प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में बड़ा खुलासा, 6.5 लाख गर्भवतियों की जांच में 1.75 लाख हाई-रिस्क श्रेणी में

भोपाल 

 मध्यप्रदेश में हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत बीते छह माह में 6.5 लाख गर्भवतियों की जांच में 1.75 लाख को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में चिह्नित किया गया। भोपाल में 31.1 फीसदी गर्भवती हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं। प्रदेश में गर्भवतियों में हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की दर 26.9 प्रतिशत पाई गई। यानी हर 100 गर्भवती महिलाओं में लगभग 27 महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में पाई गईं।

वायु प्रदूषण से भी खतरा
भोपाल एम्स के हालिया अध्ययन के अनुसार वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण (पीएम 2.5 और पीएम 10) सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर रहे हैं और ये कण प्लेसेंटा (अपरा) तक पहुंच सकते हैं। प्लेसेंटा में सूजन, ऑक्सीडेंटिव स्ट्रेस बढ़ता है। शिशु तक ऑक्सीजन, पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित होती है।

गर्भवतियों को खतरे में डाल रहे ये रोग
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी वाली गर्भवतियों में एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और गर्भकालीन मधुमेह पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार 35 वर्ष से अधिक आयु में गर्भधारण, मोटापा, जुड़वा या बहुभ्रूण गर्भावस्था और पूर्व में गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के कारण भी महिलाओं की स्थिति खतरनाक हो जा रही है।

वायु प्रदूषण से प्लेसेंटा को क्या-क्या नुकसान
    जहरीले कण प्लेसेंटा के ऊतकों (tissues) को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे बच्चे तक पहुंचने वाले रक्त, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित होती है।

    एम्स के इस शोध में पाया गया कि प्रदूषण के कारण IGFBP3 नामक एक आवश्यक जीन दब जाता है। यह जीन भ्रूण के स्वस्थ विकास के लिए बड़ी भूमिका निभाता है।

    सांसों के माध्यम से जहरीले तत्वों में लेड, कैडमियम और एंटीमनी जैसी भारी और जहरीली धातुएं प्लेसेंटा में जमा होने लगती हैं, जो शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को क्षति पहुंचाती हैं।

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी में खतरे

एम्स और अन्य चिकित्सा अध्ययनों में हाईरिस्क प्रेग्नेंसी यानी गर्भावस्था में जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है-

    प्रीक्लेम्पसिया और हाइपरटेंशन का बड़ा खतरा, इसमें गर्भवती का बीपी असामान्य तरीके से बढ़ जाता है।
    प्री-टर्म डिलीवरी के मामले बढ़ना। इसमें 37 सप्ताह से पहले ही गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है।
    इसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है। इसका असर यह होता है कि जन्म लेने वाले शिशुओं में न्यूरोलॉजिकल और व्यवहार संबंधी बदलाव का जोखिम बढ़ता है।
    स्टिलबर्थ होना। यह एक अत्यंत गंभीर मामला है। इसमें गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु का खतरा होता है।

जानें क्या सावधानियां जरूरी
    औद्योगिक इलाकों के साथ ही भारी ट्रैफिक और ज्यादा वायुप्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाने से बचें। अगर जाना पड़ रहा है तो मास्क लगाकर जाएं। मास्क का यूज तब-तब करें जब घर से बाहर निकलना हो। ध्यान दें कि मास्क अच्छी गुणवत्ता वाला जैसे N95 या उससे बेहतर हो।

    घर के अंदर भी वायुप्रदूषण का रिस्क बढ़ा है। ऐसे में एयर प्यूरीफायर का यूज करें। घर की खिड़कियां, दरवाजे बंद रखें।

    इस दौरान नियमित रूप से जांच करवाने को लेकर अवेयर रहें। समय पर जांच कराएं, पौष्टिक आहार लें।

20 प्रतिशत गर्भवती हाई-रिस्क श्रेणी में
20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई-रिस्क श्रेणी में आ रही हैं। खून की कमी बीपी, थायराइड और अन्य बीमारियों के साथ ही 35 वर्ष अधिक आयु में शादी करने और प्रदूषण के कारण भी गर्भवतियों में हाई-रिस्क की स्थिति पैदा हो रही है। समय पर जांच कराने से मां और शिशु, दोनों की जान बच सकती हैं।

