योग और खजुराहो दोनों भारतीय संस्कृति के हैं अभिन्न स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

योग और खजुराहो दोनों भारतीय संस्कृति के हैं अभिन्न स्तंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्व धरोहर खजुराहो में हुआ “योग महोत्सव 2026”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम को वीडियो संदेश से किया संबोधित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय योग परम्परा को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर स्वस्थ, जागरूक एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योग और खजुराहो, दोनों ही सदियों से भारतीय संस्कृति के अभिन्न स्तंभ रहे हैं। हमारी सरकार योग के प्रचार के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है। योग को प्रदेश के घर-घर तक पहुंचाने के लिए आयुष विभाग द्वारा इन दिनों ”घर-घर योग-हर व्यक्ति निरोग” अभियान भी चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 25 दिवसीय काउंटडाउन के अवसर पर यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में आयोजित “योग महोत्सव 2026” कार्यक्रम को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित किया।

वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योग आज सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि ‘वन अर्थ-वन हेल्थ’ की भावना को साकार करने वाला जीवन दर्शन बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार घर-घर योग हर व्यक्ति निरोध के भाव से योग और आयुष चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। आयुष विभाग के माध्यम से आरोग्य मंदिरों, योग वेलनेस सेंटर्स और विभिन्न जनजागरुकता की गतिविधियों के माध्यम से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए सफल अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले काउंटडाउन इवेंट से देशभर में लाखों लोग जुड़ रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी भी योग को सहर्ष स्वीकार कर रही है। हम योग को सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़कर एक स्वस्थ, जागरूक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबके सहयोग से हम योग को हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय का यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। यह कार्यक्रम योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के प्रति केन्द्र और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्र और राज्य सरकार के आयुष मंत्रालय के अधिकारियों और जिला प्रशासन, छतरपुर को खजुराहो में इस विशेष आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम को केंद्रीय आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी और सांसद खजुराहो विष्णुदत्त शर्मा ने भी संबोधित किया।          

MP के 16 शहरों में पारा 44°C के पार, खजुराहो सबसे गर्म; 28 मई से 3 दिन बारिश का अलर्ट

भोपाल 
मध्यप्रदेश में नौतपा की शुरुआत भले ही आंधी और बूंदाबांदी के साथ हुई हो, लेकिन गर्मी का सितम कम नहीं हुआ। प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 28 मई से अगले तीन दिन तक कई जिलों में प्री-मानसून एक्टिविटी तेज हो सकती है। तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।  

एमपी में नौतपा के शुरुआती 2 दिन आंधी-बारिश का दौर रहा। वहीं, 28 मई से लगातार 3 दिन तक प्रदेश के अधिकांश हिस्से में पानी गिरने का अलर्ट है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो यह प्री-मानसून की दस्तक है। 10 से 16 जून के बाद प्रदेश में मानसून एंट्री कर सकता है। 

बुधवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में तीव्र लू का रेड अलर्ट है। टीकमगढ़ में रात में पारा बढ़ा हुआ रहेगा। वहीं, ग्वालियर, जबलपुर में तीव्र लू का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल में भी लू चल सकती है।

खजुराहो और नौगांव बने हीट सेंटर
मंगलवार को छतरपुर का खजुराहो प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। नौगांव में पारा 45.6 डिग्री तक पहुंच गया। दतिया में 45.2 डिग्री, दमोह, सतना और टीकमगढ़ में 45 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। रीवा 44.8 डिग्री और राजगढ़ 44.6 डिग्री के साथ भीषण गर्मी की चपेट में रहे। ग्वालियर, श्योपुर, गुना, नरसिंहपुर, सागर, मंडला, मुरैना और रायसेन समेत कई शहरों में भी पारा 44 डिग्री के आसपास पहुंच गया। बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ज्यादा गर्म रहा, जहां तापमान 44.1 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 43.2 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.2 डिग्री तापमान रहा।

