अडाणी ग्रुप समेत 6 बड़ी कंपनियों पर MP में FIR, परमिट रद्द होने का भी मंडराया खतरा

सिंगरौली

मध्य प्रदेश में नियमों को ठेंगा दिखाकर काम करने वाली नामी कंपनियों पर गाज गिरी है। सिंगरौली जिले में जिला प्रशासन के आदेशों को ठेंगा दिखाना देश के बड़े औद्योगिक घराने अडाणी ग्रुप समेत देश की अन्य नामचीन कंपनियों को भारी पड़ गया है। सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने प्रतिबंधित समय में नियमों को ताक पर रखकर कोयला परिवहन करने के मामले में अडाणी एंटरप्राइजेज और अडाणी लॉजिस्टिक्स समेत कई नामी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साख्त आदेश जारी किए गए हैं।

नियम ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रहे कंपनियों के वाहन
सिंगरौली जिले में कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर कलेक्टर गौरव बैनल द्वारा 23 मई की सुबह 6 बजे से 24 मई की दोपहर 12 बजे तक सड़क मार्ग से फ्लाई ऐश और कोयला परिवहन पर पूरी तरह से रोक लगाई गई थी।

धड़ल्ले से चल रहा था परिवन
प्रशासनिक आदेश के बावजूद अडाणी एं
टरप्राइजेज, अडानी लॉजिस्टिक्स, एपीएमडीसी और टीएचडीसी जैसी रसूखदार कंपनियों से जुड़े कोयले से लदे भारी वाहन प्रतिबंधित अवधि में भी सरई और बरगवां क्षेत्र की सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ते पाए गए।

प्रशासन की आंखों में धूल झोंक 60 किलोमीटर तक का सफर
जांच में जो खुलासा हुआ है उसने जिला प्रशासन को भी चौंका दिया। प्रतिबंधित समय के दौरान इन कंपनियों के चार बड़े कोयला वाहन सरई, झुरही और उज्जैनी मार्ग से होते हुए बरगवां तहसील के मझौली रेलवे साइडिंग तक पहुंच गए थे।

कलेक्टर के आदेश का खुलास उल्लंघन
प्रशासन के मुताबिक, इन भारी वाहनों ने बिना किसी डर के लगभग 60 किलोमीटर तक कोयले का अवैध परिवहन किया। जो सीधे तौर पर जिला कलेक्टर के आदेशों की खुली अवहेलना और उल्लंघन था।

संतोषजनक नहीं मिला जवाब तो कलेक्टर ने दिखाई सख्ती
मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने अडानी ग्रुप की कंपनियों समेत सभी संबंधित परिवहनकर्ताओं को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया था। लेकिन कंपनियों के सुस्त रवैये के वजह से कलेक्टर गौरव बैनल ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन कंपनियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत मामला दर्ज कराने का आदेश दिया है।

Ladli Behna Yojana: 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, इस तारीख तक खाते में आ सकते हैं ₹1500

भोपाल 

मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर माह 1500-1500 रुपए दिए जाते हैं। जून 2023 से मई 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है।

13 मई 2026 को नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी से सीएम डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किस्त जारी की थी। इसके तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। अब जून 2026 में 37वीं किस्त जारी की जाएगी। संभावना है कि 10 से 15 जून के बीच सीएम द्वारा किस्त की राशि जारी की जा सकती है, हालांकि फाइनल तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

गौरतलब है कि मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरूआत की गई थी। 10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया।

वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह (18000 रु सालाना) दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रुपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

2 साल में महिलाओं के खातों में पहुंचे 47 हजार करोड़ से ज्यादा
लाडली बहना योजना प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक बन चुकी है। शुरुआत में महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने राशि बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दी। जनवरी 2024 से मई 2026 तक सरकार योजना के तहत 47,775 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेज चुकी है।