-डॉ. नसीमा, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एम्स भोपाल

MP में चरवाहे बनेंगे वन्यजीवों के संरक्षक, क्षेत्रीय सम्मेलन होंगे आयोजित, ₹22.79 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

भोपाल
 मध्य प्रदेश के जंगलों में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव (मानव-वन्यजीव संघर्ष) को रोकने के लिए वन विभाग अब एक बेहद जमीनी स्तर का प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर ‘चरवाहा सम्मेलन’ आयोजित किए जाएंगे।

इन सम्मेलनों के जरिए उन ग्रामीणों और चरवाहों को सीधे जागरूक किया जाएगा, जो मवेशी चराने के लिए अक्सर जंगलों के भीतर या संरक्षित क्षेत्रों के आसपास जाते हैं। उन्हें वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन और खुद की सुरक्षा के गुर सिखाए जाएंगे।

यह महत्वपूर्ण फैसला वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित ‘मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन समिति’ की 22वीं बैठक में लिया गया। प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि फील्ड में पारदर्शिता और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए अब हर तीन महीने में यह बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।

22.79 करोड़ से सुधरेंगे जंगल के हालात
बैठक में वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके रहन-सहन (आवास विकास) को बेहतर बनाने के लिए 22.79 करोड़ रुपये के बड़े बजट को मंजूरी दी गई। इस राशि का उपयोग इन मुख्य कामों में होगा:

मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना: इंसानों और जंगली जानवरों के बीच टकराव रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान।

ब्लैक बक कैप्चर ऑपरेशन: काले हिरणों के संरक्षण और उनके सुरक्षित रेस्क्यू/स्थानांतरण के लिए विशेष अभियान चलाना।

रिसर्च और क्षमता संवर्धन: वन्यजीवों के व्यवहार पर अध्ययन करना और वन अमले को आधुनिक तकनीकों से लैस करना।

वार्षिक कार्ययोजना मंजूर: इसके साथ ही समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए अपनी एनुअल प्लानिंग को भी हरी झंडी दे दी है।

बैठक के दौरान प्रदेश के तमाम टाइगर रिजर्वों (जैसे कान्हा, बांधवगढ़, पेंच आदि) के संचालकों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया और अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी रिपोर्ट पेश की।

बैठक में वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समीता राजौरा, टाइगर सेल के अध्यक्ष एवं अपर पुलिस महानिदेशक सहित राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव भी शामिल हुए। प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्वों के संचालकों ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में भागीदारी की।

 

MP में 30 जून तक महा-अभियान, रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगा बिना गारंटी ₹15,000 तक का आसान लोन

भोपाल
 सड़कों और फुटपाथों पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाले छोटे कारोबारियों (पथ विक्रेताओं) को डिजीटल, वित्तीय और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ (पीएम स्वनिधि) योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में 1 जून से 30 जून तक एक विशेष महा-अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत जहां एक ओर जिला मुख्यालयों पर उत्सव का माहौल रहेगा, वहीं दूसरी ओर नगरीय निकायों में ‘सेवाएं आपके द्वार’ की तर्ज पर काम होगा।

बताई जाएंगी प्रेरक कहानियां
ना के सफल लाभार्थियों और उनके परिवारों की प्रेरक सफलता की कहानियों को साझा किया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पथ विक्रेताओं को सम्मानित कर अन्य हितग्राहियों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ पहुंचाना है।

प्रदेश में राज्य शासन, नगरीय निकायों और ऋणदाता संस्थाओं के सहयोग से अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ मिल चुका है।

लोक कल्याण मेलों में मिलेगी वित्तीय और डिजिटल सहायता

नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित लोक कल्याण मेलों के माध्यम से पथ विक्रेताओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें-

– बिना गारंटी के 15 हजार रुपये तक का ऋण

– न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता

– क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी

– डिजिटल लेन-देन के लिए मार्गदर्शन

– बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच

जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

बैंकर्स-वेंडर्स बैठकें और शिकायतों का समाधान
अभियान के दौरान बैंकर्स और पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके। वहीं नगरीय निकाय सहायता केंद्रों के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी किया जाएगा।

दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे स्वनिधि कैंप
सेंसस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” आयोजित कर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ा जाएगा। विशेष शिविरों में नए और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उनका पंजीयन कराया जाएगा तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र वेंडर योजना के लाभ से वंचित न रहे।

 

मालवा-निमाड़ में फसल विविधीकरण का असर, केला-चिया-सीताफल जैसी हाई वैल्यू फसलों से बढ़ रही किसानों की आय

