जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में

जनगणना 2027 : मध्यप्रदेश में 2 करोड़ 39 लाख से अधिक मकानों की गणना पूर्ण, फील्ड कार्य अंतिम चरण में

डिजिटल जनगणना अभियान को प्रदेशवासियों का व्यापक सहयोग
30 मई तक पूर्ण होगा मकान सूचीकरण कार्य

भोपाल

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य तेज गति से अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। प्रदेश में 01 मई से प्रारंभ हुआ यह फील्ड कार्य 30 मई 2026 तक संचालित किया जा रहा है। राज्य के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार एवं अन्य संरचनाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से संकलित की जा रही है।

सचिव गृह एवं नोडल अधिकारी जनगणना कार्य श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में जनगणना कार्य निर्धारित समय-सीमा के अनुसार निरंतर प्रगति पर है। राज्य में 1 लाख 37 हजार से अधिक मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। दिनांक 25 मई 2026 तक प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 लाख 34 हजार 309 मकान सूचीकरण ब्लॉक में कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 2 करोड़ 39 लाख 9 हजार 808 मकानों की गणना की जा चुकी है। शेष कार्य भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण किए जाने के लिये सतत प्रयास किए जा रहे हैं तथा 30 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया संचालित की गई थी, जिसमें 7 लाख 46 हजार 158 परिवारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की। नागरिकों की इस सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को गति एवं व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ।

इस बार जनगणना प्रक्रिया पूर्णतः डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है। प्रगणकों द्वारा एचएलओ ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज की जा रही है तथा कार्य की निगरानी भी डिजिटल प्रणाली से की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जनगणना कार्य अधिक प्रभावी एवं व्यवस्थित रूप से संपादित किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 को सफल बनाने के लिये जिला प्रशासन, जनगणना अधिकारियों, प्रगणकों एवं आमजन द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।

प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वे प्रगणकों को आवश्यक एवं सही जानकारी उपलब्ध कराकर जनगणना कार्य में सहयोग प्रदान करें। जनगणना से प्राप्त आँकड़े शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान

धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ

 धार 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया।

धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।

 

Development Drive: एक नई सड़क बदलेगी खंडवा की तस्वीर, तीन ग्रोथ सेंटर होंगे सीधे कनेक्ट

खंडवा
शहर की किस्मत एक बायपास रोड से खुलने की संभावना है। खंडवा-इंदौर रोड के बाद रूधि-देशगांव बायपास मार्ग पर सबसे ज्यादा विकास की संभावनाएं देखी जा रही है। इस रोड पर एक निर्माणाधीन, एक प्रस्तावित और एक पूर्व से चल रहा औद्योगिक सेंटर आ रहा है। जिसके चलते खंडवा-रूधि बायपास नए उद्योग धंधों का हब बनने की कगार पर है। इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में इस रोड पर जमीन के भाव भी बेतहाशा बढ़े हैं।

521 करोड़ की लागगत से बन रहा फोरलेन
देशगांव से रूधि तक बन रहे फोरलेन रोड की लंबाई 28.68 किमी है और इसकी लागत 521.21 करोड़ की है। भविष्य में यह रोड बैतूल, खंडवा, खरगोन, बड़वानी से बड़ोदरा तक जाएगा। जिसमें मप्र में इसकी लंबाई 105.778 किमी की रहेगी। फिलहाल इस रोड का काम लगभग 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रोड में दो बड़े रेल ओवर ब्रिज है, जिनका काम रेलवे के सुपरविजन में चल रहा है। चार माइनर ब्रिज में से तीन पूरी तरह से कंपलिट हो चुके हैं और चौथे माइनर ब्रिज का काम भी अंतिम चरण में है। इस रोड पर 12 अंडर पास ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं।

इंवेस्टर्स की पहली पसंद बन रहा
रूधि-देशगांव बायपास पर कुल 15 गांव स्थित है। पिछले तीन-चार में पंजीयक विभाग का रेकॉर्ड देखा जाए तो सबसे ज्यादा बिल्डर्स, इंवेस्टर्स, उद्योगपतियों सहित कॉलोनी डेवलपर्स ने इस रोड पर ही निवेश किया है। इस रोड पर कई उद्योगपतियों, इंवेस्टर्स द्वारा भविष्य में बड़े होटल्स, मॉल, बिजनेस पार्क तक खोले जाने की योजनाएं है। यहां जमीन की बढ़ती मांग को देखते हुए पंजीयक विभाग भी इस रोड पर सिंचित और असिंचित जमीनों के भाव एक समान कर चुका है। दो साल में यहां जमीन के भाव करीब 120 प्रतिशत तक बढ़े हैं।

