भोपाल के हुजूर-बैरसिया क्षेत्र में 2.10 लाख मकानों की गिनती का कार्य पूरा

भोपाल

जिले में जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।इसमें नगरीय क्षेत्र में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में तहसील व पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके तहत हुजूर, कोलार, बैरसिया ग्रामीण और नगर पालिका क्षेत्र में जनगणना का काम पूरा कर लिया गया है। इन क्षेत्रों में 956 ब्लाक के 919 प्रगणकों ने करीब दो लाख दस हजार से अधिक मकानों की गिनती पूरी कर ली है।

इन मकानों में रहने वाले परिवारों से 33 तरह के सवाल भी रिकार्ड में दर्ज किए गए है।बता दें कि देश में 15 साल बाद जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानाें के सूचीकरण का काम किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम के 85 वार्ड में जनगणना के पहले चरण में मकानों का सूचीकरण किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 80 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। यह काम 30 मई तक पूरा करना पड़ेगा।

इसी बीच जनणना कार्य का निरीक्षण करने केंद्र से टीम आने वाली है, जो कि नगर निगम, पंचायत व नगर पालिका इलाके में पहुंचकर जनगणना के कार्य का सर्वे करेगी।

जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि जिले में नगर निगम, बैरसिया नगर पालिका, बैरसिया ग्रामीण, हुजूर और कोलार क्षेत्र में अलग-अलग जनगणना का काम किया गया है।

चार चार्ज अधिकारियों ने काम पूरा कर लिया है। नगर निगम क्षेत्र में कुछ काम बाकी है। इन मकानों की गणना के बाद डिजिटल जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। जिसके आधार पर जनगणना के दूसरे चरण का काम शुरु किया जाएगा।
7.10 लाख मकानों की गणना

नगर निगम के शहरी क्षेत्र में दो हजार 900 प्रगणकों ने सात लाख 10 हजार से अधिक मकानों की गणना का काम पूरा कर लिया है।नगर जनगणना अधिकारी हीरेन्द्र सिंह कुशवाहा की लापरवाही की वजह से निगम क्षेत्र में जनगणना के काम में देरी हो रही है, हालांकि 30 मई तक काम पूरा किया जाना है।
टीम नहीं आई तो 1855 पर करें काॅल

जनगणना में मकानों पर नंबरिंग करने के बाद उनकी जानकारी को अपलोड कर दिया गया है। अगर अब तक किसी मकान की गणना और परिवार से जुड़ी 33 सवालों की जानकारी नहीं ली गई है, तो आम लोग 1855 पर काल कर जानकारी दे सकते हैं। आनलाइन जानकारी को सत्यापन किया जाएगा।

कलेक्टर ने किया चार्ज अधिकारी का सम्मान

कोलार ग्रामीण क्षेत्र व नगरीय क्षेत्र बैरसिया में जनगणना के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण व मकानों की गणना” का कार्य शत प्रतिशत हो गया है।इस पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बुधवार को कोलार ग्रामीण क्षेत्र के चार्ज अधिकारी यशवर्धन सिंह और सीएमओ बैरसिया नगर परिषद राजेन्द्र कुमार सक्सेना को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया ।

 

MP में बैंक, स्कूल और सरकारी दफ्तर कई दिन रहेंगे बंद, जरूरी काम पहले ही निपटा लें

भोपाल

एमपीवासियों के लिए इस वक्त एक अहम खबर सामने आ रही है। दरअसल, जून का महीना शुरू होने वाला है। जून के महीने में स्कूलों और बैंक आदि में निम्नलिखित अनुसार छुट्टी रहेगी। ऐसे में आपको बैंक से जुड़े जरूरी काम करने से पहले छुट्टियों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। वहीं, स्कूली बच्चों के लिए भी छुट्टी किसी त्योहार से कम नहीं है। जी हां आपको बता दें कि जून 2026 में स्कूल, बैंक और सार्वजनिक अवकाश कितने दिन रहने वाले हैं और किन-किन तारीखों में छुट्टी मिलेगी।

