गिरिबाला सिंह और समर्थ की 5 दिन की रिमांड मांग पर कोर्ट में सुनवाई, CBI ने रखे बड़े तर्क

भोपाल.

ट्विशा शर्मा मौत मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह को सीबीआई ने शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश किया है। जहां एजेंसी ने दोनों आरोपियों से पूछताछ के लिए कोर्ट से 5 दिन की रिमांड मांगी है। शुक्रवार को सुबह सीबीआई की टीम दोनों आरोपियों को कोर्ट लेकर पहुंची है। जहां अभी ट्विशा शर्मा की मौत के मामले सुनवाई जारी है।

सीबीआई ने 8 घंटे की पूछताछ
गुरुवार को सीबीआई ने करीब आठ घंटे तक पूछताछ के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे पहले एजेंसी ने घटनास्थल की दोबारा जांच, मैपिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल की थी। मामले में समर्थ सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। पुलिस ने उसे 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था। 23 मई को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे सात दिन की रिमांड पर लिया गया था। बुधवार को अदालत ने उसे सीबीआई कस्टडी में भेज दिया। सीबीआई को मामले के कई अहम बिंदुओं पर अभी पूछताछ और साक्ष्य जुटाने हैं।

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, किसानों से सबसे ज्यादा गेहूं खरीदने वाला राज्य बना

भोपाल
 किसानों से गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके लिए सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार लगातार किसानों के लिए काम करती रहेगी। मोहन यादव ने कहा है कि किसी राज्य ने अगर पूरे देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा है, तो वो मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1 करोड़ 4 लाख 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों की संख्या सबसे ज्यादा होने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। और, सर्वाधिक लंबे समय तक किसी राज्य ने गेहूं खरीदी की व्यवस्था जारी रखी, तो वो भी मध्यप्रदेश है। 

लक्ष्य से अधिक उपार्जन, 104 लाख मीट्रिक टन पार
मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है. इस वर्ष राज्य ने निर्धारित लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया. प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया. बेहतर रणनीति, समयबद्ध खरीदी और व्यवस्थागत सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया.

किसानों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया. यह संख्या देश में सर्वाधिक है. हालांकि कुल उपार्जन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है, लेकिन किसानों की व्यापक भागीदारी ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। 

लघु किसानों से खरीदी पहले
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं अपने सर्वाधिक गेहूं उपार्जन वाले राज्य की तरफ देखता हूं तो गेहूं की मात्रा में भी पंजाब के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है, जिसके पास गेहूं का इतना विपुल उत्पादन होने के बाद उसने खरीदी की है। मध्यप्रदेश में पहली बार हमने लघु किसान, मध्यम श्रेणी के किसान का गेहूं खरीदने का निर्णय किया। हमने छोटे किसानों से लगभग 32. 72 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की। मुझे बताया गया है कि लगभग पौने चौदह लाख किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था, उनका गेहूं गोडाउन तक पहुंच चुका है। 

किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए हमने यह गेहूं खरीदी की है। किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास है। हमने 24 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि प्रेषित की है। हमने किसानों से समर्थन मूल्य 2585 रुपये और 40 रुपये बोनस अर्थात 2625 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। आने वाले समय में एमएसपी बढ़ती जाएगी और किसान कल्याण के काम तेज होंगे। गेहूं का इतना उत्पादन होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारी सरकार किसान कल्याण के काम लगातार करती रहेगी।

10 वर्षों में सर्वाधिक खरीदी
प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक रहा है, यदि कोविड-19 अवधि को अपवाद मानें. इससे साफ है कि राज्य सरकार की नीतियां और खरीदी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है। 

राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गेहूं उपार्जन में मिली यह सफलता सरकार की नीतियों, प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का परिणाम है. आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। 

शिप्रा डैम के पानी पर विवाद गहराया, देवास से मांगलिया पंचायत को सप्लाई पर उठे सवाल

देवास
 शिप्रा डैम से मांगलिया पंचायत को पानी देने के मामले में देवास नगर निगम के जिम्मेदार घिरे हुए हैं। नेता सत्तापक्ष के विरोध के बाद अब चौतरफा विरोध हो रहा। पूर्व महापौरों ने मोर्चा संभालकर प्रतिक्रियाएं देना शुरू की हैं और देवास में जलसंकट की आशंका जताई है।

सांसद ने भी एमआईसी के निर्णय को गलत बताया है। पूरी निगम परिषद बैकफुट पर है। विधायक की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जल संसाधन मंत्री के दबाव में यह सब किया जा रहा है।