नौतपा में पहली बार नहीं बदला मौसम
भोपाल में नौतपा के दौरान बारिश या बूंदाबांदी का सिलसिला नया नहीं है। पिछले 14 साल में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि 2 बार हल्की बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी शुरुआती दिनों में मौसम ने करवट ली है। हालांकि 2018 और 2019 जैसे साल में नौतपा के दौरान रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी थी और औसत तापमान 43 डिग्री से ऊपर पहुंच गया था।

कई जिलों में लू और तीव्र लू का अलर्ट
रेड अलर्ट: निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा।

ऑरेंज अलर्ट: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, सीधी, सिंगरौली, मंडला, बालाघाट समेत 19 जिले।

येलो अलर्ट: भोपाल, उज्जैन, विदिशा, रायसेन, सीहोर, देवास, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर सहित 22 जिले।

इधर, इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा और नर्मदापुरम जैसे जिलों में तेज गर्मी का असर बना रहेगा।

दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह
मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जरूरी काम होने पर ही बाहर निकलें, पर्याप्त पानी पीते रहें और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों को खास सतर्क रहने को कहा गया है।

 

उज्जैन में वंदे भारत ट्रेन पर पथराव, 4 कोच के कांच टूटे; रेलवे पुलिस जांच में जुटी

उज्जैन
 मध्य प्रदेश के उज्जैन में रेल्वे स्टेशन से 200 मीटर की दूरी पर वंदे भारत ट्रेन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक एक के बाद एक पथराव होने लगे. देखते ही देखते उत्पातियों ने ट्रेन के 4 कोच के कांच फोड़ दिए. पथराव इतनी तेज था कि कोच के कांच तड़क गए. गनीमत रही इस दौरान यात्री सुरक्षित रहे किसी को कोई चोट नहीं लगी। 

ग्लास टूटने की तस्वीरें आईं सामने
जैसे ही घटना की जानकारी सामने आई मामले में रेल्वे ने तत्काल संज्ञान लेते हुए RPF थाने में FIR दर्ज करवाई. रेलवे पुलिस अब CCTV फुटेज व अन्य साक्ष्य के आधार पर उत्पातियों की तलाश में जुट गई है. घटना के बाद यात्री सहम उठे. वहीं जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंची रेलवे पुलिस ने जांच पड़ताल और पूछताछ शुरू कर दी है. घटना सोमवार देर शाम की है. जिसको लेकर अब FIR दर्ज की गई है. वहीं ट्रेन के ग्लास टूटने की तस्वीरे बुधवार सुबह सामने आई हैं। 

अचानक होने लगा वंदे भारत ट्रेन पर पथराव
पूरा मामला सोमवार देर शाम लगभग 07:30 बजे के आस पास का है. वंदे भारत ट्रेन भोपाल के रास्ते उज्जैन आ रही थी. उज्जैन स्टेशन से 200 मीटर दूरी पर गदा पुलिया के पास नीलगंगा क्षेत्र में अचानक ट्रेन पर पथराव होने लगा. कुल 4 कोच इस दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं. देखते ही देखते ट्रेन में मौजूद यात्रियों में हड़कंप मच गया. यात्री कुछ समझ पाते कि ट्रे स्टेशन पर पहुंच गई. जहां यात्रियों ने पुलिस से शिकायत की. जिसके बाद पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की. घटना को लेकर रेलवे पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा, ”संबंधित अधिकारी मामले को देख रहे हैं. सभी यात्रि सुरक्षित हैं। 

पुलिस ने की आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज
RPF थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया, ”सभी यात्री सुरक्षित है. उज्जैन में वंदे भारत ट्रेन में ऐसा पहली बार हुआ है. आगे से एसी घटना ना हो इसके लिए उत्पातियों को दबोचकर कड़ी कार्रवाईं की जाएगी. शिकायत पर FIR दर्ज कर अज्ञात उत्पातियों के विरुद्ध जांच एवं तलाश शुरू कर दी है। 

ट्विशा केस में आज बड़ा दिन, गिरीबाला सिंह की जमानत पर फैसला; CBI पहुंची हाई कोर्ट