मालवा-निमाड़
लंबे समय तक सोयाबीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे मालवा-निमाड़ में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए फल, सब्जी, औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

इंदौर संभाग की रबी 2025-26 समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए जिला-वार प्रस्तुतिकरणों से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में फसल विविधीकरण अब नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर गति पकड़ रहा है।

कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम मूल्य वाली फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसका रकबा बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ रहे किसान

आलीराजपुर : फलों और सब्जियों के नए क्लस्टर

आलीराजपुर में आम, सीताफल और पपीता जैसी फल फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में नए बागवानी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक किसानों को उन्नत खेती और बेहतर बाजार से जोड़ा जा सके।

झाबुआ : तरबूज से बनी नई पहचान
झाबुआ ने तरबूज उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। बढ़ते उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तरबूज अब जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है।

बड़वानी : केले से बढ़ रही समृद्धि
बड़वानी में केले की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन गई है। यहां उत्पादित केले की मांग देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रही है। इसके अलावा किसानों को मिलेट्स उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

खरगोन : सफेद मूसली बना आय का नया आधार
खरगोन में सफेद मूसली जैसी औषधीय फसल किसानों की आय का नया स्रोत बनकर उभरी है। वहीं हाईब्रिड मक्का उत्पादन को आधुनिक कृषि नवाचार के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है।

खंडवा : चिया और कुसुम की बढ़ती खेती
खंडवा में चिया, कोदो और कुटकी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। साथ ही कुसुम की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को नई दिशा दी जा रही है।

धार : ब्लूबेरी के साथ नए प्रयोग
धार जिले में ब्लूबेरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह फसल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए प्रयोग के रूप में उभर रही है और किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

बुरहानपुर : ड्रिप सिंचाई से बढ़ा मुनाफा
बुरहानपुर में ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से केले की खेती को नई दिशा मिली है। पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

सोयाबीन के विकल्पों पर बढ़ा जोर
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने सोयाबीन के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने खेतों में केवल बीटी कपास पर निर्भर रहने के बजाय कपास की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि कीट प्रकोप की समस्या को कम किया जा सके।

उन्होंने किसानों को जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।

मालवा-निमाड़ में उभरता यह कृषि परिवर्तन संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान केवल सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों के केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकती है।

 

मॉनसून की रफ्तार तेज! 14 राज्यों में पहुंचा, अगले 4 दिनों में बिहार-झारखंड में झमाझम बारिश के आसार

भोपाल 

मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद तेज रफ्तार बरकरार रखी है. वो अब तक 14 राज्यों के पार निकल गया है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अगले 3-4 दिनों में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा पहुंच सकता है.दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं। अगले 3-4 दिनों में मॉनसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों, पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा। 

बुधवार को भारत मौसम विभाग ने ये पूर्वानुमान जारी किया. अगले 5-7 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप हिमालयी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी) होने की संभावना है. साथ ही केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी भारी बारिश हो सकती है। 

मॉनसून दिल्ली-यूपी कब पहुंचेगा
मॉनसून ने मंगलवार को सभी उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों को कवर कर लिया था.भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून पिछले सात दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गोवा पहुंच चुका है. मॉनसून दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यो में 25 जून तक पहुंच सकता है. जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों में मॉनसून जून के अंत तक या जुलाई में पहुंच सकता है। 

दिल्ली, यूपी में कल से झमाझम बारिश
मॉनसून अभी भले ही उत्तर भारत न पहुंचा हो, लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गुरुवार से दो दिन बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में गुरुवार से बारिश देखने को मिल सकती है. दिल्ली में बारिश के साथ गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी। 

दिल्ली एनसीआर में पिछले हफ्ते भी दो दिन तेज बारिश देखने को मिली थी. जबकि मंगलवार रात को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई थी. दिल्ली एनसीआर में 11-12 जून को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश का अलर्ट है। 

केरल में ऑरेंज अलर्ट
मॉनसून सीजन के पहले हफ्ते में केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में जबरदस्त बारिश हो रही है. केरल के अलपुझा और एर्नाकुलम जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. केरल के कोल्लम, पथनमिट्टा, कोट्टायम, त्रिशूर, मल्लपुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। 