जून में छात्रों को वैकल्पिक व सरकारी अवकाश रहेगा

17 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – छत्रसाल जयंती / महाराणा प्रताप जयंती
23 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – महेश नवमी
24 जून 2026 – वैकल्पिक अवकाश – वीरांगना दुर्गावती बलिदान दिवस
26 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – मुहर्रम
29 जून 2026 – सरकारी अवकाश  – कबीर जयंती

MP में इस दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश

26 जून 2026 – मुहर्रम

यहां जानिए बैंकों में कितने दिन रहेगी छुट्टी

7 जून 2026  – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
13 जून 2026 – दूसरा शनिवार
14 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
21 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)
26 जून 2026 – मुहर्रम
27 जून 2026 – चौथा शनिवार
28 जून 2026 – साप्ताहिक अवकाश (रविवार)

यदि आप बैंक से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण कार्य करने की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों को ध्यान में रखते हुए अपनी योजना तैयार करें। इस जानकारी से आप जून महीने में बैंकिंग कार्यों में किसी तरह की असुविधा से बच सकते हैं।

अंतरधार्मिक विवाह पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- हर मामले में सुरक्षा देना संभव नहीं

जबलपुर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरधार्मिक दंपती को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा है कि केवल सामान्य आशंकाओं या संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर लगातार व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुरक्षा की मांग के लिए स्पष्ट और ठोस खतरे के प्रमाण होना जरूरी है।

इंदौर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई ने 14 मई को रतलाम निवासी दंपती द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। दंपती ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी कार रोकने की कोशिश की, उनके घर के पास संदिग्ध वाहन घूमते रहे और अन्य संदिग्ध घटनाएं हुईं। इसके आधार पर उन्होंने 24 घंटे पुलिस सुरक्षा और रात में विशेष सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसी असाधारण सुरक्षा मांगने वाली प्रत्येक याचिका में स्पष्ट खतरे के पुख्ता प्रमाण होना जरूरी है। केवल सामान्य आशंकाएं या संदिग्ध वाहनों की आइसोलेटेड घटनाएं व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड तैनात करने का आधार नहीं बन सकतीं। ऐसे मामलों में नियमित पुलिस गश्त और जांच पर्याप्त होती है।

याचिका के अनुसार, दंपती ने वर्ष 2019 में दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। महिला विवाह से पहले इस्लाम धर्म मानती थी और उसने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म अपनाया था। महिला ने जब अपने परिवार को विवाह और धर्म परिवर्तन की जानकारी दी, तब से उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं।

धमकियां जारी रहने पर महिला ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने रतलाम पुलिस अधीक्षक को दंपती के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी।

पहले कड़ी जांच आवश्यक-हाईकोर्ट
वर्तमान याचिका में दंपती ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को बिना किसी प्रशासनिक कारण के उनकी सुरक्षा में तैनात सशस्त्र गार्ड हटा दिया गया और उसकी जगह एक होमगार्ड जवान को तैनात कर दिया गया, जिसके पास न हथियार था और न मोबाइल फोन।

अदालत ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में लगभग हर अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह के मामले में दंपती लगातार पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दायर कर रहे हैं, जबकि कई मामलों में किसी आसन्न खतरे के ठोस और निर्विवाद प्रमाण नहीं होते।

तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के दिए गए निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में उसने केवल पुलिस अधीक्षक को आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, इसे दंपती को स्थायी 24 घंटे सुरक्षा देने का न्यायिक आदेश नहीं माना जा सकता।याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का सूक्ष्म प्रबंधन (माइक्रोमैनेजमेंट) रिट क्षेत्राधिकार के तहत संभव नहीं है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का यह संवैधानिक और वैधानिक दायित्व है कि ऐसी शिकायत मिलने पर वह तुरंत और उचित कार्रवाई करे। हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश भी दिए।

 

MP में जन्म लेते ही हर बच्चे पर ₹55 हजार का कर्ज! सरकारी योजनाओं से बढ़ा बोझ

भोपाल 

एमपी की धरती पर पैदा होने वाले हर बेटा-बेटी पर 55323 रुपए का कर्ज है। यह कर्ज उसने या उसके मां-बाप का नहीं बल्कि राज्य सरकार द्वारा बाजार से लिए जा रहे कर्ज के रूप में है जिसकी भरपाई सरकार प्रदेश वासियों से वसूले जाने वाले टैक्स के रूप में करती है.

