नौतपा के बीच मौसम का यू-टर्न! 29 मई से MP में आंधी-बारिश का अलर्ट, गर्मी होगी गायब

भोपाल
 पूरे देश में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. हर कोई बारिश का इंतजार कर रहा है. इसी बीच मौसम विभाग से भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अनुमान है कि 29 मई से मध्य प्रदेश में प्री मानसून की दस्तक दे सकता है. भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

29 मई से प्री मासनून की बारिश
प्री मानसून सबसे पहले केरल में दस्तक देगा. वहीं 29 मई को प्री मानसून के मध्य प्रदेश में पहुंचने के स्ट्रॉन्ग चांसेस हैं. जिससे प्रदेश के कई इलाकों में तेज आंधी और हवाएं चलेंगी. भोपाल सहित कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग का कहना है कि, प्रदेश के चंबल इलाके के ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, दतिया, भिंड, दतिया, शिवपुरी में बारिश होगी. वहीं टीकमगढ़, निवाड़ी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट में भी बारिश हो सकती है. बारिश होने से तापमान में भी गिरावट आएगी. पारा 2 से 3 डिग्री नीचे जाने का अनुमान है।

​आगामी दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ”मध्य प्रदेश में मानसून आमतौर पर 15 जून के आसपास पहुंचना शुरू होता है और 22 जून तक ग्वालियर-चंबल के कुछ इलाकों को छोड़कर ज्यादातर जिलों में पहुंच जाता है. 7-8 जून के बाद प्रदेश में जो बारिश शुरू होगी, उसे प्री-मानसून गतिविधि कहा जाता है. ऐसे में माना जा रहा है की 29 मई से प्री मानसून की गतिविधियां शुरु हो सकती हैं।

भीषण गर्मी से जूझ रहा मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में नौतपा की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी की शुरुआत हो गई है. मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं और आगामी दिनों में राहत के आसार फिलहाल कम दिख रहे हैं. प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है।

जल्द मिलेगी नौतपा की गर्मी से राहत
रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी में तीव्र हीटवेव का असर रहेगा. वहीं टीकमगढ़ में दिन में हीट वेव के साथ वार्म नाईट और छिंदवाड़ा में हीट वेव के साथ वार्म नाईट की चेतावनी जारी की गई है. इनके साथ ही शिवपुरी, भिंड, मुरैना और श्योपुरकलां में भी सीवियर हीट वेव चलेगी, जबकि ग्वालियर और दतिया में वार्म नाईट के साथ के साथ तीव्र हीट वेव का प्रभाव रहेगा।

आगामी दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी
​प्रदेश में तीव्र हीटवेव को देखते हुए मौसम विभाग ने आगामी दो से तीन दिनों के लिए कई जिलों में हीट वेव और सीवियर हीट वेव का अलर्ट जारी किया है. इनमें टीकमगढ़, निवाड़ी, पन्ना, सतना और भिंड जैसे जिलों के लिए रेड और आरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इसके साथ ही सागर, विदिशा, राजगढ़, रायसेन, दमोह, कटनी, सीधी और सिंगरौली सहित कई अन्य जिलों में भी गुरुवार और शुक्रवार को भी भीषण गर्मी जारी रहने की संभावना है।

भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन पर संकट! भदभदा-भेल रूट में अटकी रफ्तार, 2028 डेडलाइन पर खतरा

भोपाल
शहर को आधुनिक यातायात व्यवस्था से जोड़ने के लिए तैयार की जा रही मेट्रो की ‘ब्लू लाइन’ (भदभदा से रत्नागिरी-भेल) का काम तेजी से आगे तो बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई ऐसी अड़चनें सामने आने लगी हैं जो इसकी रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। अधिकारियों ने पहले इस लाइन को ऑरेंज लाइन (एम्स से करोंद) से पहले पूरा करने के संकेत दिए थे, मगर अब इसके दिसंबर 2028 के टारगेट टाइमलाइन पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं।

जमीन के नीचे छिपी चुनौतियां
मेट्रो रूट पर अंडरग्राउंड पाइपलाइनों और अन्य यूटिलिटी नेटवर्क को शिफ्ट करने में काफी वक्त लग रहा है। इसके चलते कई इलाकों में ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भदभदा और जवाहर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में संकरी सड़कों के कारण ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा है, जिससे रोजाना लंबा जाम लग रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आने वाले मानसून सीजन में ये मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। निर्माण स्थलों के पास उड़ती धूल और ध्वनि प्रदूषण ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

