पन्ना पुलिस ने एपीके फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश

भोपाल

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लगातार सख्त एवं तकनीकी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पन्ना पुलिस ने एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कर साइबर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया गया है।

फरियादी गोपाल बंसकार ने 1930 साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर बताया कि उसके सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया सिमरिया स्थित खाते से संचालित नवी यू.पी.आई. एप के माध्यम से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कुल 1 लाख 90 हजार रुपये की साइबर ठगी की गई है।

शिकायत प्राप्‍त होते ही पुलिस अधीक्षक पन्ना मती निवेदिता नायडू के निर्देशन में पुलिस एवं साइबर सेल की एक विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा फरियादी के मोबाइल फोन में एपीके (APK) फाइल इंस्टॉल कराकर मोबाइल का अनाधिकृत एक्सेस प्राप्त किया गया था। एपीके फाइल इंस्टॉल होने के बाद आरोपियों ने मोबाइल की संवेदनशील जानकारी, बैंकिंग एक्सेस, यूपीआई एवं ट्रांजेक्शन ओटीपी संबंधी जानकारी हासिल कर खाते से अवैध ट्रांजेक्शन किये।

पुलिस टीम द्वारा तकनीकी जांच एवं डिजिटल ट्रेल के विश्लेषण के दौरान पता चला कि 23 अप्रैल को फरियादी के खाते से 95 हजार रुपये तथा 27अप्रैल को पुनः 95 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किये गये थे।

विवेचना के दौरान बैंक खातों, मोबाइल नंबरों एवं साइबर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने अन्‍य साथियों के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 90 हजार रुपये नगद एवं एक मोबाइल फोन जब्‍त किया है।

मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल, संदिग्ध लिंक अथवा मोबाइल एप्लीकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन अथवा मोबाइल एक्सेस किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन अथवा नजदीकी पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराएं। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों के विरुद्ध सतर्क, सक्रिय एवं प्रतिबद्ध होकर आमजन की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्यरत है।

 

इंदौर में नकली बायो डीजल बेचने वाले डीजल पंप पर कार्रवाई, प्रतिष्ठान सील

इंदौर

इंदौर जिले के देपालपुर मेथवाडा स्थित मे. इंदौर बायो एनर्जी प्रा.लि. बायो डीजल पंप भागीदार सुनीता पति सुभाष केसवाल एवं सुभाष पति रामचंद्र केसवाल निवासी द्वारकापुरी द्वारा अवैध रूप से नकली बायो डीजल की बिक्री करने पर खाद्य विभाग द्वारा शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने पंप को सील कर दिया है। मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप पर प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल होना पाया गया।

बताया गया कि मे. इंदौर बायो एनर्जी बायो डीजल पंप की शिकायत प्राप्त होने पर खाद्य विभाग की टीम द्वारा जांच की गई। प्रारंभिक जांच में नकली बायो डीजल पाए जाने पर पंप को सील किया।

साथ ही पंप संचालक द्वारा राज्य सरकार के अधिकृत लाइसेंस प्राप्त छह कंपनी के सप्लायर से सप्लाई नहीं लेकर अनाधिकृत फर्म से सप्लाई लेना पाया।

पंप संचालक बीएस 100 मानक का ही बायो डीजल विक्रय कर सकते हैं, बायोडीजल के मानक की डेंसिटी 900 से ऊपर होती है, लेकिन मौके पर डेंसिटी 860 पाई गई।

मौके से कुल छह हजार लीटर नकली बायो डीजल जब्‍त किया। इसकी कीमत लगभग चार लाख 20 हजार रूपये से ज्यादा है।

नकली बायोडीजल के सैंपल लेकर पंप में बिक्री बंद करवाते हुए पंप, डिस्पेंसरी यूनिट और भूमिगत टैंक को सील कर दिया है।

सैंपल अधिकृत लेबोरेटरी में टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। नमूना रिपोर्ट आने के बाद में आगामी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील एवं सख्त कार्यवाही

भोपाल 

महिलाओं, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संवेदनशील अपराधों के विरुद्ध लगातार सख्त एवं त्वरित कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश के राजगढ़ एवं आगर मालवा जिलों में पुलिस टीमों ने तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मानव तस्करी, बाल विवाह, दुष्कर्म एवं महिलाओं के शोषण से जुड़े गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हुआ है कि मध्यप्रदेश पुलिस महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है।