रूधि औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगी ग्रोथ
इस रोड पर इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर देशगांव दो नेशनल हाईवे का सेंटर बन रहा है। यहां जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र द्वारा एक लॉजिस्टिक हब प्रस्तावित है। एक कॉलोनाइजर भी यहां बिजनेस पार्क डेवलप करने वाले है। इस मार्ग पर खंडवा के पास सुरगांव निपानी ग्रोथ सेंटर का काम तेजी से चल रहा है, जो इस साल के अंत तक पूरा होने की संभावना है। इंदौर-महाराष्ट्र से सीधी कनेक्टिविटी के चलते ग्रोथ सेंटर में कई उद्योग आने को तैयार है। वहीं, रूधि ग्रोथ सेंटर जो कई वर्षों से खाली पड़ा है, उसे भी ग्रोथ मिलने की पूरी संभावना है।

महाराष्ट्र, गुजरात से सीधी कनेक्टिविटी
एनएचएआइ द्वारा नागपुर-बड़ोदरा मार्ग का काम शुरू कर दिया गया है, जिसमें सबसे मुख्य रूधि-देशगांव बायपास है। बड़ोदरा-बैतूल हाईवे पर भी पांच चरण में से दो का काम चल रहा है। बैतूल से ये रोड आगे महाराष्ट्र के नागपुर से जुड़ रहा है। बैतूल के हैवारखेड़ी से जुलवानिया (बड़वानी) तक सात चरणों में 286 किमी की रोड बनेगी। इसमें खंडवा जिले अंतर्गत इस मार्ग के पहले चरण का काम रूधि-देशगांव बायपास के रूप में चल रहा है।

दिसंबर के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य
देशगांव-रूधि फोरलेन हाईवे का काम 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। यह रोड महाराष्ट्र और गुजरात के साथ इंदौर-इच्छापुर-एदलाबाद से जुडऩे पर दक्षिण और उत्तर भारत से भी सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। भविष्य में इस मार्ग पर विकास की अपार संभावनाएं हैं।
आशुतोष सोनी, परियोजना निदेशक एनएचएआइ

महिलाओं के नाम बढ़ीं संपत्तियां, 1 अप्रैल से अब तक 10 हजार महिलाओं के नाम हुई रजिस्ट्रियां

भोपाल 

मौजूदा वित्तवर्ष में हुई रजिस्ट्री में आधी आबादी की संपत्ति की हिस्सेदारी 65 फीसदी तक हो गई है। हर साल 7 फीसदी की दर से ये बढ़ोतरी हो रही है। हालांकि, कुल संपत्तियों में महिलाओं का हिस्सा 19 फीसदी ही है। मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में पंजीयन को लेकर सामने आ रही रोजाना की रिपोर्ट से ये स्थिति सामने आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं को रजिस्ट्री में दो फीसदी तक मिलने वाली छूट को बताया जा रहा है।

संपत्ति के क्रय विक्रय को लेकर हो रहे पंजीयन में रोजाना महिलाओं के नाम जिले में औसतन 75 नए पंजीयन किए जा रहे हैं। ये क्रय विक्रय के औसत पंजीयन का 65 फीसदी है।

बीते साल महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति हुई
भोपाल की शहरी संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी साल दर साल बढ़ोतरी कर रही है। बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 की बात करें तो प्रदेश भर में महिलाओं के नाम 38 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदी गई थी। इसमें भोपाल में 5900 करोड़ रुपए की संपत्ति महिलाओं के नाम पर दर्ज हुई थी। वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में ये दो फीसदी ज्यादा था। जिले में महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदकर छूट का लाभ नियम से 128 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी बचाई जा सकी थी।

पंद्रह दिन में महिलाओं के नाम 9000 संपत्तियां
इस संबंध में जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा का कहना है कि, पंजीयन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि, हर पंद्रह दिन में प्रदेश भर में महिलाओं के नाम पर 9400 संपत्तियां रजिस्टर्ड हो रही है। जबकि पुरुषों के नाम 7700 संपत्तियां दर्ज हो रही हैं। जाहिर है कि, महिलाओं के नाम 626 संपत्तियां रोजाना रजिस्टर्ड हो रही है। शासन के तय नियमों के अनुसार, संपदा 2.0 से पंजीयन की प्रक्रिया की जा रही है। अब पोर्टल पर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है।