बता दें कि गत दिनों एमआइसी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके तहत शिप्रा डैम से 2.20 एमएलडी पानी मांगलिया पंचायत को दिया जाएगा। महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने बताया था कि एनवीडीए और मांगलिया पंचायत के बीच यह करार हुआ है। देवास के हिस्से का पानी नहीं दिया जाएगा। एनवीडीए अलग से पानी देगा, जो मांगलिया तक जाएगा।

यह देवासवासियों के साथ अन्याय है
देवास का काम बस ये रहेगा कि शिप्रा डैम में पानी स्टोर करना है। बदले में मांगलिया पंचायत से मेंटेनेंस शुल्क लिया जाएगा। इस निर्णय के बाद भाजपा नेता ही विरोध में आए। सबसे पहले नेता सत्तापक्ष मनीष सेन ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और कहा कि यह देवासवासियों के साथ अन्याय है। इस पर पुनर्विचार किया जाए। हालांकि अगले ही दिन सेन ने इंटरनेट मीडिया में वीडियो प्रसारित कर बात पलट दी और कहा कि मुझे विषय की पूरी जानकारी थी, इसलिए पत्र लिखा था। अब लोग कह रहे कि इस वीडियो जारी करने के पीछे राजनीतिक दबाव है या स्वेच्छा, क्योंकि यदि एेसा था तो पहले पत्र क्यों लिखा।

पूर्व महापौर ने लिखा पत्र
 पूर्व महापौर सुभाष शर्मा ने निगमायुक्त दलीप कुमार व महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल के नाम पत्र लिखा है। हालांकि पत्र में तारीख तो ठीक है,लेकिन 2025 लिख दिया। इस पर ट्रोल भी हुए। पत्र में उल्लेख किया कि शिप्रा डेम से इंदौर के अन्य क्षेत्रों को पानी देने की योजना पर काम हो रहा है। इसके बाबद देवास नगर निगम से एनओसी या अनुमति मांगी गई है।

बढ़ते हुए देवास शहर को पेयजल देने के साथ ही इंडस्ट्रीज में भी शिप्रा डेम में वाटर सप्लाय होता है। पहले भी आसपास के कई गांवों से मांग आई थी कि हमें पानी दिया जाए, लेकिन डेम की क्षमता देखते हुए ज्यादा पानी स्टोर नहीं किया जा सकता। इसलिए डेम से दूसरे स्थानों को पानी देने से सारी व्यवस्था चौपट हो जाएगी। इंदौर जिले के गांवों में इंदौर नगर निगम या नर्मदा माइक्रो से पानी दिया जा सकता है।

पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने भी फेसबुक पर पोस्ट लिखी
इंदौर निगम की सीमा देवास नाका तक है, जो मांगलिया से दो किमी दूर ही है। इसलिए इस प्रस्ताव को निरस्त किया जाए। एमआईसी प्रस्ताव पास करती है तो विशेष सम्मेलन बुलाकर पक्ष-विपक्ष से विचार-विमर्श कर ही निर्णय लें। पूर्व महापौर शरद पाचुनकर ने भी फेसबुक पर पोस्ट लिखी। कहा कि चालीस-पचास सालों के संघर्ष के बाद हमारे कार्यकाल में शिप्रा डेम की सौगात मिली थी। इसके जल का उपयोग स्थानीय लोगों के लिए करना होगा, दूसरे शहर या गांवों के लिए नहीं। वरना जनता को परेशान होना पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष अहिल्या पंवार ने भी उक्त निर्णय के विरोध में पत्र लिखा है।

विधायक को संज्ञान में लेना चाहिए
सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी ने कहा कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है क्योंकि महापौर से मेरी बात ही नहीं हो पाती है। यदि ऐसा हो रहा है तो विधायक को संज्ञान में लेना चाहिए। देवास में खुद ही जलसंकट है, एेसे में यहां का पानी कहीं और देना देवास की जनता के साथ अन्याय होगा। एेसा निर्णय होता है तो मैं विरोध करूंगा। देवास की जनता के साथ खडा़ हूं। फिलहाल आधिकारिक रूप से मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

