भोपाल में पार्टी-फंक्शन से पहले लेनी होगी परमिशन, मेहमानों की जानकारी देना भी हुआ जरूरी

​​भोपाल
 शहर में स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नगर निगम परिषद ने केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को लागू करने का फैसला किया है. अब नगर निगम की नजर सिर्फ बड़े राजनीतिक या व्यावसायिक आयोजनों पर ही नहीं, बल्कि घरों में होने वाले छोटे-मोटे कार्यक्रमों जैसे बर्थ-डे पार्टी, सगाई, फेयरवेल और कॉलोनी के फंक्शन्स पर भी रहेगी। 

निगम अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों का मुख्य उद्देश्य बड़े और छोटे आयोजनों से निकलने वाले कचरे पर नियंत्रण पाना और लोगों की जवाबदेही तय करना है. ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने या खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

​100 मेहमान जुटे तो 3 दिन पहले देनी होगी सूचना
​नए नियमों के अनुसार यदि किसी भी निजी, धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में 100 या उससे अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है, तो आयोजक को कार्यक्रम से 3 दिन पहले नगर निगम को इसकी लिखित जानकारी और अनुमति लेनी होगी. आयोजकों को पहले से यह बताना होगा कि कार्यक्रम कहां हो रहा है, कितने लोग आएंगे और वहां पैदा होने वाले कचरे के निपटारे के लिए क्या व्यवस्था की गई है. बिना सूचना दिए आयोजन करने या कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। 

बिना छंटनी पर 150 प्रतिशत जुर्माना
​अब भोपाल के हर घर और व्यावसायिक संस्थान को अपने कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रखना होगा. ऐसा न करने और 100 किलोग्राम से अधिक कचरा अलग-अलग श्रेणियों में देने पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा। 

कचरे को इन 4 भागों में विभाजित करना होगा अनिवार्य

​गीला कचरा- रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके और पेड़-पौधों की हरी पत्तियां.

​सूखा कचरा- रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, धातु, कांच की बोतलें और फटे-पुराने कपड़े.

​सैनिटरी कचरा – डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिश्यू पेपर और घरेलू स्तर का मेडिकल वेस्ट.

​घरेलू ई-वेस्ट – मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, बल्ब, घरेलू केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां.

​बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसर भी दायरे में
नगर ​निगम ने बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी तय की है, जिसमें शहर के लगभग 2 हजार आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी परिसर शामिल होंगे. नियमों के दायरे में आने वाले मानदंड इस प्रकार है। 

    ​आवासीय भवन – कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.
    ​होटल और रेस्टोरेंट – कुल फ्लोर एरिया 5,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.
    कचरा उत्पादन – प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान.

पंचायत सचिवों के लिए नई तबादला नीति जारी, गृहग्राम और ससुराल में नहीं कर सकेंगे पदस्थापना

भोपाल

तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई नीति के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही जिस पंचायत में सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाएंगे, वहां से भी सचिव का तबादला किया जाएगा।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आधार पर यह नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कराई जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 23 हजार से ज्यादा पंचायत सचिव हैं।

15 जून तक होंगे तबादले
9 जून को जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक जिले के भीतर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद जारी किए जाएंगे। यह प्रक्रिया एक जून से ही मान्य की जाएगी।

विभागीय निर्देशों के मुताबिक स्थानांतरण आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे। नई गाइडलाइन में जिला एवं अंतरजिला स्तर पर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी तय की गई है।

सरकार को इसलिए रखनी पड़ी शर्त
दिग्विजय सरकार ने वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति की थी, जो आज पंचायत सचिव हैं। तब नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी और ज्यादातर मामलों में ग्राम सभा ने सरपंच, उप सरपंच, पंच या गांव के प्रभावशाली व्यक्ति के रिश्तेदारों को नियुक्त किया था। ज्यादातर मामलों में देखने में आया है कि ये जनप्रतिनिधि रिश्तेदारी या अहसान के बदले सचिवों को वह सब करने के लिए राजी कर लेते हैं, जो वे चाहते हैं। ऐसे कई मामले जांच में आ चुके हैं। जिनमें सरपंच, उप सरपंच और सचिव ने मिलकर गड़बड़ी की है। इसलिए सरकार को तबादला नीति में यह शर्तें जोड़नी पड़ीं।