हर तरह की प्रॉपर्टी की डिमांड ज्यादा
खास बात ये है कि, मौजूदा समय में जिलेभर में फ्लैट, प्लॉट, डुप्लेक्स, फार्म हाउस और कृषि भूमि हर श्रेणी की प्रॉपर्टी की खरीदारी हो रही है। खासकर शहर के विस्तार वाले इलाकों में निवेशकों की रुचि सबसे ज्यादा देखी जा रही है। रजिस्ट्री कार्यालय के अफसरों का कहना है कि, ज्यादा संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। हालांकि, उनका ये भी कहना कि, भारतीय कल्चर के के चलते यहां आम दिनों के मुकाबले त्योहारी सीजन में लोग प्रॉपर्टी की खरीदी ज्यादा करते हैं।

MP में Township Development पर सख्ती, सरकार ने लागू किए नए नियम

भोपाल 

मध्यप्रदेश में टाउनशिप और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स के विकास को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव कर दिए हैं। अब मास्टर प्लान में लैंड यूज परिवर्तन करवाकर छोटे क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करना आसान नहीं रहेगा। नगरीय विकास विभाग ने नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि टाउनशिप विकास के मामलों में अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के प्रावधान प्रभावी होंगे। इसके बाद प्रदेश में 10 हेक्टेयर से कम क्षेत्र में टाउनशिप विकसित नहीं की जा सकेगी।

अब नहीं टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य
अभी तक एमपी के कई शहरों में मास्टर प्लान के तहत लैंड यूज बदलवाकर 2 हेक्टेयर जैसी छोटी जमीन पर भी आवासीय कॉलोनियां और टाउनशिप विकसित की जा रही थीं। सरकार ने फरवरी 2026 में इस संशोधन का प्रारूप जारी किया था। दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद मई से इसे अधिसूचित कर प्रभावी कर दिया गया है। संशोधन में नई धारा जोड़कर यह स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान या लैंड यूज परिवर्तन संबंधी प्रावधानों के बावजूद टाउनशिप के लिए इंटीग्रेटेड नियम ही मान्य होंगे।

इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्लान में ये संशोधन

    अब इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी के नियम प्रभावी होंगे

    5 लाख से कम आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 10 हेक्टेयर तो इससे अधिक आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 20 हेक्टेयर जमीन अनिवार्य।
    नगरीय सीमा या प्लानिंग एरिया के बाहर कम से कम 40 हेक्टेयर में ही टाउनशिप विकसित होगी।
    24 से 30 मीटर चौड़ी सड़क से कनेक्टिविटी जरूरी
    सड़क, पेयजल, सीवेज, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था डेवलपर को स्वयं ही करनी होगी।
    डेवलपर के लिए 5 करोड़ नेटवर्थ और 6 करोड़ टर्नओवर अनिवार्य।
    लैंड यूज परिवर्तन के लिए अब 10 फीसदी राशि जमा करनी होगी।
    प्रस्तावों पर सचिव नगरीय विकास या कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी।

ये होंगे फायदे

    बड़े और नियोजित टाउनशिप विकास को बढ़ावा मिलेगा।
    अव्यवस्थित कॉलोनियों पर नियंत्रण लगेगा।
    सड़क, पानी, बिजली और सीवेज जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।
    पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा और शहरी विकास अधिक व्यवस्थित और दीर्घकालिक होगा।

ये नुकसान भी

    छोटे और मझोले डेवलपर्स बाजार से बाहर हो सकते हैं
    एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स कम होने की आशंका
    मध्यमवर्गीय लोगों के लिए सस्ते घरों की उपलब्धता घट सकती है
    बड़े भूखंड जुटाना कठिन होने से प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है
    भोपाल-इंदौर में आवासीय प्रोजेक्ट्स की रगतार कम होगी

एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर

नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है।
साधिकार समितियां करेंगी अनुमोदन

अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है।

भोपाल सिटी बस सेवा में खत्म होगा राजनीतिक दखल, अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन संचालन

भोपाल

भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा।

भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड‎(बीसीएलएल) ‎राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगम‎परिवहन सेवा’ का हिस्सा बन गई है। ‎इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम ‎को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौर‎और एमआईसी (मेयर इन काउंसिल)‎ सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता ‎था, लेकिन अब कमान पूरी तरह ‎प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी ‎तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान ‎व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू‎ अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी।‎

नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा
नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन ‎में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ ‎नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।‎दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में‎ होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।‎ सिफारिशें नहीं चलेंगी

जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज या‎नई बसें चलाने में अब पार्षदों या ‎एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा‎ नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे ‎सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और‎ व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे।‎

भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी ‎कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन‎ से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया‎ निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी ‎यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगम‎पर निर्भरता खत्म होगी।‎

बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने‎ वाली शिकायतों (जैसे चालकों की‎मनमानी, समय पर बस न मिलना) को‎दूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट‎ मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। ‎इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू‎ मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी।‎ कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी।‎

भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें‎ योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 ‎मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार ‎किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य‎ मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम ‎संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी।‎ सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी‎ ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन‎ पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल‎पर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर‎ निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।‎

बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।

 

वक्फ बोर्ड स्कॉलरशिप से 850 छात्रों को मिला सहारा, CM बोले- शिक्षा ही बदलाव की ताकत

भोपाल 

भोपाल के रवींद्र भवन में सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड का राज्य स्तरीय स्कॉलरशिप वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 850 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा ही युवाओं को आगे बढ़ाने और समाज की तस्वीर बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। कार्यक्रम में पढ़ो-पढ़ाओ, राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से ही समाज मजबूत होगा और युवा देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगे। 

पहली बार राज्य स्तर पर दिया गया स्कॉलरशिप वितरण
वक्फ बोर्ड के गठन के बाद पहली बार प्रदेश स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि बोर्ड अब तक 1452 बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ चुका है। इनमें ऐसे छात्र भी शामिल हैं, जिन्होंने आर्थिक तंगी या सामाजिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। समारोह में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड, कमेटी इंजामिया औकाफ-ए-अम्मा, औकाफ-ए-खास भोपाल और ताजुल मसाजिद से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

स्कॉलरशिप सिर्फ मदद नहीं, सपनों की उड़ान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने का जरिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की। सीएम ने कहा कि शिक्षा इंसान को नई दिशा देती है और समाज को मजबूत बनाती है। उन्होंने रहीम के दोहे का उल्लेख करते हुए शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताया।

सरकार भी देगी बराबर की सहायता राशि
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन विद्यार्थियों को वक्फ बोर्ड की ओर से स्कॉलरशिप दी गई है, उन्हें राज्य सरकार भी उतनी ही सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

वक्फ संपत्तियों से बढ़ेगी शिक्षा की मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वक्फ कानून लागू होने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार आया है। वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी चल रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और सुधार के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इन संपत्तियों की आय बढ़ाकर गरीब और जरूरतमंद बच्चों, खासकर बेटियों की शिक्षा में इस्तेमाल किया जाए।

माफियाओं से संपत्तियां छुड़ाकर समाजहित में करेंगे उपयोग
सीएम ने कहा कि वक्फ की जमीनों और संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा रहा है। इन संपत्तियों से मिलने वाली आय को शिक्षा, स्कॉलरशिप और समाज कल्याण के कार्यों में लगाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।

 

त्विषा केस: सास की अग्रिम जमानत पर सुनवाई अब 27 मई को, हाईकोर्ट ने दिया समय

भोपाल 

भोपाल के बहुचर्चित त्विषा शर्मा की दहेज हत्या के अपराध में आरोपी सास तथा पूर्व भोपाल जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ प्रदेश सरकार के साथ त्विषा शर्मा के पिता ने भी हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ द्वारा दोनों याचिकाओं पर सोमवार को संयुक्त रूप से सुनवाई की गई।  

याचिका की सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के अधिवक्ता की तरफ से बताया गया कि शिकायतकर्ता की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें नहीं मिली है। एकलपीठ ने अनावेदिका गिरिबाला सिंह को याचिका की कॉपी उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 27 मई को निर्धारित की है।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को दहेज हत्या के अपराध में मिली अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करने हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। इसके अलावा जमानत का मिलने पर वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकती हैं। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने एकलपीठ को बताया कि भोपाल की पूर्व सत्र व जिला न्यायाधीश की बहू त्विषा शर्मा की 12 मई को रात में संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। इसका पोस्टमार्टम 13 मई को हुआ था। उन्होने 14 मई को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। उन्हें अगले दिन न्यायालय ने अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया।

सोमवार को याचिका की सुनवाई के दौरान अनावेदिका की तरफ से बताया गया कि प्रदेश सरकार की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें मिल गई है। शिकायतकर्ता की तरफ से दायर याचिका की कॉपी उन्हें नहीं मिली है। एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की है। प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता व महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा तथा अनावेदिका की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोरा पैरवी के लिए उपस्थित हुईं। 

MP का यह एयरपोर्ट जल्द जुड़ेगा दुनिया से, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सर्वे शुरू

