4 जून को योग के ऑनलाइन सत्र में हर नागरिक हो शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समस्त प्रदेशवासियों से ऑनलाइन योग सत्र में शामिल होने की अपील की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसने आज सम्पूर्ण विश्व को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक जनआंदोलन के रूप में स्थापित हुआ है। आज अनेक राष्ट्र योग के महत्व को स्वीकार और अंगीकार कर चुके हैं। योग दिवस 21 जून पर अनेक आयोजनों के साथ ही 14 जून को विशेष ऑनलाइन सत्र आयोजित किया जा रहा है। बीस मिनिट के इस ऑनलाइन सत्र में कोई भी नागरिक हिस्सा ले सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : 2026 के सातवें काउन्ट डाउन के अवसर पर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 14 जून, 2026 को प्रातः 06:15 बजे से 07:35 बजे तक एक विशेष ऑनलाइन योग सत्र के आयोजन का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को योग से जोड़ते हुए स्वस्थ, जागरूक एवं निरोग समाज का निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठजनों, विद्यार्थियों, शासकीय सेवकों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस ऑनलाइन योग सत्र में अधिकाधिक संख्या में सहभागी बनें और योग को अपनी दैनिक जीवन शैली का अभिन्न अंग बनाएं।

टोल फ्री नंबर सुविधा

कार्यक्रम से जुड़ने के लिए टोल-फ्री नम्बर 1800-315-7008 पर मिस्ड कॉल देकर पंजीयन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की गई अपील में कहा है कि आइए, हम सभी मिलकर “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” के संकल्प के साथ अब हर घर योग को गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बनाने में सहभागी बनें और स्वस्थ मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

 

शिक्षा, श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम : मंत्री परमार

भोपाल : गुरूवार, जून 11, 2026, 20:17 IST

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि शिक्षा केवल विषयविद बनाने का साधन नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिक निर्माण का सबसे प्रभावी उपक्रम है। शिक्षित और संस्कारित युवा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

मंत्री  परमार भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित “सेज करियर डे-2026” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में वर्ष 2024 से 2026 के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित कंपनियों में चयनित 4 हजार 500 से अधिक विद्यार्थियों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया तथा चयनित विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।

मंत्री  परमार ने कहा कि सेज यूनिवर्सिटी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना के साथ आगे बढ़ें तथा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश और समाज के विकास में करें। मंत्री  परमार ने सभी विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

मंत्री  परमार ने युवाओं से कहा कि” आपने अभी अपने पंख फैलाए हैं, आपकी उड़ान अभी बाकी है। जीवन की प्रत्येक चुनौती आपको और अधिक सशक्त बनाती है।” उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

सेज ग्रुप के डायरेक्टर जनरल डॉ. सर्वेश शुक्ला ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रख्यात प्रबंधन गुरु एवं कॉलमिस्ट  एन. रघुरामन ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए प्रतिबद्धता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। सेज ग्रुप की कार्यकारी निदेशक आर्किटेक्ट शिवानी अग्रवाल ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, कौशल विकास और समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार की अध्यक्षता में “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025” को लेकर उच्च स्तरीय बैठक हुई

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में भोपाल स्थित मंत्रालय में “विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025” के विभिन्न प्रावधानों एवं उसके संभावित प्रभावों के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक हुई।

बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों, उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता, गुणवत्ता आश्वासन, मानकीकरण, प्रत्यायन व्यवस्था, नियामकीय सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन तथा विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के समग्र विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में यह विधेयक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षण, अनुसंधान एवं नवाचार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक  अशोक कड़ेल, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कान्हेरे सहित विविध शिक्षाविद,विषय विशेषज्ञ, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

मध्यप्रदेश समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए किए जा रहे विशेष प्रयत्नों से अवगत करवाया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काउंसिल की बैठक में ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुशासन, समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।

नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब देंगे विकास को गति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश को नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा से पहले करने में सफलता मिली है। प्रदेश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज की जाएगी। युवाओं के विकास पर विशेष रूप से जोर रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश में बहनों और बेटियों की उन्नति, कृषक कल्याण, नए मेडीकल कॉलेजों के माध्यम से उपचार कार्य को गुणवत्तापूर्ण बनाते हुए बेहतर कार्य हो रहा है। इसी तरह आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रसर है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी की गई है। पीएम महाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को अनेक संकायों और विषयों के अध्ययन से जोड़ा गया है। कौशल विकास और औद्योगिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं। देश में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क की धार जिले में स्थापना हुई है, यहां शीघ्र ही इकाइयों द्वारा रिकार्ड समय में कार्य प्रारंभ हो रहा है। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के वेस्ट को निष्पादित करने के साथ ही प्रदेश में जनकल्याण की दृष्टि से अनेक नए कार्य प्रारंभ करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में मुख्यत: ‘मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल’, ‘उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास’, ‘स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण’ एवं ‘सभी के लिए समानता और गरिमा’ से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

