबिक, थिंक गैस कंपनी ने होशंगाबाद रोड के दोनों ओर समेत कुल 172 कॉलोनियों के मुख्य रास्तों पर गैस लाइन बिछा दी है। यहां रहने वाले लोग कंपनी के पास आवेदन करके अपने घरों में कनेक्शन लगवा रहे हैं और कटारा हिल्स समेत कई अन्य इलाकों से भी लोग इसके लिए तेजी से फॉर्म भर रहे हैं। विभाग अब चार-चार कॉलोनियों का समूह बनाकर फोकस कर रहा है ताकि काम जल्दी पूरा हो सके। एक तय समय सीमा के बाद इन इलाकों में एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी।

मंत्री और अफसरों के बंगलों में भी बिछेगी पाइपलाइन
भोपाल के दो सबसे बड़े और वीआईपी इलाके ‘चार इमली’ और ’74 बंगला’ में भी इस समय भूमिगत (अंडरग्राउंड) गैस पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आपको बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों, सीनियर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के सरकारी बंगले हैं। इन इलाकों के अधिकांश हिस्सों में लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और कुछ ही दिनों में बंगलों के भीतर कनेक्शन देने की शुरुआत हो जाएगी।

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराया संकट
दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसी का असर है कि मध्य प्रदेश और भोपाल में पिछले कई महीनों से घरेलू गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। भोपाल में इस समय हर दिन 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कंपनियों की तरफ से सप्लाई केवल 9 से 10 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही है। इस किल्लत की चपेट में आम जनता के साथ-साथ कई बड़े मंत्री और अफसर भी आ गए थे, जिसके बाद वीआईपी इलाकों में भी पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाई गई है।

होशंगाबाद रोड पर सबसे ज्यादा 43 हजार कनेक्शन
वर्तमान में पीएनजी पाइपलाइन का सबसे बड़ा जाल होशंगाबाद रोड पर फैला हुआ है, जहां करीब 43 हजार घरों में गैस पाइपलाइन के जरिए खाना बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस योजना को पुराने शहर (ओल्ड सिटी) की तरफ भी ले जाया जाएगा ताकि वहां के बड़े इलाकों को कवर करके घर-घर गैस पहुंचाई जा सके। इसके अलावा घरों के साथ-साथ शहर के सभी बड़े होटलों, रेस्टोरेंटों, व्यावसायिक संस्थानों और बहुमंजिला इमारतों (मल्टीस्टोरी बिल्डिंग) को भी अनिवार्य रूप से पीएनजी लाइन से जोड़ा जाएगा।

90 दिनों में कनेक्शन लेना होगा अनिवार्य
सरकार ने इस योजना को लेकर एक नई और सख्त गाइडलाइन भी जारी कर दी है। इसके नियम के मुताबिक, जिन इलाकों में गैस की अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछ जाएगी, वहां के निवासियों को 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई तय समय के भीतर नया कनेक्शन नहीं लेता है, तो उसका पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन सरकारी आदेश के तहत ब्लॉक या काट दिया जाएगा।

PNG को लेकर केंद्र सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की गैस संकट के बीच ही भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955’ के तहत एक नया आदेश जारी किया था। इस नए नियम का मकसद देशभर में गैस पाइपलाइन बिछाने और उनके विस्तार के काम को रफ्तार देना है।

अब पाइपलाइन के काम में जमीन मिलने या मंजूरी मिलने में होने वाली देरी खत्म हो गई है। जिससे रिहायशी इलाकों (Residential areas) तक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से पहुंच सकेगा।

नए एक्ट के 4 नियम समझें

1. सोसाइटियों और RWA की मनमानी खत्म
    कई बार हाउसिंग सोसाइटियों या RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के विरोध की वजह से पाइपलाइन का काम रुक जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।
    अगर कोई कंपनी पाइपलाइन के लिए रास्ता मांगती है तो सोसाइटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी।
    अगर सोसाइटी ने मना किया या देरी की तो वहां रहने वाले सभी घरों की PNG सप्लाई पर रोक लगाई जा सकती है।

2. छोटे इलाकों को 10 दिन में मंजूरी मिलेगी
    पाइपलाइन बिछाने के लिए अब सरकारी विभागों को फाइलों को लटकाने की इजाजत नहीं है।
    छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़ी लाइनों के लिए 60 दिन में मंजूरी देना अनिवार्य है।
    अगर विभाग तय समय में जवाब नहीं देता, तो उसे ‘डीम्ड क्लियरेंस’ यानी ‘ऑटोमैटिक मंजूरी’ मान लिया जाएगा और काम शुरू कर दिया जाएगा।