भोपाल/जबलपुर
भोपाल के हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला तेज़ी से गर्माता जा रहा है. पीड़ित परिवार कि मांग पर राज्य सरकार ने जांच का जिम्मा सीबीआई के हाथों सौंप दिया है. सीबीआई ने पूरे मामले को टेक ओवर भी कर लिया है और जांच भी शुरू कर दी है. आज बुधवार 27 मई को उच्च न्यायलय में पूर्व न्यायाधीश और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह कि अंतरिम जमानत को चुनौती देते हुए सुनवाई है. पहले पुलिस ने जमानत को चुनौती दी थी लेकिन अब सीबीआई के पास पूरा केस पहुंच गया है तो हाई कोर्ट में सीबीआई कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेगी। 

आज कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी CBI
भोपाल के चर्चित ट्विशा सुसाइड केस में अब जांच पूरी तरह सीबीआई के हाथों में आ चुकी है. मामले की केस डायरी तैयार होने के बाद सीबीआई बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई में अपना पक्ष रखेगी. दरअसल, मामले में गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ पहले से ही याचिका दायर है. पिछली सुनवाई के दौरान भोपाल पुलिस ने भी जमानत का विरोध किया था. अब जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी इस मामले में कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखेगी और सूत्रों के मुताबिक अग्रिम जमानत को चुनौती भी दे सकती है। 

गिरिबाला सिंह की जमानत पर फैसला
बताया जा रहा है कि, सीबीआई ने केस से जुड़ी तमाम दस्तावेजी प्रक्रिया और केस डायरी को व्यवस्थित कर लिया है. एजेंसी अब तक पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों, बयान और डिजिटल एविडेंस का परीक्षण कर रही है. इसी आधार पर हाई कोर्ट में विस्तृत जवाब पेश किया जा सकता है. बुधवार होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह तय करेगा कि गिरिबाला सिंह को मिली राहत बरकरार रहेगी या जांच एजेंसी कोर्ट से जमानत निरस्त करने की मांग करेगी। 

निकलवाई जा रही गिरीबाला, समर्थ और ट्विशा कीCDR 

मामले में गठित एसआईटी ने गिरिबाला सिंह की CDR (Call detail report) को लेकर कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि गिरीबाला सिंह, समर्थ सिंह और ट्विशा की CDR सुरक्षित रखने की मांग को देखते हुए 12 मई से 20 मई तक की CDR को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित मोबाइल सिम कंपनियों को पत्र लिखे गए हैं। 

कंपनी से डेटा मिलने पर इसे भी केस डायरी में जोड़ा जाएगा. बता दें कि सीडीआर को लेकर ट्विशा के परिवार की ओर से वकील अंकुर पांडे ने यह अर्जी लगायी थी. ट्विशा के परिवार का आरोप है कि उसकी मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने कई लोगों को कॉल किए थे जिनमें से कुछ प्रभावशाली लोग भी थे। 

गिरिबाला ने कई लोगों को किए थे कॉल
ट्विशा के परिवार ने गिरीबाला की ये कॉल डीटेल अपने स्तर पर पहले ही जारी की थी और ऐसा दावा किया थी कि बेटी की मौत के अगले दिन यानी 13 मई को गिरीबाला ने कई कॉल किए थे. जज लेवल के लोगों से बातचीत के अलावा गिरीबाला ने सीसीटीवी इंस्टॉल करने वाले युवकों को भी कॉल किया था। 

उसी समय परिवार ने मांग की थी कि इन सभी नंबर्स की जांच की जाएं और इनसे संबंधित समस्त कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टॉवर डंप एवं टॉवर लोकेशन डेटा, इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) लॉग्स, ई-मेल कम्युनिकेशन, एसएमएस, व्हाट्सएप चैट्स के बैकअप, सोशल मीडिया कम्युनिकेशन, क्लाउड डेटा, लोकेशन हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्डिंग और डेटा ट्रांसफर हिस्ट्री समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूतों को तत्काल सीज किया जाए। 

सीसीटीवी फुटेज से केस में आया मोड़
गौरतलब है कि इस मामले में हाल में सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने जांच को नया मोड़ दे दिया है और कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं. फुटेज में ट्विशा शर्मा को बिल्डिंग की सीढ़ियों से छत की तरफ जाते हुए देखा गया, जबकि करीब एक घंटे बाद उनके पति समर्थ और तीन अन्य लोग उन्हें नीचे लाते नजर आए। 