कांग्रेस ने चलाया हस्ताक्षर अभियान
घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार को हस्ताक्षर अभियान चलाया। कांग्रेस नेता पं. रितेश त्रिपाठी के नेतृत्व में खेड़ापति मंदिर के बाहर कांग्रेसजन एकत्र हुए। यहां एमआइसी के निर्णय के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया। पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह अभियान निरंतर चलेगा। त्रिपाठी ने बताया कि एमआइसी ने गलत निर्णय लिया है। देवास के हिस्से का पानी दूसरे जिले के गांवों को देना गलत है।

उज्जैन में ‘नर्मदा-गंभीर परियोजना’ की टेस्टिंग शुरू, 914 गांवों को मिलेगा पानी

 उज्जैन
 मालवांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट काे स्थायी रूप से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भूमिपूजित 1275 करोड़ रुपये की ‘नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना’ अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।

उज्जैन के गंभीर बांध पर नया विशाल इंटकवेल और झिरन्या गांव में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया है। सिस्टम की मजबूती जांचने के लिए जल निगम ने अब जलप्रदाय का परीक्षण (टेस्टिंग) भी प्रारम्भ कर दिया है। अब केवल बची हुई पाइपलाइन जोड़ने का काम शेष है। अफसर से पूछा गया कि घर-घर पानी नियमित रूप से कब से मिलेगा, इस पर जवाब मिला- बहुत जल्द।

तस्वीरें दे रही हैं गवाही, ढांचागत काम लगभग पूरा
योजना के धरातल पर आने की तस्वीर इन दो निर्माण कार्यों से साफ देखी जा सकती है। पहली तस्वीर घटि्टया विकासखंड के ग्राम झिरन्या (उन्हेल रोड) में बने अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) की है, जिसका काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं दूसरी तस्वीर गंभीर बांध के जल भंडारण क्षेत्र में बने नए विशाल इंटकवेल की है, जो पानी की लिफ्टिंग के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है।

परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर जब मध्य प्रदेश जल निगम के अधिकारियों से बात की गई, तो उनका कहना है कि योजना के मुख्यतः समस्त अवयव जैसे—इंटेक वेल, जल शोधन संयंत्र, एम बी आर (मास्टर बैलेंसिंग रिज़ैवर), आई पी एस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन) और टंकियां इत्यादि लगभग पूर्ण हो गए हैं। अफसरों के मुताबिक, अब केवल कुछ पाइपलाइन बिछाने और जोड़ने का कार्य ही शेष बचा है, जिसे बहुत शीघ्रता से पूर्ण किया जा रहा है।

2023 में हुआ था प्रोजेक्ट शुरू, 2025 में हो जाना था पूरा
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का जमीनी स्तर पर काम सितंबर-2023 में शुरू हुआ था। काम शुरू होने के चार महीने बाद 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विधिवत भूमि पूजन किया था। जल निगम ने इस काम को पूरा करने की अंतिम तारीख 7 नवंबर 2025 तय की थी।

गंभीर बांध के पास 20 मीटर गहरा और 14 मीटर व्यास वाला इंटकवेल, पंप हाउस तो समय पर आकार ले चुका था मगर परियोजना की असली रीढ़- झिरन्या का जल शोध संयंत्र और ग्रामीण इलाकों में आंतरिक पाइपलाइन बिछाने तथा पानी की टंकियों का निर्माण कार्य सबसे अधिक लंबित रहा। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में 1856 करोड़ रुपये की नर्मदा–शिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना की पाइपलाइन भी बाधा बनी।

‘नर्मदा-गंभीर परियोजना’ के लटकने से उन हजारों ग्रामीण परिवारों का इंतजार लंबा हुआ है, जो बरसों से घरों में नर्मदा जल आने की आस लगाए बैठे हैं। योजना के तहत दो जिलों (उज्जैन के 830 और इंदौर के देपालपुर विकासखंड के 84) के कुल 914 गांवों में घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना है।

ग्वालियर में सजेगा IPL फैन पार्क, बड़ी स्क्रीन पर लाइव मैच के साथ मस्ती का डबल डोज

ग्वालियर 

 ग्वालियर में शुक्रवार को आईपीएल के इस सीजन के फ़ैनपार्क का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आईपीएल क्रिकेट के फैन्स यहाँ बैठे-बैठे स्टेडियम के माहौल का मजा लेंगे. आईपीएल फैन पार्क की व्यवस्थाओं और तैयारियों की जानकारी बीसीसीआई की और से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। 