3. जमीन और मुआवजे का झंझट खत्म
अगर पाइपलाइन किसी की निजी जमीन से गुजर रही है, तो अब मुआवजे को लेकर सालों तक केस नहीं चलेंगे। सरकार ने सर्किल रेट के आधार पर एक फिक्स फॉर्मूला बना दिया है। अगर जमीन मालिक राजी नहीं होता है, तो जिला कलेक्टर हस्तक्षेप करके काम को आगे बढ़ाएंगे। ताकि सप्लाई में देरी न हो।

4. क्या यह आपकी सुरक्षा और बचत के लिए है?
सरकार ने इसे ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत जारी किया है, ताकि युद्ध जैसे हालात में भी आपको रसोई गैस की कमी न पड़े।

    फायदा: आपको सिलेंडर बुकिंग या खत्म होने की टेंशन नहीं रहेगी।
    नुकसान: जो लोग अपनी मर्जी से सिलेंडर इस्तेमाल करना चाहते थे, उनके पास अब विकल्प सीमित हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ट्रेजर्स ऑफ ताप्ती वैली एण्ड बुरहानपुर की प्रति भेंट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ट्रेजर्स ऑफ ताप्ती वैली एण्ड बुरहानपुर की प्रति भेंट

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पुस्तक ”ट्रेजर्स ऑफ ताप्ती वैली एण्ड बुरहानपुर” की प्रति, पूर्व मंत्री तथा बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने मंत्रालय में गत दिवस भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ताप्ती नदी घाटी और विशेष रूप से बुरहानपुर के इतिहास में गहराई से उतरती यह पुस्तक इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, शोधार्थियों, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी होगी। पुस्तक का प्रकाशन नई दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट द्वारा किया गया है। पुस्तक के लेखक सुप्रसिद्ध पुरातत्वविद तथा विरासत संरक्षण और संग्रहालय विशेषज्ञ डॉ. ओम प्रकाश मिश्रा है।

पुस्तक में बुरहानपुर और ताप्ती नदी घाटी के इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और स्थापत्य विरासत का व्यापक एवं शोधपरक जानकारी है। बुरहानपुर के ऐतिहासिक विकास, यहाँ प्राप्त मुद्राओं (न्यूमिसमेटिक्स) तथा अभिलेखीय साक्ष्यों (एपिग्राफी) के माध्यम से पुस्तक में क्षेत्र के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक इतिहास का समग्र विश्लेषण है। बुरहानपुर की सूफी परंपरा, मंदिरों तथा अन्य धार्मिक स्थलों का भी इसमें विस्तार से वर्णन है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सह-अस्तित्व की परंपरा को दर्शाता है।

पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बुरहानपुर के शहरी स्वरूप, परकोटे, द्वारों, घाटों और सरायों पर केंद्रित है। पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणाली ‘कुंडी भंडारा’ का अध्ययन यह दर्शाता है कि मध्यकालीन समाज किस प्रकार जल संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत उपयोग करता था। सांस्कृतिक विरासत, फारूकी एवं मुगल कालीन स्मारकों तथा असीरगढ़ दुर्ग के विस्तृत विश्लेषण से यह पुस्तक, बुरहानपुर की ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित करती है।

पुस्तक के लेखक डॉ. मिश्रा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत टैगोर नेशनल फेलो एवं टैगोर नेशनल स्कॉलर रहे हैं। प्रदेश के पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय विभाग में निदेशक के रूप में कार्य करते हुए डॉ. मिश्रा ने अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर व्यापक उत्खनन कार्यों का निर्देशन किया। वर्तमान में डॉ. मिश्रा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड में पुरातत्व सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।

 

Bhopal Garbage Law 2026: 900 से ज्यादा बड़ी सोसायटियों को खुद करना होगा कचरे का निपटारा, नहीं तो देना होगा भारी शुल्क