तेलंगाना भी भारी बारिश
तेलंगाना के विकाराबाद, महबूबनगर, नारायणपेट और जोगुलांबा गडवाल में भी भारी बारिश हो रही है. हालांकि मौसम विभाग ने इस साल मजबूत अल नीनो की भविष्यवाणी की है, जो मॉनसूनी बारिश के लिए खतरा साबित हो सकता है. बारिश में कमी से जून-जुलाई के दौरान तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रह सकता है। 

पार्षद से संसद तक का सफर! महेश केवट राज्यसभा पहुंचे तो बनेंगे सीधे पार्लियामेंट मेंबर

ओरछा 

निवाड़ी जिले के ओरछा कस्बे के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मुहल्ले में रहने वाले महेश केवट के राज्यसभा जाने का रास्ता लगभग साफ है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद यदि कांग्रेस को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार, भोई समाज के पहले राज्यसभा सांसद होंगे।

पत्नी हार गई थी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव
महेश केवट 2000 से लेकर 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे। महेश की पत्नी ने ओरछा नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

बीजेपी ने कर दिया था निष्कासित,
2022 के नगर परिषद ओरछ़ा के चुनाव में उस समय स्थानीय बीजेपी नेतृत्व ने महेश केवट पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में उन्हें निष्कासित कर दिया था। महेश के साथ उन कार्यकर्ताओं को निष्कासित किया गया था जिन्होंने भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

महेश के साथ करीब दर्जन भर भाजपाई और पार्टी से बाहर किए गए थे। लेकिन, महेश और निवाड़ी विधायक अनिल जैन ने भोपाल में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में महेश केवट के निष्कासन की फाइल निकलवाई तो यहां कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। महेश ने पार्टी को यह जानकारी दी कि उन्होंने और उनके परिवार के किसी सदस्य ने बागी होकर चुनाव नहीं लड़ा है।

बल्कि सोशल मीडिया में कई ऐसे पत्र वायरल हुए जिनमें महेश के निष्कासन के आदेश में कुछ और नाम जोड़कर उन्हें भी बीजेपी से निष्कासित बताया गया। इसके बाद पार्टी ने अधिकारिक तौर पर 2023 में महेश के निष्कासन को समाप्त करने का आदेश तत्कालीन प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी की तरफ से जारी किया गया।

हरदौल बैठका पर सेवा करता है परिवार
महेश केवट के परिवार के सदस्य ओरछा के फूलबाग में स्थित हरदौल बैठका की सेवा करते हैं। लाला हरदौल बुन्देलखंड के लोकदेवता हैं। महेश के छोटे भाई हरदौल बैठका में आज भी नियमित सेवा कार्य करते हैं। महेश सीमेंट व्यवसायी हैं।

ऐसे बीजेपी की नजर में आए महेश केवट हेमंत खंडेलवाल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के संगठन और सरकार के विभिन्न बोर्ड, निगम मंडलों में नए ऐसे चेहरों को शामिल करने पर मंथन चल रहा था कि ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए जो अब तक किसी अहम जिम्मेदारी पर न रहे हों।

यह भी तय हुआ कि उन जातियों में से नेताओं को छांटा जाए जिन वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बहुत कम रही हो। ऐसे में मल्लाह, केवट, मांझी समाज से शिवपुरी भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजू बाथम और महेश केवट के नाम सामने आए। सीताराम बाथम पहले कई पदों पर रह चुके थे। ऐसे में महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के लिए चुना गया।

जैसे ही महेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने उसके तुरंत बाद उनके विरोधी भाजपाई एक्टिव हुए और उन्हें भाजपा से निष्कासित नेता बताते हुए उनके निष्कासन के आदेशों को सोशल मीडिया पर शेयर कराना शुरु कर दिया।

इसके बाद भोपाल में एक दिन निवाड़ी भाजपा के नेताओं, विधायक, जिलाध्यक्ष सहित चुनिंदा पदाधिकारियों की भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक ली। इस बैठक में तत्कालीन जिलाध्यक्ष अखिलेश अयाची से कहा गया कि आप महेश के निष्कासन के मामले का पटाक्षेप कीजिए। सोशल मीडिया पर पूरी जानकारी विस्तार से लिखिए। उसके बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने अपने फेसबुक पर सिर्फ लेटर पोस्ट कर दिया।

राज्यसभा के लिए कैसे चुने गए
बीजेपी ने एमपी में बीजेपी के कब्जे वाली दो सीटों पर राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को घोषित किया। रजनीश को वीडी शर्मा की सिफारिश पर उम्मीदवार बताया गया।

