MP का ऐतिहासिक बुरहानपुर बनेगा इंडस्ट्रियल हब, 1000 करोड़ निवेश का मास्टर प्लान तैयार

 बुरहानपुर

बुरहानपुर शहर ऐतिहासिक और यहां सभी धर्मों के संगम के रूप में जाना जाता है। 400 साल पहले मुगल समय से यहां कपड़े की सबसे बड़ी मंडी रही। जिस तरह यहां कपड़े का ताना बाना बुना जाता था, उसी तरह यहां की गंगा-जमुनी तहजीब रही। यहां का कपड़ा दुनियाभर में प्रसिद्ध था, समय के साथ बाजार की चमक जरूर फीकी पड़ी, लेकिन अब बदलते समय यहां का कपड़ा फिर देशभर में सप्लाइ होने लगा। आने वाले पांच सालों में इसे और उड़ान मिलने जा रही है। साथ ही केले के लिए प्रसिद्ध बुरहानपुर में एक्सपोर्ट जोन से लेकर इस पर आधारित कृषि उद्योग की भी रफ्तार बढ़ी है।

टेक्सटाइल उद्योग से ही बुरहानपुर की पहचान
प्रदेश के सबसे बड़े टेक्सटाइल उद्योग के रूप में बुरहानपुर की एक अलग ही पहचान है। आने वाले सालों में इस उद्योग की एक और नई तस्वीर उभरेगी। यहां पर एक हजार करोड़ से अधिक का निवेश होने जा रहा है, जिससे 12 हजार से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

अभी जो तेजी से प्रयास हो रहे हैं इससे एक नए शहर का भविष्य देखने को मिल रहा है। यहां उद्योग के लिए जो माहौल और जमीन तैयार हुई उसमें स्थानीय ही नहीं बल्कि गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तक उद्योगपति निवेश में रुचि दिखा रहे हैं। यही वजह है कि 2015-16 तक जो बुरहानपुर का कपड़ा उद्योग 770 करोड़ का था, वह अब 1 हजार करोड़ का होगा। इससे जिले की तस्वीर ही बदल जाएगी।

जानें यहां उद्योग की इकॉनोमी

-211 करोड़ का जीएसटी टैक्स 4 साल में दे चुका है बुरहानपुर

-04 साल पहले तक 60 करोड़ का जाता था टैक्स

-04 हजार रजिस्टर्ड औद्योगिक प्रतिष्ठान यहां

-45 हजार पावरलूम

-05 हजार आधुनिक लूम यहां

-01 लाख लोग कपड़ा उद्योग से जुड़े

-01 लाख लोग केला उद्योग से जुड़े हुए
भविष्य में निवेश की तैयारी

-200 करोड़ रेहटा में निवेश की तैयारी

-400 करोड़ सुखपुरी में निवेश

-200 करोड़ फेयर डील में निवेश

-400 करोड़ चार नई स्पीनिंग मिल प्रस्तावित

– 12 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा
एफॉर्डेबल हाउसिंग पर पड़ सकता है असर

नए नियमों से छोटे और मझोले डेवलपर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असरभोपाल और इंदौर जैसे शहरों में होगा। यहां 10 हेक्टेयर क्षेत्र जुटाना छोटे डेवलपर्स के लिए आसान नहीं होगा। वहीं पॉलिसी के तहत डेवलपर के लिए न्यूनतम 5 करोड़ की नेटवर्थ और 6 करोड़ रुपए का औसत वार्षिक टर्नओवर भी प्रभाव डालेगा। साथ ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में पंजीयन के लिए 50 हजार रुपए खर्च करने होंगे, वहीं पांच साल बाद नवीनीकरण के लिए भी 25 हजार देना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स मध्यमवर्गीय और किफायती आवासीय योजनाएं विकसित करते हैं। ऐसे डेवलपर्स बाजार से बाहर होंगे तो, एफॉर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की संख्या घटने की आशंका है।
नई साधिकार समितियां गठित होंगी

अब टाउनशिप संबंधी प्रस्तावों पर संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अध्यक्षता वाली समिति विचार नहीं करेगी। इसके स्थान पर नई साधिकार समितियां गठित की गई हैं। 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सचिव नगरीय विकास की अध्यक्षता में समिति प्रस्तावों का परीक्षण-अनुमोदन करेगी। वहीं जिलों में अधिकार कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति को है।
ये क्षेत्र देंगे ऊंची उड़ान
टैक्सटाइल

टैक्सटाइल में बुरहानपुर शहर में विकास की खासी संभावनाएं हैं। यहां का कपड़ा देशभर में सप्लाय होता है, लेकिन इसमें वेल्यू एडिशन के लिए डाइंग, प्रिंटिंग, गारमेंटस, अपेरल मेकिंग को बढ़ावा देना होगा। अभी निम्न गुणवत्ता कपड़ा यहां बन रहा है।
टूरिज्म

यहां का पर्यटन अनछुआ पहलू है। टूरिज्म सर्किट में आना चाहिए। यहां पर टूरिज्म की उद्योग में बढ़ोतरी हुई है। रेस्टोरेंट, होटल, एऊयूजमेंट पार्क भी बढऩा शुरू हो गई, लेकिन अभी इसमें और काम करने जरूरत है। सरकार के साथ हमारा प्रतिनिधित्व करेंगे तो अच्छा लाभ मिल सकते हैं।
ट्रांसपोर्टेशन

देश के मध्य भाग में होने से सेंट्रल लाइन मुख्य रेल मार्ग, सड़क मार्ग बुरहानपुर से जुड़ चुके हैं। फोरलेन बुरहानपुर में पहुंच चुका है। अभी नया हाईवे लगभग बन चुका है। आगे महाराष्ट्र को जोड़ने का काम बाकी है। जबकि नई रेलवे लाइन भी शहर के विकास में उपयोगी होगी।
बुरहानपुर बड़ा केंद्र, बड़े शहर में उभरेगा