मेट्रो परियोजना का मकसद सिर्फ तेज सफर कराना नहीं है, बल्कि शहरी गतिशीलता को बदलना और ट्रैफिक के दबाव को स्थायी रूप से कम करना है। जहां भी एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहे हैं, वहां सड़कों को दो से तीन मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है ताकि भविष्य में ट्रैफिक सुगम हो सके।

क्या ऑरेंज लाइन से सबक लेगा प्रबंधन?
सड़क किनारे काम कर रहे न्यू मार्केट के व्यापारियों को डर है कि अगर काम में लंबा खिंचाव हुआ तो व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर को ही बनने में 5 साल से अधिक का समय लग गया और पूरी लाइन अब भी अधूरी है। ऐसे में ब्लू लाइन के टुकड़ों-टुकड़ों में हो रहे निर्माण से डेडलाइन टूटने का जोखिम बढ़ गया है।

काटे गए दशकों पुराने पेड़

झीलों के शहर भोपाल में विकास की रफ्तार अब पेड़ों पर भारी पड़ने लगी है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के ब्लू लाइन एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता साफ करने के लिए ऐतिहासिक मिंटो हॉल यानी पुरानी विधानसभा के ठीक सामने लगे दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया है।

मुसाफिरों का आसरा खत्म
ये पेड़ महज हरियाली का हिस्सा नहीं थे, बल्कि पास के व्यस्त बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों के लिए तपती गर्मियों में कुदरती छतरी का काम करते थे। अब वहां सिर्फ सन्नाटा और कंक्रीट का मलबा नजर आता है।

‘सब नियमों के तहत हुआ’
पेड़ों की कटाई को लेकर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि यह काम जरूरी था। एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए खाली जगह की जरूरत होती है। अफसरों के मुताबिक, पेड़ों को काटने के लिए सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां ली गई थीं। नुकसान की भरपाई के लिए अब कैपिटल प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेशन को दोबारा पौधारोपण की जिम्मेदारी दी गई है।

ब्लू लाइन प्रोजेक्ट: एक नजर में
यह कटाई 12.9 किलोमीटर लंबे ब्लू लाइन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह लाइन भदभदा चौराहे से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहे तक जाएगी।

 

कॉरिडोर का नाम       ब्लू लाइन (Blue Line)
कुल दूरी                   12.9 किलोमीटर
स्टेशनों की संख्या     13 एलिवेटेड स्टेशन
समय सीमा               2025 में काम शुरू, 3 साल का लक्ष्य
रूट                        भदभदा से रत्नागिरी तिराहा

विकास बनाम पर्यावरण
पर्यावरणविदों का मानना है कि भले ही काटे गए पेड़ों की संख्या कम हो, लेकिन ऐतिहासिक इमारतों के पास से हरियाली का गायब होना चिंताजनक है। यह मामला एक बार फिर शहर के बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच के तनाव को उजागर करता है। जहां एक ओर मेट्रो शहर में यातायात को आधुनिक बनाएगी, वहीं दूसरी ओर पुराने पेड़ों के कटने से भोपाल की ग्रीन सिटी वाली छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

गुना के डायल-112 हीरोज सड़क दुर्घटना में घायल दो बुजुर्ग व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

गुना जिले के थाना राघौगढ़ क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दो बुजुर्ग व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से दोनों घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।

27 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना राघौगढ़ क्षेत्र अंतर्गत वृंदावन होटल के सामने ए.बी. रोड पर एक मोटर साइकिल दुर्घटनाग्रस्त हो गई है, जिसमें 02 व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना राघौगढ़ क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक शशि कपूर राजावत एवं पायलट रवि शर्मा ने मौके पर पहुँचकर पाया कि सड़क पर अचानक सामने आई गाय को बचाने के प्रयास में मोटर साइकिल अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना में मोटर साइकिल सवार दो बुजुर्ग व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को सुरक्षित डायल 112 वाहन की सहायता से तत्काल अस्पताल पहुँचाया।

डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से दोनों बुजुर्गों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। इस मानवीय सहायता के लिए परिजनों एवं स्थानीय नागरिकों ने डायल-112 टीम का आभार व्यक्त किया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मृत पाये गए नर बाघ का हुआ पोस्टमॉर्टम