प्रदेश की आबादी के वास्तविक आंकड़े फरवरी 2027 में आएंगे पर राज्य सरकार द्वारा जो औसत आबादी मानी जा रही है वह नौ करोड़ है। इसके आधार पर एमपी के हर व्यक्ति पर कर्ज की यह राशि सामने आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी सरकार पर कर्ज की राशि 488714.17 करोड़ रुपए हैं जो इसके बाद के दो महीने में लिए गए 9200 करोड़ के कर्ज के चलते बढ़कर अब 497914 करोड़ रुपए हो गई है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल 2025-26 में लिए गए कर्ज के मुकाबले 29 हजार करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए हैं। माना जा रहा है कि यह किसी बड़ी योजना के बराबर की राशि है जिसका ब्याज सरकार ने चुकाया है।

प्रदेश सरकार का मौजूदा कर्ज और कर्ज देने वाली संस्थाओं पर बकाया राशि

    वित्त विभाग ने कहा है कि प्रदेश सरकार पर वर्तमान में 488714.17 करोड़ का कर्ज है। कर्ज की यह राशि सरकार ने अलग-अलग सेक्टर से ली है।

    राज्य सरकार ने बाजार से 333278.21 करोड रुपए का लोन लिया है। कंपनसेशन और अदर बॉन्ड जिसमें पावर बांड्स भी शामिल हैं, के जरिये सरकार ने 4416. 45 करोड़ रुपए उधार लिए हैं।

    साथ ही वित्तीय संस्थानों से 17737.58 करोड़ रुपए सरकार ने लिए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से लोन और एडवांस राशि के रूप में 81152.31 करोड़ रुपए ले रखे हैं।

    इसके अलावा अदर लायबिलिटी कैटेगरी में 13951.57 करोड़ रुपए का कर्ज होने की जानकारी दी गई है।

    केंद्र सरकार के नेशनल स्मॉल सेविंग फंड से भी सरकार ने 38178.05 करोड़ रुपए ले रखे हैं। इस तरह कुल 488714.17 करोड रुपए का कर्ज राज्य सरकार पर है।

31 मार्च 2025 की स्थिति में था 421740 करोड़ का कर्ज
पिछले साल 31 मार्च 2025 की स्थिति में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 421740.27 करोड़ रुपए था। अगर 31 मार्च 2025 की स्थिति में एमपी की आबादी 8.80 करोड़ मानी जाए तो प्रदेश के हर व्यक्ति पर कुल कर्ज 47925 रुपए होता है। यानी एक साल में प्रति व्यक्ति कर्ज घटने के बजाय छह हजार रुपए बढ़ गया है और इस स्थिति में सुधार आने की कोई गुंजाइश फिलहाल दिखाई नहीं देती है क्योंकि योजनाओं की पूर्ति के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में अप्रेल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया है।

लाड़ली बहना, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने बढ़ाया कर्ज
राज्य सरकार पर कर्ज की बढ़ती राशि के पीछे मुफ्त में बांटी जाने वाली राशि को भी कारण बताया जा रहा है। सरकार भले ही दावे करे कि जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह अधोसंरचना विकास और प्रदेश के विकास के लिए खर्च हो रहा है लेकिन हकीकत यही है कि हर माह ली जाने वाली कर्ज की रकम लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्जवला योजना जैसे अन्य योजनाओं पर खर्च की जा रही है और प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।