बुरहानपुर उद्योग का बहुत बड़ा केंद्र है। यहां आगे टूरिज्म, कृषि और टेक्सटाइल के रूप में अच्छे परिणाम सामने आएंगे। स्वरोजगार यहां अच्छा मिलेगा। अब हाइवे और रेलवे से कनेक्टिविटी भी बहुत अच्छी बन रही है। बुरहानपुर आगे जाकर बड़े शहर के रूप में उभरेगा।

– हर्षसिंह, कलेक्टर, बुरहानपुर
पर्यटन को मिले उड़ान

यहां के उद्योग को उड़ान मिलना चाहिए। बुरहानपुर में मिनी एयरपोर्ट की तैयारी चल रही है, अच्छा है, लेकिन इसे और गति मिलने की जरूरत है। यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यहां हवाई अड्डे की सुविधा हो जाए तो बुरहानपुर से 105 किमी अजंता, 110 पर ओंकारेश्वर, 165 किमी महेश्वर है।

-होशंग हवलदार, पुरातत्वविद्

100 साल पुराने मकानों के नीचे बनेगी मेट्रो टनल, अंडरग्राउंड रूट को मिली मंजूरी

इंदौर 

इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है. सुपर कॉरिडोर से रेडिसन तक के हिस्से को सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) से हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद अब टनल निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए 4 बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) जल्द ही इंदौर पहुंचेंगी. ये मशीनें लगभग 20 मीटर गहराई तक खुदाई करने में सक्षम होंगी. इन मशीनों के कुछ अहम हिस्से जर्मनी में बनाए गए हैं और उनका अंतिम असेंबलिंग कार्य थाईलैंड में किया जा रहा है। 

इन मशीनों को खास तौर पर इंदौर की जमीन और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. शहर के मध्य हिस्से में मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां 100 साल से भी पुराने मकान मौजूद हैं. ऐसे में खुदाई के दौरान किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए स्पेशल टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंदौर की मिट्टी में हार्ड रॉक, सॉफ्ट सॉइल और मुरम जैसी परतें हैं, इसलिए ‘मिक्स लेयर’ तकनीक वाली मशीनें चुनी गई हैं. हाल ही में मेट्रो कॉर्पोरेशन, कंसल्टेंट और ठेकेदारों की टीम ने जर्मनी और थाईलैंड जाकर मशीनों का अंतिम निरीक्षण भी किया है। 

टनल खुदाई का काम शुरू
भास्कर की रिपोर्ट के हवाले से जुलाई 2026 से टनल खुदाई का काम शुरू करने की योजना है. ये चारों मशीनें शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम करेंगी, जिसमें एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र से जुड़े स्टेशन और ट्रैक का निर्माण शामिल है. मशीनें जमीन के नीचे जाकर सुरक्षित तरीके से टनल तैयार करेंगी. वहीं, छोटा गणपति स्टेशन पर ‘नेटाम’ तकनीक से निर्माण कार्य पहले से जारी है और वहां खुदाई का काम चल रहा है। 

इसके अलावा शहीद पार्क से खजराना तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले इस रूट को एलिवेटेड बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे अंडरग्राउंड कर दिया गया है. इस बदलाव के चलते टेंडर प्रोसेस में संशोधन किया जा रहा है. फिलहाल, शहीद पार्क से खजराना तक कई स्टेशन और ट्रैक का ढांचा आकार ले रहा है. रेडिसन तक 17 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो चुका है और यहां लगातार ट्रायल रन चल रहा है. हालांकि, इसे आम जनता के लिए शुरू करने के लिए अभी पीएम ऑफिस की अंतिम मंजूरी का इंतजार है. इसकी मंजूरी मिलते ही इंदौर में 
मेट्रो सेवाएं और व्यापक स्तर पर शुरू हो जाएंगी। 

Indore Honey Trap केस में सभी आरोपी जेल पहुंचे, निजी वीडियो को लेकर नया खुलासा

इंदौर 
 इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार सभी सात आरोपियों को बालेबाले मजिस्ट्रेट के घर पर पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसी बीच सामने आया कि हनी ट्रैप-2 के नाम से चर्चा में आए गैंग की मास्टरमाइंड रेशू और श्वेता ने पुराने हनी ट्रैप प्रकरण के वीडियो का इस्तेमाल कर पांच लोगों को टारगेट बनाया था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।

इंदौर में हनी ट्रैप कहे जा रहे ब्लैकमेलिंग मामले में कार्रवाई तेज कर दी गई है। क्राइम ब्रांच पुलिस ने घटना के लिए जिम्मेदार सभी सात आरोपियों को औपचारिक कार्यवाही के बाद सीधे बाले बाले मजिस्ट्रेट के घर ले जाकर पेश किया। सोमवार सुबह हुई इस पेशी में अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए, जिसके बाद सातों को जेल रवाना कर दिया गया। पुलिस के इस कदम को मामले की गंभीरता और सुरक्षा कारणों से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस बीच जांच में एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। हनी ट्रैप-2 नाम से सामने आए इस नए जालसाजी नेटवर्क में मुख्य भूमिका रेशू और श्वेता बताई जा रही है। दोनों ने पुराने हनी ट्रैप कर कई अन्य मामले के संवेदनशील वीडियो हासिल कर लिए थे और इन्हीं के आधार पर पांच लोगों को ब्लैकमेल किया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी पहले भरोसा जीतते थे, फिर निजी पलों के वीडियो दिखाकर पैसों की मांग की जाती थी।