सीसीटीवी में कैद यह घटनाक्रम अब जांच एजेंसियों के लिए अहम सबूत माना जा रहा है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उस एक घंटे के दौरान छत पर आखिर क्या हुआ था. जानकारी के मुताबिक, ट्विशा आखिरी बार हाथ में हेडफोन लिए सामान्य स्थिति में सीढ़ियां चढ़ती दिखाई दी थीं, लेकिन लगभग एक घंटे बाद उनकी हालत बेहद गंभीर नजर आई. यही कारण है कि परिजन इस मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। 

ट्विशा के परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
12 मई को गिरिबाला सिंह की बहू और क्रिमिनल लॉयर समर्थ सिंह की पत्नी ट्विशा ने आत्महत्या कर ली थी. ट्विशा के परिजनों ने समर्थ सिंह और गिरिबाला पर कई गंभीर आरोप लगाए थे और पुरे मामले की सीबीआई जांच, सेंकण्ड पीएम कराने और गिरिबाला सिंह कि जमानत ख़ारिज करने कि मांग मुख्यमंत्री से की थी. मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिया था कि पूरे मामले कि निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी. हालांकि पुलिस ने विशेष टीम का गठन भी किया था लेकिन पीड़ित परिवार पुलिस कि जांच से संतुष्ट नहीं था. ट्विशा सुसाइड केस में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां भी बेहद सतर्क नजर आ रही हैं। 

सबूतों से मैच नहीं खा रहे समर्थ के बयान
ट्विशा शर्मा डेथ केस में अब पति समर्थ सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. मामले की जांच अब पूरी तरह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के हाथों में पहुंच चुकी है और एजेंसी ने अपनी पड़ताल भी शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, SIT की पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह द्वारा कई सवालों पर विरोधाभासी जवाब दिए गए, जिसके बाद जांच एजेंसियों को शक और गहरा गया है. बताया जा रहा है कि SIT ने घटना वाली रात की टाइमलाइन, अस्पताल ले जाने के समय, पुलिस को सूचना देने में हुई देरी और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड को लेकर समर्थ सिंह से लगातार पूछताछ की थी। 

जांच के दौरान कुछ जवाब पहले दिए गए बयानों से मेल नहीं खा रहे थे. इसी कारण अब जांच एजेंसियां यह मानकर चल रही हैं कि मामले में कई अहम तथ्य छुपाए गए हो सकते हैं. टीम ने बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित घर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया. करीब आधे घंटे तक मौके का बारीकी से मुआयना किया गया और घटना के हर पहलू को समझने की कोशिश की गई। 

मौत के बाद पुलिस को सूचना देने में देरी क्यों की?
सूत्रों के अनुसार, CBI अब इस बात की जांच कर रही है कि ट्विशा की मौत के बाद पुलिस को सूचना देने में इतनी देरी क्यों हुई. परिवार का आरोप है कि इसी दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की गई. यही कारण है कि अब एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों पर विशेष फोकस कर रही है. CBI यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना वाली रात घर के अंदर क्या हुआ था। 

तनाव में थी ट्विशा
ट्विशा द्वारा अपने परिवार को किए गए आखिरी फोन कॉल, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है. जांच एजेंसी उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है, जो घटना के बाद संपर्क में आए थे. मामले में दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोप पहले ही सामने आ चुके हैं. FIR में यह उल्लेख है कि शादी के बाद ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. परिवार ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त पैसों की मांग, चरित्र पर शक और मानसिक दबाव के कारण ट्विशा तनाव में थी। 

भोपाल में IPS अधिकारी की 16 वर्षीय बेटी ने की आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस

भोपाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक आईपीएस अधिकारी की 16 वर्षीय बेटी ने खुदकुशी कर ली. यह दिल दहला देने वाला हबीबगंज थाने क्षेत्र में चार इमली स्थित सरकारी बंगले का है, जहां नाबालिग ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस की टीम को वहां से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. ऐसे में बच्ची ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह सामने नहीं आ सकी है। 