नए आवेदन अभी भी बंद, लाखों महिलाएं कर रही इंतजार
योजना में शामिल होने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं है। सरकार ने वर्ष 2023 के बाद से नए पंजीयन शुरू नहीं किए हैं और अभी तक आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने को लेकर कोई संकेत नहीं मिला है। ऐसे में नई पात्र महिलाओं को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

e-KYC नहीं कराया तो अटक सकती है किस्त
योजना का लाभ लगातार मिलता रहे, इसके लिए लाभार्थियों को e-KYC करवाना जरूरी है। जिन महिलाओं का भुगतान रुका हुआ है, वे समग्र पोर्टल पर जाकर आधार के माध्यम से e-KYC प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं। समय रहते यह प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर आगामी किस्त मिलने में परेशानी हो सकती है।

जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान
राज्य की 1.25 करोड़ से अधिक लाडली बहनें अब सरकार के आधिकारिक ऐलान का इंतजार कर रही हैं। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में 37वीं किस्त की तारीख को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। तब तक महिलाओं की निगाहें सरकार की घोषणा पर टिकी हुई हैं।

इन्हें मिलता है योजना का लाभ:

    मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो ।
    विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी योजना की पात्र हैं।
    महिलाओं की आयु 21 से 60 वर्ष तक होनी चाहिए ।
    स्वयं का बैंक खाता और बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी होना चाहिए।
    समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई किया होना चाहिए ।

ये योजना से बाहर :

    स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।
    जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​
    जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।
    स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के
    शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/ संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो।

लाभार्थी सूची में कैसे चेक करें अपना नाम

    लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।
    वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर
    क्लिक करें।
    दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।
    कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
    मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।
    ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

किसान कल्याण वर्ष:चार वर्षों में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की हुई अभूतपूर्व वृद्धि

किसान कल्याण वर्ष:चार वर्षों में सब्जी उत्पादन में 21.58 लाख मीट्रिक टन की हुई अभूतपूर्व वृद्धि

मध्यप्रदेश, देश में सब्जी उत्पादन में तीसरे स्थान पर

भोपाल

मध्यप्रदेश आज कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, इसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, कृषि का विविधीकरण तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते है कि कृषि को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण को भी समान महत्व देना आवश्यक है। विगत 4 वर्ष में प्रदेश के सब्जी उत्पादन में लगभग 21.58 लाख मीट्रिक टन की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश देश में सब्जियों के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर सब्जी क्षेत्र विस्तार की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रदेश की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ भूमि, सिंचाई संसाधनों का विस्तार तथा किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के कारण सब्जी उत्पादन में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्ष 2022-23 में प्रदेश में सब्जियों का उत्पादन 236.41 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 257.99 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि राज्य के कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र की सुदृढ़ प्रगति को दर्शाती है।

राष्ट्रीय स्तर पर सब्जियों का कुल उत्पादन लगभग 2177 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें मध्यप्रदेश की भागीदारी लगभग 259 लाख मीट्रिक टन है। इससे स्पष्ट है कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रदेश के लाखों किसान सब्जी उत्पादन से अपनी आय भी बढ़ा रहे हैं और देश की बढ़ती मांग को भी पूरा कर रहे हैं।

प्रदेश में किसानों द्वारा प्याज, आलू, टमाटर, बैंगन, फूल-गोभी, पत्ता-गोभी, हरी मटर, भिंडी, पालक, लौकी, अरबी, करेला, ककड़ी, मूली, तुरई (तोरी), गाजर, शकरकंद, शिमला मिर्च, परवल सहित अनेक प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। इनमें प्याज उत्पादन का विशेष स्थान है। प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्र प्याज की खेती के लिए उपयोग किया जाता है। वर्ष 2022-23 में प्याज का रकबा 2.17 लाख हैक्टेयर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.30 लाख हैक्टेयर हो गया है। यह वृद्धि किसानों के बढ़ते विश्वास और बाजार में प्याज की मांग को दर्शाती है।