ग्वालियर में शुक्रवार को होगा आईपीएल फैन पार्क का आयोजन
देश चार अन्य शहरों के साथ ग्वालियर में शुक्रवार को बीसीसीआई द्वारा आईपीएल फैन पार्क का आयोजन किया जा रहा है. ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम के पास बने श्रीमंत माधवराव खेल परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन होगा. जिसमें एक बड़ी स्क्रीन पर आईपीएल क्रिकेट के दीवाने लाइव मैच का प्रसारण देख सकेंगे. इसके साथ ही यहाँ आईपीएल फैन्स के लिए कई तरह की एक्टिविटीज भी होंगी। 

एंट्री फ्री लेकिन रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीसीसीआई के सीनियर मैनेजर संदीप वागड़े ने बताया, हर सीजन में बीसीसीआई की और से 50 फैन पार्क आयोजित किए जाते हैं. इस हफ्ते शुक्रवार को ये आयोजन ग्वालियर समेत देश के पाँच शहरों में होगा. शुक्रवार को राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच होने वाले प्लेऑफ मैच का सीधा प्रसारण एक बड़ी स्क्रीन के साथ फैन पार्क में किया जाएगा जहाँ आने वाले सभी क्रिकेट फैन्स इसका लुत्फ उठा सकेंगे. इसमें एंट्री पूरी तरह फ्री रहेगी हालांकि इसके लिए आने वाले क्रिकेट प्रेमियों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 

लॉटरी से मिलेगा आईपीएल टीम की सिग्नेचर की गई टीशर्ट जीतने का मौका
रजिस्ट्रेशन के साथ ही एंट्री करने वालों को एक कूपन दिया जाएगा जो अंदर रखे बॉक्स में सबमिट करना होगा. ब्रेक टाइम में बीसीसीआई की टीम उस बॉक्स में से दो कूपन्स निकालेगी. इन विजेताओं को राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस दोनों टीमों की टी-शर्ट दी जाएगी जिन पर पूरे टीम प्लेयर्स के सिग्नेचर होंगे। 

फन इवेंट होगा आईपीएल का फ़ैनपार्क
ये फ़ैनपार्क एक फ़न इवेंट होगा जहाँ आने वाले लोगों को कई तरह की एक्टिविटीज भी मिलेंगी जिनमे बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए कई तरह के गेम्स होंगे. फूड स्टॉल्स होंगे, मैच का लाइव प्रसारण तो होगा ही, साथ ही लाइव म्यूजिक भी होगा. एक तरह से जैसे स्टेडियम में बैठ कर लोग क्रिकेट का मजा लेते हैं ठीक उसी तरह इस फैन पार्क में आने वाले लोगों को भी वहीं आनंद और माहौल मिलेगा जो मैच का मजा बढ़ा देगा। 

12 हज़ार लोग एक साथ उठायेंगे आईपीएल का आनंद
बीसीसीआई के सीनियर मैनेजर संदीप वागड़े के मुताबिक, एंट्री के साथ ही फैन्स के लिए सभी सुविधाओं और सुरक्षा का ध्यान भी रखा जा रहा है. सुरक्षाकर्मियों के साथ ही किसी तरह की मेडिकल इमरजेंसी के एक एंबुलेंस वाहन मौजूद रहेगी. इस फैनपार्क में लगभग 12 हज़ार लोग एक समय पर मौजूद रह कर आईपीएल का आनंद ले सकेंगे। 

भोपाल में STF की बड़ी कार्रवाई, डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप बरामद; 10 लोग हिरासत में

भोपाल 

भोपाल के गांधी नगर से करीब डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप पकड़ा गया है। यह कार्रवाई एसटीएफ ने डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में की। एसटीएफ ने यहां से 700 से ज्यादा पेटियां और मशीनें जब्त की। इसके अलावा 10 लोगों को हिरासत में लिया है। कार्रवाई गुरुवार रात करीब 12 बजे शुरू हुई, जो शुक्रवार सुबह 3 बजे तक जारी रही।

जानकारी के अनुसार, मकान में ‘आफ कफ’ नाम की अवैध कफ सिरप तैयार की जा रही थी। गुप्त सूचना पर एसटीएफ ने यहां दबिश दी। मकान के दो अलग-अलग कमरों में नशीले कफ सिरप के कॉर्टन और बोतलें रखी हुई मिलीं। एसटीएफ ने कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। आरोपियों की निशानदेही पर आगे भी कार्रवाई जारी है।

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि गांधीनगर इलाके से अवैध रूप से नशीले कफ सिरप की सप्लाई की जा रही है। छापे की जानकारी स्थानीय गांधीनगर पुलिस को नहीं थी कार्रवाई के दौरान एसटीएफ के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे।

