प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप, विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल

प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप

विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल

भोपाल

प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘स्वस्थ मध्यप्रदेश’ के संकल्पों को जमीनी धरातल पर उतारते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए ‘पोषण संजीवनी अभियान’ ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ एक निर्णायक और प्रभावी जंग छेड़ दी है। यह अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया है कि जब जिला प्रशासन और समाज की संवेदनशील ताकतें एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो कठिन से कठिन सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान सहज संभव हो जाता है।

अमूमन यह देखा जाता है कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में उपचार के बाद जब बच्चे घर लौटते हैं, तो परिवारों की सीमित आर्थिक क्षमता और माताओं में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण वे दोबारा कुपोषण चक्र में फंस जाते हैं। जून 2025 में हुए एक व्यापक सर्वे के दौरान जिले में 1,307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समस्या की गंभीरता और स्पष्ट हो गई। इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलते हुए विदिशा जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नेतृत्व में ‘पोषण संजीवनी अभियान’ की परिकल्पना की गई, जिसका मूल ध्येय बच्चों का तात्कालिक उपचार नहीं बल्कि उनका दीर्घकालिक सुपोषण सुनिश्चित करना था।

अभियान के तहत प्रत्येक चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन महीने तक अतिरिक्त पोषण देने के लिए ₹3000 मूल्य की विशेष ‘सुपोषण किट’ प्रदान की जा रही है। उच्च गुणवत्तायुक्त पौष्टिक तत्वों से भरपूर इस किट में दो किलो मूंगदाल, एक किलो बेसन, पंद्रह सौ ग्राम मुरमुरा, एक लीटर खाद्य तेल, एक किलो शुद्ध घी, डेढ़ किलो मूंगफली, एक किलो गुड़ पाउडर, दो किलो मल्टीग्रेन आटा, एक किलो सत्तू, दो किलो चावल और पांच सौ ग्राम तिल जैसी अत्यंत पौष्टिक सामग्रियां शामिल की गई हैं। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन लगभग 750 अतिरिक्त कैलोरी प्रदान करता है, जो उनके शारीरिक विकास के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।

इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे जनभागीदारी एक प्रमुख कारण बना। इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता का परिचय दिया। समाज के सामूहिक प्रयासों से देखते ही देखते ₹39.21 लाख की सम्मानजनक राशि स्वेच्छा से एकत्र हो गई, जिसके माध्यम से अब तक सभी 1,307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई जा चुकी है। यह जनसहयोग इस बात का सशक्त प्रतीक है कि समाज अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग और उत्तरदायी है।

तकनीक और जमीनी निगरानी से सफल परिणाम

प्रशासन ने केवल राशन वितरण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि माताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को पूरी मुस्तैदी से काम पर लगाया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा माताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से सरल और पौष्टिक व्यंजन जैसे लड्डू, हलवा और सत्तू पेय बनाने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आनंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें खिलौना किट और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए टिफिन व पानी की बोतलें भी उपहार स्वरूप दी गईं। तकनीक और कड़े पर्यवेक्षण के मोर्चे पर भी यह मॉडल बेहद सुदृढ़ है। ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के चयन से लेकर उसकी शारीरिक प्रगति का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से घर-घर जाकर बच्चों की वृद्धि निगरानी की गई। वहीं विभाग के पर्यवेक्षक लगातार बच्चों का वजन मापकर उनकी वास्तविक स्थिति का जमीनी आकलन कर रहे हैं।

63%  से अधिक बच्चे हुए सामान्य

इस बेहद सुनियोजित और समन्वित प्रयास के जो परिणाम निकलकर आए हैं, वे राज्य स्तर पर बेहद उत्साहजनक और प्रेरणादायी हैं। जिले के कुल 1,307 कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं, जिससे 63.02% की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक रिकवरी दर दर्ज की गई है। यह शानदार सफलता इस अभियान को मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय ‘रोल मॉडल’ के रूप में स्थापित करती है। यह अभियान अब एक प्रशासनिक पहल से आगे बढ़कर विदिशा में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जिला प्रशासन के सशक्त नेतृत्व में अब स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रबुद्ध समाज सेवियों एवं विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय अंतर-विभागीय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विभाग द्वारा इन गंभीर कुपोषित बच्चों की सतत और गहन निगरानी की जा रही है ताकि परिवर्तन केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य के संकल्प में बदले।