मामले में शामिल अन्य आरोपियों की भूमिका भी इसी गिरोह के संचालन, तकनीकी काम और पैसे की वसूली से जुड़ी बताई जा रही है। क्राइम ब्रांच पिछले कुछ दिनों से लगातार इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही सभी सात आरोपियों श्वेता जैन, रेशु चौधरी, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन जितेंद्र पुरोहित और पुलिस कर्मी  विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें मजिस्ट्रेट ने न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल कर दिया है। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, लेन-देन और पुराने मामलों के लिंक की गहराई से जांच कर रही है साथ ही आरोपियों से जब्त मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं जिनका डेटा रिकवर किया जा रहा है। त्रिपाठी का कहना है कि यह गैंग संगठित रूप से काम कर रहा था और आगे और खुलासे संभव हैं।

ट्विशा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, कहा- ‘जान चली गई, वजह चाहे जो हो’

भोपाल 

मध्यप्रदेश के चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी एम पंचोली की बेंच ने अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने मीडिया से इस मामले में आरोपियों के इंटरव्यू न चलाने का आग्रह किया. साथ ही कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले की पूरी जांच को आज ही अपने हाथों में ले रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है। 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि सीबीआई तुरंत जांच अपने पास लेकर इस पर कड़े स्तर की सुनवाई शुरू करेगी. कोर्ट ने कहा कि एक मासूम युवती की जान गई है, वजह चाहे जो हो ,उसका पता चलना चाहिए. उसके स्वतंत्र निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी जरूरी है. क्योंकि मामले में अपराधिक साजिश का भी एंगल शुरुआती जांच और आरोपों से सामने आ रहा है। 

CBI को सौंपी जा रही है जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम मीडिया और जनता की अटकलें नहीं चाहते हैं. सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि जांच आज सीबीआई को सौंपी जा रही है. सुनवाई के दौरान अदालत को ये भी बताया गया कि एक मृत बेटी होने की तुलना में समाज में एक तलाकशुदा बेटी होना कहीं ज्यादा बेहतर है। 

इस पर अदालत ने सुनवाई के दौरान दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उसे एक युवा बेटी को असमय खोने पर पीड़ित परिवार की असीम पीड़ा के साथ पूरी मानवीय सहानुभूति है। 

ट्विशा के पति और सास के खिलाफ FIR दर्ज
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पति समर्थ सिंह और उनकी सास जो कि एक पूर्व जिला न्यायाधीश हैं, गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि रसूख के कारण स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो रही थी. सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि इसी प्रक्रियागत अनियमितता को दूर करने के लिए आज ही जांच सीबीआई को सौंपी जा रही है। 

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच को लेकर भी टिप्पणी की. कोर्ट ने ऐसे मामलों में जांच के संचालन पर दु:ख व्यक्त किया और जांच को लेकर चल रही प्रक्रियागत अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच का निर्देश दिया है। 

12 दिन बाद हुआ अंतिम संस्कार
राज्य सरकार की निगरानी में भोपाल में हुए पहले शव परीक्षण (पोस्टमार्टम) पर जब पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए, तब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर दिल्ली एम्स (AIIMS) की चार सदस्यीय विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मृतका का दूसरा पोस्टमार्टम किया. इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के कारण घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद आखिरकार ट्विशा का अंतिम संस्कार किया जा सका। 

आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि  ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं. उसके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना, सबूतों से छेड़छाड़ और जांच में लापरवाही का आरोप लगाया है। 

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड, देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड
वक्फ सुधारों के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी
मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम में 849 बेटे-बेटियों को मिली स्कॉलरशिप
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने पूर्व राष्ट्रपति महान वैज्ञानिक डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम और भारत-पाक युद्ध में शौर्य के प्रतीक कैप्टन हमीद का किया स्मरण

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड विभिन्न नवाचारों से देश में सबसे आगे है। प्रदेश में वक्फ बोर्ड के माध्यम से वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन की गई, इसके लिए भारत सरकार से स्कॉच अवार्ड मिला। यह पारदर्शी व्यवस्था पूरे देश के लिए उदाहरण बनी है। म.प्र वक्फ बोर्ड देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

रहीम और रसखान ने दिया समरसता का संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा देश रहीम और रसखान की मेलजोल की संस्कृति में विश्वास रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की जनता कानून में भरोसा रखती है, चाहे किसी भी समुदाय की हो। इसलिए भारत पूरे विश्व में आदर्श है।

कश्मीर की जनता ने पड़ोसी दरिंदों को खदेड़ा, यह भारत की आदर्श संस्कृति

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब जम्मू कश्मीर में पड़ोसी राष्ट्र से दरिन्दे आए तब वहां की जनता ने उनका सीधा विरोध किया और उन्हें खदेड़ दिया। हमारे देश की जनता बुद्धि और विवेक का उपयोग करती है। भारत की यह सुदृढ़ परम्परा और आदर्श संस्कृति है।

प्रधानमंत्री की पहल और मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने नए वक्फ कानून के माध्यम से सुशासन और पारदर्शिता की व्यवस्था लागू करवाई है। अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश इस कार्य में अग्रणी है।

वक्फ सुधार के कार्य ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक वक्फ सुधार में इतना बड़ा कार्य नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड अभिनंदन का पात्र है। वक्फ संपत्तियों का संरक्षण और सुधार हो रहा है। नया वक्फ भवन भी बनाने की पहल हुई है, जिसका नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया।

पोर्टल से पारदर्शिता आई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब पारदर्शी कार्य प्रणाली लागू है। उम्मीद पोर्टल के माध्यम से सभी वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन हैं और रिकॉर्ड में दर्ज हुई हैं। वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण हटाने का कार्य बोर्ड द्वारा किया जा रहा है जो प्रशंसनीय है।