भोपाल 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया अंतर्गत पनपथा बफर क्षेत्र के ग्राम खेरवा टोला में 24 मई 2026 को मृत पाए गए नर बाघ का पोस्टमॉर्टम 25 मई 2026 को किया गया। पोस्टमॉर्टम 3 वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल और 2 आमंत्रित विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ। पोस्टमॉर्टम में बाघ के सभी अंगों का गहन परीक्षण किया गया और आवश्यक नमूने संग्रहित किए गए। पोस्टमॉर्टम में एकत्रित नमूनों को बीमारी, अन्य आंतरिक रोगों, तनाव अथवा विषाक्तता जैसी संभावनाओं की जांच के लिए मानक प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। पोस्टमॉर्टम में डायरेक्टर, स्टेट वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक हेडक्वार्टर (एसडब्ल्यूएफएच) जबलपुर, क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व तथा एनटीसीए के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।

पोस्टमॉर्टम के बाद क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एवं एनटीसीए प्रतिनिधि की उपस्थिति में 25 मई 2026 को जबलपुर में बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

पोस्टमॉर्टम में चिकित्सकों और विशेषज्ञों के पैनल ने पाया कि मृत नर बाघ का स्वास्थ्य अत्यंत खराब था। उसकी मांसपेशियां पीली एवं सूखी थीं, पाचन तंत्र खाली था और त्वचा खुरदरी और बेजान हो चुकी थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ट्रैंक्विलाइज़र डार्ट दाहिने कंधे पर लगा था, जहां रक्तस्राव नहीं पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि डार्ट बाघ की मृत्यु के बाद लगाया गया था। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में ‘कंजेस्टिव एवं हेमरेजिक’ परिवर्तन पाए गए, जो कमजोर रक्त संचार के संकेतक हैं। पोस्टमॉर्टम करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार बाघ की मृत्यु कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर के कारण हुई होगी।

 

भोपाल में चार्जिंग पर लगा मोबाइल बना साइबर ठगी का जरिया, खाते से उड़े ₹1 लाख

भोपाल

ऐशबाग में रहने वाले एक ऑटो इलेक्ट्रिक वर्कशाप संचालक साइबर ठगी का शिकार हो गए। अज्ञात साइबर जालसाजों ने उनका मोबाइल हैक कर बैंक खाते से एक लाख रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चार्जिंग पर लगे मोबाइल का लॉक हुआ था हैंग

ऐशबाग थाना प्रभारी संदीप पवार के अनुसार अफाक कालोनी, बाग फरहत अफजा निवासी मोहम्मद शरीफ (39) गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में ऑटो इलेक्ट्रिक वर्कशाप संचालित करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 24 मई को उनका मोबाइल घर पर चार्जिंग पर लगा था।

घर से निकलते समय जब उन्होंने मोबाइल उठाया तो स्क्रीन लॉक नहीं खुल रहा था। कई बार प्रयास करने के बाद मोबाइल चालू हुआ और उन्होंने सामान्य रूप से फोन का उपयोग भी किया।

बिना ओटीपी और बिना संदिग्ध लिंक के हुई ठगी

इसी दौरान सुबह करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर सेंट्रल बैंक खाते से एक लाख रुपए डेबिट होने का संदेश मिला। रकम किसी अज्ञात खाते में ट्रांसफर की गई थी।

पीड़ित के अनुसार उन्होंने न तो कोई संदिग्ध लिंक या एपीके फाइल डाउनलोड की थी और न ही किसी को ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा की थी। उन्हें शंका है कि मोबाइल हैक कर साइबर ठगी की गई है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत व पारदर्शी बनाने पर जोर

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं, अधोसंरचना विकास एवं मानव संसाधन संबंधी विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिये विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती, नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति, चिकित्सालयों के संधारण एवं रख-रखाव, सागर स्थित कैंसर हॉस्पिटल के लिये पदों की स्वीकृति, प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण (लैब स्ट्रेंदनिंग) और स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने संबंधी विषयों की समीक्षा की गई।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि अंडर सर्व्ड एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिससे अंतिम पंक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने कहा कि केवल चिकित्सकों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता भी सशक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में प्रभावी एवं ठोस प्रयास किए जाएँ।