भविष्य की तैयारियों को लेकर भी सरकार और प्रशासन की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। आगामी तिमाही के लिए 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को इस अभियान से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से जून माह में लटेरी, सिरोंज एवं कुरवाई जैसी दूरस्थ परियोजनाओं के चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों के बीच 500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। विदिशा का यह सुपोषण मॉडल यह संदेश देता है कि जब शासन, प्रशासन, समाज और संस्थाएं एकजुट होकर पूरी संवेदनशीलता से कार्य करते हैं, तो कुपोषण जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीत सुनिश्चित हो जाती है।

पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना दे रही विदेश अध्ययन के सपने को उड़ान

पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना दे रही विदेश अध्ययन के सपने को उड़ान

बालाघाट के राजवर्धन का ‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स’ में चयन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्यमंत्री श्रीमती गौर का जताया आभार

भोपाल

बालाघाट की वारासिवनी तहसील के ग्राम सांवगी निवासी राजवर्धन राणा ने अपनी प्रतिभा और लगन के बल पर पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। राजवर्धन का चयन इंग्लैंड की प्रसिद्ध शिक्षण संस्था ‘द लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस’ में ‘मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन’ पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर वैश्विक स्तर की इस प्रतिष्ठित संस्था तक पहुँचने में मध्यप्रदेश शासन की ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ ने अहम भूमिका निभाई है।

आर्थिक रूप से सीमित किंतु होनहार विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ के तहत राज्य शासन राजवर्धन को पूर्ण वित्तीय सहयोग प्रदान कर रहा है। पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की फीस के रूप में 40 लाख 70 हजार 736 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्वाह भत्ता (लिविंग अलाउंस), आकस्मिकता भत्ता, बीमा राशि और हवाई यात्रा का किराया भी राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है।

राजवर्धन राणा ने अपनी इस सफलता पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर समेत पूरे प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस दूरदर्शी योजना के बिना उनके लिए इतने बड़े संस्थान में पढ़ने का सपना साकार करना संभव नहीं था। राजवर्धन ने कहा यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, परिश्रम निष्ठापूर्वक किया जाए और शासन की योजनाओं का समुचित लाभ उठाया जाए, तो सीमित संसाधन सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकते। वे भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।

राजवर्धन जैसे कई छात्र विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के ज़रिए विदेश में पढ़ाई के अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। इस योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार उन मेधावी और होनहार युवाओं को एक मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करती है, जो प्रतिभा के धनी हैं, लेकिन आर्थिक सीमाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं।

योजना के बारे में जानिए

पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना’ प्रदेश के युवाओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। इस योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पोस्ट-ग्रेजुएशन, पीएचडी या रिसर्च की पढ़ाई के लिए ट्यूशन फीस का भुगतान शासन द्वारा किया जाता है। पढ़ाई के खर्च के साथ-साथ रहने और यात्रा का खर्च भी सरकार वहन करती है। योजना में निर्वाह भत्ता (लिविंग अलाउंस), आकस्मिक व्यय, स्वास्थ्य बीमा, वीज़ा शुल्क और विदेश जाने-आने का हवाई यात्रा (इकोनॉमी क्लास) का खर्च भी शामिल है।

योजना के लिए पात्रता

    छात्र-छात्रा मध्यप्रदेश के मूल निवासी और पिछड़ा वर्ग श्रेणी (नॉन क्रीमी लेयर) के अंतर्गत आते हों।

    पिछली परीक्षा प्रथम श्रेणी (कम से कम 60% अंक) के साथ उत्तीर्ण की हो।

    आवेदक की आयु 35 वर्ष से कम हो।

    विद्यार्थी ने विदेश के किसी मान्यता प्राप्त और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान में प्रवेश प्राप्त कर लिया हो।

