CM मोहन यादव के अचानक दिल्ली पहुंचने से बढ़ी सियासी हलचल, मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज

भोपाल

मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती नजर आ रही हैं। संगठन में नई नियुक्तियों और आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने भी सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav का अचानक दिल्ली दौरा कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व आने वाले दिनों में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े फैसले ले सकता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक बैठकों का दौर पहले से ही जारी है, वहीं प्रदेश मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली पहुंचना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री ने पार्टी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Arjun Ram Meghwal से भी सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी स्वयं अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की।

आज नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय विधि और न्याय (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जी से सौजन्य भेंट की। हालांकि इस मुलाकात को औपचारिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव, संगठनात्मक बदलाव और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर दिल्ली में लगातार मंथन चल रहा है।

प्रदेश भाजपा में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह नियुक्तियों और बैठकों का सिलसिला बढ़ा है, उसने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि पार्टी आने वाले समय में बड़े राजनीतिक फैसलों की तैयारी में जुट चुकी है। अब सबकी नजर दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।

उर्दू शायरी का चमकता सितारा बुझा, बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन

भोपाल

उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है।प्रसिद्ध उर्दू शायर आधुनिक ग़ज़ल के उस्ताद और पद्मश्री सम्मानित डॉ. बशीर बद्र का भोपाल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 91 सालों के थे. मेरठ में एक जमाने में वह साहित्यिक आयोजन की शान होते थे. बाद में जब थोड़ी दूर पर स्थित उनके मकान के सामने से गुजरता था, तो उसकी दीवारों पर कुछ जले जैसे निशान नजर आते थे. मेरठ के 1987 के भीषण दंगों के बाद उन्होंने अपने इस शहर को हमेशा के लिए ही छोड़ दिया. लेकिन उनसे मुलाकातें, मुस्कुराहट और हर मौके के लिए मौजूं शायरियां अब तक याद तो हैं ही।

बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था।

1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर
उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे।

मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र
1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था।

शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड
उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी।

बशीर बद्र उन चुनिंदा शायरों में थे, जिनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं. उनकी लाइनें लोगों की डायरी, वॉट्सऐप स्टेटस, मोहब्बत के खत और टूटे दिलों की जुबान बन गईं।

उनका एक शेर तो जैसे हर दौर में जिंदा रहेगा-

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…’

और ये भी-

मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहां होगा
परिंदा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाए…’

बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि वो मुश्किल अल्फाज में नहीं, सीधे दिल में उतरती थी।

मोहब्बत को उन्होंने मुश्किल नहीं, आसान बताया. उनकी शायरी में दर्द था, लेकिन उम्मीद भी थी. मोहब्बत थी, लेकिन दिखावा नहीं था.

उन्होंने लिखा-

‘सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है
बा-वजू होके भी छूते हुए डर लगता है…’

और फिर मोहब्बत को इतना आसान बना दिया कि पढ़ने वाला मुस्कुरा उठे-

‘मैं तेरे साथ सितारों से गुजर सकता हूं
कितना आसान मोहब्बत का सफर लगता है…’

बशीर बद्र सिर्फ इश्क के शायर नहीं थे. उन्होंने जिंदगी के संघर्ष को भी उतनी ही खूबसूरती से लिखा।
उनका ये शेर आज भी लाखों लोगों को हिम्मत देता है-

‘जिस दिन से चला हूं मेरी मंजिल पे नजर है
आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा…’

और फिर जिंदगी की तकलीफ को कुछ यूं बयान किया-

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुमने मेरा कांटों भरा बिस्तर नहीं देखा…’

उनकी शायरी में एक अजीब सी नरमी थी. ऐसा लगता था जैसे कोई बहुत धीरे से जिंदगी समझा रहा हो.