इन परिस्थितियों में स्थानांतरण होगा अनिवार्य
विभाग ने कुछ मामलों में ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य किया है, जिनमें इस तरह की परिस्थितियां शामिल हैं।

    यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का रिश्तेदार पंचायत का सरपंच या उपसरपंच चुन लिया गया हो।
    सचिव को उसके पैतृक ग्राम या ससुराल स्थित ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जाएगा।
    जो सचिव एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं, उन्हें प्राथमिकता से स्थानांतरित किया जाएगा।
    यदि 10 साल या अधिक समय से पदस्थ सचिवों की संख्या तबादला लिमिट से अधिक है तो पहले सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का तबादला किया जाएगा।

प्रतिबंध अवधि में भी संभव होगा इनका स्थानांतरण
    स्थानांतरण प्रतिबंध अवधि के दौरान विशेष परिस्थितियों में इन सचिवों के तबादले किए जा सकेंगे।
    भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों के मामले।
    अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने की स्थिति।
    लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू अथवा अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े प्रकरण।
    उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से प्राप्त निर्देश।
    ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त, संचालक पंचायत राज द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे।

अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर
    आदेश में अंतरजिला संविलियन (ट्रांसफर) को केवल स्वैच्छिक आधार पर अनुमति दी गई है।
    महिला सचिवों को विशेष सुविधा मिलेगी। इसमें विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिला ग्राम पंचायत सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी।
    अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव, यदि उनकी नियुक्ति वाले जिले के अलावा किसी अन्य जिले से संबंध रखते हैं, तो वे भी अपने मूल जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगे।
    इच्छुक सचिव को वर्तमान पदस्थापना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देना होगा।
    आवेदन के साथ संबंधित जिले में रिक्त पद की उपलब्धता का सत्यापन किया जाएगा।
    रिक्त पद उपलब्ध होने पर प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा।
    प्रशासनिक स्वीकृति के बाद संविलियन आदेश जारी किए जाएंगे।
    संविलियन के बाद सचिव का नाम वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
    अंतरजिला संविलियन का लाभ केवल एक बार ही दिया जाएगा।

Bhopal Recruitment 2026: गांधी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के 22 पदों पर भर्ती, 25 जून तक करें आवेदन

भोपाल
 राजधानी के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित जीएमसी स्वशासी समिति द्वारा विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी और ब्रांड स्पेशियलिटी विभागों में रिक्त 22 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक अभ्यर्थी 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं।

इन विभागों में होंगी नियुक्तियां
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 15 विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें कम्युनिटी मेडिसिन (स्टेटिस्टिक्स), न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा यूनिट, स्पोर्ट्स मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक नियोनेटोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, फार्माकोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, रेडियोडायग्नोसिस, नेफ्रोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन जैसे विभाग शामिल हैं।

सातवें वेतनमान का मिलेगा लाभ
चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतनमान के वेतन मैट्रिक्स लेवल-11 के अनुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते एवं सुविधाएं भी नियमानुसार मिलेंगी।

तीन वर्ष के सेवा बांड पर होगी नियुक्ति
भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित चिकित्सकों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के सेवा बांड या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के आधार पर की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाकर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। 

MP में सरकारी नौकरियों के लिए खत्म हुआ दो बच्चों का नियम, भाजपा सरकार का बड़ा फैसला

भोपाल 

मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में सरकारी सेवा नियमों से दो-बच्चों की शर्त को वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों में शामिल दो-बच्चों की शर्त के मसौदे को वापस ले लिया गया है और सरकारी पोर्टल से इसे ‘तत्काल’ हटाने का आदेश दिया गया है।

राज्य सरकार द्वारा देर शाम जारी एक रिलीज में कहा गया, ”मुख्यमंत्री ने यह बड़ा फैसला सरकारी कर्मचारियों और सरकारी सेवा की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के हित में यह बड़ा फैसला लिया है।”

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस मामले को देखा और आदेश दिया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के उस प्रस्ताव को वापस लिया जाए जिसमें सरकारी नौकरी के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त रखी गई थी।

मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहा
मध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है।

नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शन
दरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है।

2001 में लागू हुआ थआ ‘टू चाइल्ड’ का नियम
यह याद किया जा सकता है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा लिए गए एक निर्णय के तहत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक प्रावधान लागू किया था जिसके अनुसार दो से ज्यादा जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा में सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था।

2001 में लागू मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक जीवित बच्चे थे, उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 के तहत सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था।