इसके बाद सीएम डॉ मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने यह तय किया कि उम्मीदवार सामाजिक जातिगत समीकरणों के हिसाब से उतारा जाएगा। कई नामों पर विचार-मंथन हुआ लेकिन, जब जीत के लिए जरूरी 58 विधायकों के आंकड़े को लेकर टेंशन दिखी तो तय किया गया कि ऐसे केंडिडेट को उतारा जाए जिसकी उम्मीदवारी मात्र से बड़ा संदेश जाए।

यूपी चुनाव में महेश की भूमिका होगी अहम
अगले साल फरवरी- मार्च में यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चूंकि ओरछा तीन तरफ से एमपी-यूपी के बॉर्डर पर लगा हुआ है। बुन्देलखंड के मुख्य शहर झांसी की ओरछा से दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। ओरछा में धार्मिक स्थल के साथ ही बडे़ होटल भी हैं। ऐसे में यूपी सरकार और राजनीतिक दलों की बैठकें और नेताओं का आना-जाना होता रहता है।

यूपी की राजनीति में अकेले भाजपा ही नहीं, सपा बसपा में भी केवट निषाद समाज के नेता बडे़ पदों पर रहे हैं। ऐसे में अब महेश केवट का उपयोग पार्टी यूपी के चुनाव में करेगी। झांसी से लेकर पूरे गंगा किनारे केवट समाज में महेश भाजपा के प्रचारक के तौर पर काम करेंगे।

यूपी में केवट समाज की राजनीतिक पकड़ समझिए

सबसे पहले बीजेपी में निषाद समाज का दबदबा देखिए

    डॉ संजय निषाद : निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
    साध्वी निरंजन ज्योति: फतेहपुर से लोकसभा सांसद और केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुकी हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष हैं।
    जयप्रकाश निषाद: पूर्वांचल (गोरखपुर क्षेत्र) में भाजपा संगठन के बेहद मजबूत स्तंभ हैं। भाजपा में क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न दायित्वों को संभालने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (मत्स्य एवं पशुधन विभाग) के पद पर रह चुके हैं। वे बीजेपी के राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं।
    बाबूराम निषाद : बाबूराम निषाद हमीरपुर से जिला अध्यक्ष, भाजयुमो क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष, बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहने के बाद वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।
    भगवान दास निषाद: बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र के पुराने भाजपा नेता हैं। पार्टी संगठन में विभिन्न जिला व क्षेत्रीय पदों पर रहने के साथ-साथ इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के तहत मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) बनाकर समाज के संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को मजबूत किया गया था।

अब सपा में समाज की हिस्सेदारी

    रामभुआल निषाद: वर्तमान में समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद हैं और वह पहले बसपा और सपा सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।
    राजपाल कश्यप: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व एमएलसी (MLC) हैं। वह सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बहुजन समाज पार्टी

    लालचंद निषाद: बसपा के बहुत पुराने और कद्दावर नेता रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश विधानसभा में पूर्व एमएलसी (MLC) और मायावती सरकार में अति पिछड़ा वर्ग के महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।
    हरिप्रकाश निषाद: वर्तमान में बसपा संगठन में गोरखपुर के जिला अध्यक्ष पद पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
    राम प्रसाद निषाद:
बसपा शासनकाल में विभिन्न आयोगों में पूर्व अध्यक्ष/सदस्य और संगठन के मुख्य पदों पर काम कर चुके हैं।

एमपी में चंबल से महाकौशल तक प्रभावी हैं केवट समाज

ग्वालियर-चंबल: मेहगांव, अटेर, लहार, मुरैना, दिमनी, अंबाह, दतिया इन सीटों पर केवट और मल्लाह मतदाताओं की संख्या 15,000 से 25,000 तक है, जो किसी भी दल का खेल बना या बिगाड़ सकते हैं।

बुंदेलखंड: टीकमगढ़, जतारा, पृथ्वीपुर, खरगापुर, निवाड़ी,चंदला, पन्ना, इस क्षेत्र में रैकवार और केवट समाज के पारंपरिक वोट बैंक का झुकाव बेहद निर्णायक होता है।

विंध्य और महाकौशल: रीवा, सेमरिया, अमरपाटन, मैहर, सिहोरा, जबलपुर उत्तर, पूर्व विधानसभा सीटों पर माझी बर्मन और बिंद समाज चुनावी नतीजों को सीधा प्रभावित करते हैं।