‘कहां से आई ये खुशबू, ये घर की खुशबू है
इस अजनबी के अंधेरे में कौन आया है…

‘महक रही है जमीं चांदनी के फूलों से
खुदा किसी की मोहब्बत पे मुस्कुराया है…’

15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मे बशीर बद्र बाद में भोपाल आकर बस गए. उन्होंने उर्दू साहित्य को कई यादगार गजलें, किताबें और अशआर दिए. कई बड़े सम्मानों से उन्हें नवाजा गया. लेकिन सच ये है कि उनका सबसे बड़ा सम्मान वो लोग थे, जिन्होंने उनकी शायरी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया।

आज बशीर बद्र नहीं हैं. लेकिन उनकी लाइनें शायद हमेशा रहेंगी… किसी की याद में, किसी की मोहब्बत में, किसी की तन्हाई में. डॉ. बशीर बद्र के निधन की खबर सामने आने के बाद साहित्य और शायरी जगत में शोक की लहर है. उनके चाहने वाले सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट को जल्द मिलेंगे नए जज, जस्टिस संजीव सचदेवा और शील नागू समेत कई नाम शामिल

भोपाल

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट चीफ जस्टिस व एक वरिष्ठ अधिवक्ता को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. इस कॉलेजियम में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा समेत चार मुख्य न्यायधीशों को शामिल किया है।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में 4 चीफ जस्टिस
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 22 और 27 मई, 2026 को आयोजित अपनी बैठकों में निम्निलिखित मुख्य न्यायधीशों को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की अनुशंसा की है।

मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के जज

    न्यायमूर्ति शील नागू, मुख्य न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (पीएचसी: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय)

    न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे उच्च न्यायालय (पीएचसी: झारखंड उच्च न्यायालय)

    न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (पीएचसी: दिल्ली उच्च न्यायालय)

    न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च
न्यायालय (पीएचसी: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय)

    वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना (सुप्रीम कोर्ट)

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का दिल्ली से संबंध, चीफ जस्टिस नागू का एमपी से
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा का संबंध दिल्ली उच्च न्यायालय से है. वर्तमान में चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कई चर्चित मामलों की सुनवाई की हैं और कई ऐतिहासिक फैसले भी दिए हैं. उन्हें भी इस कोलेजियम में शामिल किया गया है. वहीं, जस्टिस न्यायमूर्ति शील नागू वर्तमान में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं और उनका मूल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट है. इसके अलावा जम्मू और कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय से हैं।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा
यदि केंद्र सरकार द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी दे दी जाती है, तो सभी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होंगे. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली दसवीं अधिवक्ता होंगी. वे सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी महिला होंगी.

22 और 27 मई को हुई अपनी बैठक में, कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अरुण पल्ली, और सीनियर एडवोकेट वी मोहना को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति को मंजूरी दी।

तमिलनाडु की रहने वाली मोहना, अगर केंद्र इन सिफारिशों को मंजूरी दे देता है, तो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली दूसरी महिला वकील होंगी जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन मिलेगा।

इससे पहले, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​पहली महिला सीनियर एडवोकेट थीं जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था. 2021 में, तीन महिला जज, जस्टिस हिमा कोहली, बेला एम. त्रिवेदी, और बीवी नागरत्ना को सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट (पदोन्नत) किया गया था।

जस्टिस नागू मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से, जस्टिस चंद्रशेखर झारखंड हाई कोर्ट से, जस्टिस सचदेवा दिल्ली हाई कोर्ट से, और जस्टिस पल्ली पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से थीं।

आगे क्या होगा?
कॉलेजियम की इस सिफारिश को अब केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की अंतिम मुहर और वारंट जारी होने के बाद ये सभी नाम तय हो जाएंगे, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन या सुप्रीम कोर्ट में इनका शपथ ग्रहण समारोह होगा।

जनसुनवाई में आत्मदाह की घटनाओं पर भड़के CS अनुराग जैन, कलेक्टरों से पूछा- यही सुशासन है?

भोपाल

ये बात मध्य प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को कही। जैन की यह नाराजगी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के एजेंडों पर किए जा रहे एक्शन की समीक्षा के दौरान सामने आई।

मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा कि खनिज के अवैध परिवहन में लगे बिना नंबर प्लेट और टूटी-फूटी नंबर प्लेट वाले वाहनों को राजसात करें। जितनी जल्दी हो, ऐसे वाहनों को नीलाम भी किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि खनन अपराधों के पुराने केस निकाले जाएं। पता लगाएं कि किन मामलों में अब तक सजा हुई है और यदि सजा नहीं हुई है तो तुरंत औपचारिकता पूरी कर सजा दिलाने के प्रयास किए जाएं।