बताया जा रहा है कि घर के हेल्पर ने लड़की को दुपट्टे से बने फंदे पर झूलते देखा और चीख-पुकार मच गई. फिलहाल, पुलिस ने मृतक लड़की का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने आखिरी बात किससे की थी या फिर मैसेज आदि में ऐसी कोई वजह मिले जिसकी वजह से लड़की यह कदम उठा सकती है। 

AIG हैं मृतक लड़की के IPS पिता
बता दें, मृतक नाबालिग लड़की के IPS अधिकारी पिता पुलिस हेडक्वॉर्टर्स (PHQ) में असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (AIG) पद पर पोस्टेड हैं. लड़की की मां रजिस्ट्रार गैस राहत के पद पर हैं। 

घर में अकेली थी लड़की  
जब लड़की ने यह खौफनाक कदम उठाया, उस समय घर में उसके अलावा और कोी मौजूद नहीं था. बुधवार (27 मई) की सुबह माता-पिता दोनों ऑफिस गए हुए थे. उनका एक बड़ा बेटा भी है जो उस समय घर के बाहर था. अब पुलिस मृतक लड़की के परिजनों, दोस्तों, स्कूल में टीचर्स आदि से बात कर यह समझने की कोशिश करेगी कि सुसाइड के पीछे की वजह क्या है. वहीं, नाबालिग के कमरे में उसके फोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों की भी जांच की जाएगी। 

अंबुज पांडेय, 2012 से सक्रिय  पत्रकारिता में हैं. वर्तमान में ABP न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पॉडेंट, भोपाल मध्य प्रदेश में कार्यरत हैं. न्यूज़ पॉइंट, NNIS न्यूज़ एजेंसी, APN न्यूज़, ANI, और PTI में बतौर राजनैतिक संवाददाता काम किया . पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के साथ-साथ, जन सरोकारों से जुड़ी खबरें, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें और विषम परिस्थिति में प्राकृतिक आपदाएं कवर करने का अनुभव है। 

सिंहस्थ: 2028, श्रद्धालुओं को मिलेगा माँ शिप्रा के जल से स्नान का पुण्य लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सिंहस्थ: 2028, श्रद्धालुओं को मिलेगा माँ शिप्रा के जल से स्नान का पुण्य लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गरिमामय रहा शिप्रा तीर्थ परिक्रमा का समापन समारोह
सुगम संगीत संध्या में दरभंगा की सुश्री मैथिली ठाकुर ने दी संगीतमयी प्रस्तुति

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 में 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई में निर्मित शिप्रा के घाट श्रद्धालुओं को पुण्य स्नान का लाभ प्रदान करेंगे। मां शिप्रा के स्वच्छ जल की उपलब्धता आयोजन को पावन बनाएगी। लगभग छह दशक बाद यह संभव होगा जब श्रद्धालु सिर्फ माँ शिप्रा के प्रवाहमान जल से सिंहस्थ के लिए पहुंचकर स्नान कर सकेंगे। गत सिंहस्थ : 2016 में माँ नर्मदा के जल से स्नान की सुविधा प्राप्त होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने कामना की थी कि मां शिप्रा का जल पूरी तरह से प्रवाहित हो और स्नान लाभ ले सकें। श्रद्धालुओं की आकांक्षा को पूर्ण करने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। बाबा महाकाल और संतों के आशीर्वाद से श्रेष्ठ प्रबंध कर हम सिंहस्थ: 2028 को यादगार बनाएंगे। सिंहस्थ के आयोजन से नए कीर्तिमान बनेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मां शिप्रा के आशीर्वाद से समारोह में अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहे हैं। दीपामलिकाएं देखकर लगता है जैसे दीप पर्व आ गया हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि सभी को यश प्राप्त हो। त्रिवेणी से सिद्धनाथ तक शिप्रा जी के घाट पवित्र माने जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से अनेक कार्य संचालित हैं, जो सिंहस्थ के आयोजन को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का कार्य करेंगे।