चालू वित्त वर्ष में सरकार ने ले लिया है 9200 करोड़ का कर्ज
मोहन सरकार ने पिछले साल लिए गए 488714 करोड़ रुपए के कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में अप्रेल और मई के महीनों में 9200 करोड़ रुपए का कर्ज चार बार में ले लिया है। अगर इसे भी कर्ज की कुल राशि में जोड़ दिया जाए तो वर्तमान में सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो जाता है। इस नजरिये से देखें तो प्रदेश के हर नागरिक पर कर्ज का आंकड़ा 54301 से बढ़कर 55323 रुपए हो जाता है।

MP में रिकॉर्ड गेहूं खरीदी! 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन उपार्जन

अब तक कुल 13.36 लाख किसानों से 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित

सीमांत एवं लघु कृषकों से हुआ 32.14 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन
गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी

भोपाल

मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में अव्वल है। अब तक 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हो चुका है। इसमें से 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी की गई है। गेहूं का उपार्जन अभी भी जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है।

मुख्यमंत्री कर रहे सतत मॉनिटरिंग

मंत्री राजपूत ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन लक्ष्य को केन्द्र सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य से अधिक गेहूँ का उपार्जन हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। उन्होंने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये हैं, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी है।

किसानों को 22,842.9 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 22,842.9 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया है। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया जा रहा है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल काटें, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई।

 

मध्यप्रदेश में शराब दुकानों पर बड़ा एक्शन! ओवर रेटिंग और अवैध अहातों पर चलेगा अभियान

भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत शराब दुकानों और अवैध गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में आबकारी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि शराब दुकानों पर ओवर रेटिंग, तय समय के बाद बिक्री और अवैध रूप से संचालित शॉप बार जैसी गतिविधियों के खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले मदिरा ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह “ऑफ श्रेणी” घोषित किया गया है। इसके तहत दुकान परिसर या आसपास शराब सेवन की अनुमति नहीं होगी। अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को बंद कराने के लिए विशेष दल गठित कर औचक निरीक्षण किए जाएंगे।  

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब दुकानों के खुलने और बंद होने के निर्धारित समय का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें निगरानी करेंगी। वहीं उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को रोकने के लिए दुकानों पर शराब की दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही पारदर्शिता के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे, ताकि ग्राहक वास्तविक कीमत की जांच कर सकें। उन्होंने कहा कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर शराब बेचने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के पवित्र घोषित नगरों और क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सभी कम्पोजिट दुकानें ‘ऑफ श्रेणी’ की घोषित, अवैध अहाते होंगे बंद
उप मुख्यमंत्री ने नीतिगत प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानों को पूरी तरह ‘ऑफ श्रेणी’ का घोषित किया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब दुकान परिसर या उसके आसपास मदिरा सेवन (शराब पीने) की सुविधा उपलब्ध कराना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की सघन जांच के लिए विशेष दलों का गठन किया गया है, जो औचक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान मिलने वाले सभी अवैध अहातों और उपभोग स्थलों को तुरंत बंद कराने के निर्देश मुख्यालय द्वारा बिंदुवार दिशा-निर्देशों के माध्यम से जारी कर दिए गए हैं।

देर रात तक शराब बिक्री पर रोक, क्यूआर कोड से थमेगी ओवर रेटिंग
दुकानों के निर्धारित समय से पहले खुलने और तय वक्त के बाद देर रात तक मदिरा बेचने के मामलों को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। राजपत्र में निर्धारित समय सीमा का पालन कराने के लिए अब पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीमें मिलकर गश्त करेंगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं से तय मूल्य से अधिक राशि वसूलने (ओवर रेटिंग) की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक दुकान पर विक्रय दरों का प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जाएंगे, जिससे मदिरा की वास्तविक दरों का सत्यापन हो सकेगा। यदि कोई ठेकेदार निर्धारित दर से अधिक कीमत पर मदिरा बेचता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई होगी।