राजगढ़ जिले में थाना कोतवाली पुलिस ने 12 वर्षीय नाबालिग बालिका से बाल विवाह, खरीद-फरोख्त, दैहिक शोषण एवं प्रताड़ना के अत्यंत संवेदनशील मामले का खुलासा करते हुए 6 नामजद आरोपियों में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक  अमित तोलानी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई।

प्रकरण में सामने आया कि पीड़िता के पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां की दूसरी शादी आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर निवासी गुना से कराई गई थी। इसके बाद आरोपी पीड़िता एवं उसकी मां को राजगढ़ लेकर आया, जहां सुनियोजित तरीके से 3 फरवरी 2025 को 12 वर्षीय बालिका का विवाह भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर से करा दिया गया। आरोपियों द्वारा इस बाल विवाह के एवज में लाखों रुपये नगद एवं जेवरात लिए गए। विवाह के बाद नाबालिग के साथ दुष्कर्म एवं लगातार शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना की गई। मामले में अन्य आरोपियों द्वारा भी पीड़िता का शोषण किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामला थाना प्रभारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने अत्यंत संवेदनशीलता एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बालिका की काउंसलिंग की, जिससे पीड़िता ने साहसपूर्वक अपनी आपबीती पुलिस को बताई। इसके बाद थाना कोतवाली राजगढ़ में पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में भोला उर्फ भोलाराम गुर्जर, देवराज गुर्जर, सागर गुर्जर, शैतानबाई तथा पीड़िता की मां शामिल हैं। वहीं मुख्य आरोपी पवन उर्फ परमाल गुर्जर फरार है, जिसकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस अधीक्षक राजगढ़ द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

इसी प्रकार आगर मालवा के थाना बड़ौद पुलिस ने मानव तस्करी एवं जबरन विवाह कराने की साजिश का पर्दाफाश करते हुए त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार कर युवती को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पुलिस अधीक्षक आगर मालवा  दिलीप कुमार सोनी के निर्देशनमें यह कार्रवाई की गई।

प्रकरण में बैतूल निवासी युवती द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई कि वह इंदौर में कार्य करने जा रही थी, तभी शाहपुर बस स्टॉप से कुछ व्यक्तियों ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसे वाहन में बैठा लिया। आरोपियों द्वारा युवती को राजस्थान निवासी व्यक्ति से जबरन विवाह कराने एवं रुपये लेकर बेचने की योजना बनाई गई थी। विरोध करने पर युवती को जान से मारने एवं अन्य स्थान पर बेच देने की धमकी भी दी गई।

घटना के दौरान पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस कंट्रोल रूम आगर को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही डायल-112, कंट्रोल रूम एवं थाना बड़ौद पुलिस तत्काल सक्रिय हुई और तकनीकी विश्लेषण एवं लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर राजस्थान सीमा से लगे क्षेत्र में सघन घेराबंदी की गई। पुलिस टीम के पहुंचते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन पुलिस ने तत्परता एवं सूझबूझ से कार्रवाई करते हुए युवती को सुरक्षित बरामद कर आरोपी ईश्वर सिंह बागरी को गिरफ्तार कर लिया।थाना बड़ौद में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।

मध्यप्रदेश पुलिस प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पुलिस द्वारा न केवल त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण, संरक्षण एवं न्याय दिलाने हेतु संवेदनशील पुलिसिंग को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगा।

 

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश ने गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से अब तक 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

24 हजार करोड़ रुपये का किसानों को किया जा चुका है भुगतान

प्रदेश में सबसे लम्बे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था की गई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन पर वीडियो संदेश के माध्यम से दी जानकारी

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने इस वर्ष गेहूं उपार्जन में अपने सभी लक्ष्य हासिल करते हुए नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। प्रदेश में किसानों से अब तक रिकॉर्ड 1.4 करोड़ मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को 2585 रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य और प्रति क्विंटल 40 रुपए बोनस का लाभ दिया है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान किया। अब तक किसानों को गेहूं उपार्जन की 24 हजार करोड़ राशि दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में आज वीडियो संदेश के माध्यम से ये जानकारी दी।

किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं खरीदने के लिए किसानों की संख्या के मामले में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश में इस वर्ष गेहूं की पैदावार बढ़ी है। देश में सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले राज्यों में पंजाब के बाद मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश सर्वाधिक लंबे समय तक गेहूं खरीद की व्यवस्था लागू करने वाला एकमात्र राज्य है।

सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं गोदामों तक पहुंच चुका है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटे और मध्यम श्रेणी के किसानों से पहले गेहूं खरीदा गया। यह व्यवस्था प्रदेश में पहली बार लागू की गई। छोटे किसानों से अब तक लगभग 32.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। इसके बाद बड़े किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिला। अब तक लगभग पौने 14 लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन कर लिया गया है। सरकारी खरीद के लिए पंजीयन कराने वाले सभी किसान भाई-बहनों का गेहूं गोदाम तक पहुंच चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति और विश्व में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है। इस कठिन दौर में भी रिकॉर्ड गेहूं खरीदी की गई है। राज्य सरकार किसानों के लिए अनेक जन हितैषी निर्णय ले रही है। अन्नदाता भाई-बहनों की बेहतरी के लिए राज्य सरकार ने यह पूरा वर्ष कृषक कल्याण को समर्पित किया है। प्रदेश का हर किसान समृद्ध और खुशहाल हो, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फसल उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग से किसानों की आय में वृद्धि हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है।

जल संरक्षण और संवर्धन के पुनीत कार्य में देश का अग्रणी राज्य बना मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन का मुख्य आधार है और हमारी पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित और संवर्धित करना हमारा परम सामाजिक और पर्यावरणीय कर्तव्य है। इसी पावन उद्देश्य के साथ राज्य में शुरू किया गया ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ आज केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सहयोग से एक पवित्र जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पुनर्जीवन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है, जिसके अंतर्गत अब तक रिकॉर्ड 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जल सहेजने के इस पुनीत कार्य में पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

6 हजार 330 करोड़ रुपये की राशि से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य हुए पूरे

जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के तहत राज्य में कुल 3,67,777 कार्यों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार पूरा किया जा चुका है, जबकि 1,51,093 कार्य तीव्र गति से प्रगति पर हैं। इस विशाल अभियान को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से क्रियान्वित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा कुल 10,644.02 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से अब तक 6,330.81 करोड़ रुपये (लगभग 59.5%) की राशि का उपयोग किया गया है, जो विकास की वास्तविक गति को दर्शाती है।

कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में हुई जल क्रांति

ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड 57,794 खेत तालाब और 91,838 डग वेल रिचार्ज (कुआं पुनर्भरण) संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक और नए जल स्रोतों को सहेजने के उद्देश्य से 29,906 जल संरक्षण एवं पुनर्भरण संरचनाओं तथा 126 भव्य ‘अमृत सरोवरों’ का कार्य शत्-प्रतिशत् पूरा किया जा चुका है। सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,152 विशेष सिंचाई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के लिए 2,721 मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत सामाजिक, पर्यावरणीय और शैक्षणिक स्तर पर भी विशेष प्रयास किए गए हैं। वाटरशेड प्रबंधन के तहत 4,822 कार्यों को पूर्ण किया गया है, जिससे भूमिगत जल स्तर में व्यापक सुधार होगा। वहीं, स्कूलों में स्वच्छता और शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए ‘WoW मोबाइल ऐप’ के माध्यम से 5,275 पानी की टंकियों की सफाई का कार्य संपन्न कराया गया है। इसके अलावा, ‘जल संसद जल बंधन 2.0’ (JSJB 2.0) पहल के तहत 21.23 लाख से अधिक कार्यों का सफल पंजीकरण किया गया है, जिसमें समय पर कार्य पूर्ण करने की उत्कृष्ट दर 91.3% दर्ज की गई है।

देश के लिए मिसाल बनेगा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय प्रदेश की जागरूक जनता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समर्पित प्रशासनिक अमले को देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश का यह सशक्त जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए एक नई और अनुकरणीय दिशा तय करेगा। आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मध्यप्रदेश इस दिशा में निरंतर नवाचार करता रहेगा।

 

ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, गिरिबाला और समर्थ सिंह 2 जून तक CBI रिमांड में; होगा वर्चुअल रीक्रिएशन

भोपाल 

एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने उसकी सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी के वकील ने दोनों की 5-5 दिन की रिमांड मांगी। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की। जिसके बाद स्पेशल कोर्ट की जज शोभना भलावे ने सीबीआई रिमांड को मंजूरी दे दी।

बता दें कि ट्विशा का पति समर्थ सिंह पहले से ही 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर था। शुक्रवार को ये रिमांड खत्म होने पर उसे कोर्ट में पेश किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान सीबीआई दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। समर्थ ने फरारी कहां और किसके साथ काटी, इसको लेकर भी सवाल-जवाब होंगे।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, अब जांच के लिए टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एजेंसी ट्विशा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की हर गतिविधि को मिनट-टू-मिनट समझा जा सके।