प्रदेश में छोटी जोत वाले किसानों को सब्जी फसलों के उत्पादन के लिये ओर प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है। जिनसे कम भूमि में अधिक आय प्राप्त हो सके। सब्जी उत्पादन इस दृष्टि से सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक होने से ही किसान कल्याण वर्ष में सब्जी क्षेत्र विस्तार को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की कार्य योजना में प्रदेश में 54 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों का विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 13 हजार 300 हैक्टेयर में आलू, 9 हजार 800 हैक्टेयर में टमाटर, 16 हजार 500 हैक्टेयर में प्याज, 3 हजार 500 हेक्टेयर में मटर, 3 हजार 500 हेक्टेयर में फूल-गोभी एवं पत्ता-गोभी, 01 हजार 200 हेक्टेयर में उच्च मूल्य वाली सब्जियां तथा 6 हजार 200 हैक्टेयर में कद्दूवर्गीय सब्जियों का विस्तार किया जाएगा। इस योजना से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा विपणन सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

किसान कल्याण वर्ष का मूल उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। सब्जी उत्पादन में वृद्धि से किसानों को वर्ष भर नियमित आय प्राप्त होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। साथ ही प्रदेश में पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है। सब्जियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन, परिवहन, भंडारण एवं विपणन से जुड़े हजारों लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह के नेतृत्व में विभाग किसानों को उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। विभागीय योजनाओं का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक मूल्य वाली सब्जियों का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे कम भूमि में अधिक लाभ अर्जित कर सकें। आधुनिक तकनीक, संरक्षित खेती, सूक्ष्म सिंचाई तथा गुणवत्तायुक्त बीजों के उपयोग से उत्पादन और उत्पादकता दोनों में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।

मध्यप्रदेश में कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में जो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं, वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और किसान हितैषी नीतियों का परिणाम हैं। किसान कल्याण वर्ष में सब्जी क्षेत्र विस्तार की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी उद्यानिकी राज्य बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समृद्ध किसान, समृद्ध कृषि और समृद्ध मध्यप्रदेश की अवधारणा को साकार करने में प्रदेश के सब्जी उत्पादक किसानों का योगदान आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

 

महिला सुरक्षा एवं गुमशुदा बालिकाओं की शीघ्र बरामदगी के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों की राज्य महिला आयोग ने की सराहना

भोपाल 

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव एवं सदस्य सुश्री साधना स्थापक ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा से महिला सुरक्षा, महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं बरामदगी तथा पीड़ित सहायता से संबंधित विषयों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा तथा गुमशुदा बालिकाओं की बरामदगी के संबंध में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने महिला एवं बालिका संबंधी अपराधों में प्रभावी कार्रवाई तथा संवेदनशील पुलिसिंग को और सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने बताया कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं के प्रत्येक प्रकरण में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। आधुनिक तकनीक, साइबर विश्लेषण, अंतरराज्यीय समन्वय एवं विशेष पुलिस टीमों के माध्यम से गुमशुदा बालिकाओं की खोज एवं सुरक्षित बरामदगी के मामलों में निरंतर सफलता प्राप्त हो रही है।

उन्होंने बताया कि दूरस्थ एवं अंतरराज्यीय गुमशुदगी के मामलों में भी समन्वित प्रयासों के माध्यम से बड़ी संख्या में बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की गई है। महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रदेशभर में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

बैठक में महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने, पीड़ित सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने तथा महिला एवं बालिका संबंधी मामलों में विभिन्न संस्थाओं के मध्य समन्वय बढ़ाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा के विशेष पुलिस महानिदेशक (SDG) श्री अनिल कुमार सहित महिला शाखा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

इंदौर के डायल-112 हीरोज घर की राह भटकी 4 वर्षीय बालिका को सुरक्षित परिजन से मिलाया

भोपाल 

इंदौर जिले के थाना चन्दन नगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटकी 04 वर्षीय बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय रहते की गई सहायता से बालिका सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सकी।