पवित्र नगरों और क्षेत्रों में अवैध परिवहन व बिक्री पर रहेगी पैनी नजर
 देवड़ा ने कहा कि प्रदेश के जिन नगरों और क्षेत्रों को ‘पॉली / पवित्र’ घोषित किया गया है, वहाँ मदिरा की अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में पहले से ही मदिरा दुकानों को पूरी तरह बंद रखने के आदेश लागू हैं। अब इन क्षेत्रों में शराब के किसी भी प्रकार के अवैध परिवहन या बिक्री को रोकने के लिए निगरानी तंत्र (सुरक्षा और इंटेलिजेंस) को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि सरकार के इन कदमों से अवैध रूप से मदिरा का विक्रय और उपभोग कराने वाले तत्वों पर पूरी तरह शिकंजा कसा जा सके।

उज्जैन के डायल-112 हीरोज घर की राह भटके मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर थाने पहुँचाया

भोपाल

उज्जैन जिले के थाना चिंतामन गणेश क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गए मानसिक रूप से अस्वस्थ 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर थाना पहुँचाया गया।

26 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना चिंतामन गणेश क्षेत्र अंतर्गत कंदरिया चौराहा के पास एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बालक अकेला मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है तथा पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल चिंतामन गणेश थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक सागर सिंह एवं पायलट लाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बालक से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, किन्तु मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा था।

डायल-112 जवानों ने बालक को सुरक्षित डायल 112 वाहन में बैठाकर आसपास क्षेत्र में परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किन्तु परिजनों के संबंध में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद डायल-112 टीम द्वारा बालक को सुरक्षित थाना चिंतामन गणेश पहुँचाया गया।

 

इंदौर में गहराया जल संकट, 35 लाख आबादी पर पानी का खतरा

इंदौर

 देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर गंभीर जलसंकट से गुजर रहा है। हालत यह है कि 35 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाला यह शहर आज भी पानी के मामले में 70 किमी दूर बहने वाली नर्मदा नदी के भरोसे है। शहर में सवा लाख से ज्यादा बोरिंग हैं, लेकिन वर्षाजल को जमीन में सहेजने की प्रवृत्ति नहीं होने की वजह से इनमें से ज्यादातर सूख चुके हैं। वर्ष 2013 में नर्मदा का तीसरा चरण इंदौर आया था जो वर्ष 2024 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया था।

पिछले 13 साल में भविष्य की आवश्यकता को लेकर कोई काम ही नहीं हुआ। स्थिति यह है कि आज शहर का बड़ा हिस्सा टैंकरों के भरोसे है। रोज किसी न किसी क्षेत्र में जलसंकट को लेकर चक्काजाम और प्रदर्शन हो रहे हैं। नींद से जागे नगर निगम ने नर्मदा के चौथे चरण को लेकर काम तो शुरू कर दिया है, लेकिन इसे पूरा होने में कम से कम तीन साल लगेंगे। मतलब साफ है कि शहरवासियों को आने वाले तीन साल जलसंकट झेलना ही पड़ेगा।

इन वजहों से बिगड़े हालात

1970 के आसपास इंदौर में सूखे के हालात बने थे। 70 किमी दूर बहने वाली नर्मदा का जल इंदौर लाने के लिए आंदोलन हुआ, जिसके बाद नर्मदा परियोजना को स्वीकृति मिली। वर्ष 1978 में नर्मदा का पहला चरण इंदौर आया और शहर को 90 एमएलडी पानी मिलने लगा। वर्ष 1990 में नर्मदा का दूसरा चरण इंदौर आया और 90 एमएलडी पानी और मिलने लगा। वर्ष 2013 में तीसरा चरण इंदौर आया और इंदौर को 430 एमएलडी पानी मिलने लगा।

पिछले दो दशक में शहर का विस्तार तेजी से हुआ। नई कॉलोनियां, टाउनशिप आईं, जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई, लेकिन पानी की मात्रा बढ़ाने को लेकर कोई काम नहीं हुआ। हाल ही में नर्मदा के चौथे चरण का काम शुरू हुआ है। उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2029 के अंत तक यह पूरा हो जाएगा। इसके बाद इंदौर को कुल 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा।

