पेंच टाइगर रिजर्व में पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम से होगी वन्यजीव संरक्षण की निगरानी

भोपाल

पेंच टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थापित की गई अत्याधुनिक पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम (PAWS) तकनीक ने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है। एआई आधारित कैमरा नेटवर्क की सहायता से रिजर्व के कोर क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश कर मछली पकड़ने आए एक व्यक्ति को त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया है। पेंच टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित PAWS प्रणाली ने 26 मई को कोर क्षेत्र में मानव गतिविधि का अलर्ट जारी किया। यह क्षेत्र बाघों एवं अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की उच्च उपस्थिति वाला प्रतिबंधित इलाका है। अलर्ट प्राप्त होते ही वन विभाग का मैदानी अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और अवैध रूप से मछली पकड़ने आए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय, छिंदवाड़ा में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

इस सफल कार्रवाई ने वन एवं वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग को प्रमाणित किया है। समय पर प्राप्त अलर्ट और त्वरित कार्रवाई से न केवल अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाया गया, बल्कि संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति को भी टालने में सफलता मिली। संबंधित क्षेत्र में बाघों की नियमित आवाजाही रहती है, जिससे किसी भी अनाधिकृत मानव प्रवेश से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

पेंच टाइगर रिजर्व द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली को मैदानी कार्यवाहियों के साथ जोड़कर कोर क्षेत्र की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण तथा मानव सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। पीएडब्ल्यूएस तकनीक भविष्य में भी वन अपराधों की रोकथाम और संरक्षित क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री  मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत

विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण

परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार

परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक

परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

व्यापक अधोसंरचना निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है।

यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।

महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार

आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर विकसित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा पौधरोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकास, संपर्क और समृद्धि का नया अध्याय

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली विकास यात्रा है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, कम ईंधन खपत, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर मध्य भारत के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा।

 

उमरिया के पाली क्षेत्र के तिवनी गांव में दर्दनाक हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 5 की मौत

उमरिया

जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत तिवनी गांव के पास शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पुलिया पर पलट गई। हादसे में 5 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब दो दर्जन लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जा रहे थे धार्मिक कार्यक्रम में

जानकारी के अनुसार पाली से लगे ग्राम गिंजरी के ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर बिजौरा गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान तिवनी गांव स्थित शनिधाम के पास पुलिया पर ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित हो गया और ट्रॉली पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना तेज था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। हालांकि संयोग से ट्रैक्टर पुलिया के नीचे नहीं गिरा, अन्यथा दुर्घटना और भी भयावह हो सकती थी।

 

मंत्री सारंग ने किया निर्माणाधीन 10 लेन करोंद बायपास प्रोजेक्ट का निरीक्षण

भोपाल

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शुक्रवार को निर्माणाधीन 10 लेन करोंद बायपास परियोजना का एनएचएआई, नगर निगम, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, मेट्रो कॉर्पोरेशन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य की प्रगति, यातायात व्यवस्था, जनसुविधाओं एवं निर्माण कार्य के दौरान उत्पन्न हो रही समस्याओं का मौके पर जायजा लेकर संबंधित आधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से करें पानी की व्यवस्था

निरीक्षण में मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही के कारण पानी लाइन बार-बार क्षतिग्रस्त होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मंत्री  सारंग ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण नागरिकों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिये तत्काल एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि जहां भी पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, वहां तत्काल अस्थायी रूप से टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

अव्यवस्थाओं को लेकर की नाराजगी व्यक्त

मंत्री  सारंग ने निर्माण कार्य में सामने आ रही व्यवस्थागत कमियों एवं अव्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा आमजन की सुविधा एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि करोंद बायपास परियोजना शहर के यातायात को सुगम बनाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन निर्माण कार्य के कारण नागरिकों को अनावश्यक परेशानियां न उठानी पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात, आवागमन एवं दैनिक गतिविधियां प्रभावित न हों, इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करें।

पानी एवं सीवेज लाइनों को व्यवस्थित रूप से करें शिफ्ट

मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण एजेंसियां खुदाई करने से पहले पानी एवं सीवेज लाइनों की स्थिति देख लें, जिससे भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न न हों। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरी योजना एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाए, जिससे परियोजना समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण हो सके।

ठेकेदार से लिया जाएगा आर्थिक मुआवजा

मंत्री  सारंग ने कहा कि ठेकेदार की लापरवाही से पाइप-लाइन टूटने की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिये आर्थिक मुआवजा भी वसूला जाएगा। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो तथा निर्माण कार्य में आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