इसके अलावा, मध्य प्रदेश सेवा नियम (Conduct), 1965 के तहत दो से ज्यादा बच्चों का होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार (मिसकंडक्ट) माना जाता था।

मुख्यमंत्री श्री यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को तुरंत प्रस्तावित नियमों का मसौदा वापस लेने और सरकारी सेवा से अयोग्यता से जुड़े उन सभी प्रावधानों को हटाने का निर्देश दिया है। यह प्रावधान दो से ज्यादा जीवित बच्चों के आधार पर लागू होते थे।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए एक संशोधित मसौदा तैयार कर उसे प्रकाशित किया जाए।

UCC लागू करने की तैयारी में मोहन सरकार
क संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। यादव ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए धर्मगुरुओं की राय लेगी।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश में यूसीसी को लागू किया जाएगा, क्योंकि आज धार्मिक-सामाजिक-पारिवारिक रूप से भिन्न-भिन्न मतों की आवश्यकता नहीं है। आज जरूरत यूसीसी की ओर बढ़ने की है।”

 

BRICS Agriculture Conference: इंदौर की हेरिटेज वॉक पर निकले विदेशी मेहमान, जाना होलकरकालीन इतिहास

इंदौर 

इंदौर में चल रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भाग लेने आए अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए बुधवार की सुबह कुछ खास थी। उनके लिए एक बार फिर शहर के ऐतिहासिक स्थलों का इतिहास जीवंत किया गया। राजवाड़ा पैलेस में पुराने समय में लगने वाले दरबार की तरह हरकारों की गूंज सुनाई दी और शास्त्रीय संगीत की स्वर-लहरियां गूंजीं। 

ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह वॉक बोलिया सरकार छत्री से होना थी, लेकिन उसके बजाय मेहमान साढ़े छह बजे सीधे राजवाड़ा पहुंचे। यहां उनके लिए गोल मेज लगाई गई थी।

गोपाल मंदिर की सुंदरता देख मेहमान हुए मुग्ध
इतिहासकार जफर अंसारी ने इंदौर की महारानी देवी अहिल्या के शासनकाल के अलावा होलकरकाल से जुड़े इतिहास के तथ्य बताए। राजवाड़ा में जब दरबार लगता था, तब दूसरे राज्यों के राजाओं को किस तरह हरकारा देकर सम्मानित किया जाता था, इसकी प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद राजवाड़ा पर संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी कलाकारों ने दी। इसके बाद मेहमान गोपाल मंदिर पहुंचे और पहली मंजिल पर लकड़ी के नक्काशीदार भवनों को निहारा।

लिया इंदौरी व्यंजनों का स्वाद
हेरिटेज वॉक में शामिल मेहमानों के लिए इंदौरी नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। स्टॉल पर रखे गए पोहे, जलेबी के साथ मेहमानों ने चाय-कॉफी का लुत्फ भी लिया। करीब डेढ़ घंटे तक हेरिटेज वॉक में शामिल होने के बाद मेहमान होटल के लिए रवाना हो गए।

चखे आम, लोक नृत्यों पर थिरके मेहमान
हेरिटेज वाॅक के बाद विदेशी मेहमान ग्रामीण हाट पहुंचे। यहां उन्होंने जैविक खेती के उत्पादों को देखा और स्टाॅल पर आमों का स्वाद भी चखा। इंडोनेशिया से आई रीना सुप्रिहाती ने आदिवासी गीत पर नृत्य भी किया।

मानसून से पहले बारिश का जोरदार असर, कई जिलों में सामान्य से कई गुना अधिक वर्षा, आज भी अलर्ट जारी

भोपाल 

मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक दस्तक अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय हैं। जून के पहले नौ दिनों में हुई बारिश ने कई जिलों में सामान्य आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। हालात यह हैं कि प्रदेश के 14 जिलों में अब तक 100 प्रतिशत से लेकर 672 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। मौसम विभाग ने इस वर्ष प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई है, लेकिन मानसून पूर्व बारिश ने फिलहाल राहत और चुनौती दोनों हालात पैदा कर दिए हैं। 1 से 9 जून के बीच प्रदेश में औसतन आधा इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