सीएस जैन ने कहा- सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई सर्विस डिलेवरी का सशक्त माध्यम हैं। यहां आने वाले मामलों में प्रशासन को संवेदना के साथ काम करना चाहिए। जनसुनवाई के दौरान अधिकारी मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं और शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण करें। सीएम हेल्पलाइन के शत-प्रतिशत प्रकरणों को अटेंड करने की कार्यवाही करें।

जनसुनवाई में जहर, सीएस का सवाल
मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन बुधवार को एकदम कड़े मूड में थे। कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सीधे पूछा कि जनसुनवाई में लोग जहर खा रहे हैं, आत्मदाह कर रहे हैं, तो यह कैसा सुशासन है?

उन्होंने कहा कि अवैध खनन करने वालों पर पुलिस और प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। इसीलिए कोई भी आसानी से ट्रैक्टर या बाइक चढ़ाने की हिम्मत कर लेता है। यह हालत बदलनी ही होगी।सीएस ने साफ कहा कि कलेक्टर और एसपी की यह जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों पर सख्त एक्शन लिया जाए। ताकि दोबारा ऐसी घटनाएं न हों।

खनन माफिया पर नई सख्ती
मुख्य सचिव ने अवैध खनन और परिवहन पर बड़ा आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर एक भी गाड़ी बिना नंबर प्लेट या टूटी नंबर प्लेट के पकड़ी गई तो उसे सिर्फ जब्त नहीं किया जाएगा। उसे सीधे राजसात करके तुरंत नीलाम किया जाएगा।

104 हैंडपंप निजी कब्जे में होने पर नाराजगी जताई
बैठक में पेयजल की समीक्षा के दौरान यह जानकारी सामने आई कि अलग-अलग जिलों में 104 हैंडपंप निजी लोगों के कब्जे में हैं। सीएस जैन ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए कहा- ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई सरकारी हैंडपंप पर ही कब्जा कर ले।

पानी सभी को मिलना चाहिए। संबंधित कलेक्टर ऐसे मामले में जल्द कार्यवाही कर जानकारी देंगे। इसके अलावा शहरों में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश भी सीएस जैन ने कलेक्टरों को दिए।

सिर्फ डीएपी नहीं, एनपीके के लिए भी दें टोकन
खरीफ सीजन के लिए खाद वितरण की समीक्षा करते हुए सीएस जैन ने कहा- खाद का पर्याप्त भंडारण है। किसानों को ई-विकास पोर्टल के जरिये पंजीयन कर खाद देने का काम किया जाए। सिर्फ डीएपी के लिए ही टोकन न दें बल्कि एनपीके के लिए भी टोकन दें ताकि भीड़ की स्थिति न बने।

जैन ने दुग्ध उत्पादन के लिए क्षीर धारा कार्यक्रम और नस्ल सुधार के कार्यक्रम भी ग्रामीण इलाकों में तेजी से चलाने के लिए कहा।

पुल-पुलिया की मरम्मत कराने के निर्देश
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा- किसी भी जिले की प्रगति वहां होने वाले बैंक फाइनेंस से पता चलती है, कलेक्टर इसके लिए तेजी से काम कराएं। बारिश का मौसम आने वाला है, इसलिए पुल-पुलिया की मरम्मत और नवीनीकरण का काम पूरा करा लिया जाए।

बरगी क्रूज हादसे की घटना के मद्देनजर सीएस ने कलेक्टरों से कहा है कि वे अपने जिले के जलाशयों में पहुंचने वाले पर्यटकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।

साथ ही पुराने खनन माफियाओं की फाइलें दोबारा खोलने का आदेश भी दिया गया है। यह देखा जाएगा कि किन मामलों में अब तक सजा नहीं हुई है। जहां भी सजा रुकी हुई हो, वहां तुरंत औपचारिकता पूरी करके सजा दिलाने की कोशिश की जाए।

भोपाल-सिंगरौली कलेक्टर को फटकार
राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान भोपाल कलेक्टर (आईएएस प्रियंक मिश्रा) को कड़ी फटकार लगाई गई है। जमीनों के नामांतरण और बंटान के मामलों में पेंडेंसी बढ़ती जा रही थी और समीक्षा भी नहीं हो रही थी। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जाहिर की।