अदालत में पेशी, 5 दिन की रिमांड मंजूर
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिबाला और समर्थ शांत मुद्रा में नजर आए। 

वकीलों ने रिमांड का विरोध नहीं किया
गिरिबाला सिंह के वकीलों ने सीबीआई की रिमांड का विरोध नहीं किया, बल्कि यह कहा कि एसआईटी के पास जो भी सबूत हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से सीबीआई को सौंपा जाए. इस पर सीबीआई ने बताया कि उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज मिल चुके है। 

कोर्ट में हुई बहस, CBI ने रोका दखल
सुनवाई के दौरान कटघरे में खड़े गिरिबाला सिंह की सीबीआई अधिकारियों से बहस भी हुई. अधिकारी ने उन्हें वकीलों से अधिक बोलने और मामले से इतर विषय उठाने से रोका, जिससे कुछ देर के लिए अदालत का माहौल गर्म हो गया। 

घटना के दिन के हालात पर होगी पूछताछ
सीबीआई अब घटना के दिन की परिस्थितियों को लेकर अहम सवाल करेगी. इसमें यह जानने की कोशिश होगी कि कटारा हिल्स स्थित घर में उस समय कौन-कौन मौजूद था और अंदर क्या घटनाक्रम हुआ था। 

शादी के 5 महीने बाद मौत पर सवाल
जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो शादी के महज 5 महीने बाद ऐसी स्थिति कैसे बनी कि ट्विशा शर्मा की मौत हो गई. साथ ही परिवार के भीतर चल रहे विवादों और उत्पीड़न के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी। 

सबूतों और पुलिस जांच पर संदेह
सीबीआई पुलिस जांच के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाएगी. जैसे- मौत की सूचना देने में देरी क्यों हुई, शव को नीचे लाकर CPR देने का फैसला किसने लिया और पुलिस रिकॉर्ड में लंबाई जैसी जानकारी गलत कैसे दर्ज हुई। 

40 मिनट की घटनाओं पर फोकस
जांच का सबसे अहम हिस्सा वह 40 मिनट का समय है, जब ट्विशा जिम एरिया में गईं और फिर उनकी मौत हुई. सीबीआई यह जानने की कोशिश करेगी कि उस दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में उन्हें नीचे लाया गया। 

वायरल वीडियो पर भी सवाल
जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि केवल छत से नीचे लाने का वीडियो ही क्यों वायरल हुआ, उसके पहले या बाद का कोई फुटेज क्यों सामने नहीं आया. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। 

समर्थ सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीबीआई समर्थ सिंह की भूमिका की भी गहराई से जांच करेगी. उनके बयानों में विरोधाभास, फरार रहने के दौरान मदद और पूरे घटनाक्रम में उनकी संलिप्तता की जांच की जाएगी। 

परिजनों के आरोपों की पड़ताल
ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप भी जांच में अहम होंगे. इनमें कथित उत्पीड़न, जबरन गर्भपात और चरित्र पर सवाल उठाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। 

जांच में खुल सकती हैं नई परतें
सीबीआई की इस पूछताछ से मामले के कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठने की संभावना है. अब सबकी नजर 2 जून तक की रिमांड अवधि पर टिकी है, जहां से इस हाई-प्रोफाइल केस में अहम खुलासे हो सकते हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

3,540 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हाई-स्पीड कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया मानक स्थापित करेगा
114 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिलेगी जाम से राहत, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को मिलेगा नया आधार
जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना से आवागमन होगा तेज

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत

विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण

परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार

परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक

परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

व्यापक अधोसंरचना निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है।

यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।

महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार

आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर विकसित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा पौधरोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकास, संपर्क और समृद्धि का नया अध्याय

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली विकास यात्रा है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, कम ईंधन खपत, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर मध्य भारत के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा।

 