 

मांगलिया रेलवे स्टेशन बनेगा नया जंक्शन! इंदौर के पास विकास कार्यों ने पकड़ी रफ्तार

इंदौर
 इंदौर से बुधनी को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल परियोजना के तहत मांगलिया गांव रेलवे स्टेशन को बड़े जंक्शन के रूप में विकसित किया जा रहा है। स्टेशन पर एक ओर यात्री की सुविधाओं को देखते हुए विस्तार का काम चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

स्टेशन परिसर में कई निर्माण कार्य तेजी से चलते दिखाई दिए, लेकिन अभी भी कई काम अधूरे हैं। यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। नईदुनिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर काम की स्थिति देखी। टीम मांगलिया स्टेशन पहुंची तो प्लेटफार्म के हिस्से का निर्माण काफी हद तक पूरा नजर आया।

नया फुट ओवरब्रिज (एफओबी) भी लगभग तैयार हो चुका है। हालांकि, स्टेशन परिसर में बनने वाला यात्री और गुड्स शेड अभी अधूरा है। लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, लेकिन उस पर छत नहीं डाली गई है। गर्मी के मौसम में यात्री खुले में ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर हैं।

आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं
जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, प्रस्तावित कार्यों में विभिन्न गुड्स शेड्स पर आल वेदर एप्रोच रोड, पीसीसी फ्लोरिंग, सर्कुलेशन एवं हैंडलिंग एरिया का विकास, कवर शेड निर्माण, हाई मास्ट लाइट, पेयजल सुविधा, महिला एवं पुरुष विश्राम कक्ष, शौचालय ब्लाक, गुड्स ऑफिस एवं ट्रेडर्स रूम जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

मांगलिया गांव गुड्स शेड पर अतिरिक्त हाई मास्ट लाइट, कवर शेड, महिलाओं के लिए विश्राम कक्ष एवं शौचालय तथा प्लेटफार्म क्षेत्र के सुधार कार्य किए जाएंगे।

पेट्रोलियम और सोयाबीन आपूर्ति के लिए मजबूत
स्टेशन के दोनों ओर नए गुड्स शेड बनाए जा रहे हैं, ताकि माल ढुलाई का दबाव संभाला जा सके। यहां पेट्रोलियम डिपो और सोयाबीन बाय-प्रोडक्ट्स की आपूर्ति के लिए माल परिवहन सुविधा को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मांगलिया आने वाले समय में माल ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। इसके लिए ट्रैक जुड़ाव व संपर्क और लादना व भरने की सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है।

10 नए क्रासिंग एवं सात हाल्ट
इस रेल मार्ग पर 10 नए क्रासिंग और सात नए हाल्ट स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। वहीं, आगे एक फ्लाईओवर भी बनाया जाना है, जिसके लिए पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है। स्टेशन परिसर में बनने वाले कुछ कमरों का निर्माण अभी अधूरा है। कुल मिलाकर मांगलिया स्टेशन पर काम तेजी से चल रहा है, लेकिन यात्रियों को पूरी सुविधाएं मिलने में अभी समय लगेगा।

इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर जारी अर्थवर्क
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर भी काम तेजी से जारी है। स्टेशन के आगे रेलवे क्रासिंग के पास नई लाइन डालने के लिए अर्थवर्क किया जा रहा है। मौके पर बड़ी मशीनों से मिट्टी भराई और जमीन समतल करने का काम चलता दिखाई दिया। कई स्थानों पर गड्ढे खोदकर आधार मजबूत किया जा रहा है।

रेलवे स्लीपर भी साइट पर पहुंच चुके हैं और ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि, अभी कुछ स्थानों पर किसानों के विरोध के कारण बीच-बीच में काम अटका हुआ है। इसके आगे देवास जिले में भी काम चल रहा है।

संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन का शिखर प्रदर्शन: यूनिट-3 ने लगातार 100 दिन बिजली उत्पादन कर रचा इतिहास

संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन का शिखर प्रदर्शन: यूनिट-3 ने लगातार 100 दिन बिजली उत्पादन कर रचा इतिहास

भोपाल

प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के संजय गांधी थर्मल पॉवर स्टेशन बिरसिंगपुर (SGTPS) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। स्टेशन की यूनिट नंबर 3 ने बीते 27 फरवरी से बिना रुके लगातार 100 दिनों तक बिजली पैदा करने का स्वर्णिम आंकड़ा छू लिया है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भी कंपनी की कुल 13 उत्पादन इकाइयों ने 100 से अधिक दिनों तक लगातार निर्बाध बिजली उत्पादन करने का रिकॉर्ड बनाया था। इस शानदार ट्रैक रिकॉर्ड में अकेले संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर का दबदबा रहा; जहां इसी यूनिट-3 ने पहले भी एक बार यह मुकाम हासिल किया था, वहीं स्टेशन की यूनिट-4 दो बार और यूनिट-5 ने एक बार इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अपने नाम दर्ज कराया था।

सटीक परिचालन से गढ़े गए दक्षता के नए मानदंड

इस रिकॉर्ड परिचालन अवधि के दौरान यूनिट ने 89.18 प्रतिशत का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF) बनाए रखा, जो बिजली उत्पादन के लिए इस इकाई की उच्च उपलब्धता और तकनीकी मजबूती को प्रमाणित करता है। इसके साथ ही, इकाई ने 80.07 प्रतिशत का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) दर्ज कर अपनी वास्तविक उत्पादन क्षमता के कुशल उपयोग का लोहा मनवाया। ऊर्जा दक्षता के मोर्चे पर भी प्रबंधन का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा, जहां आंतरिक सहायक विद्युत खपत (APC) को महज 9.17 प्रतिशत पर सीमित रखकर बिजली की बड़ी बचत की गई।

उत्पादन इकाइयाँ उच्चतम विश्वसनीयता के साथ काम करने में सक्षम

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारे इंजीनियरों और तकनीकी टीम ने उत्कृष्ट संधारण (Maintenance) और कुशल संचालन (Operation) के दम पर बार-बार यह साबित किया है कि कंपनी की बिजली उत्पादन इकाइयाँ उच्चतम विश्वसनीयता के साथ काम करने में पूरी तरह सक्षम हैं। यही वजह है कि हमारी इकाइयाँ लगातार राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन का एक बेहद मजबूत रिकॉर्ड बना रही हैं।” उन्होंने कहा यह उपलब्धि तकनीकी कार्मिकों एवं ठेका श्रमिकों की सतत निगरानी, समर्पण तथा समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण संधारण का परिणाम है।

डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम ने कहा कि यह सफलता पूरी टीम के आपसी तालमेल, सक्रिय कार्यप्रणाली और संकट के समय त्वरित फैसलों का नतीजा है। उन्होंने विश्वास जताया कि हमारे सभी विद्युत गृह भविष्य में भी प्रदेश को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली देने में हमेशा आगे रहेंगे।

 

मध्यप्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

मध्यप्रदेश 7.63 लाख से अधिक बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर यह सिद्ध कर दिया है कि जनभागीदारी, स्वास्थ्य अमले की प्रतिबद्धता और प्रभावी नेतृत्व के बल पर बड़े से बड़े जनस्वास्थ्य अभियानों को समय से पहले सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने अभियान से जुड़े चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, शिक्षकों, जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सफलता के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाकर सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को देशव्यापी एचपीवी(ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया था। महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान में मध्यप्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है। स्वास्थ्य अमले, सहयोगी विभागों की प्रतिबद्धता एवं सतत मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप प्रदेश में 7.63 लाख से अधिक पात्र बालिकाओं का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया जा चुका है। यह अभियान मूल रूप से 90 दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन मध्यप्रदेश ने निर्धारित लक्ष्य को मात्र 60 दिनों में ही पूर्ण कर लिया जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है तथा इसके अधिकांश मामलों का प्रमुख कारण एचपीवी संक्रमण होता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसा कैंसर है जिसे प्रभावी टीकाकरण के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन बालिकाओं को भविष्य में इस गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने का सुरक्षित, प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय है। अभियान की सफलता में स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जनजागरूकता, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रो प्लानिंग) एवं सतत मॉनिटरिंग के माध्यम से यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।