वहीं सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल की भी जमकर क्लास लगाई गई। प्रदूषण, पेयजल संकट और कानून व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिए जाने पर उन्हें सख्त चेतावनी दी गई।

सीएस अनुराग जैन ने एक बात और बिल्कुल साफ कर दी। उन्होंने कहा कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। हर जिले को अपनी अर्थव्यवस्था खुद खड़ी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो जवाबदेही तय की जाएगी।

जनसुनवाई में लापरवाही नहीं चलेगी
सीएस ने यह भी कहा कि लोक सेवा गारंटी, सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में आम जनता के साथ संवेदनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। अगर ऐसा हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई होगी। उन्होंने याद दिलाया कि इन तीनों माध्यमों से ही सरकार की छवि बनती और बिगड़ती है।

औद्योगिक नीति की समीक्षा में कलेक्टरों को कहा गया कि अपनी नाकामी छुपाने के बजाय कृषि और उद्यानिकी से तालमेल बिठाकर जिले में औद्योगिक माहौल बनाएं। उन्होंने बताया कि जीएसडीपी (Gross State Domestic Product) में कृषि का हिस्सा 37 से बढ़कर 43 फीसदी हो गया है। वहीं, सिर्फ खेती से जिलों का पूरा विकास नहीं होगा, इसलिए उद्योगों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

ड्रग्स-नारकोटिक्स पर विशेष अभियान
डीजीपी कैलाश मकवाना ने सभी एसपी को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के आसपास फैले ड्रग्स के जाल को खत्म करके ड्रग फ्री जोन बनाया जाए। पोक्सो एक्ट और विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। शांति भंग करने वाले और हुड़दंगियों से भी सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए।

बैठक में कई और अहम फैसले
बैठक में कई और जरूरी बातें भी सामने आईं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में 104 सरकारी हैंडपंपों पर रसूखदार या निजी लोगों ने कब्जा कर रखा है। कलेक्टरों को आदेश दिया गया है कि तुरंत कब्जा हटाएं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें।

नरवाई जलाने के मामले में लापरवाही पर जबलपुर और नरसिंहपुर के कलेक्टरों को भी फटकार लगाई गई।

खरीफ सीजन में किसानों को खाद के टोकन सिर्फ डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) के लिए नहीं, बल्कि एनपीके (Nitrogen Phosphorus Potassium) के लिए भी दिए जाएं। इससे हंगामे की स्थिति नहीं बनेगी।

बरगी क्रूज हादसे से सबक लेते हुए सभी कलेक्टरों को जिले के हर जलाशय और पर्यटन स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दिए गए।

स्वच्छता और आवास में कोताही नहीं
शहरी और ग्रामीण विकास की समीक्षा में प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई गई। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) और स्वच्छता पर सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी गई। पानी की सुरक्षित आपूर्ति और जल गंगा संवर्धन अभियान के बचे हुए काम 21 जून से पहले हर हाल में पूरे करने के निर्देश दिए गए।

ट्विशा केस में रिटायर्ड जज गिरिबाला को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की रद्द

भोपाल

 भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने बुधवार को कई घंटों की बहस के बाद देर रात आदेश जारी किया। जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। इसी के साथ अब CBI पूर्व जज गिरिबाला को कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने हाईकोर्ट में ​अग्रिम जमानत निरस्त करने की याचिका लगाई थी। मध्यप्रदेश सरकार ने भी पूर्व जज गिरिबाला पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। बुधवार को दिन में पौने तीन घंटे की बहस के बाद रिजर्व किया गया हाईकोर्ट का ऑर्डर गुरुवार को रात्रि एक बजे के बाद बाहर आया। दरअसल, कोर्ट ने बुधवार को शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ही साफ कर दिया था कि आदेश पारित करेंगे।

हाईकोर्ट में बुधवार की सुनवाई में सीबीआई ने दोनों मामलों में पक्षकार बनाए जाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया था। मामला ट्विशा सिंह की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है।

ट्विशा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। 12 मई, 2026 को ट्विशा की मौत फांसी पर लटकी अवस्था में हुई। बाद में कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भोपाल ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे चुनौती दी गई।

सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप
हाई कोर्ट ने कहा कि वाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 15 मई, 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए आदेश दिया। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।

पूर्व जज को गिरफ्तार कर सकेगी CBI
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया जा सकेगा। मामले की जांच कर रही CBI उन्हें कभी भी गिरफ्तार कर सकती है।

12 मई की रात हुई थी ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत

12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है।

24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।

आरोपियों ने ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की
हाईकोर्ट कोर्ट ने कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। आरोपी ने मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की, जो जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है। मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को पक्षकार बनाना जरूरी है।

चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं
कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। इसी बिंदु को अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना और कहा कि इन परिस्थितियों में गहन जांच की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाए गए हैं कि सास और पति उस पर गर्भपात का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मान लिया था कि केवल विवाह के सात साल के भीतर हुई मौत के आधार पर अग्रिम जमानत खारिज नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट ने यह भी माना था कि आरोपी पक्ष ट्विशा के खाते में पैसे भेजता था।

व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य शिकायत पति के खिलाफ दिखाई देती है। इन्हीं आधारों पर अग्रिम जमानत दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और सबूतों की गहराई से जांच करने पर अलग तस्वीर सामने आती है।

हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत पर क्या-क्या कहा ?

    जमानत देना मामले की गंभीरता के हिसाब से सही नहीं था।
    ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।
    आरोपी पक्ष चोटों का सही जवाब नहीं दे पाया।
    आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया।
    मीडिया में बयान देकर ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश।
    पोस्टमॉर्टम में फांसी के अलावा भी चोटें मिलीं।
    ये चोटें सिर्फ शव उतारने से नहीं हो सकतीं।
    गवाहों ने गर्भपात का दबाव और दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए।
    अग्रिम जमानत केवल खास हालात में दी जानी चाहिए।

आखिर में क्या बोला हाईकोर्ट?
अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी। इसी के साथ कोर्ट ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।

CBI और राज्य सरकार की दलीलें
    गर्भावस्था के बाद पति और सास ने ट्विशा पर चरित्र को लेकर शक किया।
    गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया, जिसका उल्लेख व्हाट्सऐप चैट्स में है।
    ट्विशा ने अपने परिवार को लगातार मानसिक प्रताड़ना की जानकारी दी थी।
    आरोपी प्रभावशाली हैं और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए हिरासत में पूछताछ (custodial interrogation) जरूरी है।

ट्विशा के पिता के वकील की दलीलें
    व्हाट्सऐप चैट्स में स्पष्ट है कि ट्विशा को मानसिक प्रताड़ना दी जा रही थी।
    पति गर्भ में पल रहे बच्चे पर शक करता था और गर्भपात का दबाव डालता था।
    ट्विशा ने कई बार मायके ले जाने की गुहार लगाई थी।
    परिवार को जांच और घटना की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
    ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर ठीक से विचार नहीं किया।
    CCTV फुटेज से छेड़छाड़ और जल्दबाज़ी में जमानत देने का आरोप।

आरोपी पक्ष की दलीलें
    ट्विशा ने आत्महत्या की थी।
    घटना के बाद उसे तुरंत एम्स ले जाया गया था।
    पुलिस ने उसी दिन मोबाइल और DVR जब्त कर लिए थे, इसलिए सहयोग न करने का आरोप गलत है।
    व्हाट्सऐप चैट्स में मुख्य आरोप पति पर हैं, सास पर नहीं।
    अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए असाधारण परिस्थितियां आवश्यक हैं, जो इस मामले में नहीं हैं।

आदेश के बाद मामले में क्या हो सकता है?

