MP में नौतपा का कहर, 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार

भोपाल

नौतपा के चौथे दिन भी मध्य प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में रहा। प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। खजुराहो सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बड़े शहरों में ग्वालियर का पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग ने प्रदेश के 48 जिलों में हीटवेव और तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के असर से अगले तीन दिनों में कई जिलों में आंधी और वर्षा की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार भोपाल में 43.8 डिग्री, जबलपुर में 44 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री तापमान रिकार्ड किया गया। इधर, दमोह जिले के तेंदूखेड़ा क्षेत्र में गुरुवार शाम अचानक मौसम बदला और करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि हुई। इसके बाद वर्षा का दौर जारी रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

नौतपा के बीच आंधी-बारिश का भी अनुमान

नौतपा के दौरान इस बार गर्मी के साथ वर्षा और तेज आंधी का असर भी देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं वर्षा दर्ज की गई है। 29 से 31 मई के बीच प्रदेश के अधिकांश जिलों में वर्षा और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट

मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं सागर, दमोह, सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली सहित 10 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन, विदिशा और उज्जैन समेत 32 जिलों में येलो अलर्ट जारी है।
लू से बचने के लिए सावधानी जरूरी

मौसम विज्ञानियों ने लोगों को दोपहर 12 से तीन बजे तक घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त पानी पीने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और शरीर को हाइड्रेट रखने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मई के अंतिम दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और वर्षा का असर बढ़ेगा, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है।

 

त्विषा केस में बड़ा एक्शन, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह गिरफ्तार

भोपाल

नोएडा की अभिनेत्री व मॉडल त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में सास रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार शाम को सीबीआई टीम ने उन्हें घर से गिरफ्तार किया।

इसके लिए टीम सुबह 10 बजे घर पहुंच गई थी और करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। सीबीआई ने उन्हें भोपाल के मैनिट स्थित कैंप में रखा है। वहीं, त्विषा के पति समर्थ सिंह को पहले ही सीबीआई रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।

घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और जांच की

समर्थ 29 मई तक की रिमांड पर है। सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम ने डीआईजी अब्दुल जब्बार के नेतृत्व में गुरुवार को सुबह गिरिबाला के घर पर घटनास्थल की मैपिंग कराई और विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की। इसके बाद गिरिबाला से लगातार पूछताछ की गई।

देर शाम गिरफ्तारी के दौरान घर के बाहर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीबीआई टीम ने सुरक्षा कारणों से अपनी गाड़ी घर के अंदर पार्क कराई और उसी में गिरिबाला को बैठाकर मैनिट स्थित सीबीआई कैंप कार्यालय ले गई।
तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सवाल किए

पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने गिरिबाला, त्विषा व समर्थ के रिश्तों को लेकर सवाल किए। उन्होंने मामले से जुड़े कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी सवाल किए। जांच एजेंसी पहले ही इस मामले में कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त कर चुकी है।
हाई कोर्ट ने इसलिए रद की थी अग्रिम जमानत

बता दें कि बुधवार देर रात एक बजे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को भोपाल न्यायालय से 15 मई को दी गई अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। हाई कोर्ट ने माना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। जबकि वाट्सएप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रहीं। इन तथ्यों के आधार पर न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

न्यायिक सेवा में कई अहम पदों पद रहीं हैं गिरिबाला

भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से 2024 में रिटायर्ड हुईं गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा की वरिष्ठ और अनुभवी न्यायिक अधिकारी रही हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई की।

उन्होंने 1988 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर सिविल जज (क्लास-2) के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। 2010- 2011 में उच्च न्यायिक सेवा का हिस्सा बनीं। 2018 में भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर रहीं।

इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलसचिव रह चुकी हैं। गैस राहत कोर्ट भोपाल की न्यायाधीश भी रहीं। वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-2 की अध्यक्ष हैं।

 