 

भारत को अक्षय ऊर्जा की वैश्विक महाशक्ति बना रही पीएम सूर्य घर योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ भारत को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। आत्मनिर्भर ऊर्जा के साथ सशक्त भारत की दिशा में केन्द्र सरकार के बढ़ते कदमों का ही सुपरिणाम है कि आज देश के 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित हो गए हैं। इनमें मध्यप्रदेश के 1 लाख 29 हजार 971 घर शामिल हैं। ये सभी घर-परिवार अब बिजली बिल की चिंता से हमेशा के लिए मुक्त होकर स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा से रौशन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में स्थापित इन सोलर संयंत्रों से 456 मेगावॉट से अधिक स्वच्छ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी हो रहा है।

केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के नेशनल पोर्टल के अनुसार इस योजना से अब तक प्रदेश के 1 लाख 34 हजार 436 परिवार लाभान्वित हो चुके हैं। प्रदेश के पीएम सूर्य घर योजना हितग्राहियों को अब तक 901.92 करोड़ रुपये की अनुदान (सब्सिडी) राशि रिलीज की जा चुकी है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा प्रदेश में 6 लाख घरों को ‘पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना’ के तहत सौर ऊर्जा से रौशन करने का लक्ष्य लिया गया है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए तेजी से काम जारी है। विभाग को अब तक 2 लाख 4 हजार 601 आवेदन मिल चुके हैं।

 

 

परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए अंतर्विभागीय समन्वय और टीम भावना सर्वोपरि: सिंह

भोपाल

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी (एमपीयूडीसी) की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त प्रबंध संचालक  दिव्यांक सिंह ने परियोजना प्रबंधकों एवं संविदाकारों को निर्देशित किया है कि समस्त जलप्रदाय एवं मलजल योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च तकनीकी गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रबंधन इकाई, क्रियान्वयन इकाई, स्थानीय निकाय और संविदाकार आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें जिससे जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हो सके।  सिंह ने वर्षा ऋतु को दृष्टिगत रखते हुए संविदाकारों को कड़ी हिदायत दी कि वे प्राथमिकता के आधार पर सड़कों के जीर्णोद्धार (रोड रेस्टोरेशन) के शेष कार्यों को मानसून पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर जल प्रदाय के देयक वितरित करने और वाटर आईडी को प्रॉपर्टी आईडी से लिंक करने की प्रक्रिया को गति प्रदान करने के निर्देश दिए जिससे राजस्व प्रबंधन सुदृढ़ हो सके।

भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा नगर प्रबंधन संस्थान में आयोजित बैठक में पूर्ण तथा प्रगतिरत कुल 134 महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की बिंदुवार एवं सूक्ष्म समीक्षा की गई। अतिरिक्त प्रबंध संचालक ने रेखांकित किया कि परियोजना क्रियान्वयन में उत्पन्न होने वाली तकनीकी अथवा प्रशासनिक समस्याओं से वरिष्ठ प्रबंधन को समय रहते अवगत कराया जाए जिससे उनके त्वरित निवारण में कोई विलंब न हो। उन्होंने परियोजना प्रबंधकों को अनुबंधों की शर्तों का गहन एवं सूक्ष्म अध्ययन करने का परामर्श भी दिया इससे संविदात्मक स्तर पर कोई गतिरोध उत्पन्न न हो। बैठक में विभिन्न बाह्य विभागों जैसे एमपीआरडीसी, एनएचएआई, जल संसाधन तथा एमपीआरडीए से लंबित अनुमतियों और अनापत्ति प्रमाण पत्रों से संबंधित प्रकरणों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिससे विकास कार्यों की गति निर्बाध बनी रहे।

समीक्षा बैठक के तकनीकी सत्र में परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का व्यापक प्रस्तुतीकरण प्रमुख अभियंता  आनंद सिंह एवं मुख्य अभियंता  शैलेन्द्र शुक्ला द्वारा किया गया, जिसमें प्रत्येक परियोजना की अद्यतन स्थिति और आगामी कार्ययोजना को रेखांकित किया गया। बैठक का समन्वय उप परियोजना संचालक प्रशासन  राजीव रंजन पांडे द्वारा निष्पादित किया गया। बैठक में सहभागिता के रूप में एमपीयूडीसी की समस्त 10 क्षेत्रीय इकाइयों के परियोजना प्रबंधक, सहायक परियोजना प्रबंधक, संबंधित संविदाकार तथा परियोजना सलाहकार फर्मों के विषय-विशेषज्ञ एवं तकनीकी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