1. अग्रिम जमानत खत्म मानी जाएगी
हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। इसका मतलब है कि अब आरोपी गिरिबाला सिंह को गिरफ्तारी से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं रहेगी।

2. CBI अब तेजी से आगे की कार्रवाई कर सकती है
चूंकि मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है, इसलिए एजेंसी आगे कई अहम कदम उठा सकती है। इसमें आरोपी से पूछताछ, हिरासत में पूछताछ, मोबाइल चैट्स और डिजिटल सबूतों की जांच, CCTV फुटेज की पड़ताल, पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का गहराई से विश्लेषण शामिल हो सकता है।

3. गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मामला गंभीर है और जांच अभी शुरुआती चरण में है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पक्ष जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसे में CBI आरोपी की गिरफ्तारी कर सकती है।

4. सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है
आरोपी पक्ष के पास अब भी सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रहेगा। वे वहां स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल कर सकते हैं। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने और दोबारा जमानत देने की मांग भी कर सकते हैं।

भोपाल मेट्रो के लिए चलेगा बुलडोजर! न्यू मार्केट-रोशनपुरा में कई दुकानें और मकान हटेंगे

भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन की ब्लू लाइन के लिए अब न्यू मार्केट से लगे रोशनपुरा, मालवीय नगर में दुकानों की बड़ी तोड़फोड़ होगी। यहां दरवेश बर्तन भंडार की लाइन और इसके आसपास के क्षेत्र की दुकानों को नोटिस देकर आगाह किया गया है। अगले दो माह में यहां काम शुरू होगा। मेट्रो ट्रेन के इन नोटिस से पूरे क्षेत्र में लोगों में डर है। ये मेट्रो ट्रेन अफसरों से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। यहां सरकारी जमीन है और प्रोजेक्ट की डिजाइन में बदलाव कर दुकानों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

न्यू मार्केट और मालवीय नगर में स्टेशन की डिजाइन में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। छोटी बड़ी 15 दुकानें इससे प्रभावित होने की स्थिति है। रोशनपुरा मेट्रो स्टेशन कांग्रेस के जवाहर भवन के पास है। इसकी डिजाइन को लेकर कई आपत्तियां आईं। कुछ बड़े कॉम्प्लेक्स इसमें जा रहे थे, जिन्हें डिजाइन बदलकर बचाया गया। मालवीय नगर की ओर बड़ी संख्या में स्लम है।

जहांगीराबाद बाजार और आवासीय क्षेत्र भी चिंता में
मेट्रो की तोड़फोड़ से सिर्फ न्यू मार्केट मालवीय नगर ही नहीं, जहांगीराबाद बाजार से लेकर आवासीय क्षेत्र तक चिंता में है। यहां 600 मीटर लंबा हिस्सा मेट्रो के लिए तोड़ा जाएगा। इसमें कई बड़े व्यवसायिक भवन शामिल है। दुकानों के अंदर तक निशान लगाए हुए हैं। 20 मकान भी है, जिन्हें तोड़ा जाएगा। इसके लिए लोगों ने कलेक्ट्रेट से लेकर कोर्ट तक याचिका लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

रेलवे लाइन के किनारे से हटाई गईं 85 झुग्गिया
जिला प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में छोला रेलवे लाइन के पास 85 झुग्गियों को हटाया गया। इन्हें हटाने के लिए रेलवे ने प्रक्रिया की थी। जिस जगह झुग्गियां बना ली थी वह रेलवे की जमीन है। यहां हाल में ही तेजी से जमीन पर कब्जा करने के लिए झुग्गियां बनाई जा रही थी। रेलवे ने जिला प्रशासन व नगर निगम की मदद से इन झुग्गियों को हटवाया। इस दौरान पुलिस बल उपस्थित रहा।

रेलवे के लिए खतरा थी झुग्गियां
गोविंदपुरा एसडीएम भुवन गुप्ता के अनुसार ये अभी नई झुग्गियां बनी थी। रेलवे की सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी। इसके साथ ही रेलवे यहां अपनी जमीन को संरक्षित करने फेंसिंग का काम शुरू करने वाला है। मौके पर प्रशासन व पुलिस बल सुबह ही पहुंच गया था। इन झुग्गियों में से अधिकतर में छोटी दुकानें संचालित की जा रही थी। ये लोग पास की ही कॉलोनी के थे। इन्हें हटाया गया। जमीन खाली कराई, अब रेलवे यहां फेंङ्क्षसग कर जमीन को संरक्षित करेगा।

 

हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में उमड़ा आस्था का सैलाब, 11 दिन में पहुंचे 2 लाख श्रद्धालु

धार
 धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसले के बाद यहां आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अभूतपूर्व वातावरण देखने को मिल रहा है। फैसले के बाद से भोजशाला में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि पिछले मात्र 11 दिनों में यहां दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच चुके हैं।