अब वक्फ संपत्तियां सुरक्षित, वक्फ बोर्ड के माध्यम से आय वृद्धि का अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। मध्यप्रदेश में अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। बोर्ड को आय वृद्धि का अवसर भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है।

बेटे बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें सरकार देगी पूरा सहयोग

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बेटे-बेटियां शिक्षा के माध्यम से प्रोत्साहित हों और भविष्य के सपनों को साकार करें। मध्यप्रदेश सरकार इनका पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न तरह के दान से भी निर्धन बच्चों को पढ़ाने का कार्य हो रहा है। दान दाताओं की भूमिका प्रशंसनीय है। ऐसे कार्यों में राज्य सरकार भी पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न धार्मिक प्रमुखों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाले 849 बेटे बेटियों को हार्दिक बधाई दी।

कैप्टन हमीद के साहस और शौर्य का स्मरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत पाक युद्ध में कैप्टन हमीद ने साहसी कारनामा करते हुए पाकिस्तान के अनेक टैंक नष्ट कर दिखाए, इसे कौन भूल सकता है। कैप्टन हमीद शहीद हुए, उन्होंने राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा को सर्वोपरि माना।

पढ़ो-पढ़ाओ और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना में छात्रवृत्ति का लाभ लें विद्यार्थी – डॉ. सनवर पटेल

मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि आज पढ़ो-पढ़ाओ- राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को विकसित और स्वर्णिम बनाने के लिए कार्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी वक्फ की चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानून लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नए कानूनों के माध्यम से आमजन की भलाई और बेटा-बेटियों की पढ़ाई के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में वक्फ माफियाओं पर अंकुश लगा है, मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति ऑनलाइन दर्ज हुई है। इस कार्य के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला और प्रदेश को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। संपत्तियों के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ी है, छुप कर मिली भगत से काम करने वाले बेनकाब हुए हैं। माफिया और भू-माफिया किसी धर्मस्थल का शोषण न कर पाएं, इस बात का वक्फ बोर्ड विशेष ध्यान रख रहा है। वक्फ की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है।

स्कूल-कॉलेजों में बेटियों के ड्राप आउट को रोकने में मिली सफलता

डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के सभी मेधावी विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। इसी का परिणाम है कि आज 849 मेधावी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर उनका सम्मान किया जा रहा है। गरीब-जरूरतमंद बेटा-बेटियों को मेडिकल कॉलेज तक की पढ़ाई करने में मदद दी जा रही है। नए कानूनों के कारण वक्फ बोर्ड की आय बढ़ी है। हमारा वक्फ बोर्ड गरीब बेटियों की पढ़ाई में सहायता करता है। औकाफ-ए-आम्मा के प्रयास स्कूल-कॉलेजों में बेटियों के ड्राप आउट को रोकने में कारगर सिद्ध हुये है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्तियों में इस वर्ष 5 लाख पौधे रोपने का निर्णय लिया है। वक्फ के एक स्कूल की नई बिल्डिंग का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा जाएगा। कार्यक्रम में वक्फ बोर्ड की सीईओ श्रीमती फरजाना गजाल, शहर काजी मुस्ताक अली नदमी, जिलाध्यक्ष वक्फ बोर्ड असलम भाई सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में मुस्लिम छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

 

डिजिटल दीदी पूनम खेल-खेल में संवार रही नौनिहालों का भविष्य

डिजिटल दीदी पूनम खेल-खेल में संवार रही नौनिहालों का भविष्य

भोपाल 

डिजिटल प्लेटफॉर्म का सही इस्तेमाल अगर समाज को बदलने के लिए किया जाए, तो परिणाम कितने सुखद हो सकते हैं, इसकी मिसाल पेश की है मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने। परासिया परियोजना के वार्ड क्रमांक 12 की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूनम चौरसिया आज सोशल मीडिया पर एक चर्चित नाम बन चुकी हैं। पूनम अपनी आंगनवाड़ी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने और उनके संपूर्ण विकास के लिए अनूठे प्रयोग कर रही हैं।

पूनम चौरसिया के यूट्यूब चैनल ‘@parasiawalipoonam’ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस चैनल पर 71 हजार 600 से अधिक सब्सक्राइबर्स जुड़ चुके हैं। खेल-खेल में प्रारंभिक बाल्याव्यस्था, देखभाल और शिक्षा गतिविधियों को सिखाते हुए पूनम अब तक 6 हजार 800 से ज्यादा वीडियो अपलोड कर चुकी हैं, जिन्हें 7 करोड़ 48 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। यूट्यूब ही नहीं, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर भी उनकी वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं।

स्थानीय संसाधनों से शिक्षा को बनाया मजेदार

एम.कॉम (M.Com) शिक्षित पूनम साल 2020 से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं। वे भारत सरकार के 48 सप्ताह के ‘आधारशिला पाठ्यक्रम’ को रटाने के बजाय बेहद मनोरंजक तरीके से बच्चों को सिखाती हैं। पूनम बच्चों के लिये पाठ्यक्रम को इतना आसान और मजेदार बना देती हैं कि बच्चे खुद व खुद पढ़ाई की ओर खिचें चले आते है। खास बात यह है कि इन गतिविधियों के लिए वे किसी महंगे सामान का इस्तेमाल नहीं करतीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों जैसे कंकड़, पत्थर, रंग-बिरंगे कागज और घरेलू वस्तुओं के जरिए बच्चों को अक्षर ज्ञान, रंगों की पहचान, शेप और शैडो (आकृतियां और परछाईं) जैसी पेचीदा चीजें सहजता से सिखा देती हैं।

पढ़ाई भी और पोषण भी: आंगनवाड़ी बनी ‘स्मार्ट क्लास’