सीएम केयर्स के अंतर्गत अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) से जुड़े प्रकरणों में अतिरिक्त व्यय की प्रतिपूर्ति संबंधी विषय पर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि जरूरतमंद मरीजों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने के लिये आवश्यक प्रावधान किए जाएँ।उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार पैकेज को शामिल किए जाने के लिये आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे कैंसर रोगियों को उपचार में अधिक आर्थिक सहायता मिल सके और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक उनकी पहुँच आसान हो।

स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सहज एवं संवेदनशील बनाए

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विभागीय स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सहज एवं संवेदनशील बनाए जाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही गंभीर बीमारी, पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पदस्थापना, दिव्यांग आश्रित, विधवा एवं परित्यक्ता जैसे संवेदनशील प्रकरणों को स्थानांतरण प्रक्रिया में प्राथमिकता प्रदान की जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

धरती की बुझी प्यास से दक्षिण पन्ना की झिरियों में फिर लौटी जैव-विविधता

भोपाल

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में स्थित रामडोल की झिरिया एवं दाने बाबा की झिरिया में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्राकृतिक झिरियों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य कराया गया। इसके परिणामस्वरूप इन झिरियों को पुनर्जीवन मिला और भीषण गर्मी में भी इनमें जल बना हुआ है। इससे झिरियों के आसपास के वन क्षेत्रों में वन्य पक्षियों की वापसी हुई है तथा क्षेत्र की जैव-विविधता पुनर्जीवित हो उठी है।

प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते अब शहद से भरे दिखाई दे रहे हैं। पक्षियों के घोंसले फिर आबाद हो गए हैं और अन्य वन्यजीवों की सक्रियता भी बढ़ी है। वन क्षेत्र में दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल तथा जंगली मुर्गा सहित अनेक पक्षी प्रजातियाँ विहार कर रही हैं। कई पक्षियों के घोंसलों में अंडे भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि यह क्षेत्र अब वन्यजीवों, स्थानीय तथा प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास बन गया है।

स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने बताया कि पिछली गर्मियों तक भीषण गर्मी के दौरान यहां की प्राकृतिक झिरियाँ सूख जाया करती थीं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत वन विभाग ने इन झिरियों की पहचान कर उनकी सफाई और मरम्मत कराई। वन विभाग के प्रयासों से इस वर्ष इन झिरियों में जल निरंतर प्रवाहित हो रहा है। जल स्रोतों से वन्यजीवों और पक्षियों को राहत मिल रही है। साथ ही मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य छोटे जीवों के लिए भी यह वन क्षेत्र महत्वपूर्ण पारिस्थितिक आश्रय बन गया है।

जल संरक्षण और जैव-विविधता संरक्षण का यह समन्वित प्रयास दक्षिण पन्ना वनमंडल में प्राकृतिक संरक्षण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।

 

100 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध हुई 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया।

सतत मॉनिटरिंग

प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी।

किसानों को हुआ 23,708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है।

संभागवार उपार्जन

रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।

 उपार्जन के समुचित प्रबंध

प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया गया। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई थी। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।

 

भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन से मिलेगी वैश्विक पहचान — मंत्री पटेल

भोपाल 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आज का दिन भारत और मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है। यह पावन अस्थि अवशेष न केवल हमारी अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर हैं, बल्कि वैश्विक शांति और सौहार्द के प्रतीक भी हैं। मंत्री पटेल राजा भोज एयरपोर्ट पर भगवान बुद्ध के शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना करने के कार्यक्रम के संबोधित कर रहे थे। मंत्री पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन करने से वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने रेखांकित किया कि भगवान बुद्ध के इन महान शिष्यों की पवित्र अस्थियां संपूर्ण विश्व में केवल तीन देशों—भारत,लंका एवं म्यांमार में ही संरक्षित हैं, जो हमारे प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गौरव की बात है। इससे मंगोलिया सहित सभी देशों के बौद्ध अनुयायी प्रदेश में आने के लिए प्रेरित होंगे।