बारिश के बीच गर्मी भी बरकरार
एक ओर कई इलाकों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। मंगलवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में 44 डिग्री और राजगढ़, रीवा व टीकमगढ़ में 43 डिग्री के आसपास तापमान रहा। प्रदेश के 26 शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान 40 डिग्री के करीब रहा, जबकि ग्वालियर में 42.8 डिग्री दर्ज किया गया।

निवाड़ी सबसे आगे, नीमच और भोपाल भी रिकॉर्ड सूची में
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवाड़ी में सामान्य 1.9 मिमी के मुकाबले 14.7 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 672 प्रतिशत अधिक है। नीमच में 493 प्रतिशत, आगर-मालवा में 385 प्रतिशत, श्योपुर में 346 प्रतिशत, मंदसौर में 334 प्रतिशत और भोपाल में 304 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा अलीराजपुर, अशोकनगर, देवास, हरदा, मुरैना, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर में भी सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी गिर चुका है।

आज 16 जिलों में बारिश के आसार
मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में बारिश की संभावना जताई है। वहीं भोपाल समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में उमस और गर्मी का असर बना रह सकता है।

बदला मौसम का मिजाज, लू की जगह ओलों का अलर्ट
मौसम विभाग ने ताजा पूर्वानुमान में बड़ा बदलाव किया है। जिन जिलों में पहले 10 और 11 जून के लिए लू का अलर्ट जारी किया गया था, वहां अब 12 जून को ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओले गिर सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने के संकेत हैं।  

महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक पर बड़ी कार्रवाई, छापे में 9.5 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

इंदौर
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के यहां छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति का पता लगाया।अधिकारी को अब तक के अपने सेवाकाल में वेतन से ढाई करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन छापे में साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है। उन्होंने अपनी आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। 

छापे में स्कीम-103 में एक तीन मंजिला मकान और एक व्यावसायिक परिसर मिला। इसके अलावा स्कीम-140 में 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट भी मिले। 30 वर्षों के सेवाकाल में वे अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे। फिलहाल वे इंदौर में पदस्थ थे। कंडवाल के पास पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के तारापुर, बेकलाय और बनेड़िया में 11 प्लॉट भी मिले हैं।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने बताया कि शिकायत मिलने पर बुधवार सुबह छापे की योजना बनाई गई थी। इसके लिए तीन टीमों का गठन किया गया। मकान, जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर पर टीमों ने छापा मारकर कथित काली कमाई से जुटाई गई संपत्ति का पता लगाया। कंडवाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है।लक्ष्मीनारायण कंडवाल महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर वर्ष 1996 से पदस्थ हैं। अब विभाग उनके निलंबन की कार्रवाई कर सकता है।

बेटे, बहू और रिश्तेदारों के नाम खरीदी जमीनें
संयुक्त संचालक कंडारिया ने काली कमाई का पैसा पत्नी, बेटों, पुत्रवधु और रिश्तेदारों के नाम पर जमीनें खरीदने में लगाया। इंदौर के समीप सोनवाय गांव में 0.097 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी, जिसकी कीमत साढ़े छह लाख रुपये है। इसके अलावा पीथमपुर के समीप 2.560 हेक्टेयर कृषि भूमि तथा स्कीम-103 में भूखंड क्रमांक 149-सी खरीदा और उस पर जी+3 का 13 हजार वर्गफीट से अधिक निर्माण कराया।

इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140 स्थित भूखंड क्रमांक 220 ए.एम. को 21 लाख रुपये में खरीदा। इसके अलावा इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 140, सेक्टर ए-टाइप में भूखंड क्रमांक 378 भी 15 लाख रुपये में खरीदा।

ग्राम बनेडिया, जिला धार में 0.879 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। तारपुरा, तहसील सागौर, जिला धार में 2.195 हेक्टेयर कृषि भूमि भी खरीदी। ग्राम बेकल्या, तहसील पीथमपुर, जिला धार में 1.740 हेक्टेयर कृषि भूमि ली। आरोपी ने ज्यादातर पैसा संपत्ति खरीदने में ही लगाया।

इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया की सांठा बाजार शाखा में एक बैंक लॉकर भी मिला है, जिसे गुरुवार को खोला जाएगा।

पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना
कंडारिया की पांच दिन पहले ही इंदौर में पदस्थापना हुई थी और लोकायुक्त का छापा पड़ गया। उनका परिवार इंदौर में ही रहता था और ऐशो-आराम की जिंदगी जीता था। कंडारिया झाबुआ, नीमच, रतलाम, रीवा, शहडोल, उज्जैन और देवास में भी पदस्थ रहे।

जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर भी खोला
छापे के दौरान अधिकारियों को दो मंजिला आलीशान जिम भी मिला, जिसमें आधुनिक मशीनें हैं। इसके अलावा एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी मिला, जिसका संचालन कंडारिया के परिवार के सदस्य करते हैं।

 

PWD में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, ENC केपीएस राणा का तबादला, आरएल वर्मा को मिला अतिरिक्त प्रभार

भोपाल 
मध्य प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रभारी प्रमुख अभियंता (ईएनसी) स्तर पर तबादला आदेश जारी किया है। विभाग के प्रभारी प्रमुख अभियंता केपीएस राणा को नई जिम्मेदारी सौंपते हुए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) भेजा गया है, जबकि आरएल वर्मा को पीडब्ल्यूडी के प्रभारी प्रमुख अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, केपीएस राणा, जो वर्तमान में भोपाल में प्रभारी प्रमुख अभियंता के पद पर कार्यरत थे, उन्हें आगामी आदेश तक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी), भोपाल में प्रभारी प्रमुख अभियंता के पद पर पदस्थ किया गया है।  वहीं, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता, जबलपुर परिक्षेत्र आरएल वर्मा को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक लोक निर्माण विभाग, भोपाल में प्रभारी प्रमुख अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह आदेश 9 जून 2026 को जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू होगा।  

सिंहस्थ : 2028 के लिए 17 नए विकास कार्यों को मिली मंजूरी

सिंहस्थ : 2028 के लिए 17 नए विकास कार्यों को मिली मंजूरी

सिंहस्थ के लिए प्रगति पर हैं 16 हजार 910 करोड़ रूपए के 148 विकास व निर्माण कार्य
ओंकोरश्वर में बनेगा हेलीपेड
उज्जैन सहित ओंकारेश्वर, देवास, इंदौर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर और खरगोन में जारी हैं गतिविधियां
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धालुओं की सुविधा, बेहतर आवागमन, सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिए निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-मंडलीय समिति की छठवीं बैठक सम्पन्न

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए जारी बेहतर रोड नेटवर्क के लिए इंफ्रॉस्ट्रक्चर निर्माण, शिप्रा घाटों के निर्माण, पुण्य स्नान के लिए जल की पर्याप्त उपलब्धता, श्रद्धालुओं के ठहरने और आवागमन की सुगम व्यवस्था तय समय-सीमा में पूर्ण की जाए। बेहतर प्रबंधन के लिए स्टाफिंग और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से आरंभ हो। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के लिए अद्यतन तकनीक के उपयोग और आपदा प्रबंधन व चिकित्सा सुविधाओं के लिए माइक्रो प्लानिंग की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में हुई सिंहस्थ : 2028 की मंत्रि-मंडलीय समिति की छठवीं बैठक में यह दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-मंडलीय समिति ने 491.66 करोड़ रुपये की लागत के 17 नए विकास कार्यों को मंजूरी दी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन एवं आसपास के 07 जिलों में जारी 16 हजार 910 करोड़ से अधिक लागत के 148 विकास एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा की और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मंत्रालय में संपन्न बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, श्रम मंत्री गौतम टेटवाल तथा पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उज्जैन के विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

    उज्जैन में शनि मंदिर से प्रशांति धाम चौराहा मार्ग तक पुल और एप्रोच रोड का 30 करोड़ की लागत से निर्माण।

    तपोभूमि से पिपलियाराघो पंचक्रोशी मार्ग पर कान्ह नदी पर 12 करोड़ रूपए की लागत से समानन्तर नया पुल।

    तपोभूमि से गंगेडी व्हाया राघोपिपल्या तक 5.5 किलोमीटर की 30 करोड़ रूपए लागत की दो लेन की नई सड़क।

    देवास रोड से लालपुर होते हुए गरोठ मार्ग तक ढाई किलोमीटर लंबा पंचक्रोशी मार्ग। फोर लेन की यह सड़क 18 करोड़ रुपये की लागत से बनेगी।

    उज्जैन में देवास रोड पर लोक निर्माण विभाग 2.36 करोड़ रुपये की लागत से विश्राम गृह (रेस्ट हाउस)।