10 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चन्दन नगर क्षेत्र अंतर्गत राजनगर स्थित सांवरिया टेंट हाउस के पास एक छोटी बच्ची अकेली मिली है, जो घर का रास्ता भटक गई है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल चन्दन नगर थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री विपिन रघुवंशी, आरक्षक श्री अनिल एवं पायलट श्री पंकज पांडे ने मौके पर पहुँचकर बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बच्ची से उसके परिजनों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु कम आयु होने के कारण वह अपने परिवार के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रही थी।

इसके बाद डायल-112 टीम ने बच्ची को सुरक्षित एफआरव्ही वाहन में साथ लेकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ प्रारंभ की। तलाश के दौरान बच्ची के परिजन उसे खोजते हुए मिले। आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बच्ची को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता : विगत एक माह में 1 हजार 136 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल बरामद

भोपाल

“देशभक्ति जनसेवा” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेशभर में नागरिकों की गुम एवं चोरी हुई संपत्ति को वापस दिलाने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। आधुनिक तकनीक, साइबर विशेषज्ञता, सीईआईआर (Central Equipment Identity Register) पोर्टल, साइबर हेल्प डेस्क तथा जिला पुलिस बलों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप विगत एक माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 1 हजार 136 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाए गए हैं। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपये है। मोबाइल फोन वापस प्राप्त होने पर नागरिकों ने मध्यप्रदेश पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया तथा पुलिस के प्रति उनका विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

विभिन्न जिलों की प्रमुख उपलब्धियां

इंदौर

क्राइम ब्रांच इंदौर ने सिटीजन कॉप एप्लीकेशन एवं सीईआईआर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निराकरण के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से 230 गुम मोबाइल फोन खोजकर नागरिकों को लौटाए। जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रूपये है। इसके अतिरिक्त भंवरकुआं थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण एवं सतत प्रयासों से 13 मोबाइल फोन कीमत 3 लाख 60 हजार तथा विजय नगर थाना पुलिस ने मोबाइल दुकान में हुई लाखों रुपये की चोरी का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए 17 मोबाइल फोन, नगदी, मोबाइल एसेसरीज एवं अन्य सामग्री सहित लगभग 13 लाख रूपये का की संपत्ति जब्‍त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

इस प्रकार तीनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 260 मोबाइल फोन सहित लगभग 66 लाख 60 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की।

दमोह

पुलिस द्वारा चलाए गए “गुम मोबाइल खोज अभियान” के अंतर्गत 208 गुम मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया गया। बरामद मोबाइल फोन की अनुमानित कीमत लगभग 41 लाख 60 हजार रुपये है।

शिवपुरी

तकनीकी विश्लेषण एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से पुलिस ने 120 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया। बरामद मोबाइल फोन की कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपये है।

खण्डवा

पुलिस ने “ऑपरेशन सहयोग” के तहत दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से 151 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर बरामद किए। इन मोबाइल फोन की कीमत लगभग 22 लाख 84 हजार रूपये से अधिक है।

भोपाल

जीआरपी भोपाल ने ट्रेनों में मोबाइल चोरी करने वाले बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 10 मोबाइल फोन सहित 4 लाख 82 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।

वहीं थाना हनुमानगंज पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 50 गुम मोबाइल फोन बरामद कर नागरिकों को लौटाए, जिनकी कीमत लगभग 12 लाख रूपये है।

दोनों कार्रवाइयों में कुल 60 मोबाइल फोन सहित लगभग 16 लाख 82 हजार मूल्य की संपत्ति बरामद की गई।

अशोकनगर

साइबर सेल के विशेष प्रयासों से 120 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 लाख 20 हजार रुपये है।

धार

जिला साइबर शाखा एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए लगभग 12 लाख रुपये से अधिक के 124 गुम मोबाइल फोन बरामद किए है।