बोरिंग या तो सूख गए या दूषित पानी दे रहे हैं

शहर के 25 प्रतिशत हिस्से में आज भी नर्मदा लाइनें नहीं हैं। ये क्षेत्र पूरी तरह से बोरिंग पर निर्भर हैं। गर्मी के चलते ज्यादातर बोरिंग या तो सूख चुके हैं या दूषित पानी दे रहे हैं। इसके चलते ये क्षेत्र अब पूरी तरह से टैंकरों पर आश्रित हो गए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला प्रदूषित पानी खुले में छोड़ने से आसपास के क्षेत्रों का भू-जल दूषित हो गया। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 36 मौतें हुईं।

नए तालाबों की योजना नहीं बनी, पुरानों का गहरीकरण नहीं हुआ

लगभग 87 वर्ष पहले होलकरकाल में इंदौर की पानी की आवश्यकता पूरी करने के लिए यशवंत सागर जलाशय बनाया गया था। इसके बाद किसी नए तालाब की योजना तक नहीं बनी। शहर में सिरपुर, बिलावली, पिपल्याहाना तालाब हैं, लेकिन इनके गहरीकरण को लेकर काम ही नहीं हुआ।
प्रति व्यक्ति 100 लीटर पानी भी नहीं मिल रहा

नर्मदा के तीन चरण इंदौर लाने के बाद अधिकारियों का अनुमान था कि शहर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 180 लीटर पानी की आपूर्ति हो सकेगी, लेकिन तेजी से बढ़ती जनसंख्या की वजह से ऐसा नहीं हो सका। नर्मदा का तीसरा चरण 25 लाख जनसंख्या की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, लेकिन नगर निगम सीमा में 29 गांव शामिल करने के बाद इन गांवों में नर्मदा पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम पर आ गई। जनसंख्या भी 35 लाख से अधिक हो गई। यही वजह है कि शहर को इस वर्ष शहर में जबरदस्त जलसंकट झेलना पड़ रहा है।

चौथा चरण आने के बाद मिलेगी राहत

नर्मदा के चौथे चरण पर नगर निगम लगभग 2300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके बाद इंदौर को 900 एमएलडी पानी मिलने लगेगा। अमृत 2.0 योजना के तहत किए जा रहे इस कार्य में शहर में 1500 किमी नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दो लाख से ज्यादा पुराने जल कनेक्शन की लाइन भी बदली जाएगी। 1.47 लाख नए कनेक्शन भी दिए जाएंगे। इसके अलावा 40 नई टंकियां बनाई जाएंगी। अनुमान है कि नर्मदा के चौथे चरण से इंदौर की वर्ष 2045 तक की आवश्यकता पूरी होगी।

 

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थो के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में अवैध मादक पदार्थों एवं नशीले पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विभिन्न जिलों में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए विगत एक सप्‍ताह में 80 लाख रूपए से अधिक मूल्‍य के अवैध मादक पदार्थ सहित संपत्ति जब्‍त की हैं।

मंदसौर : जिले की नारायणगढ़ पुलिस द्वारा पुलिस पर फायर कर भागने वाले अंतर्राज्यीय डोडाचूरा तस्करों के विरुद्ध बडी कार्यवाही करते हुए 252 किलोग्राम डोडाचूरा डोडाचूरा, एक देशी पिस्टल मय राउण्ड, मोबाइल फोन तथा कार सहित लगभग 20 लाख 51 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

वहीं थाना शामगढ़ पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज करते हुए आरोपी के खेत में संतरे के बगीचे के बीच छुपाकर लगाए गए 384 गांजा पौधे जब्‍त किए। एक अन्‍य कार्रवाई में आरोपी से 68 ग्राम एमडी ड्रग्स पाउडर एवं 05 किलोग्राम डोडाचूरा जब्‍त किया गया। दोनों कार्रवाई में लगभग 2 लाख 3 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