पन्ना पुलिस ने एपीके फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लगातार सख्त एवं तकनीकी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पन्ना पुलिस ने एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया गया है।

फरियादी गोपाल बंसकार ने 1930 साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर बताया कि उसके सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सिमरिया स्थित खाते से संचालित नवी यू.पी.आई. एप के माध्यम से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कुल 1 लाख 90 हजार रुपये की साइबर ठगी की गई है।

शिकायत प्राप्‍त होते ही पुलिस अधीक्षक पन्ना मती निवेदिता नायडू के निर्देशन में पुलिस एवं साइबर सेल की एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा फरियादी के मोबाइल फोन में एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कराकर मोबाइल का अनाधिकृत एक्सेस प्राप्त किया गया था। एपीके फाइल इंस्टॉल होने के बाद आरोपियों ने मोबाइल की संवेदनशील जानकारी, बैंकिंग एक्सेस, यूपीआई एवं ट्रांजेक्शन ओटीपी संबंधी जानकारी हासिल कर खाते से अवैध ट्रांजेक्शन किये।

पुलिस टीम द्वारा तकनीकी जांच एवं डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के दौरान पता चला कि 23 अप्रैल को फरियादी के खाते से 95 हजार रुपये तथा 27अप्रैल को पुनः 95 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किये गये थे।

विवेचना के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों एवं साइबर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने अन्‍य साथियों के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया है।

मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, संदिग्ध लिंक अथवा मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन अथवा मोबाइल एक्सेस किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा नजदीकी पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराएं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध सतर्क, सक्रिय एवं प्रतिबद्ध होकर आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्यरत है।

 

इंदौर में नकली बायो डीजल बेचने वाले डीजल पंप पर कार्रवाई, प्रतिष्ठान सील

इंदौर

इंदौर जिले के देपालपुर मेथवाडा स्थित मे. इंदौर बायो एनर्जी प्रा.लि. बायो डीजल पंप भागीदार सुनीता पति सुभाष केसवाल एवं सुभाष पति रामचंद्र केसवाल निवासी द्वारकापुरी द्वारा अवैध रूप से नकली बायो डीजल की बिक्री करने पर खाद्य विभाग द्वारा शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने पंप को सील कर दिया है। मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप पर प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल होना पाया गया।

बताया गया कि मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप की शिकायत प्राप्त होने पर खाद्य विभाग की टीम द्वारा जांच की गई। प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल पाए जाने पर पंप को सील किया।

साथ ही पंप संचालक द्वारा राज्य सरकार के अधिकृत लाइसेंस प्राप्त छह कंपनी के सप्लायर से सप्लाई नहीं लेकर अनाधिकृत फर्म से सप्लाई लेना पाया।

पंप संचालक बीएस 100 मानक का ही बायो डीजल विक्रय कर सकते हैं, बायोडीजल के मानक की डेंसिटी 900 से ऊपर होती है, लेकिन मौके पर डेंसिटी 860 पाई गई।

मौके से कुल छह हजार लीटर नकली बायो डीजल जब्‍त किया। इसकी कीमत लगभग चार लाख 20 हजार रूपये से ज्यादा है।

नकली बायोडीजल के सैंपल लेकर पंप में बिक्री बंद करवाते हुए पंप, डिस्पेंसरी यूनिट और भूमिगत टैंक को सील कर दिया है।

सैंपल अधिकृत लेबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। नमूना रिपोर्ट आने के बाद में आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील एवं सख्त कार्यवाही

भोपाल 

महिलाओं, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संवेदनशील अपराधों के विरुद्ध लगातार सख्त एवं त्वरित कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश के राजगढ़ एवं आगर मालवा जिलों में पुलिस टीमों ने तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मानव तस्करी, बाल विवाह, दुष्कर्म एवं महिलाओं के शोषण से जुड़े गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हुआ है कि मध्यप्रदेश पुलिस महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है।

राजगढ़ जिले में थाना कोतवाली पुलिस ने 12 वर्षीय नाबालिग बालिका से बाल विवाह, खरीद-फरोख्त, दैहिक शोषण एवं प्रताड़ना के अत्यंत संवेदनशील मामले का खुलासा करते हुए 6 नामजद आरोपियों में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक  अमित तोलानी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई।