भोपाल
 भोपाल में 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए केंद्र सरकार के नए ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों’ ने शहर के एक बड़े हिस्से की नींद उड़ा दी है। नगर निगम परिषद द्वारा स्वीकृत इस कड़े कानून का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला असर भोपाल की 900 से अधिक बड़ी कॉलोनियों, सोसायटियों और व्यावसायिक संस्थानों पर पड़ने जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि जो परिसर केवल अपने यहां होने वाली पानी की खपत के कारण ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (बड़ा कचरा उत्पादक) के दायरे में आ गए हैं, उन्हें अब अपना कचरा खुद ठिकाने लगाना होगा। इस नियम के दायरे में नगर निगम को हैंडओवर हो चुकीं 1273 कॉलोनियों समेत खुद नगर निगम का ‘तुलसी नगर’ स्थित नया मुख्यालय भी शामिल हो गया है। इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए निगम के पास 18 महीने (डेढ़ साल) का समय है। 

बल्क वेस्ट के नियम: इन 4 शर्तों से तय होंगे ‘बड़े कचरा उत्पादक’
यदि कोई भी परिसर नीचे दी गई चार शर्तों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे अनिवार्य रूप से ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ माना जाएगा और पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा:
1. आवासीय परिसर: 5 एकड़ (20,000 वर्ग मीटर) या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली हाउसिंग सोसाइटी।

2. व्यावसायिक परिसर: 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल, मॉल, अस्पताल, मैरिज गार्डन या बाजार।
3. कचरे की मात्रा: रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकालने वाले संस्थान।
4. पानी की खपत : रोजाना 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत करने वाले परिसर (भोपाल में ऐसी 900 सोसायटियां हैं)।
सोसायटियों के पास कचरा निपटान के 3 विकल्प और ‘निगम का चार्ज’
नए कानून के तहत सोसायटियों को कचरा प्रबंधन के लिए तीन रास्ते दिए गए हैं। यदि वे तीसरा विकल्प चुनकर कचरा नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन भेजती हैं, तो उन्हें प्रति टन के हिसाब से यह चार्ज देना होगा:
विकल्प 1: वे अपने कैंपस के अंदर ही खुद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं और गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाकर खुद निपटारा करें।

बल्क वेस्ट के नियम: इन 4 शर्तों से तय होंगे ‘बड़े कचरा उत्पादक’
यदि कोई भी परिसर नीचे दी गई चार शर्तों में से किसी एक को भी पूरा करता है, तो उसे अनिवार्य रूप से ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ माना जाएगा और पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा:
1. आवासीय परिसर: 5 एकड़ (20,000 वर्ग मीटर) या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली हाउसिंग सोसाइटी।

2. व्यावसायिक परिसर: 5,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले होटल, मॉल, अस्पताल, मैरिज गार्डन या बाजार।
3. कचरे की मात्रा: रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकालने वाले संस्थान।
4. पानी की खपत : रोजाना 40,000 लीटर या अधिक पानी की खपत करने वाले परिसर (भोपाल में ऐसी 900 सोसायटियां हैं)।
सोसायटियों के पास कचरा निपटान के 3 विकल्प और ‘निगम का चार्ज’
नए कानून के तहत सोसायटियों को कचरा प्रबंधन के लिए तीन रास्ते दिए गए हैं। यदि वे तीसरा विकल्प चुनकर कचरा नगर निगम के ग्लोबल ट्रांसफर स्टेशन भेजती हैं, तो उन्हें प्रति टन के हिसाब से यह चार्ज देना होगा:
विकल्प 1: वे अपने कैंपस के अंदर ही खुद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएं और गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाकर खुद निपटारा करें।

विकल्प 2: वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को यह काम सौंपें।
विकल्प 3
(निगम को सौंपने पर प्रति टन दरें):
आवासीय सोसायटियां : 2,100 रुपये प्रति टन
सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज: 2,400 रुपये प्रति टन
मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन: 2,700 रुपये प्रति टन
जो सोसायटियां कचरा पूरी तरह से अलग-अलग (सूखा, गीला, सैनिटरी, ई-वेस्ट) छांटकर देंगी, उन्हें सिर्फ 922 रुपये प्रति टन देना होगा। मिक्स कचरा देने पर इन दरों का 150% जुर्माना लगेगा।

अब रखने होंगे 4 अलग डस्टबिन
शहर की कॉलोनियों में अब आगामी डेढ़ साल के भीतर 4-डस्टबिन मॉडल लागू करना अनिवार्य होगा। आम जनता को अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि कुल चार श्रेणियों में कचरा छांटना होगा:
1. गीला कचरा: रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके।
2. सूखा कचरा: रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, कांच, कपड़े।
3. सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, घरेलू मेडिकल वेस्ट।
4. घरेलू ई-वेस्ट:
पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।
शादी-पार्टी के लिए नया नियम: घर या संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में 100 से अधिक मेहमान शामिल होने पर आयोजन से 3 दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेनी होगी। 

वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल पर रजिस्टर्ड किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को यह काम सौंपें।
विकल्प 3 (निगम को सौंपने पर प्रति टन दरें):
आवासीय सोसायटियां : 2,100 रुपये प्रति टन
सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज: 2,400 रुपये प्रति टन
मॉल, होटल, अस्पताल, मैरिज गार्डन: 2,700 रुपये प्रति टन
जो सोसायटियां कचरा पूरी तरह से अलग-अलग (सूखा, गीला, सैनिटरी, ई-वेस्ट) छांटकर देंगी, उन्हें सिर्फ 922 रुपये प्रति टन देना होगा। मिक्स कचरा देने पर इन दरों का 150% जुर्माना लगेगा।

अब रखने होंगे 4 अलग डस्टबिन
शहर की कॉलोनियों में अब आगामी डेढ़ साल के भीतर 4-डस्टबिन मॉडल लागू करना अनिवार्य होगा। आम जनता को अब केवल गीला और सूखा नहीं, बल्कि कुल चार श्रेणियों में कचरा छांटना होगा:
1. गीला कचरा: रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके।
2. सूखा कचरा: रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, कांच, कपड़े।
3. सैनिटरी कचरा: डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, घरेलू मेडिकल वेस्ट।
4. घरेलू ई-वेस्ट: पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।
शादी-पार्टी के लिए नया नियम: घर या संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में 100 से अधिक मेहमान शामिल होने पर आयोजन से 3 दिन पहले नगर निगम से अनुमति लेनी होगी। 

अडाणी ग्रुप समेत 6 बड़ी कंपनियों पर MP में FIR, परमिट रद्द होने का भी मंडराया खतरा

सिंगरौली

मध्य प्रदेश में नियमों को ठेंगा दिखाकर काम करने वाली नामी कंपनियों पर गाज गिरी है। सिंगरौली जिले में जिला प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाना देश के बड़े औद्योगिक घराने अडाणी ग्रुप समेत देश की अन्य नामचीन कंपनियों को भारी पड़ गया है। सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने प्रतिबंधित समय में नियमों को ताक पर रखकर कोयला परिवहन करने के मामले में अडाणी एंटरप्राइजेज और अडाणी लॉजिस्टिक्स समेत कई नामी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साख्त आदेश जारी किए गए हैं।

नियम ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रहे कंपनियों के वाहन
सिंगरौली जिले में कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर कलेक्टर गौरव बैनल द्वारा 23 मई की सुबह 6 बजे से 24 मई की दोपहर 12 बजे तक सड़क मार्ग से फ्लाई ऐश और कोयला परिवहन पर पूरी तरह से रोक लगाई गई थी।

धड़ल्ले से चल रहा था परिवन
प्रशासनिक आदेश के बावजूद अडाणी एं
टरप्राइजेज, अडानी लॉजिस्टिक्स, एपीएमडीसी और टीएचडीसी जैसी रसूखदार कंपनियों से जुड़े कोयले से लदे भारी वाहन प्रतिबंधित अवधि में भी सरई और बरगवां क्षेत्र की सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ते पाए गए।

प्रशासन की आंखों में धूल झोंक 60 किलोमीटर तक का सफर
जांच में जो खुलासा हुआ है उसने जिला प्रशासन को भी चौंका दिया। प्रतिबंधित समय के दौरान इन कंपनियों के चार बड़े कोयला वाहन सरई, झुरही और उज्जैनी मार्ग से होते हुए बरगवां तहसील के मझौली रेलवे साइडिंग तक पहुंच गए थे।

कलेक्टर के आदेश का खुलास उल्लंघन
प्रशासन के मुताबिक, इन भारी वाहनों ने बिना किसी डर के लगभग 60 किलोमीटर तक कोयले का अवैध परिवहन किया। जो सीधे तौर पर जिला कलेक्टर के आदेशों की खुली अवहेलना और उल्लंघन था।

संतोषजनक नहीं मिला जवाब तो कलेक्टर ने दिखाई सख्ती
मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने अडानी ग्रुप की कंपनियों समेत सभी संबंधित परिवहनकर्ताओं को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया था। लेकिन कंपनियों के सुस्त रवैये के वजह से कलेक्टर गौरव बैनल ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन कंपनियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत मामला दर्ज कराने का आदेश दिया है।

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