भारत की मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत का संरक्षण भी हो रहा है। हाल ही में हुए न्यायालय के निर्णय भी परिपालन की दृष्टि से स्वर्णकाल का आभास करवाते हैं। देश के नागरिक सभी निर्णयों पर भरोसा करते हुए परस्पर सहयोग और समरसता का परिचय दे रहे हैं। अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के भूमि-पूजन और लोकार्पण में ऐसे सभी लोग उपस्थित हुए जिन्होंने मंदिर के संबंध में वर्षों तक न्यायालय में मुकदमा लड़ा। हमारे देश में मेलजोल की उत्कृष्ट परम्परा है।

राजभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजाभोज का उज्जैन से लेकर भोपाल तक संबंध है। धार में भोजशाला में मां वागदेवी की प्रतिमा स्थापित होगी। न्यायालय के निर्णय के बाद यह मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का शासन काल सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल की याद दिलवाता है, जिसमें प्रत्येक नागरिक का हित सर्वोपरि रहा।

जल गंगा संवर्धन अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने तीन माह से अधिक अवधि के जल गंगा संवर्धन अभियान में कुओं- तालाबों, नदियों, पोखर, जलाशय और अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण संवर्धन के कार्यों का संचालन किया है। इसमें जनता की भागीदारी भी हो रही है। मध्यप्रदेश नदी जोड़ो अभियान के क्रियान्वयन में अग्रणी बना है।

समारोह में दरभंगा से कार्यक्रम प्रस्तुति के लिए आई गायिका और बिहार विधानसभा की सदस्य सुश्री मैथिली ठाकुर ने भजन प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से पूर्व सुश्री ठाकुर का मध्यप्रदेश आगमन पर स्वागत किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज भारत भवन में सदानीरा समागम का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भारत भवन में सदानीरा समागम का करेंगे शुभारंभ

जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगा राष्ट्रीय विमर्श
भारत भवन में 27 मई से 2 जून तक चलेगा सात दिवसीय समागम
देश-विदेश के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और कलाकार होंगे शामिल
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, चित्रकला कार्यशाला और जल-केंद्रित प्रदर्शनियां होंगी मुख्य आकर्षण

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बुधवार 27 मई को भारत भवन में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव “सदानीरा समागम” का शुभारंभ करेंगे। वीर भारत न्यास द्वारा जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति, पंचमहाभूतों तथा सतत विकास के विषयों पर केंद्रित यह गरिमामयी आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कलाकार सहभागिता करेंगे। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर और संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी उपस्थित रहेंगे।

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस सात दिवसीय समागम में भारतीय दर्शन के पंचमहाभूत-जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि-पर आधारित विभिन्न वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान पर देश-विदेश के विशेषज्ञ गहराई से मंथन करेंगे। इस राष्ट्रीय विमर्श में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), आईआईएम बोधगया जैसी देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी शामिल होकर अपने विचार साझा करेंगे।

समागम में वैचारिक मंथन के साथ प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजनों की धूम रहेगी, जिसमें नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस दौरान भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, ‘गोवर्धन लीला’ और ‘गंगा यात्रा’ की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी। इसके साथ ही ‘जल, जंगल, जीवन’ पर केंद्रित राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला और पारंपरिक चित्र शैलियों में जल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के नामचीन कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन स्थल पर म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय के सहयोग से जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों पर आधारित चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी।

कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिनमें वीर भारत न्यास और मैपकॉस्ट द्वारा प्रकाशित ‘अंतर्जली यात्रा’, ‘पुरोवाक्’, प्रेमशंकर शुक्ल की ‘आत्मा की घाटी में पानी का संगीत’ और राजेश्वर त्रिवेदी की ‘जल, संस्कृति और स्थापत्य’ शामिल हैं। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी सहित केन्द्रीय भूजल बोर्ड, नर्मदा समग्र जैसी अनेक संस्थाएं और जिला प्रशासन भोपाल सहयोगी के रूप में अपना सक्रिय योगदान देंंंगे।

 