 

4 घंटे से ज्यादा बिजली गुल तो मिलेगा मुआवजा! उपभोक्ताओं को राहत देने की नई व्यवस्था

भोपाल 

मध्य प्रदेश विद्युत विभाग ने जबलपुर में बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी खुशखबरी दी है। शहर में 4 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा। बिजली सप्लाई बंद होने के कारणों का पता लगाने के बाद बिजली विभाग मुआवजे की राशि निर्धारित करेगा।

प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही ऐसा नया नियम लागू होने वाला है, जिसके बाद बिना सूचना के होने वाली बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को मुआवजा पाने के लिए अलग से चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

बिजली कंपनी की गलती साबित होने पर मुआवजे की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू होगी। यानी अब घंटों बिजली गुल रहने और शिकायतों पर सुनवाई न होने की समस्या पर लगाम लग सकती है।

अब खुद मिलेगा मुआवजा
सरकार नया इलेक्ट्रिसिटी बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 लेकर आ रही है। इसमें इस व्यवस्था को बहुत कड़ा और साफ कर दिया गया है। इस नए संशोधन बिल की धारा 58 में बदलाव करके बिजली सप्लाई की क्वालिटी और उसे ठीक करने का एक समय तय किया जा रहा है।

अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। आपके इलाके में तय समय से ज्यादा देर तक बिजली कटी, तो मुआवजा अपने आप आपके बिजली खाते या अगले महीने के बिल में जोड़ दिया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

स्मार्ट मीटर से खुलेगी कंपनियों की पोल
अक्सर बिजली कंपनियां यह कहकर बच जाती हैं कि बिजली सिर्फ 10-15 मिनट के लिए ही कटी थी। अब ऐसा नहीं चल पाएगा। जहां-जहां भी स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कब कटी और कब वापस आई, इसका एक-एक सेकंड का डेटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज हो जाएगा।

इस डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से कंपनियां झूठ नहीं बोल पाएंगी। साथ ही उपभोक्ताओं को उनका हक आसानी से मिल जाएगा।

अभी ऐसी स्थिति
अभी विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों ने अघोषित या तय सीमा से ज्यादा बिजली कटौती पर उपभोक्ताओं को हर्जाना देने का प्रावधान तय किया है। सामान्य फॉल्ट जैसे फ्यूज उडना या तार टूटना को 1 से 3 घंटे के भीतर ठीक करना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 4 घंटे का समय तय है। ट्रांसफार्मर जलने पर 12 घंटे में आपूर्ति का समय है। प्रतिघंटा 25 रुपए से 100 रुपए तक है।

इस संशोधन से स्मार्ट मीटर दिलाएगा मुआवजा
नए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में इस व्यवस्था को और स्पष्ट बनाया जा रहा है। नए संशोधन बिल की धारा 58 में संशोधन के तहत बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बहाली की बेसलाइन तय की जा रही है। स्मार्ट मीटर में क्षेत्र की बिजली कटौती का डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होगा।

ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे और शहरों में 2 घंटे के भीतर बिजली नहीं आई, तो स्वतः मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा, जो सीधे उनके बिजली खाते या अगले बिल में क्रेडिट होगा। बिल में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां-जहां स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, वहां बिजली कटने और जुड़ने का समय सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगा, जिससे कंपनियों को यह झूठ बोलने का मौका नहीं मिलेगा कि बिजली सिर्फ 10 मिनट के लिए कटी थी।

बिजली गुल हो तो ये रखें ध्यान
बिजली कटते ही तुरंत कंपनी के टोल-फ्री नंबर या वाट्सऐप पर शिकायत दर्ज कराएं और शिकायत नंबर रखें। बिजली कब कटी और कितने घंटे बाद आई, इसका रिकॉर्ड रखें। कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती। उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 45 दिनों में समस्या का समाधान करना अनिवार्य है।