मध्यप्रदेश के 98 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में 30 लाख से अधिक बच्चों को पोषण, स्वास्थ्य और शाला पूर्व शिक्षा दी जा रही है। आंगनवाड़ी देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहां पोषण के साथ पढ़ाई भी होती है। पूनम ने इस अवधारणा को पूरी तरह धरातल पर उतारा है। उन्होंने भारत सरकार के ‘पोषण भी-पढ़ाई भी’ (PBPB) अभियान के तहत प्रथम चरण का प्रशिक्षण लिया और उत्कृष्ट कार्य के चलते दूसरे चरण में वे ‘स्टार चैंपियन कार्यकर्ता’ के रूप में चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने ‘निपसिड’ (NIPCCD) से मास्टर ट्रेनर के रूप में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में उनके केंद्र में 3 से 6 आयु वर्ग के 43 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें से 22 बच्चे नियमित रूप से शाला पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

अभिभावकों में बढ़ा भरोसा, निजी स्कूलों को मिल रही टक्कर

पूनम के इस अभिनव प्रयास का सबसे बड़ा असर स्थानीय समाज पर पड़ा है। क्षेत्र के अभिभावक निजी स्कूलों को छोड़कर अपने बच्चों को पूनम की आंगनवाड़ी केंद्र में भेज रहे हैं। माता-पिता स्वयं बच्चों को केंद्र पर छोड़ने और लेने आते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूनम ने आंगनवाड़ी के पारंपरिक ढर्रे को बदलकर उसे एक आधुनिक शिक्षा केंद्र का रूप दे दिया है। स्थिति यह है कि जब यहां के बच्चे आगे चलकर प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश लेते हैं, तो अभिभावक गर्व से कहते हैं कि ‘ये पूनम की आंगनवाड़ी से पढ़कर आए हैं।’

अन्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्त्रोत

पूनम चौरसिया की यह अनूठी पहल अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिये प्रेरणा है। डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग कर सरल गतिविधियों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित किया जा सकता है।

 

धार से CM का बड़ा ऐलान, भोजशाला में बनेगा ‘सरस्वती लोक’

धार
 स्‍थानीय मोतीबाग चौक में आयोजित विशाल आमसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि मालवा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है. उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले समय में भोजशाला परिसर को विकसित कर यहां ‘सरस्वती लोक’ बनाया जाएगा. सीएम ने कहा कि राजा भोज की परंपरा, विद्या और संस्कृति को दुनिया में नई पहचान दिलाने का समय आ गया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में वर्षों पुराना मुद्दा समाधान की दिशा में पहुंचा है और हाईकोर्ट का फैसला भी उसी परिवर्तन का परिणाम है. मुख्यमंत्री ने मंच से यह भी कहा कि धार का गौरव अब नई ऊंचाइयों तक जाएगा। 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पहले भोजशाला के नाम पर तनाव और दंगे का माहौल बनाया जाता था, लेकिन अब विकास और विरासत संरक्षण की राजनीति हो रही है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को सम्मान मिला है. सीएम ने धार में चल रहे विकास कार्यों, पीएम मित्रा पार्क, जल संरक्षण योजनाओं और रोजगार के नए अवसरों का जिक्र करते हुए कहा कि धार अब तेजी से विकसित होने वाला जिला बनेगा. उन्होंने यह भी कहा कि राजा भोज और विक्रमादित्य की भूमि होने के कारण मालवा की सांस्कृतिक पहचान पूरे देश के लिए गौरव का विषय है. मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान सभा में मौजूद लोगों ने कई बार जयकारे लगाए और भोजशाला को लेकर किए गए ऐलान का स्वागत किया। 

भोजशाला को बताया मालवा की धरोहर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला का नाम आते ही राजा भोज की विद्वता और मालवा की समृद्ध संस्कृति याद आती है. उन्होंने कहा कि यह केवल इतिहास नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान है. सीएम ने कहा कि धार की धरती ने दुनिया को ज्ञान और संस्कृति दी है. ऐसे में भोजशाला का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। 

‘सरस्वती लोक’ बनाने का ऐलान
मोहन यादव ने मंच से घोषणा की कि भोजशाला क्षेत्र को विकसित कर ‘सरस्वती लोक’ बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह परियोजना मालवा की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगी. सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करेगी. इससे पर्यटन और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। 

कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- पहले समाज को बांटने की कोशिश होती थी
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले ऐसे मुद्दों पर समाज को बांटने की कोशिश होती थी. उन्होंने कहा कि आज विकास और विरासत संरक्षण साथ-साथ चल रहा है. हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि यह लंबे संघर्ष का परिणाम है। 

पीएम मोदी का किया अभिनंदन
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सांस्कृतिक धरोहरों को सम्मान दिलाने का काम किया है. उन्होंने पीएम मित्रा पार्क का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपना जन्मदिन भी धार में मनाया था. इससे धार और मालवा को राष्ट्रीय पहचान मिली है। 

जल संरक्षण पर भी बड़ा बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के मामले में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है. उन्होंने बताया कि राज्य में ढाई हजार करोड़ रुपये से जल संरक्षण के काम किए जा रहे हैं. 105 अमृत सरोवरों का निर्माण भी कराया गया है. इससे गांवों और किसानों को लाभ मिलेगा। 

करोड़ों के विकास कार्यों का लोकार्पण
धार दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धार में सड़क, उद्योग, सिंचाई और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव दिखाई देंगे. पीएम मित्रा पार्क के जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा और निवेश बढ़ेगा. सीएम ने अपने भाषण में राजा भोज और सम्राट विक्रमादित्य की वीरता और शासन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मालवा की यह ऐतिहासिक विरासत पूरे देश के लिए प्रेरणा है. राजा भोज का नाम आज भी सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। 