प्रकरण में सामने आया कि पीड़िता के पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां की दूसरी शादी आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर निवासी गुना से कराई गई थी। इसके बाद आरोपी पीड़िता एवं उसकी मां को राजगढ़ लेकर आया, जहां सुनियोजित तरीके से 3 फरवरी 2025 को 12 वर्षीय बालिका का विवाह भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर से करा दिया गया। आरोपियों द्वारा इस बाल विवाह के एवज में लाखों रुपये नगद एवं जेवरात लिए गए। विवाह के बाद नाबालिग के साथ दुष्कर्म एवं लगातार शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना की गई। मामले में अन्य आरोपियों द्वारा भी पीड़िता का शोषण किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामला थाना प्रभारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने अत्यंत संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बालिका की काउंसलिंग की, जिससे पीड़िता ने साहसपूर्वक अपनी आपबीती पुलिस को बताई। इसके बाद थाना कोतवाली राजगढ़ में पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर, देवराज गुर्जर, सागर गुर्जर, शैतानबाई तथा पीड़िता की मां शामिल हैं। वहीं मुख्य आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर फरार है, जिसकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस अधीक्षक राजगढ़ द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

इसी प्रकार आगर मालवा के थाना बड़ौद पुलिस ने मानव तस्करी एवं जबरन विवाह कराने की साजिश का पर्दाफाश करते हुए त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार कर युवती को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पुलिस अधीक्षक आगर मालवा  दिलीप कुमार सोनी के निर्देशनमें यह कार्रवाई की गई।

प्रकरण में बैतूल निवासी युवती द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई कि वह इंदौर में कार्य करने जा रही थी, तभी शाहपुर बस स्टॉप से कुछ व्यक्तियों ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसे वाहन में बैठा लिया। आरोपियों द्वारा युवती को राजस्थान निवासी व्यक्ति से जबरन विवाह कराने एवं रुपये लेकर बेचने की योजना बनाई गई थी। विरोध करने पर युवती को जान से मारने एवं अन्य स्थान पर बेच देने की धमकी भी दी गई।

घटना के दौरान पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस कंट्रोल रूम आगर को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही डायल-112, कंट्रोल रूम एवं थाना बड़ौद पुलिस तत्काल सक्रिय हुई और तकनीकी विश्लेषण एवं लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर राजस्थान सीमा से लगे क्षेत्र में सघन घेराबंदी की गई। पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन पुलिस ने तत्परता एवं सूझबूझ से कार्रवाई करते हुए युवती को सुरक्षित बरामद कर आरोपी ईश्वर सिंह बागरी को गिरफ्तार कर लिया।थाना बड़ौद में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।

मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस द्वारा न केवल त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण, संरक्षण एवं न्याय दिलाने हेतु संवेदनशील पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

 

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से अब तक 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

24 हजार करोड़ रुपये का किसानों को किया जा चुका है भुगतान

प्रदेश में सबसे लम्बे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था की गई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन पर वीडियो संदेश के माध्यम से दी जानकारी

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन में अपने सभी लक्ष्य हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। प्रदेश में किसानों से अब तक रिकॉर्ड 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को 2585 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रति क्विंटल 40 रुपए बोनस का लाभ दिया है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान किया। अब तक किसानों को गेहूं उपार्जन की 24 हजार करोड़ राशि दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में आज वीडियो संदेश के माध्यम से ये जानकारी दी।

किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं खरीदने के लिए किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश में इस वर्ष गेहूं की पैदावार बढ़ी है। देश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले राज्यों में पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश सर्वाधिक लंबे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था लागू करने वाला एकमात्र राज्य है।

सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं गोदामों तक पहुंच चुका है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे और मध्यम श्रेणी के किसानों से पहले गेहूं खरीदा गया। यह व्यवस्था प्रदेश में पहली बार लागू की गई। छोटे किसानों से अब तक लगभग 32.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। इसके बाद बड़े किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिला। अब तक लगभग पौने 14 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन कर लिया गया है। सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसान भाई-बहनों का गेहूं गोदाम तक पहुंच चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति और विश्व में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है। इस कठिन दौर में भी रिकॉर्ड गेहूं खरीदी की गई है। राज्य सरकार किसानों के लिए अनेक जन हितैषी निर्णय ले रही है। अन्नदाता भाई-बहनों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार ने यह पूरा वर्ष कृषक कल्याण को समर्पित किया है। प्रदेश का हर किसान समृद्ध और खुशहाल हो, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फसल उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग से किसानों की आय में वृद्धि हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है।

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