बिजली सुधारने के लिए अभी के नियम?
विद्युत नियम, 2020 के तहत बिजली कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह के फॉल्ट को ठीक करने का एक समय तय किया गया है। कंपनियां इस समय के अंदर बिजली बहाल नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें हर घंटे के हिसाब से 25 रुपए से लेकर 100 रुपए तक का हर्जाना देना होगा।

खराबी का प्रकार  शहर के लिए समय सीमा  ग्रामीण क्षेत्र के लिए समय सीमा 
सामान्य फॉल्ट (जैसे- फ्यूज उड़ना या तार टूटना) 1 से 3 घंटे 4 घंटे
ट्रांसफार्मर जलना या खराब होना 12 घंटे 12 घंटे
बिना पूर्व सूचना के बिजली कटना 2 घंटे 4 घंटे

यदि आपके इलाके में बिना किसी पहली सूचना के 4 घंटे से अधिक समय तक बिजली आपूर्ति  बंद रहती है, तो आप अभी भी उपभोक्ता फोरम से मुआवजे की मांग कर सकते हैं।

बिजली गुल होने पर इन 4 बातों का रखें ध्यान

  • बिजली कटते ही सबसे पहले बिजली कंपनी के टोल-फ्री नंबर या व्हाट्सएप नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
  • शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाले कंप्लेंट नंबर को कहीं लिख कर सुरक्षित रख लें।
  • बिजली किस समय कटी थी और कितने घंटे बाद वापस आई। इसका अपने पास एक रिकॉर्ड जरूर रखें।
  • अगर कंपनी तय समय से ज्यादा बिजली काटने के बाद भी आपके बिल में मुआवजा नहीं जोड़ती है, तो बिजली उपभोक्ता, उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में अपनी शिकायत दे सकते हैं। इस फोरम के लिए 45 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांड़ो ने कहा कि बिजली से जुड़े जो भी नियम तय हैं, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा।

नए बिजली बिल के तहत यदि उपभोक्ताओं को शिकायत करने या मुआवजा पाने का अधिकार मिलता है, तो पात्र लोगों को उसका फायदा जरूर दिया जाएगा।

अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा

भोपाल। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती राजधानी में श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर 31 मई 2026 को शाम 5 बजे पाल समाज श्रीकृष्ण गोवर्धन गिरिराज मंदिर समिति के तत्वावधान में विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। आयोजन को लेकर समाजजनों और मंदिर समिति के सदस्यों ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

शहर से लेकर गांवों तक उत्साह का माहौल

मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आयोजन में केवल भोपाल ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में समाजजन और श्रद्धालु शामिल होंगे। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके आदर्शों और समाज सेवा के योगदान को याद करते हुए यह आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देगा।

जनप्रतिनिधि रहेंगे कार्यक्रम के अतिथि

समिति के अनुसार शोभायात्रा और जयंती समारोह में विधायक भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, पार्षद जगदीश यादव एवं श्रीमती बृजुला सचान विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे। आयोजन के दौरान अतिथि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार भी व्यक्त करेंगे।

पाल समाज का इकलौता मंदिर बना सामाजिक गतिविधियों का केंद्र

मंदिर समिति के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह बघेल एवं कार्यकारिणी सदस्य भानुप्रताप सिंह पाल ने बताया कि श्रीकृष्ण गोवर्धन गिरिराज मंदिर पाल समाज का इकलौता मंदिर है, जहां वर्षों से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता आ रहा है। मंदिर समाज के लोगों को एकजुट करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

समाजजनों से परिवार सहित शामिल होने की अपील

समिति के उपाध्यक्ष जयराम बघेल ने समाज के सभी स्वजातीय बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आयोजन को और अधिक भव्य एवं गरिमामय बनाएगी।

भोजन प्रसादी की विशेष व्यवस्था

आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं और समाजजनों के लिए भोजन प्रसादी की विशेष व्यवस्था की गई है। समिति ने बताया कि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है।