    उज्जैन के देवास रोड स्थित पीडब्लयूडी सर्किट हाउस का विस्तार और नवीनीकरण।

    लेकोड़ा से टनकारिया रेलवे स्टेशन रोड तक 13.28 करोड़ रुपये से 2.50 किलोमीटर लंबी सड़क‍।

    महाकाल पुलिस थाने से चौबीस खंबा मार्ग तक 4 करोड़ रुपये लागत से 180 मीटर लंबी नई सड़क।

    कुशाभाऊ ठाकरे मार्ग से छोटी रपट तक 36.75 करोड़ रुपये लागत से सड़क चौड़ीकरण कार्य।

ओंकारेश्वर के निर्माण कार्य स्वीकृत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओंकारेश्वर मंदिर परिसर के 160 करोड़ रूपए लागत के निर्माण कार्य, नगर परिषद ओंकारेश्वर में 12.63 करोड़ रूपए लागत की सीसी रोड निर्माण, ओंकारेश्वर रोड सनावद पर 9.23 करोड़ रूपए लागत के रेलवे आरओबी निर्माण, ओंकारेश्वर में 24.99 करोड़ रूपए लागत की मल्टी लेवल पार्किंग, फूड कोर्ट, टॉयलेट और एडमिन ब्लॉक निर्माण, ओंकारेश्वर में 1.46 करोड़ रूपए लागत के बैरिक तथा प्रशिक्षण हॉल आदि के निर्माण, 4.74 करोड़ रूपए लागत से अस्पताल और स्टाफ क्वार्टर, 38 करोड़ रूपए लागत की 3 फ्लोर कुबेर भंडारी पार्किंग और 12.68 करोड़ रूपए लागत से अस्पताल भवन उन्नयन कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ : 2028 के लिए जारी विभिन्न गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर में सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनाने और हेलीपैड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह निर्माण आपदा की स्थिति में विशेष रूप से सहायक होंगे। एयर एम्बुलेंस के संचालन में भी इससे मदद मिलेगी।

ओंकारेश्वर-बड़वाह क्षेत्र के विकास के लिए पृथक प्राधिकरण गठित करें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बड़वाह, ओंकारेश्वर, खेड़ी घाट क्षेत्र के आसपास होने वाले निर्माण कार्यों के लिए पृथक से प्राधिकरण गठित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इससे खंडवा खरगोन जिलों में होने वाले कार्यों का बेहतर समन्वय सुनिश्चित होगा और विकास गतिविधियां समय से पूर्ण करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ओंकारेश्वर के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के भी निर्देश दिए।

क्षिप्रा घाटों के प्रबंधन में आश्रमों और गुरूकुलों को भी जोड़ा जाए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया कि उज्जैन में शिप्रा नदी के साथ विकसित हो रहे घाटों का निर्माण चरणबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। घाटों तक आने-जाने के मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का निर्माण भी साथ-साथ किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिप्रा नदी पर बन रहे घाटों के पास के आश्रमों तथा गुरुकुलों को घाटों के प्रबंधन से जोड़ा जाए। इससे आश्रम और गुरुकुलों को मदद मिलेगी। साथ ही सिंहस्थ के बाद भी घाटों का दीर्घकालिक उपयोग हो सकेगा।

पुलिस-प्रशासन-नगर निगम बेहतर समन्वय के लिए अभी से अभ्यास करें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के लिए सम्पर्ण व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन का समन्वय कंट्रोल रूम से होगा। इसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस, जिला प्रशासन, नगर निगम तथा अन्य सभी एजेंसियां बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिये कि इसके लिए प्रशिक्षण और अभ्यास की प्रक्रिया अभी से आरंभ की जाए।

अतिक्रमण हटाने में भेदभाव न हो

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मार्ग चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में कोई भेदभाव न हो, सबके लिए एक समान कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसे मामलों में तत्काल मुआवजा भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उज्जैन क्षेत्र में 15 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंचक्रोशी मार्ग पर सघन पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया कि उज्जैन क्षेत्र में 15 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य है।

जनसुविधा उपलब्ध कराने में निजी क्षेत्र का सहयोग लिया जाए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि श्रद्धालुओं के आवागमन में सुगमता और सुविधा के लिए उज्जैन से लगे क्षेत्रों जैसे देवास, इंदौर, खंडवा, आगर-मालवा, शाजापुर, मंदसौर और खरगोन आदि में भी उपयुक्त विकास कार्य किए जाएं। पीने के पानी, छायादार स्थलों, जनसुविधा केन्द्रों, पार्किंग एरिया, आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निजी भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने मंदसौर के पशुपतिनाथ, आगर-मालवा के नलखेड़ा, देवास, महेश्वर-मंडलेश्वर आदि के मंदिरों और श्रद्धा के केन्द्रों का भी समुचित विकास किया जाए तथा श्रद्धालुओं के आवागमन और सुविधाजनक आवास के लिए समुचित व्यवस्था की जाए।

इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में होटल निर्माण से संबंधित बिल्डिंग परमिशन का त्वरित निराकरण करें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि इंदौर, उज्जैन क्षेत्र में होटल निर्माण से संबंधित बिल्डिंग परमिशन के आवेदनों का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए। यह सब संसाधन सिंहस्थ : 2028 में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक होंगे। उज्जैन, इंदौर, देवास क्षेत्र के सभी होटलों, लॉज, धर्मशाला, होम-स्टे आदि की रहने की क्षमता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी एकत्र करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि सभी मंदिरों तथा श्रद्धा के केन्द्रों पर पेयजल, भोजन सामग्री के साथ ही अतिरिक्त चप्पल-जूतों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उज्जैन स्मार्ट सिटी कार्यों के बेहतर अनुवीक्षण के लिए भारत सरकार से संबद्ध थर्ड पार्टी कंसलटेंट नियुक्त किया जाए। उज्जैन को मूर्तिकला केन्द्र के रूप में विकसित किया जाए। महाकाल लोक परिसर में ही प्रतिमाएं तैयार की जाए एवं निर्माण में कटनी, छतरपुर और बालाघाट में उपलब्ध बेहतर क्वालिटी के पत्थर का उपयोग किया जाए तथा स्थानीय मूर्तिकारों को प्रोत्साहन दिया जाए। महाकाल लोक में स्थित फायबर प्रतिमाओं के स्थान पर पत्थर और धातु से निर्मित 99 प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।

युवाओं को दें आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वार्ड स्तर और सड़क किनारे के ग्रामों में युवाओं को आपदा प्रबंधन और दुर्घटना में घायलों को राहत पहुंचाने का प्रशिक्षण देने तथा राहवीर योजना की जानकारी का अधिक से अधिक विस्तार करने के भी निर्देश दिए। 

आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुँचाकर स्वस्थ समाज का निर्माण करें: आयुष मंत्री परमार

“आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुँचाकर स्वस्थ समाज का निर्माण करें”: आयुष मंत्री परमार

मंत्री परमार की अध्यक्षता में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक हुई

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मंत्री परमार ने महाविद्यालय के विकास, आयुर्वेद के संवर्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए।

आयुष मंत्री परमार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। मंत्री परमार ने कहा कि सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य पद्धतियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का उपयोग आयुर्वेद और योग के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा जनजागरूकता के लिए किया जाना चाहिए।

मंत्री परमार ने कहा कि योग भारत की अमूल्य धरोहर है और इसे गाँव-गाँव तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संस्थान से योग को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक योग गतिविधियाँ संचालित करने तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया।

मंत्री परमार ने आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इसे भारतीय रसोई (किचन) से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन परंपरा स्वयं में आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है तथा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मसाले, औषधीय पौधे एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य संरक्षण के प्रभावी माध्यम हैं। आयुर्वेद को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए इसकी उपयोगिता को प्रत्येक घर तक पहुँचाना आवश्यक है।

बैठक में पिछले वर्ष की कार्यकारिणी सभा के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा की गई। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में 500 बिस्तरों वाले आयुर्वेद चिकित्सालय के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में नवीन ऑडिटोरियम निर्माण किए जाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में अतिथि गृह तथा छात्रावास अधीक्षकों के आवास निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए।

बैठक में उज्जैन (उत्तर) विधायक अनिल जैन कालूहेडा, उप सचिव आयुष श्रीमती रंजना देवड़ा, आयुष संचालनालय की प्रतिनिधि डॉ. वंदना बोराना, महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. जे.पी. चौरसिया, नीमा जिलाध्यक्ष डॉ अनिल सराफ, पूर्व छात्र डॉ ईश्वर सिंह सिसोदिया सहित अन्य अधिकारी, साधारण सभा के सदस्यगण एवं महाविद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक का संचालन डॉ अजयकीर्ति जैन और आभार प्रदर्शन प्रो. नृपेन्द्र मिश्रा ने किया।

 

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