जिस मकान में कार्रवाई की गई, वह किसी मालवीय नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है। खबर लिखे जाने तक एसटीएफ का मकान मालिक से संपर्क नहीं हो सका था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध कफ सिरप का नेटवर्क किन लोगों से जुड़ा हुआ है और इसकी सप्लाई किन क्षेत्रों में की जा रही थी।

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत की पत्नी की तबीयत बिगड़ी, नागदा में चल रहा इलाज

उज्जैन 

कर्नाटक के राज्यपाल और पूर्व केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। गुरुवार को पत्नी की तबीयत बिगड़ने की खबर लगते ही थावरचंद गहलोत अपने घर उज्जैन के नागदा पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि थावरचंद गहलोत की बीमार पत्नी का घर पर ही डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा है। वहीं थावरचंद गहलोत के अचानक नागदा पहुंचने पर राजनीतिक हलकों में अटकलें लगना शुरू हो गई हैं।

थावरचंद गहलोत की पत्नी की तबीयत बिगड़ी
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत की पत्नी अनीता गहलोत की तबीयत गुरुवार को अचानक बिगड़ गई। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत नागदा के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज किया। अभी अनीता गहलोत का घर पर ही डॉक्टरों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है। बताया गया है कि अनीता गहलोत का ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था।

मुंबई से नागदा पहुंचे थावरचंद गहलोत
जिस वक्त नागदा में अनीता गहलोत की तबीयत बिगड़ी उस वक्त थावरचंद गहलोत मुंबई में थे। जब उन्हें पत्नी की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो वो तुरंत मुंबई से सीधे उज्जैन पहुंचे और फिर वहां से नागदा स्थित अपने घर। अनीता गहलोत की तबीयत बिगड़ने की खबर लगते ही थावरचंद गहलोत के घर के बाहर मीडिया का जमावड़ा लग गया। पत्नी का हालचाल जानने के बाद थावरचंद गहलोत कुछ पर रुके और फिर कर्नाटक के लिए रवाना हो गए।

राज्यपाल की गैर मौजूदगी में कर्नाटक में सीएम का इस्तीफा
उधर कर्नाटक में राज्यपाल थावरचंद गहलोत की गैरमौजूदगी में बड़ा सियासी घटनाक्रम हुआ। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले सीएम सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा था लेकिन राज्यपाल के बेंगलुरू से बाहर होने के कारण उन्हें समय नहीं मिला था। अब खबरें हैं कि सिद्धारमैया राज्यपाल दफ्तर को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। जिसे राज्यपाल बाद में स्वीकार कर सकते हैं।

थावरचंद गहलोत के दामाद ने छोड़ी कांग्रेस
पांच दिन पहले 23 मई को थावरचंद गहलोत के दामाद विशाल मालवीय ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। विशाल मालवीय थावरचंद गहलोत के दामाद होने के साथ ही मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री रहे राधाकिशन मालवीय के पोते हैं। विशाल वर्तमान में इंदौर जनपद पंचायत में सदस्य हैं और देवास-शाजापुर से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले राजेंद्र मालवीय के बेटे हैं। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद विशाल मालवीय ने प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी (jitu patwari) की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था- जो लोग केवल नेताओं के आगे पीछे घूमकर व्यक्तिगत लाभ साधने में लगे हैं, उन्हें संगठन में पद व प्रतिष्ठा प्रदान की जा रही है। वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार उपेक्षित कर हाशिये पर धकेला जा रहा है। संगठन में आज स्वयं को उपेक्षित व असहज महसूस करना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।

हवालात में बेचैन रही गिरिबाला सिंह और समर्थ, भविष्य की चिंता में गुजरी रात; आज कोर्ट में पेशी

भोपाल 

एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने उसकी सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप है। सीबीआई ने लगातार तीन दिन तक पूछताछ, स्पॉट वेरिफिकेशन और सबूतों की जांच के बाद यह कार्रवाई की है।

गिरिबाला को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। सीबीआई ने 25 मई की रात इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज की थी। 26 मई को सीबीआई की टीम पहली बार बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित गिरिबाला सिंह के घर पहुंची थी। यहां अधिकारियों ने करीब दो घंटे तक पूछताछ की।

टीम ने ट्विशा शर्मा की मौत वाली रात की परिस्थितियों, घर में मौजूद लोगों की गतिविधियों और घटना के बाद की गई कार्रवाई को लेकर जानकारी भी हासिल की। ट्विशा के पति समर्थ सिंह को सीबीआई पहले ही रिमांड पर ले चुकी है। सूत्रों का कहना है कि अब समर्थ और गिरिबाला को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी।