छतरपुर

पुलिस ने “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत लवकुशनगर एवं बड़ामलहरा अनुभागों में कार्रवाई करते हुए 48 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए। इन मोबाइल फोन की कीमत लगभग 7 लाख 20 हजार रूपए है। मोबाइल प्राप्त करने वालों में छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर एवं गृहणियां शामिल रहीं।

अनूपपुर

पुलिस ने थाना कोतमा एवं बिजुरी क्षेत्र से गुम हुए 22 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया। इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 3 लाख 30 हजार रूपये है। इसके अतिरिक्त जीआरपी अनूपपुर ने चोरी के मोबाइल बेचने की फिराक में घूम रहे एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 3 मोबाइल फोन कीमत 51 हजार रूपये जब्त किए।

इस प्रकार दोनों कार्यवाहियों में पुलिस ने 25 मोबाइल सहित लगभग 3 लाख 81 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। 

सिवनी

पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से 20 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर आवेदकों को लौटाए गए। इन मोबाइल फोन की कुल कीमत लगभग 4 लाख रूपये है।

आधुनिक तकनीक और साइबर विशेषज्ञता का प्रभावी उपयोग

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर तकनीक, सीईआईआर पोर्टल, डिजिटल विश्लेषण एवं अंतरराज्यीय समन्वय का प्रभावी उपयोग करते हुए गुम एवं चोरी हुई संपत्ति को नागरिकों तक वापस पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य में भी आमजन की संपत्ति की सुरक्षा तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए ऐसे प्रयास सतत जारी रहेंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से मुलाकात

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल कृषि मंत्रियों एवं अन्य विदेशी प्रतिनिधियों एवं अतिथियों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथियों का देश के दिल मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इन्दौर में स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी के सम्मान में रात्रि भोज भी दिया। अतिथियों के स्वागत के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और पर्यटन वैभव को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया।

रात्रि भोज एवं सांस्कृतिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसी राम सिलावट, कृषि मंत्री  एदल सिंह कंषाना, सांसद  शंकर लालवानी तथा सु कविता पाटीदार, महापौर  पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष के मती रीना सतीश मालवीय, विधायक मती मालिनी गौड़, सु उषा ठाकुर,  रमेश मेंदोला,  मधु वर्मा तथा  गोलू शुक्ला,  सावन सोनकर,  प्रताप करोसिया,  सुमित मिश्रा,  श्रवण सिंह चावड़ा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

आदिवासियों की करोड़ों की जमीन कौड़ियों के दाम खरीदने का मामला, कलेक्टर ने बैठाई जांच

छिंदवाड़ा

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में राजस्व अधिकारियों ने मिलीभगत कर भारिया जनजाति के परिवार की 6.60 करोड़ की 11 एकड़ जमीन मात्र छह लाख रुपये में खरीद ली। प्रमुख पर्यटन स्थल तामिया में यह जमीन चौरा पठार और पातालकोट व्यू पॉइंट के पास सड़क किनारे स्थित है, जिसे तत्कालीन तहसीलदार उमराव वारले की पत्नी प्रियंका वारले, बीएमओ जितेंद्र शाह और जुन्नारदेव एसडीएम कामिनी ठाकुर के पिता दिलीप सिंह (सभी आदिवासी) के नाम पर खरीदा गया है। शिकायत पर कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने जांच के आदेश दिए हैं।
पहले मांगी, फिर साजिश कर ई-केवाईसी के बहाने ले ली जमीन

दरअसल, भारिया परिवार की यहां 22 एकड़ पुश्तैनी जमीन है। पिता नान्हों भारती की मौत के बाद पुत्री विप्पा भारती और सिमिना बाई के बीच सीमांकन और बंटवारे को लेकर सालों से विवाद चल रहा था। दोनों की मौत के बाद वारिस बढ़े तो विवाद भी गहरा गया। इसी बीच सिमिना बाई के पुत्र रामदास भारती ने 11 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करा दी।