गुना : जिले में मृगवास थाना पुलिस ने राजस्थान से अफीम तस्करी कर रहे बाइक सवार दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1 किलो 10 ग्राम अफीम एवं मोटरसाइकिल सहित लगभग 11 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। एक अन्‍य कार्रवाई में भी मृगवास थाना पुलिस ने नाकाबंदी कर 04 अंतर्राज्यीय गांजा तस्करों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 10 किलो 157 ग्राम अवैध गांजा एवं दो मोटरसाइकिल सहित लगभग 7 लाख 20 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार दोनों कार्रवाई में मृगवास थाना पुलिस ने 18 लाख 20 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

शिवपुरी : जिले के थाना करैरा पुलिस ने अवैध स्मैक बेचने आए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 43.06 ग्राम स्मैक जप्त की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 लाख 60 हजार रूपए है।

राजगढ़ : जिले में ऑपरेशन “शुद्धि” के तहत थाना भोजपुर पुलिस ने 46.50 ग्राम अवैध स्मैक सहित आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 4 लाख 60 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की। इसी प्रकार एक अन्‍य कार्रवाई में 35 ग्राम अवैध स्मैक के साथ 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर 3 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार दोनों कार्रवाई में भोजपुर पुलिस ने 8 लाख 10 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

भोपाल : क्राइम ब्रांच ने ट्रेन से भोपाल पहुंचे गांजा तस्करों के गिरोह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 05 महिलाओं सहित 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी घरेलू सामान की आड़ में लगभग 36 किलो गांजा भोपाल सप्लाई करने लाए थे। कार्रवाई में लगभग 4 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

वहीं एक अन्य कार्रवाई में क्राइम ब्रांच ने 7 किलो 670 ग्राम गांजा एवं मोबाइल फोन के साथ आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए लगभग 2 लाख 30 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

जीआरपी जबलपुर / शहडोल : नशे के विरुद्ध लगातार अभियान चलाते हुए जीआरपी शहडोल द्वारा ट्रेन में तस्करी कर ले जाया जा रहा 41 किलो गांजा जब्त किया गया। जप्त संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 4 लाख रुपये है।

दमोह : जिले में अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पटेरा पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से 02 किलो 864 ग्राम अवैध गांजा एवं एक मोबाइल फोन सहित लगभग 40 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। वहीं एक अन्‍य कार्रवाई में थाना पटेरा पुलिस ने ही कार्रवाई करते हुए 10 किलो 900 ग्राम गांजा सहित एक आरोपी को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 62 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। इस प्रकार दोनों कार्रवाई में पटेरा पुलिस ने 2 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

मैहर : जिले में विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 4.6 ग्राम अवैध स्मैक पाउडर एवं परिवहन में प्रयुक्त कार सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 1 लाख 70 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

नरसिंहपुर : “ऑपरेशन ईगल क्लॉ” के तहत नरसिंहपुर पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए 11.28 ग्राम अवैध स्मैक सहित लगभग 1 लाख 30 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

अनूपपुर : जिले में थाना जैतहरी पुलिस ने 8 किलो 207 ग्राम अवैध गांजा के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्‍त गांजे की अनुमानित कीमत लगभग 56 हजार रूपए है।

सीधी : जिले में ऑपरेशन “प्रहार 2.0” के तहत थाना जमोड़ी पुलिस ने 3 हजार 480 प्रतिबंधित ONEREX कफ सिरप जब्‍त की। कफ सिरप की अनुमानित कीमत लगभग 6 लाख 96 हजार रूपए है।

रीवा : जिले में थाना सगरा पुलिस ने नशे के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 115 शीशी अवैध ऑनरेक्‍स नशीली कफ सिरप एवं टीवीएस स्कूटी सहित 1 लाख 13 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की।

मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा समाज को नशामुक्त बनाने एवं युवाओं को मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु कठोर वैधानिक कार्रवाई निरंतर की जा रही है। मध्‍यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी थाना अथवा डायल-112 को दें।

 