विशेष बात यह है कि भोजशाला में अब केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि दिल्ली सहित प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडेय ने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से शाम तक दर्शनार्थियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। अब तक यह स्थिति मुख्य रूप से मंगलवार तक सीमित रहती थी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद सप्ताह के हर दिन भोजशाला में श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक नियमित पूजा-अर्चना और आरती का क्रम जारी है, जिससे पूरे परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण और अधिक सशक्त हुआ है।

मुख्यमंत्री के प्रवास के बाद से लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के हालिया भोजशाला प्रवास के बाद लोगों की उम्मीदें भी और बढ़ गई हैं। श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों को अब इस बात का इंतजार है कि यहां प्रस्तावित शोध संस्थान को किस स्वरूप में विकसित किया जाएगा तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भविष्य में कौन-कौन सी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं के विस्तार की मांग भी तेज हो गई है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोजशाला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और ज्ञान परंपरा का गौरवशाली प्रतीक है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री भोजशाला आएंगी
हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री का इंदौर-धार प्रवास 27 से 30 मई तक प्रस्तावित है। भोजशाला प्रकरण की कानूनी लड़ाई की सूत्रधार, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री इंदौर-धार प्रवास के दौरान भोजशाला में दर्शन-पूजन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगी। रंजना अपने साथ लखनऊ के प्रसिद्ध महादेव मंदिर के तालाब से 108 कमल पुष्प मां वाग्देवी के चरणों में अर्पित करने के लिए ला रही हैं। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने बताया कि अग्निहोत्री ने श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मथुरा के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ी है।

भोपाल के हुजूर-बैरसिया क्षेत्र में 2.10 लाख मकानों की गिनती का कार्य पूरा

भोपाल

जिले में जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।इसमें नगरीय क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में तहसील व पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके तहत हुजूर, कोलार, बैरसिया ग्रामीण और नगर पालिका क्षेत्र में जनगणना का काम पूरा कर लिया गया है। इन क्षेत्रों में 956 ब्लाक के 919 प्रगणकों ने करीब दो लाख दस हजार से अधिक मकानों की गिनती पूरी कर ली है।

इन मकानों में रहने वाले परिवारों से 33 तरह के सवाल भी रिकार्ड में दर्ज किए गए है।बता दें कि देश में 15 साल बाद जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानाें के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम के 85 वार्ड में जनगणना के पहले चरण में मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 80 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। यह काम 30 मई तक पूरा करना पड़ेगा।

इसी बीच जनणना कार्य का निरीक्षण करने केंद्र से टीम आने वाली है, जो कि नगर निगम, पंचायत व नगर पालिका इलाके में पहुंचकर जनगणना के कार्य का सर्वे करेगी।

जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि जिले में नगर निगम, बैरसिया नगर पालिका, बैरसिया ग्रामीण, हुजूर और कोलार क्षेत्र में अलग-अलग जनगणना का काम किया गया है।

चार चार्ज अधिकारियों ने काम पूरा कर लिया है। नगर निगम क्षेत्र में कुछ काम बाकी है। इन मकानों की गणना के बाद डिजिटल जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। जिसके आधार पर जनगणना के दूसरे चरण का काम शुरु किया जाएगा।
7.10 लाख मकानों की गणना

नगर निगम के शहरी क्षेत्र में दो हजार 900 प्रगणकों ने सात लाख 10 हजार से अधिक मकानों की गणना का काम पूरा कर लिया है।नगर जनगणना अधिकारी हीरेन्द्र सिंह कुशवाहा की लापरवाही की वजह से निगम क्षेत्र में जनगणना के काम में देरी हो रही है, हालांकि 30 मई तक काम पूरा किया जाना है।
टीम नहीं आई तो 1855 पर करें काॅल

जनगणना में मकानों पर नंबरिंग करने के बाद उनकी जानकारी को अपलोड कर दिया गया है। अगर अब तक किसी मकान की गणना और परिवार से जुड़ी 33 सवालों की जानकारी नहीं ली गई है, तो आम लोग 1855 पर काल कर जानकारी दे सकते हैं। आनलाइन जानकारी को सत्यापन किया जाएगा।