पीड़ित परिवार के सदस्य बिसन लाल भारती का आरोप है कि जुन्नारदेव एसडीएम पिछले साल उनके घर जमीन मांगने आई थीं। मना करने पर तत्कालीन पटवारी लेखराम यदुवंशी और कोटवार ने सरकारी योजना के लिए ई-केवाईसी के नाम पर कोरे कागजों पर अंगूठे और दस्तखत ले लिए। बाद में उनका इस्तेमाल कर जमीन का बंटवारा करवा दिया। बता दें कि तहसील ऑफिस में दो मई 2025 को नामांतरण के लिए आवेदन पहुंचा और 30 मई को नामांतरण हो गया। दो जुलाई 2025 को रजिस्ट्री हो गई। इसके बाद अधिकारियों के परिवार के नाम जमीन हो गई।
60 लाख रुपये प्रति एकड़ है जमीन की वास्तविक कीमत

तामिया स्थित इस जमीन का बाजार मूल्य 60 लाख रुपये प्रति एकड़ और शासकीय गाइडलाइन में करीब 27 लाख रुपये प्रति एकड़ है। यानी व्यावसायिक उपयोग की यह 11 एकड़ जमीन करीब 6.60 करोड़ रुपये होती है, जिसे छह लाख रुपये (तीन लाख चेक और तीन लाख नकद) में खरीदा गया है।

 

वर्ल्ड चैंपियनशिप्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे मध्यप्रदेश के अजय अहिरवार

भोपाल

मध्यप्रदेश के युवा प्रतिभागी अजय अहिरवार ने इंडिया स्किल्स नेशनल कंपीटिशन 2025- 26 में ब्रिक लेइंग स्किल में स्वर्ण पदक प्राप्त कर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन भारत की ओर से वर्ल्ड स्किल्स कंपीटिशन 2026 के लिए हुआ है, यह कंपीटिशन सितंबर 2026 में शंघाई, चीन में आयोजित होगी।

अजय अहिरवार का चयन

ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 के लिए भी हुआ है, जिसका आयोजन 23 से 29 जून 2026 तक ऑस्ट्रेलिया में किया जाएगा। प्रतियोगिता में वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। वर्तमान में अजय अहिरवार कानपुर में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर आगामी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं।

अजय की यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। सीमित संसाधनों के बीच अपनी मेहनत, लगन और कौशल के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के माध्यम से युवा वैश्विक स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।

अजय की उपलब्धियों और उनकी तैयारी को प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड द्वारा विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जिससे वे आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें।

मध्यप्रदेश में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश के युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहे हैं। राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराकर उन्हें वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

 

मध्य प्रदेश के ग्रामीणों को बड़ी राहत, गांवों में मकान और दुकान की रजिस्ट्री होगी निःशुल्क

भोपाल

मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर आवास, दुकान या भूखंडधारकों को अचल संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए निःशुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया गया है। इसके तहत सरकार अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट दे सकती है।

अधिकार पत्र के बाद भी नहीं मिल रहा था लोन, इसलिए बनी नई योजना

प्रदेश में स्वामित्व योजना के अंतर्गत अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेखों का निर्माण किया गया, जिसमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन्हें अधिकार पत्र तो दे दिए गए लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि बैंकों ने इसके आधार पर ऋण नहीं दिया। उन्हें रजिस्ट्री चाहिए, इसलिए सरकार ने ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026’ बनाई।

अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी, मानसून सत्र में आएगा विधेयक

चूंकि, नियम में शुल्क से छूट का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन किया गया है। इससे सरकार को अतिरिक्त शुल्क लेने से छूट देने का अधिकार मिल गया। अभी ग्रामीण क्षेत्र में रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत पंचायत उपकर और आधा प्रतिशत सेस लगता है।

इसी तरह मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क से छूट देने का प्रावधान भी अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। दोनों संशोधनों के लिए विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत होंगे।

 

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