सीबीआई अब टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। एजेंसी ट्विशा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की हर गतिविधि को मिनट-टू-मिनट समझा जा सके।

डिजिटल एविडेंस का इन्वेस्टिगेशन कर रही CBI
28 मई की सुबह साढ़े 10 बजे सीबीआई की टीम एक बार फिर गिरिबाला सिंह के घर पहुंची। 7 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार पूछताछ की गई। इस तरह तीन दिन में करीब 10 घंटे चले सवाल-जवाब में सीबीआई ने पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया।

स्पॉट वेरिफिकेशन के दौरान जांच एजेंसी को ऐसे संकेत मिले, जिनसे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका मजबूत हुई। इसी आधार पर गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया।

सीबीआई अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और डिजिटल एविडेंस का इन्वेस्टिगेशन कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि घटना की रात किन लोगों से संपर्क किया गया था और मौत के बाद घटनास्थल पर क्या बदलाव किए गए?

सवाल में फंसी गिरिबाला सिंह

 ट्विशा शर्मा केस में पूर्व जज गिरिबाला सिंह कानूनी शिकंजे में बुरी तरह से फंस चुकी हैं। गुरुवार को गिरफ़्तारी के बाद उन्हें बेटे समर्थ सिंह के साथ सीबीआई की हवालात में रखा गया। आज गिरिबाला सिंह को सीबीआई, कोर्ट में पेश करेगी। पूर्व जज, ट्विशा शर्मा केस की जांच कर रहे अधिकारियों के सवालों में घिरीं हैं। सीबीआई उनसे प्रमुख रूप से यह जानना चाह रही है कि फांसी लगाने और एम्स ले जाने के बीच ट्विशा के साथ क्या हुआ! उसके शरीर पर 6 चोटें कैसे आईं। गिरिबाला सिंह अधिकारियों के सामने पुराने बयान ही दोहरा रही हैं लेकिन सीबीआई को इस पर भरोसा नहीं हो रहा।

सीबीआई ने मामले की जांच तेज कर दी है। सोमवार की रात को दिल्ली से आकर नई एफआईआर दर्ज कराने के बाद से ही टीम लगातार सक्रिय है। इस दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियोें ने केस के हर पहलू को खंगालने की कोशिश की है। जांच अधिकारियों के अनुसार चार दिनों में ही टीम को कई अहम सबूत हासिल हो चुके हैं।

बहू की संदिग्ध मौत के केस के संबंध में सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घरेलू कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई। सीबीआई के जांच अधिकारियों ने समर्थ के उस चचेरे भाई स्वराज को भी तलब किया, जिसने वारदात के बाद कथित तौर पर ट्विशा शर्मा को फंदे से उतारने में मदद की थी।

 हवालात में रातभर बेचैन रहे समर्थ और गिरिबाला सिंह

 भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह भी सीबीआई की हवालात में पहुंच चुकी हैं। अपनी बहू मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआइ ने उन्हें गुुरुवार को गिरफ़्तार कर लिया था। बुधवार देर रात ही हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद गुरुवार सुबह सीबीआई टीम उनके घर पहुंची और ट्विशा की मौत से जुड़े कई सवाल पूछे। कई घंटों तक चली पूछताछ के बाद घटना के 17वें दिन पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया। सीबीआइ उन्हें मैनिट में तैयार कैंप ऑफिस ले गई। यहीं मेडिकल जांच कराई। बाद में सीबीआइ ऑफिस ले गई। केस के लिए सीबीआइ ने भोपाल दफ़्तर से अलग मैनिट गेस्ट हाउस को कैंप ऑफिस बनाया है। अब शुक्रवार को सीबीआइ स्पेशल कोर्ट में पेश कर गिरिबाला सिंह को रिमांड पर लेगी। ट्विशा शर्मा केस में समर्थ सिंह और पूर्व जज गिरिबाला सिंह अब बुरी तरह फंस गए हैं। भविष्य की चिंता ने मां बेटे को बेचैन कर दिया है।

सीबीआइ की टीम सुबह 10.30 बजे ट्विशा के आरोपी पति समर्थ सिंह को लेकर उसके घर पहुंची। यहां सास गिरिबाला सिंह, चचेरे भाई स्वराज और अन्य लोगों से 7 घंटे पूछताछ की। इसके बाद शाम 5.15 बजे गिरिबाला को गिरफ़्तार कर लिया।