ट्विशा केस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से रोका

भोपाल 
 ट्विशा शर्मा की मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया इस केस को सनसनीखेज बनाने से बचें। मीडिया परिजनों का इंटरव्यू नहीं चलाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका निष्पक्ष जांच जरूरी है। सच ये है कि लड़की की जान गई है।

मीडिया को बयान देने से बचे पीड़ित और आरोपी के परिवार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम पीड़ित परिवार और आरोपी परिवार दोनों के परिवार वालों से अपील करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपना पक्ष दर्ज कराएं ताकि चल जांच पर किसी तरह का कोई प्रभाव न पड़े।

सॉलिसिटर जनरल बोले- जांच सीबीआई अपने हाथ में लेगी
सॉलिसिटर जनरल (SG) ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा देते हुए कहा कि ट्विशा केस की जांच आज ही CBI अपने हाथ में लेगी। इस बीच ट्विशा परिवार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने FIR दर्ज करने में देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

गिरिबाला को तुरंत जमानत कैसे? रसूख से जांच में बाधा… ट्विशा केस में सुप्रीम कोर्ट में उठे ये सवाल

ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल उठाए हैं और सीबीआई को मामले की जांच अपने हाथ में लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने आरोपी और पीड़ित परिवार से मीडिया में या सार्वजनिक मंचों पर बयान न देने की अपील की है. अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आया कि गिरिबाला अपने रसूख का इस्तेमाल कर जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं. कोर्ट ने ये भी सवाल उठाया कि उन्हें तुरंत जमानत कैसे मिल गई। 

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनलर तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CBI आज ही मामले की जांच अपने पास ले लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर ले लिया. CJI सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि CBI तुरंत और निष्पक्ष जांच करेगी। 

निष्पक्ष हो जांच: SC
अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे ये मौत खुदकुशी हो या फिर कोई अन-नेचुरल डेथ (अप्राकृतिक मौत), हर हाल में इस पूरे मामले की तह तक जाकर एक निष्पक्ष और पूरी जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस वक्त मीडिया और आम जनता के बीच चल रही किसी भी तरह की अटकलों को बिल्कुल बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं। 

सरकार के फैसले की सराहना
अदालत में सुनवाई के दौरान ये बात भी सामने आई कि आरोपी पक्ष की गिरिबाला सिंह के एक रिटायर्ड जज होने की वजह से समाज में ये नैरेटिव (विमर्श) सेट किया जा रहा है कि स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष नहीं हो रही है. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले की सराहना की है, ताकि जांच बिना किसी बाधा के पूरी तरह निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके। 

‘जांच में सहयोग नहीं कर रही गिरिबाला’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह अब तक पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुई हैं, लेकिन वह लगातार अलग-अलग टीवी चैनलों को इंटरव्यू देकर दिवंगत ट्विशा शर्मा को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने तुरंत ही जमानत भी मिल गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जांच के लिए उनसे जब उनका मोबाइल मांगा गया तो उन्होंने इस को लेकर भी परेशानियां खड़ी कीं। 

साथ ही ट्विशा के वकील ने कहा कि ट्विशा की सास मीडिया को दिए अपने इंटरव्यू में कॉल डिटेल्स भी दे रही हैं. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इन बातों को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों (आरोपी-पीड़ित) के परिवारों को सख्त हिदायत दी है कि वो मीडिया में बयान देने के बजाय अपने बयानों को सीधे जांच एजेंसी के पास रिकॉर्ड कराएं। 

‘परिवार आना चाहिए आगे’
शीर्ष अदालत ने कहा कि एक युवा बेटी को खोने पर परिवार को जिस असीम पीड़ा और दुख से गुजरना पड़ता है, उसके प्रति अदालत की पूरी सहानुभूति है. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवारों को सही वक्त पर अपनी बेटियों के लिए आगे आना चाहिए, क्योंकि एक मृत बेटी होने से कहीं बेहतर है कि बेटी तलाकशुदा होकर उनके साथ सुरक्षित रहे। 

‘प्री-जज नहीं बनाना चाहती कोर्ट’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया और आम जनता से इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की मनगढ़ंत अटकलें लगाने से पूरी तरह दूर रहने की अपील की. सीजेआई ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि लोग देश की इस सबसे प्रीमियर जांच एजेंसी (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर पूरा भरोसा रखें. अदालत अभी उन मुद्दों के परिणाम पर कोई पहले से राय (प्री-जज) नहीं बनाना चाहती है, जिनकी जांच होना अभी बाकी है। 

परिवार दायर कर सकता है ट्रांसफर याचिका
इसके अलावा ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को सूचित किया कि वह इस पूरे मुकदमे की निष्पक्षता के लिए इसे मध्य प्रदेश राज्य से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग कर सकते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि कानूनन इस पर कोई रोक नहीं है और वो इसके लिए किसी भी समय स्थानांतरण याचिका दायर कर सकते हैं। 

आपको बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. 33 साल की मॉडल-एक्टर के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं. जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि ट्विशा नशे की लत से जूझ रही थीं। 

क्या है मामला
बता दें कि ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल के घर की छत पर फंदे से लटकी हुई मिली थीं। ट्विशा शर्मा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए उसका पति और सास जिम्मेदार है। वहीं, ससुराल पक्ष ने आरोप लगाया कि ट्विशा ड्रग्स लेने लगी थीं।

12 दिन बाद ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार
ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार 12 दिन बाद हुआ। इस दौरान ट्विशा की मां बदहवास दिखीं। वह दहाड़ मार-मारकर रो रही थीं। परिवार के अन्य सदस्य भी फूट-फूटकर रो रही थी। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली एम्स की चार सदस्यीय मेडिकल टीम ने उनका दूसरा पोस्टमार्टम पूरा किया।