मध्य क्षेत्र: होशंगाबाद, बाबई (सोहागपुर), बुधनी, उदयपुरा नर्मदा किनारे की इन सीटों पर केवट, कहार और ढ़ीमर समाज के वोट निर्णायक माने जाते हैं।

सीधी के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल दम्पति एवं दो बच्चों को त्वरित सहायता पहुँचाकर अस्पताल में भर्ती कराया

भोपाल 

सीधी जिले के थाना चुरहट क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में घायल हुए एक दम्पति एवं उनके दो बच्चों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायलों को समय रहते चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी।

10 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चुरहट क्षेत्र अंतर्गत बड़खरा में मोटर साइकिल से गिरने के कारण एक दम्पति एवं दो बच्चे घायल हो गए हैं तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल थाना चुरहट क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजय साकेत एवं पायलट  वेंकटेश्वर मिश्रा ने  मौके पर पहुँचकर पाया कि मोटर साइकिल दुर्घटना में एक दम्पति एवं दो बच्चे घायल हो गए थे। डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को सुरक्षित एफआरव्ही वाहन की सहायता से शासकीय चिकित्सालय, चुरहट पहुँचाया। डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया से घायलों को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकी।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटनाओं सहित हर संकट की स्थिति में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, तत्परता एवं सेवा भाव के साथ लोगों की सहायता कर रहे हैं।

 

इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर छापा

इंदौर

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल पर लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कंडवाल के ठिकानों पर छापा मारते हुए 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार से ज्यादा की संपत्ति निकाली है। 30 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान उनकी कुल वैध आय लगभग 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।

एसपी (लोकायुक्त) डॉ. राजेश सहाय के अनुसार कार्रवाई गुप्त शिकायत के बाद हुई है। पुलिस ने लक्ष्मी नारायण के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर सुबह करीब 6 बजे आनंद विहार कालोनी (स्कीम-103) में छापा मारा। पांच मंजिला इस भवन में कंडवाल का सुपर मार्केट, जिम भी संचालित हो रहा था। इस संपत्ति की कीमत 2 करोड़ 66 लाख से ज्यादा बताई गई है। सुपर मार्केट उनका बेटा पवन और अभिषेक चलाते हैं जबकि जिम 1 लाख 15 हजार रुपये प्रति माह किराये पर दे रखी है।

ठिकानों से मिली अचल संपत्तियों और भूखंडों का ब्यौरा

  •     ग्राम सोनवाय में 664170 रुपये कीमती 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि
  •     ग्राम तारपुरा (धार) में 9,36,655 रुपये कीमत की सर्वे क्रमांक 33 रकबा 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि
  •     भूखण्ड क्रमांक 149-सी, आनंद विहार कालोनी (स्कीम नम्बर-103) में भूखंड (सी-149) मिला है। इस पर जी 3 करीब 13560 वर्गफीट भवन निर्माण है। इसकी अनुमानित कीमत 2,66,57,450 रुपये है।
  •     इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम-140 स्थित भूखण्ड क्रमांक- 220 (54 वर्गमीटर) मिला है। उसकी कीमत 21,90,806 रुपये है।
  •     इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक- 140 के सेक्टर ए में टाईप एम का भूखण्ड (378) मिला है। इसकी कीमत 15,34,572 रुपये है।
  •     ग्राम बनेडिया (धार) में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 12,26,118 रुपये है।

धार और पीथमपुर में मिली करोड़ों की कृषि भूमि

  •     ग्राम बनेडिया (धार) में 1.176 हेक्टेयर कृषि भूमि मिली है। इसकी कीमत 22,71,327 रुपये बताई है।
  •     ग्राम बनेडिया (धार) में 2.100 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 40,55,940 रुपये है।
  •     ग्राम तारपुरा सागौर (धार) में 2.195 कृषि भूमि है। इसकी कीमत 1,53,15,350 रुपये है।
  •     ग्राम तारपुरा पीथमपुर (धार) में 0.345 हेक्टेयर एवं 0.606 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 67,27,239 रुपये है।
  •     ग्राम बेकल्या पीथमपुर (धार) में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 11,94,185 रुपये है।
  •     Gram बेकल्या पीथमपुर (धार) में 2.435 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 2,28,97,007 है।
  •     ग्राम तारपुरा पीथमपुर (धार) में 1.212 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसकी कीमत 25,00,000 रुपये है।