सेवाभाव से जुटे पदाधिकारी और कार्यकर्ता

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मंदिर समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। कार्यकारिणी सदस्य विनोद पाल, दिनेश पाल, रामसिया बघेल (कोषाध्यक्ष), विनोद यादव, प्रहलाद सिंह बघेल, राजेन्द्र पाल (पूर्व अध्यक्ष), राजबहादुर पाल, अजय बघेल (अधिवक्ता), नंदराम बघेल सहित अनेक कार्यकर्ता सेवाभाव से आयोजन की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

लोकमाता अहिल्याबाई के आदर्शों को किया जाएगा याद

जयंती समारोह के दौरान लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक योगदान को स्मरण किया जाएगा। उनके सुशासन, जनकल्याण और धर्मस्थलों के संरक्षण में दिए गए योगदान पर भी प्रकाश डाला जाएगा। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके आदर्शों और प्रेरणादायी जीवन से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।

कौन थीं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर?

अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की महान शासकों में गिनी जाती हैं। उन्होंने मालवा राज्य का कुशल नेतृत्व करते हुए जनकल्याण, धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सामाजिक विकास के अनेक कार्य किए। काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देशभर के कई तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण और विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसी कारण उन्हें लोकमाता के रूप में सम्मानित किया जाता है।

रतलाम के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल 02 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

रतलाम जिले के थाना जावरा शहर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से मोटर साइकिल दुर्घटना में घायल दो व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।

29 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना जावरा शहर क्षेत्र अंतर्गत महू-नीमच हाईवे रोड पर पुलिस बटालियन के सामने एक मोटर साइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, जिसमें दो व्यक्ति घायल हो गए हैं एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना जावरा शहर क्षेत्र में तैनात डायल 112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  जितेन्द्र व्यास एवं पायलट  मंगलेश्वर सूर्यवंशी ने मौके पर पहुँचकर पाया कि दुर्घटना में दो व्यक्ति घायल हो गये थे, जिनमें से एक को गंभीर चोटें आई थीं।

डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को तत्काल डायल 112 की सहायता से शासकीय सिविल चिकित्सालय, जावरा पहुँचाया।

डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से दोनों घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

पूर्व राज्यसभा सांसद स्व. कैलाश नारायण सारंग की जयंती पर देशभर में मनाया जाएगा मातृ–पितृ भक्ति दिवस

भोपाल 

भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है। उनके सम्मान, सेवा और आशीर्वाद को जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य माना जाता है। इन्हीं संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाजपा के संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद एवं जनसेवा के पर्याय रहे स्व.  कैलाश नारायण सारंग जी की जयंती 2 जून को इस वर्ष भी देशभर में मातृ–पितृ भक्ति दिवस के रूप में श्रद्धा, सम्मान और सेवा भाव के साथ मनाई जाएगी।

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग के आह्वान पर इस अवसर पर देशभर में वृद्धजनों के सम्मान, सेवा और संस्कार जागरण के विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा विभिन्न राज्यों में वृद्धजनों के चरण पखारकर, उन्हें शाल एवं फल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही सेवा, समर्पण और श्रद्धा के अनेक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

मंत्री  सारंग ने बताया कि पूज्य पिताजी स्व.  कैलाश नारायण सारंग का सम्पूर्ण जीवन समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उनका सपना था कि समाज का कोई भी वृद्ध स्वयं को अकेला महसूस न करे और प्रत्येक घर में माता-पिता को सर्वोच्च सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि मातृ–पितृ भक्ति दिवस केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और संस्कारों को सशक्त बनाने का संकल्प है, जो नई पीढ़ी को अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों के प्रति कर्तव्यबोध का संदेश देगा।