मंत्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सांस्कृतिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार जन-जन की आस्था और देश के आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि जब वे भारत के संस्कृति मंत्री थे, तब एक विशेष नीति बनाई गई थी कि जिस देश से एक लाख से अधिक पर्यटक भारत आएंगे, वहां उनकी स्थानीय भाषा में साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। इसी नीति के तहतलंका से दो लाख से अधिक पर्यटकों के आगमन पर सांची में उनकी भाषा में साइन बोर्ड लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को सांची और अन्य बौद्ध स्थलों की यात्रा के दौरान सुगमता और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने बल देकर कहा कि सांची केवल अपने पाषाण स्तूपों के कारण विश्व धरोहर स्थल नहीं है, अपितु इन चैतन्य अस्थि अवशेषों की पावन उपस्थिति के कारण वैश्विक श्रद्धा का केंद्र है, जिसके कारण विश्व भर से पर्यटक यहाँ खिंचे चले आते हैं। पूर्व में इन अवशेषों की सफल थाईलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध अत्यंत प्राचीन और प्रगाढ़ हैं, और यह यात्रा इन संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

सांची आध्यात्मिक वैभव का अनुपम खजाना — पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित बौद्ध धर्मगुरु बड़े गुरु पूज्य बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने सांची की महत्ता को बताते हुए कहा कि सांची केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का एक अनमोल खजाना है। बौद्ध जगत में इस स्थान की महिमा अतुलनीय है। उन्होंने पूर्व के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब ये पवित्र अस्थि अवशेष पूर्व में थाईलैंड प्रवास पर गए थे, तब वहां लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) से अधिक श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धाभाव से इनकी पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में इन अवशेषों (रेलिक्स) का स्थान सर्वोपरि है और उन्हें सांची जैसी पवित्र धरा का कस्टोडियन (संरक्षक) बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह विरासत विश्व बंधुत्व की एक अमूल्य निधि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मूल मंत्र ‘विकास भी, विरासत भी’ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय और आध्यात्मिक प्रकल्प संपूर्ण विश्व को यह दिग्दर्शित करते हैं कि भारत आदि काल से विश्वगुरु रहा है और अपनी इसी सांस्कृतिक संपन्नता के कारण सदैव विश्वगुरु के पद पर सुशोभित रहेगा।

कलेक्टर मिश्रा ने अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों को साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ है, जो स्वयं भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल और उनसे जुड़े अत्यंत पवित्र क्षेत्रों से घिरा हुआ है। ऐसे में भोपाल की धरती पर इस पावन विदाई समारोह का साक्षी बनना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस गरिमामयी आयोजन के माध्यम से मध्यप्रदेश की पहचान मध्य एशिया के देश मंगोलिया तक सुदृढ़ रूप से पहुंचेगी। भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रम अन्य देशों के साथ आयोजित किए जाएंगे, जो हमारे प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण हैं क्योंकि मध्यप्रदेश ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध प्रदेश है।

इस गरिमामयी प्रस्थान समारोह में छोटे गुरु पूज्य बानगल विमल तिस्स थेरी, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के संचालक कर्नल यश सक्सेना, संस्कृति विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी राजेश कुमार गुप्ता सहित अनेक प्रबुद्ध जन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी गणमान्य नागरिकों ने मंत्रोच्चार और पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के बीच भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों को मंगोलिया यात्रा के लिए भावभीनी और श्रद्धापूर्वक विदाई दी।

 

 

MP में नौतपा का कहर, 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार

भोपाल

नौतपा के चौथे दिन भी मध्य प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में रहा। प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बड़े शहरों में ग्वालियर का पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग ने प्रदेश के 48 जिलों में हीटवेव और तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिनों में कई जिलों में आंधी और वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार भोपाल में 43.8 डिग्री, जबलपुर में 44 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। इधर, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदला और करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। इसके बाद वर्षा का दौर जारी रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

नौतपा के बीच आंधी-बारिश का भी अनुमान

नौतपा के दौरान इस बार गर्मी के साथ वर्षा और तेज आंधी का असर भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं वर्षा दर्ज की गई है। 29 से 31 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश जिलों में वर्षा और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट

मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली सहित 10 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन, विदिशा और उज्जैन समेत 32 जिलों में येलो अलर्ट जारी है।
लू से बचने के लिए सावधानी जरूरी

मौसम विज्ञानियों ने लोगों को दोपहर 12 से तीन बजे तक घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मई के अंतिम दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और वर्षा का असर बढ़ेगा, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है।

 

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