संवेदनशील और प्रभावशाली शायरी के माध्यम से बद्र ने साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने प्रख्यात शायर एवं साहित्यकार बशीर बद्र के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी संवेदनशील और प्रभावशाली शायरी के माध्यम से साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी ग़ज़लों और रचनाओं ने मानवीय भावनाओं, रिश्तों और सामाजिक संवेदनाओं को बेहद खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। उनकी लेखनी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।

श्री शुक्ल ने कहा कि बशीर बद्र का निधन साहित्य एवं कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएँ सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय में जीवित रहेंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों, प्रशंसकों एवं साहित्य जगत के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।

 

टिटहरी के 4 अंडों ने जगाई अच्छी बारिश की उम्मीद

भोपाल 

दक्षिण पन्ना वनमंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत भरतला बीट में एक झिरिया के पास हाल ही में टिटहरी (रेड-वॉटल्ड लैपविंग) के 4 अंडे पाए गए हैं। सामान्यतः टिटहरी 2 या 3 अंडे देती है, जबकि 4 अंडों का समूह अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है।

स्थानीय ग्रामीणों के बीच लंबे समय से यह रोचक मान्यता प्रचलित है कि यदि टिटहरी के घोंसले में 2 से अधिक अंडे हों, तो अच्छी और लंबे समय तक वर्षा होने की संभावना रहती है। झिरिया क्षेत्र में 4 अंडों का पाया जाना स्थानीय लोगों और वन अमले के बीच अच्छी बारिश की उम्मीदों को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। यद्यपि इस विश्वास का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, फिर भी सदियों से संचित लोकज्ञान और प्रकृति अवलोकन की समृद्ध परंपरा पर ग्रामीण अंचलों में आज भी भरोसा किया जाता है।

खुले पथरीले और कंकरीले भूभाग पर बिना पारंपरिक घोंसले के दिए गए ये अंडे प्रकृति की अद्भुत अनुकूलन क्षमता को दर्शाते हैं। अंडों का रंग और बनावट आसपास की मिट्टी एवं पत्थरों में इस प्रकार घुल-मिल जाते हैं कि उन्हें पहचान पाना कठिन हो जाता है, जिससे उन्हें प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। वन अधिकारियों के अनुसार, ऐसे पारंपरिक दावों का व्यवस्थित अभिलेखन और दीर्घकालीन अध्ययन भविष्य में रोचक निष्कर्ष दे सकता है।

दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में झिरियों के संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यों से इन क्षेत्रों में पक्षियों एवं अन्य जीवों की गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। टिटहरी जैसे संवेदनशील पक्षियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि प्राकृतिक आवास और जलस्रोत पुनः जीवंत हो रहे हैं।

 

जल संरक्षण को बनाये जन आंदोलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्राचीन अहिल्या कुंड के जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सभी से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। जल बचा कर भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संत कबीरदास एवं संत रहीम के दोहों का उल्लेख करते हुए जल की महत्ता को सरल एवं प्रेरणादायी ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को जीवन, संवेदना और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। उन्होंने ग्रामीणों से वर्षा जल संरक्षण, तालाबों और कुंडों के संरक्षण तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य शासन जल संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है और जल गंगा संवर्धन अभियान से पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास सफल होंगे और आने वाले समय में प्रदेश जल समृद्धि की दिशा में नई पहचान बनाएगा।

निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, गौरव रणदिवे, श्रवण सिंह चावड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। साथ ही पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, आईजी अनुराग, कलेक्टर शिवम वर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन, डीआईजी मनोज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राजेंद्र वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

 

त्विषा केस में बड़ा एक्शन: सास गिरिबाला गिरफ्तार, मेडिकल टेस्ट के बाद आज कोर्ट में पेश करेगी CBI

नई दिल्ली. 
त्विषा शर्मा डेथ केस में एक बड़ी खबर सामने आई है। त्विषा की सास गिरबाला सिंह को गुरुवार को सीबीआई ने भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही है। 

यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद किए जाने और 15 मई को भोपाल के 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा गिरिबाला सिंह को दी गई राहत को खारिज किए जाने के एक दिन बाद हुई है। बता दें आज ही सिंह को कोर्ट ने सामने पेशा किया जाएगा। 

एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने क्या कहा?
इस मामले में मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने कहा, ‘हाई कोर्ट ने इस मामले में कुछ बातों को गंभीरता से लिया है, जैसे त्विषा शर्मा के शरीर पर मौत से पहले की सात चोटें, जो एक गंभीर अपराध की ओर इशारा करती हैं। इसके साथ ही कई नोटिसों के बावजूद गिरिबाला सिंह का जांच में मदद न करना और WhatsApp चैट, जो त्विषा के मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करती हैं। इन सभी बातों को देखते हुए, हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब यह CBI को तय करना है कि हिरासत में पूछताछ की जानी चाहिए या नहीं।’

बेटे ने 10 दिन बाद किया था सरेंडर
इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने उन आरोपों का भी गंभीरता से संज्ञान लिया कि गिरिबाला सिंह, जो एक रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी हैं और जिन्हें साइबर क्राइम, साइबर फोरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में ट्रेनिंग मिली हुई है, उन्होंने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच की दिशा को प्रभावित करने के लिए किया हो सकता है।

पिछले हफ्ते, गिरिबाला के बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने 10 दिनों तक फरार रहने के बाद एक अदालत के सामने सरेंडर किया था। बता दें गिरिबाला सिंह की सास रिटायर्ड जज हैं और उनके वकील बेटे समर्थ पर दहेज उत्पीड़न से जुड़े आरोप हैं। CBI ने सोमवार को औपचारिक रूप से 12 मई को हुई त्विषा शर्मा की मौत की जांच अपने हाथ में ले ली।

सीबीआई ने दर्ज की थी FIR
सीबीआई ने राज्य पुलिस द्वारा समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ पहले से दर्ज की गई FIR को फिर से दर्ज किया था। CBI की FIR के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने विदाई के समय त्विषा के परिवार से 2 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे पीड़िता के परिवार ने उनके जोर देने पर दे दिया था।

सुनवाई के दौरान, त्विषा के परिवार की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि पीड़िता कथित तौर पर मानसिक उत्पीड़न का शिकार थी। हाई कोर्ट ने पाया कि त्विषा के माता-पिता और रिश्तेदारों के दर्ज बयानों में जांच के पहले ही दिन से लगातार यह आरोप लगाया गया है कि समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह, दोनों ही त्विषा का उत्पीड़न कर रहे थे।

धार भोजशाला विवाद पहुंचा फिर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के फैसले को तीसरी चुनौती

धार

धार भोजशाला विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका लगी है। सुप्रीम कोर्ट अब भोजशाला से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सकता है। तीसरी याचिका जिब्रान अंसारी ने प्रस्तुत की है। तीनों याचिकाओं पर अब तक कोर्ट ने सुनवाई शुरू नहीं की है। उधर, हिंदू पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिकाओं को लेकर तैयारी कर रहा है। पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट में भोजशाला मामले में कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके।

भोजशाला को इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले को मुस्लिम पक्ष ने चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की है। पहले शहर काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। पिछली याचिकाओं पर अभी तक हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट का फैसला आने के छह दिन बाद मुस्लिम पक्ष ने रात साढ़े आठ बजे कोर्ट में याचिका लगाई थी।

आधी रात दाखिल हुई नई याचिका
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल होने की जानकारी सामने आते ही विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार “Jebran Ansari Vs Union of India” नाम से यह याचिका डायरी नंबर 33643/2026 के तहत दर्ज की गई है। बताया गया कि याचिका 26 मई 2026 की रात करीब 11:30 बजे दाखिल की गई, जिससे यह स्पष्ट माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष इस मामले में कानूनी तैयारी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती
नई याचिका में इंदौर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने भोजशाला विवाद को लेकर अहम फैसला सुनाया था। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अब सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मामले की एंट्री सुप्रीम कोर्ट में होते ही दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ गई है।

धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज
भोजशाला विवाद लंबे समय से संवेदनशील धार्मिक मामलों में गिना जाता रहा है। ऐसे में नई याचिका के बाद धार्मिक संगठनों और विभिन्न पक्षों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ सकती है। विवाद को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जिससे प्रदेश का माहौल फिर गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।

कानूनी लड़ाई अब नए चरण में
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद अब यह विवाद नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों के साथ अदालत में मजबूती से उतरने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस प्रकरण की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बन सकती है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

संवेदनशील मामले पर बढ़ी निगरानी
भोजशाला विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। संवेदनशील माहौल को देखते हुए स्थानीय स्तर पर गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने धार सहित प्रदेश की राजनीति और धार्मिक चर्चाओं को फिर केंद्र में ला दिया है।

कमाल मौला मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि हमारे पास सरकारी दस्तावेज और पुख्ता प्रमाण हैं, जिनके आधार पर हम सुप्रीम कोर्ट में साबित करेंगे कि धार का परिसर मंदिर नहीं, मस्जिद है। हाईकोर्ट ने एएसआई की जिस रिपोर्ट में भोजशाला को मंदिर बताया, वही पूर्व की रिपोर्ट में भोजशाला को मस्जिद बताती रही है।

धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा दावा, बोले- गाय को लेकर देश की सोच बदल रही है

खजुराहो

पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है। यह अभियान आगामी 27 जुलाई को भारत के सभी जिलों में चलाया जाएगा, जिसमें ज्ञापन सौंपने और हस्ताक्षर अभियान शामिल होगा।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री वर्तमान में उत्तराखंड स्थित श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर हैं। 21 दिवसीय कठिन साधना पूरी करने के बाद उन्होंने बद्रीनाथ धाम में श्री सत्यनारायण भगवान की पांच दिवसीय कथा का शुभारंभ किया। कथा के पहले दिन व्यासपीठ से उन्होंने देशभर के सनातनियों, गौ सेवकों और संत समाज से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया।

पंडित शास्त्री बोले-गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार तक यह संदेश पहुंचाना है कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित किया जाए। साथ ही, सड़कों पर भटक रही गौ माताओं को सम्मानपूर्वक गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की जाएगी। उन्होंने गौ सेवकों और सनातनियों से अपने-अपने जिलों में एकत्र होकर गौ संरक्षण के लिए आवाज उठाने का आग्रह किया।

व्यासपीठ से संबोधित करते हुए बागेश्वर सरकार ने एक समाचार का उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में सामने आ रहे हैं।

बाबा बोले-गाय को खाने वाले भी राष्ट्र माता बनाने की मांग कर रहे
उन्होंने मौलाना मदनी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी भारत सरकार से यह मांग की है। इस दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हम लोग गाय को रोटी खिलाते हैं, कुछ लोग रोटी के साथ गाय खाते हैं, लेकिन अब वे भी गौ माता को राष्ट्र माता बनाने के समर्थन में आगे आ रहे हैं। देश बदल रहा है।”

उन्होंने संत समाज से भी आग्रह किया कि सभी संत महात्मा और सनातनी दिल्ली पहुंचकर गौ माता को राष्ट्र माता बनाने की मांग को मजबूती प्रदान करें। बद्रीनाथ धाम में चल रही श्री सत्यनारायण कथा के दौरान यह घोषणा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और देशभर के गौ भक्तों में इस अभियान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

राजा रघुवंशी मर्डर केस में नया मोड़! सोनम की जमानत रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंची मेघालय सरकार