कलेक्टर ने किया चार्ज अधिकारी का सम्मान

कोलार ग्रामीण क्षेत्र व नगरीय क्षेत्र बैरसिया में जनगणना के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण व मकानों की गणना” का कार्य शत प्रतिशत हो गया है।इस पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बुधवार को कोलार ग्रामीण क्षेत्र के चार्ज अधिकारी यशवर्धन सिंह और सीएमओ बैरसिया नगर परिषद राजेन्द्र कुमार सक्सेना को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया ।

 

MP में बैंक, स्कूल और सरकारी दफ्तर कई दिन रहेंगे बंद, जरूरी काम पहले ही निपटा लें

भोपाल

एमपीवासियों के लिए इस वक्त एक अहम खबर सामने आ रही है। दरअसल, जून का महीना शुरू होने वाला है। जून के महीने में स्कूलों और बैंक आदि में निम्नलिखित अनुसार छुट्टी रहेगी। ऐसे में आपको बैंक से जुड़े जरूरी काम करने से पहले छुट्टियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। वहीं, स्कूली बच्चों के लिए भी छुट्टी किसी त्योहार से कम नहीं है। जी हां आपको बता दें कि जून 2026 में स्कूल, बैंक और सार्वजनिक अवकाश कितने दिन रहने वाले हैं और किन-किन तारीखों में छुट्टी मिलेगी।

जून में छात्रों को वैकल्पिक व सरकारी अवकाश रहेगा

17 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – छत्रसाल जयंती / महाराणा प्रताप जयंती
23 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – महेश नवमी
24 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – वीरांगना दुर्गावती बलिदान दिवस
26 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – मुहर्रम
29 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – कबीर जयंती

MP में इस दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश

26 जून 2026 – मुहर्रम

यहां जानिए बैंकों में कितने दिन रहेगी छुट्टी

7 जून 2026  – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
13 जून 2026 – दूसरा शनिवार
14 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
21 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
26 जून 2026 – मुहर्रम
27 जून 2026 – चौथा शनिवार
28 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)

यदि आप बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना तैयार करें। इस जानकारी से आप जून महीने में बैंकिंग कार्यों में किसी तरह की असुविधा से बच सकते हैं।

अंतरधार्मिक विवाह पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- हर मामले में सुरक्षा देना संभव नहीं

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा है कि केवल सामान्य आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर लगातार व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा की मांग के लिए स्पष्ट और ठोस खतरे के प्रमाण होना जरूरी है।

इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 14 मई को रतलाम निवासी दंपती द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी कार रोकने की कोशिश की, उनके घर के पास संदिग्ध वाहन घूमते रहे और अन्य संदिग्ध घटनाएं हुईं। इसके आधार पर उन्होंने 24 घंटे पुलिस सुरक्षा और रात में विशेष सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी असाधारण सुरक्षा मांगने वाली प्रत्येक याचिका में स्पष्ट खतरे के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल सामान्य आशंकाएं या संदिग्ध वाहनों की आइसोलेटेड घटनाएं व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड तैनात करने का आधार नहीं बन सकतीं। ऐसे मामलों में नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है।

याचिका के अनुसार, दंपती ने वर्ष 2019 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। महिला विवाह से पहले इस्लाम धर्म मानती थी और उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया था। महिला ने जब अपने परिवार को विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी दी, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।

धमकियां जारी रहने पर महिला ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को दंपती के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

पहले कड़ी जांच आवश्यक-हाईकोर्ट
वर्तमान याचिका में दंपती ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को बिना किसी प्रशासनिक कारण के उनकी सुरक्षा में तैनात सशस्त्र गार्ड हटा दिया गया और उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात कर दिया गया, जिसके पास न हथियार था और न मोबाइल फोन।

अदालत ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में लगभग हर अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह के मामले में दंपती लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में किसी आसन्न खतरे के ठोस और निर्विवाद प्रमाण नहीं होते।

तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के दिए गए निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में उसने केवल पुलिस अधीक्षक को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, इसे दंपती को स्थायी 24 घंटे सुरक्षा देने का न्यायिक आदेश नहीं माना जा सकता।याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव नहीं है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि ऐसी शिकायत मिलने पर वह तुरंत और उचित कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए।

 

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