 

लाडली बहना योजना: 37वीं किस्त का इंतजार खत्म? जानिए कब खाते में आएंगे ₹1500 और नए रजिस्ट्रेशन पर क्या है अपडेट

भोपाल 

मध्य प्रदेश की महिलाओं को जल्द ही जून महीने की अच्छी खबर मिलने वाली है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त की तारीख बस नजदीक आ गई है। हर महीने की तरह राज्य की 1.25 करोड़ महिलाओं के खाते में 1500 रुपये आने वाले हैं। हालांकि इस बार लाभार्थी महिलाओं को थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के लाडली बहना योजना के कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई ऐलान नहीं किया गया है।

जानकारी मिल रही है कि इस बार 37वीं किस्त जारी करने का कार्यक्रम 15 जून तक खिंच सकता है। पिछले महीने 13 मई को सीएम मोहन यादव ने महिलाओं के खाते में 1500-1500 रुपये भेज दिए थे। लेकिन अभी मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं के चलते इसमें देरी हो सकती है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कुछ भी आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है। लाडली बहना योजना की अगली किस्त को लेकर औपचारिक ऐलान अगले 1-2 दिन में हो सकता है।

पिछले 2 साल में 47 हजार करोड़ ट्रांसफर
सीएम लाडली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जा रही है। पहले इस योजना के तहत 1000 रुपये दिए जाते थे। बाद में उसे बढ़ाकर 1250 रुपये किया गया। पिछले साल सीएम मोहन यादव ने इसमें बढ़ोतरी कर 1500 रुपये महीना कर दिया गया। जनवरी 2024 से मई 2026 तक लाडली बहनों के खाते में 47,775 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं।

लाडली बहना योजना ऑनलाइन आवेदन कब शुरू होंगे
लाडली बहना योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। अभी तक सरकार की ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा जा रहा है। इस योजना को लेकर नए रजिस्ट्रेशन 2023 से ही बंद पड़े हैं। फिलहाल जो जानकारियां मिल रही हैं, उसके मुताबिक इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जब भी सरकार नए रजिस्ट्रेशन शुरू करेगी, उसके बाद ही लाडली बहना योजना के नए फॉर्म भरे जाने शुरू होंगे।

क्या eKYC की वजह से बंद हो गया लाडली बहना का पैसा
अगर ईकेवाईसी न कराने की वजह से आपका लाडली बहना योजना का पैसा बंद हो गया है तो अभी आपके पास वक्त है। इस काम को तुरंत करा लें। इसके लिए आपको समग्र पोर्टल पर जाना होगा और वहां आपको ईकेवाईसी करें का विकल्प दिखेगा। वहां जाकर आप अपने आधार कार्ड से ईकेवाईसी कर सकते हैं।

लाडली बहना योजना का स्टेटस कैसे चेक करें
आपके खाते में पैसा आया है या नहीं, इसकी जानकारी के लिए आपको लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाना होगा। यहां आपको ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ पर क्लिक करना है। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी डाल कर आप जानकारी हासिल कर सकती हैं।

 

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता : आयोग अध्यक्ष यादव

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता : आयोग अध्यक्ष यादव

राज्य महिला आयोग ने केंद्रीय जेल भोपाल का किया निरीक्षण

भोपाल

सुधार गृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। महिला बंदियों को सम्मानजनक वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है। यह बात मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने केंद्रीय जेल भोपाल के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक महिला को उसके अधिकार, सम्मान और न्याय मिले।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने महिला बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। आयोग ने जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।

आयोग ने महिला वार्ड, चिकित्सालय, रसोई घर, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कक्ष, आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का अवलोकन किया। सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों द्वारा संचालित ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने ऑर्केस्ट्रा की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में प्रभावी पहल बताया।

महिला बंदियों से संवाद के दौरान उनकी दिनचर्या, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों और पुनर्वास गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। आयोग ने बंदियों द्वारा आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर में तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन भी किया। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव ने महिला बंदियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया

विशेष लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया

आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है

भोपाल 

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ क्षण ऐसे हैं जो केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं होते, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं और विश्वास का प्रतीक बन जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के देश की जनता के निरंतर विश्वास के साथ ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त कर दीर्घकाल तक राष्ट्र का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त करना गौरवपूर्ण क्षण है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण के संकल्प, सेवा और सुशासन की विजय है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च साधन बनाया। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी एक नई पहचान स्थापित की है। आज विश्व भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हुई है और यह परिवर्तन प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच तथा निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है।

प्रधानमंत्री मोदी जी का देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित होना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, यह भारत की जनता के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। निरंतर जनसमर्थन किसी पद या प्रचार से नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, पारदर्शिता, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्य शैली से अर्जित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को सदैव “प्रधान सेवक” के रूप में प्रस्तुत किया और गरीब, किसान, महिला, युवा तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सतत प्रयास किया। यही कारण है कि देश की जनता ने बार-बार उन पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, अथक कार्यशक्ति, दूरदर्शी सोच और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्पष्ट संकल्प करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है तथा उन्हें जन-जन का प्रिय नेता बनाता है।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना, रक्षा क्षमता, अंतरिक्ष विज्ञान और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और डिजिटल इंडिया जैसे अनेक कार्यक्रमों से करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। शासन की योजनाएँ पहली बार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी ढंग से पहुँची हैं।

भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में रहेगा अंकित

भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का भी यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों की सदियों पुरानी आस्था की पूर्ति का क्षण था। यह केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्म गौरव का पुनर्स्थापन था। जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक निर्णयों ने राष्ट्रीय एकीकरण को नई मजबूती प्रदान की। विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए जम्मू-कश्मीर आज नए अवसरों की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी ने यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छा शक्ति और स्पष्ट नीति के साथ कठिन से कठिन निर्णय भी राष्ट्रहित में लिए जा सकते हैं।

मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का निरंतर लाभ प्राप्त हुआ है

मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का लाभ निरंतर प्राप्त करता रहा है। प्रदेश में सड़क, रेल, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश एवं परियोजनाओं ने विकास को नई गति दी है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से गरीब, किसान, महिला और युवाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली अनेक योजनाओं का प्रभाव प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुँचा है। विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से मेरा गृह क्षेत्र रीवा भी इस परिवर्तनकारी यात्रा का साक्षी बना है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। यह परियोजना प्रधानमंत्री जी के उस विजन का प्रतीक है जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। आज रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और विंध्य की पहचान नई संभावनाओं से जुड़ चुकी है। विंध्य क्षेत्र में सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं, शिक्षा संस्थानों और आधारभूत संरचना के विस्तार ने विकास के नए द्वार खोले हैं। यह क्षेत्र अब पिछड़ेपन की पहचान से आगे बढ़कर प्रगति और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार का सतत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मुझे यह अनुभव करने का अवसर मिला है कि प्रधानमंत्री जी की सोच केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ भारत के व्यापक निर्माण की है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजना ने गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। प्रदेश सरकार भी प्रधानमंत्री जी के इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व हमें यह विश्वास देता है कि विकसित भारत का संकल्प केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक साकार होती राष्ट्रीय यात्रा है। उनके नेतृत्व में भारत ने आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज प्रत्येक भारतीय गर्व के साथ कह सकता है कि उसका देश विश्व पटल पर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। व्यक्तिगत रूप से मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे ऐसे युग निर्माता नेतृत्व के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

भारतीय चिंतन में आदर्श नेतृत्व का आधार सदैव लोक कल्याण और राष्ट्रहित रहा है।

“प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्।

नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥”

शासक का सुख प्रजा के सुख में और उसका हित प्रजा के हित में निहित होता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र प्रथम की यही भावना निरंतर परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश और विंध्य की जनता की ओर से मैं उनके प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र सेवा की अक्षुण्ण ऊर्जा प्रदान करें, ताकि उनके नेतृत्व में भारत विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर रहे।

· राजेन्द्र शुक्ल

 

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का किया अध्ययन

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का किया अध्ययन

भोपाल 
“मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना” के क्रियान्वयन संबंधी जानकारी लेने और इसमें विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिये छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों का एक दल मध्यप्रदेश भ्रमण पर है। इस दल ने गुरूवार को खाद्य संचालनालय में अधिकारियों से योजना की कार्य प्रणाली, परिवहन व्यवस्था, आईटी आधरित मॉनीटरिंग प्रणाली, संबंधित विभागों के बीच समन्वय, हित धारकों की भूमिका तथा खाद्यान वितरण व्यवस्था में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी ली।