नरेला विधानसभा में तीन दिवसीय सेवा कार्यक्रम

नरेला विधानसभा के विभिन्न वार्डों में 1 से 3 जून तक वृद्धजनों का सम्मान और अन्य सेवा कार्य आयोजित किए जाएंगे। दिनांक 01 जून को वार्ड 76 (खेड़ापति हनुमान मंदिर), 79 (सरदार पटेल स्कूल), 75 (केनरा बैंक के सामने करोंद), 77 (शिव मंदिर पुलिस चौकी करोंद), 78 (पानी की टंकी के पास विश्वकर्मा नगर करोंद), 37 (मरई माता मंदिर द्वारका नगर) व 38 (साईंराम कॉलोनी) में वृद्धजनों का सम्मान किया जाएगा। वार्ड 38, साईंराम कॉलोनी में विशाल भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। दिनांक 02 जून को वार्ड 71 (स्वामी विवेकानंद चौराहा), वार्ड 39-40 (चाणक्यपुरी), वार्ड 59 (अन्ना नगर), वार्ड 58 (सर्जना पार्क), वार्ड 44 (हनुमान मंदिर आचार्य नरेंद्र देव नगर), वार्ड 70 (पिंक टॉवर के सामने), वार्ड 69-41 (नर्मदा चौरहा) एवं वार्ड 36 (जैन मंदिर के पास शंकराचार्य नगर) में वृद्धजनों का सम्मान किया जाएगा। दिनांक 03 जून को वार्ड 38 कैलाश सारंग पार्क एकतापुरी में सायं 07:00 बजे स्व. कैलाश नारायण सारंग की मूर्ति का अनावरण, भजन संध्या एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

देशभर में सेवा और सम्मान कार्यक्रम

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा भी स्व. कैलाश नारायण सारंग जी की जयंती को देशभर में मातृ–पितृ भक्ति दिवस के रूप में मनाया जाएगा। विभिन्न राज्यों में वृद्धजनों के सम्मान के साथ-साथ सेवा, स्वास्थ्य, सहयोग एवं जनकल्याण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

जनसेवा के प्रकल्प आज भी दे रहे हैं संस्कार और सेवा का संदेश

मंत्री  सारंग ने बताया कि स्व. कैलाश सारंग ने अपने पैतृक ग्राम बरेली में वृद्धाश्रम की स्थापना कर बेसहारा बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। इसके अतिरिक्त रायसेन जिले के ग्राम घाटपिपरिया स्थित नर्मदा तट पर परिक्रमावासियों के लिए आश्रम की स्थापना कर सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके द्वारा प्रारंभ किए गए सेवा, संस्कार और जनकल्याण के अनेक प्रकल्प आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

आइए, माता-पिता के चरणों में श्रद्धा अर्पित करें

मंत्री  विश्वास सारंग ने सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि 2 जून को अपने माता-पिता एवं परिवार के सभी वरिष्ठजनों का सम्मान करें, उनका आशीर्वाद प्राप्त करें तथा अपने बच्चों को भी सेवा, संस्कार और श्रद्धा की इस महान परंपरा से जोड़ें। उन्होंने आग्रह किया कि इस अवसर पर अपने अनुभव, फोटो एवं वीडियो सोशल मीडिया पर #सारंग_मातृ_पितृ_भक्ति_दिवस के साथ साझा करें।

 

नीमच रिश्वत कांड पर भड़के दिग्विजय सिंह, कलेक्टर-एसपी से मांगा जवाब

नीमच

जनपद पंचायत जावद के अध्यक्ष गोपाल चारण के रिश्वत लेते पकड़े जाने के मामले में लगभग तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कलेक्टर और एसपी को संबोधित पोस्ट करते हुए कई सवाल किए हैं और जवाब नहीं मिलने की दशा में कहा कि अन्यथा मुझे आपकी जनसुनवाई में आना पड़ेगा।

सोशल मीडिया पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने 30 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और फेसबुक पर पोस्ट की है, जिसमें उन्होंने जावद के अध्यक्ष के रिश्वत लेते पकड़े जाने पर गिरफ्तार नहीं किए, पद से नहीं हटाए जाने और सरपंच व सचिव के भ्रष्टाचार की जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद पंचायत अधिनियम के तहत पद से बेदखल नहीं करने जैसे सवाल उठाए हैं। नीमच कलेक्टर व एसपी से सवालों के जवाब मांगे हैं।

 

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