आंधी-पानी से हुए नुकसान का जायजा लेने मैदान में उतरे ऊर्जा मंत्री तोमर

आंधी-पानी से हुए नुकसान का जायजा लेने मैदान में उतरे ऊर्जा मंत्री तोमर

ग्वालियर

गुरुवार रात आई आंधी और बारिश से उप नगर ग्वालियर में कई क्षेत्रों में वृक्ष गिरने से विद्युत लाइनों तथा खंभों के क्षतिग्रस्त होने से बिजली संबंधी गंभीर समस्या उत्पन्न हुई। सूचना प्राप्त होते ही ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने तत्काल ग्राउंड पर पहुँचकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा राहत एवं मरम्मत संबंधी कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने देर रात 1 बजे 4 फीडरों पर विद्युत व्यवस्था का जायजा लिया। मंत्री तोमर ने माँ वैष्णोंपुरम , चंदनपुरा, श्याम बाबा का मंदिर, राठौर चौक, गदाईपुरा पहुंचकर विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आंधी-पानी के कारण जिन इलाकों में विद्युत आपूर्ति बाधित हुई है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्युत आपूर्ति बहाल करें।

प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से संवाद करते हुए ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिजली विभाग की टीमें पूरी तत्परता और तेजी से कार्य कर रही हैं। शीघ्र ही सभी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 

 

गिरिबाला सिंह और समर्थ की 5 दिन की रिमांड मांग पर कोर्ट में सुनवाई, CBI ने रखे बड़े तर्क

भोपाल.

ट्विशा शर्मा मौत मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह को सीबीआई ने शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश किया है। जहां एजेंसी ने दोनों आरोपियों से पूछताछ के लिए कोर्ट से 5 दिन की रिमांड मांगी है। शुक्रवार को सुबह सीबीआई की टीम दोनों आरोपियों को कोर्ट लेकर पहुंची है। जहां अभी ट्विशा शर्मा की मौत के मामले सुनवाई जारी है।

सीबीआई ने 8 घंटे की पूछताछ
गुरुवार को सीबीआई ने करीब आठ घंटे तक पूछताछ के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे पहले एजेंसी ने घटनास्थल की दोबारा जांच, मैपिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल की थी। मामले में समर्थ सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। पुलिस ने उसे 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था। 23 मई को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे सात दिन की रिमांड पर लिया गया था। बुधवार को अदालत ने उसे सीबीआई कस्टडी में भेज दिया। सीबीआई को मामले के कई अहम बिंदुओं पर अभी पूछताछ और साक्ष्य जुटाने हैं।

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, किसानों से सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाला राज्य बना

भोपाल
 किसानों से गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके लिए सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार लगातार किसानों के लिए काम करती रहेगी। मोहन यादव ने कहा है कि किसी राज्य ने अगर पूरे देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा है, तो वो मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1 करोड़ 4 लाख 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों की संख्या सबसे ज्यादा होने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। और, सर्वाधिक लंबे समय तक किसी राज्य ने गेहूं खरीदी की व्यवस्था जारी रखी, तो वो भी मध्यप्रदेश है। 

लक्ष्य से अधिक उपार्जन, 104 लाख मीट्रिक टन पार
मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है. इस वर्ष राज्य ने निर्धारित लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया. प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया. बेहतर रणनीति, समयबद्ध खरीदी और व्यवस्थागत सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया.

किसानों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया. यह संख्या देश में सर्वाधिक है. हालांकि कुल उपार्जन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है, लेकिन किसानों की व्यापक भागीदारी ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। 

लघु किसानों से खरीदी पहले
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं अपने सर्वाधिक गेहूं उपार्जन वाले राज्य की तरफ देखता हूं तो गेहूं की मात्रा में भी पंजाब के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है, जिसके पास गेहूं का इतना विपुल उत्पादन होने के बाद उसने खरीदी की है। मध्यप्रदेश में पहली बार हमने लघु किसान, मध्यम श्रेणी के किसान का गेहूं खरीदने का निर्णय किया। हमने छोटे किसानों से लगभग 32. 72 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की। मुझे बताया गया है कि लगभग पौने चौदह लाख किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था, उनका गेहूं गोडाउन तक पहुंच चुका है। 

किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए हमने यह गेहूं खरीदी की है। किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास है। हमने 24 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि प्रेषित की है। हमने किसानों से समर्थन मूल्य 2585 रुपये और 40 रुपये बोनस अर्थात 2625 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। आने वाले समय में एमएसपी बढ़ती जाएगी और किसान कल्याण के काम तेज होंगे। गेहूं का इतना उत्पादन होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारी सरकार किसान कल्याण के काम लगातार करती रहेगी।

10 वर्षों में सर्वाधिक खरीदी
प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक रहा है, यदि कोविड-19 अवधि को अपवाद मानें. इससे साफ है कि राज्य सरकार की नीतियां और खरीदी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है। 

राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गेहूं उपार्जन में मिली यह सफलता सरकार की नीतियों, प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का परिणाम है. आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। 

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