भोपाल

भोपाल का राजा भोज एयरपोर्ट “इंटरनेशनल एयरपोर्ट” के रूप में जाना जाता है। पिछले दो वर्षों से इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस दुबई के लिए डायरेक्ट फ़्लाइट शुरू करने को लेकर सर्वे और संभावनाएं तलाश रही हैं। कई बार यात्रियों की संख्या और व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन भी किया गया, हालांकि अब तक कोई स्थायी शेड्यूल जारी नहीं हो पाया। भोपाल एयरपोर्ट से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालित करने के लिए अधिकारी पूरा जोर लगा रहे हैं। एयरपोर्ट का तेजी से विकास किया जा रहा है। यहां के नए अराइवल एरिया में अब यात्रियों के लिए रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी बुकिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कुछ अन्य घरेलू शहरों के लिए उड़ानें

वर्तमान में भोपाल से मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कुछ अन्य घरेलू शहरों के लिए उड़ानें संचालित हो रही हैं। लेकिन राजधानी होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कनेक्टविटी का अभाव शहर की व्यापारिक और पर्यटन संभावनाओं को सीमित करता है।

दुबई, सिंगापुर या मध्य-पूर्व के अन्य देशों के लिए सीधी उड़ान
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि दुबई, सिंगापुर या मध्य-पूर्व के अन्य देशों के लिए सीधी उड़ान जल्द शुरू की जानी चाहिए। इससे भोपाल को निवेश और व्यापार के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।

रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी सुविधा शुरू
भोपाल के राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हाल ही में विकसित किए गए नए अराइवल एरिया में अब यात्रियों के लिए रिजर्व लाउंज और प्री-पेड टैक्सी बुकिंग जैसी सुविधाएं भी शुरू कर दी गई हैं। नियमित उड़ानों से भोपाल आने वाले विशिष्ट और अति विशिष्ट यात्री अब मुख्य लाउंज के बजाय नए रिजर्व लाउंज में समय बिता सकेंगे। एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा शुरू किए गए इस नए अराइवल एरिया का अब तक करीब एक लाख यात्री उपयोग कर चुके हैं।

एस्केलेटर और हेल्प डेस्क से यात्रियों को राहत
यात्रियों की सुविधा के लिए यहां ”मे आइ हेल्प यू” काउंटर भी बनाया गया है, जहां एयरपोर्ट परिसर और सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। नए अराइवल एरिया में यात्री एयरपोर्ट से बाहर निकलने से पहले ही प्री-पेड टैक्सी बुक करा सकेंगे। इससे भोपाल आने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिल रही है।

विमान से उतरने के बाद सीधे एस्केलेटर के जरिए बाहर
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए एस्केलेटर सुविधा भी उपलब्ध कराई है। अब यात्री विमान से उतरने के बाद सीधे एस्केलेटर के जरिए बाहर पार्किंग क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। पहले यात्रियों को पार्किंग तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

नरोत्तम मिश्रा की बढ़ सकती है सियासी भूमिका, BJP प्रदेश प्रभारी की बैठक से अटकलें तेज

दतिया 
 मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के दोनों बड़े दलों ने अंदरखाते में तैयारियां शुरु कर दी है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश मिलने के बाद दतिया कलेक्टर ने चुनाव संबंधी तैयारियां भी शुरू कर दी है। अटकलें हैं कि यदि उपचुनाव होते है तो दिग्गज नेता व पूर्व गृहमंत्री भाजपा के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। इसी बीच मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मध्य प्रदेश भाजपा प्रभारी महेंद्र सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात नरोत्तम मिश्रा के भोपाल स्थित निवास पर हुई।

इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इस दौरान डॉ. मिश्रा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों, प्रदेश की राजनितिक परिस्थितियों एंव विभिन्न समसामयिक विषयों पर लंबी चर्चा की।

दरअसल, यदि दतिया में उपचुनाव होते हैं, तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां हर हालत में इस चुनाव को जीतना चाहती है। भाजपा नरोत्तम मिश्रा के जरिए दतिया सीट पर वापसी करना चाहती है। वहीं नरोत्तम मिश्रा भी हर हाल में इस चुनाव को जीतना चाहते हैं। क्योंकि उनके पास सत्ता में वापसी का ये सुनहरा मौका है। यही वजह है कि भाजपा इस उपचुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है और रणनीति तैयार करने में जुट गई है। दतिया सीट भाजपा के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराया था। नरोत्तम मिश्रा के लिए ये चुनाव उनके राजनीतिक सफर के लिए बेहद अहम है।

वहीं अगर कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस कोर्ट के जरिए उपचुनाव को रोकना चाहती है, वहीं यदि उपचुनाव होते भी हैं तो पार्टी मजबूत रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दतिया उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।

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