इंदौर

देश को झकझोर कर रख देने वाले मेघालय के चर्चित ‘हनीमून मर्डर केस’ में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है. मेघालय राज्य सरकार ने शिलॉन्ग की एक निचली अदालत द्वारा इस खौफनाक हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत के खिलाफ मेघालय हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर शिलॉन्ग कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत अप्रैल 2026 में सोनम को बेल दी गई थी. पुलिस और अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मामला बेहद संगीन और सुनियोजित हत्या का है, इसलिए मुख्य आरोपी का जेल से बाहर आना जांच और गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

यह पूरा मामला मई 2025 का है, जब मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी (29 साल) की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी (25 साल) से हुई थी. शादी के कुछ ही दिनों बाद 20 मई को यह नवविवाहित जोड़ा हनीमून मनाने के लिए मेघालय की खूबसूरत वादियों में पहुंचा था. लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह रोमांटिक ट्रिप एक खौफनाक मर्डर सीन में तब्दील होने वाला है. 23 मई 2025 को चेरापूंजी (सोहरा) के नोंगिर्यत गांव में एक होमस्टे से चेकआउट करने के बाद यह जोड़ा अचानक लापता हो गया था. शुरुआत में इसे एक सामान्य लापता होने या दुर्घटना का मामला माना जा रहा था, लेकिन जब 2 जून 2025 को एनडीआरएफ के ड्रोन ने सोहरा के वेई सावदोंग झरने के पास एक गहरी खाई में राजा रघुवंशी का सड़ा-गला शव बरामद किया, तो इस पूरे रहस्य से पर्दा उठा।

मेघालय पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए. पुलिस के अनुसार, यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सोनम रघुवंशी द्वारा रची गई एक सोची-समझी और बर्बर हत्या थी. सोनम का इंदौर में ही राज कुशवाहा नाम के एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और उसने शादी के महज तीन दिन बाद ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली थी. इस साजिश के तहत राज कुशवाहा ने अपने तीन दोस्तों को 50,000 रुपये देकर कॉन्ट्रैक्ट किलर के रूप में मेघालय भेजा था. जब राजा और सोनम ट्रैकिंग कर रहे थे, तभी इन भाड़े के हत्यारों ने राजा पर धारदार हथियार से हमला किया और उन्हें गहरी खाई में धक्का दे दिया, जबकि सोनम चुपचाप खड़ी यह सब देखती रही।

हत्या को अंजाम देने के बाद सोनम खुद को पीड़ित दिखाने के लिए गायब हो गई और अलग-अलग राज्यों में छिपती रही, जबकि बाद में उसे उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के एक ढाबे से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने इस मामले में सोनम, उसके प्रेमी राज कुशवाहा और तीनों कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इस सनसनीखेज मामले में अप्रैल में शिलॉन्ग की एक अदालत ने सोनम को जमानत दे दी थी, जिसका अब मेघालय सरकार पुरजोर विरोध कर रही है. हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में सरकार ने दलील दी है कि निचली अदालत ने अपराध की क्रूरता और साजिश की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए जमानत दी है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, MP सरकार से पूछा- माफिया अब तक क्यों नहीं रुके?

ग्वालियर
 देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने चंबल घड़ियाल सेंचुरी में चल रहे बड़े पैमाने पर रेत के अवैध खनन और परिवहन मामले पर सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए फटकार लगायी है. अवैध रेत खनन को लेकर लगायी गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा की, राज्य सरकारों ने भले ही रेत खनन को रोकने के लिए प्रशासनिक सख्ती की हो, लेकिन अब भी रेत खनन की गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं।

रेत खनन से नुकसान पर चिंतित सर्वोच्च न्यायालय
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान के तहत दायर सुओ मोटो रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए कहा है कि, “नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अवैध खनन पर्यावरणीय अपराध ही नहीं, बल्कि जैव विविधता, दुर्लभ जलीय जीवों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे के लिए भी गंभीर खतरा है. ये सिर्फ जलीय जीवों तक नहीं बल्कि नेशनल हाईवे 44 पर स्थित चंबल पुल के लिए भी खतरा है. क्योंकि कोर्ट का मानना है की, नदी में लगातार रेत का खनन होने से नदी पर बने पुल की नीव और आसपास की स्टेब्लिटी पर भी इसका असर पड़ता है।