आईसेक्ट इंडिया ने एमपीएल टीम रॉयल निमाड़ ईगल्स का किया भव्य लॉन्च, खेल प्रतिभाओं के सम्मान के साथ सामाजिक पहलों की घोषणा

आईसेक्ट इंडिया ने एमपीएल टीम “रॉयल निमाड़ ईगल्स” का किया भव्य लॉन्च, खेल प्रतिभाओं के सम्मान के साथ सामाजिक पहलों की घोषणा

भोपाल
 मध्य प्रदेश लीग (MPL) टी-20 क्रिकेट में वर्ष 2025 में प्रेजेंटिंग स्पॉन्सर के रूप में प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद आईसेक्ट समूह ने इस बार एक निर्णायक कदम उठाते हुए अपनी नई पुरुष एवं महिला क्रिकेट टीम “रॉयल निमाड़ ईगल्स” का भव्य लॉन्च किया। इस अवसर पर आयोजित विशेष मीट एंड ग्रीट कार्यक्रम में खिलाड़ियों, खेल जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों, उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों एवं स्पॉन्सर्स की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान खेल एवं क्रिकेट के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले करीब 10 व्यक्तित्वों एवं टीम के स्पॉन्सर्स का सम्मान किया गया। साथ ही रॉयल निमाड़ ईगल्स की मेंस एवं वूमेंस टीम का भव्य स्वागत किया गया।

इस अवसर पर टीम का विशेष “रॉयल निमाड़ ईगल्स जिंगल” लॉन्च किया गया, जिसने उपस्थित अतिथियों और खेल प्रेमियों में उत्साह का संचार किया। इसके साथ ही टीम की नई जर्सी का अनावरण किया गया। इस दौरान मंच पर आईसेक्ट समूह के चेयरमैन श्री संतोष चौबे, एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी एवं एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पल्लवी राव चतुर्वेदी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में रॉयल निमाड़ ईगल्स की क्रिकेट किट का भी अनावरण किया गया। इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की प्रो. चांसलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी, आईक्यूएसी डायरेक्टर नितिन वत्स, टीम डायरेक्टर जी. सतीश एवं टीम मैनेजर विजय प्रताप मंच पर मौजूद रहे।

आईसेक्ट समूह द्वारा ‘रॉयल निमाड़ ईगल्स’ नाम का चयन केवल एक भौगोलिक संकेत नहीं, बल्कि निमाड़ क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं के प्रति समूह की भावनात्मक प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि का प्रतीक है। अब तक आईसेक्ट समूह रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्याल, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी एवं डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करता रहा है, वहीं अब समूह खेल क्षेत्र में भी प्रतिभाओं को पहचानने, संवारने और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

निमाड़ अंचल, विशेषकर खंडवा एवं आसपास के क्षेत्रों में खेल प्रतिभा सदैव प्रचुर मात्रा में रही है। यहां के युवाओं में स्वाभाविक ऊर्जा, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी जज़्बा दिखाई देता है, लेकिन लंबे समय तक उन्हें संगठित संरचना, पेशेवर मार्गदर्शन और बड़े मंच का अभाव रहा। ‘रॉयल निमाड़ ईगल्स’ इसी सोच का विस्तार है, जो क्षेत्रीय गौरव को पेशेवर उत्कृष्टता से जोड़ने का प्रयास है।

खेल के परिप्रेक्ष्य में ‘ईगल’ धैर्य, रणनीतिक सोच और आक्रामकता के संतुलन का प्रतिनिधित्व करती है। वहीं ‘रॉयल’ शब्द गरिमा, नेतृत्व और श्रेष्ठता का प्रतीक है। टीम का नाम यह संदेश देता है कि सफलता केवल ताकत से नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता से प्राप्त होती है।

टीम चयन के लिए आईसेक्ट समूह द्वारा 24 फरवरी से खंडवा, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और रीवा में ओपन ट्रायल्स आयोजित किए गए, जिनमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ियों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में आईसेक्ट समूह के चेयरमैन श्री संतोष चौबे ने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और आत्मविश्वास का विकास करते हैं। रॉयल निमाड़ ईगल्स केवल एक क्रिकेट टीम नहीं, बल्कि निमाड़ क्षेत्र की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का एक सशक्त मंच बनेगी।
एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा, “आईसेक्ट समूह का यह कदम केवल टीम लॉन्च तक सीमित नहीं है। समूह प्रशिक्षण, फिटनेस, पोषण, विश्लेषण और खेल प्रबंधन को समेकित कर एक स्थायी खेल इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है। इसके लिए स्कोप कैंपस में आधुनिक सुविधाओं से लैस रॉयल ईगल्स क्रिकेट एकेडमी स्थापित की गई है। हम केवल टीम नहीं बना रहे, बल्कि एक ऐसा संरचित इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं जहाँ युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और प्रोफेशनल सपोर्ट मिल सके।”