 

साध्वियों को कार से कुचलने के विरोध में जैन समाज की मौन रैली, बोले- अहिंसा पर हमला बर्दाश्त नहीं

रीवा/भोपाल/इंदौर/विदिशा/मैहर

मध्यप्रदेश के रीवा में सड़क दुर्घटना में दो आर्यिका माताओं के दर्दनाक निधन के बाद देशभर में जैन समाज में तीव्र आक्रोश फैल गया है। इस घटना को लेकर समाज ने इसे महज सड़क हादसा मानने से इनकार करते हुए सुनियोजित साजिश करार दिया है और उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।

घटना 20 मई को रीवा के कलेक्ट्रेट और सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पास की बताई जा रही है, जहां पूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्रुतमती माताजी और आर्यिका उपशममती माताजी को तेज रफ्तार वाहन ने कुचल दिया। दोनों संतों की मौके पर ही मौत हो गई।जैन समाज का आरोप है कि उपलब्ध वीडियो फुटेज इस घटना को सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई हिंसक वारदात साबित करते हैं। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आरोपी चालक ने पैदल विहार कर रही निहत्थी संतों को निशाना बनाते हुए टक्कर मारी और फरार हो गया।

“अहिंसा पर हमला, अब नहीं सहेंगे” राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और विभिन्न जैन संगठनों ने संयुक्त रूप से जारी आक्रोश पत्र में कहा है कि यह घटना केवल दो संतों की हत्या नहीं, बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा’ पर सीधा हमला है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो देशव्यापी उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

विदिशा में साध्वियों के समाधिमरण पर समाज का मौन मार्च

रीवा में विहार के दौरान सड़क दुर्घटना में 105 श्रुतमति माताजी और 105 उपसमति माताजी के समाधिमरण (निधन) को लेकर जैन समाज में भारी रोष है। इस घटना के विरोध में रविवार को विदिशा में सकल दिगंबर जैन समाज ने एक विशाल मौन मार्च निकाला।

यह मौन मार्च माधवगंज चौराहे स्थित स्टेशन जैन मंदिर के बाहर से शुरू हुआ। इसमें बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिलाओं और पुरुषों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। समाज के लोग हाथों में न्याय, श्रद्धांजलि और संत सुरक्षा के स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नीमताल चौराहे तक पहुंचे।

णमोकार मंत्र का जाप कर अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन नीमताल चौराहे पर समाजजनों ने सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद सकल दिगंबर जैन समाज, महिला मंडल और व्यापार महासंघ ने मौके पर मौजूद तहसीलदार को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की अपील की गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर ‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ लागू करने की मांग ज्ञापन के माध्यम से समाज ने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पैदल विहार करने वाले साधु-संतों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा गाइडलाइन और एसओपी (SOP) तैयार की जानी चाहिए। इसके तहत विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पुलिस सहायता, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक और विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश सरकार को संबोधित करते हुए सौंपा गया है। जैन समाज ने इस मामले में कई सख्त मांगें रखी हैं प्रमुख मांगें

    पूरे प्रकरण की SIT या न्यायिक आयोग से जांच।
    CCTV और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने की व्यवस्था।
    आरोपी और साजिशकर्ताओं पर हत्या (धारा 302) के तहत कार्रवाई।
    देशभर में “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करना।
    ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ बनाना।
    संतों के खिलाफ अपराधों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के दायरे में लाना।
    संत भी सुरक्षित नहीं, तो व्यवस्था पर सवाल
    ज्ञापन में कहा गया है कि जैन साधु-संत पूरी तरह निहत्थे और पैदल जीवन जीते हैं।
    ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। बार-बार हो रही घटनाओं से समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।मौन रैली निकालते जैन समाज के लोग।

उग्र आंदोलन की चेतावनी जैन समाज ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरेंगे। ज्ञापन में ‘जेल भरो आंदोलन’, ‘चक्का जाम’ और ‘भारत बंद’ जैसे कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई है।

शिवराज दिल्ली आइए… मोहन यादव के शपथ ग्रहण में PM मोदी ने क्यों बुलाया था? अंदर की कहानी

भोपाल 

मुझे 13 दिसंबर, 2023 मध्य प्रदेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण का दिन स्पष्ट याद है। मैंने प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेतृत्व का मुख्यमंत्री के रूप में स्वागत किया और जैसे ही मोहन यादव ने शपथ ली, स्वाभाविक रूप से सबका ध्यान उन पर चला गया। बाद में प्रधानमंत्री मेरे पास आए और धीरे से कहा- शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आओ। आपसे कुछ बातें करनी हैं। इसके छह महीने बाद नौ जून, 2024 को मैंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। मुझे कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय सौंपा गया। तब मुझे अहसास हुआ प्रधानमंत्री ने उस शपथग्रहण समारोह के दौरान ही मेरे लिए योजना बना ली थी।’

यह अंश है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कई संस्मरणों को शामिल किया है। पुस्तक में शिवराज सिंह के प्रधानमंत्री मोदी के साथ तीन दशकों से अधिक पुराने आत्मीय संबंधों का हृदयस्पर्शी वर्णन है। इसमें घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि अनुभवों की वह यात्रा है, जो 1991-92 की एकता यात्रा से प्रारंभ होकर वर्ष 2025 में उनके तीसरे कार्यकाल तक विस्तृत है।
पुस्तक में और क्या

शिवराज सिंह ने पुस्तक में कहा है कि पहलगाम हमले के बाद कैबिनेट बैठक के बाद उनके मन में पुस्तक लिखने का विचार आया। तब प्रधानमंत्री सऊदी अरब के राजकीय दौरे पर थे। लेकिन सूचना मिलने पर वह कार्यक्रम को बीच में ही रोककर अगले दिन भारत लौट आए।

उन्होंने लिखा, ‘30 अप्रैल, 2025 को कैबिनेट बैठक के वातावरण में तनाव था, और मेरे मन में बार-बार एक ही प्रश्न उठ रहा था-इन कठिन क्षणों का बोझ मोदीजी पर कितना भारी पड़ रहा होगा? लेकिन मैंने उन्हें अंदाज में कमरे में आते देखा। उनके मन-मानस पर क्रोध और विचलन का नामोनिशान नहीं था। अपनी शांत, परंतु दृढ़निश्चयी आवाज में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। सर्जिकल स्ट्राइक्स और एयरस्ट्राइक्स से अलग होगा। जिन्होंने यह हरकत करने की जुर्रत की है, वे दुनिया के किसी भी कोने में छुपे हों, हम उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।’ ये क्रोध में बोले गए शब्द नहीं, बल्कि अडिग संकल्प और दृढ़ नेतृत्व के परिचायक थे।
जब शिवराज सिंह चौहान को लिस्ट में नहीं मिला उनका नाम

पीटीआई भाषा ने किताब में वर्णित अंशों के हवाले से लिखा, जब भाजपा ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, तो चौहान ने सोचा कि पहले उन सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे, जहां भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही थी। उन्होंने लिखा, ‘मेरा नाम शुरुआती सूचियों में शामिल नहीं था।’
पुराने बयान का जिक्र

किताब के अनुसार, इसी दौरान एक जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य में विकास का उल्लेख करते हुए कहा था, ‘अगर हम नहीं रहे, तो हमें बहुत याद किया जाएगा।’ उन्होंने लिखा कि विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और यह प्रचारित किया कि चौहान का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया है।

चौहान ने लिखा कि विपक्ष के कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। मौजूदा कृषि मंत्री चौहान ने कहा, ‘उन्होंने (विपक्ष ने) यह तक कह दिया कि मामाजी का तो राजनीतिक अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।’ चौहान ने किताब में लिखा कि कांग्रेस पार्टी ने ‘गलत सूचना’ को अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य आधार बना लिया और उनके बयान को ‘तोड़-मरोड़कर पेश’ करते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

उन्होंने लिखा, ‘शायद वे हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना चाहते थे। मुझे भी लगा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और गलत धारणा को तोड़ने के लिए कुछ करना चाहिए।’ केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि जब वह उस समय को याद करते हैं, तो उन्हें कांग्रेस की ‘मजाक उड़ाने वाली बातें’ याद नहीं आतीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘गहरी भावनात्मक संवेदनशीलता’ सामने आती है।
जब पीएम मोदी का फोन आया

उन्होंने कहा कि चुनाव अभियान के बीच बेहद व्यस्त होने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया। चौहान ने किताब में लिखा, ‘उन्होंने (मोदी ने) मुझे मुख्यमंत्री के रूप में संबोधित नहीं किया। बहुत गर्मजोशी और स्नेह के साथ उन्होंने कहा, ‘आज मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं, न ही चुनावों के संदर्भ में फोन कर रहा हूं। मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।’

उन्होंने किताब में कहा कि प्रधानमंत्री ने बहुत ही नरमी से पूछा, ‘आप इतने चिंतित क्यों हो? अगर आपका कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शक या गुरु है, जिनका आप सम्मान करते हैं, तो उनके पास जाकर मार्गदर्शन लें। कुछ समय एकांत में बिताएं और अपने मन को शांत, संतुलित एवं स्थिर रखें।’ चौहान ने लिखा कि उन्हें लगा कि शायद प्रधानमंत्री यह सोच रहे थे कि ‘मुझे कुछ आश्वासन की जरूरत हो सकती है’।
शिवराज सिंह चौहान ने क्या रिप्लाई दिया

केंद्रीय मंत्री ने लिखा, ‘मैंने उनसे कहा, ‘भाई साहब, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं सिर्फ काम करना चाहता हूं।’ चौहान के अनुसार, इसपर मोदी ने जवाब दिया, ‘नहीं शिवराज, एक-दो दिन अकेले रहिए, अपना ध्यान रखिए, अपनी मानसिक स्थिति का ख्याल रखें और फिर काम में जुट जाएं।’

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने लिखा, ‘वह (मोदी) चाहते थे कि मैं कुछ समय के लिए रुकूं, अपने ऊपर ध्यान दूं और आंतरिक शक्ति को फिर से जागृत करुं, उनका स्नेह मेरे मन को गहराई से छू गया। जो नेता पूरे देश की जिम्मेदारियों का भार उठाए हुए हैं, वह मेरे व्यक्तिगत मानसिक हालात की भी चिंता कर रहे थे; यही वास्तविक संवेदनशीलता है।’
सलाह मान उत्तराखंड गए

चार बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चौहान ने लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की सलाह मान ली और उत्तराखंड चले गए। चौहान ने लिखा, ‘ऋषिकेश से थोड़ी दूरी पर, मैं गंगा के किनारे एकांत में घंटों बैठा रहा। बहते पानी और अडिग पहाड़ों को देखते हुए मेरा मन धीरे-धीरे शांत होने लगा। तब मैं पूरी तरह समझ गया कि मोदी जी क्या चाहते थे। उनका स्नेह केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि रणनीतिक भी था।’

केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि मोदी अच्छी तरह समझते थे कि यदि भ्रामक मीडिया रिपोर्टों से उनका (चौहान) मनोबल कमजोर हुआ, तो उसका असर भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी हो सकता है।

नई दिल्ली में 26 मई को पूर्व उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की मौजूदगी में इस पुस्तक का आधिकारिक रूप से विमोचन किया जाएगा।

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