सरकार के हलफनामे पर खड़े हुए सवाल
चंबल घड़ियाल सेंचुरी में हो रहे अनियंत्रित अवैध रेत खनन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर भी सर्वोच्च अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए पूछा कि, इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, सुप्रीम कोर्ट के पहले सख्त आदेशों के बावजूद चंबल क्षेत्र में रेत का अवैध खनन जारी है. क्या सरकार ने इन पर ध्यान दिया? कोर्ट ने टिप्पणी की, अदालत की सख्ती के बाद रेत माफिया ने रास्ते जरूर बदल लिए हैं लेकिन रेत खनन और परिवहन की गतिविधियां अभी भी जारी हैं. हालांकि कोर्ट ने सख्त लहजे में मध्य प्रदेश सरकार से कहा कि, अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही पायी जाती है तो इसका मतलब है राज्य सरकार द्वारा गलत हलफनामा दिया गया है. ऐसे में कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार तो एक ताजा हलफनामा दाखिल कर रिपोर्ट पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार की कार्रवाइयों को बताया अपर्याप्त
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चंबल क्षेत्र में हो रहे रेत के अवैध खनन और परिवहन पर की जा रही कार्रवाइयों को अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि, अवैध परिवहन करने वाले बिना नंबर प्लेट या बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों पर जुर्माना या चालान काटना पर्यप्त कार्रवाई नहीं है, इस तरह की स्थिति में इन वाहनों को जब्त किया जाना चाहिए और साथ ही इन वाहन के मालिकों और फाइनैंसरों पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए. कोर्ट ने ऐसे मामलों में वाहनों की जब्ती के साथ प्रॉसिक्यूशन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

SC के दखल के बाद चंबल में खनन पर लगाम!
आपको बता दें की, राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मध्य प्रदेश की चंबल नदी से लगे मुरैना में इन दिनों लगातार अवैध खनन और परिवहन पर पुलिस वन और खनिज विभाग की कार्रवाइयां जारी हैं, यही वजह है कि पिछले लगभग डेढ़ महीने से मुरैना के चंबल नदी स्थित राजघाट पर जहां पहले खुलेआम रेत का अवैध खनन होता था अब लगभग पूरी तरह बंद है. साथ हीं प्रशासन अंदरूनी इलाकों में भी रेत माफिया पर लगातार कार्रवाइयां कर रहा है।

अब तक 25 करोड़ का अवैध भंडारण नष्ट, आधा सैकड़ा से ज़्यादा वाहन जब्त
मुरैना खनिज विभाग के मुताबिक “पिछले एक महीने में प्रशासन ने रेत माफिया द्वारा चंबल क्षेत्र में नदी से अवैध उत्खनन कर अलग अलग इलाकों खुले में डंप किया गए रेत के विनिष्टीकरण की अलग अलग कार्रवाइयां की हैं. जिनमें लगभग 1.25 लाख ट्रॉली रेत का विनिष्टीकरण किया गया जिसकी कुल कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये है. इन कार्रवाइयों में टीम ने 55 से अधिक ट्रैक्टर ट्रॉली ट्रक, लोडर और हाइड्रा सहित अन्य वाहन जब्त किया है और उन पर मामले दर्ज किए हैं. इस दौरान पुलिस ने अवैध रेत भंडारण पर 12 मामले दर्ज किए हैं. इनके अलावा प्रशासन ने 60 से ज़्यादा वाहन स्टोन माफिया के भी जब्त किए हैं. साथ ही मुड़ाईं कलेक्टर द्वारा पेट्रोल पम्प संचालकों को भी निर्देशित किया है कि, बिना नंबरप्लेट के ट्रैक्टर ट्रॉली को ईंधन न दिया जाए।

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