अपर संचालक खाद्य एचएस परमार एवं अन्य अधिकारियों ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। छत्तीसगढ़ के दल में सहायक महाप्रबंधक आईटी एवं उपार्जन महेन्द्र साहू, उप सहायक महाप्रबंधक परिवहन मनोज वर्मा, उप सहायक महाप्रबंधक सार्वजनिक वितरण प्रणाली त्रिनाधा रेड्डी, वरिष्ठ सलाहकार सुशील तिवारी और सलाहकार संदीप हलदर शामिल हैं।

9954-मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य’ दुकानों तक राशन सामग्री के परिवहन का कार्य परिवहनकर्ता ठेकेदार के स्थान पर बेरोजगार युवकों के माध्यम से कराकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना नवाचार के रूप में लागू की गई है। इसमें लगभग 900 परिवहन कर्ता हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजनांतर्गत ऋण स्वीकृति से 7.5 मीट्रिक टन क्षमता के वाहन उपलब्ध कराएँ गए हैं। वाहनों के लिये राज्य सरकार द्वारा 1.25 लाख रूपये प्रति वाहन मार्जिन मनी और 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है। वाहनों से प्रतिमाह लगभग 3,000 क्विंटल राशन सामग्री का परिवहन किया जा रहा है। योजना में बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ सामग्री का परिवहन भी त्वरित गति से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के वाहनों में जीपीएस के माध्यम से स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से मॉनीटरिंग की जाती है।

 

त्विषा मौत मामला: जेल में ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती मिलीं गिरिबाला सिंह, महिला आयोग ने की मुलाकात

भोपाल 
त्विषा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से बुधवार को मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने मुलाकात की। आयोग की टीम महिला कैदियों और बंदियों की स्थिति का जायजा लेने जेल पहुंची थी। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने गिरिबाला सिंह से जेल में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने किसी भी प्रकार की परेशानी से इनकार करते हुए कहा कि जेल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं और उन्हें कोई शिकायत नहीं है। जानकारी के अनुसार, आयोग की टीम जब उनके पास पहुंची, तब वे लेखक देवदत्त पटनायक की पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ रही थीं। टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान वे काफी शांत नजर आईं। निरीक्षण के दौरान महिला आयोग की टीम को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो।  

क्या है ‘द प्रेग्नेंट किंग’ की कहानी
देवदत्त पटनायक का उपन्यास ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पौराणिक कथा से प्रेरित है। कथा के अनुसार राजा युवनाश्व संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ कराते हैं। यज्ञ के बाद रानियों के लिए तैयार किया गया मंत्रयुक्त पेय वे स्वयं पी लेते हैं, जिसके बाद वे गर्भवती हो जाते हैं। बाद में उनके शरीर से पुत्र मांधाता का जन्म होता है। इसी कथा को आधार बनाकर यह उपन्यास लिखा गया है। 

लीगल एड के वकीलों ने पेश किया वकालतनामा
त्विषा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने जिला अदालत में वकालतनामा प्रस्तुत किया है। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं। इस कारण अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि उन्हें मामले में पैरवी की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने इस संबंध में आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे हैं। 

दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच तेज
त्विषा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीबीआई को मिल गई है। जांच एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच का फोकस गर्भावस्था, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर है। इसके अलावा मोबाइल और लैपटॉप से रिकवर किए गए चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य डिलीट किए गए डेटा का भी विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मामले की सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके। 

CBI जुटा रही मेडिकल और डिजिटल सबूत
ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच कर रही सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों का मिलान कर रही है। जांच में प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर फोकस किया जा रहा है।

वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला कोर्ट में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण (लीगल सर्विस अथॉरिटी) से जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

सीबीआई मोबाइल, लैपटॉप से मिले चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और डिलीट डेटा की भी जांच कर रही है, ताकि मामले की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।

मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों की जांच कर रही सीबीआई
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और अन्य तथ्यों को जोड़कर जांच कर रही है। गिरिबाला सिंह की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश दस्तावेज में सामने आया है कि जांच से जुड़े तथ्य पहले ही उनके पास पहुंच रहे थे।

ट्विशा के परिजन के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि इसी के चलते गिरिबाला अग्रिम जमानत लेने में सफल हो गईं। मामले की प्रारंभिक जांच और रस्सी जब्त करने वाले एसआई दिनेश शर्मा से दोबारा पूछताछ की जाएगी।