समर्थ सिंह को 29 मई तक CBI रिमांड, त्विषा शर्मा मौत मामले में पूछताछ तेज

भोपाल

मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में आरोपित पति समर्थ सिंह को 29 मई तक की सीबीआई रिमांड पर सौंप दिया गया। वह अभी तक पुलिस रिमांड पर था। बुधवार को पुलिस ने उसे भोपाल जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया। यहां सीबीआई ने उसकी रिमांड मांगी थी।
पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी

वहीं, आरोपित सास और पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत के विरुद्ध प्रदेश सरकार व त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा की ओर से दायर याचिकाओं पर हाई कोर्ट जबलपुर में बुधवार को सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली। फिलहाल आदेश रोक लिया गया है।

CBI ने घर पहुंचकर किया क्राइम सीन रिक्रिएट

समर्थ सिंह की रिमांड मिलने के बाद सीबीआई टीम उसे लेकर उसके बागमुगालिया एक्सटेंशन स्थित घर पहुंची और घटनाक्रम को समझने के लिए क्राइम सीन रिक्रिएट किया। दिल्ली से आई विशेष फोरेंसिक टीम ने घर से वैज्ञानिक साक्ष्य, फिंगर प्रिंट्स और अन्य तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए। बुधवार को ही गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई।

भोपाल में अस्थायी कंट्रोल रूम बनाएगी CBI

इस बीच, सीबीआई ने भोपाल में अस्थायी कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी की है। दिल्ली सीबीआइ की ओर से भोपाल पुलिस कमिश्नर को एक आवेदन भेजकर मांग की गई है कि टीम को शहर में ऐसा स्थान मुहैया कराया जाए, जहां मामले से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज और साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके। आवश्यकता पड़ने पर आरोपितों व संदिग्धों को रोककर उनसे पूछताछ की जा सके।

CBI का इंटरविनर बनने का आवेदन हाई कोर्ट ने किया स्वीकार

जबलपुर प्रतिनिधि के अनुसार हाई कोर्ट में गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद करने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि वह अग्रिम जमानत की शर्तों का पालन नहीं कर रही हैं। पुलिस ने उन्हें 13 से 23 मई के बीच पांच नोटिस दिए थे लेकिन वह पूछताछ के लिए नहीं पहुंचीं। इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने 18 मई को पत्रकार वार्ता कर मृतका के चरित्र पर गंभीर आरोप लगाए थे। वह भौतिक साक्ष्य जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं करवा रही हैं।

CBI ने इंटरविनर बनकर की जमानत निरस्त करने की मांग

सीबीआई की तरफ से इंटरविनर बनने का आवेदन पेश करते हुए भी अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग की गई। सीबीआइ की ओर से तर्क दिया गया कि त्विषा के पहले पोस्टमार्टम के दौरान गिरिबाला सिंह की रिश्ते में लगने वाली बहन व एक अन्य व्यक्ति मौजूद था, जिन्हें उपस्थित नहीं रहना चाहिए था और यह जांच का विषय है। इसके अलावा दोनों आरोपितों के क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए गिरिबाला सिंह की अभिरक्षा आवश्यक है।
बचाव पक्ष ने आरोपों को नकारा और दी अपनी दलीलें

गिरिबाला सिंह की ओर से तर्क दिया गया कि डॉक्टरों ने एंग्जायटी, ड्रग्स के कारण त्विषा की स्थिति को देखते हुए गर्भपात की गोलियां दी थीं। त्विषा ने जिस मंजिल पर फांसी लगाई वहीं उसका किचन, बाथरूम व बेडरूम था। घटना के अगले दिन 13 मई को पुलिस ने उसे सील कर दिया था। उन्होंने और समर्थ सिंह ने शादी के बाद त्विषा को यूपीआई के माध्यम से सात लाख रुपये से अधिक दिए।

त्विषा ने कभी भी अपनी सास पर दहेज मांगने और प्रताड़ित करने की बात मायके पक्ष वालों से नहीं कही थी। त्विषा के सभी आरोप अपने पति के खिलाफ हैं, सास के खिलाफ नहीं।

 

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