चचाई पॉवर प्लांट ने रचा इतिहास, अमरकंटक यूनिट लगातार 600 दिनों से चालू

चचाई पॉवर प्लांट का महा-रिकॉर्ड

लगातार 600 दिनों से चल रही है अमरकंटक की यह यूनिट
मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी इतिहास में पहली बार

अमरकंटक

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के इतिहास में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अमरकंटक थर्मल पॉवर स्टेशन चचाई की 210 मेगावॉट क्षमता वाली यूनिट ने लगातार 600 दिनों तक बिना किसी बाधा के निरंतर बिजली उत्पादन करने का एक अभूतपूर्व महा-रिकॉर्ड स्थापित किया है। कंपनी के इतिहास में आज तक किसी भी जनरेटिंग यूनिट ने इतने लंबे समय तक बिना बंद हुए उत्पादन नहीं किया है। प्लांट की यह ऐतिहासिक यात्रा 1 अक्टूबर 2024 से शुरू हुई थी, जो आज भी सफलतापूर्वक निरंतर जारी है।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्लांट के नेतृत्व और पूरी तकनीकी टीम को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने विश्वास जताया है कि अमरकंटक थर्मल पॉवर स्टेशन भविष्य में भी उत्कृष्टता की इस भावना को बनाए रखेगा और राज्य की प्रगति के लिए सफलता के कई नए कीर्तिमान गढ़ेगा।

प्रदर्शन के बेमिसाल आंकड़े

इस असाधारण संचालन अवधि के दौरान यूनिट ने तकनीकी और कार्यकुशलता के मोर्चे पर नए मानदंड स्थापित किए हैं। प्लांट उपलब्धता कारक 98.81% दर्ज किया गया, जो इसकी निरंतर उपलब्धता को दर्शाता है। प्लांट लोड फैक्टर 95.6% के बेहद उच्च स्तर पर रहा, जो बेहतरीन बिजली उत्पादन क्षमता का प्रमाण है।

सहायक बिजली खपत मात्र 9.28% रही, जिससे बिजली की बचत और कार्यकुशलता प्रमाणित होती है।

कुशल नेतृत्व और टीम के समर्पण का परिणाम

बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी तकनीकी खराबी, ग्रिड ट्रिपिंग या फोर्स आउटेज के थर्मल प्लांट को चलाना एक असाधारण तकनीकी चुनौती होती है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय सूक्ष्म और सटीक योजना, मजबूत प्रिवेंटिव मेंटेनेंस (निवारक रखरखाव) प्रथाओं, लगातार की जा रही कड़ी डिजिटल निगरानी और चचाई प्लांट की ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस टीम के कुशल नेतृत्व और अटूट समर्पण को दिया है।

मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं को मिला सीधा लाभ

इस उल्लेखनीय उपलब्धि से न केवल अमरकंटक पॉवर स्टेशन का नाम देश के अग्रणी बिजली घरों में शामिल हुआ है, बल्कि इससे मध्यप्रदेश के आम उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत मिली है। यूनिट के लगातार चालू रहने से राज्य को बिना किसी रुकावट के निरंतर और सस्ती बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी मजबूती मिली है। यह रिकॉर्ड प्रदर्शन अब मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग के अन्य बिजली उत्पादन केंद्रों के लिए भी एक अनुकरणीय मानदंड का काम करेगा।

 

नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन

नर्मदापुरम बना प्रदेश का एकमात्र जिला जहां चारों प्रकार का होता है रेशम उत्पादन

मालाखेड़ी, पचमढ़ी, मढ़ई के रेशम केंद्रों से हजारों किसानों को हो रहा लाभ

भोपाल 

प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान मिल रही है। नर्मदापुरम जिले ने रेशम उत्पादन में प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले में मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा, चारों प्रकार का रेशम उत्पादित हो रहा है। नर्मदापुरम प्रदेश का पहला जिला है जहां चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। जिले के रेशमी वस्त्र अब फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी बिक रहे हैं।

मालाखेड़ी बना रेशम उत्पादन का मुख्य केंद्र

जिले का मुख्य रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित है। यहाँ “फार्म से फेब्रिक” तक पूरी प्रक्रिया होती है।