शर्मा ने ही घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और क्राइम सीन तैयार किया था। घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की।

महिला बंदियों ने प्रस्तुत किए भजन
महिला आयोग की टीम ने जेल के महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों से उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली गई। जेल के सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों के ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। निरीक्षण के दौरान आयोग के सचिव सुरेश तोमर, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। 

एसआई ने रस्सी जब्त की और कार में रख ली
वकील अंकुर पांडे ने कहा– कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा 13 मई 2026 को सुबह करीब 9:42 बजे ट्विशा के घर पहुंचे। उन्होंने गिरिबाला और समर्थ के सामने रस्सी जब्त की, लेकिन दस्तावेज में किसी को चश्मदीद नहीं बनाया।

उन्होंने रस्सी अपनी कार में रख ली, जबकि ये तत्काल एम्स के डॉक्टरों को देना था। 13 मई को पीएम कराने भी दिनेश शर्मा ही एम्स पहुंचे थे। ट्विशा के परिजन ने इस पर 14 मई को हंगामा कर दिया। इसके बाद एसआई ने 15 मई को ये रस्सी डॉक्टरों को दी।

वकील कहते हैं, ऐसे सबूत जुटाते समय गवाह बनाना कानूनी रूप से जरूरी है। पुलिस को शुरुआत में ही गिरिबाला और पति समर्थ को संदिग्ध के रूप में चिह्नित करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। एक जून को गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर उनके घर पहुंची थी।

रस्सी की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं
वकील का दावा है कि प्रारंभिक जांच करने वाले एसआई दिनेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध है। अग्रिम जमानत के लिए दिए गए आवेदन में जब्ती से जुड़े दस्तावेज में हुई गलतियों का जिक्र था। इसी आधार पर जमानत मांगी गई। इससे संकेत मिलता है कि केस डायरी से जुड़ी अहम जानकारी गिरिबाला सिंह तक पहुंच रही थी।

अंकुर ने बताया कि ट्विशा के परिजन शुरू से ही पुलिस की मंशा पर सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप था कि पुलिस जानबूझकर गंभीर त्रुटियां कर रही है, जिससे केस कमजोर हो सकता है। एम्स में परीक्षण के बाद 16 मई को रस्सी को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया।

फिलहाल सीबीआई केवल ट्विशा की मौत की जांच कर रही है। 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था।

दो बेल्ट थे, पुलिस ने एक की जब्ती की
ट्विशा मामले में घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की। जब्ती पंचनामा में यह स्पष्ट नहीं है कि बेल्ट किसकी निशानदेही पर मिली। इसके बावजूद पुलिस ने उसी बेल्ट को मौत में इस्तेमाल मानकर जांच में शामिल किया और एम्स भोपाल भेजा।

केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने के आरोप
अग्रिम जमानत खारिज कराने लगाई गई याचिका के जवाब में गिरिबाला की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया है कि रस्सी से संबंधित जब्ती दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा था। उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए कानूनी रूप से उन्हें उस दस्तावेज तक पहुंच का अधिकार नहीं था।

यह अधिकार सिर्फ पुलिस को रहता है। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के जवाब के साथ यह दस्तावेज दाखिल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

ट्विशा के परिजन के वकील का आरोप है कि इससे जांच से जुड़े दस्तावेज आरोपियों तक पहले ही पहुंच रहे थे। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नटराजन के नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक आज

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट कल कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने अपने राज्यसभा नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत तत्काल सुनवाई योग्य मामला बताया और शीघ्र सुनवाई या अंतरिम आदेश की मांग की। अदालत ने उनकी दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

सिंघवी ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए नामांकन खारिज किया कि नटराजन ने लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी, जबकि वास्तव में केवल समन जारी हुआ था और मामले में अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यहां तक कि संज्ञान भी नहीं लिया गया था, फिर भी नामांकन खारिज कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय अवैध, मनमाना और पक्षपातपूर्ण है। साथ ही नामांकन खारिज करने के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश होते हुए आरोप लगाया कि उनका नामांकन गलत कानूनी आधार पर संक्षेप में खारिज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि वास्तविक कानूनी उपाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दायर करना है। 

मीनाक्षी नटराजन को चुनाव आयोग पर भरोसा
पूरे मामले पर मीनाक्षी नटराजन का भी बयान सामने आया था। चुनाव आयोग के दफ्तर से बाहर आकर मीडिया से उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमारी बात सुनी है और सिंघवी जी ने पूरे मामले को विस्तार से उनके समक्ष रखा है। हमें संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।

चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार
जो जानकारी सामने आ रही है, इसके मुताबिक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को करीब 35 मिनट तक चुनाव आयुक्त से  बातचीत की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, मीनाक्षी नटराजन, भूपेश बघेल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बाहर आकर प्रेस को ब्रीफ किया था। उसमें सिंघवी ने बताया था कि चुनाव आयोग तक हमने हमारी बात पहुंचा दी है। उन्होंने हमारी बात पर विचार कर फैसला लेने का कहा है। हालांकि ये फैसला कब आएगा, इसका कहीं जिक्र नहीं है। बुधवार रात तक कोई फैसला नहीं आया। अब संभावना जताई जा रही है कि कुछ देर में चुनाव आयोग मामले में अपना फैसला सुना सकता है। 

न्याय में इतनी देरी क्यों : सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनका कहना था कि चुनाव आयोग चाहता तो इस मामले में बुधवार को ही फैसला दे सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भाजपा उम्मीदवार के मामले में चुनाव आयोग ने निर्णय लिया था, लेकिन इस प्रकरण में आयोग ने कोई विचार नहीं किया। सिंघार ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की अनदेखी की है।

उन्होंने कहा, “हमने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई और निर्णय की मांग की थी। अदालत ने कल का समय दिया है, लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? कई मामलों में रातभर सुनवाई होती रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली की तरह काम कर रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग रबर स्टांप की तरह किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को न्यायपूर्ण फैसला देगा।

तीनों राज्यसभा सीटें जीत सकती है भाजपा
दरअसल, मामले पर चुनाव आयोग की चुप्पी ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला करेगा। यदि तब तक आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई फैसला नहीं करता या खामोश ही रहता है तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन तय हो जाएगा।

बाकी दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्वाचन निर्विरोध तय है। ऐसे में प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें भाजपा बिना लड़े जीत जाएगी।

सिंघार बोले- न्याय में देरी क्यों?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया?

सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर चुनाव आयोग ने कोई विचार नहीं किया। उनके रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाईं।

सुप्रीम कोर्ट ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की लास्ट डेट है।

अदालत के निर्णय के बाद ही करें कार्यवाही
वहीं, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा विधानसभा पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ विधानसभा गेट पर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की निर्वाचन शाखा भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। शर्मा ने कहा कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि दोपहर एक से तीन बजे के बीच भाजपा के तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए विधानसभा की निर्वाचन शाखा को अदालत के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।” 

कांग्रेस की बैठक में होगी चर्चा
गुरुवार को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक भी आयोजित की गई है। पार्टी ने अपने सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली तलब किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में ये बैठक होगी। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी नटराजन का मामले पर भी इस बैठक में चर्चा हो सकती है। इधर कांग्रेस आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर सकती है।  

अब आगे क्या हो सकता है…
1. आयोग नामांकन बहाल करता है तो चुनाव फिर मुकाबले में बदल जाएगा

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के अनुसार, यदि चुनाव आयोग यह मानता है कि रिटर्निंग ऑफिसर से त्रुटि हुई है तो वह स्पष्ट आदेश जारी कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन वैध घोषित कर सकता है। ऐसे में फिर से वोटिंग होगी।

2. आयोग राहत नहीं देता तो भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन होगा

यदि आयोग हस्तक्षेप नहीं करता या रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को बरकरार रखता है, तो कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव से बाहर मानी जाएंगी। ऐसे में भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीतेंगे।

3. राष्ट्रपति के पास जाने से कांग्रेस को क्या मिलेगा?

राष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस गलत तरीके से नामांकन निरस्त करने का मुद्दा उठा सकती है। राष्ट्रपति मामले का संज्ञान लेकर चुनाव आयोग या संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से जानकारी मांग सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति सीधे चुनाव आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव प्रक्रिया के किसी फैसले को रद्द नहीं कर सकते। इस मुलाकात का महत्व संवैधानिक और राजनीतिक संदेश के रूप में अधिक माना जा रहा है।

कोर्ट में मामला लंबित होने की शिकायत हुई थी
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाई है।

कांग्रेस की दलील- यह केस नहीं, सिर्फ नोटिस है
चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस की ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है। सिंघवी के मुताबिक, तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि संज्ञान क्यों न लिया जाए?

कांग्रेस का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए इसे हलफनामे में लिखना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैर-कानूनी और सीटों की चोरी करार दिया है।

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