बैंक लॉकर से मिला सोना, मिली 287.7% अनुपातहीन संपत्ति

कुल अचल संपत्ति में 9,76,15,004 रुपये व्यय किया गया है। सांठा बाजार स्थित बैंक ऑफ इंडिया में लॉकर मिला है। उसमें 1.89 ग्राम सोना मिला है। एसपी के अनुसार आरोपित की 30 साल की नौकरी में कुल आय 2,80,00,000 रुपये है जबकि सर्चिंग में 10 करोड़ 82 लाख 73 हजार रुपये की संपत्ति मिली है। उक्त संपत्ति 287.7 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति मिली है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में 5.39 करोड़ हितग्राहियों को नि:शुल्क खाद्यान्न आवंटित

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में 5.39 करोड़ हितग्राहियों को नि:शुल्क खाद्यान्न आवंटित

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 5.39 करोड़ हितग्राहियों को मिलेगा मुफ्त राशन
5.39 करोड़ लोगों को नि:शुल्क खाद्यान्न आवंटित, PM गरीब कल्याण अन्न योजना से बड़ी राहत
गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ करोड़ों तक, 5.39 करोड़ हितग्राहियों के लिए मुफ्त खाद्यान्न वितरण

भोपाल 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि दिसम्बर, 2023 से अभी तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अंतर्गत 5.39 करोड़ से अधिक पात्र हितग्राहियों को कुल 24,209 करोड़ रूपये का 74.31 लाख में. टन निःशुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया है। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों को निःशुल्क राशन का वितरण करने के लिए असंगठित एवं प्रवासी श्रमिकों की 29 वी प्राथमिकता श्रेणी सम्मिलित की गई। इसमें असंगठित एवं प्रवासी श्रमिकों के 7.82 लाख परिवारों के 27.80 लाख नवीन श्रमिकों को पात्रता पर्ची जारी कर निःशुल्क राशन का वितरण किया जा रहा है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत वितरित राशन सामग्री के परिवहन करने वाले 896 परिवहनकर्ताओं एवं 27,872 दुकानों के कमीशन देयकों का प्रतिमाह लगभग 40 करोड़ रूपये का भुगतान ऑनलाईन किया जा रहा है। यह व्यवस्था माह फरवरी, 2024 से लागू है। पूर्व में संचालित 269 पीडीएस के प्रदाय केन्द्रों की संस्था से बढ़ाकर 273 (42 नवीन) की गयी है। इससे सामग्री के प्रदाय के समय एवं राशि की बचत हुई है।

 

कटनी में दिनदहाड़े चेन स्नैचिंग, ऑटो से जा रही शिक्षिका बनी बदमाशों का निशाना

कटनी

शहर के रंगनाथ नगर थाना क्षेत्र के डन कालोनी मोड़ बरगवां में बुधवार की शाम ऑटो से घर जा रही एक महिला के गले से दो बाइक सवार बदमाशों ने सोने की चैन खींची और मौके से भाग निकले। दिनदहाड़े व भीड़ वाले क्षेत्र में हुई घटना से लोगों में दहशत फैल गई। वहीं पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। जिसके आधार पर पुलिस आरोपितों की पहचान करने में जुटी हुई है।

जानकारी के अनुसार डन कालोनी बरगवां निवासी शिक्षिका आराधना अग्रवाल गली नंबर पांच में रहती हैं। बुधवार की शाम को वे आटो से अपने घर लौट रही थीं और जैसे ही आटो से वे डन कालोनी मोड़ की गली नंबर तीन के पास पहुंची उनके आटो के बगल से मोटर साइकिल पर दो युवक आए और उनके गले की सोने की चैन छीनते भाग निकले।

शोर मचाने पर भी आंखों से ओझल हुए बदमाश

महिला ने आटो रूकवाया और आसपास के लोगों को आवाज दी, लेकिन तब तक मोटर साइकिल सवार युवक लोगों की आंखों से ओझल हो गए। दिनदहाड़े हुई घटना के बाद लोगों में सुरक्षा को लेकर दहशत फैल गई। मामले की सूचना रंगनाथ नगर पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला व आसपास के लोगों से घटना की जानकारी ली।

सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी पुलिस, पहले भी हो चुकी है वारदात

चैन स्नैचिंग की पूरी घटना पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपितों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

इससे पहले भी डन कालोनी में एक अस्पताल के बाहर टहल रही महिला के गले से सुबह-सुबह बदमाश सोने की चैन खींचकर भाग गए थे, जिसके चलते शहर में सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।

 

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