    वर्ष 2025 में मालाखेड़ी केंद्र में 742 किलोग्राम मलवरी रेशम धागा उत्पादन हुआ।

    32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी दी गई, जबकि 415 किलोग्राम धागे की ट्विस्टिंग में 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये मिले।

    मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी संचालित है। यहाँ से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को 51.99 लाख रुपये की आय हुई।

    मालाखेड़ी में तैयार प्राकृत ब्रांड की साड़ियां और परिधान शोरूम में भी बिक रहे हैं।

पचमढ़ी और मढ़ई में विस्तार

    पचमढ़ी रेशम केंद्र में 5 एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम का पौधरोपण कर 500 नग ककून उत्पादन किया जा रहा है।

    मढ़ई रेशम उत्पादन केंद्र को सिल्क टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ पर्यटक रेशम पालन की प्रक्रिया देखने आते हैं।

जिले में 28 केंद्र सक्रिय

नर्मदापुरम में कुल 16 मलबरी रेशम केंद्र और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनसे हजारों किसान और स्थानीय महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

2025 में जिले में मलबरी रेशम ककून उत्पादन 15,426.5 किलोग्राम रहा, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला। टसर ककून उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है।

रेशम से दवाइयाँ भी बन रहीं

मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम के धागे से दवाइयाँ और मेडिकल उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभ भाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के साथ अनुबंध कर यहाँ पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज बनाए जा रहे हैं।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर

रेशम केंद्रों के फिर से शुरू होने से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। जिससे लखपति दीदियों की संख्या में भी वृद्धि होगी। नर्मदापुरम की यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है और जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

 

भोपाल की सड़कों पर हाई-टेक ड्रोन कैमरों की नजर, लाइव फीड से कट रहे चालान

भोपाल 

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अगर आप अपनी गाड़ी किसी व्यस्त सड़क किनारे पार्क करने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। भोपाल पुलिस अब आसमान से आप पर नजर रख रही है। राज्य में अपनी तरह की इस पहली पहल में, ट्रैफिक पुलिस ने नो-पार्किंग जोन में वाहन खड़े करने वालों को पकड़ने और उनका चालान काटने के लिए ड्रोन-माउंटेड कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस हाई-टेक मुहिम की शुरुआत सोमवार से औपचारिक रूप से कर दी गई है। सबसे ज्यादा फोकस एमपी नगर और वीआईपी रोड जैसे भारी ट्रैफिक वाले और संकरे रास्तों पर किया जा रहा है।

इन इलाकों में भी बढ़ाई गई चौकसी
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, शहर की करीब एक-तिहाई सड़कें केवल अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों के कारण जाम रहती हैं। इसी को देखते हुए ड्रोन सर्विलांस का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब एमपी नगर और वीआईपी रोड के अलावा बागसेवनिया, मिसरोद और नर्मदापुरम रोड के कुछ हिस्सों पर भी ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पहले इन ड्रोन का इस्तेमाल केवल दुर्घटना स्थलों के दस्तावेज़ीकरण के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका उपयोग सीधे नियम तोड़ने वालों की पहचान करने और उनके वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए ई-चालान जेनरेट करने के लिए हो रहा है।

कंट्रोल रूम से हो रही है लाइव मॉनिटरिंग
अतिरिक्त आयुक्त मोनिका शुक्ला ने बताया कि औपचारिक चालान की कार्रवाई शुरू करने से पहले एक महीने तक इसका कड़ा ट्रायल किया गया था। फिलहाल विभाग के पास दो हाई-टेक ड्रोन हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बड़ी सभाओं के दौरान भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया जा रहा है। वहीं पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इन ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम को ट्रांसफर होती है। इससे न सिर्फ नो-पार्किंग वालों पर कार्रवाई होगी, बल्कि कहीं भी जाम लगने पर तुरंत पुलिस बल को मौके पर भेजा जा सकेगा। साथ ही, ये ड्रोन क्षतिग्रस्त डिवाइडर जैसी सड़क इंजीनियरिंग की कमियों को पहचानने में भी मदद करेंगे।

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