कार्यक्रम के दौरान आईसेक्ट इंडिया द्वारा एमपीएल के माध्यम से संचालित किए जाने वाले विभिन्न सोशल इनीशिएटिव्स की भी घोषणा की गई। इसके अंतर्गत मैच में प्रत्येक सेंचुरी पर गर्ल्स एजुकेशन और फ्री क्रिकेट किट दिए जाने का इनिशिएटिव लिया गया है।

कार्यक्रम में रॉयल निमाड़ ईगल्स टीम के खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ, खेल जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां, उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

मेंस टीम सदस्य –
रॉयल निमाड़ ईगल्स पुरुष टीम 2026 में कप्तान सारांश जैन एवं उपकप्तान हिमांशु मंत्री के नेतृत्व में मैदान पर उतरेगी। टीम में कुमार कार्तिकेय सिंह, आनंद सिंह बैस, प्रणित पाटीदार, पारुष मंडल, पुष्कर विश्वकर्मा, प्रारब्ध वी. मिश्रा, शिवांश चतुर्वेदी, कनिष्क दुबे, धर्मेश पटेल, कार्तिक राजोरिया, शांतनु रघुवंशी, अयान श्रीराज, अभिषेक मावी, देवेंद्र सिंह कठैत एवं शशांक पाटीदार जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हैं।

वूमंस टीम सदस्य –
रॉयल निमाड़ ईगल्स महिला टीम 2026 में कप्तान निकिता सिंह के नेतृत्व में मैदान पर उतरेगी। टीम में वैष्णवी शर्मा, यामिनी बिल्लोरे, कल्याणी जादव, सोनिया सिंह, तनिष्का सेन, दीप्ति सिंह, हर्षिता सिंह, ऋषिता जैन, खुशी यादव, जानवी राय, लक्ष्यिता माहेश्वरी, मुस्कान योगी, राशि सोनी एवं सलोनी पासवान जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हैं।

MP Weather Update: ग्वालियर-मुरैना में बारिश, 6 जिलों में लू और आंधी-ओलों का अलर्ट

ग्वालियर

मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। ग्वालियर में शुक्रवार सुबह 6 बजे से रुक-रुक कर, जबकि मुरैना जिले में तेज बारिश हुई।

अचानक बदले मौसम से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। बता दें कि गुरुवार को भी दमोह समेत कई जिलों में ओले गिरे और बारिश हुई।

मौसम विभाग ने शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, वहीं भोपाल, जबलपुर समेत 27 जिलों में हीटवेव का येलो अलर्ट है। यहां पारा 43 डिग्री के ऊपर ही रहेगा।

प्रदेश के 10 शहरों में पारा 45 डिग्री पार…खजुराहो सबसे गर्म
25 मई से नौतपा की शुरुआत हुई है। इसके पहले दिन से ही प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। 18 मई से खजुराहो-नौगांव सबसे गर्म बने हुए हैं। इस अवधि में यहां अधिकतम तापमान रिकॉर्ड 47 डिग्री के पार पहुंच गया।

नौतपा के चौथे दिन गुरुवार को मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर देखने को मिला। 10 शहर ऐसे रहे, जहां पारा 45 डिग्री या इसके पार पहुंच गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री दर्ज किया गया।

राजगढ़ में 46 डिग्री, दतिया में 45.7 डिग्री, नौगांव, दमोह-मलाजखंड में 45.5 डिग्री, टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री, सतना में 45.1 डिग्री, मंडला-सागर में 45 डिग्री रहा।

इसी तरह गुना में 44.7 डिग्री, श्योपुर में 44.6 डिग्री, रायसेन में 44.2 डिग्री, रीवा-छिंदवाड़ा में 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में सबसे ज्यादा 44.7 डिग्री, जबलपुर में 44 डिग्री, भोपाल में 43.8 डिग्री, इंदौर में 41.8 डिग्री और उज्जैन में पारा 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu